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सामाजिक चिंता(सामाजिक भय, social phobia)

मेडिकली रिव्यूड

विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों तथा लोगों के आसपास होने से स्थाई रूप से पैदा होने वाले डर या चिंता को ही सामाजिक चिंता विकार या सोशल फोबिया कहा जाता है।यह सबसे आम चिंता सम्बंधी विकारों में से एक है।

सिर्फ शर्मीला स्वभाव होना ही सामाजिक चिंता विकार नहीं कहलाता, बल्कि यह इससे कहीं ज्यादा चिंताजनक होता है। यह रोज़मर्रा में किए जाने वाले कार्यों, जैसे- शॉपिंग या फोन पर बात करने आदि में काफी डर पैदा करता है। जो लोग इस समस्या से ग्रसित हैं, वे अपने अपमानित होने के डर से कुछ भी बोलने या करने से घबराते हैं।

यह चिंता विकार आपकी सामान्य जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर देता है। आपके सामाजिक संबंधों और जीवन की गुणवत्ता पर प्रभाव डालता है। स्कूल अथवा कार्य-स्थल पर अच्छा प्रदर्शन करने से रोकता है।

यह आम तौर पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। यह अमूमन किशोरावस्था से शुरू होता है और कई बार बाल्यावस्था यानी बचपन में भी देखने को मिलता है।

अगर आपको लगता है कि आप में यह विकार है तो अपने डॉक्टर के पास जाने से न घबराएं। यह एक मान्य स्थिति है, जिसका प्रभावशाली उपचार संभव है।

सामाजिक चिंता विकार के लक्षण क्या होते हैं?

इसमें जहां कुछ बच्चे बहुत रोते हैं तो कुछ बहुत ज्यादा गुस्सा या नखरे करते हैं। इसमें बच्चा स्कूल जाने से डरता है। अपनी क्लास या स्कूल के किसी आयोजन में भाग लेने से भी घबराता है।

किशोर या युवा वर्ग, जिन्हें यह समस्या है, वे कई रोज़मर्रा के कामकाज में भी डर का सामना करते हैं, जैसे:

  • अंजान लोगों से मिलने में
  • समूह में बात करने या बातचीत की शुरुआत करने में
  • फोन पर बात करने में
  • किसी आधिकारिक व्यक्ति से बात करने में
  • काम करने में
  • किसी के साथ खाने-पीने में
  • ख़रीददारी करने जाने में
  • आत्मविश्वास की कमी एवं संबंधों को लेकर असुरक्षा की भावना होना
  • आलोचना सुनने में
  • आंख से आंख मिलाकर बात कर पाने में
  • वो अपनी फिक्र को कम करने के लिए ड्रग या शराब का सेवन कर सकते हैं।
  • इन सभी या फिर इनमें से किसी एक स्थिति से भयभीत हो सकते हैं।

पैनिक अटैक(Panic attacks)

कई बार किसी सामाजिक स्थिति को लेकर डर और भय इस हद तक बढ़ जाता है कि यह पैनिक अटैक का रूप ले लेता है। इसमें कुछ मिनटों के लिए व्यक्ति काफी डर, चिंता और घबराहट महसूस करता है। शारीरिक लक्षण भी दिख सकते हैं, जैसे उबकाई आना, पसीना आना, शरीर का कांपना और दिल की धड़कन बढ़ जाना।

ये अनुभूतियां अपने शिखर पर पहुँचकर शीघ्र समाप्त भी हो जाती हैं। यह भयावह होता है, पर इसमें शारीरिक नुकसान नहीं होता।

अन्य मानसिक स्वास्थ्य परेशानियां

जिन लोगों को यह समस्या होती है, उनमें कई दूसरी मानसिक परेशानियां भी घर कर सकती हैं, जैसे- अवसाद , सामान्य चिंता विकार(generalised anxiety disorder), पैनिक डिसॉर्डर (भय विकार) और पोस्ट-ट्रॉमेटिक तनाव विकार (post-traumatic stress disorder)

कुछ लोग अपनी चिंता और डर से जूझने के लिए शराब पीना शुरू कर देते हैं और कुछ ड्रग्स भी शुरू कर देते हैं।

इसके कारण

इसके पीछे के सही कारण तो नहीं पता, पर यह बहुत सी बातों का मिश्रण हो सकता है। कई बार जीन्स भी इसमें एक अहम भूमिका निभाते हैं।

माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति व्यवहार भी बच्चों में विकार उत्पन्न होने का अहम कारण बताया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन्हें यह डिसॉर्डर था, उन्होंने अपने माता-पिता के बारे में ये बताया:

  • जरूरत से ज्यादा रक्षात्मक(overprotective)
  • प्यार भरा स्वभाव न होना
  • निरंतर आलोचना करना और चिंता करना कि शायद यह कुछ गलत न कर दे
  • अंजान लोगों से मिलने-जुलने के खतरे को बढ़ा-चढ़ा कर बताना

मदद लेना

अगर आपको लगता है कि आपको यह समस्या है तो अपने डॉक्टर की मदद लेने से ना कतराएँ।

वह आपको परामर्श देने के लिए जितना हो सके उतने आसान तरीके बताएँगे। आप उनसे फोन पर बात कर सकते हैं, मिलने का समय सुनिश्चित कर सकते हैं, सुविधा अनुसार सामान्य समय से पहले या बाद में जब भीड़ कम या ज्यादा हो कोई भी समय चुन सकते हैं।

यदि आपकी चिंता बहुत ज्यादा गंभीर हो चुकी है या आप अपने बच्चे की स्थिति का आकलन करना चाहते हैं, तो डॉक्टर आपके घर पर भी आ सकते हैं।

परीक्षण

आपके डॉक्टर आपसे समस्या के परीक्षण के लिए बनाई गई प्रश्नावली में से कुछ सवाल करेंगे, जिसके बाद आपको कुछ अंक मिलेंगे। इन्हीं अंकों के आधार पर तय होता है कि आप में यह विकार किस स्तर का है?

डॉक्टर कुछ इस तरह के सवाल कर सकते हैं, जैसे कि:

  • क्या आप/आपका बच्चा सामाजिक स्थानों और गतिविधियों से दूर रहना पसंद करता है?
  • क्या आप/आपका बच्चा दूसरे लोगों के साथ खाने, बोलने या पार्टी में जाने से घबराता है?
  • क्या आप/आपके बच्चे को किसी काम करने में तकलीफ़ होती है, जब कोई अन्य व्यक्ति देख रहा हो?

आपका डॉक्टर आपके डर से जुड़े अन्य सभी संभव कारणों को मिटा देना चाहेंगे। जैसे- जेनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसॉर्डर(सामान्यीकृत चिंता विकार) या एगोराफोबिया (agoraphobia) ( एक ऐसी स्थिति में होने का डर, जहां से बचकर निकलना मुश्किल हो या अगर कुछ गलत हो जाए तो मदद नहीं मिल सकती हो)।

फोबिया के बारे में थोड़ा और जानें

डॉक्टर यह खोजने की कोशिश करेंगे कि क्या आपको कोई और परेशानी तो नहीं है, जिसका अलग से उपचार कराना जरूरी हो, जैसे- अवसाद या ड्रग या शराब की समस्या।

अवसाद के उपचार के बारे में पढ़ें, नशे की दवाइयों और शराब से दूर रहने के लिए मदद भी लें।

वयस्कों में सामाजिक चिंता विकार का उपचार

संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी(कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी)

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी यानी सीबीटी सबसे असरदार तरीका है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत सीबीटी दी जाती है, जिसे करीब 4 महीने में 14 चरणों में बाँटा जाता है।

आम तौर पर सीबीटी के जरिए थेरेपिस्ट काल्पनिक और बेकार की धारणाओं को बदलने में मदद करता है। आप और आपका थेरेपिस्ट आपके व्यवहार को बदलने के लिए एक साथ काम करते हैं और वयरत विचारों को अधिक यथार्थवादी व संतुलित विचारों में तब्दील करते हैं।

सीबीटी(CBT) कुछ नई तकनीक सिखाता है, जिससे मुश्किल परिस्थितियों में सकारात्मक रहने में मदद मिलती है।

थेरेपी के सत्र में सोशल एंग्जाइटी के बारे में जानकारी देना सम्मिलित होता है। अपने बारे में विकृत सोच को ठीक करने के लिए वीडियो प्रतिक्रिया(feedback) का इस्तेमाल होता है। साथ ही व्यावहारिक व्यायाम और प्रयोग की मदद भी ली जाती है।

स्व-सहायता में मदद

अगर आप सीबीटी से कुछ अलग मानसिक थेरेपी चाहते है, तो आपको स्यवं की सहायता करने में मदद की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर, सीबीटी पर आधारित किताबें, कंप्यूटर प्रोग्राम आदि की मदद लेकर 3 से 4 महीने में सत्र पूरा कर सकते हैं।

एंटीडिप्रेसेंट्स (Antidepressants)

कुछ लोगों को अवसाद-रोधी दवाइयों से भी काफी मदद मिलती है, जैसे एसएसआरआई (सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिअप्टेक इन्हिबिटर) या फिर इसे व्यक्तिगत CBT के साथ लिया जा सकता है।

SSRIs दिमाग में सेरोटोनिन नामक केमिकल के स्तर को बढ़ा देता है। यह लंबे समय तक लेना होता है।

सभी अवसाद रोधी दवाओं के साथ एसएसआरआई का असर दिखने में कई हफ्तों का समय लग सकता है। शुरुआत कम मात्रा देकर की जाती है। जब आपका शरीर उसे अपनाने लगता है तो धीरे-धीरे मात्रा बढ़ा दी जाती है।

आपको ऐसकीटालोप्राम(escitalopram) एवं सेर्ट्रालिन(sertraline) भी दी जा सकती है। और शुरुआती कुछ हफ्तों में होने वाले सुधार का विश्लेषण किया जाएगा। फिर पता किया जाएगा कि आप अनुकूल प्रतिक्रिया दे रहे हैं या नहीं।

एसएसआरआई (SSRIs) से होने वाले सामान्य दुष्प्रभाव

  • जी मिचलाना (बीमार महसूस करना)
  • यौन क्षमता में कमी
  • धुंधला दिखाई देना
  • दस्त या कब्ज होना
  • चक्कर आना
  • मुंह सूखना
  • भूख न लगना
  • पसीना आना
  • घबराहट होना
  • इनसोम्निया यानी नींद ना आना

जब आपको और आपके डॉक्टर को लगता है कि एसएसआरआई का सेवन बंद कर देना चाहिए तो आप धीरे-धीरे दवाई की मात्रा कम करके इसे बंद कर सकते हैं। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बाद ही पूरी तरह से बंद करनी चाहिए।

मनोचिकित्सा

यदि किसी भी कारण वश ऊपर दिए गए सभी व्यवधान आपको अपने लिए सही नहीं लगते तो आप पारस्परिक मनोचिकित्सा या लघु-अवधि वाली मनोचिकित्सा की मदद भी ले सकते हैं। यह विशेष तौर पर सामाजिक चिंता विकार के लिए ही बनाई गई है।

आम तौर पर मनोचिकित्सा में प्रशिक्षित थेरेपिस्ट से अकेले में, समूह में या अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ बात करना सम्मिलित होता है। यह थेरेपी आपको अपनी परेशानियों, चिंताओं को और भी ज्यादा गहरायी से समझने में मदद करती है। यह सभी तरह के मानसिक विकारों और कष्टप्रद आदतों के बीच सही व्यवहार करना सिखाती है।

पारस्परिक मनोचिकित्सा का उद्देश्य सोशल एंग्जाइटी यानी सामाजिक चिंता को संबंधों से जुड़ी परेशानियों से जोड़ना होता है। इसके लिए संभवतः 16 से 20 सत्र(सेशन) होते हैं, जिनमें 4 से 5 महीने का समय लग जाता है।

लघु-अवधि मनोचिकित्सा का उद्देश्य आपके सामाजिक कौशल में सुधार करना है। अन्य लोगों के बीच बिना डरे हर तरह की सामाजिक स्थिति का सामना करना सिखाना होता है। इसमें सामान्य तौर पर 6 से 8 महीने के समय में 25 से 30 सत्र लेने होते हैं।

बच्चों में सोशल एंग्जायटी डिसॉर्डर का उपचार

बड़ों के लिए जो मनोवैज्ञानिक थेरेपी सुझाई गई है, वह 15 साल और उससे बड़े बच्चों के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है।

समूह आधारित सीबीटी 7 साल या उससे बड़े बच्चों को दी जानी चाहिए। यह ग्रुप सेशन धीरे-धीरे बच्चों के डर को कम करके उन्हें सामाजिक स्थितियों का सामना करने योग्य बनाता है एवं सामाजिक कौशल सिखाता है। इसके अंतर्गत 8 से 12 सत्र होते हैं, जिसका हर सत्र 90 मिनट का होता है।

छोटे बच्चों के लिए माता-पिता द्वारा संचालित सीबीटी ज्यादा सही रहती है। इसमें माता-पिता को सीबीटी आधारित वस्तु दी जाती है और इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता है। जैसे कि किताबें, जो बच्चे में एंग्जाइटी की समस्या का इलाज करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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