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ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) (Autism spectrum disorder)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) क्या है? (What is autism spectrum disorder?)

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एस्पर्गर सिंड्रोम (Asperger syndrome) सहित ऐसी ही मानसिक समस्याओं सा एक समूह है। यह पीड़ित व्यक्ति के सामाजिक संपर्क, संचार, रुचि और व्यवहार को प्रभावित करता है।

एएसडी (ASD) से पीड़ित बच्चों में आमतौर पर तीन साल की उम्र से पहले ही लक्षण (symptoms) नजर आने लगते हैं, हालांकि उनका निदान आमतौर पर तीन साल की उम्र के बाद किया जाता है।

आंकड़ों के अनुसार हर 100 में से 1 व्यक्ति एएसडी (ASD) से पीड़ित पाया जाता है। यह बीमारी लड़कियों की अपेक्षा लड़कों को अधिक प्रभावित करती है।

एएसडी (ASD) के लिए कोई "इलाज" नहीं है, लेकिन स्पीच और भाषा थेरेपी, व्यावसायिक थेरेपी, शैक्षिक सहायता सहित अन्य तरीके बच्चों और माता-पिता को इस समस्या से उबरने में मदद करते हैं।

एएसडी से पीड़ित लोगों के लिए उपलब्ध मदद और समर्थन के बारे में पढ़ें।

संकेत और लक्षण (Signs and symptoms)

एएसडी (ASD) से पीड़ित लोगों में सामाजिक संपर्क और संचार की समस्याएं होती हैं।

प्रारंभिक अवस्था में, एएसडी (ASD) से पीड़ित कुछ बच्चे तुतला कर नहीं बोलते हैं या अन्य वोकल साउंड का उपयोग नहीं करते हैं। बड़े बच्चों को दूसरों के साथ बातचीत करने के लिए गैर-मौखिक व्यवहार का उपयोग करने में समस्या होती है - जैसे कि, उन्हें आई कॉन्टैक्ट, चेहरे के भाव, शरीर की भाषा और मुद्रा के साथ कठिनाई होती है। वे कोई भी नहीं या हल्का आई कॉन्टैक्ट रखते हैं और परिचित या अपरिचित दोनों लोगों की अनदेखी कर सकते हैं।

एएसडी (ASD) से पीड़ित बच्चों में जागरूकता और रुचि की कमी हो सकती है। वे अपने उम्र के बच्चों के साथ बातचीत करने के बजाय अक्सर बड़े या छोटे बच्चों पर दबाव डालते हैं। वे अकेले खेलते हैं।

उन्हें अन्य लोगों की भावनाओं और अनुभवों को समझना मुश्किल होता है और बातचीत शुरू करने या इनमें शामिल होने में कठिनाई होती है। उनके भाषा के विकास में देरी हो सकती है, और एएसडी से पीड़ित बच्चा हावभाव (शरीर की भाषा) या चेहरे के भावों का उपयोग करके बात नहीं कर पाता है। वह किसी भी तरह भाषा की कमी या भाषा कौशल में देरी की भरपाई नहीं कर सकता है।

एएसडी से पीड़ित बच्चे अपनी भाषा तैयार करने के बिना या अपनी भाषा कौशल विकसित बिना दूसरों द्वारा कहे गए शब्दों या वाक्यों को तुरंत या बाद में दोहराते हैं। कुछ बच्चे दूसरों को देखकर भी उनकी नकल नहीं कर पाते।

एएसडी से पीड़ित कुछ बच्चे हर दिन उसी दिनचर्या को जीना पसंद करते हैं और थोड़ा बदलाव करने पर नखरे दिखाने लगते हैं। उत्तेजित या परेशान होने पर कुछ बच्चे अपने हाथ या उंगलियों को इधर-उधर घुमाते हैं। अन्य रिपिटेटिव एक्टिविटी कर सकते हैं, जैसे लाइट स्विच को चालू और बंद करना, दरवाजे खोलना और बंद करना, या चीजों को कतार में लगाना ।

एएसडी से पीड़ित बच्चे और युवा आमतौर पर कॉग्निटिव (सोच), सीखने, भावनात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याओं का अनुभव करते हैं। उदाहरण के लिए, ](https://www.livehealthily.com/adhd)[उन्हें अटेंटिव डेफिशिट डिसऑर्डर (ADHD), चिंता या अवसाद भी हो सकता है।

एएसडी (ASD) से पीड़ित लगभग 70% बच्चों में नॉन-वर्बल आईक्यू 70 से नीचे होता है। इनमें से 50% में नॉन-वर्बल आईक्यू 50 से कम होता है। कुल मिलाकर सीखने में गंभीर कठिनाई का अनुभव करने वाले 50 प्रतिशत बच्चे एएसडी से पीड़ित होते हैं।

एएसडी के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

निदान कराना (Getting a diagnosis)

एएसडी (ASD) की मुख्य विशेषताएं - सामाजिक संचार और बातचीत में समस्याएं - यह लक्षण बचपन में पहचाना जा सकता है।

एएसडी के कुछ लक्षण तब तक नजर नहीं आते जब तक परिस्थिति में बदलाव नहीं होता है, जैसे कि जब बच्चा नर्सरी या स्कूल जाना शुरू करता है।

यदि आप अपने बच्चे में एएसडी के किसी भी लक्षण को नोटिस करते हैं, या यदि आप अपने बच्चे के विकास को लेकर चिंतित हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें। बच्चे की नर्सरी या स्कूल में बातचीत करने से भी आपकी चिंताएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।

एएसडी के निदान के बारे में और पढ़ें।

एएसडी से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करना (Caring for someone with ASD)

किसी की देखभाल करना बहुत आसान नहीं होता है। जब आप दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में व्यस्त होते हैं, तो यह आपकी भावनात्मक और शारीरिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है और इस दौरान अपने स्वयं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में न सोचना स्वाभाविक है।

यदि आप किसी और की देखभाल कर रहे हैं, तो साथ ही अपनी देखभाल करना भी जरूरी है। यह आपके और जिस व्यक्ति की आप देखभाल कर रहे हैं, दोनों के हित में है।

एएसडी किन कारणों से होता है? (What causes ASD?)

एएसडी का सटीक कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन माना जाता है कि यह कई जटिल आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों से होता है।

पहले कुछ लोगों का मानना ​​था कि एमएमआर वैक्सीन के कारण एएसडी होता है, लेकिन दुनिया भर में कई बड़े अध्ययनों में इसकी बड़े पैमाने पर जांच की गई है।जिसमें लाखों बच्चों को शामिल किया गया। इस दौरान शोधकर्ताओं ने एमएमआर और एएसडी के बीच लिंक का कोई सबूत नहीं पाया।

एएसडी के कारणों के बारे में और पढ़ें।

वयस्कों में ऑटिज्म (Autism in adults)

एएसडी से पीड़ित कुछ लोगों में बच्चों के समान ही लक्षण नजर आते हैं। लेकिन अक्सर बिन निदान किए वे वयस्कता में प्रवेश कर जाते हैं।

हालांकि, वयस्क होने के बाद निदान करने से एएसडी से पीड़ित व्यक्ति को इससे निपटने में मदद मिलता है। उसका परिवार इस समस्या को समझकर उसके अनुसार व्यक्ति को सलाह और सहयोग प्रदान कर सकता है।

उदाहरण के लिए, कई ऑटिज़्म के लिए कई विशिष्ट सेवाएं उपलब्ध हैं जो एएसडी से पीड़ित वयस्कों को सहायता प्रदान करती हैं। वे स्वतंत्र रूप से जी सकते हैं और अपने कौशल और क्षमताओं से मेल खाते नौकरी या काम ढूंढ सकते हैं।

एएसडी से पीड़ित वयस्कों के बारे में और पढ़ें।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of autism spectrum disorder)

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का मुख्य लक्षण सामाजिक संचार और बातचीत में कठिनाई है।

यदि आप अपने बच्चे में एएसडी के किसी भी लक्षण को नोटिस करते हैं या यदि आप अपने बच्चे के विकास को लेकर चिंतित हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

प्री-स्कूल के बच्चों में एएसडी के लक्षण (Signs of ASD in pre-school children)

बोली जाने वाली भाषा (Spoken language)

  • देर से बोलने का विकास (उदाहरण के लिए, दो वर्ष की आयु तक 50 से कम अलग-अलग शब्द बोलना), या बिल्कुल नहीं बोलना
  • रटे रटाए शब्दों और वाक्यों को बार-बार बोलना
  • बहुत नीरस या सपाट भाषा बोलना
  • वाक्यों में बोलने में सक्षम होने के बावजूद एक शब्द का इस्तेमाल करके संवाद करना पसंद करते हैं

दूसरों को जवाब देना (Responding to others)

  • सामान्य रूप से सुनने के बावजूद, उनका नाम बुलाने पर जवाब नहीं देना
  • माता-पिता या देखभालकर्ता के प्यार को अस्वीकार करना (हालांकि वे खुद को प्यार करना शुरू कर सकते हैं)
  • किसी और के द्वारा कुछ करने के लिए कहने पर असामान्य रूप से नकारात्मक प्रतिक्रिया करना

दूसरों के साथ बातचीत (Interacting with others)

  • अन्य लोगों के व्यक्तिगत स्थान के बारे में पता नहीं होना, या अपने स्वयं के व्यक्तिगत स्थान में प्रवेश करने वाले लोगों को बर्दाश्त न कर पाना
  • समान उम्र के बच्चों सहित अन्य लोगों के साथ बातचीत करने में थोड़ी दिलचस्पी
  • अपने उम्र के अधिकांश बच्चों की तरह किसी चीज का आनंद न लेना, जैसे कि जन्मदिन की पार्टी
  • दूसरों के साथ खेलने के बजाय अकेले खेलना पसंद करना
  • संचार करते समय इशारों या चेहरे के भावों का उपयोग न करना
  • आई कॉन्टैक्ट से बचना

व्यवहार (Behaviour)

  • बार-बार एक ही हरकत करना, जैसे कि अपने हाथों को फड़फड़ाना, आगे-पीछे हिलना, या अपनी उंगलियों को फैलाना
  • अपने खिलौनों के साथ असामान्य तरीके से खेलना, जैसे कि कुछ बनाने में चीजों का इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें आकार या रंग के क्रम में रख देना।
  • रोजाना एक ही दिनचर्या जीना पसंद करना और इसमें बदलाव करने पर परेशान हो जाना
  • स्वाद की तरह भोजन की बनावट या रंग के आधार उसे पसंद या नापसंद करना
  • असामान्य संवेदी रुचियां - उदाहरण के लिए, एएसडी से पीड़ित बच्चे खिलौने, वस्तुओं या लोगों को असामान्य तरीके से सूँघ सकते हैं
  • स्कूली बच्चों में एएसडी के लक्षण (Signs and symptoms of ASD in school-age children)

बोली जाने वाली भाषा संबंधी समस्या (Spoken language)

  • बोली जाने वाली भाषा का उपयोग करने से बचना
  • बच्चे की भाषा बहुत नीरस या सपाट होना
  • नए वाक्यों को सीखने या बोलने के बजाय पहले से सीखे गए वाक्यों को बोलना
  • दो-तरफ़ा बातचीत करने के बजाय बोलते हुए व्यक्ति की तरह देखना

दूसरों को जवाब देना (Responding to others)

  • लोगों के भाषण को हूबहू सुनना लेकिन व्यंग्य, रूपकों या अलंकारों को न समझ पाना
  • किसी और के द्वारा कुछ करने के लिए कहने पर असामान्य रूप से नकारात्मक प्रतिक्रिया करना

दूसरों के साथ बातचीत (Interacting with others)

  • अन्य लोगों के व्यक्तिगत स्थान के बारे में पता नहीं होना, या अपने स्वयं के व्यक्तिगत स्थान में प्रवेश करने वाले लोगों को बर्दाश्त न कर पाना
  • मित्रता की कोशिश के बावजूद, समान उम्र के बच्चों, या कुछ करीबी दोस्तों सहित अन्य लोगों के साथ बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं होना
  • यह न समझ पाना कि लोग आम तौर पर सामाजिक रूप से कैसे बातचीत करते हैं, जैसे कि लोगों का अभिवादन करना या उन्हें विदाई देना
  • विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार बातचीन न कर पाना - उदाहरण के लिए, किसी पार्टी में बहुत औपचारिक रूप से बोलना और फिर विचित्र तरीके से बोलना
  • उन स्थितियों और गतिविधियों का आनंद नहीं लेना जो उनकी उम्र के अधिकांश बच्चे लेते हैं
  • संचार करते समय इशारों या चेहरे के भावों का उपयोग न करना
  • नजरें मिलाने से बचना

व्यवहार (Behaviour)

  • बार-बार एक ही हरकत करना, जैसे कि अपने हाथों को फड़फड़ाना, आगे-पीछे हिलना, या अपनी उंगलियों को फैलाना
  • असामान्य तरीके से खेलना, आमतौर पर लोगों के साथ खेलने की बजाय वस्तुओं के साथ खेलना पसंद करना
  • किसी विशेष विषय या गतिविधि में अधिक रुचि लेना
  • रोजाना एक ही दिनचर्या जीना पसंद करना और इसमें बदलाव करने पर परेशान हो जाना
  • स्वाद की तरह भोजन की बनावट या रंग के आधार उसे पसंद या नापसंद करना
  • असामान्य संवेदी रुचियां - उदाहरण के लिए, एएसडी से पीड़ित बच्चे खिलौने, वस्तुओं या लोगों को असामान्य तरीके से सूँघ सकते हैं

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के कारण (Causes of autism spectrum disorder)

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) का सटीक कारण फिलहाल ज्ञात नहीं है।

यह एक जटिल स्थिति है। यह आमतौर पर आनुवंशिक खराबी पर्यावरणीय या अन्य अज्ञात कारकों के कारण होती है।

जीन (Genes)

अधिकांश शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि माता-पिता से बच्चे को मिले जीन के कारण उसमें एएसडी विकसित होने की संभावना अधिक होती है।

एएसडी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी पहुंच सकता है। उदाहरण के लिए, एएसडी से पीड़ित बच्चों के छोटे भाई-बहनों को भी यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा समान जुड़वा बच्चों में भी यह समस्या आम है।

एएसडी (ASD) से जुड़े किसी भी विशिष्ट जीन की पहचान नहीं की गई है, लेकिन यह कुछ दुर्लभ आनुवांशिक सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है, जिसमें फ्रैजाइल एक्स सिंड्रोम, विलियम्स सिंड्रोम और एंजेलमैन सिंड्रोम शामिल हैं।

पर्यावरणीय कारक (Environmental triggers)

कुछ शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि आनुवंशिक गड़बड़ी के साथ पैदा हुए बच्चे को केवल तभी एएसडी हो सकता है जब वह किसी विशिष्ट पर्यावरणीय कारक के संपर्क में होता है।

समय से पहले जन्म (गर्भावस्था के 35वें सप्ताह से पहले), या गर्भ में शराब या कुछ दवाओं जैसे सोडियम वैल्प्रोएट (गर्भावस्था के दौरान मिर्गी के इलाज में दी जाने वाली दवा) के संपर्क में आने के कारण यह बीमारी हो सकती है।

हालांकि प्रदूषण या गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के कारण इस बीमारी का जोखिम बढ़ने का कोई प्रमाण नहीं है।

अन्य स्वास्थ्य समस्याएं (Other health conditions)

नीचे एएसडी से जुड़ी कुछ अन्य समस्याएं दी गई हैं:

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का निदान (Diagnosing autism spectrum disorder)

यदि आपके बच्चे में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के लक्षण नजर आते हैं, या आप उसके विकास को लेकर चिंतित हैं तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आपको एएसडी के निदान के विशेषज्ञ स्वास्थ्य देखभालकर्ता या टीम के पास भेज सकते हैं।

विशेषज्ञ टीम अधिक गहन मूल्यांकन करती है, जिसे रेफरल के तीन महीने के भीतर शुरू किया जाता है।

आपको इनमें से निम्न विशेषज्ञ के पास भेजा जा सकता है:

  • मनोवैज्ञानिक - मनोविज्ञान डिग्री के साथ मनोविज्ञान में प्रशिक्षण और योग्यता
  • मनोचिकित्सक - मनोचिकित्सा में प्रशिक्षण के साथ एक योग्य चिकित्सक
  • बाल रोग विशेषज्ञ - बच्चों की बीमारी को विशेषज्ञ
  • भाषण और भाषा थेरेपिस्ट - संचार समस्याओं को पहचानने और उपचार करने में विशेषज्ञ

कुछ स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी बहु-विषयक टीमों का उपयोग करते हैं। ये विशेषज्ञों की एक टीम है जो मूल्यांकन करने के लिए एक साथ काम करती है।

मूल्यांकन (Assessment)

एएसडी का निदान बच्चे में नजर आने वाले लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

अधिकांश बच्चों के लिए:

  • बच्चे के विकास, स्वास्थ्य और व्यवहार के बारे में डॉक्टर, नर्सरी या स्कूल स्टाफ के साथ ही भाषण और भाषा और व्यावसायिक थेरेपिस्ट से जानकारी की जरूरत पडे़गी
  • भाषण और भाषा थेरेपिस्ट और व्यावसायिक थेरेपिस्ट बच्चे का मूल्यांकन कर सकते हैं
  • बच्चे के लक्षणों जैसे कि न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस या डाउन सिंड्रोम जैसी मौजूदा समस्याओं के बारे में पता लगाने के लिए उसका शारीरिक परीक्षण करने की जरूरत पड़ती है।
  • मूल्यांकन में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की जाँच भी शामिल होती है

इसके अलावा, कुछ बच्चों के लिए:

  • आपको साक्षात्कार में शामिल होने के लिए कहा जा सकता है ताकि आपके पारिवारिक इतिहास और आपके बच्चे के विकास और व्यवहार से संबंधी जानकारी मिल सके।
  • आपके बच्चे को कई अप्वाइंटमेंट में शामिल होने के लिए कहा सकता है, ताकि उसे विशिष्ट कौशल और गतिविधियों को देखा और मूल्यांकन किया जा सके।

एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, एएसडी के निदान की पुष्टि की जा सकती है।

निदान के बाद (After diagnosis)

यदि बच्चा एएसडी से पीड़ित पाया जाता है, तो कई माता-पिता इस बीमारी के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहते है। नेशनल ऑटिस्टिक सोसाइटी इससे जुड़े कई संसाधन और सलाह प्रदान करता है।

वयस्कों में एएसडी का निदान (Diagnosing ASD in adults)

एएसडी से पीड़ित कुछ लोग इस समस्या का निदान कराए बिना ही वयस्क उम्र में पहुंच जाते हैं। लेकिन निदान अभी भी कराया जा सकता है। कुछ लोग निदान कराने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके ऊपर इस बीमारी का "लेबल" लग जाएगा और उनसे लोगों की उम्मीदें कम हो जाएंगी।

लेकिन निदान कराने के कई फायदे हैं। इससे पीड़ित लोगों और उनके परिवारों को एएसडी को समझने और यह तय करने में मदद मिलता है कि उन्हें किस तरह के समर्थन की जरूरत है। निदान कराने के बाद ऑटिज्म से जुड़ी सेवाओं का आसानी से लाभ उठाया जा सकता है।

यदि आपको लगता है कि आप एएसडी से पीड़ित हैं तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें और उन्हें साइकोथेरेपिस्ट या साइकोलॉजिस्ट के पास भेजने के लिए कहें। यदि आप वयस्क हैं तो नेशनल ऑटिस्टिक सोसाइटी की वेबसाइट पर एएसडी के निदान से जुड़ी जानकारी पढ़ें।

यदि आप पहले से ही अन्य कारणों से किसी विशेषज्ञ के पास जाते हैं, तो आप उनसे रेफरल के लिए पूछ सकते हैं।

वयस्कों में एएसडी के निदान के बारे में और एएसडी के साथ जीने वाले वयस्कों के लिए सलाह के बारे में और पढ़ें।

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का इलाज (Treating autism spectrum disorder)

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के लिए कोई 'इलाज' नहीं है, लेकिन संचार कौशल और शैक्षिक और सामाजिक विकास में सुधार करके इस समस्या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

यह जानना मुश्किल हो सकता है कि आपके बच्चे के लिए कौन सा विकल्प सबसे अच्छा काम करेगा। क्योंकि एएसडी से पीड़ित हर व्यक्ति अलग तरह से प्रभावित होता है।

कुछ प्रकार के इंटरवेंशन में घंटों के गहन कार्य कराए जा सकते हैं जो व्यावहारिक, भावनात्मक और आर्थिक दृष्टि से कई परिवारों के लिए यह संभव नहीं हो पाता है।

नेशनल ऑटिस्टिक सोसाइटी वेबसाइट पर एएसडी के लिए उपलब्ध कई अलग-अलग रणनीतियों और दृष्टिकोणों के बारे में जानकारी उपलब्ध है।

किसी भी इंटरवेंशन में आपके बच्चे के विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए। य़े हैं:

  • संचार कौशल - जैसे संचार में मदद करने के लिए चित्रों का उपयोग करना (क्योंकि भाषण और भाषा कौशल का विकास आमतौर पर काफी देर से होता है)
  • सामाजिक संपर्क कौशल - जैसे कि अन्य लोगों की भावनाओं को समझने और उनके प्रति प्रतिक्रिया करने की क्षमता
  • कल्पनाशील नाटक कौशल - जैसे ढोंग या नकल करने के लिए प्रोत्साहित करना
  • शैक्षिक कौशल - बच्चे के "पारंपरिक" कौशल जैसे पढ़ना, लिखना और गणित के सवाल हल करने आदि की क्षमता को बढ़ाना

एएसडी से पीड़ित बच्चों और युवाओं की देखभाल के विस्तृत मूल्यांकन, प्रबंधन और समन्वय में स्थानीय विशेषज्ञ समुदाय-आधारित बहु-विषयक टीमों (जिसे "लोकल ऑटिज़्म टीम" कहा जाता है) को एक साथ काम करना चाहिए। टीम में शामिल हो सकते हैं:

  • बाल रोग विशेषज्ञ
  • मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, जैसे मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक
  • लर्निंग डिसेबिलिटी स्पेशलिस्ट
  • भाषण और भाषा थेरेपिस्ट
  • व्यावसायिक थेरेपिस्ट
  • शिक्षा और सामाजिक देखभाल सेवाएं

स्थानीय ऑटिज्म टीमों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एएसडी से पीड़ित प्रत्येक बच्चे या युवा के पास उनके उपचार, देखभाल और सहायता के लिए उचित स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हों।

रिसर्च ऑटिज़्म वेबसाइट पर कई अलग-अलग प्रकार के ऑटिज़्म इंटरवेंशन, इलाज और थेरेपी का विवरण दिया गया है।

माता-पिता को शिक्षित करना और प्रशिक्षण देना (Parent education and training)

एएसडी से पीड़ित बच्चों के माता-पिता अपने बच्चे का सहयोग करने और उनके कौशल में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि आपका बच्चा एएसडी से पीड़ित है, तो आपको इस बीमारी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करनी चाहिए। नेशनल ऑटिस्टिक सोसाइटी की वेबसाइट पर माता-पिता, रिश्तेदारों और देखभाल करने वालों के लिए उपयोगी जानकारी और सलाह उपलब्ध है।

रिसर्च ऑटिज्म वेबसाइट भी जानकारी का एक अच्छा स्रोत है और इसमें अलग-अलग मुद्दों के बारे में एक खंड है जो ऑटिज्म से जुड़ा है। साथ ही इसमें परिवार पर ऑटिज्म के प्रभाव से भी जुड़ी जानकारी है।

माता-पिता के लिए संचार सलाह (Communication advice for parents)

एएसडी से पीड़ित बच्चों को आमतौर पर संचार में काफी कठिनाई होती है। संवाद करने में बच्चे की मदद करने से उसकी चिंता कम हो सकती है और व्यवहार में सुधार हो सकता है।

आपके बच्चे के साथ संवाद और बातचीत करते समय निम्नलिखित टिप्स उपयोगी हो सकती हैं:

  • अपने बच्चे के नाम का उपयोग करें, क्योंकि उन्हें पता होता है कि उन्हें ही बुलाया जा रहा है।
  • बैकग्राउंड के शोर को कम से कम रखें
  • भाषा को सरल रखें
  • शब्दों के बीच ठहराव के साथ, धीरे और स्पष्ट रूप से बोलें
  • आप जो कहते हैं वह सरल भाव और भाषा में बोलें
  • आपने जो कहा, उसे समझने के लिए अपने बच्चे को थोड़ा समय दे

मनोसामाजिक इलाज (Psychosocial treatments)

यदि आपके बच्चे के व्यवहार के कारण परेशानी आ रही है, तो यह उसके शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं या पर्यावरणीय कारकों के कारण हो सकता है।

दवा और मनोवैज्ञानिक इलाज से शारीरिक या मानसिक समस्याओं को ठीक किया जा सकता है।

दवा (Medication)

कुछ मामलों में, एएसडी से जुड़े लक्षणों या समस्याओं के इलाज के लिए दवा दी जा सकती है। उदाहरण के लिए:

इन दवाओं के कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए बीमारी का इलाज करने वाले डॉक्टर की सलाह के बाद ही इनका सेवन करना चाहिए। यदि आपके बच्चे को ये दवाएं दी जाती हैं तो उसकी नियमित जांच भी की जाएगी कि उसे यह दवा काम कर रही है या नहीं।

इलाज की सलाह नहीं दी जाती (Treatments not recommended)

एएसडी के लिए कई वैकल्पिक इलाज भी मौजूद हैं। हालांकि इनसे बचना चाहिए, क्योंकि इसके प्रभाव का कोई सबूत मौजूद नहीं हैं। इनमें से कुछ खतरनाक भी हो सकते हैं।

एएसडी के लिए निम्न उपचारों की सलाह नहीं दी जाती है:

  • विशेष आहार - जैसे ग्लूटेन-फ्री या केसिन-मुक्त आहार
  • न्यूरोफीडबैक - इसमें मस्तिष्क की गतिविधि पर नज़र रखी जाती है (इलेक्ट्रोड को सिर पर रखकर) इस दौरान पीड़ित व्यक्ति अपने मस्तिष्क की गतिविधि को स्क्रीन पर देख सकता है। उसे इसे गतिविधि को बदलने के बारे में भी सीखाया जाता है।
  • ऑडिटरी इंटीग्रेशन ट्रेनिंग - एक ऐसी थेरेपी जिसमें अलग-अलग टोन, पिच और स्वर का संगीत सुनाया जाता है।
  • चेलेशन थेरेपी - इसमें शरीर से धातु (विशेष रूप से, पारा) को हटाने के लिए दवा या अन्य एजेंटों का उपयोग किया जाता है
  • हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी - इसमें एक दबाव कक्ष में ऑक्सीजन देकर इलाज किया जाता है।
  • सुगम संचार - इसमें डॉक्टर या अन्य व्यक्ति कंप्यूटर कीबोर्ड या माउस जैसे उपकरण का उपयोग करते हुए मरीज के हाथ या बांह को सपोर्ट देता है

ऑटिज्म के साथ जीने वाले वयस्क (Adults living with autism)

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) से पीड़ित कुछ लोग अपनी स्थिति को पहचाने बिना बड़े हो जाते हैं।

हालांकि, समय पर निदान कराने से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने वाली सेवाओं तक पहुंचना आसान हो सकता है।

एएसडी का निदान कभी भी कराया जा सकता है, हालांकि यह हमेशा आसान नहीं होता है क्योंकि कुछ स्थानीय एनएचएस अधिकारी वयस्कों में एएसडी के निदान के लिए एनएचएस फंडिंग प्रदान नहीं करते हैं।

वयस्कों में एएसडी के निदान के बारे में और पढ़ें या वयस्कों के लिए ऑटिज्म के निदान के बारे में अधिक जानकारी के लिए नेशनल ऑटिस्टिक सोसाइटी की वेबसाइट देखें।

इलाज और सहायता (Treatment and support)

उचित निदान के बाद एएसडी से पीड़ित वयस्क अपने क्षेत्र में उपलब्ध स्थानीय ऑटिज्म सहायता सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। आप ऑटिज्म सेवा निर्देशिका का उपयोग करके वयस्कों के लिए उपलब्ध सेवाओं को ढूंढ सकते हैं।

एएसडी का निदान करने वाले डॉक्टर आपको उपलब्ध देखभाल और सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी और सलाह प्रदान कर सकते हैं।

देखभाल और सहयोग की जरूरतों का आकलन करने के बारे में पढ़ें।

आपके स्थानीय क्षेत्र में निम्न कार्यक्रम उपलब्ध हो सकते हैं :

  • सामाजिक शिक्षण कार्यक्रम - सामाजिक समस्याओं का सामना करने में आपकी सहायता करने के लिए
  • अवकाश गतिविधि कार्यक्रम - इनमें अवकाश गतिविधियों में भाग लेना शामिल है, जैसे कि खेल, व्यायाम, या लोगों के समूह के साथ सिनेमा या थिएटर में जाना।
  • डेली लिविंग प्रोग्राम के लिए कौशल - यदि आपको दैनिक गतिविधियों को पूरा करने में समस्या होती है, जैसे कि खाने और बर्तन धोने में

एएसडी से पीड़ित वयस्कों को बच्चों को दिए जाने वाले कुछ उपचारों से लाभ हो सकता है, जैसे मनोवैज्ञानिक थेरेपी और दवा।

एएसडी से पीड़ित लोगों के लिए उपलब्ध सपोर्ट और मदद के बारे में और पढ़ें।

आवास (Accommodation)

एएसडी से पीड़ित वयस्क सभी प्रकार के आवास में रह सकते हैं। कुछ लोग आवासीय देखभाल घर में रखे जा सकते हैं, जबकि अन्य अपने मनचाहे स्थान पर रहना पसंद करते और घर से सपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। एएसडी से पीड़ित कुछ लोग पूरी तरह से स्वतंत्र रहते हैं।

रोज़गार (Employment)

एएसडी से पीड़ित लोगों को नौकरी ढूंढने में परेशानी हो सकती है। उदाहरण के लिए, उन्हें काम का माहौल बहुत अधिक शोर-शराबापूर्ण लग सकता है, या काम पर जाते समय भीड़ देखकर तनाव हो सकता है। दिनचर्या में अचानक बदलाव भी उन्हें परेशान कर सकता है।

हालांकि, सही नौकरी और सही सहयोग से एएसडी से पीड़ित लोग भी काफी बेहतर कर सकते हैं। वे आमतौर पर विश्वसनीय होते हैं और परखने की अच्छी क्षमता होती है। काम के माहौल में होने से व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास में काफी मदद मिल सकती है।

यदि आपको नौकरी पाने या नौकरी में बने रहने में समस्या हो रही है, तो आप अपने स्थानीय क्षेत्र में रोजगार कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। ये कार्यक्रम आपको सीवी तैयार करने और नौकरी के लिए आवेदन करने में मदद कर सकते हैं, और आपको साक्षात्कार के लिए तैयार कर सकते हैं। वे आपको इस बारे में भी सलाह दे सकते हैं कि कौन सी नौकरी आपके लिए बेहतर है और उसके लिए प्रशिक्षण भी दे सकते हैं।

इसके अलावा ये संस्थाएं कंपनी के बॉस को एएसडी से पीड़ित लोगों के अनुकूल वर्कप्लेस पर जरूरी बदलाव से जुड़ी सलाह दे सकती हैं। साथ ही साथ काम शुरू करने से पहले और बाद में आपको और नियोक्ता का सहयोग किया है।

निर्णय लेना (Making decision)

एएसडी से पीड़ित व्यक्ति कुछ निर्णय ले सकता है (उदाहरण के लिए, यह तय करना कि स्थानीय दुकान पर क्या सामान खरीदना है), लेकिन अन्य निर्णय लेने में काफी कठिनाई होती है (उदाहरण के लिए, जटिल आर्थिक मुद्दों के बारे में निर्णय लेना)।

इसमें यह आंका जाता है कि क्षमता निर्धारण के बाद कोई विशेष निर्णय लेने की क्षमता है या नहीं। पीड़ित व्यक्ति के लिए कोई निर्णय लिया जा सकता है लेकिन यह उसके सर्वोत्तम हित में होना चाहिए।

ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के संकेत (Characteristics of autistic spectrum disorder)

ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं।

वे अपने जीवन में अलग-अलग समय में एक ही व्यक्ति के लिए अलग-अलग भी हो सकते हैं। यही कारण है कि ऑटिज्म को स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहा जाता है।

एएसडी के लक्षणों को तीन मुख्य समूहों में विभाजित किया जा सकता है। वो हैं:

  • सामाजिक संपर्क
  • सामाजिक संचार
  • सामाजिक कल्पना

एएसडी का पहला लक्षण आमतौर पर दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है। हालाँकि, अन्य बच्चों में इसका पता तब तक नहीं चल पाता है जब तक कि वे बड़े नहीं हो जाते हैं।

सामाजिक संपर्क (Social interaction)

एएसडी से पीड़ित व्यक्ति को अन्य लोगों से जोड़ना काफी मुश्किल हो सकता है। वे आमतौर पर निम्न तरीके से रहते हैं:

  • लोगों से दूर या अलग रहना
  • अन्य लोगों में बहुत कम या कोई दिलचस्पी नहीं होना
  • दोस्त बनाने में कठिनाई
  • प्रेम और आकर्षण से दूर रहना, या इस तरह के चुंबन और गले लगने जैसे शारीरिक संपर्क से बचना
  • अन्य लोगों के साथ आई कॉन्टैक्ट बनाने में परेशानी
  • सामाजिक संपर्क चाहना, लेकिन पहल करने में कठिनाई होना
  • अन्य लोगों की भावनाओं को न समझना और अपनी भावनाओं से निपटने में कठिनाई
  • अकेले समय बिताना पसंद करते हैं

सामाजिक संचार (Social communication)

एएसडी से पीड़ित व्यक्ति को मौखिक और गैर-मौखिक कौशल का उपयोग करने में कठिनाई होती है। कुछ लोग जीवन भर गैर-मौखिक संचार कर सकते हैं।

एएसडी से पीड़ित कुछ लोग असामान्य तरीके से बोलते हैं और अजीब से शब्दों एवं वाक्यों का प्रयोग करते हैं।

वे अपने शब्दों में बात नहीं करते हैं बल्कि आसान सी बात को समझाने के लिए अधिक शब्दों का उपयोग करते हैं। एएसडी से पीड़ित व्यक्ति को निम्न समस्याएं हो सकती है:

  • खुद को अच्छी तरह से व्यक्त करना
  • हावभाव, चेहरे के भाव या स्वर को समझने में
  • संवाद करने के लिए हावभाव का इस्तेमाल करने में
  • दिशा निर्देशों को समझने में

एएसडी से पीड़ित कुछ लोग इकोलिया से ग्रसित हो सकते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पीड़ित व्यक्ति ऐसे शब्दों को दोहराते हैं जिनका कोई अर्थ नहीं होता है या उन्हें जो कहा गया है उसे बार-बार दोहराते हैं।

सामाजिक कल्पना (Social imagination)

एएसडी से पीड़ित बच्चे:

  • कल्पनाशक्ति कम होती है
  • बार-बार एक ही गेम खेलते या अपने से छोटे बच्चों के लिए बनाए गए गेम्स खेलते हैं
  • अगर उनकी दिनचर्या किसी भी तरह से बाधित होती है तो परेशान हो जाते हैं
  • रिपिटेटिव व्यवहार दिखाते हैं, जैसे कि हाथ फड़फड़ाना या गोल गोल घुमाना

इसके अलावा, इस बीमारी से पीड़ित बच्चों और वयस्कों में विशिष्ट वस्तुओं, सूचियों, समय सारिणी या दिनचर्या के प्रति पागलपन नजर आता है।

संवेदना संबंधी समस्याएं (Sensory difficulties)

एएसडी से पीड़ित अधिकांश लोगों को संवेदना से जुड़ी कठिनाइयाँ होती हैं। इसका मतलब यह है कि वे कुछ खास चीजों के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं, जैसे कि स्पर्श, कुछ बनावट, प्रकाश या ध्वनि।

संवेदना से जुड़ी कठिनाइयों से शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। एएसडी से पीड़ित व्यक्ति मूर्ख नजर आ सकता है या असामान्य तरीके से चल सकता है।

एस्पर्जर सिंड्रोम (Asperger syndrome)

एस्पर्जर सिंड्रोम एएसडी का दूसरा रूप है। एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में आमतौर पर सीखने की क्षमता की कमी नहीं होती है। वे औसत या औसत से अधिक बुद्धि वाले होते हैं।

उन्हें आमतौर पर भाषा के विकास के साथ कम समस्याएं होंगी, लेकिन फिर भी सामाजिक संचार में परेशानी महसूस हो सकती है।

एस्पर्जर सिंड्रोम का अक्सर बाद में बच्चों में निदान किया जाता है। लेकिन कभी-कभी वयस्क होने तक उनकी समस्याओं को पहचानने में कठिनाई होती है। इसके कारण पीड़ित व्यक्ति और उसके परिवार के लिए उचित मदद प्राप्त करने में देरी हो सकती है।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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