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सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

सेरेब्रल पाल्सी क्या है? (What is cerebral palsy)

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) एक सामान्य टर्म है जिसके अंतर्गत कई सारी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों आती हैं जो बच्चे की गति और समन्वय को प्रभावित करती हैं।

न्यूरोलॉजिकल स्थितियां मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती हैं।

सेरेब्रल पाल्सी, मस्तिष्क को हुए किसी डैमेज के कारण होता है, जो आमतौर पर जन्म से पहले, जन्म के दौरान या उसके तुरंत बाद होता है। सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के संभव कारणों में शामिल हैं:

  • गर्भावस्था की शुरुआत में संक्रमण
  • समय से पहले बच्चे का जन्म या जन्म लेने में कठिनाई
  • बच्चे के दिमाग में रक्तस्त्राव
  • बच्चे में असामान्य रूप से मस्तिष्क का विकास

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के कारणों के बारे में पढ़ें।

सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण (Symptoms of cerebral palsy)

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के लक्षण हर बच्चे में भिन्न होते हैं और इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपके बच्चे को किस प्रकार का सेरेब्रल पाल्सी है (बायीं ओर बॉक्स देखें)। कुछ बच्चों को चलने में समस्या होती है जबकि अन्य गंभीर रूप से विकलांग होते हैं और उन्हें आजीवन देखभाल की जरूरत होती है। सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) वाले बच्चों में अक्सर अन्य संबंधित स्थितियां या परेशानियां हो सकती हैं जैसे:

  • मिर्गी (epilepsy)
  • सीखने में मुश्किल होना
  • असंयमिता (incontinence)
  • दृष्टि बाधित होना (visual impairment)
  • सुनने की समस्या (hearing impairment)
  • बोलने में कठिनाई और दूसरों की बातों को समझने में कठिनाई
  • विकास में देरी
  • कर्व्ड स्पाइन (scoliosis)
  • लार बहना (ड्रूलिंग)

सेरेब्रल पाल्सी कितना आम है? (How common is cerebral palsy)

ऐसा अनुमान है कि यूके में 400 में से 1 बच्चा सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित होता है। हर साल लगभग 1800 बच्चे इस स्थिति का शिकार होते हैं।

नज़रिया (Outlook)

सेरेब्रल पाल्सी कोई प्रगतिशील स्थिति नहीं है, इसका मतलब आपके बच्चे के बड़े होने के साथ ये खराब नहीं होगी, हालांकि ये शरीर पर बहुत अधिक तनाव डाल सकती है; जिससे आगे चलकर समस्याएं हो सकती हैं।

सेरेब्रल पाल्सी का कोई इलाज नहीं है लेकिन कई इलाज लक्षणों को कम करने और बच्चे के स्वतंत्र और आत्मनिर्भर होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं। इनमें मांसपेशियों की जकड़न और ऐंठन से राहत देने के लिए फिजियोथेरेपी, ऑक्युपेशनल चिकित्सा और दवा शामिल हैं। सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के इलाज के बारे में और पढ़ें।

सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण (Cerebral palsy symptoms)

सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण आमतौर पर आपके बच्चे के जीवन के शुरुआती तीन सालो में दिखाई देते हैं।

आपका बच्चा विकास से जुड़े जरूरी लक्ष्यों को प्राप्त करने में धीमा हो सकता है, जैसे कि क्रॉल करना, चलना या बोलना सीखना

जिन बच्चों को सेरेब्रल पाल्सी होती है उन्हें मांसपेशियों के टोन के साथ भी दिक्कत होती है (ज़रूरत के हिसाब से अपनी मांसपेशियों को रिलैक्स करने या सिकुड़ने की अचेतन क्षमता। आपके बच्चे को निम्नलिखित समस्याएँ हो सकती हैं:

  • हाइपरटोनिया (hypertonia)- मांसपेशियों की टोन में वृद्धि, जिससे मांसपेशियां कठोर हो सकती हैं या लग सकती हैं।
  • हाइपोटोनिया (hypotonia) - मांसपेशियों की टोन में कमी, जिससे वो पिलपिली दिखाई देती हैं।

कुछ मामलों में, आपका बच्चा हाइपरटोनिया (hypertonia) की ओर बढ़ने से पहले अपने जीवन के शुरू के दो या तीन महीनों में हाइपोटोनिया (hypotonia) का अनुभव कर सकता है।

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) वाले बच्चे शरीर के एक तरफ के हिस्से का दूसरे तरफ के हिस्से की तुलना में अधिक इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे उनकी मुद्रा असामान्य दिखाई दे सकती है।

स्पास्टिक हेमग्लैजिया के लक्षण (Symptoms of spastic hemiplegia)

अगर आपके बच्चे को स्पास्टिक हेमग्लैजिया (spastic hemiplegia) है तो उनके शरीर के एक तरफ मांसपेशियों में अकड़न (स्पैस्टिसिटी) होगी। ये सामान्य रूप से हाथ तक सीमित होती है लेकिन कभी कभी पैर पर भी असर कर सकती है।

स्पास्टिक हेमग्लैजिया (spastic hemiplegia) आपके बच्चे की रीढ़ की असामान्य वक्रता (स्कोलियोसिस) (scoliosis) विकसित करने का कारण हो सकता है। उन्हें बोलने में समस्या हो सकती है, लेकिन इस स्थिति से उनकी बुद्धिमत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

स्पास्टिक हेमग्लैजिया (spastic hemiplegia) वाले कुछ बच्चों को मिर्गी के दौरे (epileptic seizures ) का अनुभव हो सकता है।

स्पास्टिक डेजिया के लक्षण (Symptoms of spastic diplegia)

इस प्रकार की सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) में, आपका बच्चा पैरों की मांसपेशियों में जकड़न महसूस करेगा। इसकी वजह से चलने में दिक्कत हो सकती है और उन्हें चलने के लिए सहारे जैसे पैरों के ब्रेसेस या वॉकिंग फ्रेम की जरूरत हो सकती है।

बातचीत करने की कला और बुद्धिमत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

एटैक्सिक सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण (Symptoms of ataxic cerebral palsy)

एटैक्सिक सेरेब्रल पाल्सी (ataxic cerebral palsy) में, आपके बच्चे द्वारा संतुलन और गहराई का अंदाज़ा लगाना प्रभावित होगा। गहराई का अंदाज़ा लगाना ये जज करने की क्षमता है कि वस्तुओं का आपकी स्थिति से क्या संबंध है।

आपका बच्चा बेढ़ंग और असंयमित दिखाई दे सकता है और उसे ऐसी गतिविधियों के साथ समस्या हो सकती है जिनके लिए सटीक गति की आवश्यकता होती है, जैसे कि लिखना या जूते के फीते बांधना। वे अपने हाथों में कंपकंपी (अनैच्छिक झटकों) को भी महसूस कर सकते हैं, खासकर जब वे किसी वस्तु तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हो।

आपके बच्चे की बातचीत करने की कला और बुद्धिमत्ता इससे प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

एथेटोइड या डिस्किनेटिक सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण (Symptoms of athetoid or dyskinetic cerebral palsy)

अगर आपके बच्चे को एथेटोइड सेरेब्रल पाल्सी (athetoid cerebral palsy) है, (इसे डिस्किनेटिक सेरेब्रल पाल्सी (dyskinetic cerebral palsy) ) भी कहा जाता है) तो वे मांसपेशियों की टोन बढ़ा हुआ और घटा हुआ, दोनों महसूस करेंगे। इसका मतलब वो अक्सर ही अनियंत्रित और अनियमित शारीरिक गति करेंगे। संभव है कि उन्हें अपने शरीर की मुद्रा बनाए रखने में भी परेशानी होगी।

उनकी बोली भी प्रभावित होगी क्योंकि उन्हें अपनी जीभ और वोकल कॉर्ड्स को नियंत्रित करने में दिक्कत होगी। आपके बच्चे को खाने में और लार बहने की परेशानी हो सकती है।

एस्थेटोइड सेरेब्रल पाल्सी (athetoid cerebral palsy) वाले बच्चों में बुद्धिमत्ता प्रभावित नहीं होती है।

स्पास्टिक क्वाड्रिप्लेजिया के लक्षण (Symptoms of spastic quadriplegia)

स्पास्टिक क्वाड्रिप्लेजिया (spastic quadriplegia, सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) का सबसे खतरनाक प्रकार है, क्योंकि इससे मस्तिष्क को व्यापक क्षति होती है। आपके बच्चे के सभी अंगों में अकड़न बहुत अधिक होगी और चलने में असमर्थ हो सकता है। साथ ही, उसकी गर्दन की मांसपेशियां बहुत ढीली होंगी और उसे अपने सिर को सहारा देने में समस्या हो सकती है।

उन्हें बोलने में मुश्किल होगी और सीखने में साधारण से लेकर गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।

स्पास्टिक क्वाड्रिप्लेजिया (spastic quadriplegia) वाले बच्चों में बार-बार मिर्गी का दौरा पड़ना आम है।

सेरेब्रल पाल्सी के कारण (Cerebral palsy causes)

हालांकि सेरेब्रल पाल्सी में मांसपेशियां शामिल होती हैं लेकिन ये दिमाग के उस हिस्से में क्षति के कारण होता है जो इन मांसपेशियों को नियंत्रित करता है, इसे सेरीब्रम (cerebrum) कहते हैं।

सेरीब्रम दिमाग के अन्य जरूरी कामों के लिए भी जिम्मेदार होता है, जैसे कि बातचीत करने की कला, स्मृति और सीखने की क्षमता। इसलिए कुछ बच्चे जिन्हें सेरेब्रल पाल्सी की समस्या होती है उन्हें सीखने और बातचीत करने में मुश्किल आती है।

सेरीब्रम में क्षति की वजह से दिखाई देने और सुनने में भी परेशानियां हो सकती है।

दिमाग में क्षति कैसे होती है? (How does brain damage occur)

पहले, डॉक्टर ऐसा मानते थे कि मस्तिष्क में क्षति बच्चे के पैदा होने के समय अस्थायी रूप से ऑक्सीजन (एस्फिक्सिया) ना मिल पाने की वजह से होती है। एस्फिक्सिया (asphyxia) कभी-कभी मुश्किल या जटिल प्रसव के दौरान हो सकता है।

हालांकि, 1980 में हुए एक गहन शोध में ये बात सामने आई कि सेरेब्रल पाल्सी के लगभग 5-10 प्रतिशत मामले ही एस्फिक्सिया के कारण होते हैं। ज्यादातर मामले, बच्चे के जन्म से पहले दिमाग को हुए नुकसान की वजह से होते हैं।

वयस्क मस्तिष्क काफी अनुकूलनीय होता है और अधिक गंभीर क्षति से उबर सकता है लेकिन बच्चों के दिमाग, विशेष रूप से विकास के पहले छः महीनों के दौरान, विशेष रूप से कमजोर होते हैं। इस दौरान होने वाले किसी भी नुकसान के गंभीर और आजीवन रहने वाले परिणाम हो सकते हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि बच्चे के जन्म से पहले दिमाग में होने वाली क्षति के तीन मुख्य कारण है जो नीचे समझाए गए हैं।

पेरिवेंट्रिकुलर ल्यूकोमालेसिया (पीवीएल) Periventricular leukomalacia (PVL)

पेरिवेंट्रिकुलर ल्यूकोमालेसिया (पीवीएल) Periventricular leukomalacia (PVL), मस्तिष्क के सफेद पदार्थ को नुकसान पहुंचाता है। मस्तिष्क का यह हिस्सा कई तंत्रिका तंतुओं से बना होता है जो एक सफेद फैटी प्रोटीन द्वारा संरक्षित होते हैं, जिसे माइलिन (myelin) के रूप में जाना जाता है। ये सफेद पदार्थ, दिमाग के सोचने वाले हिस्से (इसे ग्रे पदार्थ भी कहते हैं) और शरीर के अन्य हिस्सों के बीच निर्देशों का संचार करता है।

यह माना जाता है कि मस्तिष्क को नुकसान बच्चे की रक्त की आपूर्ति में कमी के कारण होता है। रक्त की इस कम आपूर्ति के कारण, बच्चे का मस्तिष्क ऑक्सीजन से वंचित रहता है और मस्तिष्क कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। इस क्षति से आगे के जीवन में गंभीर परिणाम देखने को मिलते हैं, क्योंकि मस्तिष्क का सफेद पदार्थ मांसपेशियों को संकेतों को देने के लिए जिम्मेदार होता है।

PVL के ये कारण हो सकते हैं:

  • कोई संक्रमण जिससे मां ग्रसित हो जैसे कि रूबेला (जर्मन खसरा)
  • मां को असामान्य लो ब्लड प्रेशर
  • समय से पहले बच्चे का जन्म, खासकर अगर बच्चा 6 महीने या उससे भी पहले पैदा हुआ हो
  • अगर मां गर्भावस्था में कोकीन ले रही हो

मस्तिष्क का असामान्य विकास (Abnormal development of the brain)

ऐसा कुछ भी जो दिमाग के सामान्य विकास को बदल देता है या प्रभावित कर देता है, दिमाग द्वारा मांसपेशियों को भेजने वाले सिग्नल्स में मुश्किल पैदा कर सकता है और इसलिए सेरेब्रल पाल्सी का कारण बन सकता है। बच्चे के विकास के शुरुआती 20 हफ्तों में बच्चे का दिमाग विशेष रूप से कमजोर होता है।

दिमाग का विकास इन कारणों से प्रभावित हो सकता है:

  • जीन्स में परिवर्तन (बदलाव) जो मस्तिष्क को विकसित करने में मदद करते हैं
  • दाद, टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (toxoplasmosis) (एक परजीवी के कारण होने वाला संक्रमण) और साइटोमेगालोवायरस (cytomegalovirus) (एक हर्पीज़-प्रकार का वायरस जिसके लिए ज्यादातर लोगों में प्रतिरोधक क्षमता होती है) जैसे संक्रमण।

अजन्मे बच्चे के सिर पर आघात या चोट

इंट्राक्रैनील रक्तस्राव (Intracranial haemorrhage)

इंट्राक्रैनील रक्तस्राव दिमाग में होने वाला रक्तस्त्राव है, ये खतरनाक हो सकता है क्योंकि:

  • ये मस्तिष्क को रक्त से वंचित कर सकता है, जिससे टिश्यूज़ मर सकते हैं।
  • खून खुद ब्रेन के टिश्यूज़ को नुकसान पहुंचा सकता है।

इंट्राक्रैनील रक्तस्राव (Intracranial haemorrhage) आमतौर पर अजन्मे बच्चों में तब होती है जब उन्हें स्ट्रोक होता है। स्ट्रोक के कारण हो सकते हैं:

  • बच्चे की रक्त वाहिकाओं में पहले से मौजूद कमजोरियां या असामान्यताएं
  • मां को उच्च रक्तचाप
  • गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, विशेष रूप से पेल्विक सूजन की बीमारी (ऊपरी महिला प्रजनन अंगों का एक संक्रमण)

जन्म के बाद डैमेज (Damage after birth)

सेरेब्रल पाल्सी के कुछ मामले, जन्म के बाद दिमाग को हुई क्षति के कारण होते हैं।

आमतौर पर ये नुकसान बच्चे की जिंदगी के शुरुआती महीनों में तब होता है, जब दिमाग हल्की सी क्षति का सामना करने और उसके अनुकूल होने की क्षमता विकसित कर लेता है।

क्षति मस्तिष्क के संक्रमण, जैसे कि मेनिन्जाइटिस (meningitis), या एक दर्दनाक सिर की चोट के परिणामस्वरूप हो सकती है।

सेरेब्रल पाल्सी का निदान (Cerebral palsy diagnosis)

अगर आप अपने बच्चे के विकास के बारे में चिंतित हैं, तो अपने डॉक्टर को दिखाएं, वो आपको एक बाल रोग विशेषज्ञ (एक डॉक्टर जो बच्चों के इलाज में माहिर हैं) के पास भेज सकता है।

बाल रोग विशेषज्ञ आपसे, आपके बच्चे की हिस्ट्री और उनके विकास के पैटर्न के बारे में पूछेंगे। वे आपके बच्चे की सजगता, मुद्रा, मोटर कौशल और मांसपेशियों की टोन का भी अध्ययन करेंगे।

आपके बच्चे की उम्र के आधार पर, आपको एक शैक्षिक मनोवैज्ञानिक के पास भी जाने के लिए कहा जा सकता है ताकि आपके बच्चे के बौद्धिक विकास का आकलन किया जा सके।

टेस्टिंग (Testing)

आगे के टेस्ट करवाने के लिए भी कहा जा सकता है ताकि उन अन्य स्थितियों का भी पता लगाया जा सके जिनके लक्षण सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के समान ही होते हैं, जैसे कि ट्यूमर या पेशी अपविकास muscular dystrophy (एक आनुवंशिक स्थिति जो मांसपेशियों के विकास को प्रभावित करती है)।

कुछ मामलों में, आगे के टेस्ट, सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) को कन्फर्म करने में सक्षम होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि ये स्थिति मस्तिष्क की संरचना में परिवर्तन का कारण बन सकती है, जिसका पता टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है।

आपके बच्चे को जिन टेस्ट्स को करवाने की जरूरत पड़ सकती है, उनमें शामिल है:

  • खून की जांच
  • क्रेनियल अल्ट्रासाउंड (cranial ultrasound), जो आपके बच्चे के दिमाग के टिश्यू की छवि बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है
  • MRI SCAN - जो साउंड और मैग्नेटिक तरंगों का उपयोग दिमाग की और डिटेल में स्टडी के लिए करता है
  • CT SCAN - इसमें आपके बच्चे के दिमाग का विस्तृत 3D मॉडल बनाने के लिए X RAYS की श्रृंखला का उपयोग किया जाता है, जिसे फिर कंप्यूटर से असेंबल किया जाता है

हालांकि सेरेब्रल पाल्सी का विश्वसनीय निदान आमतौर पर तब किया जा सकता है जब आपका बच्चा दो या तीन साल का हो, आपके बच्चे के सेरेब्रल पाल्सी के प्रकार और गंभीरता तब तक निर्धारित नहीं की जा सकती है, जब तक कि वे चार या पांच साल की उम्र तक नहीं पहुंच जाते।

सेरेब्रल पाल्सी का इलाज (Cerebral palsy treatment)

आपको और आपके बच्चे को कई अलग-अलग स्वास्थ्य प्रोफेशनल्स की टीम से मिलवाया जाएगा जो आपके बच्चे की देखभाल में शामिल होंगे।

इस टीम में शामिल हो सकते हैं:

  • एक बाल रोग विशेषज्ञ
  • एक हेल्थ विज़िटर
  • एक सामाजिक कार्यकर्ता
  • एक फिजियोथेरेपिस्ट, जो किसी व्यक्ति की गति और समन्वय को बेहतर बनाता है
  • बोलचाल और भाषा थैरेपिस्ट
  • एक ऑक्युपेशनल चिकित्सक, जो रोजमर्रा के कामों के लिए जो आवश्यक कौशल और क्षमताएं चाहिए, उनमें मदद करता है, जैसे साफ़ सफ़ाई या कपड़े पहना
  • एक इनकोंसिसटेंट सलाहकार
  • एक शैक्षिक मनोवैज्ञानिक, जो सीखने में कठिनाई रखने वाले लोगों की मदद करने में माहिर होता है

आपके बच्चे की किसी भी जरूरत या समस्या के समाधान के लिए एक व्यक्तिगत देखभाल योजना तैयार की जाएगी। जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होगा और उसकी जरूरतों और स्थिति में बदलाव होगा, इस प्लान में बदलाव किए जाएंगे।

आपको और आपके बच्चे को एक प्रमुख वर्कर भी दिया जाएगा, जो आपके और उपलब्ध विभिन्न सहायता सेवाओं के बीच संपर्क का पहला प्वाइंट होगा। जब आपका बच्चा युवा होता है, तो ये प्रमुख वर्कर, हेल्थ विजिटर होने की संभावना रखता है। जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होता जाता है और उनकी जरूरतें और अधिक जटिल होती जाती हैं, मुमकिन है कि प्रमुख वर्कर, सोशल वर्कर होगा।

सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों के इलाज के लिए कोई एक योजना नहीं है। बल्कि, इलाज की एक बड़ी श्रृंखला है जो आपके बच्चे को अधिक से अधिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में मदद करने के लिए डिजाइन की गई है। कुछ इलाज नीचे दिए गए हैं।

फिजियोथेरेपी (Physiotherapy)

फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) आमतौर पर तभी शुरू कर दी जाती है जैसे ही आपके बच्चे में सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) का पता चलता है। ये आपके बच्चे को अपनी स्थिति मैनेज करने में मदद करने के लिए सबसे ज़रूरी तरीकों में से एक है।

फिजियोथेरेपी के दो मुख्य लक्ष्य ये हैं-

  • उन मांसपेशियों को कमजोर होने से रोकना जिन्हें आमतौर पर आपका बच्चा इस्तेमाल नहीं करता है
  • मांसपेशियों को अकड़ने से रोकना, इसे कॉनट्रैचर (Contracture) के नाम से जाना जाता है

सिकुड़न उन बच्चों में एक जोखिम है जिन्हें मांसपेशियों में अकड़न के कारण मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या होती है। अगर मांसपेशियों में खिंचाव नहीं हो सकता है, तो वे हड्डियों की तरह तेज़ी से नहीं बढ़ती है। इससे विकृति हो सकती है, जिससे आपके बच्चे को दर्द और परेशानी हो सकती है।

फिजियोथेरेपिस्ट आपके बच्चे को कई शारीरिक व्यायाम सिखाएगा जो वे अपनी मांसपेशियों को मजबूत करने और खींचने के लिए हर दिन कर सकते हैं। विशेष हाथ या पैर ब्रेसिज़ का उपयोग उनकी मांसपेशियों को फैलाने में मदद करने के लिए भी किया जा सकता है।

स्पीच थेरेपी (Speech therapy)

जिन बच्चों को कम्युनिकेशन करने में दिक्कत है, स्पीच थेरेपी उन बच्चों को कई प्रकार की तकनीकों द्वारा उनकी मदद कर सकती है; जिससे स्पष्ट रूप से बोलने की उनकी क्षमता में सुधार हो सकता है।

अगर बातचीत करने में उन्हें गंभीर परेशानी है तो थैरेपिस्ट उन्हें बातचीत का एक अन्य तरीका सिखा सकता है, जैसे कि साइन लैंग्वेज।

आपके बच्चे को बातचीत करने में मदद करने के लिए विशेष उपकरण भी उपलब्ध हो सकते हैं, जैसे कि वॉइस सिंथेसाइज़र से जुड़ा कंप्यूटर।

छोटे बच्चों को एक लैपटॉप के जैसा एक उपकरण दिया जा सकता है, जिसमें रोजमर्रा की वस्तुओं और गतिविधियों के प्रतीक होते हैं। बच्चा तब खुद को समझाने के लिए प्रतीकों के संयोजन को दबाता है।

ऑक्युपेशनल चिकित्सा (Occupational therapy)

ऑक्युपेशनल चिकित्सा आपके बच्चे की शरीर की मुद्रा में सुधार के लिए और जो गति उनमें पहले से है उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए बनाई गई है।

उन्हें रोजमर्रा के कामों को करने के लिए सबसे अच्छे तरीके से सलाह दी जाएगी, जिसमें गति कौशल की आवश्यकता होती है, जैसे कि शौचालय जाना या कपड़े पहनना।

ऑक्युपेशनल थेरेपी आपके बच्चे के आत्मविश्वास और स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है, खासकर तब जब वो बड़े हो जाते हैं।

दवाइयां (Medicines)

यदि आपके बच्चे की मांसपेशियां विशेष रूप से कठोर और अति सक्रिय हैं, तो इससे आपके बच्चे को निराशा और दर्द हो सकता है। यदि आपका बच्चा इन समस्याओं का अनुभव करता है, तो उन्हें अपनी मांसपेशियों को आराम करने में मदद करने के लिए दवा की आवश्यकता हो सकती है।

इंट्राथेलिक बैक्लोफ़ेन थैरेपी (Intrathecal baclofen therapy)

इंट्राथेलिक बैक्लोफ़ेन थैरेपी (Intrathecal baclofen therapy) में सर्जिकल रूप से शरीर के बाहर एक छोटे पंप को इम्पलांट किया जाता है जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ा होता है।

ये पम्प बैक्लोफेन (Baclofen) नाम की दवा की रेगुलर खुराक सीधे हमारे नर्वस सिस्टम में देता है। बैक्लोफेन (Baclofen) कुछ ऐसे नर्व सिग्नल्स को ब्लॉक कर देता है जिनसे मांसपेशियों में अकड़न होती है।

मांसपेशियों को आराम देने वाले (Muscle relaxants)

आपके बच्चे को डायजेपाम (diazepam) जैसी मांसपेशियों को आराम देने वाली दवा दी जा सकती है, जिसे आमतौर पर टैबलेट के रूप में लिया जाता है।

डायजेपाम (diazepam) के दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

  • ज़्यादा नींद आना (drowsiness)
  • अस्पष्ट बोली (slurred speech)
  • कब्ज़ (constipation)
  • जी मिचलाना (nausea)
  • असंयम होना (incontinence)

अगर डायजेपाम (diazepam) काम नहीं करती है तो कई अन्य मसल्स को आराम देने वाली दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे डैंट्रोलिन (dantrolene) या टिज़ैनिडाइन (tizanidine) इनके दुष्प्रभाव भी डायजेपाम (diazepam) के समान ही होते हैं।

बोटुलिनम टॉक्सिन (Botulinum toxin)

यदि मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाइयां कारगर नहीं होते हैं, तो बोटुलिनम टॉक्सिन(Botulinum toxin) का एक इंजेक्शन दिया जा सकता है। बोटुलिनम टॉक्सिन

(Botulinum toxin) मस्तिष्क से प्रभावित मांसपेशियों तक संकेतों को अवरुद्ध करने का काम करता है।

इंजेक्शन का प्रभाव सामान्य रूप से तीन महीने तक रहता है। ये उपचार सबसे प्रभावी है जब इसके साथ स्ट्रेचिंग और फिजिकल थेरेपी भी की जाती है।

खाने की और लार बहने की समस्या का इलाज (Treating feeding and drooling problems)

जिन बच्चों को अपने मुंह को नियंत्रित करने में समस्या होती है, उन्हें अक्सर भोजन निगलने में समस्या होगी, साथ ही उनके लार के उत्पादन को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है। ये दोनों समस्याएं संभावित रूप से गंभीर हो सकती हैं और इलाज की आवश्यकता होती है।

यदि आपके बच्चे को अपने भोजन को निगलने में समस्या (डिस्पैगिया) (dysphagia) है, तो इस बात का खतरा है कि भोजन के छोटे टुकड़े उनके श्वास नलियों और फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं। यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और एक संक्रमण (निमोनिया) का कारण बन सकती है।

अगर आपके बच्चे का (डिस्पैगिया) (dysphagia) उतना गम्भीर नहीं है,तो समस्या को दूर करने के लिए उन्हें कुछ तकनीक सिखाना संभव हो सकता है। एक संशोधित डाइट जिसमें नरम खाने की चीज़े शामिल हो, उसकी आवश्यकता हो सकती है। यदि समस्या अधिक गंभीर है, तो एक फीडिंग ट्यूब की आवश्यकता हो सकती है, जिसे आपके बच्चे की गर्दन के नीचे रखा जा सकता है या सीधे उनके पेट से जोड़ा जा सकता है।

यदि आपके बच्चे को अधिक लार बहने की समस्या है, तो अतिरिक्त लार मुंह, ठोड़ी और गर्दन के आसपास की त्वचा को परेशान कर सकती है। इससे त्वचा की ऊपरी परत भी टूट सकती है, जिससे संक्रमण हो सकता है।

इस समस्या को नियंत्रित करने में कई इलाज आपके बच्चे की मदद कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • एंटीकोलिनर्जिक दवाएं (anticholinergic drugs), जो शरीर में लार के उत्पादन को कम करती हैं
  • लार ग्रंथि को पुनर्निर्देशित करने के लिए सर्जरी की जाती है, जिससे लार सामने की बजाय मुंह के पीछे की ओर जाए
  • जीभ की बेहतर स्थिति और नियमित रूप से निगलने को प्रोत्साहित करने के लिए मुंह में इंट्रोरल डिवाइस रखना
  • बायोफीडबैक प्रशिक्षण (biofeedback training) , जिसमें आपके बच्चे को ये पहचाना सिखाया जाता है कि कब उनकी लार बह रही है और उसी हिसाब से उसे निगला जाए

आर्थोपैडिक सर्जरी (Orthopaedic surgery)

हड्डी और जोड़ों से जुड़ी परेशानियों को ठीक करने के लिए, आर्थोपेडिक सर्जरी (Orthopaedic surgery) की जाती है। सेलेब्रल पाल्सी की वजह से जब आपके बच्चे को चलने और हिलने में दर्द हो रहा है, तब इसकी सलाह दी जाती है। ये उनके शरीर की मुद्रा और गतिशीलता को भी सुधार सकता है जिससे उनका आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ सकती है।

सर्जरी के दौरान, सर्जन किसी भी उन मांसपेशियों और टेंडॉन को लंबा कर देगा जो बहुत छोटी हैं और समस्याएं पैदा कर रहे हैं।

घाव को भरने में 1 हफ्ते या अधिक का वक्त लग सकता है, पर सर्जरी के बाद ठीक तरह से चलने में आपके बच्चे को 12-18 महीने लग सकते हैं।

सर्जिकल प्रक्रियाएं आमतौर पर आपके बच्चे के संभावित शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए, उनके जीवन को डगमगा सकती हैं।

सेलेक्टिव डॉर्सल रिज़ोटॉमी (Selective dorsal rhizotomy (SDR))

सेलेक्टिव डॉर्सल रिज़ोटॉमी Selective dorsal rhizotomy (SDR) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसकी आमतौर पर सलाह सिर्फ तब दी जाती है जब मांसपेशियों की अकड़न और अतिक्रियाशीलता से जुड़े बाकी सभी इलाज ट्राई कर लिए गए हो और फेल हो गए हो।

ये एक जटिल ऑपरेशन है जिसका उपयोग निचले अंगों की स्पास्टिसिटी (spasticity) के उपचार के लिए किया जाता है, जिसमें निचले स्पाइनल कॉलम में संवेदी नर्व्स में से कुछ को काटना शामिल है। यह पैरों में मांसपेशियों की कठोरता, साथ ही दर्द और ऐंठन को कम कर सकता है।

हालांकि, जिन बच्चों को SDR होता है, उन्हें तीन से नौ महीने तक चलने वाली व्यापक फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है, बुनियादी मोटर स्किल्स जैसे कि दोबारा चलना सीखने के लिए।

इस प्रकार की सर्जरी से जटिलताएं भी हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • शरीर के उस भाग में, पिंस और सुइयों की तरह एक अप्रिय झुनझुनी सनसनी, जिससे नर्व्स को हटाया गया हो
  • कब्ज़
  • पेशाब करने में परेशानी

कम सामान्य जटिलताओं में शामिल हैं:

  • सांस लेने में दिक्कत
  • फेफड़ों का संक्रमण

आपको और आपके बच्चे को (अगर वे सर्जरी की उलझन को समझने में सक्षम हैं) अपने सर्जन से इस प्रक्रिया के संभावित लाभों और जोखिमों पर चर्चा करनी चाहिए।

सेरेब्रल पाल्सी की जटिलताएं (Complications of cerebral palsy)

वयस्क पड़ाव में परिवर्तन के दौरान, सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों को कुछ जटिलताओं का अनुभव हो सकता है।

इनमें से कुछ नीचे दिए गए हैं।

पोस्ट इमपेयरमेंट सिंड्रोम (Post-impairment syndrome)

सेरेब्रल पाल्सी वाले अधिकांश वयस्कों को पोस्ट इमपेयरमेंट सिंड्रोम (Post-impairment syndrome) का अनुभव होता है। ये सेरेब्रल पाल्सी द्वारा शरीर पर डाले गए स्ट्रेस के कारणों की वजह से होता है।

इन कारकों में शामिल हो सकते हैं:

  • थकान (सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) वाले व्यक्तियों में सामान्य व्यक्तियों की तुलना में चलने के लिए तीन गुना ऊर्जा का जरूरत होती है)
  • मांसपेशियों की कमजोरी
  • दर्द
  • गठिया (arthritis) ( इस स्थिति में हड्डियों और जोड़ो पर जो अतिरिक्त दबाव पड़ता है, उसके कारण)
  • बार बार मोच आना (repetitive strain injury)

आगे फिजियोथेरेपी और उपकरण जो चलने में सहायता कर सकते हैं, जैसे कि व्हीलचेयर या वाकिंग फ्रेम, इन लक्षणों में से कुछ को राहत देने में मदद कर सकते हैं।

शरीर के अंगों की समस्या (Body organ problems)

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) वाले ज्यादातर वयस्क, जब 40 की उम्र तक पहुंचते हैं तो वो समय से पहले अपने अंगों के बूढ़ा होने का अनुभव करेंगे (जैसे कि दिल, वेन्स, धमनियां), यह आंशिक रूप से उस तनाव के कारण होता है जो ये स्थिति शरीर पर डालती है।

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) वाले कई व्यक्तियों में पूरी तरह से विकसित अंग भी नहीं होते हैं। इसका मतलब ये है कि विकास की कमी की भरपाई के लिए उनके अंगों को अक्सर सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

सेरेब्रल पाल्सी वाले वयस्कों को ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए जो उनके अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जैसे कि धूम्रपान, अधिक मात्रा में शराब पीना और उच्च वसा वाला भोजन करना।

अवसाद (Depression)

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) जैसी दीर्घकालिक स्थिति के साथ रहने की दैनिक चुनौतियाँ तनाव और चिंता का कारण बन सकती हैं, जो फिर अवसाद जैसे हालात पैदा कर सकती है।

संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Cognitive behavioural therapy) (सीबीटी) लोगों को अपने अवसाद से लड़ने और उनकी स्थिति का बेहतर तरीके से सामना करने में मदद करने के लिए मदद कर सकती है।

संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Cognitive behavioural therapy) (सीबीटी) पूरी तरह से इस सिद्धांत पर आधारित है कि जिस तरह से हम महसूस करते हैं, वह आंशिक रूप से चीजों के बारे में हमारे सोचने के तरीके पर निर्भर करता है। जो लोग विश्राम तकनीकों का उपयोग करते हुए और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखते हुए अपनी स्थिति पर अलग-अलग प्रतिक्रिया करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करते हैं, उन्होंने बताया कि उनके दर्द, तनाव और अवसाद के स्तर में गिरावट आई है।

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के साथ जी रहे अन्य लोगों से सम्पर्क रखना भी मदद कर सकता है। स्कोप, सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) वाले लोगों के लिए एक चैरिटी, इस स्थिति वाले लोगों के लिए इंटरनेट फोरम चलाती है। अधिक जानकारी के लिए स्कोप फोरम देखें।

स्कोप में उम्र बढ़ने और सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी है।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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