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सीमित विकास/बौनापन (Restricted growth)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

सीमित विकास क्या है? (What is restricted growth?)

सीमित विकास (बौनापन) एक ऐसी स्थिति है जिसमें लंबाई नहीं बढ़ती है और कद छोटा रह जाता है। यह कई अलग-अलग मेडिकल समस्याओं के कारण होता है।

सीमित विकास (restricted growth) के दो मुख्य प्रकार हैं:

  • प्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (PSS) (proportionate short stature) - सामान्य वृद्धि में कमी
  • डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (DSS) (disproportionate short stature) - कुछ हड्डियों के विकास में समस्या

सीमित विकास के लक्षणों (symptoms of restricted growth) के बारे में और पढ़ें।

प्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (PSS) (Proportionate short stature)

यदि किसी को PSS है, तो उसके धड़ (पेट और छाती) की लंबाई पैरों के सामान्य अनुपात में होगी, लेकिन उसकी लंबाई सामान्य से कम होगी।

PSS होने का सबसे आम कारण माता-पिता का छोटे कद का होना है। पीएसएस तब भी हो सकता है जब शरीर पर्याप्त ग्रोथ हार्मोन का उत्पादन नहीं करता है।

कुछ जेनेटिक सिंड्रोम के कारण भी पीएसएस हो सकता है। जैसे कि टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) से पीड़ित लड़कियों और आनुवांशिक असामान्यता से ग्रसित बच्चे जिन्हें शॉक्स जीन हैप्लिंसफिशिएंसी (haploinsufficiency) कहा जाता है, में PSS का हल्का रूप नजर आता है।

बौनापन के कारणों (causes of restricted growth) के बारे में और पढ़ें।

डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (DSS) (disproportionate short stature)

DSS तब होता है जब जोड़ों और हड्डियों के विकास में समस्या होती है। कुछ अंग छोटे हो सकते हैं, या विशेष रूप से धड़ या ट्रंक छोटे हो सकते हैं। इसके कारण आमतौर पर लंबाई बहुत कम रह जाती है।

DSS से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर दोषपूर्ण जीन के कारण होती हैं। डीएसएस के साथ पैदा होने वाले कई बच्चों के माता-पिता औसत लंबाई के होते हैं और संयोग से बच्चे में दोषपूर्ण जीन चला जाता है।

छोटे कद का इलाज आमतौर पर इसके कारणों पर निर्भर करता है और इसमें कई अलग-अलग प्रकार के डॉक्टर शामिल होते हैं।

यदि खासतौर पर आपका पैर छोटा है, तो DSS का इलाज पैर-लंबी करने की प्रक्रिया के जरिए किया जा सकता है।हालांकि इस की सुरक्षा और प्रभावशीलता स्पष्ट नहीं है।

सीमित विकास की समस्या से पीड़ित कुछ बच्चों का इलाज ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन के जरिए किया जा सकता है।

सीमित विकास (restricted growth) के इलाज के बारे में और जानकारी प्राप्त करें।

सीमित विकास के लक्षण

सीमित विकास (बौनापन) वाले लोगों में स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े अन्य लक्षण नजर आते हैं, जो उनके छोटे कद के लिए जिम्मेदार होते हैं।

प्रपोर्सनेट और डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर से पीड़ित लोगों में नजर आने वाले लक्षण नीचे दिए गए हैं।

प्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (Proportionate short stature)

प्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (PSS) वाले लोगों का विकास बहुत धीरे-धीरे होता है लेकिन उनके शरीर के अंग अनुपात में होते हैं।

PSS वृद्धि हार्मोन की कमी के कारण हो सकता है। जन्म से वृद्धि हार्मोन की कमी वाले बच्चों में रक्त शर्करा (blood sugar) घट सकता है और वे किशोरावस्था (puberty) में काफी देर से पहुंचते हैं।

डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (Disproportionate short stature)

डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (DSS) वाले लोगों में निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं:

  • झुके हुए पैर
  • स्कोलियोसिस (Scoliosis) - एक तरफ झुकी हुई रीढ़ की हड्डी।
  • किफोसिस - ऊपरी रीढ़ की हड्डी बाहर की ओर मुड़ी होना।
  • पीठ की समस्याएं - कुछ स्थितियों में रीढ़ की समस्याओं के कारण मेरुरज्जु और नसों में सिकुड़न हो सकता है। इससे कूल्हों, घुटनों और पैरों में दर्द और सुन्नता का अनुभव हो सकता है, और इन्हें चारों ओर घुमाने में कठिनाई हो सकती है।
  • शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में सिर का ऊपरी हिस्सा भारी होना - इससे संतुलन बनाने में कठिनाई होती है।
  • स्लीप एप्निया (Sleep apnoea) - यह नींद से जुड़ी बीमारी है जिसके कारण रात में सांस लेने में कठिनाई होती है और दिन के दौरान अधिक नींद आती है।
  • सुनने में कठिनाई - छोटे बच्चों को बोलने और भाषा को सुनने और समझने में कठिनाई हो सकती है।
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) - इस प्रकार की अर्थराइटिस विशेष रूप से डीएसएस में कूल्हे और घुटने के जोड़ों को प्रभावित करती है। यदि अन्य जोड़ भी प्रभावित होते हैं, तो इन्हें घूमाने में बहुत परेशानी हो सकती है। कुछ स्थितियों में, जोड़ों को पूरी तरह से सीधा नहीं किया जा सकता है।
  • गर्दन में कमजोरी - कुछ स्थितियों में, गर्दन में हड्डियों के बीच स्थित जोड़ों में कमजोरी हो सकती है, जिसे जल्दी पहचानकर इलाज कराने की जरूरत पड़ सकती है।
  • हाइड्रोसिफ़लस (Hydrocephalus) - यह मस्तिष्क की कैविटी में अतिरिक्त द्रव के कारण होता है।

सीमित विकास के कारण

सीमित विकास (बौनापन) कई अलग-अलग चिकित्सा स्थितियों के कारण हो सकता है, और अन्य की अपेक्षा कुछ स्थितियों में इसे जल्दी पहचाना जा सकता है।

प्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर के कारण (Causes of proportionate short stature)

प्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (PSS) का मुख्य कारण माता-पिता का कद छोटा होना है।

शरीर में पर्याप्त वृद्धि हार्मोन का उत्पादन नहीं होना इस समस्या का कम सामान्य कारण है। पिट्यूटरी ग्रंथि में समस्या के कारण (मस्तिष्क के नीचे मटर के आकार की ग्रंथि जो कई जरूरी हार्मोन का उत्पादन करती है) ग्रोथ हार्मोन की कमी जन्म के समय मौजूद हो सकती है। इसके अलावा यह बचपन में सिर पर चोट लगने या किसी बीमारी के कारण शुरू हो सकता है।

वृद्धि हार्मोन की कमी से पीड़ित लगभग आधे बच्चों में इसका कारण अज्ञात है। 3,500-4,000 बच्चों में से केवल एक बच्चे में ग्रोथ हार्मोन की कमी हो सकती है है।

अन्य संभावित कारण (Other possible causes)

PSS के अन्य संभावित कारणों में शामिल हैं:

डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (Disproportionate short stature)

डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर (DSS) से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर दोषपूर्ण जीन के कारण होती हैं। DSS के साथ पैदा होने वाले कई बच्चों के माता-पिता की लंबाई औसत होती हैं और जीन में परिवर्तन संयोग से होता है। प्रभावित जीन हड्डियों और उपास्थि को ठीक से विकसित करने से रोकते हैं, जिससे विकास रुक जाता है।

DSS उत्पन्न करने वाली समस्याओं से ग्रसित लोगों के बच्चे भी उनकी समस्याओं से प्रभावित हो सकते हैं। DSS उत्पन्न करने वाली समस्याएं आमतौर पर जन्म से मौजूद होती हैं।

DSS का सबसे आम कारण एकोन्ड्रोप्लेसिया नामक समस्या है। इसके कारण अंग छोटे (विशेष रूप से बांह का ऊपरी हिस्सा और जांघ), बड़े कपाल के साथ ऊंचा माथा, छोटे हाथ और पैर और रीढ़ की हड्डी की असामान्यता हो सकती है।

डीएसएस का कारण बनने वाली अन्य स्थितियों में शामिल हैं:

  • हाइपोकॉन्ड्रोप्लेसिया
  • म्यूकोपॉलीसैकेराइड डिजीज
  • डायस्ट्रोफिक डिस्प्लेसिया
  • स्पोंडिलोफिएफ़िशियल डिसप्लेसिया
  • मल्टीपल एपिफेसियल डिसप्लेसिया
  • सीडोएकोन्ड्रोप्लेसिया
  • कॉनराडी सिंड्रोम
  • एलिस-वैन क्रेवेल्ड सिंड्रोम

आप रेस्ट्रिक्टेड ग्रोथ एसोशिएशन की वेबसाइट पर इन दुर्लभ समस्याओं में से किसी के भी बारे में अधिक जानकारी पा सकते हैं।

सीमित विकास का निदान

सीमित विकास (बौनापन) का निदान लक्षणों, लंबाई की माप, पारिवारिक इतिहास और जांच पर आधारित होता है।

प्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर बचपन या किशोरावस्था तक ध्यान में नहीं आता है।

वृद्धि हार्मोन की कमी की पहचान (Diagnosing growth hormone deficiency)

वृद्धि हार्मोन की कमी की पहचान आमतौर पर ग्रोथ हार्मोन स्टीमुलेशन टेस्ट के जरिए किया जाता है।

रक्त में वृद्धि हार्मोन के स्तर को बढ़ाने के लिए दवा को एक नस में इंजेक्ट किया जाता है। यदि पिट्यूटरी ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर रही है, तो वृद्धि हार्मोन का स्तर सामान्य से कम होगा, जिससे विकास हार्मोन में कमी का संकेत मिलता है।

वृद्धि हार्मोन की कमी का निदान करने के लिए आमतौर पर दो ग्रोथ हार्मोन स्टीमूलेशन टेस्ट जरूरी होते हैं। यदि खून की जांच में वृद्धि हार्मोन के कम उत्पादन का पता चलता है तो पिट्यूटरी ग्रंथि की जांच के लिए मस्तिष्क का स्कैन कराना जरूरी होता है।

सीमित विकास का कारण बनने वाली समस्याओं की पहचान

डिसप्रपोर्सनेट शॉर्ट स्टेचर का कारण बनने वाली समस्याओं का निदान जन्म के समय किया जाता है। हालाँकि, कुछ मामलों में बाद में उनका निदान किया जा सकता है। जैसे कि सिडोएकोन्ड्रोप्लेशिया का निदान आमतौर पर तीन साल की उम्र में किया जाता है।

आमतौर पर छोटे कद के कारणों से जुड़ी समस्याओं की पहचान के लिए निम्न परीक्षण किए जा सकते हैं :

  • खून की जांच (Blood tests)- लिवर, किडनी और हड्डियों की समस्याओं या कुपोषण (malnutrition) का पता लगाने के लिए खून की जांच की जाती है। इसके अलावा क्रोमोसोम का विश्लेषण करने के लिए भी खून की जांच की जाती है। यह टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) जैसी कुछ समस्याओं की पहचान में मदद करता है।
  • पेशाब की जांच से कुछ एंजाइम की कमी से जुड़े रोगों जैसे कि म्यूकोपॉलीसेकेराइड रोग की पहचान की जाती है।
  • हड्डियों या पिट्यूटरी ग्रंथि में असामान्यताओं का पता लगाने के लिए एक्सरे या एमआरआई स्कैन जांच जैसे इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं जो ग्रोथ हार्मोन की कमी का संकेत दे सकते हैं।
  • अस्थि मज्जा या त्वचा की बायोप्सी कुछ समस्याओं को इंगित करने वाली असामान्यताओं का निदान करने में मदद कर सकती है।

सीमित विकास के लिए उपचार

ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन वृद्धि हार्मोन की कमी से पीड़ित बच्चों में विकास को बढ़ाने में मदद करता है।

शॉर्ट स्टेचर के लिए उपलब्ध इलाज के बारे में नीचे दिया गया है।

ग्रोथ हार्मोन ट्रीटमेंट (Growth hormone treatment)

निम्न में से किसी भी समस्या के कारण बच्चों का विकास रुकने पर उनके लिए निम्न विकल्प मौजूद हो सकते हैं:

जो बच्चे छोटे पैदा होते हैं और चार साल की उम्र या उसके बाद तक उनका विकास नहीं हो पाता है

विशेष दोषपूर्ण जीन वाले बच्चे, जिन्हें शॉर्ट स्टेचर होमोबॉक्स-युक्त जीन की कमी (या SHOX जीन हैप्लोइनसफिशिएंसी) कहा जाता है

वृद्धि हार्मोन की कमी से जूझ रहे बच्चे ग्रोथ हार्मोन ट्रीटमेंट के प्रति बहुत अच्छी तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। जबकि अन्य समस्याओं से पीड़ित बच्चों में वृद्धि हार्मोन की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है। बच्चे के विकास के पैटर्न के आधार पर अलग-अलग उम्र में इलाज शुरू किया जा सकता है।

जैसे कि टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित लड़कियों को ग्रोथ हार्मोन उनके असामान्य विकास का पता चलते ही दिया जाता है। इससे उनकी लंबाई बढ़ने में मदद मिलती है।

बच्चों में ग्रोथ हार्मोन डिसऑर्डर को नियंत्रित करने के लिए हमेशा बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट) की देखरेख में सोमाट्रोपिन उपचार शुरू किया जाना चाहिए। आमतौर पर रोजाना इंजेक्शन के जरिए इसकी एक खुराक दी जाती है।

सोमाट्रोपिन के कारण स्किन एलर्जी होना एक आम दुष्प्रभाव है। कुछ दुर्लभ मामलों में के कारण गंभीर सिरदर्द, उल्टी और आंखों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

दीर्घकालिक समस्याओं को नियंत्रित करना (Controlling long-term conditions)

शुरुआती अवस्था से फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, आंत रोग या अर्थराइटिस (arthritis) जैसे दीर्घकालिक समस्याओं को नियंत्रित करने से विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को रोका जा सकता है।

बच्चों को अपनी स्वास्थ्य टीम से नियमित रूप से जांच करवानी चाहिए और जितनी जल्दी हो सके बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) के पास भेजना चाहिए। उनकी देखभाल में निम्न में से एक या अधिक स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की टीम शामिल हो सकती है:

  • फिजियोथेरेपिस्ट
  • व्यावसायिक थेरेपिस्ट
  • आहार विशेषज्ञ
  • श्रवण विशेषज्ञ (ऑडियोलॉजिस्ट)
  • स्पीच और लैंग्वेज थेरेपिस्ट
  • तंत्रिका तंत्र विकारों के विशेषज्ञ (न्यूरोलॉजिस्ट)
  • रीढ़ और जोड़ों की समस्याओं के विशेषज्ञ (आर्थोपेडिक विशेषज्ञ)
  • बच्चों की विशेषज्ञ नर्स

जेनेटिकिस्ट

पैर लंबा करना (Leg lengthening)

यदि खासतौर पर किसी व्यक्ति का पैर काफी छोटा है, तो पैर-लंबी करने की प्रक्रिया, जिसे डिस्ट्रैक्शन कहा जाता है, इसके लिएएक विकल्प है। इसमें पैर की हड्डी को तोड़कर इसे एक विशेष फ्रेम में फिक्स किया जाता है। यह धीरे-धीरे हर दिन जुड़ता है जिससे पैर की हड्डी लंबी हो जाती है।

हालांकि, यह एक लंबी प्रक्रिया होती है और इसमें जटिलताओं का खतरा भी होता है। इसके अलावा, यह हमेशा सकारात्मक परिणाम नहीं मिलता है। चूंकि पैर की हड्डी को लंबा करने की सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है, इसलिए इसकी प्रक्रिया और जोखिमों को समझने के लिए अपने आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉक्टर से बात करें।

कुछ लोगों को अंगों को लंबा करने की प्रक्रिया के बाद दर्द होता है। अन्य संभावित जटिलताओं में शामिल हैं:

  • खराब हड्डी बनना
  • संक्रमण
  • असामान्य तरीके से हड्डी का लंबा होना
  • नस में खून का थक्का बनना
NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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