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वयस्कों में सामान्य एंग्जायटी डिसऑर्डर

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

एंग्जायटी (Anxiety)

एंग्जायटी (Anxiety) एक तरह की बेचैनी, चिंता और डर का अनुभव है। यह हल्का या गंभीर हो सकता है।

अपने जीवन में कभी न कभी हर व्यक्ति को चिंता या एंग्जायटी महसूस होती है। जैसे परीक्षा में बैठने, मेडिकल टेस्ट या नौकरी के लिए इंटरव्यू देने की चिंता। लेकिन समय के साथ चिंता पूरी तरह सामान्य हो जाती है।

हालांकि कुछ लोगों को अपनी चिंता को नियंत्रित करने में मुश्किल आती है।

चिंता लंबे समय तक भी बनी रह सकती है जिसके कारण व्यक्ति का दैनिक जीवन प्रभावित होता है।

चिंता कई समस्याओं का मुख्य लक्षण है, जिसमें शामिल हैं:

हालांकि, यहां हम आपको एक विशेष समस्या यानी जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर (GAD) के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

GAD एक ऐसी बीमारी है जो लंबे समय तक बनी रहती है। इससे पीड़ित व्यक्ति को किसी विशेष समस्या के बजाय लगभग हर समस्या या परिस्थिति में चिंता महसूस होती है।

एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति अधिकांश समय चिंतित ही रहता हैं और उन्हें इस बात का ध्यान ही नहीं रहता है कि उन्हें पिछली बार चिंता कब नहीं हुई थी।जैसे ही चिंता की एक समस्या सुलझती है तब तक व्यक्ति को दूसरी चीजों की चिंता होने लगती है।

GAD से पीड़ित व्यक्ति में मनोवैज्ञानिक (मानसिक) और शारीरिक दोनों लक्षण नजर आ सकते हैं। ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग होते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

  • चिंता और बेचैनी महसूस करना
  • एकाग्र होने या सोने में परेशानी होना
  • चक्कर आना या दिल की धड़कन बढ़ना

डॉक्टर के पास कब जाएं

हालांकि कुछ समय ऐंज़ाइयटी पूरी तरह सामान्य हो जाती है। लेकिन यदि चिंता आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है या आपको किसी तरह की परेशानी हो रही है, तो तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं।

जीएडी का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपसे लक्षणों और चिंता, डर और आपकी भावनाओं के बारे में पूछेंगे।

सामान्य एंग्जायटी डिसऑर्डर (GAD) के कारण

GAD का सटीक कारण पूरी तरह से पता नहीं चल पाया है। लेकिन यह कई कारणों से होता है। रिसर्च के अनुसार, इसके निम्न कारण हो सकते हैं:

  • व्यवहार या भावनाओं के प्रति मस्तिष्क का ओवरएक्टिव होना।
  • मूड को नियंत्रित और उत्तेजित करने वाले मस्तिष्क के रसायनों सेरोटोनिन (serotonin) और नोराड्रीनलीन (noradrenaline) का असंतुलन।
  • माता-पिता से प्राप्त जीन - यदि आपके माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य को यह समस्या है तो आपको GAD होने की संभावना पांच गुनी बढ़ सकती है
  • घरेलू हिंसा, बाल शोषण, उत्पीड़न जैसी तनावपूर्ण घटनाओं का इतिहास
  • अर्थराइटिस (arthritis) जैसी पीड़ादायक स्वास्थ्य समस्या से लंबे समय से जूझना
  • अधिक ड्रग या शराब की लत

हालांकि कई लोग बिना किसी कारण के जीएडी से पीड़ित हो सकते हैं।

कौन प्रभावित होता है?

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को यह बीमारी अधिक प्रभावित करती है। 35 से 59 वर्ष के उम्र के लोगों में यह समस्या बहुत आम है।

GAD का इलाज कैसे होता है?

GAD आपके रोजमर्रा के जीवन को कई तरह से प्रभावित कर सकती है। लेकिन इसके कई अलग-अलग इलाज मौजूद हैं, जो इस बीमारी के लक्षणों को कम कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

इसके अलावा भी कई चीजें हैं, जो आपकी चिंता को कम करने में मदद कर सकती हैं, जैसे:

  • स्वयं सहायता पाठ्यक्रम
  • नियमित एक्सरसाइज करना
  • धूम्रपान छोड़ना
  • कम मात्रा में कैफीन या शराब का सेवन करना

इलाज से अधिकांश लोग अपने चिंता के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए लंबे समय तक इलाज कराना पड़ सकता है और लक्षण गंभीर होने पर लंबे इलाज की जरूरत पड़ती है।

सामान्य एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर (GAD) आपको शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्रभावित कर सकता है।

हर व्यक्ति में इसके अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में केवल एक या दो लक्षण नजर आते हैं जबकि कई लोगों में बहुत से लक्षण दिखते हैं।

यदि चिंता से आपका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, या किसी तरह की परेशानी हो रही है, तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

GAD के मनोवैज्ञानिक लक्षण

जीएडी के कारण आपके व्यवहार, सोचने और चीजों को महसूस करने के तरीकों में बदलाव हो सकता है। इसके कारण निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं :

  • बेचैनी
  • डर
  • उत्तेजित महसूस करना
  • एकाग्रता में परेशानी
  • चिड़चिड़ापन

चिंता और डर से बचने के लिए आप सामाजिक संपर्क (दोस्तों और परिवार को देखकर) से बचने की कोशिश कर सकते हैं।

आपको काम पर जाने में भी तनाव और परेशानी हो सकती है और आप छुट्टी ले सकते हैं। इसके कारण आपको अधिक चिंता हो सकती है और आपका आत्मसम्मान कम हो सकता है।

GAD के शारीरिक लक्षण

जीएडी में कई शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • चक्कर आना
  • थकान
  • हृदय की धड़कन बढ़ना या असामान्य होना
  • मांसपेशियों में दर्द और तनाव
  • कंपकंपी
  • मुँह सूखना
  • बहुत ज़्यादा पसीना आना
  • सांस लेने में कठिनाई
  • पेट दर्द
  • उबकाई
  • सिरदर्द
  • झुनझुनी
  • सोने में कठिनाई (अनिद्रा) (Insomnia)

एंग्जायटी के कारण

यदि आपको किसी डर या घबराहट (पैनिक डिसऑर्डर) के कारण चिंता होती है, तो आपको पता चल जाएगा कि वास्तव में इसका कारण क्या है।

जैसे यदि आपको क्लस्ट्रोफोबिया (एक जगह बंद रहने का डर) है आपको पता होगा कि छोटे से जगह में रहने के कारण आपको चिंता होगी।

हालांकि अगर आपको जीएडी है तो आपको हमेशा यह महसूस नहीं होगा कि आप किस बात को लेकर चिंता कर रहे हैं। कारणों को न जानने के बावजूद काफी अधिक चिंता हो सकती है। अगर आप बिना कारण चिंता करते हैं तो इसका कोई समाधान नहीं है।

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर के लिए सेल्फ-हेल्प उपचार

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर के लिए सेल्फ-हेल्प उपचार

यदि आपको जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर (जीएडी) है तो एंग्जाइटी के लक्षणों को खुद से नियंत्रित करने के लिए कई तरीके हैं।

किताब या ऑनलाइन कोर्स की मदद लें

यदि आपको जीएडी है, तो आपके डॉक्टर गहन मनोवैज्ञानिक थेरेपी या दवा से पहले आपको सेल्फ-हेल्प ट्रीटमेंट की सलाह देंगे।

इसमें छह हफ्ते या इससे अधिक समय तक किताब या कंप्यूटर प्रोग्राम पर काम करना शामिल है। कुछ मामलों में प्रशिक्षित थेरेपिस्ट से आपको मदद मिल सकती है जो हर हफ्ते या दो हफ्ते पर आपसे बात करेंगे। कुछ इलाज के दौरान उन थेरेपिस्ट के साथ बहुत कम या कभी-कभी संपर्क में रहने की जरूरत पड़ती है जो आपकी स्थिति की जांच करते हैं।

एंग्जायटी से निपटने के लिए कई किताबें और कोर्स मौजूद हैं।

CBT एक प्रकार का मनोवैज्ञानिक इलाज है जो आपकी समस्या को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है। साथ ही यह भी देखता है कि आपकी समस्या, विचार, भावनाएं और व्यवहार एक दूसरे को कितना प्रभावित करते हैं। सीबीटी पर आधारित इलाज का उद्देश्य आपको चिंता, नकारात्मक सोच और व्यवहार से निपटना सीखाना है।

नियमित व्यायाम

नियमित एक्सरसाइज, खासतौर पर एरोबिक एक्सरसाइज से तनाव और चिंता से निपटने में मदद मिलती है। एक्सरसाइज करने से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्राव होता है जो मूड को बेहतर बनाता है।

एरोबिक एक्सरसाइज में शामिल है:

  • तेज चलना या टहलना
  • तैराकी
  • साइकिल चलाना
  • टेनिस
  • हाइकिंग
  • फुटबॉल या रग्बी
  • एरोबिक्स

आपको हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम या तीव्र एक्सरसाइज करनी चाहिए। मध्यम-तीव्र एक्सरसाइज करने से हृदय की गति बढ़ती है जिससे आप तेजी से सांस लेंगे।

रिलैक्स करें

नियमित एक्सरसाइज के साथ ही आराम या रिलैक्स के तरीक़े सीखना भी जरूरी है।

रिलैक्सेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज काफी फायदेमंद होती है। इसके साथ ही आप आराम करने के लिए योग और पाइलेट्स भी कर सकते हैं।

कैफीन से परहेज करें

अधिक कैफीन का सेवन करने से आपकी चिंता सामान्य से अधिक बढ़ सकती है। दरअसल, कैफीन नींद में रुकावट डालता है और हृदय की गति को बढ़ाता है। यदि आप थके हैं तो चिंता को नियंत्रित करना आपके लिए मुश्किल हो सकता है।

कॉफी, चाय, सोडा युक्त पेय पदार्थ और एनर्जी ड्रिंक में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। इनका सेवन करने से बचें। इससे आपकी एंग्जायटी का स्तर कम होगा।

पानी, पेय पदार्थ और अपने स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से पढ़ें।

धूम्रपान और शराब से बचें

धूम्रपान और शराब का सेवन करने से एंग्जायटी बढ़ सकती है। सीमित मात्रा में शराब पीने या धूम्रपान से परहेज करने से ही चिंता कम हो सकती है।

सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले इन जोखिम को कम करें:

  • पुरुष और महिलाओं को हफ्ते में 14 यूनिट से अधिक शराब का सेवन नहीं करना चाहिए
  • यदि आप हफ्ते में 14 यूनिट से अधिक शराब पीते हैं तो इसे तीन या उससे अधिक दिनों में विभाजित करें

14 यूनिट, 6 पिंट की एवरेज-स्ट्रेंथ बीयर या लो-स्ट्रेंथ वाली 10 छोटी गिलास वाइन के बराबर होता है।

धूम्रपान छोड़ने और चिंता कम करने के बारे में विस्तार से पढ़ें।

अल्कोहल यूनिट और धूम्रपान की लत से छुटकारा पाने के बारे में विस्तार से पढ़ें।

सहायता समूह से संपर्क करें

सहायता समूह से आपको एंग्जायटी से निपटने की सलाह मिल सकती है। इसके साथ ही इसी समस्या से पीड़ित लोगों से मिलना भी एक बेहतर विकल्प है।

सहायता समूह आमने-सामने मीटिंग की व्यवस्था करता है। जहां आप दूसरे लोगों से अपनी समस्याओं और परेशानियों के बारे में बात कर सकते हैं। बहुत से सहायता समूह फोन या पत्र लिखकर भी मदद प्रदान करते हैं।

एंग्जायटी के लिए अपने डॉक्टर से अपने क्षेत्र में स्थानीय सहायता समूह के बारे में पूछें या मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी या सहायता सेवाओं को ऑनलाइन खोजें।

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर का निदान

यदि एंग्जायटी से आपका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, या किसी तरह की परेशानी हो रही है तो अपने डॉक्टर के पास जाएं।

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर (जीएडी) का निदान करना मुश्किल हो सकता है। कुछ मामलों में इसे अवसाद (depression) जैसे मानसिक स्वास्थ्य समस्या से अलग करना भी मुश्किल हो सकता है।

आपको जीएडी हो सकता है यदि:

  • आपके चिंता के कारण आपके दैनिक जीवन के साथ ही आपकी नौकरी और सामाजिक जीवन प्रभावित होता है
  • आपकी चिंता अधिक तनावपूर्ण और परेशान करने वाली होती है
  • आप हर तरह की चीजों को लेकर चिंता करते हैं और उसके बारे में बुरा सोचते हैं
  • आप अपनी चिंता को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं
  • आप कम से कम छह महीने तक लगातार हर दिन चिंता महसूस करते हैं

अपने डॉक्टर से एंग्जाइटी के बारे में बात करना

आपके डॉक्टर आपसे ये सवाल पूछ सकते हैं:

  • किसी भी तरह का शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षण और ये आपको कितने समय से है
  • आपकी चिंता, डर और भावनाओं के बारे में
  • निजी जीवन के बारे में

आपको अपनी भावनाओं, एहसास और निजी जीवन के बारे में डॉक्टर से बात करते हुए परेशानी हो सकती है। लेकिन डॉक्टर को बीमारी के उचित निदान के लिए आपके लक्षण और परिस्थितियों के बारे में जानना जरूरी है।

यदि आप छह महीने या इससे अधिक समय से लक्षणों का सामना कर रहे हैं तो आपको जीएडी हो सकता है। इसके अलावा अपनी चिंता और डर को नियंत्रित न कर पाना भी इस बीमारी का संकेत है।

बीमारी के निदान के लिए एवं अन्य समस्याओं का पता लगाने के आपके डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण या खून की जांच कर सकते हैं, जो इन लक्षणों का कारण हो सकते हैं:

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज

जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर (जीएडी) लंबे समय तक चलने वाली एक बीमारी है। लेकिन इसके कई अलग-अलग इलाज मौजूद हैं जो इसे ठीक करने में मदद करते हैं।

किसी भी तरह का इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर आपसे इलाज के विकल्पों के बारे में चर्चा करेंगे। वह हर इलाज के फायदे और नुकसान भी बताएंगे। इसके साथ ही संभावित जोखिम और दुष्प्रभावों के बारे में भी बताएंगे।

डॉक्टर से बात करके आप अपने लिए उचित इलाज का विकल्प चुन सकते हैं।

यदि आपको जीएडी के साथ ही अवसाद, अधिक ड्रग या शराब की लत जैसी अन्य समस्याएं हैं, तो जीएडी का इलाज शुरू करने से पहले इन समस्याओं को ठीक किया जाता है।

शुरुआती इलाज

चिंता और डर से निपटने के लिए सबसे पहले डॉक्टर आपको एक या दो महीने तक स्वयं सहायता कोर्स आजमाने की सलाह देंगे।

इसमें आमतौर पर खुद ही किसी किताब या कंप्यूटर प्रोग्राम पर काम करना होता है (शुरू करने से पहले आपको सलाह दी जाएगी)। आप केवल कभी-कभी ही डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

इसके अलावा आप एक समूह कोर्स का भी हिस्सा बन सकते हैं। जिसमें एक जैसी समस्या से जूझ रहे लोग हर हफ्ते थेरेपिस्ट से मिलकर चिंता से निपटने के तरीके सीखते हैं।

चिंता से निपटने के लिए सेल्फ-हेल्प सुझाव प्राप्त करें।

अगर इन शुरुआती उपचारों से मदद नहीं मिलती है तो आपको अधिक गहरे मनोवैज्ञानिक उपचार या दवा की सलाह दी जाएगी। इसके बारे में नीचे बताया गया है।

मनोवैज्ञानिक उपचार

यदि आपको जीएडी है, तो आमतौर पर आपको दवा से पहले मनोवैज्ञानिक उपचार की सलाह दी जाती है।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (cognitive behavioural therapy)

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) GAD का सबसे प्रभावी इलाज है। GAD के इलाज पर हुई अलग-अलग शोध में यह पाया गया है कि दवाओं की अपेक्षा सीबीटी का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। लेकिन हर किसी के लिए कोई एक इलाज बेहतर नहीं है।

CBT से यह समझने में मदद मिलती है कि आपकी समस्या, विचार, भावनाएं और व्यवहार एक दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं। यह आपके नकारात्मक और चिंतापूर्ण सोच पर भी सवाल उठाने में मदद करता है। साथ ही उन चीजों को करने के लिए प्रेरित करता है जिससे आप अक्सर बचते हैं और वही आपकी चिंता का कारण बन जाता है।

CBT में आपको आमतौर पर तीन से चार महीने तक हर हफ्ते एक घंटे के सेशन के लिए अनुभवी और प्रशिक्षित थेरेपिस्ट से मिलने की जरूरत होती है। आपके थेरेपिस्ट को सीबीटी उचित तरीके से करना चाहिए और नियमित देखभाल के साथ प्रभावी इलाज प्रदान करना चाहिए।

माइंडफुलनेस और एप्लाइड रिलैक्सेशन (Mindfulness and applied relaxation)

माइंडफुलनेस और एप्लाइड रिलैक्सेशन मनोवैज्ञानिक इलाज का एक प्रकार है। यह GAD के इलाज में CBT की तरह ही प्रभावी है।

माइंडफुलनेस (Mindfulness) में अपने मौजूदा समय पर क्षण पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही अपनी भावनाओं को स्वीकार किया जाता है। माइंडफुल होने से डर, परिस्थिति या किसी अन्य कारण से होने वाली चिंता को कम किया जा सकता है। माइंडफुलनेस की उत्पत्ति बौद्ध धर्म से हुई है। इसके लिए आपको अपना धर्म बदलने की जरूरत नहीं है।

एप्लाइड रिलैक्सेशन (applied relaxation) में विशेष तरीके से आपकी मांसपेशियों को उन परिस्थितियों में आराम देने की कोशिश की जाती है, जिसके कारण आपको चिंता होती है। इस टेक्निक को एक प्रशिक्षित थेरेपिस्ट द्वारा सिखाया जाता है। इसमें निम्न चीजें शामिल हैं:

  • अपनी मांसपेशियों को आराम देने का तरीका सीखना
  • यह सीखना कि अपनी मांसपेशियों को तेजी से कैसे आराम दें
  • चिंता की स्थिति में अपनी मांसपेशियों को आराम देना सीखना

CBT की तरह एप्लाइड रिलैक्सेशन थेरेपी (Applied relaxation therapy) के लिए भी तीन से चार महीने तक हर हफ्ते एक घंटे के सेशन के लिए थेरेपिस्ट से मिलना पड़ता है।

दवाएं (Medication)

यदि मनोवैज्ञानिक उपचार से मदद नहीं मिलती है या आप इन्हें नहीं आजमाना चाहते हैं तो आपको आमतौर पर दवा दी जाएगी।

GAD के इलाज के लिए आपके डॉक्टर अलग-अलग तरह की दवा लिख सकते हैं। कुछ दवाओं का सेवन कम समय तक जबकि कुछ का सेवन लंबे समय तक करना पड़ सकता है।

लक्षणों के आधार पर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षणों को ठीक करने के लिए आपको दवा की जरूरत हो सकती है।

यदि आप जीएडी की दवा लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो इलाज शुरू करने से पहले आपके डॉक्टर को दवा के विभिन्न विकल्पों के बारे में चर्चा करनी चाहिए। जिसमें शामिल है:

  • अलग-अलग तरह की दवाएं
  • इलाज की अवधि
  • दुष्प्रभाव और अन्य दवाओं के साथ संभावित प्रतिक्रिया

यदि आप जीएडी के लिए दवा ले रहे हैं तो इसका फायदा जानने के लिए आपको अपने डॉक्टर से नियमित रूप से मिलना चाहिए। आमतौर पर शुरू के तीन महीने तक आपको हर दो से चार हफ्ते बाद जाना चाहिए। इसके बाद हर तीन महीने बाद जा सकते हैं।

अगर आप दवा के दुष्प्रभाव का अनुभव कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर को बताएं। वह आपको दवा की खुराक कम करने या अन्य दवा के सेवन की सलाह दे सकते हैं।

जीएडी के इलाज के लिए आमतौर पर ये दवाएं लेने की सलाह दी जाती है:

सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (SSRIs)

ज्यादातर मामलों में सबसे पहले आपको एक तरह का एंटीडिप्रेसेंट दिया जाता है जिसे सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (Serotonin reuptake inhibitors) (SSRIs) कहते हैं। इस तरह की दवा मस्तिष्क में सेरोटोनिन नामक रसायन को बढ़ाती है।

आपको निम्न SSRI दवाएं लेने का सुझाव दिया जा सकता है:

  • सेर्टालाइन (sertraline)
  • एस्किटालोप्राम (escitalopram)
  • पैरोक्सेटिन (paroxetine)

SSRI को लंबे समय तक लिया जा सकता है। लेकिन अन्य एंटीडिप्रेसेंट (antidepressant) की तरह यह भी कुछ हफ्तों बाद काम करना शुरू करता है। आपको आमतौर पर कम खुराक से शुरुआत करनी चाहिए और फिर धीरे-धीरे खुराक बढ़ानी चाहिए।

SSRI के सामान्य दुष्प्रभाव:

  • गुस्सा आना
  • उबकाई
  • खट्टी डकार
  • दस्त या कब्ज
  • भूख न लगना और वज़न घटना
  • चक्कर आना
  • आंख से धुंधला दिखाई देना
  • मुँह सूखना
  • बहुत ज़्यादा पसीना आना
  • सिर दर्द
  • नींद न आना (अनिद्रा) या सुस्ती
  • सेक्स की इच्छा घटना
  • सेक्स या हस्तमैथुन के दौरान चरम सुख न मिलना
  • पुरुषों में उत्तेजना की कमी (erectile dysfunction)

ये दुष्प्रभाव समय के साथ खत्म हो जानी चाहिए। जबकि इनमें से कुछ, जैसे यौन समस्याएं बनी रहती हैं।

यदि दो महीने के इलाज के बाद भी आपको दवा से कोई फायदा नहीं हो रहा है या दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है, तो आपके डॉक्टर SSRI का अन्य विकल्प दे सकते हैं।

जब आपके डॉक्टर आपको दवा बंद करने के लिए कहते हैं तो आपको धीरे-धीरे दवा की खुराक कम करनी चाहिए। इससे आपको दवा छोड़ने का जोखिम नहीं उठाना पडे़गा। जब तक डॉक्टर न कहें, अपनी मर्जी से दवा नहीं छोड़नी चाहिए।

सेरोटोनिन और नोराड्रेनालिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (Serotonin and noradrenaline reuptake inhibitors) (SNRIs)

यदि SSRI से आपकी चिंता कम नहीं होती है तो आपको एक अलग प्रकार का एंटीडिप्रेसेंट (antidepressant) दिया जाएगा जिसे सेरोटोनिन और नोराड्रीनलीन रीअपटेक इनहिबिटर (SNRI) कहते हैं। इस तरह की दवा मस्तिष्क में सेरोटोनिन (serotonin) और नोराड्रीनलीन (noradrenaline) की मात्रा को बढ़ाती हैं।

आपको ये SNRI लेने का सुझाव दिया जा सकता है:

  • वेनलाफेक्सिन (venlafaxine)
  • डुलोक्जेटिन (duloxetine)

SNRIs के सामान्य दुष्प्रभाव:

  • उबकाई
  • सिर दर्द
  • सुस्ती
  • चक्कर आना
  • मुँह सूखना
  • कब्ज़
  • अनिद्रा
  • पसीना आना

SNRIs आपके रक्तचाप (blood pressure) को भी बढ़ा सकते हैं, इसलिए इलाज के दौरान आपके रक्तचाप की नियमित जांच की जाएगी।

SSRI की तरह इसके भी कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जैसे उबकाई, पेट गड़बड़ होना, नींद न आना, गुस्सा आना या अधिक चिंता होना। इलाज के एक या दो हफ्तों तक ये लक्षण बहुत सामान्य हैं। लेकिन दवा का प्रभाव होने पर ये लक्षण घटने लगते हैं।

प्रेगाबेलिन (Pregabalin)

यदि SSRIs और SNRIs से आपके लक्षण कम नहीं हो रहे हैं तो आपको प्रेगाबेलिन (pregabalin) लेने का सुझाव दिया जाएगा। इस दवा को एंटी कॉन्वेलसेंट (anticonvulsant) कहा जाता है, जो मिर्गी (epilepsy) के इलाज में इस्तेमाल की जाती है। हालांकि यह एंग्जायटी (anxiety) के इलाज में भी फायदेमंद है।

प्रेगाबेलिन (pregabalin) के ये दुष्प्रभाव हो सकते हैं:

  • सुस्ती
  • चक्कर आना
  • भूख और वजन बढ़ना
  • आंख से धुंधला दिखाई देना
  • सिर दर्द
  • मुँह सूखना
  • वर्टिगो (सिर चकराना) (vertigo)

प्रेगाबलिन (pregabalin) का सेवन करने से एसएसआरआई या एसएनआरआई की अपेक्षा मतली या सेक्स ड्राइव घटने की संभावना कम होती है।

बेंजोडायजेपाइन (Benzodiazepines)

बेंजोडायजेपाइन (Benzodiazepines) एक प्रकार कि सेडटिव दवा है जो कभी-कभी चिंता की स्थिति गंभीर होने पर कुछ समय तक इलाज के लिए दी जाती है। दवा लेने के 30 से 90 मिनट के अंदर चिंता के लक्षण कम हो जाते हैं।

यदि आपको बेंजोडायजेपाइन (benzodiazepine) की सलाह दी जाती है, तो यह आमतौर पर डायजेपाम (diazepam) होगा।

चिंता के लक्षणों को दूर करने में बेंजोडायजेपाइन (benzodiazepine) बहुत प्रभावी है लेकिन इसका इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं किया जा सकता है। चार हफ्तों से अधिक समय तक इसका सेवन करने से इसकी लत लग सकती है।

चार हफ्तों के बाद बेंजोडायजेपाइन (benzodiazepine) का असर कम होने लगता है। इसलिए दो या चार हफ्तों से अधिक समय तक बेंजोडायजेपाइन (benzodiazepine) लेने की सलाह नहीं दी जाती है।

बेंजोडायजेपाइन (benzodiazepine) के निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं:

  • सुस्ती
  • एकाग्रता में कठिनाई
  • सिर दर्द
  • चक्कर आना
  • कंपकंपी (शरीर में झटका या कम्पन)
  • सेक्स की इच्छा में कमी

सुस्ती बेंजोडायजेपाइन का सामान्य दुष्प्रभाव है। यह दवा लेने से शरीर की क्रिया धीमी हो जाती है जिससे आपको वाहन या मशीन चलाने में परेशानी होती है। इसलिए इलाज के दौरान इस तरह के काम नहीं करने चाहिए।

विशेषज्ञ के पास जाना

यदि ऊपर दिए गए इलाज से आप थक चुके हैं और जीएडी के लक्षण कम नहीं होते हैं तो आप अपने डॉक्टर से मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास जाने के बारे में चर्चा कर सकते हैं।

ये रेफरल अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरह से काम करते हैं। लेकिन आपको सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य टीम में भेजा जाएगा। इन टीमों में कई तरह के विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जैसे:

  • मनोचिकित्सक
  • मनोरोगी नर्स
  • क्लिनिकल ​​मनोवैज्ञानिक
  • व्यावसायिक थेरेपिस्ट
  • सामाजिक कार्यकर्ता

स्थानीय टीम का मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपकी पूरी समस्या की जांच करेगा। वे आपसे आपके पिछले इलाज और उसके फायदे के बारे में भी पूछेंगे।

इसके अलावा वे आपसे आपके जीवन से जुड़ी उन चीजों के बारे में भी पूछेंगे जो समस्या को प्रभावित करती है। साथ ही वे परिवार और दोस्तों से मिलने वाली मदद के बारे में भी प्रश्न करेंगे। आपके विशेषज्ञ आपके इलाज की ऐसी योजना बनाएंगे, जिसका उद्देश्य बीमारी के लक्षणों को कम करना होगा।

इस दौरान आपको ऐसे इलाज का विकल्प दिया जाएगा, जिसे आपने पहले नहीं आजमाया होगा। यह ऊपर बताए गए मनोवैज्ञानिक इलाज या दवा के विकल्प में से एक हो सकता है।

साथ ही आपको मनोवैज्ञानिक इलाज के साथ ही दवा का भी सुझाव दिया जाएगा, या दो अलग-अलग दवाएं दी जाएंगी।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।