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फाइमोसिस (phimosis) और पैराफाइमोसिस (paraphimosis) - लिंग की त्वचा में कसाव

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

फाइमोसिस (phimosis) किसे कहते हैं?

फाइमोसिस टाइट फ़ोरस्किन के लिए एक चिकित्सीय शब्द है, जहाँ लिंग की त्वचा की ऊपरी चमड़ी अत्यधिक टाइट हो जाती है और शिश्नमुंड (लिंग के आगे वाला हिस्सा) से पीछे नहीं हट पाती।

नवजात और छोटे बच्चों के लिए ये सामान्य होता है, मगर बड़े बच्चों में यह त्वचा की किसी बीमारी के कारण हो सकता है जिससे घाव के निशान पड़ जाते हैंI

फाइमोसिस (phimosis) कब सामान्य होता है?

ऐसे लगभग सभी बच्चों में जिनका खतना (लिंग के आगे की त्वचा को थोड़ा काट देना-circumsection) नहीं हुआ है, ये सामान्य है क्योंकि उनके लिंग की त्वचा पीछे नहीं जाती है क्योंकि वो अभी भी शिश्नमुंड (लिंग के आगे वाला हिस्सा, Glans) से जुड़ी हुई होती है। इस उम्र में फाइमोसिस पूरी तरह सामान्य है और इस त्वचा (foreskin) को यूं ही छोड़ दिया जाना चाहिए।

आमतौर बच्चे की उम्र दो साल के होने तक बच्चे के लिंग की त्वचा इसी तरह की होती है। दो साल की उम्र के बाद लिंग के ऊपर की त्वचा अपने आप शिश्नमुंड से अलग हो जाती है।

कुछ बच्चों में ये त्वचा अलग होने में कुछ ज्यादा वक्त भी ले सकती है। इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि ये कोई समस्या है।

अगर आपके बच्चे के लिंग की त्वचा सिरे से अलग होकर नीचे जाने के लिए तैयार नहीं है तो आपको जबरन कोशिश बिलकुल नहीं करनी चाहिए। इससे नुकसान हो सकता है और समस्या बढ़ सकती है।

फाइमोसिस (phimosis) कब एक समस्या होती है?

अमूमन जब तक इसके लक्षण सामने नहीं आएं, फाइमोसिस (phimosis) कोई समस्या नहीं होती है । अगर लक्षण दिखने लगें तो इस स्थिति का कारण शायद पेशाब करने में खुजली या संक्रमण हो सकता है, ऐसे में आपको डॉक्टर को दिखाने की जरुरत है। इस खुजली या संक्रमण का इलाज करने से ये समस्या समाप्त हो जाएगी।

अगर लिंग की ऊपरी त्वचा और शिश्नमुंड (glans) के इर्द-गिर्द खुजली, सूजन या लाली हो या कभी-कभी इस त्वचा से गाढ़ा स्राव भी होता हो, तो ये बैलेनाइटिस (balanitis) हो सकता है। बैलेनाइटिस(balanitis) गंभीर बीमारी नहीं होती है और सिर्फ नहाने से ही इसे सही किया जा सकता है। इस पर एक स्टेरॉयड मलहम लगाया जा सकता है और कभी-कभी एंटीबायोटिक्स की जरुरत हो सकती है।

अव्यस्क लड़कों में बैलेनाइटिस (balanitis) का सबसे आम कारण है कि पेशाब करते समय पेशाब को लिंग से पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाना।

कभी-कभी बैलेनाइटिस (balanitis) को पेशाब संबंधी संक्रमण समझा जा सकता है, जिसमें पेशाब करने में दर्द होता है। बार-बार पेशाब जाने की जरुरत महसूस होती है और मूत्र में खून आता है। इसमें इलाज और एंटीबायोटिक्स की जरुरत होती है।

बार बार बैलेनाइटिस(balanitis) हो तो क्या करें?

अगर आपके बेटे के लिंग के शिश्न की त्वचा बार बार बैलेनाइटिस के कारण कठोर होती जा रही है तो ऐसे में सर्जरी की जरुरत है। इसके लिए या तो ख़तना(सर्जरी के द्वारा लिंग के ऊपर की त्वचा को हटाना) किया जा सकता है या फिर चिपकी हुई त्वचा को हटाने के लिए सर्जरी(वो हिस्से जहां फोरस्किन शिश्नमुंड से चिपक गयी है) I सर्जरी के जरिए चिपकी हुई त्वचा को हटाने से लिंग के ऊपरी भाग की त्वचा सुरक्षित रहती है मगर हो सकता है कि ये समस्या को बार-बार होने से रोक नहीं सकती।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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