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दुर्घटनाएं और प्राथमिक उपचार

मेडिकल समीक्षा के साथ

स्वास्थ्य संबंधी सभी लेखों की चिकित्सीय सुरक्षा जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है। अधिक जानकारी के लिए हमारी सम्पादकीय नीति देखें।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

परिचय

दुनिया में हर साल लाखों लोग दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होते हैं और काइ मरते भी हैं। आपात सेवाओं के पहुंचने से पहले अगर प्राथमिक उपचार दिया जाए तो इनमें से कई मौतों को रोका जा सकता है।

क्या किया जाए

अगर कोई घायल है तो आप :

  • पहले देखें कि आप या घायल व्यक्ति किसी खतरे वाली स्थिति में तो नहीं हैं अगर ऐसा है तो स्थिति को सबसे पहले सुरक्षित बनाएं।
  • यदि जरूरत हो और ऐसा करना सुरक्षित हो तो एंबुलेंस को बुलाएं।
  • बेसिक फर्स्ट ऐड यानी प्राथमिक उपचार दें।

किसी घटना के बाद क्या करें इसके बारे में और अधिक पढ़ें।

अगर कोई बेहोश है और सांस चल रही है

अगर कोई व्यक्ति बेहोश है लेकिन उसकी सांस चल रही है और कोई ऐसी चोट भी नहीं लगी है, जो उसे वहां से हटाने में बाधा बन रही हो, तो जब तक सहायता नहीं पहुंचती, तब तक उन्हें रिकवरी पोजीशन (recovery position) में रखें।

उन्हें निगरानी में रखें और यह सुनिश्चित करते रहें कि वे सामान्य तरीके से सांस लेते रहें और उनके सांस लेने का रास्ता बंद न हो।

अगर कोई व्यक्ति बेहोश है और सांस नहीं ले पा रहा

अगर कोई आदमी दुर्घटना के बाद सामान्य तरीके से सांस नहीं ले पा रहा तो फौरन एंबुलेंस को फोन करें और सीधे सीपीआर (CPR) देना शुरू करें। अगर आप जान बचाने वाली सांसों को देने के तरीके को नहीं जानते या उसमें प्रशिक्षित नहीं हैं तो केवल हाथों के जरिए सीपीआर (CPR) दें।

सीपीआर के बारे में और अधिक पढ़ें जिसमें केवल हाथों से सीपीआर देने के बारे में निर्देश और वीडियो भी शामिल हैं।

आम दुर्घटनाएं और आपात स्थितियां

नीचे कुछ सामान्य चोटों के बारे में लिखा गया है जिनका आपात स्थिति में उपचार करने की जरूरत होती है और उनके बारे में जानकारी दी गई है-

  • एनाफाइलेक्सिस (anaphylaxis) (या एनाफाइलेटिक शॉक/ anaphylactic shock)
  • खून बहना
  • जलना और झुलसना
  • चोकिंग
  • डूबना
  • बिजली का झटका (घरेलू)
  • हड्डी का टूटना
  • हार्ट अटैक
  • जहर का सेवन
  • झटके
  • स्ट्रोक

एनाफाइलेक्सिस (Anaphylaxis)

यह एक गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (allergic reaction) होता है जो किसी कीड़े के काटने या किसी खास भोजन करने के बाद होता है। यह विपरीत प्रतिक्रिया काफी तेज होती है जो उस व्यक्ति के एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में आने के कुछ ही सेकेंड या मिनटों में हो जाती है।

इस एनाफाइलेटिक शॉक (anaphylactic shock) के दौरान व्यक्ति के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है क्योंकि उसकी जीभ और गला सूज जाते हैं और सांस लेने का रास्ता बंद हो जाता है।

अगर आपको लगता है कि कोई शख्स एनाफाइलेटिक शॉक (anaphylactic shock) से गुजर रहा है तो ऐसे में जल्द एंबुलेंस बुलाएं।

यह पता करें कि उस व्यक्ति के पास कोई दवा है। कुछ लोग यह जानते हैं कि उन्हें किस चीज से एलर्जी है , तो वे एड्रेनालाइन सेल्फ इंजेक्टर (adrenaline self-injector) को साथ लेकर चलते हैं जो एक प्रकार से पहले से तैयार सीरिंज (सुईं) होती है। आप उस व्यक्ति की मदद उस दवा को लेने में कर सकते हैं। अगर आप प्रशिक्षित हैं तो उसे यह इंजेक्शन लगा भी सकते हैं ।

इंजेक्शन के बाद उस व्यक्ति पर तब तक नजर रखें जब तक मेडिकल हेल्प नहीं पहुंच जाती। सभी केजुअल्टी (casualties) में एड्रेनालाइन (adrenaline) के इंट्राम्सक्यूलर या सबक्यूटेनस (intramuscular or subcutaneous) (स्किन के अंदर) इंजेक्शन होते हैं उन्हें देखा जाना चाहिए और इंजेक्शन दिए जाने के बाद जितना जल्दी संभव हो सके किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल द्वारा उसकी जांच की जानी चाहिए।

यह सुनिश्चित करें कि जब तक मेडिकल सहायता नहीं आती वे सहज हों और जितना संभव हो उतनी आसानी से सांस ले सकें। अगर वे होश में हैं तो उन्हें सीधे बैठाना ही सबसे बेहतर तरीका होगा।

एनाफाइलेक्सिस (anaphylaxis) के उपचार के बारे में और अधिक पढ़ें।

खून बहना

अगर किसी का तेजी से खून बह रहा है तो मुख्य लक्ष्य होगा कि उसका खून बहना बंद किया जाए और शॉक का असर कम से कम किया जाए (नीचे देखें)।

जितना जल्दी हो सके सबसे पहले एंबुलेंस बुलवाएं।

अगर आपके पास डिस्पोजेबल दस्ताने हैं तो इंफेक्शन को फैलने के जोखिम को कम करने के लिए उनका इस्तेमाल करें।

यह देखें कि जख्म में कुछ घंसा हुआ न हो। अगर कुछ हो तो ध्यान रखें कि उस पर किसी तरह का दबाव न पड़े।

इसकी जगह पर उस चीज की दूसरी तरफ दबाव डालें और उसके आसपास बैंडेज लगाने से पहले पैडिंग कर दें ताकि उस चीज पर किसी तरह का दबाव न पड़े।

अगर कुछ भी नहीं घुसा है:

  • अपने दस्ताने वाले हाथ से घाव पर साफ कपड़े या ड्रेसिंग से यदि संभव हो, दबाव बना कर रखें, जब तक खून बहना बंद न हो जाए तब तक दबाव बनाकर रखें।
  • चोट को बांधने के लिए साफ ड्रेसिंग का प्रयोग करें।
  • अगर पैडिंग से भी खून बहता रहता है तो तब तक चोट को दबा कर रखें जब तक खून बहना बंद नहीं हो जाता और तब उसके ऊपर फिर से एक और पैड बांधें और उस पर बैंडेज लगा दें। ऐसा करते हुए पहले लगे पैड या ड्रेसिंग को न हटाएं लेकिन यह जांच करते रहें कि खून बहना बंद हुआ या नहीं।

अगर शरीर का कोई अंग जैसे उंगली कट गई है तो उसे प्लास्टिक बैग में रखें या क्लिंग फिल्म (cling film) में लपेट कर रखें और यह सुनिश्चित करें कि वह घायल के साथ अस्पताल जरूर पहुंचे।

अगर खून बहने की स्थिति गंभीर हो तो हमेशा मेडिकल हेल्प लें।

अगर किसी की नाक से खून बह रहा है और यह 20 मिनट बाद भी नहीं रुक रहा है तो अपने निकटतम अस्पताल में एमरजेंसी में दिखाएं।

कैसे कटने और छिलने से छोटे स्तर पर खून बहने का इलाज किया जाता है और नाक से खून बहने का उपचार कैसे करें, इस बारे में और अधिक पढ़ें।

हीमोस्टेटिक ड्रेसिंग और टोरनिक्वेट्स (Haemostatic dressings and tourniquets)

कई परिस्थितियों में काफी तेज खून बह रहा होता है और यह शरीर के खास अंगों जैसे सिर, गर्दन और धड़ से निकल रहा होता है तो उस मामले में हीमोस्टेटिक ड्रेसिंग (haemostatic dressings ) या टोरनिक्वेट (tourniquet) का प्रयोग करना उचित रहता है।

हीमोस्टेटिक ड्रेसिंग (haemostatic dressings) में ऐसी प्रापर्टी होती हैं जो खून को जल्द जमने में मदद करती हैं। टोरनिक्वेट (tourniquet) एक बैंड होता है जिसे खून बहने से रोकने के लिए अंग के आसपास कस कर बांधा जाता है। हीमोस्टेटिक ड्रेसिंग (Haemostatic dressings) और टोरनिक्वेट्स (tourniquets) उन लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने चाहिए जिन्हें इसे लगाने का प्रशिक्षण मिला हो।

जलना और झुलसना

अगर व्यक्ति जल या झुलस गया है तो:

  • जले हुए हिस्से को जितना जल्दी हो सके ठंडे बहते पानी से कम से कम 20 मिनट तक ठंडा करें या जब तक दर्द से राहत न मिले तब तक ऐसा करें।
  • अगर जरूरत हो तो एंबुलेंस या मेडिकल हेल्प की मदद लें।
  • जले हुए हिस्से को ठंडा करते समय सावधानी के साथ कपड़े या ज्वेलरी को उतार लें अगर वे त्वचा के साथ चिपके हुए न हों।
  • अगर आप एक बड़े जले हुए हिस्से को ठंडा कर रहे हैं खासकर बच्चे, शिशु या बुजुर्ग लोगों को तो सावधान रहें कि इससे उन्हें हाइपोथर्मिया (hypothermia) हो सकता है (हाइपोथर्मिया से उन्हें बचाने के लिए जले हिस्से को ठंडा करने की प्रक्रिया को रोकना होगा)।
  • जले हिस्से को ढीले तरीके से क्लिंग फिल्म (cling film) से ढक दें अगर वह उपलब्ध नहीं है तो एक साफ, सूखी ड्रेसिंग या नॉन फ्लफी मेटेरियल का प्रयोग करें, जले भाग को कस कर बांधे नहीं क्योंकि उसमें सूजन से और घाव बढ़ सकता है।
  • जले हिस्से पर क्रीम, लोशन या स्प्रे न लगाएं।
  • कैमिकल से जलने पर रक्षात्मक दस्ताने पहनें, किसी प्रभावित कपड़े को उतार दें और जले भाग को 20 मिनट तक बहते पानी में इस तरह ठंडा करें कि कैमिकल बह जाए। यदि संभव हो तो चोट की वजह का पता लगाएं।

ऐसी स्थितियों में जहां नियमित रूप से कैमिकल का काम होता है वहां पर कैमिकल एंटीडोट (chemical antidote ) भी उपलब्ध कराया जाता है।

सावधान रहें, कैमिकल से खुद को बचा कर रखें और जरूरी हो तो रक्षात्मक कपड़े पहनें।

तुरंत एंबुलेंस या मेडिकल सहायता के लिए संपर्क करें।

जले और झुलसे लोगों के उपचार करने के बारे में और अधिक पढ़ें।

चोकिंग

यहाँ दी गई जानकारी वयस्कों और एक साल से ज्यादा उम्र के बच्चों में दम घुटने के बारे में दी गई है। एक साल से कम उम्र के बच्चों में चोकिंग की समस्या के लिए क्या करें, इसके बारे में और अधिक पढ़ें।

हल्की चोकिंग (Mild choking)

अगर हवा लेने का रास्ता आंशिक रूप से बंद हो गया हो तो व्यक्ति अमूमन बोलने, रोने, खांसने या सांस लेने में सक्षम होगा। ऐसी हालत में व्यक्ति स्वयं इस तरह की बाधा को दूर करने में सफल हो सकता है।

अगर चोकिंग हल्की है:

  • उस व्यक्ति को प्रेरित करें कि वह खांसकर अवरोध को दूर करने की कोशिश करे।
  • अगर कोई वस्तु उनके मुंह में है तो उन्हें कहें कि वे उस थूक कर बाहर निकालने का प्रयास करें।
  • उनकी मदद करने के लिए अपनी उंगली उनके मुंह में न डालें क्योंकि वह अचानक आपकी उंगली काट भी सकता है।

अगर खांसने से काम न बने तो पीठ पर थपकी मारना शुरू करें ( नीचे देखें)।

गंभीर चोकिंग (Severe choking)

अगर चोकिंग काफी गंभीर है तो व्यक्ति बोलने, रोने, खांसने या सांस लेने में सक्षम नहीं होगा और बिना किसी सहायता के अंत में बेहोश हो सकता है।

वयस्क या एक साल से उपर के बच्चे की मदद के लिए:

  • उस व्यक्ति के पीछे किसी एक तरफ को होकर खड़े हों। उनकी छाती को एक हाथ से सहारा दें। उस आदमी को आगे की तरफ झुकाएं ताकि उनके सांस लेने के रास्ते में अटकी चीज उनके मुंह से बाहर निकल सके और वह शरीर के और अंदर न चली जाए।
  • अपने हाथ के हत्थे (आपकी के पंजे और कलाई के बीच का जोड़ वाला भाग) से व्यक्ति के कंधे के किनारों पर पांच तेज झटके मारें।
  • जांच करें कि अवरोध करने वाली चीज निकल गई है।
  • अगर नहीं निकली तो पेट को पांच बार जोर से दबाएं (नीचे देखें)।

अगर बच्चा एक साल से कम उम्र का हो, या गर्भवती महिला हो या मोटे लोग हों तो पेट को इस तरह दबाने से बचना चाहिए।

जो व्यक्ति गंभीर चोकिंग की समस्या से पीड़ित हो और उपरोक्त में से किए भी समूह में से न आता हो , उसके साथ पेट को जोर दे दबाने का कुछ ऐसा प्रयास करें :

  • जो व्यक्ति चोकिंग का शिकार है उसके पीछे खड़े हो जाएं।
  • अपनी बांहें उसकी कमर के आसपास रखें और उन्हें आगे झुकने को कहें।
  • अपनी मुट्ठी कस लें और उसे व्यक्ति की नाभी के ठीक उपर रखें।
  • अपना दूसरा हाथ अपनी मुट्ठी के ऊपर रखें और उसे तेजी से अंदर की तरफ और ऊपर की तरफ खींचे।

इसे पांच बार दोहराएं।

इसका उद्देश्य छाती पर हर धक्के के साथ बाधा बनी चीज को बाहर निकालना होता है न कि पांच बार सिर्फ धक्का मारऩा।

पीठ पर मारने या सीने पर धकेलने के तीन चक्र के बाद भी अगर बाधा बाहर नहीं निकल रही तो एंबुलेंस को बुलवाएं और जब तक सहायता आती है उसकी मदद करते रहें।

चोकिंग के शिकार व्यक्ति को बाद में किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल द्वारा जांचा जाना चाहिए कि उसके अंदर कोई चोट तो नहीं आ गई या उस चीज का कोई छोटा हिस्सा अंदर ही तो नहीं रह गया।

डूबना

अगर कोई पानी में परेशानी महसूस करता है तो वह दूसरों की मदद के लिए तब तक पानी में न जाए जब तक ऐसा करना जरूरी न हो जाए।

पानी में डूबे किसी शख्स को जब जमीन पर लाया जाए, तो हो सकता है कि वह सांस न ले रहा हो, ऐसे में उसके पास हवा आने का रास्ता खोल कर रखें और सीपीआर करने से पहले पांच प्रारंभिक रेसक्यू ब्रीथ (rescue breaths) दें। अगर आप अकेले हैं तो एमरजेंसी हेल्प के लिए कॉल करने से एक मिनट पहले सीपीआर दें।

जानें सीपीआर और रेस्क्यू ब्रीथ कैसे दें।

अगर कोई व्यक्ति बेहोश है लेकिन सांस ले रहा है तो उन्हें रिकवरी पोजीशन (recovery position) में रखें , जिसमें उनका सिर उनके शरीर से नीचे की तरफ हो और शीघ्र एंबुलेंस को बुलवाएं।

उस व्यक्ति को देखते रहें और सुनिश्चित करें कि वह सांस लेना बंद न करे या उनके हवा का मार्ग बंद न हो।

बिजली का झटका (घरेलू)

यदि किसी को बिजली का झटका लगा हो तो मुख्य जगह से बिजली का करेंट बंद कर दें ताकि उसके और बिजली के बीच का संपर्क खत्म हो सके।

अगर आप मुख्य सप्लाई तक नहीं पहुंच सकते तो:

  • उस व्यक्ति के पास न जाएं या उसे तब तक न छुएं जब तक आप यह सुनिश्चित न कर लें कि बिजली की आपूर्ति बंद नहीं हो गई।
  • एक बार बिजली की आपूर्ति काट दी जाए और वह आदमी सांस न ले पा रहा हो तो फौरन एंबुलेंस को बुलवाएं।
  • इसके बाद अगर बिजली का झटका काफी गंभीर लगा है तो मेडिकल सहायता लें।

फ्रैक्चर

यह बताना काफी मुश्किल होता है कि किसी की हड्डी टूटी है या जोड़ टूटा है या उसे सिर्फ मांसपेशियों में चोट आई है। अगर आपको इस लेकर किसी तरह का संशय हो तो उस चोट को हड्डी टूटने के समान ही माना जाना चाहिए।

अगर कोई व्यक्ति बेहोश है और सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहा हो या काफी खून बह रहा हो तो उसे सबसे पहले देखना चाहिए। खून बहना रोकने के लिए सीधे दबाव डालें और सीपीआर दें।

अगर कोई व्यक्ति बेहोश है तो आगे उसको दर्द या क्षति न हो इसके लिए फ्रैक्चर को जहां तक संभव हो सीधा रखें जब तक उसे सुरक्षित अस्पताल न पहुंचा दिया जाए।

चोट का अंदाजा लगाएं और तय करें कि उन्हें कैसे अस्पताल में भेजा जाए किसी एंबुलेंस से या कार में। उदाहरण के लिए अगर दर्द काफी तेज हो तो आप उन्हें कार से भी अस्पताल ले जा सकते हैं। बेहतर होगा कि कोई और व्यक्ति वाहन को चलाए ताकि उसकी हालत अगर खराब हो जाए उदाहरण के लिए वह दर्द की वजह से बेहोश हो जाए या उल्टी करने लगे तो आप उसे संभाल सकें।

हालाँकि अगर:

  • वह काफी दर्द में हों और तेज पेनकिलर दवा की जरूरत हो तो उन्हें हिलाएं नहीं और एंबुलेंस को बुलवाएं।
  • हो सकता है उनका पैर टूट गया हो, तो उन्हें हिलाएं नहीं लेकिन उन्हें उसी स्थिति में रखें जैसे वो आपको मिले हैं और एंबुलेंस को बुलवाएं।
  • आपको आशंका हो कि उन्होंने अपनी पीठ चोटिल कर ली है या तोड़ ली है तो उन्हें हिलाएं नहीं और एंबुलेंस को बुलवाएं।
  • उस घायल व्यक्ति को कुछ खाने या पीने को न दें क्योंकि उन्हें अस्पताल पहुंचकर एनेस्थिसिया (सुन्न करने की दवा) दिया जाना होता है।

अगले पेजों में खास टूटी हड्डियों के बारे में और अधिक पढ़ सकते हैं:

  • टूटी ऐड़ी
  • टूटी बाजू या कलाई
  • टूटी कॉलरबोन
  • टूटा पंजा
  • टूटी पसलियां
  • कूल्हों में फ्रैक्चर

हार्ट अटैक

दुनियाभर में हार्ट अटैक जीवन को खतरे में डालने वाली सबसे आम बीमारी है।

अगर आपको लगे कि किसी को हार्ट अटैक आ रहा है या आ सकता है तो उन्हें नीचे बैठा दें और जितना संभव हो सके उन्हें सहज महसूस करवाएं और एंबुलेंस को बुलवाएं।

हार्ट अटैक के लक्षणों में शामिल हैं:

  • सीने में दर्द- यह दर्द अमूमन सीने के मध्य या बायीं तरफ होता है और इसमें दबाव, जकड़न और खिंचाव की स्थिति महसूस हो सकती है।
  • शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द-यह भी महसूस हो सकता है अगर दर्द सीने से चलते हुए एक या दोनों हाथों में या जबड़े, गर्दन, पीठ या पेट में पहुंच सकता है। उस व्यक्ति को आराम से बैठा दें और उन्हें सहज करें।
  • अगर वे होश में हैं तो उन्हें भरोसा दिलाएं और उन्हें 300 एमजी एस्प्रिन (300mg aspirin) की गोली धीरे-धीरे चबाने के लिए कहें (अगर आप जानते हैं कि उन्हें यह गोली नहीं लेनी चाहिए तो मत दें, उदाहरण के लिए वे 16 साल से कम उम्र के हों या उससे एलर्जिक हों)।

अगर व्यक्ति के पास सीने में दर्द या एन्जाइना (angina) के लिए कोई दवा जैसे स्प्रे या गोली है तो उसे लेने में उसकी मदद करें। जब तक मदद पहुंचती है उसके प्रमुख संकेतों पर ध्यान दें जैसे सांस लेना।

अगर उसकी हालत खराब हो जाती है और वह बेहोश हो जाता है तो उसके सांस लेने का रास्ता खोलें, उसकी सांस चेक करें और जरूरी हो तो सीपीआर देना शुरू करें। एमरजेंसी सेवा को फिर से अलर्ट करें कि रोगी अब कार्डिएक अरेस्ट (cardiac arrest ) में आ चुका है।

जहर

जहर संभावित रूप से जानलेवा हो सकता है। इसके ज्यादातर मामले उस वक्त होते हैं जब कोई व्यक्ति जहरीला पदार्थ निगल लेता है जैसे ब्लीच, किसी दवा को ज्यादा मात्रा में खा लेना या जंगली पौधे या फंगी खा लेना । एल्कोहल से होने वाली प्वायजनिंग (poisoning) में भी इसी तरह के लक्षण दिखते हैं।

अगर आप सोचते हैं कि किसी ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है तो तुरंत चिकित्सा सहायता और सलाह के लिए एंबुलेंस को बुलवाएं।

जहर के सेवन का असर निगले गए पदार्थ पर निर्भर करता है लेकिन उसमें उल्टी, बेहोशी, दर्द या सीने में जलन की परेशानी शामिल हो सकती है। नीचे दी गई सलाह महत्वपूर्ण होगी:

  • पता लगाए क्या खाया गया है ताकि आप पैरामेडिक या डॉक्टर को बता सकें।
  • जब तक डॉक्टर सलाह न दे उस व्यक्ति को कुछ भी खाने या पीने को न दें।
  • उल्टी करवाने की कोशिश न करें।
  • उस व्यक्ति के साथ रहें क्योंकि उसकी हालत बिगड़ सकती है और वह बेहोश हो सकता है।
  • अगर व्यक्ति बेहोश हो जाता है और मदद के आने का इंतजार कर रहे हैं तो उसकी सांस चेक करें और जरूरी हो तो सीपीआर करें।
  • अगर उस व्यक्ति के मुंह या सांस लेने के रास्ते में जहर लगा है तो मुंह से मुंह में सांस देने का प्रयास न करें।
  • अगर वह बेहोश है तो उन्हें अकेला न छोड़ें क्योंकि वे अपनी पीठ के बल लुढ़क सकता है, जिससे उसे उल्टी आ सकती है। वह उल्टी उनके फेफड़े में प्रवेश कर सकती है और उनकी सांस बंद हो सकती है।
  • अगर रोगी होश में है और सामान्य तरीके से सांस ले रहा है तो उन्हें रिकवरी पोजीशन में रखें और उनके होश और सांस पर निरंतर नजर रखें।

जहर खाने वाले के इलाज और एल्कोहल प्वायजनिंग (alcohol poisoning) के उपचार के बारे में और अधिक पढ़ें।

शॉक

किसी गंभीर चोट या बीमारी में यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि उसमें शॉक के संकेतों को देखा जाए (नीचे देखें)।

शॉक एक जानलेवा समस्या है जो उस समय होती है जब सर्कुलेटरी सिस्टम (the circulatory system) शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजनयुक्त रक्त प्रदान नहीं कर पाता जिससे प्रमुख अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।

यह अमूमन ज्यादा खून बहने से होता है लेकिन गंभीर रूप से जलने, तेज उल्टी करने, हार्ट अटैक, बैक्टीरिया इंफेक्शन या किसी गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (एनाफाइलिक्स/ anaphylaxis) से भी हो सकता है।

यहां पर वर्णित शॉक के प्रकार शॉक की भावनात्मक प्रतिक्रिया के समान नहीं हैं जो किसी दुर्घटना के बाद होते हैं।

शॉक के संकेतों में शामिल हैं:

  • पीली, ठंडी, मुरझाई त्वचा
  • पसीना आना
  • तेज और उखड़ती सांस
  • कमजोरी और चक्कर आना
  • प्यास लगना
  • उबासी लेना
  • आह भरना
  • उबकाई या उलटी

अगर आपको किसी व्यक्ति में इनमें से शॉक के कोई संकेत दिखें तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। अगर वे ऐसे दिखें तो आपको करना चाहिए:

  • एंबुलेंस मंगवाएं।
  • कोई चोट दिख रही है तो उसका उपचार करें।
  • अगर उस व्यक्ति की चोट इजाजत देती है तो उसे नीचे लिटा दें और संभव हो तो उसके पैरों को उपर उठाएं और सहारा दें।
  • उन्हें गर्म रखने के लिए कोट या कंबल का प्रयोग करें।
  • उन्हें काफी सहयोग और आश्वासन दें।

व्यक्ति पर नजर रखें अगर वे सांस लेना बंद कर देते हैं तो सीपीआर देना शुरू करें और एमरजेंसी सेवा को अलर्ट जारी करें।

स्ट्रोक

सबसे ज्यादा जरूरी बात को ध्यान में रखने की सबसे तेज निर्देशिका है कि किसी स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति से कैसे व्यवहार करें। जितना जल्दी उन्हें उपचार मिलेगा उतना ही बेहतर होगा। सबसे पहले एमरजेंसी मेडिकल हेल्प को बुलाएं।

अगर आपको लगता है कि किसी व्यक्ति को स्ट्रोक हो रहा है तो उसके लिए फास्ट गाइड का प्रयोग करें:

  • चेहरे की कमजोरी- देखें अगर कोई व्यक्ति मुस्कुराने की स्थिति में नहीं है या उनकी आंखें या मुंह लटक रहे हैं?
  • बांहों की कमजोरी- देखें की क्या वह सिर्फ एक बांह उठा पाने में सक्षम है?
  • बोलने में परेशानी- अगर वह साफ बोल नहीं पा रहा या आप उसकी बात नहीं समझ पा रहे?

एबूलेंस को बुलाने का समय-अगर किसी व्यक्ति में ऐसे संकेत दिख रहे हैं तो एमरजेंसी हेल्प को बुलवाएं।

स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में और अधिक पढ़ें।

आप क्या करें

अगर कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना में घायल हो गया है तो पहले चेक करें कि आप या वह व्यक्ति किसी खतरे वाली पोजीशन में तो नहीं हैं। अगर हैं तो स्थिति को सुरक्षित बनाएं।

जब ऐसा कर लें तो देखें कि घायल की स्थिति क्या है और जरूर तो तो एंबुलेंस मंगवाएं। इसके बाद आप बेसिक फर्स्ट ऐड कर सकते हैं।

चोट का मूल्यांकन

आमतौर पर किसी चोट के साथ व्यवहार करते समय तीन वरियताएं संदर्भित की जाती हैं, एबीसी, जिनका अर्थ है:

  • ए- एयरवे (A irway)
  • बी- ब्रीदिंग (B reathing)
  • सी- सर्कुलेशन (C irculation)

एयरवे

अगर घायल जवाब नहीं दे पा रहा है तो उनसे ऊंची आवाज में पूछें कि क्या वे अपनी आंखें खोल सकते हैं। अगर वे जवाब देते हैं तो आप उन्हें जब तक मदद नहीं पहुंचती उस स्थिति में रहने दे सकते हैं। जब तक आप इंतजार करते हैं उनकी सांस, नब्ज और प्रतिक्रिया का स्तर चेक करते रहें।

  • क्या वे चेतना में हैं?
  • क्या वे आपकी बात का जवाब दे रहे हैं?
  • क्या वे दर्द को महसूस कर पा रहे हैं?
  • क्या में किसी प्रकार की सहायता का जवाब नहीं दे पा रहे हैं (क्या वे बेहोश हैं) ?

अगर कोई जवाब नहीं दे पा रहे तो उसे जिस स्थिति में वे हैं वैसा ही रहने दें और उनके सांस लेने के रास्तों को खोलें। अगर जिस स्थिति में वे हैं ऐसा करना संभव नहीं है तो धीरे से उन्हें उनकी पीठ के बल पर लिटा दें और उनके सांस लेने की रास्ते को सहज करें।

उनके सांस लेने के रास्ते को खोलने के लिए एक हाथ उसके माथे पर रखें और धीरे से उनके सिर को पीछे की तरफ झुकाएं, उनकी ठोड़ी को दो उंगलियों से ऊपर की तरफ उठाएं। इससे उनकी जीभ गले की पिछली तरफ से दूर हो जाएगी। उनका मुंह फर्श की तरफ न धकेलें क्योंकि इससे उनकी जीभ ऊपर की तरफ चली जाएगी और सांस लेने का रास्ता बाधित हो जाएगा।

अगर आप सोचते हैं कि उसे रीढ़ की हड्डी में चोट लगी है तो अपने हाथ उसके सिर के नीचे रखें और उनका सांस लेने का रास्ता खोलने के लिए उनके सिर को हिलाए बिना अपनी उंगलियों से उसके जबड़े को आगे और ऊपर की तरफ उठाने की कोशिश करें। सावधान रहें उसकी गर्दन न हिले। बहरहाल, सांस का रास्ता खोलना गर्दन ने हिलने से ज्यादा महत्व रखता है। इसे जॉ थ्रस्ट टेक्नीक कहते हैं।

सांस लेना

व्यक्ति अभी तक सांस ले रहा है यह जांचने के लिए:

  • देखें कि उनकी छाती उठ या बैठ रही है
  • सांस लेने की आवाज सुनने के लिए उनके मुंह या नाक पर ध्यान दें
  • 10 सेकेंड के लिए अपने गाल पर उनकी सांस को महसूस करें

अगर वे सामान्य रूप से सांस ले रहे हैं तो उन्हें रिकवरी पोजीशन (recovery position) में रखें ताकि उनके एयरवे किसी बाधा से साफ रहें और उनकी सामान्य सांस लेने की प्रक्रिया पर नजर रखें। हांफना या अनियमित सांस लेने को सामान्य सांस लेना नहीं कहा जा सकता।

अगर व्यक्ति सांस नहीं ले रहा तो एंबुलेंस को बुलवाएं और सीपीआर शुरू करें।

सर्कुलेशन (Circulation)

अगर व्यक्ति सामान्य तरीके से सांस नहीं ले पा रहा तो आपको उसके सीने पर तत्काल दबाव देना शुरू करें।

अचानक कार्डिएक अरेस्ट (जब दिल धड़कना बंद कर देता है) के बाद पहले कुछ मिनट में एगोनल ब्रीदिंग (Agonal breathing) जिसे अंतिम हिचकी लेना भी कहते हैं, आम होती है। यह अचानक होती है, सांस लेते हुए अनियमित रूप से हांफने जैसा। इसे सामान्य सांस लेने के रूप में नहीं समझ लेना चाहिए और सीधे सीपीआर देते रहना चाहिए।

रिकवरी पोजीशन

यदि कोई व्यक्ति बेहोश है लेकिन उसकी सांस चल रही है और कोई अन्य जीवन को खतरे वाली हालत नहीं बन रही है तो उन्हें रिकवरी पोजीशन (recovery position) में रखा जाता है।

किसी को रिकवरी पोजीशन (recovery position) में रखने का मतलब होता है उसके एयरवे साफ और खुले रखे जाएं। यह भी सुनिश्चित करें कि किसी उल्टी या फ्लूइड की वजह से उनकी सांस न अटके।

इस पेज पर किसी व्यक्ति को रिकवरी पोजीशन में लाने के एक-एक कर निर्देशिका दर्शायी गई है।

या आप इन कदमों का पालन कर सकते हैं:

  • व्यक्ति अपनी पीठ के बल पर लेटा हो, फर्श पर उनकी तरफ झुकें
  • उनकी बाजू उनके शरीर के सही कोण में अपने पास रखें और उनके हाथ ऊपर की तरफ सिर की तरफ हों
  • उनके दूसरे हाथ को उनके सिर के नीचे फंसाएं ताकि उनके हाथ का पिछला हिस्सा उनके गाल को छुए
  • घुटने को एक सही कोण में अपने से दूर मोड़ें
  • सावधानी के साथ उस व्यक्ति को उनकी तरफ मुड़े हुए घुटने पर खींचते हुए लुढ़काएं
  • ऊपरी बाजू सिर का सहारा देने की स्थिति में हो और निचली बाजू उन्हें आपसे दूर लुढ़कने से रोकेगी
  • उनके सिर को धीरे से पीछे की तरफ झुकाते हुए और उनकी ठोड़ी को उठाते हुए उनके एयरवे को खोलें और जांच करें कि कुछ भी उनके एयरवे को बाधित न कर रहा हो
  • जब तक मदद न पहुंचे तब तक उस व्यक्ति की हालत पर नजर रखें

रीढ़ की हड्डी में चोट (Spinal injury)

अगर आप सोचते हैं कि उस व्यक्ति को रीढ़ की हड्डी में चोट लगी है तो जब तक आपात सेवा आप तक नहीं पहुंचती तब तक उन्हें हिलाने की कोशिश न करें।

अगर उस व्यक्ति के एयरवे खोलना जरूरी हो तो अपने हाथ उसके सिर के दोनों तरफ रखें और धीरे से उनके जबड़े को उंगलियों से ऊपर उठाएं और उनका एयरवे खोलें। सावधान रहें उनकी गर्दन न हिलाएं।

आपको संशय हो सकता है कि उसे रीढ़ की हड्डी में चोट लगी है अगर:

  • वह किसी ऐसा दुर्घटना में शामिल हो जिसमें सीधे उसकी रीढ़ की हड्डी पर चोट लगी हो जैसे ऊंचाई से सीधे पीठ के बल गिरना
  • अपनी गर्दन या पीठ में तेज दर्द की शिकायत कर रहे हों
  • अपनी गर्दन न हिसा पा रहे हों
  • कमजोरी, सुन्नपन या लकवा महसूस कर रहे हों
  • अपने अंगों, ब्लैडर और बोवल पर नियंत्रण खो चुके हों

सीपीआर

यह पेज हाथों से कार्डियोप्लमोनरी रेसुसाइटेशन (सीपीआर) (cardiopulmonary resuscitation- CPR) और रेस्क्यू ब्रीथ से सीपीआर के बारे में जानकारी और निर्देश मुहैया कराता है।

केवल हाथों से सीपीआर

सीने पर दबाव देकर करने के लिए:

  • अपने हाथ के किनारे उस व्यक्ति के सीने के मध्य में ब्रेस्टबोन पर रखें। अपना एक हाथ दूसरे हाथ के ऊपर रखें और अपनी उंगलियों के आपस में फंसा लें।
  • अपने कंधों को अपने हाथों के ठीक ऊपर स्थित कर लें।
  • अपने शरीर का वजन ( केवल अपने हाथों का नहीं) का प्रयोग करते हुए 5-6 सेमी (2-2.5 इंच) तक उनके सीने में दबाव डालें।
  • अपने हाथ उनके सीने पर रखें, दबाव को छोड़ें और सीने को वापस अपनी स्थिति में आने दें।
  • इस तरह से हर मिनट 100 से 120 बार दबाव देना जारी रखें जब तक एंबुलेंस न आ जाए या आप थक न जाएं।

जब आप एंबुलेंस को बुलाते हैं तो कुछ जगहों पर टेलीफोन पर आपको जीवन बचाने वाले निर्देश दिए जाते हैं जिसमें सीपीआर की सलाह भी होती है। ये अब आम हैं और मोबाइल फोन पर आसानी से उपलब्ध हैं।

रेसक्यू ब्रीथ के साथ सीपीआर

अगर आप सीपीआर में प्रशिक्षित हैं जिसमें रेसक्यू ब्रीथ भी शामिल है और इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि आप इसे ठीक से कर लेंगे तो प सीने परे दबाव के साथ सांस के जरिये सीपीआर भी दे सकते हैं। अगर आप पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं तो केवल हाथों से सीपीआर (ऊपर देखें) ही दें।

वयस्क

  • अपनी हाथ की हथेली व्यक्ति के सीने के बीच में रखें और दूसरा हाथ उसके ऊपर रखें और उसे 100 से 120 दबाव प्रति मिनट की रफ्तार के साथ 5-6 सेमी (2-2.5 इंच) तक नीचे की तरफ दबाएं।
  • हर 30 दबावों के बाद दो रेसक्यू ब्रीथ दें।
  • उस व्यक्ति के सिर को धीरे से ऊपर उठाएं औ दो उंगलियों से ठोड़ी को ऊपर करें। उसकी नाक को पिंच करें। अपने मुंह से उसका बंद कर दें और धीरे और निरंतर उनके मुंह में एक सेकेंड तक फूंक मारें। देखें कि क्या उसका सीना ऊपर उठ रहा है। दो रेसक्यू ब्रीथ दें।
  • जब तक वे संभलें नहीं या मेडिकल हेल्प न आ जाए तब तक सीने पर हर 30 दबावों के बाद 2 रेसक्यू ब्रीथ देते रहें।

एक साल से ज्यादा उम्र के बच्चे

  • बच्चे के सांस लेने के मार्ग को उसके माथे पर हाथ रखकर उसके सिर को धीरे से पीछे की तरफ झुकाते हुए उसकी ठोड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए खोलें। उसके मुंह या नाक से किसी भी दिखाई देने वाली बाधा को हटा दें।
  • उनकी नाक को पिंच करें। अपना मुंह उनके मुंह पर रखें और निरंतरता के साथ और तेजी से उनके मुंह में फूंक मारें, देखें कि क्या उनका सीना ऊपर उठ रहा है। उन्हें पांच प्रारंभिक रेसक्यू ब्रीथ दें।
  • एक हाथ की हथेली को उनके सीने के मध्य में रखें और 5 सेमी ( लगभग दो इंच) नीचे की तरफ दबाएं जो सीने के व्यास के लगभग एक तिहाई के समान होता है। सीने पर दबाव की मात्रा (गहराई) काफी महत्व रखती है। अगर आप 5 सेमी की गहराई नहीं हासिल कर पा रहे हैं तो दोनों हाथों का प्रयोग करें।
  • 100 से 120 मिनट की दर से हर 30 दबाव देने के बाद दो बार मुंह से सांस दें। यह चक्र तब तक जारी रखें जब तक वह राहत न पाएं या एमरजेंसी मदद ना पहुंच जाए।

एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए

  • शिशु के माथे पर एक हाथ रखते हुए उसके सिर को धीरे से पीछे की तरफ झुकें और ठोड़ी को ऊपर उठाते हुए उसके सांस लेने का रास्ता खोलें। उनके मुंह या नाक से किसी भी दिखाई देने वाली बाधा को हटा दें।
  • अपना मुंह उनके मुंह के ऊपर रखें और उनके मुंह से धीरे-धीरे तेज सांस दें उनका सीना उठ रहा है या नहीं यह चेक करते रहें। पांच प्रारंभिक रेसक्यू ब्रीथ दें।
  • सीने के बीच में दो उंगलियां रखें और उन्हें 4 सेमी (लगभग 1.5 इंच) तक नीचे दबाएं जो सीने के व्यास का लगभर एक तिहाई होता है। दबाव की गहराई महत्व रखती है। अगर आप 4 सेमी की गहराई उंगलियों से हासिल नहीं कर पा रहे हैं तो एक हाथ की हथेली का प्रयोग करें।
  • 100 से 120 दबाव प्रतिमिनट के 30 दबावों के बाद दो रेसक्यू ब्रीथ दें।
  • इस 30 दबावों के चक्र को तब तक जारी रखें जब तक वे रिकवर न हो जाएं या मेडिकल हेल्प न आ जाए।
NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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