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ब्लेफेराइटिस (blepharitis)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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परिचय

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) एक सामान्य स्थिति है, जिसमें पलकों (eyelids) के किनारे लाल हो जाते हैं और उनमें सूजन हो जाती है।

ब्लेफेराइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है। जिसके लक्षणों में ये शामिल हैं:

  • खुजली, दर्द और लाल पलकें (eyelids) जो आपस में चिपक जाती हैं
  • पपड़ीदार या चिकनी हो जाए
  • आपकी आंखों में जलन और सनसनी होना
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता का बढ़ना
  • पलकों (eyelids) के किनारों में सूजन
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनने में असहज महसूस करना
  • आइ लैशेज का अनियमित रूप से बढ़ना या गम्भीर मामलों में उनका झड़ना

बहुत से मामलों में दोनों आँखें प्रभावित होती हैं लेकिन एक आँख दूसरी से ज़्यादा प्रभावित हो सकती है। सुबह के समय लक्षण और खराब हो सकते हैं।

इलाज के लिए सलाह कब लें (When to get medical advice)

आगर आप में ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के लक्षण बने हुए हैं जो पलकों (eyelids) की सफाई से भी नियंत्रित नहीं हो रहे हैं तो अपने ऑप्टिसियन (optometrist) को दिखाएं।

अगर किसी अंदरूनी स्थिति के कारण यह परेशानी हुई है तो वह आपकी जांच कर सकते हैं या आपको एक आँख के विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं।

अपने डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट (optometrist) से तुरंत सम्पर्क करें अगर आपको कोई भी गंभीर लक्षण हैं। अगर यह संभव नहीं है तो अपने नजदीकी दुर्घटना और आपातकालीन विभाग में जाएं।

ब्लेफेराइटिस का इलाज कैसे किया जाता है? (How blepharitis is treated)

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) आमतौर पर एक दीर्घकालिक स्थिति है। बहुत से लोगों को यह बिना किसी लक्षण के अलग-अलग समय पर बार-बार होता है।

आमतौर पर इसका इलाज नहीं किया जा सकता है लेकिन पलकों (eyelids) की रोज़ाना सफाई लक्षणों को नियंत्रित करने और पलकों के किनारों को हमेशा के लिए चोटिल होने से बचाया जा सकता है।

दिन में दो बार तीन तरह से पलकों (eyelids) की सफाई की जा सकती है:

  • गर्म दबाव का उपयोग करना(using a warm compress) - यह आपके आँख की आसपास की ग्रन्थि (glands) की तेल निर्माण में मदद करती है।
  • पलकों (eyelids) की आराम से मालिश - ग्रन्थि (gland) से तेल निकलने के लिए उनपर दबाव बनाना।
  • पलक को साफ करना - किसी भी अतिरिक्त तेल को हटाने और किसी भी पपड़ी, बैक्टीरिया, धूल या जमी हुई मैल को दूर करने के लिए किया जाता है।

अधिक गंभीर मामलों में एंटीबायोटिक (antibiotics) की सलाह दी जाती है जिसे सीधे पलकों या आंखों पर इस्तेमाल किया जाता है। या टैबलेट के रूप में दिया जाता है।

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के इलाज के बारे में और पढ़ें

ब्लेफेराइटिस होने का कारण क्या है? (What causes blepharitis)

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के तीन मुख्य प्रकार हैं

  • एंटीरियर ब्लेफेराइटिस (anterior blepharitis) - जहाँ सूजन आपकी बरौनी के चारों ओर की त्वचा को प्रभावित करती है।
  • पोस्टीरियर ब्लेफेराइटिस (posterior blepharitis) - जहां सूजन मेबॉमियन ग्रन्थि (meibomian gland) को प्रभावित करती है। जो बरौनी की सतह के पीछे पलक (eyelids) के किनारों पर होती है
  • मिक्स्ड ब्लेफेराइटिस (mixed blepharitis) - यह एंटीरियर ब्लेफेराइटिस (anterior blepharitis) और पोस्टीरियर ब्लेफेराइटिस (posterior blepharitis) का मिश्रण है

एंटीरियर ब्लेफेराइटिस (anterior blepharitis) इन वजहों से हो सकता है:

  • स्टैफ़ीलोकोक्क्स (Staphylococcus) बैक्टीरिया से: यह आमतौर पर बिना कोई नुकसान पहुँचाये बहुत से लोगों की त्वचा पर पाया जाता है। लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से ये यह पलकों (eyelids) के सूजन का का कारण बन सकते हैं।
  • सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस (seborrhoeic dermatitis): त्वचा की एक स्थिति जो त्वचा के तैलीय और पपड़ीदार होने का कारण बनती है और कभी-कभी मेबॉमियन ग्रन्थि (meibomian gland) को रोक कर पलकों (eyelids) को परेशान करने का कारण बनती है।

पोस्टीरियर ब्लेफेराइटिस (posterior blepharitis) मेबॉमियन ग्रन्थि (meibomian gland) में होने वाली समस्याओं के कारण होता है। जहां ग्रंथि (gland) डबरिस (debris), पपड़ी (flakes) या सूजन (inflammation) से बन्द हो जाती है।

कभी-कभी मेबॉमियन ग्रन्थि (meibomian gland) में रूकावट त्वचा की स्थिति से जुड़ी होती है। जिसे रोसैसिया (rosacea) कहते हैं। अगर बहुत ज़्यादा मात्रा में तैलीय पदार्थ बन रहा है तो यह सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस (seborrhoeic dermatitis) के कारण हो सकता है।

मिक्स्ड ब्लेफेराइटिस (mixed blepharitis) जो कि सबसे सामान्य है यह एंटीरियर (anterior blepharitis) और पोस्टीरियर ब्लेफेराइटिस (posterior blepharitis) के मिश्रण के कारण होता है।

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) संक्रामक नहीं है।

जटिलताएं (Complications)

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) आमतौर पर गंभीर स्थिति नहीं है लेकिन कई अन्य समस्ययों का कारण हो सकती है।

उदाहरण के लिए बहुत से लोग जिन्हें ब्लेफेराइटिस (blepharitis) होता है, उन्हें ड्राई आई सिंड्रोम (dry eye syndrome) भी हो जाता है। जहाँ आँखें पर्याप्त आँसूओं का निर्माण नहीं कर पाती हैं या बहुत जल्दी सूख जाती है। यह आपकी आंखों को सूखा, किरकिरा और पीड़ादायक बनाता है।

गंभीर रूप से नज़र सम्बन्धी समस्या होना दुर्लभ हैं। विशेष रूप से किसी में जटिलता होती है तो उसका पता लगाकर जल्दी इलाज किया जाना चाहिए।

ब्लेफेराइटिस(blepharitis) की जटिलताओं के बारे में और पढ़ें।

ब्लेफेराइटिस का इलाज (Treating blepharitis)

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) का आमतौर पर इलाज नहीं किया जा सकता है लेकिन लक्षणों को पलक की अच्छी स्वच्छता रखकर नियंत्रित रख सकते हैं।

ब्लेफेराइटिस(blepharitis) एक दीर्घकालिक स्थिति है, ज़्यादातर लोगों में ये बिना किसी लक्षण के अलग-अलग समय पर बार-बार होता है।

पलक की स्वच्छता (eyelid hygiene)

अगर आपको ब्लेफेराइटिस (blepharitis) है तो ये ज़रूरी है कि आप अपनी पलकें रोज़ साफ करें। तब भी अगर आप कोई दवाई ले रहे हैं या अभी कोई लक्षण नहीं है।

पलकों(eyelids) की अच्छी सफाई लक्षणों से आराम देने में मदद करेगी और उन्हें दोबारा होने से रोकेगी।

अपनी पलकों (eyelids) को साफ़ रखने के लिए इन कदमों का पालन करें:

गर्म कम्प्रेस (Warm compresses)

  • पानी को उबालकर उसे हल्का गर्म होने तक छोड़ दें
  • साफ फ्लेनल (flannel) या आई पैड को पानी में भिंगोकर 10 मिनट के लिए आंखों पर रखें
  • यह सुनिश्चित करें कि फ्लेनल (flannel) पानी में दोबारा गर्म करने से ठंडा ना हो जाए

आप अपनी आँख के लिए फ्लेनल (flannel) की जगह विशेष माइक्रोवेबल कम्प्रेस का प्रयोग कर सकते हैं।

पलकों की मालिश (Eye lid massage):

  • अपनी आँख बंद करके छोटी उंगली गोल-गोल घुमाकर धीमे-धीमे मालिश करें
  • एक कॉटन बड लें और अपनी आँखें बंद करके, इसे धीरे से ऊपरी पलक पर नीचे की ओर और किनारों की तरफ घुमाएं, इससे पिघले हुए तेल को ग्रंथियों (glands) से बाहर निकालने में मदद मिलती है, लेकिन आप इन छोटी बूंदों को देख नहीं पाएंगे
  • पलक पर ऊपर से नीचे इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराएं

यह प्रक्रिया शुरुआत में आपकी पलकों (eyelids) को थोड़ा परेशान कर सकती है। जैसे कि साबुन लगाते समय होता है। हालांकि यह सामान्य है और समय के साथ ठीक हो जाना चाहिए।

पलक के किनारे की सफाई (Lid margin hygiene)

विभिन्न पलक-सफाई समाधान और आईलिड वाइप्स (eyelid wipes) व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं, या आप घर पर भी बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

घर में घोल बनाने के लिए : एक बाउल को उबलते पानी से भरें और इसे हल्का गर्म होने तक ठंडा होने दें। इसमें एक चम्मच बाईकार्बोनेट सोडा (bicarbonate soda) मिलाएँ

एक बार जब आप सफाई का घोल बना लें:

  • घोल में कुछ सूती रूई को भिगोएँ और पलकों के चारों ओर से पपड़ी को दूर करें, बरौनी पर विशेष ध्यान दें।
  • इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराएं और ज़रूरत पड़ने पर सूती कपड़े का इस्तेमाल करें
  • घोल में सूती कपड़े को डुबोएं और आराम से पलकों के किनारों को साफ करें। साथ ही पलकों की सतह और लंबाई को भी साफ करें

एक उचित सफाई के घोल के बारे में आपके डॉक्टर, फार्मासिस्ट या ऑप्टोमेट्रिस्ट (optometrist) सलाह दे सकते हैं। हालांकि आपको ये पता करने के लिए कि कौन सा उत्पाद आपके लिए सही है, एक से ज़्यादा उत्पाद इस्तेमाल करने की ज़रूरत पड़ सकती है।

अगर आपमें कोई लक्षण नहीं भी है, तो भी यह ज़रूरी है कि पलकों के किनारों की सफाई हफ्ते में दो से तीन बार की जाए। यह आपकी पलकों को हमेशा के लिए चोटिल होने से रोकने में सहायता करेगा।

एंटीबायोटिक ड्रॉप और ऑइंटमेंट (Antibiotic drops and ointments)

अगर आपको ब्लेफेराइटिस है जो नियमित सफाई पर भी ठीक नहीं हो रहा, तो आपको एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट (antibiotic ointment) क्रीम या आई ड्रॉप की सलाह दी जा सकती है। आपको आमतौर पर इन्हें 4 से 6 हफ्ते इस्तेमाल करने की ज़रूरत पड़ेगी।

ऑइंटमेंट और क्रीम को आप आराम से अपनी पलकों के किनारों पर मल सकते हैं। आमतौर पर दिन में कई बार, इस्तेमाल के लिए साफ उंगली या सूती कपड़े का प्रयोग करे।

एक बार जब आपकी स्थिति सुधरने लगती है तब यह आपको दिन में एक बार करने की ज़रुरत है। आमतौर पर रात में अपनी पलकों को साफ़ करने के बाद ऊपर लिखे तरीके का इस्तेमाल करें।

सावधानी (Cautions)

आपको आंखों पर एंटीबायोटिक आई ड्रॉप इस्तेमाल करते समय कॉन्टैक्ट लेंस का प्रयोग करने से बचना चाहिए। क्योंकि बूंदे लेंस के पीछे जमा हो जाएंगी और आपकी आंखों को परेशान करेंगी।

अगर आप एक ही समय में एक से ज़्यादा ड्रॉप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो दूसरे ड्रॉप का इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 5 मिनट उसे ऐसे ही छोड़ दें।

अगर आपकी परेशानी जारी रहती है तो अपने डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट (optometrist) को बताएं। वह आपको लुब्रिकेंट इलाज (lubricant treatment) की सलाह दे सकते हैं।

आप एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट (antibiotic ointments) या ड्रॉप (drop) का इस्तेमाल करते समय हल्की चुभन या जलन का अनुभव कर सकते हैं। लेकिन यह जल्दी चली जाएगी। अगर ऑइंटमेंट (ointment) आपकी नज़र को धुँधली कर रही है तो ड्राइव ना करें।

ओरल एंटीबायोटिक (oral antibiotic)

एन्टी इंफ्लेमेटरी एजेंट (anti inflammatory agents) के तौर पर एंटीबायोटिक (antibiotics) की कम खुराक तीन से चार महीनों तक दी जा सकती है। कभी-कभी यह समय बढ़ सकता है।

अगर आपका ब्लेफेराइटिस अन्य इलाजों पर प्रतिक्रिया नहीं देता है तो आपको दिन में एक या दो बार मुँह से ली जाने वाली एंटीबायोटिक (antibiotics) दी जा सकती हैं।

अगर लगेगा कि रोसैसिया (rosacea) आपके लक्षणों को बढ़ा रहा है तो ओरल एंटीबायोटिक (oral antibiotics) की सलाह इलाज के शुरुआत में भी दी जा सकती है।

ज़्यादातर लोग इलाज के कुछ हफ़्तों में ठीक होने लगते हैं। लेकिन आपको उनके कुछ महीनों तक लेने की ज़रूरत पड़ सकती है। आपके लिए एंटीबायोटिक (antibiotic) का कोर्स खत्म करना तब भी ज़रूरी है अगर आपके लक्षण ठीक हो रहे हैं।

सावधानी (Cautions)

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ ओरल एंटीबायोटिक (oral antibiotics) लोगों को सूरज के प्रभाव में संवेदनशील बनाने के लिए जानी जाती हैं। जब आप उन्हें ले रहे हों तो सूरज के प्रकाश, सनलैम्प के इस्तेमाल और धूप में लेटने से बचना चाहिए।

ओरल एंटीबायोटिक (oral antibiotics) कभी-कभी अजन्मे शिशु या विकसित बच्चों को प्रभावित करता है। इसलिए यह आमतौर पर गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला के इलाज में इस्तेमाल नहीं होता है। कुछ तरह के एंटीबायोटिक (antibiotics) का इस्तेमाल 12 साल से कम उम्र के बच्चों पर नहीं करते हैं।

ओरल एंटीबायोटिक (oral antibiotics) के दुष्प्रभाव बहुत दुर्लभ हैं क्योंकि इसकी खुराक बहुत कम होती है। लेकिन आपको पेट खराब (stomach upset), उल्टी (vomiting) और डायरिया (diarrhoea) का ख्याल रखना चाहिए।

ऑयली टीयर आई ड्रॉप (oil tear eye drops)

अगर ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के कारण आपके आँसू तेज़ी से सूख रहे हैं तो विशेष रूप से ऑयली टीयर ड्रॉप (oily tear drops) का इस्तेमाल करते हैं।

आई ड्रॉप (eye drops) जो टीयर फ़िल्म (tear film) के तैलीय भाग को बदलती है और आँख की सतह से वाष्पीकरण को कम करती है इनका तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। इन तैयारियों में सिंथेटिक ग्वार गम (synthetic guar gums) या लिपोसोमल स्प्रे (liposomal spray) शामिल हैं।

लिपोसोमल स्प्रे (liposomal spray) काउंटर से ली जाने वाली दवाई है जो दवाई पर्चे के साथ उपलब्ध नहीं होती है। इन्हें पलक के किनारों पर स्प्रे किया जाता है, जब आपकी आंखें बंद होती हैं। जब आप अपनी आँखें खोलते हैं तो घोल आँख की सतह पर चारो तरफ फैल जाता है, जो नई ऑयली फ़िल्म का निर्माण करता है।

आहार (Diet)

कुछ सबूतों के अनुसार खाने में ओमेगा 3 अधिक मात्रा में लेना ब्लेफेराइटिस (blepharitis) को ठीक करने में सहायता कर सकता है।

ओमेगा -3 s का सबसे अच्छा स्रोत तैलीय मछली हैं, जैसे:

  • मैकरेल (mackerel)
  • सालमन (salmon)
  • सार्डीन (sardine)
  • हिलसा (herring)
  • ताज़ा या फ़्रोज़ेन टूना: डिब्बे में बन्द वाली नहीं, क्योंकि डिब्बे में बन्द करने वाली प्रक्रिया कभी-कभी लाभदायक तेल को हटा देती है

हफ्ते में दो बार मछली के दो भागों को खाने का लक्ष्य बनाए। जिसमें से एक तैलीय मछली होनी चाहिए।

आप तरह-तरह के नट्स और सीड्स, सब्ज़ियों, तेल, सोयाबीन, सोया उत्पाद और हरी पत्तेदार सब्जियों से भी ओमेगा 3 प्राप्त कर सकते हैं।

ओमेगा 7 और सी-बक्थोर्न (sea buckthorn) का तेल भी मददगार साबित होता है।

अन्य स्थितियों का इलाज (Treating other conditions)

अगर आपमें कोई अंदरूनी समस्या है जो ब्लेफेराइटिस (blepharitis) का कारण बन रही है तो आपके डॉक्टर इसके लिए इलाज लिखेंगे या प्रभावी ढंग से इलाज होने के लिए आपको एक विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं।

यह आपके स्थिति के कारण और अन्य लक्षणों पर निर्भर करता है। आपको अतिरिक्त इलाज की भी ज़रूरत पड़ सकती है।

उदाहरण के लिए अगर आपको सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस (seborrhoeic dermatitis) या डैंड्रफ (dandruff) है तो आप अपने स्काल्प (scalp) और बरौनी पर एन्टी डैंड्रफ शैम्पू का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर आपको ड्राई आई सिंड्रोम (dry eye syndrome) है जो ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के साथ होता है तो आपको इसके लिए अलग से इलाज लेने की ज़रूरत पड़ सकती है। जैसे कि आर्टिफिशियल टीयर आई ड्रॉप (artificial tear eye drops)

ब्लेफेराइटिस की जटिलताएं (Complications of blepharitis)

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) कई अलग-अलग समस्याओं का कारण बन सकता है लेकिन गंभीर परेशानियां दुर्लभ हैं।

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) से जुड़ी कई समस्याएं आपकी नज़र पर प्रभाव डाल सकती हैं। लेकिन आपकी नज़र हमेशा की लिए खराब नहीं होगी अगर इन समस्याओं को जल्दी खोजा और इनका इलाज किया जा सकता है।

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) की कुछ मुख्य परेशानियां नीचे बताई गई हैं।

ड्राई आई सिंड्रोम (dry eye syndrome)

ड्राई आई सिंड्रोम (dry eye syndrome) ब्लेफेराइटिस की एक सामान्य समस्या है। यह तब होता है जब आपकी आंखे पर्याप्त आंसुओं का निर्माण नहीं करती हैं या आँसू बहुत जल्दी सूख जाते हैं। यह आपकी आंखों को सुखा और सुजा हुआ बना सकता है; जिससे आपकी आँखें सूख़ कर पीड़ादायक और सूजी हुई हो आती हैं।

ड्राई आई सिंड्रोम (dry eye syndrome) त्वचा की उसी स्थिति के कारण हो सकता है जिससे ब्लेफेराइटिस (blepharitis) होता है। यह भी आपके आंसुओं की गुणवत्ता को प्रभावित करने का कारण बनते हैं।

  • सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस (seborrhoeic dermatitis): एक ऐसी स्थिति जो आपकी त्वचा को तैलीय या पपड़ीदार बना देती है।
  • (rosacea): एक ऐसी स्थिति जो मुख्य रूप से चेहरे पर प्रभाव डालती है।

यदि आपको लगातार ड्राई आई(dry eye) होता है, तो एक ऑप्टिशियंस (opticians) पर बड़े ऑप्टोमेट्रिस्ट (high street optometrist) से बात करें। वह एक आई ड्रॉप निर्धारित कर सकते हैं जिसमें आर्टिफिशियल आँसू (artificial tear) होता है। जो बिना पर्चे के भी फार्मिसिस्ट के पास मिल सकता है।

कंजंक्टिवाइटिस (conjunctivitis)

कंजक्टिवा (conjuntiva) में होने वाले सूजन को कंजंक्टिवाइटिस (conjunctivitis) कहते हैं। यह एक पारदर्शी झिल्ली होती है जो आंख की पुतली के सफेद भाग और पलक के अंदर की सतह को ढकती है।

कंजंक्टिवाइटिस (conjunctivitis) तब होता है जब बैक्टीरिया आँख की पलक को संक्रमित करते हैं। स्थिति आमतौर पर गंभीर नहीं होती है और आपकी नज़र को प्रभावित नहीं करती है।

कंजंक्टिवाइटिस के ज़्यादातर मामले हल्के होते हैं और बिना इलाज के 1-2 हफ़्तों में ठीक हो जाते हैं। हालांकि अगर आपको लगता है कि आपको कंजंक्टिवाइटिस (conjunctivitis) है तो अपने डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट (optometrist) से सम्पर्क करना चाहिए।

अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो उन्हें हटा दें और तब तक दोबारा ना पहनें जबतक आपका कंजंक्टिवाइटिस ठीक नहीं हो जाता।

अगर आपके लक्षण जारी रहते हैं और आपको बार-बार संक्रमण होता है तो आपको एंटीबायोटिक ड्राप (antibiotics drop) लिखी जा सकती है।

मेबॉमियन सिस्ट (meibomian cysts)

मेबॉमियन सिस्ट तब होता है जब आपकी पलकों के अंदर सूजन होने लगती है। अगर आपकी एक मेबॉमियन ग्रन्थि (meibomian gland) जो आंसू बनाने वाले तैलीय पदार्थ का निर्माण करती है, उसमें ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के कारण सूजन आ जाती है तो एक सिस्ट विकसित हो सकता है।

सिस्ट सामन्यतः दर्दरहित होते हैं, जबतक वो संक्रमित नहीं होते। ऐसे मामलों में आपको अपने डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट (optometrist) को दिखाना चाहिए, क्योंकि इस स्थिति में आपको एंटीबायोटिक (antibiotics) की ज़रूरत पड़ सकती है। गर्म कपड़े से सेंकाई सिस्ट की सूजन कम करने में सहायता करती है। हालांकि सिस्ट अक्सर अपने आप गायब हो जाते हैं।

अगर सिस्ट गायब नहीं होते हैं तो लोकल एनेस्थेटिक (local anaesthetic) का इस्तेमाल करके एक साधारण सर्जरी की प्रकिया से इसे हटाया जा सकता हैं।

पलक की समस्याओं के बारे में और पढ़ें।

स्टाई या बिलनी (styes)

बिलनी (styes) एक दर्दनाक सूजन है जो मवाद का निर्माण करती है और पलक के बाहर की सतह पर होती है। बिलनी (styes) बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती है।

हल्की बिलनी (styes) का इलाज गर्म पानी में एक कपड़ा डालकर, उस जगह पर सेंककर किया जा सकता है।

अगर आपको बहुत दर्दनाक बिलनी (styes) है जो ठीक नहीं हो रही तो अपने डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट (optometrist) को दिखाएं। यदि ऐसा होता है तो बिलनी को एक छोटी सुई के इस्तेमाल से सुखाया जा सकता है।

बिलनी (styes) के उपचार के बारे में और पढ़ें।

कॉर्निया चोटिल होना (Damage to the cornea)

ब्लेफेराइटिस (blepharitis) के गंभीर मामलों में या वे मामले जो उपचार में बहुत अच्छी प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, आँख के सामने की पारदर्शी परत जिसे केरेटाइटिस (keratitis) कहते हैं, जो कॉर्निया (cornea) की सतह होती है, उसे लालपन और सूजन चोटिल कर देती है।

कभी-कभी कॉर्निया (cornea) छालों और संक्रमण के चपेट में आ जाती है। जो नज़र के लिए ख़तरनाक स्थिति है। यह हमेशा गंभीर दर्द से जुड़ा रहता है।

अगर आपको केरेटाइटिस (keratitis) के लक्षण हैं तो यह ज़रूरी है कि आप तुरंत इलाज की सलाह लें, कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • अचानक आँख दर्द
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
  • नज़र का खराब होना

अगर आपको किसी भी लक्षण का अनुभव होता है तो तुरंत अपने डॉक्टर या लोकल आपातकालीन आई केयर सर्विस में सम्पर्क करें। अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो अपने करीबी दुर्घटना और आपातकालीन विभाग में जाएं।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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