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एटॉपिक एक्जिमा (Atopic eczema)

मेडिकली रिव्यूड

परिचय

एटॉपिक एक्‍जिमा (Atopic eczema), एक्‍जिमा का सबसे आम प्रकार है, इसे एटॉपिक डर्मेटाइटिस (as atopic dermatitis) भी कहते हैं। यह मुख्‍य तौर पर बच्‍चों को होता है, मगर किशोरावस्‍था तक बना रह सकता है।

एक्‍जिमा त्‍वचा की ऐसी अवस्‍था है जिसमें खुजली, लाल, रूखी और चटकने के लक्षण होते हैं। यह लंबे समय तक रहने वाली या स्‍थायी हो सकती है।

एटॉपिक एक्‍जिमा ज्‍यादातर शरीर के ऐसे हिस्‍सों में होता है जहां की त्‍वचा मुड़ रही होती है, जैसे :

  • टखने के पीछे
  • कोहनी का अंदरूनी हिस्‍सा
  • गर्दन के किनारों पर
  • आंखों और कान के पास

एटॉपिक एक्‍जिमा (Atopic eczema) उग्रता के मामले में अलग-अलग हो सकता है और ज्‍यादातर लोगों में औसत दर्जे का ही होता है। त्‍वचा का चटकना, दर्द होना और खून निकलना इसके उग्र लक्षण हो सकते हैं।

इसके शिकार लोगों को कुछ समय के लिए ऐसा भी अनुभव होता है जब उनके लक्षण हल्‍के होने लगते हैं, साथ ही कभी एकदम से लक्षण उभरते हैं और उन्‍हें अतिरिक्‍त इलाज की जरूरत पड़ती है।

एटॉपिक एक्‍जिमा के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

एटॉपिक एक्‍जिमा होने का क्‍या कारण है ?

एटॉपिक एक्‍जिमा के सटीक कारण अब तक अज्ञात हैं। हालांकि यह ज्‍यादातर उन लोगों को होता है, जिन्‍हें किसी भी चीज से एलर्जी होती है (‘एटॉपिक’ का अर्थ एलर्जी करने वाले एलर्जेंस के प्रति संवेदनशील होना है)।

एटॉपिक एक्‍जिमा (Atopic eczema) की पारिवारिक पृष्‍ठभूमि हो सकती है और यह दमा व हे-फीवर जैसे समस्‍या के साथ ही होता है।

एटॉपिक एक्‍जिमा के कारणों के बारे में और जानकारी के लिए पढ़ें।

एटॉपिक एक्‍जिमा का इलाज

बच्‍चे के बड़े होने पर एटॉपिक एक्‍जिमा (Atopic eczema) या तो ठीक हो जाता है या काफी हद तक साफ हो जाता है। एटॉपिक एक्‍जिमा के तकरीबन 53% बच्चों में यह 11 साल की उम्र का होने तक सही हो जाता है, और 65% मामलों में यह उनके 16 साल का होने तक साफ हो जाता है।

गंभीर एक्‍जिमा का रोजमर्रा की जिंदगी पर महत्‍वपूर्ण असर होता है और इससे शारीरिक व मानसिक रूप से उबर पाना काफी मुश्‍किल होता है। इसमें संक्रमण होने का खतरा भी अधिक होता है।

एटोपिक एक्‍जिमा की जटिलताओं के बारे में और पढ़ें।

एक्‍जिमा के लक्षणों को नियंत्रित करने और संभालने के लिए कई तरह के इलाज उपलब्‍ध हैं, जिसमें दवाएं और स्‍वयं सहायता तकनीक दोनों शामिल है।

इसके मुख्‍य इलाज हैं :

एमोलिएंट्स/ emollients (मॉइश्‍चराइज करने वाले इलाज) – रूखी त्‍वचा के लिए हमेशा इस्‍तेमाल किए जाते हैं

टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स/ topical corticosteroids - इनका इस्‍तेमाल बीमारी उभरने पर सूजन और लालिमा को कम करने में किया जाता है

एटॉपिक एक्‍जिमा का इलाज कैसे करें इसके बारे में और पढ़ें।

कौन होता है प्रभावित ?

बच्‍चों के पांच साल की उम्र का होने से पहले तक एटॉपिक एक्‍जिमा (Atopic eczema) हो सकता है। कई बच्‍चों में यह उनके पहले जन्‍मदिन मनाने से पूर्व ही हो जाता है।

हाल के वर्षों में लोगों में इस समस्या की पहचान के मामले बढ़े हैं। यह जीवनशैली में बदलाव या एक्‍जिमा के लिए जिम्‍मेदार पर्यावरण संबंधी कारणों से हो सकता है, या वर्तमान में स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी इसके लक्षणों के प्रति ज्‍यादा सजग हो गए हैं।

पुरुष और महिलाएं समान रूप से प्रभावित होते हैं।

लक्षण

एटॉपिक एक्‍जिमा के लक्षण हमेशा उपस्‍थित होते हैं। यह रोग के उभरने पर काफी खराब हो जाते हैं और इन्‍हें अतिरिक्‍त इलाज की जरूरत होती है।

त्‍वचा में खुजली, रूखापन और लाली इसके लक्षण हैं, त्‍वचा खुरदुरी और चटकी हुई भी हो सकती है।

एटॉपिक एक्‍जिमा पूरे शरीर पर छोटे-छोटे धब्‍बों के रूप में हो सकता है, मगर यह आमतौर पर सबसे ज्‍यादा :

नवजात शिशुओं में – चेहरे और खोपड़ी में, बाजुओं और पैरों में होता है

वयस्‍क और बच्‍चों में – हाथों पर या बाजुओं और पैरों के जोड़ों के आसपास, जैसे कोहनी या टखनों के पीछे की ओर

एटॉपिक एक्‍जिमा के लक्षण इस तथ्‍य के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं कि आप या आपका बच्‍चा कितने गंभीर रूप से इस अवस्‍था से प्रभावित हैं।

औसत दर्जे के एटॉपिक एक्‍जिमा के शिकार लोगों में अमूमन छोटे-छोटे दायरों में रूखी त्‍वचा के धब्‍बे होते हैं, जिनमें कभी-कभी खुजली भी होती है। बेहद गंभीर मामलों में एटॉपिक एक्‍जिमा (Atopic eczema) की वजह से बड़े दायरे में रूखी त्‍वचा, लगातार खुजली या पानी निकलने के लक्षण हो सकते हैं।

खुजली की वजह से आपकी नींद खराब हो सकती है और प्रभावत त्‍वचा से खून निकल सकता है। इससे खुजली की स्‍थिति और भी खराब हो सकती है और खुजली व चुभन का लगातार चक्र शुरू हो सकता है। बच्‍चों में इसकी वजह से रात-रातभर नींद न आने की समस्‍या और स्‍कूल में ध्‍यान लगाने में दिक्‍कत हो सकती है।

बीमारी उभरने पर

एटॉपिक एक्‍जिमा के लक्षण हमेशा उपस्‍थित होते हैं। यह रोग के उभरने पर काफी खराब हो जाते हैं और इन्‍हें अतिरिक्‍त इलाज की जरूरत होती है।

त्‍वचा में खुजली, रूखापन और लाली इसके लक्षण हैं, त्‍वचा खुरदुरी और चटकी हुई भी हो सकती है।

एटॉपिक एक्‍जिमा पूरे शरीर पर छोटे-छोटे धब्‍बों के रूप में हो सकता है, मगर यह आमतौर पर सबसे ज्‍यादा :

नवजात शिशुओं में – चेहरे और खोपड़ी में, बाजुओं और पैरों में होता है

वयस्‍क और बच्‍चों में – हाथों पर या बाजुओं और पैरों के जोड़ों के आसपास, जैसे कोहनी या टखनों के पीछे की ओर

एटॉपिक एक्‍जिमा के लक्षण इस तथ्‍य के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं कि आप या आपका बच्‍चा कितने गंभीर रूप से इस अवस्‍था से प्रभावित हैं।

औसत दर्जे के एटॉपिक एक्‍जिमा के शिकार लोगों में अमूमन छोटे-छोटे दायरों में रूखी त्‍वचा के धब्‍बे होते हैं, जिनमें कभी-कभी खुजली भी होती है। बेहद गंभीर मामलों में एटॉपिक एक्‍जिमा (Atopic eczema) की वजह से बड़े दायरे में रूखी त्‍वचा, लगातार खुजली या पानी निकलने के लक्षण हो सकते हैं।

खुजली की वजह से आपकी नींद खराब हो सकती है और प्रभावत त्‍वचा से खून निकल सकता है। इससे खुजली की स्‍थिति और भी खराब हो सकती है और खुजली व चुभन का लगातार चक्र शुरू हो सकता है। बच्‍चों में इसकी वजह से रात-रातभर नींद न आने की समस्‍या और स्‍कूल में ध्‍यान लगाने में दिक्‍कत हो सकती है।

बीमारी उभरने पर

बीमारी उभरने पर उसके लक्षण काफी खराब हो सकते हैं, ऐसे में आप या आपके बच्‍चे के लिए प्रभावशाली इलाज जरूरी हो सकता है।

बीमारी उभरने पर आपकी त्‍वचा में :

  • अत्‍यधिक खुजली, लालिमा लिए हुए, गर्म, रूखी और पपड़ीदार हो सकती है
  • गीली, पानी निकला और सूजन हो सकती है
  • बैक्‍टीरिया से संक्रमित (अमूमन स्‍टेफिलोकोकस ऑरियस)

संक्रमण और एटॉपिक एक्‍जिमा की अन्‍य जटिलताओं के बारे में और पढ़ें।

कारण

एक्‍जिमा होने का कोई एक निश्‍चित कारण नहीं है। इसके लिए वंशानुगत और पर्यावरण संबंधी कारणों का मिश्रण जिम्‍मेदार हो सकता है, जो विभिन्‍न समय में एक साथ काम करता है।

कई बार ऐसा भी होता है कि प्रभावित व्‍यक्‍ति को जन्‍म से ही यह बीमारी होने की आशंका होती है, क्‍योंकि यह उसे विरासत में अपने माता-पिता से मिलती है।

धूल या परागकण जैसे पर्यावरण संबंधी कारणों के संपर्क में आने पर एक्‍जिमा उभरने लगता है। ऐसे कई कारण होते हैं, जिनके सक्रिय होने पर एक्‍जिमा के लक्षण बिगड़ सकते हैं।

आनुवांशिक

शोध में पता चला है कि मोटेतौर पर एटॉपिक एक्‍जिमा वंशानुगत अवस्‍था है। इसका अर्थ यह हुआ कि इसके कारण प्रभावित व्‍यक्‍ति के जीन्‍स में होते हैं, जो उसे अपने माता-पिता से विरासत में मिलते हैं।

किसी बच्‍चे के माता या पिता को एटॉपिक एक्‍जिमा है, तो उसे भी यह अवस्‍था होने की बहुत संभावना होती है। अध्‍ययन में पता चला है कि जिन बच्‍चों के माता-पिता में से किसी को भी एटॉपिक एक्‍जिमा होता है उनमें से 60% को भी एक्‍जिमा होता है। अगर दोनों अभिभावकों को एटॉपिक एक्‍जिमा है तो बच्‍चे को भी यह बीमारी होने के 80% आसार हैं।

अभी यह जानकारी नहीं है कि कौन से जीन्‍स एक्‍जिमा के लिए जिम्‍मेदार हैं।

पर्यावरण

अगर जीन्‍स के कारण आप एटॉपिक एक्‍जिमा के शिकार हो सकते हैं तो यह अवस्‍था कुछ एलर्जेंस जैसे पर्यावरणजनित कारणों के संपर्क में आने पर आपको अपनी चपेट में ले सकती है।

एलर्जेंस (Allergens ) वह तत्‍व होते हैं जिनके संपर्क में आने पर हमारा शरीर असामन्‍य प्रतिक्रिया करता है। इसे एलर्जी कहा जाता है। एटॉपिक एक्‍जिमा का कारण बनने वाले कुछ एलर्जेंस में शामिल है :

  • घर की धूल के कण
  • पालतू जानवरों के रोएं
  • परागकण

एटॉपिक एक्‍जिमा कभी-कभी बच्‍चों के एक साल की उम्र का होने से पहले खाने वाले एलर्जेंस से भी हो सकता है। खाने की जिन चीजों से एलर्जी हो सकती है उनमें शामिल है :

  • गाय का दूध
  • अंडे
  • नट्स
  • सोया
  • गेहूं

एटॉपिक एक्‍जिमा के शिकार बच्‍चों और युवा लोगों पर किए गए कुछ अध्‍ययनों में पता चला है कि एक तिहाई से दो तिहाई लोगों को खाद्य पदार्थों से भी एलर्जी (फूड एलर्जी) थी। फूड एलर्जी होने पर गंभीर एटॉपिक एक्‍जिमा होने की आशंका बढ़ जाती है।

फूड एलर्जी के बारे में और पढ़ें।

एलर्जी का हमेशा कोई रोल नहीं होता है। एक्‍जिमा होने के लिए कई और चीजें जिम्‍मेदार हो सकती हैं, जिसमें शामिल है :

  • ठंडा मौसम
  • नमी या सीलन
  • सख्‍त साबुत
  • बहुत ज्‍यादा धोना
  • मोटे कपड़े

उतप्रेरक (Triggers)

उत्प्रेरकों से एटॉपिक एक्‍जिमा काफी खराब हो सकता है। हालांकि जरूरी नहीं है कि यह इस अवस्‍था के लिए जिम्‍मेदार हों।

महिलाओं में हॉर्मोन में बदलाव

हॉर्मोन ऐसे शक्तिशाली रसायन होते हैं जिनका उत्‍पादन हमारे शरीर में होता है और इनके बड़ी तादाद में प्रभाव होते हैं। किसी हॉर्मोन के स्‍तर में बदलाव के असर से कुछ महिलाओं में एटॉपिक एक्‍जिमा के लक्षण उभर सकते हैं।

बहुत सी महिलाओं का एक्‍जिमा उनके महावारी चक्र के दौरान किसी समय गंभीर हो सकते हैं। कुछ महिलाओं को पीरिएड्स शुरू होने के कुछ दिन पहले एक्‍जिमा के लक्षण भड़क सकते हैं।

गर्भावस्‍था के दौरान हॉर्मोन में होने बदलाव से भी एटॉपिक एक्‍जिमा प्रभावित हो सकता है :

  • तकरीबन आधी गर्भवती महिलाओं के लक्षण इस दौरान गंभीर हो जाते हैं
  • एक चौथाई गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अपने लक्षणों में आराम महसूस होता है

तनाव

यूं तो तनाव का संबंध एटॉपिक एक्‍जिमा से माना गया है, मगर पूरे तौर पर साफ नहीं है कि इससे यह अवस्‍था कैसे प्रभावित होती है। एक्‍जिमा के शिकार कुछ लोगों के लक्षण तनाव के दौरान गंभीर हो जाते हैं। कुछ अन्‍य लोग लक्षणों के कारण तनावग्रस्‍त महसूस करते हैं।

तनाव प्रबंधन के और तरीकों के बारे में पढ़ें।

कसरत

जबरदस्‍त कसरत करने के बाद पसीने से आपका एक्‍जिमा गंभीर हो सकता है। कसरत करने के दौरान पर्याप्‍त मात्रा में तरल पदार्थ पीकर और नियमित ब्रेक लेकर खुद को ठंडा रखने की कोशिश करें।

उत्‍तेजक

उत्‍तेजक आपके लक्षणों को गंभीर कर सकते हैं। एक्‍जिमा के शिकार किसी और व्‍यक्‍ति को जिन चीजों से परेशानी होती हो, जरूरी नहीं कि आपको भी उनसे समस्‍या हो, मगर इनमें शामिल है :

  • शैंपू, कपड़े धोने वाला लिक्‍विड या बबल बाथ जैसे साबुन और डिटर्जेंट
  • ऊनी और नायलॉन जैसे कुछ खास तरह के कपड़े
  • बहुत गर्मी
  • बहुत ठंडा या शुष्‍क मौसम
  • धूल
  • अनजान पालतू जानवर

अन्‍य उत्‍तेजक

अन्‍य संभावित उत्‍तेजकों में शामिल हैं :

  • त्‍वचा के संपर्क में आने वाली चीजें जैसे परफ्यूम आधारित उत्‍पाद या लेटेक्‍स (एक तरह का प्राकृतिक रूप से बनने वाला रबर)
  • पर्यावरण कारक, जैसे तंबाकू का धुआं, व्‍यस्‍त सड़क के किनारे रहना या खनिज तत्‍वों की अधिकता वाला पानी (हार्ड वॉटर)
  • बदलता मौसम – एटॉपिक एक्‍जिमा के शिकार बहुत से लोगों को अपने लक्षणों में गर्मी के मौसम में सुधार और सर्दियों में गंभीर हो सकते हैं।

पहचान

आपके डॉक्‍टर एटॉपिक एक्‍जिमा की पहचान त्‍वचा की जांच और लक्षणों पर आधारित कुछ सवाल पूछकर कर सकते हैं।

पहचान

आपके डॉक्‍टर एटॉपिक एक्‍जिमा की पहचान त्‍वचा की जांच और लक्षणों पर आधारित कुछ सवाल पूछकर कर सकते हैं।

इन सवालों में शामिल हैं :

  • चकत्‍ते कहां हो रहे हैं और उनमें खुजली है या नहीं
  • लक्षणों की शुरुआत कब हुई
  • क्‍या आपके लक्षण गंभीर रूप से भड़क रहे हैं
  • आपके परिवार में एटॉपिक एक्‍जिमा का इतिहास रहा है
  • क्‍या आपको एलर्जी या एस्‍थमा जैसी दूसरी समस्‍या भी है

अगर आपकी परेशानी की वजह से जीवनशैली प्रभावित हो रही है तो अपने डॉक्‍टर को जरूर बताएं, मसलन खुजली की वजह से अगर आपको सोने में परेशानी हो रही हो या दैनिक कामकाज में रुकावट आ रही हो।

एटॉपिक एक्‍जिमा की पहचान के लिए चेकलिस्‍ट

एटॉपिक एक्‍जिमा होने के अमूमन किसी को भी पिछले 12 महीनों में त्‍वचा में खुजली की समस्‍या रही हो, साथ ही नीचे बताई गई तीन या उससे ज्‍यादा लक्षण और संकेत रहे हों :

आपको उन स्‍थानों पर जहां त्‍वचा मुड़ती है वहां खुजली और उत्‍तेजना रही हो, जैसे कोहनी के अंदरूनी हिस्‍सों में, घुटनों के पीछे, एड़ी पर, गर्दन के चारों ओर या आंखों के आसपास।

आपकी त्‍वचा बीते 12 महीनों में ज्‍यादातर शुष्‍क रही हो।

अपको दमा या हेफीवर रहा हो। चार साल से कम उम्र के बच्‍चों के करीबी रिश्‍तेदार जैसे माता-पिता, भाई या बहन में से किसी को दमा या हेफीवर हुआ हो।

चार साल से कम उम्र के बच्‍चों की त्‍वचा की दरारों में, माथे पर, गालों पर, बाजुओं या पैरों पर एक्‍जिमा हुआ हो।

चार साल से अधिक उम्र के बच्चों और वयस्‍कों को यह समस्‍या दो साल की उम्र या उससे भी पहले हुई हो।

प्रामणित उप्रेरक

आपके डॉक्‍टर यह बता सकते हैं कि कौन से उत्प्रेरक (triggers) एक्‍जिमा को और भी गंभीर बना सकते हैं। यह देखने के लिए कि कौन सी स्‍पष्‍ट चीजें एक्‍जिमा के लक्षणों को गंभीर बना रही हैं, आपसे आपकी डाइट और जीवनशैली से जुड़ी जानकारियां मांगी जा सकती हैं। मसलन आपने ध्‍यान दिया हो कोई साबुन या शैंपू से आपका एक्‍जिमा गंभीर हो जाता है।

एटॉपिक एक्‍जिमा के संभावित ट्रिग्‍गर्स और कारणों के बारे में और पढ़ें।

आपसे अपनी फूड डायरी बनाने के लिए कहा जा सकता है, जिससे यह पता चल सके कि खाने की किन चीजों से आपके लक्षण गंभीर हो जाते हैं।

फूड डायरी में जो आप खाते हैं, उन सभी चीजों के बारे में लिखना होता है, एक्‍जिमा उभरने का रिकॉर्ड रखा जा सके। आपके डॉक्‍टर इस डायरी का इस्‍तेमाल कर यह देखते हैं कि खाने की किसी खास चीज और एक्‍जिमा के आपके लक्षणों के बीच कोई पैटर्न है या नहीं।

इलाज

यूं तो एटॉपिक एक्‍जिमा का कोई इलाज नहीं है, मगर इसके लक्षणों से राहत पहुंचाने के लिए उपचार किया जा सकता है।

एटॉपिक एक्‍जिमा से ग्रस्‍त बच्‍चों में समय के साथ प्राकृतिक तौर पर सुधरने लगते हैं।

एक्‍जिमा के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली ज्‍यादातर दवाओं में शामिल हैं :

  • एमोलिएंट्स- रूखी त्‍वचा पर किसी भी समय इस्‍तेमाल किया जा सकता है
  • टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स – लक्षण उभरने पर उनमें सूजन और लाली कम करने के लिए इस्‍तेमाल किए जाते हैं

आपके डॉक्‍टर रूखी त्‍वचा के लिए एमोलिएंट्स और सबसे कम प्रभावकारी टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड के इस्‍तेमाल का सुझाव दे सकते हैं। शरीर के अलग-अलग हिस्‍सों के विभिन्‍न दर्जे की दवाओं की जरूरत हो सकती है।

जब तक एक्‍जिमा संक्रमित नहीं है, खास ड्रेसिंग या बैंडेज, जिन्‍हें ड्राई रैप्‍स, वेट रैप्‍स और ऑक्‍लूसिच ड्रेसिंग को प्रशिक्षित स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी से लगवाया जा सकता है।

वह खुजली और चुभन को कम करते हुए यह त्‍वचा को रूखी होने से भी बचाते हैं।

अन्‍य दवाए

एक्‍जिमा के लक्षणों में आराम पहुंचाने के लिए अन्‍य दवाओं में शामिल है :

  • गंभीर खुजली के लिए एंटीहिस्‍टामाइन्‍स
  • गंभीर लक्षणों के लिए ओरल कॉटिकोएस्‍टेरॉएड्स
  • संक्रमित एक्‍जिमा के लिए एंटीबायोटिक्‍स

शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को दबाने के लिए इस्‍तेमाल किए जाने वाले टॉपिकल इम्‍यूनासप्रेसेंट्स जैसे पिमक्रोलिमस क्रीम और टैक्रोलिमस मलहम

आपके डॉक्‍टर जरूरत पड़ने पर अन्‍य दवाओं का सुझाव देंगे।

खुद की देखभाल

दवाओं के साथ ही कुछ ऐसी चीजें हैं, जो लक्षणों में आराम के लिए आप खुद घर पर कर सकते हैं।

खुरचना (स्‍क्रैचिंग)

एक्‍जिमा में अक्‍सर खुजली होती है और उसे खुरचने पर त्‍वचा खराब हो सकती है, जिसकी वजह से उसके मोटा होने का खतरा बढ़ जाता है। त्‍वचा को खरोचने से एक्‍जिमा के बैक्‍टीरिया से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।

एटॉपिक एक्‍जिमा की जटिलताओं के बारे में और पढ़ें।

ऐसा भी हो सकता है जब आप या आपका बच्‍चा प्रभावित स्‍थान को खुरचने से खुद को रोक न पाएं। नाखून छोटे रखकर कर त्‍वचा को क्षति पहुंचने से बचाया जा सकता है।

अगर आपके बच्चे को एटॉपिक एक्‍जिमा है, तो हाथों में पहनने वाले खुजलीरोधी मिटेन्‍स उन्‍हें त्‍वचा को खुरचने से बचा सकते हैं। त्‍वचा पर थपकी या खुजली के खत्‍म होने तक चिकोटी काटने से भी अक्‍सर आराम मिलता है।

उतप्रेरकों से बचना चाहिए

आपके डॉक्‍टर एक्‍जिमा को भड़काने वाले ट्रिग्‍गर्स की पहचान करने में आपकी मदद कर सकते हैं, हालांकि यह बिना किसी स्‍पष्‍ट कारण के बेहतर या खराब हो सकते हैं।

एक बार यह समझ में आने के बाद कि किन ट्रिग्‍गर्स से आपकी परेशानी बढ़ जाती है, आप उनसे बचने का तरीका खोज सकते हैं। मिसाल के तौर पर :

त्‍वचा को असहज करने वाले कुछ वस्‍त्र, उन्हें पहनने से बचें और कॉटन जैसे प्राकृतिक कपड़े ही पहनें

अगर गर्मी से आपका एक्‍जिमा विकराल होता है तो घर में अपने कमरे को ठंडा रखें

त्‍वचा को प्रभावित करने वाले साबुन या डिटर्जेंट पाउडर का इस्‍तेमाल करन से बचें

हालांकि एक्‍जिमा के शिकार बहुत से लोगों को घर की धूल से एलर्जी होती है, मगर उन्‍हें खुद अपने घर को साफ करने की सफाई करने की सलाह नहीं दी जाती है। यह प्रक्रिया प्रभावी तरीके से अमल में लाने में समय खपाऊ और मुश्‍किल होती है और इससे मदद मिलने के स्‍पष्‍ट प्रमाण भी नहीं हैं।

इसी तरह हार्ड वॉटर के आसपास रहने वाले छोटे बच्‍चों में एक्‍जिमा का थोड़ा ज्‍यादा स्‍तर देखने को मिला है, मगर पानी को साफ करने के उपकरण से कोई मदद मिलने के भी प्रमाण नहीं हैं।

खानपान

आपको अपने डॉक्‍टर से संपर्क किए बिना खानपान में महत्‍वपूर्ण बदलाव नहीं करने चाहिए। दूध, अंडे और नट्स जैसे कुछ खाद्य पदार्थों से एक्‍जिमा के लक्षण ट्रिग्‍गर हो सकते हैं।

हालांकि बिना चिकित्‍सकीय परामर्श के इन्‍हें अपने खानपान से पूरी तरह हटाना अच्‍छा नहीं होगा, खासतौर से छोटे बच्‍चों में जिन्‍हें पर्याप्‍त मात्रा में कैल्‍शियम, कैलोरी और प्रोटीन की जरूरत होता है जो इन खाद्य पदार्थों से मिलता है।

अगर डॉक्‍टर आपको फूड एलर्जी होने की आशंका जताते हैं, तो आपको डाइटीशियन (खानपान और पोषण संबंधी मामलों के विशेषज्ञ) से संपर्क करने के लिए कह सकते हैं।

अगर आप एटॉपिक एक्‍जिमा ग्रस्‍त शिशु को स्‍तनपान करा रही हैं तो अपने नियमित खानपान में बदलाव करने से पहले चिकित्‍सकीय सलाह जरूर ले लें।

एमोलिएंट्स

एमोलिएंट्स ऐसे तत्‍व होते हैं जो आपकी त्‍वचा को मुलायम बनाए रखने के लिए नमी प्रदान करते हैं। यह त्‍वचा से पानी का नुकसान रोकने के लिए उसे एक सुरक्षात्‍मक परत से ढक देते हैं। यह एटॉपिक एक्‍जिमा से संबंधित रूखी त्‍वचा का सबसे अहम इलाज होते हैं।

त्‍वचा में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है तो उसे रूखी और चटकने से बचाया जा सके।

एमोलिएंट का चयन

कई तरह के एमोलिएंट्स मौजूद हैं, जिनमें से कुछ को आप बिना डॉक्‍टरी पर्चे के ओवर द काउंटर आसानी से खरीद सकते हैं। आपके डॉक्‍टर या फार्मेसिस्‍ट उपयुक्‍त एमोलिएंट का सुझाव दे सकते हैं, हालांकि आपको अपने लिए सही एमोलिएंट मिलने तक कुछ का प्रयोग कर जरूर देखना चाहिए।

आपको अलग-अलग इस्‍तेमाल के लिए अलग-अलग एमोलिएंट का परामर्श दिया जा सकता है। मसलन

बुहत रूखी त्‍वचा के लिए मलहम

कम रूखी त्‍वचा के लिए क्रीम या लोशन

आपके चेहरे और हाथों के लिए खास एमोलिएंट

शरीर पर इस्‍तेमाल के लिए अलग एमोलिएंट

साबुन के स्‍थान पर इस्‍तेमाल के लिए एमोलिएंट

नहाने के पानी में डालने के लिए या शॉवर के लिए एमोलिएंट

लोशन, क्रीम और मलहम में अंतर उसमें इस्तेमाल होने वाले तेल और पानी की मात्रा की वजह से होता है। मलहम में सर्वाधिक मात्रा में तेल होता है इसलिए वह ज्‍यादा तैलीय होते हैं, मगर त्‍वचा को नर्म बनाए रखने में सबसे ज्‍यादा प्रभावी होते हैं। लोशन में सबसे कम तेल होता है और यह कम तैलीय होता हैं, इसलिए यह कम प्रभावी भी होते हैं। क्रीम में इन दोनों के बीच की मात्रा होती है।

अगर आप कोई खास एमोलिएंट का कुछ समय से इस्‍तेमाल कर रहे हैं, तो हो सकता है वो कम प्रभावी लगने लगे और आपकी त्‍वचा को उत्‍तेजित कर दे। अगर ऐसा होता है तो अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें क्‍योंकि आपको दूसरे उत्‍पाद की जरूरत हो सकती है।

अगर त्‍वचा में सूजन है तो एमोलिएंट्स का इस्‍तेमाल टॉपिकल कॉर्टिकोएस्‍टेरॉएड्स जैसे सूजनरोधी उपचार के साथ करना चाहिए।

कैसे करें एमोलिएंट्स का इस्‍तेमाल

एमोलिएंट्स का इस्‍तेमाल कभी भी किया जा सकता है, खासतौर से बीमारी भड़कने के बीच में, जब आपके लक्षण न हों। कार्यालय या स्‍कूल में अलग-अलग एमोलिएंट रखने अच्‍छा विचास हो सकता है।

एमोलिएंट का लगाते समय :

बड़ी मात्रा में इस्‍तेमाल करें

बालों के उगने की दिशा में एमोलिएंट त्‍वचा पर लगाएं

एमोलिएंट को रगड़कर नहीं लगाएं

अत्‍यधिक रूखी त्‍वचा के लिए एमोलिएंट हर दो से तीन घंटे पर लगाएं

नहाने या शावर के बाद धीरे से त्‍वचा को सुखा लें और उसके नर्म रहते हुए एमोलिएंट का इस्‍तेमाल करें

अपना एमोलिएंट दूसरों के साथ साझा नहीं करें

एमोलिएंट के पॉट में उंगली नहीं डालें- बल्‍कि चम्‍मच या पंप डिस्‍पेंसर का इस्‍तेमाल करें, क्‍योंकि इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है

यह बहुत जरूरी है कि अपने एमोलिएंट्स का इस्‍तेमाल रोग भड़कने के दौरान भी करते हैं, क्‍योंकि इसी समय में त्‍वचा को सबसे ज्‍यादा मॉइश्‍चर की जरूरत होती है। रोग भड़कने पर पर्याप्‍त मात्रा में एमोलिएंट जल्‍दी–जल्‍दी लगाएं।

टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स (Topical corticosteroids)

त्‍वचा में सूजन होने पर अमूमन टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स का सुझाव दिया जाता है। टॉपिकल का अर्थ होता है ऐसी चीज जिसे सीधे त्‍वचा पर लगाया जा सके। कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स तुरंत सूजन को कम करने का काम करते हैं।

स्‍टेरॉएड्स युक्‍त दवाओं के सेवन को लेकर आपका चिंतित होना जायज हो सकता है। हालांकि कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स एनाबोलिक स्‍टेरॉएड्स की तरह नहीं होते हैं, जिनका इस्‍तेमाल बॉडीबिल्‍डर्स और एथलीट्स गैरकानूनी तरीके से करते हैं। सही तरह से इस्‍तेमाल करने पर कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स एक्‍जिमा के लिए सुरक्षित और प्रभावी इलाज साबित होते हैं।

टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स का चयन

एटॉपिक एक्‍जिमा की गंभीरता के मुताबिक अलग-अलग प्रभाव वाले टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स का सुझाव डॉक्‍टर देते हैं। यह हाइड्रोकॉर्टिसोन जैसे हल्‍के, क्‍लोबीटासोन ब्‍यूटिरेट जैसे और ताकतवर या बहुत शक्‍तिशाली हो सकते हैं। एटॉपिक एक्‍जिमा के बेहद गंभीर मामलों में बहुत शक्‍तिशली कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स की जरूरत हो सकती है। आपको दिया जा सकता है:

चेहरे और हाथ जैसे दिखने वाली जगहों के लिए क्रीम

रात में या बहुत गंभीर रूप से रोग भड़कने पर लगाने के लिए मलहम

अगर आपको जल्‍दी-जल्‍दी कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स का इस्‍तेमाल करना पड़ रहा है तो अपने डॉक्‍टर को नियमित दिखाएं ताक वह जान सकें कि इलाज सही से काम कर रहा है या नहीं और आप सही मात्रा में इन चीजों का इस्‍तेमाल कर रहे हैं या नहीं।

कैसे करें टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स का इस्‍तेमाल ?

प्रभावित हिस्‍सों में इलाज के तौर पर बताए गए मलहम या क्रीम का इस्‍तेमाल सही से करें। कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड के साथ मिली मरीज के लिए जानकारी वाली पर्ची में दिए गए निर्देशों का पालन जरूर करना चाहिए।

एटॉपिक एक्‍जिमा के फ्लेयर-अप के दौरान कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड का इस्‍तेमाल दिन में दो बार से ज्‍यादा न करें। बहुत से लोगों दिन में एक बार ही इस्‍तेमाल करने की जरूरत होती है। टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड का इस्‍तेमाल करने के लिए :

एमोलिएंट पहले लगाएं और फिर 30 मिनट का इंतजार करें, जब तक एमोलिएंट त्‍वचा में सूख न जाए

बताई गई मात्रा में टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड को प्रभावित हिस्‍से में लगाएं

फ्लेयर-अप के बाद 48 घंटे तक दवा लगा रहने दें ताकि त्‍वचा के अंदर एक्‍जिमा साफ हो सके

अगर आप या आपका बच्‍चा लंबे समय से कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स इस्‍तेमाल कर रहे हैं, तो अब उन्‍हें इसका कम इस्‍तेमाल करना चाहिए। सलाह के लिए डॉक्‍टर से संपर्क करें।

टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड का कितना इस्‍तेमाल करें ?

टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड की मात्रा फिंगरटिप यूनिट (एफटीयू - उंगली के पोर पर आने वाली मात्रा) की इकाई में मापी जाती है।

ट्यूब से दबाने पर वयस्‍क की उंगली के पोर पर जितनी मात्रा में टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड निकल कर आता है वो एक एफटीयू होता है

एक एफटीयू की मात्रा एक वयस्‍क के हाथ के बराबर त्‍वचा के आकार पर लगाने के लिए पर्याप्‍त होता है

टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स का डोज और फिंगरटिप यूनिट के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें।

दुष्‍प्रभाव

टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स लगाने से हल्‍की जलन या चुभन महसूस हो सकती है।

लंबे समय तक अधिक शक्‍तिशाली टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स का इस्‍तेमाल करने पर निम्‍न समस्‍याएं हो सकती हैं :

त्‍वचा का पतला होना, खासतौर पर कोहनी और घुटने के जोड़ के अंदर की त्‍वचा

नजर आने वाली रक्‍त वाहिकाएं, खासतौर से गालों पर

एक्‍ने

बालों का विकास अधिक होना

यह दुष्‍प्रभाव दुर्लभ हैं।

एंटीहिस्‍टामाइन्‍स

एंटीहिस्‍टामाइन्‍स ऐसी दवाएं होती हैं जो खून में हिस्‍टामाइन तत्‍व के प्रभाव को खत्‍म करती है। एलर्जेंस के संपर्क में आने पर हमारे शरीर में हिस्‍टामाइन का स्राव होता है।

एंटीहिस्‍टामाइन्‍स एटॉपिक एक्‍जिमा की वजह से होने वाली खुजली से उबरने में मदद करता है। यह नींद आने वाली सुस्‍तीकारक हो सकती हैं या गैर सुस्‍तीकारक भी हो सकती हैं।

गैर सुस्‍तीकारक एंटीहिस्‍टामाइन्‍स

अगर आपको गंभीर खुजली या उसके साथ ही हेफीवर है तो गैर सुस्‍तीकारक एंटीहिस्‍टामाइन्‍स दवाएं दी जा सकती हैं। इससे मदद मिलने पर आपको आगे भी गैर सुस्‍तीकारक एंटीहिस्‍टामाइन दवाएं लंबे समय तक दी जा सकती हैं। हर तीन महीने में इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।

सिडेटिंग (शामक) एंटीहिस्‍टामाइन्‍स

अगर खुजली की वजह से मरीज की नींद प्रभावित हो रही है, तो सिडेटिंग एंटीहिस्‍टामाइन्‍स दवाएं मददगार हो सकती हैं। सिडेटिंग हिस्‍टामाइन्‍स छोटी अवधि के लिए सुझायी जाती हैं, ज्‍यादातर इनका अधिकतम समय दो हफ्ते के लिए होता है। इनका असर जल्‍दी खत्‍म होने लगता है।

इस तरह की एंटीहिस्‍टामाइन दवाओं की वजह से अगले दिन उनींदापन हो सकता है, इसलिए बच्‍चों के स्‍कूल में इसके बारे में सूचित करना अच्‍छा रहता है क्योंकि वह सामान्‍य की तरह सतर्क नहीं हो सकते हैं।

अगर आप सिडेटिंग एंटीहिस्‍टामाइन्‍स ले रहे हैं, तो अगले दिन उनींदापन महसूस होने पर गाड़ी चलाने से बचें। शराब का सेवन करने वालों में अगले दिन उनींदापन ज्‍यादा हो सकता है।

कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड टैबलेट्स

गंभीर फ्लेयर-अप होने पर कुछ दुर्लभ मामलों में डॉक्‍टर आपको कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड टैबलेट के रूप में दे सकते हैं। इन्‍हें दमा के फ्लेयर-अप में भी दिया जाता है।

आपको एक से दो हफ्ते तक दिन में एक बार सुबह के समय प्रेडनिसोलोन लेने का भी सुझाव दिया जा सकता है।

अगर ओरल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स अक्‍सर ली जा रही है या काफी लंबे समय से ली जा रही है, तो उनके निम्‍न साइड इफेक्‍ट हो सकते हैं :

हाई ब्‍लड प्रेशर (हाईपरटेंशन)

हड्डियां भुरभुरी होना (ऑस्‍टियोपोरोसिस)

पानी रुकना

बच्‍चे का विकास प्रभावित होना

इन कारण की वजह से डॉक्‍टर कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड टैबलेट बिना विशेषज्ञ से परामर्श लिए साल में एक बार से ज्‍यादा देने से बचते हैं।

संक्रमित एक्‍जिमा

एक्‍जिमा के संक्रमित होने पर अक्‍सर एंटीबायेटिक दवाएं दी जाती हैं।

संक्रमित त्‍वचा के बड़े हिस्‍से का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक गोलियां या कैप्‍सूल दिए जाते हैं। जो एंटीबायोटिक अमूमन सबसे ज्‍यादा दी जाती हैं उनमें फ्लूक्‍लोक्‍सेसिलीन है, जिसे सात दिनों तक दिन में चार बार तक दिया जा सकता है। अगर आपको पेनिसिलीन से एलर्जी है तो आपको :

सात दिन तक दिन में चार बार एरिथ्रोमाइसिन दी जा सकती है

सात दिन तक दिन में दो बार क्‍लेरिथ्रोमाइसिन दी जा सकती है

संक्रमित एक्‍जिमा के छोटे क्षेत्र के इलाज के लिए अमूमन एंटीबायोटिक क्रीम या मलहम दिए जा सकते हैं, जिन्‍हें सीधे प्रभावित क्षेत्र में लगाया जा सकता है।

टॉपिकल एंटीबायोटिक्स का इस्‍तेमाल दो हफ्ते से ज्‍यादा समय तक नहीं किया जाना चाहिए क्‍योंकि बैक्‍टीरिया दवा के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेता है। अगर आपके लक्षण खराब हो रहे हैं तो डॉक्‍टर से बात करें।

संक्रमण से बचाव

एक बार संक्रमण साफ होने बाद अब तक इस्‍तेमाल की जा रही क्रीम या मलहम के बजाए प्रभावित स्‍थान को दूषित होने से बचाने के लिए डॉक्‍टर कोई नई क्रीम या मलहम का सुझाव दे सकते हैं।

संक्रमण के दौरान या उसके बाद कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स की मदद से सूजन को नियंत्रित करना जरूरी होता है।

अगर आपके एक्‍जिमा के स्थान संक्रमण के प्रति संवेदनशील हैं तो एंटीसेप्‍टिक क्रीम या लोशन बैक्‍टीरिया को खत्‍म करने में मददगार हो सकते हैं। आमतौर पर बताए गए टॉपिकल एंटीसेप्‍टिक्‍स में क्‍लोर्हेक्‍सिडीन और ट्राइक्‍लोसन का सुझाव दिया जाता है।

रेफरल

एटॉपिक एक्‍जिमा के कुछ मामलों में डॉक्‍टर आपको त्‍वचा की समस्‍याओं का इलाज करने वाले विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्‍ट) के पास रेफर कर सकते हैं। आपको रेफर किया जाएगा अगर :

अगर डॉक्‍टर एक्‍जिमा का प्रकार सुनिश्‍चित नहीं कर पा रहे हैं

इलाज से एक्‍जिमा नियंत्रित नहीं हो पा रहा है

एक्‍जिमा की वजह से दैनिक जीवन में काफी समस्‍या हो सकती है

एक्‍जिमा के कारण स्‍पष्‍ट नहीं हो पा रहे हैं

डर्मेटोलॉजिस्‍ट आपको निम्‍न उपचार का सुझाव दे सकते हैं :

फोटोथेरेपी – अल्‍ट्रावायलेट (यूवी) लाइट के संपर्क में आना

बैंडेजिंग – त्‍वचा पर दवा युक्‍त या नमी वाली पट्टियां लगाना

इम्‍यूनोसप्रेसेंट मेडिकेशन – मरीज के रोग प्रतिरोधक तंत्र को थामना

शक्‍तिशाली टॉपिकल कॉर्टिकोस्‍टेरॉएड्स

इलाज के सही इस्‍तेमाल के लिए अतिरिक्‍त सहायता – जैसे प्रशिक्षित नर्स से नमूना देखना

मनोवैज्ञानिक सहयोग

एलिट्रेटिनोइन

एलिट्रेटिनोइन

एलिट्रेटिनोइन टॉकटिनो नाम के ब्रांड के तहत बेची जाती है, यह गंभीर और लंबे समय से मौजूद हाथों के एक्‍जिमा की दवा है जिस पर किसी दूसरे इलाज का असर नहीं हुआ है। एलिट्रेटिनोइन के इलाज को त्‍वचा रोग विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाना चाहिए और साथ ही प्रभावित व्‍यक्‍ति की उम्र 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए।

एलिट्रेटिनोइन रेटिनॉएड प्रकार की दवा है। रेटिनॉएड एक्‍जिमा से संबंधित उत्‍तेजना और खुजली के स्‍तर को कम करते हैं। यह कैप्‍सूल के रूप में होता है और ज्‍यादातर लोगों 12 से 24 हफ्तों तक इसे दिन में एक बार लेने का परामर्श दिया जाता है।

एलिट्रेटिनोइन को गर्भावस्‍था के दौरान नहीं लेना चाहिए क्‍योंकि जन्‍म लेने वाले नवजात पर इसके गंभीर दुष्‍परिणाम देखने को मिलते हैं। बच्‍चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं को भी एलिट्रेटिनोइन लेने से बचना चाहिए क्‍योंकि यह दवा मां के दूध से बच्‍चे में पहुंचकर उन्‍हें नुकसान पहुंचा सकती है।

जन्‍म दोष के खतरे को देखते हुए एलिट्रेटिनोइन प्रजनन आयु में आने वाली महिलाओं को देने की सलाह नहीं दी जाती है।

एलिट्रेटिनोइन के कुछ सामान्‍य दुष्‍परिणामों में शामिल है :

सिरदर्द

मुंह और आंखें सूखना

लाल रक्‍त कोशिकाओं की संख्‍या में कमी आना, जिसे एनीमिया कहते हैं

खून में कोलेस्‍ट्रॉल और ट्राइग्‍लिसेराइड जैसे वसा तत्‍वों का स्‍तर बढ़ना

जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द

दुष्‍प्रभावों की पूरी सूची के लिए अपनी दवा के साथ मिलने वाली जानकारी निर्देशिका देखें या एलिट्रेटिनोइन दवाओं की सूचना देखें।

रूबी की कहानी

रूबी में तब एक्‍जिमा की पहचान हुई जब वह मात्र छह हफ्तों की थी। उसकी मां डेनिएला बताती हैं कि उन्‍होंने कैसे रूबी की इस स्‍थिति से उबरना सीखा।

‘10 दिन की उम्र में यह रैश रूबी के हर तरफ मौजूद थी, यह काफी हद तक किशोरियों के निशान जैसे सफेद फुंसी की तरह थे।

‘ डॉक्‍टरों को लग रहा था कि यह उसकी सिबेशियस ग्रंथि के सही से काम नहीं करने की वजह से है और उन्‍होंने कहा कि यह चला जाएगा। ऐसा हुआ भी। मगर जैसा कि मेरे पति और मेरे परिवार में एक्‍जिमा का इतिहास है और यह वंशानुगत अवस्‍था है इसलिए मुझे हमेशा लगता था कि उसे भी हो जाएगा।

डॉक्‍टरों ने मुझे बताया कि बाजार में आमतौर पर मिलने वाले शिशुओं के उत्‍पाद, खुशबू वाली चीजें या साबुन का इस्‍तेमाल न करें। अब उसके इलाज में दिन में दो बार नहाना और उस दौरान तेल का इस्‍तेमाल करना शामिल है। नहाने से पहले मैं उसके पूरे शरीर पर एक्‍वीयस क्रीम लगाती हूं। मैं उसके शरीर को स्‍पॉन्‍ज के स्‍थान पर फ्लैनेल से साफ करती हूं क्‍योंकि फ्लैनेल को रोज धोया जा सकता है।

‘उसके सोने की जगह पर ढेर सारे नर्म खिलौने नहीं होते हैं क्‍योंकि उनमें धूल हो सकती है, इसके साथ ही मैं उसे जानवरों के आसपास भी नहीं ले जाती हूं क्‍योंकि इससे उसकी त्‍वचा उत्‍तेजित और परेशानी बढ़ सकती है।

‘त्‍वचा पर खाने की कुछ चीजें का भी असर होता है, इसलिए मैं उसे ऐसी चीजों खाने को भी नहीं देती हूं। मुझे उसके सनस्‍क्रीन के प्रति भी सजग रहना होता है और मैं उसे बहुत ज्‍यादा धूप में भी नहीं जाने दे सकती हूं।

‘सबसे खराब स्‍थिति तब हुई थी जब उसकी दाहिनी बाजू के एक्‍जिमा में संक्रमण हो गया था और उसकी पूरी त्‍वचा पीली होकर पस से भर गई थी। हम तुरंत उसे डॉक्‍टर के पास ले गए और उसे एंटीबायोटिक दवाओं पर रखना पड़ा। मैंने अस्‍पताल की नर्स से बात की तो उसने कुछ सहारे के साथ गीली पट्टी लपेटने का सुझाव दिया। मगर मैंने रात में उसे खुरचने से रोकने के लिए उसकी बाजू में मॉइश्‍चराइजर लगाकर सूखी पट्टी लपेटने का फैसला किया।

‘देखा जाए तो शिशुओं को खुजली होने पर खुरचने से नहीं रोका जा सकता है। आप उनका ध्‍यान भटका सकते हैं और उन्‍हें दूसरी चीजों में उलझा सकते हैं, उनके नाखून सुबह और शाम काटकर छोटे कर सकते हैं। अंतिम विकल्‍प के तौर पर हम रूबी को लंबी बाजू के कपड़े पहनाते थे और उसकी बाहों को गीली पट्टी से ढक कर रखते थे।

‘मुझे याद है रूबी के नहाने के सामान्‍य समय के बाद एक बार मैं कार चलाकर कहीं से वापस आ रही थी, वह काफी थकी हुई और चिड़चिड़ी हो गई थी। मैंने कार के शीशे में देखा वो खुद को बुरी तरह खुरचे जा रही थी और उसकी बाहों में से खून निकल रहा था। मैं ट्रैफिक में फंसी हुई थी और घर अभी दूर था, इसलिए मैंने गाना गाकर उसका ध्‍यान भटकाना शुरू किया। वह सबसे मुश्‍किल मौका था मेरे लिए।

‘मैं उम्‍मीद करती हूं कि वह एक्‍जिमा के बिना बड़ी हो। मेरे साथ और परिवार के बाकी सदस्‍यों के साथ भी ऐसा ही हुआ। हालांकि मेरे पति के परिवार के कुछ सदस्‍यों को बुढ़ापे में भी इस समस्‍या से जूझना पड़ रहा है।

सच्‍ची कहानियां

जीवन का ज्‍यादातर हिस्‍सा एक्‍जिमा से लड़ते हुए बिताने वाले जॉन फुल्‍लर ने इलाज के सभी उपलब्‍ध विकल्‍प आजमाए।

जॉन जब शिशु था तब उसे एक्‍जिमा हुआ था। वह कहता है, ‘जहां तक मुझे याद है, यह हमेशा से मौजूद था।’ ‘खुजलाते-खुजलाते मेरी त्‍वचा लाल हो जाती थी। हमने क्रीम से लेकर नमक स्‍नान तक सबकुछ आजमाया। मुझे बहुत अच्‍छे से याद है एक बार मैं काफी देर तक सॉल्‍ट बाथ में बैठा रहा क्‍योंकि हमारे डॉक्‍टर ने इसका सझाव दिया था। खुशकिस्‍मती से मुझे एक्‍जिमा के शिकार दूसरे बच्‍चों की तरह कभी परेशान नहीं किया गया।’

जॉन जब 11 साल का था तब पूरा परिवार छुट्टियां मनाने बारबाडोस गया था। इसी दौरान उन्‍होंने एलो वेरा का पौधा खोजा।

‘किसी ने हमें बताया कि यह एक्‍जिमा में मेरी मदद कर सकता है और हम कुछ भी आजमाने को तैयार थे। अब एलो वेरा हर जगह उपलब्‍ध है, मगर उस समय किसी ने इसका नाम भी नहीं सुना था। जब हम वापस आए तो हमने इसे अपने घर के बागीचे में उगाना शुरू किया। इस पौधे का रस मैं अपने पूरे शरीर पर लगता था। आश्‍चर्यजनक रूप से एक्‍जिमा अगले नौ साल के लिए पूरी तरह से साफ हो गया।’

जॉन को लगा कि उसकी यह अवस्‍था अब खत्‍म हो गई है। मगर यूनिवर्सिटी की पढ़ाई खत्‍म होने के दौरान यह फिर लौट आया। वह कहते हैं, ‘त्‍वचा में लाली और खुजली फिर शुरू हो गई थी’। ‘बहुत जल्‍द यह मेरी पूरी बाहों और पैरों पर हो गया और तब से लगातार बना हुआ है।’

जॉन ने बताया कि उन्‍होंने अब तक उपलब्‍ध हर तरह का इलाज आजमाया, जिसमें स्‍टेरॉएड की गोलियां और क्रीम्‍स, और अंग प्रत्‍यारोपण के मरीजों को नए अंग स्‍वीकार करने के लिए दी जाने वाली साइक्‍लोस्‍पोरिन दवा भी शामिल थी। यह व्‍यक्‍ति के रोग प्रतिरोधक तंत्र को रोक कर काम करती है।

वह बताते हैं ‘यह कुछ साल के लिए काम करते हैं मगर अंदरूनी अंगों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए लंबे समय तक इनके हाई डोज पर नहीं रहा जा सकता है।’ ‘यह सुनिश्‍चित करने के लिए कि सबकुछ सही से काम कर रहा है, मुझे नियमित ब्‍लड टेस्‍ट होता है और फिर इतना हल्‍का डोज लेना पड़ता है जिसका कोई मतलब नहीं होता है।’

‘मैं तीन बार अस्‍पताल में रहा। अस्‍पाल में भी आपको वही इलाज दिया जाता है जो घर पर होता है, मगर वह ज्‍यादा गहन होता है और साफ भी।’

उन्‍होंने पूरक चिकित्‍सा कस भी प्रयोग किया। वह कहते हैं, ‘मैं चीनी जड़ी-बूटी विशेषज्ञ के पास गया, जो मुझे हर रात को काफी अजीब से स्‍वाद वाली चाय पीने को देते थे।’ ‘कुछ समय के लिए लगा कि यह काम कर रहा है। मगर एक्‍जिमा फिर वापस आ गया। मैंने देखा कि बहुत सारी चीजें कुछ समय के लिए काम करती हैं, मगर उसके बाद उनका प्रभाव खत्‍म हो जाता है।’

जॉन सामान्‍य जीवन जीने की पूरी कोशिश करते हैं, मगर वह कहते हैं कि यह आसान नहीं है। वह कहते हैं, ‘जब काफी बुरी तरह खुजली होने लगती है तो काम पर ध्‍यान लगा पाना बहुत मुश्‍किल होता है।’ ‘कई बार मुझे कुछ समय की छुट्टी लेनी पड़ती है। नियोक्‍ताओं को यह अच्‍छा नहीं लगता है, और इससे मेरे साथ काम करने वाले सभी लोग प्रभावित होते हैं। कभी-कभी सोना भी असंभव हो जाता है, जिससे मेरा रोजमर्रा का जीवन प्रभावित होता है। मुझे क्रिकेट खेलना पसंद है, लेकिन सीधे सूरज की रोशनी में मेरा पूरा शरीर टमाटर की तरह लाल हो जाता है।’

जॉन ने अपनी अवस्‍था को स्‍वीकार कर लिया है, मगर उन्‍हें अब भी उम्‍मीद है। ‘किसी को नहीं पता कि मुझे एक्‍जिमा क्‍यों है, और अब तक इसका कोई सटीक इलाज भी नहीं है, मगर हम यह भी नहीं जानते हैं कि ऐसा कब तक रहेगा। हो सकता है एक दिन मैं जागूं तो एक्‍जिमा पूरी तरह खत्‍म हो गया हो। मगर तब तक मुझे उपलब्‍ध इलाज के सहारा आगे बढ़ना है।’

जटिलताएं

खासतौर से बच्‍चों में एटॉपिक एक्‍जिमा की शारीरिक और मानसिक जटिलताएं हो सकती हैं।

संक्रमण

चूंकि एटॉपिक एक्‍जिमा से आपकी त्‍वचा रूखी और खुरदुरी हो सकती है, इसलिए उसमें संक्रमण का खतरा ज्‍यादा है। एक्‍जिमा को खुरचने पर और सही से इलाज नहीं करने पर एक्‍जिमा में संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है।

बैक्‍टीरियाजनित संक्रमण के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। एटॉपिक एक्‍जिमा में पाया जाने वाला सबसे आम बैक्‍टीरियाजनित संक्रमण स्‍टेफिलोकॉकस ऑरियस है। निम्‍न लक्षण स्‍टेफिलोकॉकस ऑरियस की वजह से हो सकते हैं :

त्‍वचा लाल होना

फटी त्‍वचा से पानी निकलना और सूखने के बाद पपड़ी पड़ जाना

काफी अधिक तापमान और बीमार महसूस होना

स्‍टेफ ए संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक देना जरूरी हो जाता है (एटॉपिक एक्‍जिमा का इलाज कैसे होता है देखें)

एक्‍जिमा हरपेटिकम

एक्‍जिमा में हर्पीस सिम्‍प्‍लेक्‍स वायरस का संक्रमण हो सकता है, इससे अमूमन मुंह के छाले हो जाते हैं। यह एक्‍जिमा हरपेटिकम नाम की गंभीर अवस्‍था में बदल सकता है। एक्‍जिमा हरपेटिकम के लक्षणों में शामिल है :

एक्‍जिमा वाले क्षेत्र में दर्द होना, इसका और भी बुरा हो जाना

पानीदार फफोलों का समूह बन जाना, जो फूटने के बाद त्‍वचा पर खुले जख्‍म की तरह बन जाते हैं

तेज तापमान और कुछ मामलों में ज्‍यादातर बीमार महसूस करना

खुद को या अपने बच्‍चे को एक्‍जिमा हरपेटिकम का अंदेशा होने पर तुरंत अपने डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आप डॉक्‍टर से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, तो नजदीकी अस्‍पताल जरूर जाएं।

मनोवैज्ञानिक प्रभाव

शारीरिक रूप से प्रभावित करने के अलावा एटॉपिक एक्‍जिमा का मनोवैज्ञानिक असर भी हो सकता है।

एटॉपिक एक्‍जिमा के शिकार प्रीस्‍कूल जाने वाले बच्‍चों में सामान्‍य बच्‍चों के मुकाबले व्‍यवहार संबंधी समस्‍या ज्‍यादा हो सकती है। वह अन्‍य बच्‍चों के मुकाबले अपने माता-पिता पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।

डराना-धमकाना

एटॉपिक एक्‍जिमा के शिकार स्‍कूल जाने वाले बच्‍चों को डराने या धमकाने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। बच्‍चों का इस तरह की घटनाओं से उबर पाना काफी मुश्‍किल हो जाता है। आपका बच्‍चा शांत और अंतर्मुखी हो सकता है। बेहतर है बच्‍चे के अध्‍यापकों को उसकी अवस्‍था के बारे में बताएं और बच्‍चे को अपनी भावनाएं व्‍यक्‍त करने के लिए प्रोत्‍साहित करते रहें।

नींद खराब होना

शोध बताते हैं कि एक्‍जिमा प्रभावित बच्‍चों में नींद से संबंधित समस्‍या सामान्‍य है।

नींद की कमी बच्‍चे की मनोदशा और व्‍यवहार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इससे उन्‍हें स्‍कूल में पढ़ाई पर ध्‍यान लगाने में भी दिक्‍कत हो सकती है, जिससे वह काम में पिछड़ सकते हैं।

इसके लिए भी बच्‍चे के अध्‍यापक को उसकी अवस्‍था की जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि वह इसका ध्‍यान रख सकें।

एक्‍जिमा भड़कने के दौरान बच्‍चे को स्‍कूल से छुट्टी करनी पड़ सकती है। इससे उन्‍हें पढ़ाई के साथ सामनजस्‍य बनाने में दिक्‍कत हो सकती है।

आत्‍मविश्‍वास

एटॉपिक एक्‍जिमा से बच्‍चों और बड़ों दोनों का आत्‍मविश्‍वास डगमगा सकता है। खासतौर से बच्‍चों को अपनी अवस्‍था से निपटने में परेशानी हो सकती है, जिससे खुद की नजर में अपनी छवि भी खराब हो सकती है।

अगर आपके बच्‍चे का आत्‍मविश्‍वास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, तो यह सामाजिक कौशल विकसित करने की उनकी क्षमता पर असर डाल सकता है। सहयोग और प्रोत्‍साहन बच्‍चे का आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने में मदद करेंगे और अपनी छवि के बारे में उनकी सोच सकारात्‍मक बनेगी।

अगर आपको लगता है कि एक्‍जिमा की वजह से आपके बच्‍चे का आत्‍मविश्‍वास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है तो अपने डॉक्‍टर से जरूर संपर्क करें।

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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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