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डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) क्या है?

डिहाइड्रेशन तब होता है जब हम जितना तरल पदार्थ लेते हैं, उससे अधिक तरल पदार्थ हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है।

जब हमारे शरीर में पानी की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है, तो यह शरीर में खनिजों (नमक और चीनी) के संतुलन को गड़बड़ कर देता है। इसके कारण शरीर का कार्य प्रभावित होता है।

एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर में दो तिहाई से अधिक पानी होता है। यह जोड़ों और आंखों को चिकनाहट प्रदान करता है, पाचन में सहायता करता है, अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है।

डिहाइड्रेशन के कुछ शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं:

  • प्यास लगना और चक्कर आना
  • तीक्ष्ण गंध के साथ गहरे रंग का पेशाब होना
  • सामान्य से कम बार पेशाब आना

किसी बच्चे को डिहाइड्रेशन हो सकता है अगर :

  • सिर का तालु अंदर धंसा (fontanelle) हुआ हो
  • रोते समय आंसू न निकलना या कम निकलना
  • नैपकिन कम गीला होना
  • सुस्ती महसूस करना

थोड़ी मात्रा में तरल पदार्थ निकलने पर भी शरीर प्रभावित होता है।

डिहाइड्रेशन के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

डिहाइड्रेशन का कारण क्या है?

डिहाइड्रेशन आमतौर पर पर्याप्त तरल पदार्थ या पानी न पीने या शरीर से द्रव बाहर निकलने के कारण होता है। जलवायु, अधिक शारीरिक व्यायाम और आपका आहार के कारण भी डिहाइड्रेशन हो सकता है।

इसके अलावा बीमारी जैसे लगातार उल्टी और दस्त, बुखार से पसीना आना या गर्म जगह पर एक्सरसाइज करने के कारण भी डिहाइड्रेशन हो सकता है।

डिहाइड्रेशन के कारणों के बारे में और पढ़ें।

डिहाइड्रेशन का खतरा किसे होता है?

डिहाइड्रेशन किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन कुछ विशेष उम्र के लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। इसमें शामिल है:

  • बच्चे और शिशु - इनके शरीर का वजन कम होता है और कम मात्रा में तरल पदार्थ के बाहर निकलने से शरीर संवेदनशील हो जाता है।
  • बुजुर्ग- इन्हें अपने शरीर में पानी की कमी के बारे में कम जानकारी होती है। बुजुर्गों को पर्याप्त तरल पदार्थ की आवश्यकता होती है।
  • लंबे समय से अस्वस्थ व्यक्ति - मधुमेह से पीड़ित मरीज या शराब का सेवन करने वाला व्यक्ति।
  • एथलीट्स - पसीने के जरिए अधिक मात्रा में तरल पदार्थ शरीर से बाहर निकल आता है।

क्या करें

अगर आपको डिहाइड्रेशन की समस्या हो गई है, तो खूब सारे तरल पदार्थों का सेवन करें। पानी, सेमी-स्किम्ड दूध, पतला स्क्वैश या फलों का रस नियमित अंतराल पर लें। लेकिन कैफीन और सोडा युक्त पेय पदार्थों के सेवनसे परहेज करें।

लगातार उल्टी और दस्त के कारण आपके शरीर में पानी की कमी हो जा रही हैं तो कम मात्रा में बार-बार पानी या तरल पदार्थ पीने की कोशिश करें।

शिशुओं और बच्चों में डिहाइड्रेशन की समस्या होने पर उन्हें पानी नहीं पिलाना चाहिए, क्योंकि यह उनके शरीर में पहले से ही कम मात्रा में मौजूद खनिजों को पतला कर देता है जिससे समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।

इसके बजाय उन्हें फलों का पतला जूस या रिहाइड्रेशन घोल (फार्मेसी पर उपलब्ध) देना चाहिए। आप छोटे बच्चे को तरल पदार्थ देने के लिए चम्मच या सीरिंज का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो डिहाइड्रेशन गंभीर हो सकता है और इसके कारण बच्चे को दौरे पड़ना, मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं और यहां तक की मौत भी हो सकती है।

डिहाइड्रेशन के इलाज के बारे में और पढ़ें।

डॉक्टर के पास कब जाएं

अगर पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन करने के बाद भी लक्षण लगातार बने हों, या आपको लगता है कि आपके शिशु या बच्चे को डिहाइड्रेशन हो गया है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

डिहाइड्रेशन की आशंका होने पर आपका डॉक्टर खून की जांच या पेशाब की जांच के साथ ही शरीर में नमक (सोडियम और पोटैशियम) के संतुलन की भी जांच करेगा।

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हों, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें:

  • थकान (सुस्ती) या उलझन महसूस होना
  • मुँह सूखना और आँखों में आंसू न बनना
  • आठ घंटे तक पेशाब न होना
  • त्वचा शुष्क होना और ढीली पड़ जाना
  • हृदय की धड़कन बढ़ना
  • उल्टी या मल में खून आना
  • निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन)

पिछले 24 घंटों में यदि आपके बच्चे को 6 या इससे अधिक बार दस्त हो चुका हो या तीन से अधिक बार उल्टी हो चुकी हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

डिहाइड्रेशन (dehydration) के लक्षण

डिहाइड्रेशन (dehydration) के लक्षण

डिहाइड्रेशन हल्का, मध्यम या गंभीर हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर का वजन तरल पदार्थों के माध्यम से कितना कम हो गया है।

प्यास डिहाइड्रेशन का पहला लक्षण है। अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • चक्कर आना या कमजोरी
  • सिरदर्द
  • थकान
  • मुँह सूखना, होंठ और आँखें शुष्क होना
  • पेशाब का रंग गहरा होना
  • कम मात्रा में पेशाब होना (दिन में तीन या चार बार से कम)

डिहाइड्रेशन के कारण ताकत और शक्ति भी कम हो सकती है। यह आमतौर पर लू लगने का मुख्य कारण है।

ऐसी स्थिति में आपको चिकित्सा सलाह लिए बिना डिहाइड्रेशन को कम करने के लिए अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लेना चाहिए।

यदि डिहाइड्रेशन क्रोनिक हो, तो यह आपके किडनी के कार्य को प्रभावित कर सकता है और किडनी की पथरी हो सकती है। इसके अलावा निम्न समस्याएं भी हो सकती है :

  • लिवर, जोड़े और मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होना
  • कोलेस्ट्रॉल की समस्या
  • कब्ज

गंभीर डिहाइड्रेशन

यदि डिहाइड्रेशन का इलाज न किया जाए तो यह गंभीर हो सकता है।

गंभीर डिहाइड्रेशन एक आपातकालीन स्थिति है। इसलिए तत्काल डॉक्टर के पास जाएं।

यदि आपको निम्न लक्षणों में से कोई भी लक्षण महसूस होते है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें:

  • थकान (सुस्ती) या उलझन महसूस होना
  • मुँह सूखना और आँखों में आंसू न बनना
  • आठ घंटे तक पेशाब न होना
  • त्वचा शुष्क होना और ढीली पड़ जाना
  • हृदय की धड़कन बढ़ना
  • उल्टी या मल में खून आना
  • निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन)
  • चिड़चिड़ापन
  • आंखें धंस जाना
  • नब्ज कमजोर होना
  • हाथ पैर ठंडे पड़ जाना
  • दौरे पड़ना
  • भ्रम होना

यदि गंभीर डिहाइड्रेशन का तुरंत इलाज नहीं किया जाता है, तो यह कई परेशानियों का कारण बन सकता है। डिहाइड्रेशन के कारण रक्त का प्रवाह रुक जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है और तरल पदार्थों के नुकसान को रोकने के लिए ड्रिप लगाया जाता है।

डिहाइड्रेशन (dehydration) के कारण

डिहाइड्रेशन आमतौर पर पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन न करने या जितना तरल पदार्थ आप लेते हैं, उससे अधिक शरीर से बाहर निकलने के कारण होता है। पसीना, आँसू, उल्टी, पेशाब या दस्त के माध्यम से तरल पदार्थ शरीर से बाहर निकल आता है।

डिहाइड्रेशन की गंभीरता कई चीजों पर निर्भर कर सकती है, जैसे कि जलवायु, शारीरिक गतिविधि का स्तर और आहार।

डिहाइड्रेशन के प्रकार

डिहाइड्रेशन दो प्रकार के होते हैं। ये निम्न हैं:

  • आइसोटोनिक डिहाइड्रेशन (isotonic dehydration) - जब पानी और नमक समान अनुपात में शरीर से बाहर निकलते हैं तो इसे आइसोटोनिक डिहाइड्रेशन कहा जाता है। तरल पदार्थ के रूप में नमक और पानी हमारी कोशिकाओं के आसपास मौजूद होते हैं। इस प्रकार का डिहाइड्रेशन आमतौर पर दस्त के कारण होता है।
  • हाइपरनेट्रेमिक डिहाइड्रेशन (Hypernatraemic dehydration) - यह आमतौर पर शिशुओं या बच्चों को प्रभावित करता है। हाइपरनेट्रेमिया का अर्थ रक्त में नमक की अधिक मात्रा से है।

यह तब होता है जब बच्चे के शरीर से नमक के बजाय अधिक मात्रा में पानी बाहर निकल आता है। जैसे बच्चे को पतला दस्त और अधिक उल्टी होने पर।

डिहाइड्रेशन कई कारणों से होता है, इसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।

बीमारी

डिहाइड्रेशन आमतौर पर गैस्ट्रोएंट्राइटिस नामक बीमारी के कारण होता है। इसमें दस्त और लगातार उल्टी के कारण तरल पदार्थ शरीर से बाहर निकल आते हैं।

पसीना

यदि आप बुखार, व्यायाम और खेल के कारण अधिक पसीना बहाते हैं, या गर्म मौसम में हाथ से भारी से काम करते हैं, तो आपको डिहाइड्रेशन हो सकता है।

इन स्थितियों में नियमित रूप से पर्याप्त पानी या तरल पदार्थ पीना जरूरी है। यह जरूरी नहीं कि आप अधिक पसीना बहाकर शरीर से तरल पदार्थ कम कर दें।

बच्चों और किशोरों को विशेष रूप से जोखिम होता है क्योंकि वे डिहाइड्रेशन के लक्षणों को अनदेखा कर सकते हैं। इसके अलावा उन्हें इसकी पहचान या इलाज के बारे में जानकारी नहीं होती है।

शराब

बहुत अधिक शराब पीने से भी डिहाइड्रेशन हो सकता है। शराब एक मूत्रवर्धक है, जिसका अर्थ है कि शराब का सेवन करने से अधिक पेशाब हो सकता है।

शराब पीने के बाद सिरदर्द होना डिहाइड्रेशन का संकेत है। जब आप शराब पी रहे हों तो आपको भरपूर पानी पीने की कोशिश करनी चाहिए।

मधुमेह

यदि आपको मधुमेह है, तो आपको डिहाइड्रेशन का खतरा हो सकता है। मधुमेह के रोगियों के रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक होता है। इस दौरान किडनी अधिक मूत्र का निर्माण करके ग्लूकोज से छुटकारा पाने की कोशिश करती है। बार-बार पेशाब होने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है।

विभिन्न प्रकार के मधुमेह के बारे में और पढ़ें।

किन लोगों को ज्यादा जोखिम होता है?

इस उम्र के लोगों को डिहाइड्रेशन का जोखिम अधिक होता हैं:

  • बच्चे और शिशु - इनके शरीर का वजन कम होता है और कम मात्रा में तरल पदार्थ के बाहर निकलने से शरीर संवेदनशील हो जाता है।
  • बुजुर्ग- उन्हें अपने शरीर में पानी की कमी के बारे में कम जानकारी होती है और ये भी कि उन्हें कितनी मात्रा में पदार्थ की आवश्यकता है
  • लंबे समय से अस्वस्थ व्यक्ति - मधुमेह से पीड़ित मरीज या शराब का सेवन करने वाला व्यक्ति।
  • एथलीट्स - पसीने के जरिए अधिक मात्रा में तरल पदार्थ शरीर से बाहर निकल आता है।

डिहाइड्रेशन (dehydration) का इलाज

डिहाइड्रेशन (dehydration) के इलाज का सबसे अच्छा तरीका है कि सेमी-स्किम्ड दूध, पतला स्क्वैश या फलों का पतले जूस जैसे तरल पदार्थों का खूब सेवन करना।

मीठे पेय पदार्थ शरीर में चीनी की भरपाई करने में मदद करते हैं और नमकीन स्नैक शरीर में नमक की कमी की भरपाई करते हैं।

डिहाइड्रेशन से पीड़ित शिशुओं और बच्चों को केवल पानी नहीं देना चाहिए क्योंकि यह उनके शरीर में पहले से ही कम मात्रा के खनिजों को पतला कर देता है और समस्या को बदतर बना सकता है। इसके बजाय, उन्हें पतला स्क्वैश, फलों का पतला जूस या रिहाइड्रेशन घोल देना चाहिए।

यदि उल्टी या दस्त की वजह से आपके बच्चे के शरीर से तरल पदार्थ बाहर निकल जा रहा है, तो उसे कम मात्रा में बार-बार तरल पदार्थ दें। इसके लिए आप चम्मच या सीरिंज का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वयस्कों, बच्चों और शिशुओं में उल्टी के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

रिहाइड्रेशन घोल

डिहाइड्रेशन होने पर शुगर और नमक के साथ ही शरीर में पानी की भी कमी हो जाती है। रिहाइड्रेशन घोल शरीर में तरल पदार्थों का सही संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह घोल पोटैशियम, सोडियम, ग्लूकोज और स्टार्च का मिश्रण होता है

दवा की दुकानों पर कई तरह के रिहाइड्रेशन घोल उपलब्ध हैं। अपने बच्चे और शिशु के लिए डॉक्टर की सलाह लेकर ही रिहाइड्रेशन घोल खरीदना चाहिए।

अपने बच्चे के लिए उपयुक्त रिहाइड्रेशन घोल के बारे में डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछें।

गंभीर डिहाइड्रेशन

यदि किसी व्यक्ति गंभीर डिहाइड्रेशन की आशंका है तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। (गंभीर डिहाइड्रेशन के लक्षण देखें)।

उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है। खासतौर से शिशुओं, बच्चों और बुजुर्गों को डिहाइड्रेशन की समस्या होने पर तुरंत उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

नाक में नसोगैस्ट्रिक ट्यूब या नस में सलाइन ड्रिप का उपयोग करके मरीज को तरल पदार्थ दिया जा सकता है। यह घोल की अपेक्षा शरीर में तेजी से जरूरी पोषक तत्वों को पहुंचाता है।

यदि आपको पेट की समस्या है तो कुछ रिहाइड्रेशन घोल में पर्याप्त नमक नहीं मिलाया जाता है। ऐसी स्थिति में आपको पर्याप्त ताकत प्रदान करने वाले घोल आवश्यकता होगी। आपके डॉक्टर आपको उपयुक्त रिहाइड्रेशन घोल के बारे में सुझाव देंगे।

डिहाइड्रेशन (dehydration) से कैसे बचें

डिहाइड्रेशन से बचने के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

खाद्य मानक एजेंसी (एफएसए) के अनुसार यदि (या इसी तरह की जलवायु वाले किसी स्थान पर ) में रहते हैं तो आपको हर दिन 1.2 लीटर यानी 6-8 गिलास तरल पदार्थ पीना चाहिए।

पानी के साथ-साथ FSA, सेमी- स्किम्ड दूध, पतला स्क्वैश और फल का पतला रस पीने की सलाह देता है।

नियमित पानी पीएं

यदि आप बहुत सक्रिय हैं, या यदि मौसम काफी गर्म है, तो डिहाइड्रेशन की संभावना बढ़ सकती है। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए आपको नियमित पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए।

हर व्यक्ति को अलग-अलग मात्रा में पसीना आता है। इसलिए यह सलाह देना मुश्किल है कि आपको कितनी मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। हालांकि एक्सरसाइज करते समय आपको सामान्य से अधिक तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए। यदि आप गर्म स्थान पर एक्सरसाइज करते हैं तो पर्याप्त तरल पदार्थ आपके शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करेगा। इसका कारण यह है कि गर्म स्थान पर आपको अधिक पसीना होगा और आपके शरीर से तरल पदार्थ तेजी से निकलेगा।

हालांकि, अधिक तरल पदार्थ पीने से आपके रक्त में सोडियम (नमक) की मात्रा कम हो सकती है। इससे हाइपोनैट्रेमिया नामक गंभीर और घातक समस्या हो सकती है। यदि आप तरल पदार्थ पीने के बाद असहज और भारी महसूस करते हैं, तो कम मात्रा में सेवन करें।

बीमारी

यदि कोई व्यक्ति या आपका बच्चा बीमार है और उसे बुखार, उल्टी और दस्त की शिकायत हो तो, डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए उसे तुरंत पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना चाहिए।

बच्चों के लिए सलाह

बच्चों को पानी या अन्य तरल पदार्थों की मात्रा के बारे में कोई विशेष सलाह नहीं दी जाती है।

हालांकि, बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए शरीर में तरल पदार्थों की भरपाई करना जरूरी है। वयस्कों की तरह, बच्चों के शरीर से अधिक पानी तब निकलता है जब वे गर्म मौसम में होते हैं और जब वे शारीरिक रूप से सक्रिय होते हैं।

आपको अपने बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त पेय पदार्थ देना चाहिए।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।