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6th November, 201811 min read

अच्छे फ़ैट, खराब फ़ैट और आपका कोलेस्ट्रॉल कम करना

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

हाल ही में मीडिया में इस बारे में काफ़ी कुछ कहा जा रहा है कि किस तरह के फ़ैट को ‘सेहत के लिए’ माना जा सकता है, इसलिए यह जानना मुश्किल हो सकता है कि आपके आहार में किन चीज़ों को शामिल किया जाए।

सबसे पहले, यह ध्यान देने की ज़रूरत है कि हमारे शरीर को काम करने के लिए फ़ैट की ज़रूरत होती है। वे ऊर्जा के ज़रूरी स्रोत हैं और हमारी सेल्स, लाइनिंग और तंत्रिकाओं के विकास, हार्मोन पैदा करने, ज़रूरी विटामिन को अवशोषित करने और शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद के लिए कुछ हद तक ज़रूरी होते हैं।

इसके बावज़ूद, लंबे समय में कुछ फ़ैट आपके स्वास्थ्य के लिए खराब हो सकते हैं। इसकी वजह यह है कि कुछ फ़ैट हमारे शरीर द्वारा बनाए जाते हैं, जबकि दूसरे फ़ैट नहीं बनाए जाते हैं। हमें वे फ़ैट मिलने चाहिए, जो हमारे आहार द्वारा नहीं बनाए जाते हैं, लेकिन उन फ़ैट से बचना चाहिए जिन्हें हम बनाते हैं।

हालांकि, किसी भी तरह के बहुत ज़्यादा फ़ैट बनने से वज़न बढ़ सकता है और आने वाले समय में सेहत से जुड़ी समस्याएं आ सकती हैं। आप अपनी सेहत के लिए सबसे अच्छा काम यह कर सकते हैं कि आप कुल मिलाकर कम फ़ैट खाएं और ‘खराब’ फ़ैट को ‘अच्छे’ फ़ैट से बदल दें।

इस लेख में, आपको अपने कोलेस्ट्रॉल पर ‘खराब’ फ़ैट के प्रभाव, ‘खराब’ फ़ैट और ‘अच्छे’ फ़ैट के बीच फ़र्क और अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के बारे में सुझाव मिलेंगे।

कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol)

कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में एक प्रकार का फ़ैट है। आप स्वाभाविक तौर पर कोलेस्ट्रॉल पैदा करते हैं और दूसरे फ़ैट की तरह ही, इससे शरीर के कई कामों में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल दो तरह के होते हैं: LDL और HDL, दोनों ही आपके शरीर की कार्यप्रणाली के लिए ज़रूरी हैं।
LDL कोलेस्ट्रॉल, सेल्स तक फ़ैट के मॉलिक्यूल ले जाता है और इसे 'सेहत के लिए खराब' कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। इसकी वजह यह है कि इससे आपका खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे आपकी धमनियों (arteries) में जमाव होता है।

दूसरी ओर HDL से शरीर से LDL को निकालने में मदद मिलती है, जिससे आपके कोलेस्ट्रॉल स्तर में कमी आती है और फ़ैट के जमाव का जोखिम कम होता है।

ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल से हार्ट अटैक ( heart attack , स्ट्रोक (stroke), और पेरिफ़ेरल आर्टेरियल रोग (peripheral arterial disease) होने का आपका जोखिम बढ़ सकता है।

ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल का मुख्य कारण बहुत ज़्यादा फ़ैट, खास तौर से इसके ट्रांस और सेचुरेटेड प्रकार को लेना है।

खराब फ़ैट (Bad fats)

‘खराब’ फ़ैट से 'अच्छे’ फ़ैट के मुकाबले ‘सेहत के लिए खराब’ कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लिसेराइड के स्तर बहुत ज़्यादा बढ़ते हैं।

ऐसे दो प्रकार के फ़ैट हैं, जिन्हें अक्सर सेहत के लिए खराब फ़ैट की कैटेगरी में रखा जाता है। ये सैचुरेटेड फ़ैट (saturated fats) और ट्रांस फ़ैट (trans fats) हैं।

ट्रांस फ़ैट (Trans fats)

ट्रांस फ़ैट, ट्रायग्लिसेराइड और नुकसानदायक LDL कोलेस्ट्रॉल के स्तर बढ़ाते हैं और यहां तक कि इनसे आपके लिए मददगार HDL कोलेस्ट्रॉल के स्तरों में भी कमी आती है।

ये नुकसानदायक साबित हो चुके हैं और इनसे पूरी तरह से बचा जाना चाहिए।
कुछ ट्रांस फ़ैट, प्राकृतिक स्रोतों से मिलते हैं लेकिन ज़्यादातर कृत्रिम ही होते हैं।
ट्रांस फ़ैट के कृत्रिम स्रोतों में ये शामिल होते हैं:

  • केक (खासतौर पर फ़्रॉस्टिंग वाले)
  • मार्गेराइन (स्टिक और टब)
  • तले हुए फ़ास्ट फ़ूड
  • फ़्रोज़न पिज़ा
  • ब्रेकफ़ास्ट सैंडविच
  • डोनट
  • क्रीम वाली मिठाई
  • माइक्रोवेव पॉपकॉर्न
  • स्वीट ब्रेड (खासतौर से वे जिनमें ‘फ़्लेकी’ टेक्सचर होता है)

यह हमेशा लेबल पर लिखा नहीं होगा कि प्रोडक्ट में ट्रांस फ़ैट मौजूद है या नहीं। अगर प्रोडक्ट में प्रति सर्विंग 0.5 ग्राम से कम ट्रांस फ़ैट मौजूद है, तो उन्हें 0 ग्राम ट्रांस फ़ैट दिखाने की मंज़ूरी दी गई है। जब आप एक साथ कई सर्विंग लेते हैं, तो छोटी-छोटी मात्राएं मिलकर ज़्यादा मात्रा बन सकती हैं।

आपको कम मात्रा में हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल ऑइल के प्रोडक्ट घटकों की जांच करना चाहिए या इसे कम मात्रा में लेना चाहिए क्योंकि इनसे ट्रांस फ़ैट का माप मिल जाता है।

स्वाभाविक तौर पर, ट्रांस फ़ैट एनिमल प्रोडक्ट जैसे चीज़, क्रीम, बीफ़, लैम्ब या मटन में थोड़ी मात्रा में मिल सकता है।

न्यूट्रीशन पर UK साइंटिफ़िक एडवाइज़री कमिटी (UK Scientific Advisory Committee on Nutrition) का सुझाव है कि ट्रांस फ़ैट, आपकी रोज़ाना की कैलोरी खुराक का ज़्यादा से ज़्यादा 2% हिस्सा होता है लेकिन यह अमेरिका में भी प्रतिबंधित है।

आप जो ट्रांस फ़ैट लेते हैं, उसकी मात्रा को सीमित रखना सबसे अच्छा है क्योंकि उनसे सेहत को कोई फ़ायदा नहीं मिलता है।

सेचुरेटेड फ़ैट/संतृप्त वसा (Saturated fats)

सेचुरेटेड फ़ैट को काफ़ी लंबे समय से खराब माना जाता रहा है क्योंकि उनकी वजह से LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

हालांकि हाल ही में, मीडिया में इस बारे में काफ़ी तरह तरह की बातें बताई गई हैं क्योंकि यह साबित करने के लिए प्रमाण काफ़ी नहीं हैं कि सेचुरेटेड फ़ैट से हृदय रोग (heart disease)का आपका जोखिम बढ़ जाता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें उन्हें ज़्यादा मात्रा में खाना चाहिए। सेचुरेटेड फ़ैट के बजाय अनसेचुरेटेड फ़ैट खाने से सेहत को मिलने वाले फ़ायदों के लिए अभी भी और शोध किया जा रहा है।

हमें इस बारे में भी सजग रहना चाहिए कि हम सेचुरेटेड फ़ैट को किस चीज़ से बदल सकते हैं।

कुछ शोधोंमें दिखाया गया है कि बहुत ज़्यादा प्रोसेस किए गए या सफ़ेद आटे (जैसे व्हाइट ब्रेड, चावल या पास्ता) वाले कार्बोहाइड्रेट खाने से सेचुरेटेड फ़ैट खाने की तुलना में आपको दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।

इसलिए, सेचुरेटेड फ़ैट को अनसेचुरेटेड विकल्पों से बदलने की कोशिश करें और अपने भोजन में ज़्यादा प्रोसेस की गई किस्म लेने के बजाय स्टार्च वाले साबुत अनाज के कार्बोहाइड्रेट लें।

सेचुरेटेड फ़ैट, कई तरह की भोजन सामग्री में मिल सकता है जो कि एनिमल प्रोडक्ट से लेकर जंक फ़ूड जैसे केक, बिस्किट और ज़्यादा तली हुई भोजन सामग्री होती है।

ऐसे जानवरों से बने प्रोडक्ट जिनमें सेचुरेटेड फ़ैट बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है, ये हैं:

  • डेयरी प्रोडक्ट (जैसे दूध, चीज़, बटर)
  • फ़ैट वाला, रेड मीट (जैसे पोर्क, लैम्ब, बीफ़)
  • प्रोसेस किए गए मीट (जैसे सलामी, सॉसेज, चिकन स्किन)
  • लार्ड
    ऐसे प्लांट प्रोडक्ट जिनमें सेचुरेटेड फ़ैट बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है, ये हैं:
  • पाम ऑइल
  • कुकिंग मार्जरीन
  • कोकोनट प्रोडक्ट (जैसे तेल, दूध, क्रीम)

अच्छे फ़ैट ('Good' fats)

अनसेचुरेटेड फ़ैट/असंतृप्त वसा को सेहत के लिए ‘अच्छा’ माना जाता है। पहले 1960 के दौर में इस बात के काफ़ी सबूत मिले हैं कि अनसेचुरेटेड फ़ैट के सेहत से जुड़े फ़ायदे सेचुरेटेड फ़ैट की तुलना में कहीं ज़्यादा होते हैं।
अनसेचुरेटेड फ़ैट को ह्रदय के स्वास्थ्य में सुधार लाने से जोड़ा गया है। इनसे आपमें ‘अच्छे’ कोलेस्ट्रॉल या HDL कोलेस्ट्रॉल के स्तर बढ़ सकते हैं, जिनसे आपके शरीर से ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल में कमी आती है। ये आपके ट्रायग्लिसरॉइड को भी कम कर सकते हैं।

‘अच्छे’ फ़ैट की दो व्यापक कैटेगरी होती हैं: मोनोसेचुरेटेड और पोली-अनसेचुरेटेड फ़ैट।
आपमें हृदय रोग (heart disease) के जोखिम को कम करने के लिए सभी तरह के फ़ैट कम मात्रा में खाना चाहिए, बल्कि जहां तक संभव हो आपको ‘खराब’ फ़ैट को ‘अच्छे’ फ़ैट से बदल देना चाहिए।

मोनो-अनसेचुरेटेड फ़ैट (Monounsaturated fats)

मोनो-अनसेचुरेटेड फ़ैट, सामान्य तापमान पर तरल रूप में रहते हैं, लेकिन इन्हें ठंडा करने पर ये सख्त होने लगते हैं। मोनो-अनसेचुरेटेड फ़ैट के अच्छे स्रोतों में ये शामिल होते हैं:

  • जैतून का तेल (Olive oil)
  • मूंगफली का तेल (Peanut oil)
  • सफ़ेद सरसों का तेल (Canola oil)
  • एवोकेडो
  • ज़्यादातर नट
  • तिल का तेल (Sesame oil)
  • हाई-ओलिइक सनफ़्लॉवर ऑइल (High-oleic sunflower oil)
  • हाई-ओलिइक सेफ़्लॉवर ऑइल (High-oleic sunflower oil)

आपको कुछ मोनो-अनसेचुरेटेड फ़ैट, जानवरों से मिलते हैं जैसे रेड मीट से भी मिल सकता है लेकिन शोध बताते हैं कि पशुओं के बजाय पौधों के अनसेचुरेटेड फ़ैट लेना बेहतर होता है।

पोली-अनसेचुरेटेड फ़ैट (Polyunsaturated fats)

पोली-अनसेचुरेटेड फ़ैट, बेहद ज़रूरी फ़ैट हैं, इसका मतलब यह है कि आपका शरीर इन्हें नहीं बना सकता है इसलिए उन्हें भोजन सामग्री से प्राप्त करना आपके लिए ज़रूरी होता है।

ऐसे ज़्यादा शोध किए गए हैं, जिनमें मोनो-अनसेचुरेटेड फ़ैट की तुलना में पोली-अनसेचुरेटेड फ़ैट के फ़ायदे बताए गए हैं।

पोली-अनसेचुरेटेड फ़ैट भी दो प्रकार के होते हैं: ओमेगा-3 और ओमेगा-6।
ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत ऑइली फ़िश है, जैसे:

  • सामन
  • मैकेरेल
  • हेरिंग
  • ट्राउट
  • किपर्स
  • सार्डाइंस

भोजन सामग्री में ओमेगा-6 आपको वनस्पति तेल से मिल सकता है जैसे:

  • पटसन के बीज(Flax seeds)
  • सूरजमुखी के बीज (Sunflower seeds)
  • अखरोट (Walnuts)
  • कॉर्न ऑइल (Corn oil)
  • सोयाबीन ऑइल (Soybean oil)
  • सेफ़्लॉवर ऑइल (Safflower oil)

ओमेगा-3 पोली-अनसेचुरेटेड फ़ैट के फ़ायदे बताने वाले और भी सबूत हैं।

ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल के कारण (Causes of high cholesterol)

कोलेस्ट्रॉल के स्तर बढ़ने की मुख्य वजह ऐसा आहार है, जिसमें फ़ैट, खासतौर से सेचुरेटेड और ट्रांस फ़ैट की बहुत ज़्यादा मात्रा होती है।
इसकी दूसरी संभावित वजहें ये हो सकती हैं:

  • व्यायाम कम करना
  • नियमित तौर पर ज़्यादा मात्रा में शराब पीना
  • मोटापा और स्मोकिंग
  • लंबे समय तक रहने वाली स्थितियां (जैसे गुर्दे की बीमारी, यकृत की बीमारी और हाइपोथाईरॉइडिज़्म)
  • कोई आनुवांशिक स्थिति (जैसे फ़ैमिलियल हाइपरकोलेस्टेरोलेमिया (familial hypercholesterolemia) जिसकी वजह से स्वस्थ जीवन शैली के बजाय कोलेस्टेरॉल में बढ़ोतरी होती है)

हालांकि दूसरे कारकों के बजाय आहार की वजह से ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल होने की ज़्यादा संभावना होती है।

अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तरों की जांच कैसे करें

आपके खून में कोलेस्ट्रॉल के स्तर बढ़ने की वजह से स्वास्थ्य से जुड़ी जानलेवा समस्याएं पैदा हो सकती हैं जैसे दिल के दौरे (heart attacks) और स्ट्रोक (strokes)।
यह संकेत देने वाले कोई लक्षण नहीं हैं कि आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर बढ़े हुए हैं, लेकिन इसकी जांच करने के लिए आप खून की जांच कर सकते हैं।
आपको खाली पेट खून की जांच (fasting blood test) करने के लिए कहा जा सकता है जिसका मतलब यह है कि आपको अपनी जांच से पहले 10–12 घंटों के लिए कुछ नहीं खाना चाहिए।
अगर आप अपने कोलेस्ट्रॉल स्तरों के बढ़ने के बारे में चिंतित हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए.

अपने कोलेस्टॉल को कैसे कम करें

आप अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर को स्वाभाविक रूप से कम करने के लिए कई कदम उठा सकते हैं। सबसे पहले आपको अपने आहार में सुधार लाकर, नियमित तौर पर व्यायाम करके और धूम्रपान छोड़कर अपनी जीवन शैली में बदलाव लाने का लक्ष्य बनाना चाहिए।

बेहतर आहार के साथ आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तरों में इन कामों से कमी लाई जा सकती है:

  • मीट पर अतिरिक्त फ़ैट को हटाना और मीट के पतले टुकड़े चुनना
  • भोजन सामग्री को तलने या भूनने के बजाय उन्हें ग्रिल करना, भाप में पकाना या बेक करना
  • पूरी तरह फ़ैट वाले दूध के बजाय सेमी-स्किम्ड या स्किम्ड दूध पीना
  • भोजन सामग्री के लेबल को देखना और भोजन सामग्री के ऐसे आइटम चुनना जिनमें फ़ैट की मात्रा कम हो
  • चॉकलेट, मिठाई और पेस्ट्री जैसे स्नैक को इनके मुकाबले सेहत से भरे विकल्पों से बदलना जैसे बिना नमक वाले नट या फ़लों की थोड़ी मात्रा

निष्कर्ष (Conclusion)

फ़ैट आपके आहार का अनिवार्य हिस्सा हैं। वे आपके शरीर में ऊर्जा देने से लेकर सेल की लाइनिंग तक बहुत-सी ज़रूरी प्रक्रियाओं में हिस्सा लेते हैं।

आप जो फ़ैट लेते हैं, उनका ज़्यादातर हिस्सा अनसेचुरेटेड स्रोतों - या ‘अच्छे’ फ़ैट से मिलता है - क्योंकि इन्हें हमारे शरीर में नहीं बनाया जाता है। सेचुरेटेड या ट्रांस फ़ैट या ‘खराब’ फ़ैट के मुकाबले इसके सेहत से जुड़े ज़्यादा फ़ायदे मिलने के सबूत मिले हैं।

आखिरी में, बहुत ज़्यादा फ़ैट खाने से वज़न बढ़ सकता है और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इनकी रोज़ाना की सुझाई गई तय मात्रा ही बनाए रखने की कोशिश करें।

आपको बहुत से सामान्य कार्बोहाइड्रेट खाने से भी बचना चाहिए क्योंकि ये सेचुरेटेड फ़ैट की तुलना में आपकी सेहत के लिए ज़्यादा खराब होते हैं।

अगर आप अपने कोलेस्ट्रॉल स्तरों के बढ़ने के बारे में चिंतित हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। वे आपको खून की जांच की सलाह दे सकते हैं और अगर आपके कोलेस्ट्रॉल स्तर बहुत अधिक हैं, तो वे आपको उपचार या जीवन शैली में बदलाव लाने का सुझाव दे सकते हैं।

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