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रक्त विषाक्तता (Blood poisoning)

Medical Reviewer:Healthily's medical team
Author:Dr Lauretta Ihonor
मेडिकल समीक्षा के साथ

स्वास्थ्य संबंधी सभी लेखों की चिकित्सीय सुरक्षा जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है। अधिक जानकारी के लिए हमारी सम्पादकीय नीति देखें।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है। यह Dr Lauretta Ihonor द्वारा लिखा गया है और Healthily's medical team ने इसकी मेडिकल समीक्षा की है।

रक्त विषाक्तता क्या हैं? (What is blood poisoning?)

सेप्सिस (Sepsis) एक जानलेवा बीमारी है जो शरीर में संक्रमण होने के कारण होती है।

शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का कार्यस्तर कम हो जाता है, रिएक्शन होने पर सूजन हो जाती है और रक्त के थक्के जम जाते हैं।

इसके लक्षण आमतौर पर शीघ्रता से विकसित होते हैं और इसमें शामिल हैं:

  • बुखार या 38C(100.4F) से ज़्यादा तापमान
  • ठंड लगना
  • धड़कन का तेज होना
  • तेजी से साँस लेना

गंभीर मामलों में आप इन बातों को महसूस कर सकते हैं:

  • जब आप खड़े होते हैं तो आपको चक्कर आता है
  • भ्रम और आत्मविस्मृति
  • उल्टी तथा मितली

सेप्सिस (sepsis) के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

हालांकि किसी भी व्यक्ति में मामूली संक्रमण सेप्सिस का रूप ले सकता है, कुछ लोगों की इसकी चपेट में आने की अधिक संभावना होती है, जैसे:

  • जो बीमार हों और उनका इलाज चल रहो हो, जिससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हो गई हो
  • जो पहले से ही किसी गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में हों
  • जो बहुत छोटे हों या बहुत बूढ़े हों
  • जिनकी हाल ही में सर्जरी हुई हो या जिनको किसी दुर्घटना में घाव या चोट लगी हो

सेप्सिस (sepsis) के कारणों के बारें में और पढ़ें।

सेप्सिस के चरण (Stages of sepsis)

सेप्सिस तीन चरणों में विकसित होते हैं, ये हैं:

  • अन्काम्प्लिकेटेड सेप्सिस (uncomplicated sepsis), संक्रमण के कारण होता है, जैसे फ्लू या दंत में फोड़े(dental abscesses)। यह बहुत सामान्य है और इसमें आमतौर पर अस्पताल में उपचार की आवश्यकता नहीं होती है।
  • गंभीर सेप्सिस (sepsis) तब होता है जब संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण अंगों जैसे हृदय, गुर्दे, फेफड़े या लिवर के कार्य में रुकावट बन जाती है।
  • सेप्सिस (sepsis) कि वजह से जब आपका रक्तचाप कम और जानलेवा स्तर पर होता है, और आपके महत्वपूर्ण अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता तो सेप्टिक शॉक (septic shock) का खतरा होता है।

समय रहते इलाज नहीं मिलने पर अन्काम्प्लिकेटेड सेप्सिस (uncomplicated sepsis) सेप्टिक शॉक (septic shock) में बदल सकता है, जिससे शरीर के कई अंग बंद पड़ सकते हैं और मृत्यु तक हो सकती है।

यदि आपको लगता है कि सेप्सिस है, तो इसका जल्द से जल्द उपचार और निदान करना ज़रूरी हो जाता है।

आपको या आपकी जानकारी में किसी अन्य को गंभीर सेप्सिस या सेप्टिक शॉक (septic shock) हुआ है, तो एम्बुलेंस सेवा के लिए फोन करें।

सेप्सिस (sepsis) की पहचान कैसे की जाती है, इस बारे में और पढ़ें।

सेप्सिस का उपचार (Treating Sepsis)

यदि सेप्सिस का पता जल्दी लग जाता है और इसके द्वारा महावात्पूर्ण अंगो को क्षति नहीं पहुँची है, तो घर पर ही एंटीबायोटिक दवाओं से संक्रमण का उपचार संभव हो सकता है।जिन लोगों को जटिल सेप्सिस नहीं होता है वे पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।

गंभीर सेप्सिस और सेप्टिक शॉक को घातक स्थिति माना जाता है और आमतौर पर गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती की आवश्यकता होती है, जहाँ संक्रमण का उपचार होने पर शरीर के अंग को समर्थित दिया जाता है।

महत्वपूर्ण अंगो के साथ समस्या के कारण, गंभीर सेप्सिस से ग्रसित लोगो के बहुत बीमार होने की सम्भावावानाएँ बढ़ जाती हैं और इसका परिणाम यह होता है की लगभग 30-50% लोगों की मृत्यु हो जाती है।

सेप्सिस का उपचार कैसे किया जाता है इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।

यह कितना सामान्य है?

यह अनुमान लगाया जाता है कि प्रत्येक वर्ष UK में गंभीर सेप्सिस के 30,000 से अधिक मामले सामने आते हैं और यह संख्या बढ़ती जा रही है।

रक्त विषाक्तता के लक्षण (Blood poisoning symptoms)

सेप्सिस के लक्षण एक स्थानीय संक्रमण (संक्रमण शरीर के एक हिस्से तक सीमित रहता है) या चोट लगने के बाद विकसित होते हैं।

कुछ मामलों में, सेप्सिस तब होता है जब आप पहले से ही अस्पताल में भर्ती हों, उदाहरण स्वरूप यदि हाल ही में आपकी सर्जरी हुई है और आपके शरीर में ड्रिप या कैथेटर जुड़ा हुआ हो

स्पेसिस के कारणों के बारें में और जानें।

स्पेसिस के लक्षण आमतौरपर जल्दी बढ़ते हैं और इसमें शामिल हैं:

  • बुखार या 38C(100.4F) से उच्च तापमान
  • ठंड लगना
  • धड़कन तेज होना
  • तेजी से साँस लेना
  • भ्रम और आत्मविस्मृति

गंभीर सेप्सिस या सेप्टिक शॉक के लक्षणों में शामिल हैं:

  • रक्तचाप कम होना है जिसके कारण आपको खड़े होने पर चक्कर आने लगता है
  • आपके मानसिक स्थति मे बदलाव और भ्रम और आत्मविस्मृति का अनुभव
  • दस्त
  • मितली और उल्टी
  • ठंडी, चिपचिपी या पीली त्वचा होने

संक्रमण के सेप्सिस में बदलने के अधिकांश मामले फेफड़ों,मूत्र पथ ,पेट और पेल्विस जैसे अंगों में होते हैं।

गंभीर सेप्सिस और सेप्टिक शॉक का शीघ्र उपचार करना आवश्यक हो है। यदि आपको संदेह है कि आपको या हुआ आप जिसकी देखभाल कर रहो हों उसे गंभीर सेप्सिस या सेप्टिक शॉक है,तो शीघ्र ही आपातकालीन उपचार लें और एम्बुलेंस सेवा के लिए फोन करें।

रक्त विषाक्तता के क्या कारण हैं?

शरीर के किसी भी हिस्से में संक्रमण से सेप्सिस हो सकता है। फेफड़ों,मूत्र पथ ,पेट और पेल्विस जैसे अंगों में संक्रमण के सेप्सिस में बदलने काधिकतर मामले होते हैं।

संक्रमण के स्त्रोत

  • सेप्सिस से जुड़े हुए संक्रमण के प्रकारों में शामिल हैं:
  • फेफड़े में संक्रमण (निमोनिया)
  • फ्लू (इन्फ्लूएंजा)
  • पथरी
  • पाचन तंत्र (पेरिटोनिटिस) के अस्तर का संक्रमण
  • मूत्राशय, मूत्रमार्ग या गुर्दे (मूत्र पथ के संक्रमण) का संक्रमण
  • त्वचा में संक्रमण, जैसे सेल्युलाइटिस, अक्सर तब होता है जब एक अंतःशिरा ड्रिप या कैथेटर को त्वचा के माध्यम से शरीर में डाला जाता है।
  • पोस्ट-सर्जिकल (सर्जरी के बाद) संक्रमण
  • तंत्रिका तंत्र के संक्रमण, जैसे मेनिन्जाइटिस (meningitis) या एन्सेफलाइटिस (encephalitis)

लगभग पांच में से एक मामलों में, सेप्सिस के संक्रमण और स्रोत का पता नहीं लगाया जा सकता है।

सेप्सिस के लक्षण क्या हैं?

आमतौर पर, आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण को एक ही स्थान तक सीमित रखती हैं। ( इसे ही स्थानीय संक्रमण के रूप में जाना जाता हैं)। आपका शरीर सफ़ेद रक्त कोशिकाओँ का निर्माण करता हैं, यह आपके शरीर में संक्रमण के हिस्से तक पहुँच उन कीटाणुओं को नष्ट करता है जो आपके शरीर में संक्रमण के कारण हैं।आपके शरीर में जैविक प्रक्रियाओं की एक शृंखला होती हैं, जैसे ऊतक (tissus) का सूजन, यह संक्रमण से लड़ने में सहायता करती हैं, और इसे आपके शरीर में फैलने से रोकती हैं, इस प्रक्रिया को इन्फ़्लमेशन के रूप में जाना जाता हैं।

यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हैं और संक्रमण विशेष रूप से गंभीर हैं,तो यह रक्त के द्वारा शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता हैं यह प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता हैं और सूजन से आपका पूरा शरीर प्रभावित हो जाता हैं।

यह प्रारंभिक संक्रमण की तुलना में अधिक समस्याएं पैदा कर सकता है, क्योंकि व्यापक सूजन ऊतक को नुकसान पहुँचाती है और रक्त के प्रवाह को रोकती है, जिससे रक्तचाप में खतरनाक गिरावट आती है, और आपके अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है।

किसे ख़तरा है

मामूली संक्रमण का सेप्सिस में बदलने का खतरा सभी को होता है जैसे फ्लू। हालाँकि,कुछ लोग अधिक कमजोर होते हैं, जिनमे ये लोग शामिल हैं:

  • एचआईवी या ल्यूकेमिया जैसी बीमारी से ग्रस्त लोग, जो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती हैं
  • उन लोगो में, जो कीमोथेरेपी उपचार प्राप्त कर रहे हैं जिसके कारण उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती हैं
  • बहुत छोटें या बहुत बूढ़े लोगों में
  • जिन लोगों की हाल ही मे सर्जरी हुई हो और दुर्घटना के परिणामस्वरूप घाव या चोट लगी हो
  • जो लोग मैकेनिकल वेंटिलेशन पर हैं
  • जिनकी त्वचा से ड्रिप या कैथेटर्स जुड़े हों
  • अनुवांशिक रूप से जिनमे संक्रमण की संभावना हो

वो लोग जो किसी अन्य गंभीर बीमारी से अस्पताल में भर्ती हैं, उनके लिए स्पेसिस एक गंभीर समस्या हैं। डॉक्टर तथा नर्सो के सर्वोतम उपचार करने पर भी, अस्पताल में दूसरे संक्रमण होने का खतरा होता हैं।

अस्पताल द्वारा प्राप्त जीवाणु संक्रमण, जैसे MRSA, अधिक गंभीर होते हैं क्योंकि संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं।

रक्त विषाक्तता का परीक्षण

अक्सर रक्त परिक्षण द्वारा सेप्सिस की जाँच की जाती है। अन्य परीक्षण संक्रमण के प्रकार को निर्धारित करने में मदद कर सकते हैं, जैसे यह कहाँ स्थित हैं और शरीर की कौन सी कार्य प्रणाली प्रभावित हुए है।

सेप्सिस की जाँच करने के लिए, कई परीक्षण किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

●रक्त परीक्षण

● मूत्र परीक्षण

● मल का परीक्षण

● रक्तचाप परीक्षण

● घाव कल्चर परीक्षण (जहां परीक्षण के लिए प्रभावित क्षेत्र से ऊतक, त्वचा या तरल पदार्थ का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है)

● श्वसन स्राव परीक्षण (जिसमें आपके लार, कफ या बलगम का एक नमूना शामिल है)

● एक्स-रे या कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन जैसे इमेजिंग अध्ययन

● किडनी, लिवर और हार्ट फंक्शन टेस्ट

● लम्बर पंक्चर टेस्ट (स्पाइनल टैप) जहां सेरेब्रोस्पाइनल द्रव का एक नमूना परीक्षण के लिए आपकी पीठ से निकाला जाता है

सेप्सिस होने के सम्भावित मामलों में, जल्द से जल्द परीक्षण करना महत्वपूर्ण है। ताकि उचित उपचार दिया जा सके। यह सेप्सिस की प्रगति और शरीर में होनेवाली दीर्घकालिक क्षति को रोकने में मदद कर सकता है।

रक्तविषाक्तता का उपचार

गंभीर सेप्सिस के मामलों में उपचार हर रोगी के लिए अलग होता है, जो कि प्रारंभिक संक्रमण, कौन सा अंग प्रभावित हुआ है और यह कितना गंभीर रूप ले चुका है इस बात पर निर्भर करता है।

यदि आपकी सेप्सिस का पता जल्दी चल जाता है और इससे अंग या ऊतक का कार्य (अनकॉम्प्लिकेटेड सेप्सिस) प्रभावित नहीं हुआ है, तो इसका उपचार घर पर किया जा सकता है। आपको एंटीबायोटिक गोलियां दी जाएँगी।

यदि सेप्सिस गंभीर है, या आपको सेप्टिक शॉक लगता है, तो आपको अस्पताल में आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होगी, आमतौर पर गहन चिकित्सा इकाई(आईसीयू) में। रोगी को आईसीयू में रखकर साँस लेने या रक्‍तसंचार से जुड़ी समस्या जैसे किसी भी तरह के प्रभावित शरीरिक क्रिया में सहायता की जाती है। जब चिकित्सा कर्मचारी संक्रमण के उपचार पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

एंटीबायोटिक

गंभीर सेप्सिस का उपचार इन्ट्रावेनस एंटीबायोटिक दवाओं (सीधे एक नस में दिया जाता है) से किया जाता है। आमतौर पर हमारे पास इतना समय नहीं होता कि हम किसी विशिष्ट प्रकार के संक्रमण की पहचान होने तक प्रतीक्षा कर सकें, इसलिए 'ब्रॉड-स्पेक्ट्रम' एंटीबायोटिक शुरू में दी जाती है। ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक ज्ञात संक्रामक जीवाणु से लड़ने के लिए बनाए गए हैं, और इनकी मदद से कुछ फंगल संक्रमणों को भी ठीक किया जा सकता है।

किसी विशिष्ट जीवाणु की पहचान हो जाने के बाद, अधिक'प्रभावशाली' एंटीबायोटिक का उपयोग किया जा सकता है। इससे यह लाभ होता है कि यह एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधी संक्रामक जीवाणु बनने की संभावना को कम करते हैं।

इंट्रावेनस एंटीबायोटिक दवाओं को आमतौर पर 7 से 10 दिनों के लिए देना होता है।

यदि सेप्सिस किसी वायरस के कारण हुआ है, तो एंटीबायोटिक काम नहीं करेंगे। फिर भी, एंटीबायोटिक दवाएँ दी जा सकती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि इस बिमारी के लिए सटीक निदान नहीं मिलने तक एंटीबायोटिक उपचार में देरी करना बहुत खतरनाक होता है। जब तक कि आपका शरीर वायरस के प्रभाव के लिए प्रतिरोधक क्षमता को विकसित नहीं कर लेता आपको तब तक प्रतीक्षा करनी होती है। कुछ मामलों में, एंटीवायरल दवा दी जा सकती है।

स्रोत नियंत्रण

स्रोत नियंत्रण का अर्थ है संक्रमण के स्रोत का इलाज करना, जैसे फोड़ा या संक्रमित घाव। हो सकता है इसके लिए संक्रमित ऊतक यानि टिशू से मवाद निकालना पड़े।अधिक गंभीर स्थिति में, संक्रमित ऊतक को हटाने और किसी भी घाव या फ़ोड़े को ठीक करने के लिए सर्जरी करवानी पड़ सकती है।

वासोप्रेसर्स (Vasopressors)

वासोप्रेसर्स कम रक्तचाप यानि की लो ब्लड प्रेशर के उपचार के लिए उपयोग की जानेवाली दवाएँ हैं. सेप्सिस के उपचार में उपयोग किए जाने वाले वासोप्रेसर्स दो प्रकार के होते हैं, डोबुटामाइन और नॉरएड्रेनालाईन (dobutamine and noradrenaline)।

वे मांसपेशियों को उत्तेजित करते हैं जिससे शरीर के हर अंग में रक्त पहुँचाना और रक्तवाहिकाओं यानि बल्ड वेसेल्स को संकुचित करना शामिल है, रक्तचाप को सही स्तर तक लाने में मदद कर सकते हैं।

आमतौर पर वासोप्रेसर्स इंट्रावेनस के रूप में दिए जाते हैं। रक्तचाप को बढ़ाने में मदद करने के लिए अतिरिक्त तरल पदार्थ भी दिया जा सकता है।

अन्य उपचार

आपकी स्थिति और आपके शरीर पर सेप्सिस के प्रभाव के आधार पर, आपको निम्न उपचार की ज़रूरत भी हो सकती है:

  • दवाइयाँ, जैसे स्टेरॉयड या इंसुलिन
  • खून चढ़ाना
  • आपको सांस लेने में मदद करने के लिए मेकैनिकल वेंटिलेशन
  • किडनी के फ़ंक्शन को ठीक रखने के लिए डायलिसिस (आपके रक्त को फ़िल्टर करने की एक मशीन)
NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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