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जलना और झुलसना (Burns and scalds)

मेडिकली रिव्यूड

परिचय

गर्मी के कारण त्वचा के जलने और झुलसने से नुकसान होता है। दोनों का एक ही तरह से व्यवहार किया जाता है।

त्‍वचा का जलना शुष्‍क ताप जैसे लोहे के संपर्क में आने पर या आग के बेहद करीब जाने पर होता है। वहीं त्‍वचा का झुलसना, उसके नम या तरल चीज जैसे गर्म पानी या भाप के संपर्क में आने होता है।

जलना काफी तकलीफदेह होता है और इससे छाला पड़ सकता है, त्वचा जलकर राख हो सकती है, काली या लाल हो सकती है।

जलने के विभिन्‍न प्रकार समेत जलने और झुलसने के लक्षणों के बारे में और जानकारी पढ़ें।

जलने और झुलसने का इलाज

जलने पर नीचे बताई गई प्राथमिक चिकित्‍सा की सलाह अपनाई जानी चाहिए :

प्रभावित व्‍यक्‍ति को गर्म जगह से तुरंत दूर ले जाएं जिससे उसका जलना बंद हो। 10 से 30 मिनट तक ठंडा या गुनगुना पानी डालकर जले हुए स्‍थान को ठंडा करें। बर्फ या बर्फ के पानी का या किसी क्रीम या घी अथवा मक्‍खन जैसे चिकनी चीजों का इस्‍तेमाल बिलकुल नहीं करना चाहिए।

जली हुई त्‍वचा के आसपास कोई कपड़ा या गहना हो तो उसे तुरंत हटा दें, मगर त्‍वचा के साथ चिपक गई किसी चीज को बिलकुल न हटाएं। कंबल जैसी चीज का इस्‍तेमाल कर प्रभावित व्‍यक्‍ति के शरीर की गर्माहट सुनिश्‍चित करें – मगर ध्‍यान रहे कि ऐसा करते समय जले हुए स्‍थान पर रगड़ न लगे।

जले हुए स्‍थान को क्‍लिंग फिल्‍म (cling film) से ढक कर रखना।

जलने से होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए पैरासिटामोल या ब्रूफेन ली जा सकती है।

जलने और झुलसने के इलाज के बारे में जानने के लिए और पढ़ें।

रेड क्रॉस सोसाइटी की वेबसाइट पर जलने पर किए जाने वाले प्राथमिक उपचार पर एक वीडियो उपलब्‍ध है।

कब जाएं डॉक्‍टर के पास

यह निर्भर करता है कि जलन कितनी गंभीर है, सामान्‍य जलने का इलाज घर पर भी किया जा सकता है। मामूली जलने पर, जले हुए स्‍थान को साफ रखना चाहिए और अगर छाले हो गए हों तो जबरदस्‍ती न फोड़ें, बल्‍कि अपने आप फूटने दें।

अधिक गंभीर जलने पर प्रशिक्षित चिकित्‍सकीय देखभाल जरूरी होती है। आपको किसी अस्‍पताल के दुर्घटना एवं आकस्‍मिक चिकित्‍सा विभाग में जाना चाहिए :

सभी रसायनिक और बिजली से जलने पर

ज्यादा और गहरा जलने पर : जलने का जगह हथेली के आकार से बड़ी होने पर

सभी आकार के पूर्ण मोटाई के जले – इस तरह जलने पर त्‍वचा सफेद या चमड़ी निकलती है।

चेहरे, हाथ, बाजुओं, पंजे, पैर और जननांगों पर आंशिक मोटाई में जलना – इस तरह जलने पर त्‍वचा पर छाले पड़ जाते हैं।

धुआं या गैस सांस के रास्‍ते अंदर जाने पर भी चिकित्‍सकीय परामर्श जरूरी होता है। कुछ लक्षण देर से नजर आ सकते हैं, जैसे खांसी, गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ या चेहरे पर जलना।

जलने का असर जिन लोगों पर सबसे ज्‍यादा होता है उनमें पांच साल से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं, इन्‍हें जलने या झुलसने पर तुरंत चिकित्‍सकी परामर्श की जरूरत होती है।

ड्रेसिंग से पहले जले हुए स्‍थान की सफाई उसके आकार व गहराई का आकलन किया जाता है। इसके साथ ही प्रभावित व्‍यक्‍ति को ड्रेसिंग बदलने से संबंधित निर्देश भी दिए जाते हैं।

जलने और झुलसने से उबरने के बारे में और जानकारी प्राप्‍त करें।

लक्षण

जलने या झुलसने के लक्षण उसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। कुछ मामूली जलने की घटनाएं भी काफी तकलीफदेह होती हैं, जबकि जलने के बड़े मामलों में जरा भी दर्द नहीं होता है।

जलने के लक्षणों में शामिल हो सकता है :

  • लाल त्‍वचा
  • त्‍वचा की परत उतरना
  • छाले
  • सूजन
  • सफेद या जलकर राख त्‍वचा

दर्द की गहराई का एहसास इस बात से संबंधित नहीं होता है कि जलन कितनी गंभीर है।

आपकी त्वचा

शरीर का सबसे बड़ा अंग होती है त्‍वचा। इसके ढेरों काम हैं, जिसमें आसपास के वातावरण और आपके बीच अवरोध का काम करना और उसके मुताबिक तापमान नियमित करना शामिल है। आपकी त्‍वचा तीन परत में बनी है :

एपिडर्मिस (epidermis) (त्‍वचा की बाहरी परत) 0.5 से 1.5 मिलीमीटर तक मोटी होती है। इसमें कोशिकाओं की पांच परत होती है, जो ऊपर की तरफ त्वचा की सतह पर काम करते हैं जहां प्रत्‍येक दो हफ्तों में मृत कोशिकाएं जमा होती हैं।

डर्मिस (dermis) (यह रेशेदार ऊतकों की अंतर्निहित परत होती है) 0.3 से 3 मिलीमीटर तक मोटी होती है और इसमें तीन तरह के मिश्रित ऊतक होते हैं। डर्मिस में रोम कूप (hair follicles) और पसीने की ग्रंथियों (sweat glands) के साथ ही रक्त वाहिकाएं (blood vessels) व तंत्रिकाएं (nerves) होती हैं।

सबक्‍यूटेनियस फैट (subcutaneous fat) या सबक्‍यूटिस/subcutis (यह वसा और ऊतकों की अंतिम परत होती है) यह अलग-अलग व्‍यक्‍तियों में विभिन्‍न मोटाई की होती है। इसमें बड़ी रक्‍त वाहिकाएं (blood vessels) और तंत्रिकाएं (nerves) होती हैं और यहीं से त्‍वचा व पूरे शरीर का तापमान भी नियमित होती है।

जलने के प्रकार

जलने का आकलन त्‍वचा को हुई क्षति के आधार पर किया जाता है। इसके चार मुख्‍य प्रकार होते हैं :

  • सुपरफीशियल एपिडर्मल बर्न्‍स (superficial epidermal burns)
  • सुपरफीशियल डर्मल बर्न्‍स (superficial dermal burns)
  • डीप डर्मल या पार्शियल थिकनेस बर्न्‍स (deep dermal or partial thickness burns)
  • त्वचा की पूरी मोटाई का जलना (full thickness burns)

इन्हें नीचे विस्‍तार से बताया गया है।

सुपरफीशियल एपिडर्मल बर्न्‍स (Superficial epidermal burns)

इस तरह जलने पर त्‍वचा की ऊपरी परत एपिडर्मिस (epidermis) क्षतिग्रस्‍त होती है। इसमें त्‍वचा लाल, हल्‍की सूजी होती है और इसमें दर्द होता है, मगर छाले नहीं होते हैं।

सुपरफीशियल डर्मल बर्न्‍स (Superficial dermal burns)

इस तरह जलने पर त्‍वचा की ऊपरी सतह एपिडर्मिस (epidermis) और दूसरी सतह डर्मिस (dermis) का कुछ हिस्‍सा क्षतिग्रस्‍त होता है। प्रभावित शख्‍स की त्‍वचा निस्‍तेज गुलाबी, तकलीफदेह और उस स्‍थान पर छोटे छाले हो सकते हैं।

डीप डर्मल या पार्शियल थिकनेस बर्न्‍स (Deep dermal or partial thickness burns)

इस तरह से जलने पर त्‍वचा की ऊपर सतह एपीडर्मिस (epidermis) और दूसरी सतह डर्मिस (dermis) क्षतिग्रस्‍त हो जाती हैं। इस तरह जलने पर प्रभावित त्‍वचा लाल और सूज जाती है। त्‍वचा रूखी या नम, उसमें सूजन या छाले हो जाते हैं और कभी-कभी काफी दर्द या बिलकुल दर्दहीन हो जाती है।

फुल थिकनेस बर्न्‍स (Full thickness burns)

इस तरह जलने का अभिप्राय, त्‍वचा की परतों (एपिडर्मिस, डर्मिस और सबक्‍यूटिस/ epidermis, dermis and subcutis) के क्षतिग्रस्‍त होने से होता है। इस तरह जलने पर त्‍वचा जलकर निकल जाती है और उसके नीचे के ऊतक कुम्हलाए या काले हो सकते हैं। आसपास की बाकी बची हुई त्‍वचा रूखी, सफेद, भूरी या काली हो जाती है, जिस पर कोई छाले नहीं होते हैं। त्‍वचा की रंगत चमड़े या मोम जैसी हो जाती है।

इलाज

जलने या झुलसने पर जितनी जल्‍दी हो सके उपयुक्‍त प्राथमिक उपचार देना जरूरी होता है। इससे त्‍वचा को होने वाली क्षति को सीमित किया जा सकता है।

खुद जलने पर आपको अपने आपको या किसी दूसरे के जलने पर उसे निम्‍न प्राथमिक उपचार देना चाहिए।

जलने पर प्राथमिक उपचार

-जलने और झुलसने के इलाज के लिए नीचे दी गई प्राथमिक उपचार की सलाह अपनानी चाहिए :

जलने की प्रक्रिया को जितनी जल्‍दी हो रोक दें। इसका मतलब है कि प्रभावित व्‍यक्‍ति को जलने वाली जगह से दूर करना, उसके आसपास उठ रही लपटों को पानी या कंबल से बुझाना। इस प्रक्रिया में खुद को जलने के खतरे में नहीं डालना चाहिए।

शरीर में जली हुए जगह के आसपास मौजूद कपड़ा या जेवर को हटा देना चाहिए। हालांकि जली हुई त्‍वचा के साथ अटक गई किसी भी चीज को हटाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्‍योंकि इससे नुकसान बढ़ सकता है।

दुर्घटना होने के 20 मिनट के भीतर जले हुए स्‍थान को ठंडे या गुनगुने पानी से 10 से 30 मिनट तक धोकर ठंडा करना चाहिए। उस स्‍थान पर कभी बर्फ या बर्फ के पानी या क्रीम या मक्‍खन जैसे चिकने पदार्थ का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए।

खुद को या प्रभावित व्‍यक्‍ति को गर्म रखना चाहिए। इसके लिए कंबल या कई परतों में कपड़ों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं, मगर प्रभावित जगह पर इनका इस्‍तेमाल करने से बचना चाहिए। प्रभावित व्‍यक्‍ति को गर्म रखने से उसे हाइपोथर्मिया (hypothermia) होने के खतरे से बचाया जा सकता है, जिसमें किसी व्‍यक्‍ति के शरीर का तापमान 35°सेल्‍सियस (95° फायरनहाइट) से नीचे गिर जाता है। यह खतरा तब ज्‍यादा होता है, शरीर का बड़ा हिस्‍सा जला हो और उसे ठंडा किया जा रहा हो। खासतौर से बच्‍चों और बुजुर्ग लोगों का विशेष ध्‍यान रखने की जरूरत होती है।

जले हुए हिस्‍से को क्‍लिंग फिल्‍म (cling film) से ढक कर रखें। शरीर के उस हिस्‍से पर क्‍लिंग फिल्‍म लपेटने के बजाय जले हुए स्‍थान पर उसकी परत लगानी चाहिए। हाथ जलने पर एक साफ और स्‍पष्‍ट प्‍लास्‍टिक बैग का इस्‍तेमाल करना चाहिए।

जलने के कारण होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए पेरासिटामोल या ब्रूफीन खाई जा सकती है। काउंटर से दवा लेने पर उत्‍पादक के निर्देश जरूर पढ़ने चाहिए। 16 साल से कम उम्र के बच्‍चों को एस्‍प्रिन नहीं देना चाहिए।

अस्‍पताल कब जाएं

ऊपर बताई गई प्रक्रिया पूरी करने के बाद आपको खुद तय करना होगा कि और डॉक्‍टरी इलाज की जरूरत है या नहीं। अस्‍पताल जाएं :

  • जलने से बड़े और गहरे जख्‍म होने पर – जलने का स्‍थान व्‍यक्‍ति के हाथ के आकार से बड़ा होने पर
  • -पूर्ण मोटाई का सभी आकार का जला हुआ – इस तरह से जलने पर त्‍वचा सफेद या चमडी निकल जाती है।
  • चेहरा, हाथ, बाजू, पंजे, पैर या गुप्‍तांग में आंशिक मोटाई का जलना – इस तरह जलने पर छाले हो जाते हैं

निम्‍न परिस्‍थितियों में भी जले हुए व्‍यक्‍ति के लिए तुरंत चिकित्‍सकीय सहायता पाने में देर न करें :

  • ऐसी चोट, जिसका तुरंत इलाज करना जरूरी हो या प्रभावित व्‍यक्‍ति शॉक में जा रहा हो (ठंडी, चिपचिपी त्‍वचा, पसीना आना, बहुत तेज या बहुत धीरे सांस लेना और कमजोरी या चक्‍कर आना)
  • प्रभावित गर्भवती हो
  • 60 साल से ज्‍यादा उम्र का हो
  • पांच साल से कम उम्र का हो
  • दिल, फेफड़े या लिवर से संबंधित कोई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या हो या डायबिटीज (खून में ग्‍लूकोज की मात्रा बढ़ने की वजह से होने वाली लंबी अवधि की अवस्‍था)
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (शरीर का प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र), मिसाल के तौर पर एचआईवी या एड्स या कैंसर के लिए कीमोथेरेपी होने के कारण

धुआं या गंध सांस के रास्‍ते अंदर जाने पर भी तुरंत चिकित्‍सकीय सहायता जरूरी होती है। इसके कुछ लक्षण देर से भी नजर आ सकते हैं, जैसे खांसी आना, गला खराशना, सांस लेने में तकलीफ, नाक के बाल झुलसना या चेहरे पर जलना।

जलने या झुलसने से ठीक होने संबंधी ज्‍यादा जानकारी के लिए पढ़ें... ज्‍यादा गंभीर रूप से जलने का इलाज कैसे होता है।

इलेक्‍ट्रिकल बर्न्‍स (Electrical burns)

बिजली से जलने के मामले कम गंभीर लगते हैं, मगर यह काफी नुकसान पहुंचाने वाले हो सकते हैं। बिजली से जले किसी शख्‍स के लिए दुर्घटना एवं आकस्‍मिक चिकित्‍सा विभाग में तुरंत इलाज जरूरी होता है।

अगर प्रभावित व्‍यक्‍ति कम वोल्‍टेज वाले स्रोत (220 से 240 वोल्‍ट) जैसे घरेलू बिजली सप्‍लाई से जलने पर सबसे पहले बिजली सप्‍लाई का मेन स्‍विच बंद कर दें या प्रभावित व्‍यक्‍ति को उस स्‍थान से किसी गैर प्रवाहकीय चीज की मदद से हटाकर सुरक्षित जगह पर बैठाएं। गैर प्रवाहकीय चीज में बिजली के झटके से बचाती है, जैसे लकड़ी का डंडा या लकड़ी की कुर्सी।

हाई वोल्‍टेज से स्रोत (1000 वोल्‍ट या उससे ज्‍यादा) से चिपके व्‍यक्‍ति के पास जाने की कोशिश न करें।

कैमिकल बर्न्‍स (Chemical burns)

रसायन से जलने की दुर्घटनाएं काफी घातक होती हैं और इनमें किसी अस्‍पताल के दुर्घटना एवं आकस्‍मिक चिकित्‍सा विभाग में तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

यदि संभव हो तो स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को यह जरूर बताएं कि प्रभावित शख्‍स किस रसायन से जला है।

अगर आप किसी अन्‍य व्‍यक्‍ति की मदद कर रहे हैं, तो उचित सुरक्षात्मक कपड़े पहनें और फिर :

  • प्रभावित व्‍यक्‍ति के पास से उस कपड़े को अलग करें जिस पर उसे जलाने वाला रसायन मौजूद हो
  • रसायन अगर शुष्‍क है तो उसे ब्रश की मदद से झाड़कर त्‍वचा से हटा दें
  • बहते पानी की मदद से जले हुए स्‍थान से केमिकल और उसके अवशेष धोकर हटाएं

सनबर्न (Sunburn)

सूरज से जलने पर निम्‍न सलाह का पालन करें :

सूरज से जलने का कोई भी लक्षण, जैसे गर्म, लाल या त्‍वचा में दर्द, दिखने पर छायादार जगह पर जाएं, हो सके तो कमरे या घर के अंदर।

ठंडे पानी से या शावर से नहाकर जली हुई त्‍वचा को ठंडा करने का प्रयास करें।

प्रभावित स्‍थान पर आफ्टर सन लोशन (after-sun lotion) लगाएं ताकि उसे नमी मिले, ठंडा हो और आराम आए। उस जगह चिकने या तैलीय उत्‍पाद का इस्‍तेमाल न करें।

दर्द होने पर आराम के लिए पेरासिटामोल या ब्रूफेन ले सकते हैं। दवा पर लिखे निर्माता के निर्देश जरूर पढ़ें और 16 साल से कम उम्र के बच्‍चों को एस्‍प्रिन नहीं दें।

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और पानी की कमी से बचें।

गर्मी निकलने या तापघात, जब शरीर के अंदर का तापमान 37-40° सेल्‍सियस (98.6-104° फायरेनहाइट) या उससे ज्‍यादा होने के लक्षणों पर नजर रखें। इसके लक्षणों में चक्‍कर आना, नब्‍ज तेज चलना या उल्‍टी होना।

गर्मी निकलने से प्रभावित व्‍यक्‍ति को अगर जल्‍दी से जल्‍दी ठंडे स्‍थान पर ले जाकर पानी पिलाया जाए और उनके कपड़े ढीले कर दिए जाएं तो वह आधे घंटे के भीतर बेहतर महसूस करने लगते हैं। ऐसा नहीं होने पर उन्‍हें हीटस्ट्रोक हो सकता है। यह एक मेडिकल एमर्जेंसी है और तुरंत एंबुलेंस बुलानी चाहिए।

किसी को गर्मी निकलने या हीटस्ट्रोक होने पर क्‍या करना चाहिए यह जानने के लिए और पढ़ें।

जलने और झुलने से होने वाली जटिलताओं के बारे में और जानकारी के लिए पढ़ें।

स्‍वास्‍थ्‍य लाभ (रिकवरी)

जलने या झुलसने से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होने में कितना समय लगेगा यह निर्भर करता है दुर्घटना कितनी गंभीर है और उसका इलाज कैसे हो रहा है। जख्‍म अगर संक्रमित हो गया हो तो तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं।

जलने की वो घटनाएं जिसमें चिकित्‍सकीय मदद जरूरी न हो

अगर जलने या झुलसने की घटना औसत दर्जे की है और उसका इलाज घर पर किया जा सकता है तो वह बिना ज्यादा इलाज के ठीक हो सकती है। जलने और झुलसने के इलाज के बारे में और जानने के लिए पढ़ें।

जले हुए स्‍थान को साफ रखें और उस पर क्रीम या चिकने पदार्थ का इस्‍तेमाल न करें। उस स्‍थान पर हुए किसी छाले को फोड़ें नहीं क्‍योंकि इससे संक्रमण हो सकता है।

जलने की वो घटनाएं जिसमें डॉक्‍टरी मदद जरूरी हो

जलने या झुलसने पर डॉक्‍टरी मदद की जरूरत होने पर उसका परीक्षण कर यह आकलन किया जाता है कि जख्‍म के लिए किस दर्जे की देखभाल चाहिए। गंभीर रूप से जलने पर आपको विशेषज्ञ के पास भेजा जा सकता है।

इलाज कर रहे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी आपको :

  • जलने के जख्‍म का परीक्षण कर उसके आकार और गहराई का आकलन करेंगे
  • जले हुए स्‍थान को साफ करें, इस दौरान किसी छाले को फूटने न दें
  • चोट से बचाने वाली जीवाणुहीन पट्टी (sterile dressing) से जले हुए स्‍थान को ढककर रखें, इसके लिए एक पैड और गॉज बैंडेज (gauze bandage) आपकी मदद कर सकते हैं।
  • जरूरी होने पर दर्द निवारक दवा (पेरासिटामोल या ब्रूफेन दें)

जलने की दुर्घटना कैसे हुई है, यह जानने के बाद संक्रमण से बचाने के लिए टेटनस/ tetanus (बैक्‍टीरिया के जख्‍म में दाखिल होने की एक अवस्‍था) का इंजेक्‍शन लगाने की सलाह दी जा सकती है। मिसाल के तौर पर प्रभावित व्‍यक्‍ति के जख्‍म में मिट्टी लगने की आशंका होने पर टेटनस (tetanus) का इंजेक्‍शन लगाया जा सकता है।

24 घंटे के बाद संक्रमण के संकेत के लिए मरीज की ड्रेसिंग की जांच की जा सकती है। शुरू में 48 घंटे के बाद ड्रेसिंग बदली जाती है और उसके बाद पूरा ठीक होने तक तीसरे से पांचवें दिन ड्रेसिंग बदली जाती है।

और चिकित्‍सकीय मदद ले सकते हैं अगर :

जख्म में दर्द हो रहा हो या उसमें से दुर्गंध आ रही हो

38° सेल्‍सियस (100.4° फायरेनहाइट) या उससे ज्‍यादा तापमान होने पर

जख्‍म से निकलने वाले तरल पदार्थ से ड्रेसिंग भीग जाने पर

दो हफ्ते के बाद भी जख्‍म भरा न हो

सामान्‍य जलने के जख्‍म तकरीबन 14 दिनों में भर जाते हैं और मामूली निशान रह जाते हैं।

सूरज के संपर्क में आने पर

जलने की दुर्घटना होने के बाद के शुरुआती दो साल में प्रभावित व्‍यक्‍ति को त्‍वचा के क्षतिग्रस्‍त हिस्‍से को सीधे धूप के संपर्क में आने से बचाना चाहिए, क्‍योंकि इससे उसे छाले हो सकते हैं। यह त्‍वचा जख्‍म होने के बाद के पहले साल काफी संवेदनशील होती है। त्‍वचा प्रतिरोपण होने बाद नई त्‍वचा की भी यूं ही देखभाल करने होती है।

प्रभावित स्‍थान को नर्म सूती कपड़े से ढक कर रखना जरूरी है। जलने या झुलसने का निशान चेहरे पर है तो तेज धूप में बाहर निकलने पर हैट या चौड़े किनारे वाली हैट लगाना चाहिए। प्रभावित स्‍थान पर सूरज की रोशनी से बचाने वाला (एसपीएफ) 50 टोटल सन ब्‍लॉक जरूर लगाना चाहिए।

दुर्घटना के तकरीबन तीन साल के बाद प्रभावित हिस्‍से को सीधे सूरज की रोशनी में लाया जा सकता है, मगर तेज गर्मी में निकलने से पहले (25 या उससे ज्‍यादा एसपीएफ) हाई-फैक्‍टर सनक्रीम का इस्‍तेमाल जरूर करना चाहिए।

जटिलताएं

जलने और झुलसने की दुर्घटना की जटिलताओं में शामिल है :

  • सदमा लगना
  • गर्मी निकलना और हीटस्ट्रोक
  • संक्रमण
  • घाव का निशान
  • गंभीर धक्का लगना

किसी गंभीर चोट लगने के बाद प्रभावित शख्‍स को सदमा लग सकता है। सदमा जानलेवा भी हो सकता है क्‍योंकि यह शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्‍त मात्रा में नहीं होने पर होता है। गंभीर रूप से जलने के बाद प्रभावित शख्‍स को शॉक (shock) भी लग सकता है।

झटकों के संकेत और लक्षणों में शामिल है :

  • मुरझाया या कुम्हलाया हुआ चेहरा
  • ठंडी या चिपचिपी त्‍वचा
  • नब्‍ज तेज होना
  • तेज या धीरे सांस चलना
  • उबासी लेना
  • बेहोश होना

अगर आपको लगता है कि गंभीर रूप से घायल कोई व्‍यक्‍ति सदमे में जा रहा है तो तुरंत फोन कर एंबुलेंस बुलाएं।

एंबुलेंस के आने तक

प्रभावित शख्‍स को नीचे (उनके जख्‍म के कारण अगर ऐसा संभव हो तो) लेटाएं और उसके पैरों को ऊंचा करने के साथ ही उसे सहारा दें।

कोट या कंबल का इस्‍तेमाल कर व्‍यक्‍ति को गर्म रखें, मगर उनका चेहरा या प्रभावित हिस्‍सा न ढकें

उन्‍हें खाने या पीने के लिए कुछ भी न दें

गर्मी निकलना और हीटस्‍ट्रोक

गर्मी निकलना और हीटस्‍ट्रोक (heatstroke) गर्मी से संबंधित दो स्‍वास्‍थ्‍य अवस्‍थाएं हैं, जो शरीर का तापमान 37-40° सेल्‍सियस (98.6-104° फायरेनहाइट) से उससे ज्‍यादा होने पर होती हैं।

गर्मी निकलना या हीटस्‍ट्रोक दोनों ही अवस्‍थाएं काफी गंभीर हो सकती हैं। यह अक्‍सर तेज गर्मी में देर तक या बहुत ज्‍यादा धूप में रहने के कारण होती हैं। इसी तरह किसी व्‍यक्‍ति को सनबर्न होने पर उन्‍हें गर्मी निगलने या हीटस्‍ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है।

गर्मी निकलना या हीटस्‍ट्रोक के लक्षणों में शामिल है :

  • बहुत ज्‍यादा थकान या ऊर्जा में कमी
  • चक्‍कर आना या बेहोशी
  • उबकाई आना या उल्‍टी होना
  • नब्‍ज तेज होना
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • चिड़चिड़ापन
  • भ्रम होना

अगर गर्मी निकलने (heat exhaustion) के शिकार व्‍यक्‍ति को तुरंत किसी ठंडे स्‍थान पर ले जाया जाए, उन्‍हें पानी पिलाया जाए और कपड़े ढीले कर दिए जाएं तो वह आधे घंटे में बेहतर महसूस करने लगते हैं। ऐसा नहीं होने पर उन्‍हें हीटस्‍ट्रोक हो सकती है। यह मेडिकल एमर्जेंसी है और एंबुलेंस बुलाने में देर नहीं करनी चाहिए।

किसी को भी गर्मी निकलने या हीटस्‍ट्रोक होने पर क्‍या करना चाहिए, इस जानकारी के लिए और पढ़ें

संक्रमण

जलने के जख्‍म में बैक्‍टीरिया का प्रवेश होने पर उसमें संक्रमण हो सकता है। आपके जलने या झुलसने के स्‍थान पर छाले हो सकते हैं, जिनके फूटने पर उनमें संक्रमण हो सकता है। जलने की जिस घटना से छाले पड़ सकते हैं उसमें तुरंत चिकित्सीय देखभाल जरूरी होती है।

अपके जख्‍म में संक्रमण हो सकता है अगर :

यह असहज है या दर्द हो रहा है या दुर्गंध आ रही हो

अगर आपको 38°सेल्‍सियस (100.4° फायरेनहाइट) या उससे ज्‍यादा तापमान हो तो

सेल्‍यूलाइटिस (cellulitis) के संकेत नजर आने लगें, यह एक तरह का बैक्‍टीरियल संक्रमण है, जिससे त्‍वचा में लाली और सूजन होती है

जलने के जख्‍म में संक्रमण की आशंका होने पर तुरंत डॉक्‍टरी सलाह लें। संक्रमण होने पर उसका इलाज एंटीबायोटिक और दर्दनिवारक दवाओं से किया जा सकता है, अगर जरूरी हो तो।

कुछ दुर्लभ मामलों में जले हुए स्‍थान पर संक्रमण से रक्‍त विषाक्‍तता (सप्‍सिस/ sepsis) या टॉक्‍सिक शॉक सिंड्रोम (टीएसएस) (toxic shock syndrome-TSS) हो सकता है। यह बेहद गंभीर अवस्‍थाएं हैं, जो सही इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकती हैं। सेप्‍सिस और टीएसएस के संकेत में तेज बुखार, चक्‍कर आना और उल्‍टी शामिल है।

जख्‍म का निशान

जख्‍म का निशान, वह हिस्‍सा या ऊतकों की रेखा होती है चोट के भर जाने के बाद भी मौजूद रहती है। ज्‍यादातर मामूली जलने के मामलों में नाममात्र के जख्‍म के निशान रह जाते हैं। आप चाहें तो जख्‍म के बाद उसके निशान से निम्‍न तरीके अपनाकर बचा जा सकता है :

जख्‍म पर दिन में दो से तीन बार एमोलिएंट (emollient) लगाना, जैसे एक्‍वेशिया क्रीम (aqueous cream) या एमल्‍सिफाइंग (emulsifying) मलहम लगाना ।

दिन में तेज धूप में बाहर निकलने समय हाई सन प्रोटेक्‍शन फैक्‍टर (एसपीएफ) वाली सनस्‍क्रीन क्रीम लगाकर जलने से प्रभावित स्‍थान को सूरज की सीधी रोशनी से बचाना ।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।