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फूड एलर्जी (खाद्य पदार्थों से एलर्जी/Food allergy)

मेडिकल समीक्षा के साथ

स्वास्थ्य संबंधी सभी लेखों की चिकित्सीय सुरक्षा जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है। अधिक जानकारी के लिए हमारी सम्पादकीय नीति देखें।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

फूड एलर्जी क्या है?

फूड एलर्जी तब होती है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली विशेष खाद्य पदार्थों के लिए असामान्य प्रतिक्रिया करती है।

एलर्जिक रिएक्शन अक्सर हल्के होते हैं, लेकिन कभी-कभी बहुत गंभीर हो सकते हैं।

बच्चों में आमतौर पर दूध और अंडे से एलर्जी हो सकती है। वयस्कों में, फलों और सब्जियों से एलर्जी अधिक आम है। बच्चों और वयस्कों में मूंगफली से एलर्जी होना भी बहुत आम है।

फूड एलर्जी के लक्षण एक ही समय में शरीर के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • मुंह, गले या कान के अंदर खुजली होना
  • त्वचा पर लाल चकत्ते और खुजली (इसे यूर्टिकेरिया या हाइव्स कहा जाता है)
  • चेहरे, आंखों, होंठ, जीभ और मुंह के आसपास सूजन (इसे एंजियोएडिमा कहा जाता है)

फूड एलर्जी के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis)

सबसे गंभीर मामलों में, व्यक्ति को गंभीर एलर्जिक रिएक्शन(एनाफिलेक्सिस) होती है, जो जीवन के लिए खतरा हो सकती है।

यदि आपको संदेह है कि किसी को एनाफिलेक्सिस के लक्षणों का अनुभव हो रहा है, जैसे कि साँस लेने में कठिनाई और होठों में सूजन, तुरंत एम्बुलेंस के लिए कॉल करें और ऑपरेटर को बताएं।

फूड एलर्जी का क्या कारण है? (What causes food allergies?)

फूड एलर्जी तब होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से भोजन में पाए जाने वाले हानिरहित प्रोटीन को शरीर के लिए खतरा मानती है।

फिर यह संक्रमण को रोकने के लिए कई रसायनों का स्राव करता है। इन रसायनों के कारण एलर्जिक रिएक्शन बढ़ सकता है।

किसी भी भोजन से एलर्जी की प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो अधिक फूड एलर्जी पैदा करते हैं।

बच्चों में एलर्जिक रिएक्शन पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ निम्न हैं:

  • दूध
  • अंडे
  • मूंगफली
  • पेड़ की सुपारी
  • मछली
  • शेलफिश

फूड एलर्जी से पीड़ित अधिकांश बच्चे बचपन में एक्जिमा (त्वचा की एलर्जी की समस्या) से ग्रसित होते है। उनका एक्जिमा जितना गंभीर होता है और जितना पहले शुरू हुआ था, उन्हें फूड एलर्जी होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।

वयस्कों में निम्न खाद्य पदार्थ से फूड एलर्जी होती है:

  • कुछ प्रकार के फल जैसे सेब, नाशपाती, कीवी फल और आड़ू
  • कुछ प्रकार की सब्जियाँ जैसे आलू, गाजर, सेलेरी और पार्सनिप
  • क्रस्टेशियंस (शेलफिश), जैसे केकड़ा, झींगा मछली और झींगे
  • अखरोट, ब्राज़ील नट्स, बादाम और पिस्ता
  • मूंगफली
  • मछली

यह स्पष्ट नहीं है कि लोगों को भोजन से एलर्जी क्यों होती है। हालांकि फूड एलर्जी से ग्रसित लोगों में आमतौर पर अन्य एलर्जी की समस्या जैसे अस्थमा, हे फीवर और एक्जिमा हो सकता है।

फूड एलर्जी के कारणों और जोखिम के बारे में और पढ़ें।

फूड एलर्जी के प्रकार (Types of food allergies)

इम्युनोग्लोबुलिन ई नामक एक एंटीबॉडी द्वारा सबसे अधिक फूड एलर्जी की समस्या होती है। इसे आईजीई-मीडिएट फूड एलर्जी कहा जाता है। एलर्जेंस के संपर्क में आने के कुछ सेकंड या मिनट के भीतर तेजी से लक्षण पैदा होते हैं। इस प्रकार की एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति को एनाफिलेक्सिस का अधिक खतरा होता है।

इम्युनोग्लोबुलिन ई (नॉन आईजीई मीडिएट फूड एलर्जी) के कारण एलर्जिक रिएक्शन कुछ खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने के कुछ घंटों या दिनों के बाद भी होती है। इस प्रकार की एलर्जी का निदान अक्सर मुश्किल होता है।

इलाज (Treatments)

फूड एलर्जी का कोई इलाज नहीं है। एलर्जिक रिएक्शन को रोकने का सबसे अच्छा तरीका एलर्जी पैदा करने वाले भोजन की पहचान करना है। ऐसे भोजन से भविष्य में बचना चाहिए।

एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों की पहचान के बारे में और पढ़ें।

हालांकि, डॉक्टर की सलाह के बिना अपने बच्चे के आहार में कोई भी आमूलचूल परिवर्तन करने से बचें, जैसे कि डेयरी उत्पादों को न खिलाना।

हल्के से मध्यम एलर्जिक रिएक्शन के लक्षणों को कम करने के लिए एंटीहिस्टामिन का इस्तेमाल किया जाता है। एड्रेनेलिन नामक दवा एनाफिलेक्सिस के लिए एक प्रभावी उपचार है।

फूड एलर्जी से पीड़ित लोगों को अक्सर एक उपकरण दिया जाता है, जिसे ऑटो-इंजेक्टर पेन कहा जाता है। इसमें एड्रेनेलिन की एक खुराक होती है जो आपात स्थिति में उपयोग की जा सकती है।

फूड एलर्जी के इलाज के बारे में और पढ़ें।

डॉक्टर से सलाह कब लें (When to seek medical advice)

यदि आपको संदेह है कि आपको या आपके बच्चे को फूड एलर्जी हो सकती है, तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। वे आपको एलर्जी क्लिनिक में भेज सकते हैं।

कई बार लक्षण पूरी तरह से अलग होने के बावजूद कई माता-पिता यह मान लेते हैं कि उनके बच्चे को फूड एलर्जी है।

व्यावसायिक एलर्जी-परीक्षण किट उपलब्ध हैं, लेकिन उनके उपयोग की सलाह नहीं दी जाती है। कई किट अनसुने वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित हैं और भले ही वे विश्वसनीय हों। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

फूड एलर्जी के निदान के बारे में और पढ़ें।

कौन प्रभावित होता है? (Who is affected?)

अधिकांश फूड एलर्जी तीन वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। यह अनुमान लगाया जाता है कि इस उम्र के हर 14 बच्चों में से एक बच्चे को एक या अधिक बार फूड एलर्जी होती है।

अधिकांश बच्चे स्कूल शुरू होने के समय तक दूध, अंडे, सोया और गेहूं के खाद्य एलर्जी से ठीक हो चुके होते हैं।

मूंगफली की एलर्जी आमतौर पर अधिक सालों बनी रहती है। मूंगफली एलर्जी वाले पांच में से चार बच्चों को जीवन भर मूंगफली से एलर्जी रहती है।

वयस्कता के दौरान विकसित होने वाली फूड एलर्जी आजीवन होने की संभावना होती है।

कुछ अस्पष्ट कारणों से भी पिछले 20 वर्षों में फूड एलर्जी की दर में तेजी से वृद्धि हुई है।

हालांकि, एनाफिलेक्सिस से संबंधित खाद्य प्रतिक्रियाओं से होने वाली मौतें अब बहुत दुर्लभ हैं।

खाद्य एलर्जी और असहिष्णुता के मिथक

खाद्य एलर्जी और असहिष्णुता के बारे में कई मिथक हैं - क्या आप कल्पना से तथ्य बता सकते हैं? और दोनों में क्या अंतर है?

खाद्य असहिष्णुता क्या है?
खाद्य असहिष्णुता सिर्फ़ एक खाद्य एलर्जी ही नहीं है।
खाद्य असहिष्णुता वाले लोगों में दस्त, सूजन और पेट में ऐंठन जैसे लक्षण हो सकते हैं। यह कुछ पदार्थों को पचाने में कठिनाइयों के कारण हो सकता है, जैसे लैक्टोज। हालांकि, कोई एलर्जी प्रतिक्रिया नहीं होती है।
खाद्य एलर्जी और एक खाद्य असहिष्णुता के बीच महत्वपूर्ण अंतर में शामिल हैं:
खाद्य असहिष्णुता के लक्षण आमतौर पर खाना खाने के कई घंटे बाद होते हैं
आपको एक एलर्जी की तुलना में असहिष्णुता को ट्रिगर करने के लिए बड़ी मात्रा में भोजन करने की आवश्यकता है
एलर्जी के विपरीत खाद्य असहिष्णुता कभी भी जीवन के लिए खतरा नहीं है

खाद्य असहिष्णुता के बारे में और पढ़ें।

फूड एलर्जी के लक्षण (Symptoms of a food allergy)

फूड एलर्जी (Food allergy) के कुछ लक्षण तुरंत नजर आने लगते हैं, जबकि अन्य लक्षणों को विकसित होने में लंबा समय लगता है।

खाद्य पदार्थों से होने वाली सबसे सामान्य एलर्जी रिएक्शन को आईजीई-मीडिएट फूड एलर्जी (IgE-mediated food allergy) कहा जाता है।

इस प्रकार की एलर्जी के लक्षण एलर्जी वाले खाद्य पदार्थ (the allergen) को खाने के तुरंत बाद यानी कुछ मिनटों के अंदर ही विकसित होने लगते हैं, कुछ मामलों में कुछ सेकंड के अंदर।

इन लक्षणों में शामिल है:

  • खुजली वाले लाल उभरे हुए चकत्ते (यूर्टिकेरिया) (urticaria) जो शरीर के बस एक हिस्से को प्रभावित करता है या पूरे शरीर पर फैल सकता है। कुछ मामलों में त्वचा लाल हो जाती है और खुलजी होने लगती है लेकिन चकत्ते विकसित नहीं होते हैं।
  • चेहरे, आंखों के आसपास, होठ, जीभ और मुंह के ऊपर सूजन (एंजियोडेमा) (angioedema)
  • गले में जकड़न महसूस होना
  • वॉइसबॉक्स में सूजन के कारण आवाज में बदलाव (तेज या कर्कश)
  • चक्कर आना और सिरदर्द
  • उबकाई
  • उलटी
  • पेट दर्द और ऐंठन
  • दस्त
  • सर्दी जुकाम के लक्षण जैसे छींक आना, नाक बहना और नाक जाम होना
  • आँखें लाल होना और जलन (एलर्जिक कंजंक्टिविटिस) (allergic conjunctivitis)
  • खांसना
  • सीने में जकड़न
  • सांस लेने में तकलीफ़

कुछ मामलों में कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करने से गंभीर फूड एलर्जी (एनाफिलेक्सिस/anaphylaxis) होती है और फुर्ती वाले व्यायाम करने से बढ़ जाती है। इसे फूड-डिपेंडेंट एक्सरसाइज इंड्यूस्ड एनाफिलेक्सिस (food-dependent exercise-induced anaphylaxis) कहते हैं।

एक कम सामान्य प्रकार के एलर्जिक रिएक्शन को नॉन आईजीई-मीडिएट फूड एलर्जी (non IgE-mediated food allergy) कहा जाता है। एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ खाने के बाद इस तरह की एलर्जी के लक्षणों को विकसित होने में ज़्यादा समय लगता है। आमतौर पर लक्षण कई घंटों या कुछ दिनों बाद नजर आते हैं।

एलर्जिक रिएक्शन के कुछ लक्षण निम्न हैं:

  • त्वचा लाल होना और खुजली
  • त्वचा का फटना, लाल और शुष्क होना और खुजली होना (एटॉपिक एक्जिमा)

अन्य लक्षणों के कारण स्पष्ट नहीं होते हैं और ये एलर्जी के अलावा अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। जैसे :

  • सीने में जलन और अपच होना। यह पेट से एसिड लीक होने के कारण होता है (गैस्ट्रो-ओसोफेजल रिफ्लक्स डिजीज)
  • बार-बार मल त्यागना या पतला मल होना (पर पूरी तरह से डायरिया नहीं होना)
  • मल में खून या म्यूकस
  • बच्चों में: अच्छी तरह खिलाने और डाइपर बदलने के बावजूद बच्चे का लगातार बहुत अधिक रोना (कोलिक)
  • कब्ज
  • गुदा, मलाशय और जननांगों के आसपास लाल होना
  • त्वचा सामान्य से ज़्यादा पीली पड़ना
  • सामान्य से धीमी गति से विकास होना

मिली जुली प्रतिक्रियाएं (Mixed reaction)

कुछ बच्चों में मिला जुला रिएक्शन देखने को मिलता है। जहां वे आईजीई के लक्षण जैसे सूजन और नॉन-आईजीई के लक्षण जैसे कब्ज का अनुभव करते हैं।

जिन बच्चों को दूध से एलर्जी होती है, ये लक्षण उन बच्चों में नजर आते हैं।

एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis)

गंभीर एनाफिलेक्टिक रिएक्शन आमतौर पर एलर्जेंस के संपर्क में आने के कुछ मिनट या कुछ घंटों के दौरान होते हैं। ये अचानक होते हैं और बहुत जल्दी ही काफी बदतर भी सकते हैं।

एनाफिलेक्सिस के लक्षण ऊपर दिए गए लक्षणों की तरह होते हैं और निम्न समस्याओं का कारण बन सकते हैं:

  • धड़कन बढ़ना (टैकीकॉर्डिया)
  • गले में सूजन और जकड़न के कारण सांस लेने में परेशानी
  • अचानक तीव्र आशंका और डर का अनुभव (जैसे कुछ बुरा होने वाला है)
  • रक्तचाप अचानक कम होना जिसके कारण चक्कर और भ्रम का अनुभव होना
  • बेहोशी

एनाफिलेक्सिस एक आपात स्थिति है और बिना तुरंत इलाज के यह जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है।

यदि आपको या आपके किसी परिचित को एनाफिलेक्सिस है तो पैरामेडिक वाली एंबुलेंस को बुलाएं।

फूड एलर्जी क्यूँ होती है? (What causes food allergies?)

एलर्जी तब होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से कुछ खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले हानिरहित प्रोटीन को स्वास्थ्य के लिए खतरा मानती है। तब यह कई रसायनों को स्रावित करती है जो एलर्जिक रिएक्शन की समस्या बढ़ जाती है।

प्रतिरक्षा तंत्र (The immune system)

प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडी नामक विशेष प्रोटीन का उत्पादन करके शरीर की रक्षा करती है।

एंटीबॉडीज शरीर में संभावित खतरों जैसे बैक्टीरिया और वायरस की पहचान करते हैं। फिर ये प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए रसायनों को स्रावित करने के लिए संकेत देते हैं।

सबसे आम प्रकार के फूड एलर्जी में एक प्रकार का एंटीबॉडी जिसे इम्युनोग्लोबुलिन ई (आईजीई) कहा जाता है, गलती से शरीर के लिए भोजन में पाए जाने वाले एक निश्चित प्रोटीन पर हमला करता है।आईजीई कई रसायनों का स्रव करता है,जिसमें हिस्टामाइन सबसे महत्वपूर्ण है।

हिस्टामिन (Histamine)

हिस्टामिन के कारण फूड एलर्जी के दौरान कुछ आम लक्षण नजर आते हैं। हिस्टामिन के कारण नजर आने वाले लक्षणों में शामिल हैं:

  • छोटी रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं और आसपास की त्वचा में सूजन हो जाती है
  • त्वचा में नसों को प्रभावित करता है, जिससे त्वचा में खुजली हो सकती है
  • नाक की परत में म्यूकस की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे उस स्थान पर खुजली और जलन होती है

फूड एलर्जी के ज्यादातर मामलों में शरीर के कुछ ही हिस्सों जैसे मुंह, गला और त्वचा में सीमित मात्रा में हिस्टामिन का स्राव होता है।

एनाफिलेक्सिस होने पर प्रतिरक्षा प्रणाली थक जाती है और रक्त में भारी मात्रा में हिस्टामिन का स्राव करती है। इसके कारण हिस्टामिन से जुड़े कई लक्षण नजर आते हैं।

नॉन आईजीई-मीडिएटेड फूड एलर्जी (Non IgE-mediated food allergy)

एक अन्य तरह की फूड एलर्जी को नॉन-आईजीई-मेडिएटेड फूड एलर्जी कहा जाता है।

इस तरह की एलर्जिक रिएक्शन में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया काफी हद तक पाचन तंत्र और त्वचा तक ही सीमित होती है, जिससे सीने में जलन, अपच और एक्जिमा जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। शिशुओं में नॉन-ईजीई-मीडिएटेड फूड एलर्जी के कारण दस्त और रिफ्लक्स हो सकता है (पेट का एसिड गले में लीक होता है)।

खाद्य पदार्थ (Foods)

बच्चों में निम्न खाद्य पदार्थों के कारण एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है:

  • अंडे
  • दूध: अगर किसी बच्चे को गाय के दूध से एलर्जी है, तो उसे सभी प्रकार के दूध से एलर्जी होने की संभावना हो सकती है, जैसे बकरी का दूध, साथ ही इनफैंट और फार्मूला मिल्क
  • सोया
  • गेहूँ
  • मूंगफली

वयस्कों में निम्न खाद्य पदार्थों के कारण एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है:

  • कुछ प्रकार के फल जैसे सेब, नाशपाती,
  • कीवी और पीच
  • कुछ प्रकार की सब्जियाँ जैसे आलू, गाजर, सेलेरी और पार्सनिप
  • क्रस्टेशियंस (शेलफिश), जैसे केकड़ा, झींगा मछली और झींगे
  • अखरोट, ब्राज़ील नट्स, बादाम और पिस्ता
  • मूंगफली
  • मछली

हालांकि, आमतौर पर किसी भी प्रकार के खाद्य पदार्थ से एलर्जी हो सकती है।

निम्न खाद्य पदार्थों से एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है:

  • सेलेरी : इसके कारण एनाफिलेक्टिक शॉक लग सकता है
  • ग्लूटेन: अनाज में पाया जाने वाला एक प्रकार का प्रोटीन
  • सरसों
  • तिल के बीज
  • फल और सब्जियां: आमतौर पर केवल मुंह, होंठ और गले (मौखिक एलर्जी सिंड्रोम) को प्रभावित करने वाले लक्षण होते हैं
  • पाइन नट्स (एक प्रकार का बीज)
  • मांस: कुछ लोगों को सिर्फ एक मांस से एलर्जी होती है, जबकि अन्य लोगों को मांस के कुछ प्रकारों से एलर्जी होती है। त्वचा में जलन इसका एक सामान्य लक्षण है।

खाद्य योजक (Food additives)

सल्फाइट (Sulphites)

सल्फर डाइऑक्साइड (E220) और अन्य सल्फाइट (E221, E222, E223, E224, E226, E227 और E228) को खाद्य पदार्थों जैसे ठंडे पेय, सॉसेज, बर्गर और सूखे फल और सब्जियां को संरक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।।

शराब और बीयर बनाने पर सल्फर डाइऑक्साइड स्वतः उत्पन्न होता है।आमतौर पर वाइन की बोतल में फ़र्मंटेशन को रोकने के लिए इसे उस में मिलाया जाता है। आमतौर पर, शराब की एक बोतल (वाइन से भरी बोतल का खाली हिस्सा) में ज्यादातर 'हेड स्पेस' सल्फर डाइऑक्साइड होता है।

अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को सल्फर डाइऑक्साइड से रिएक्शन हो सकता है। सल्फाइट युक्त अम्लीय पेय पदार्थ पीने के बाद अस्थमा से पीड़ित कुछ लोगों को दौरा पड़ सकता है, लेकिन यह बहुत आम नहीं माना जाता है।

यूके और बाकी यूरोपियन देशों में बेचे जाने वाले प्री-पैक्ड फूड के लिए फूड लेबलिंग नियमों की आवश्यकता होती है, ताकि लेबल पर स्पष्ट रूप से दिखाया जा सके अगर इसमें सल्फर डाइऑक्साइड या सल्फाइट्स 10mg प्रति किलोग्राम या प्रति लीटर से अधिक है।

बेंजोएट (Benzoates)

बेंजोइक एसिड (E210) और अन्य बेंजोएट्स (E211, E212, E213, E214, E215, E218 और E219) को खमीर और मोल्ड्स को बढ़ने से रोकने के लिए खाद्य संरक्षक के रूप में उपयोग किया जाता है, जो आमतौर पर सॉफ्ट ड्रिंक्स में होता है। ये फल और शहद में स्वतः मौजूद होते हैं।

इस समस्या से पहले से पीड़ित बच्चों में बेंजोएट के कारण अस्थमा और एक्जिमा के लक्षण बदतर हो सकते हैं।

किसे जोखिम होता है? (Who is at risk?)

वास्तव में प्रतिरक्षा प्रणाली हानिरहित प्रोटीन को घातक क्यों मानती है, इसका कारण स्पष्ट नहीं है। हालांकि, फूड एलर्जी के कई जोखिम कारकों की पहचान की गई है, इनके बारे में नीचे दिया गया है।

परिवारिक इतिहास (Family history)

यदि आपके माता-पिता, भाई या बहन को एलर्जी की बीमारी जैसे कि अस्थमा, एक्जिमा या फूड एलर्जी है, तो आपको फूड एलर्जी विकसित होने का अधिक खतरा है। हालाँकि, आप अपने परिवार के सदस्यों के समान फूड एलर्जी विकसित नहीं कर सकते हैं।

एलर्जी से जुड़ी अन्य समस्याएं (Other allergic conditions)

यदि आपके बच्चे को जन्म से एलर्जिक रिएक्शन जैसे अस्थमा या एटोपिक डर्मेटाइटिस (एक्जिमा, त्वचा की एलर्जी से जुड़ी समस्या) है तो उसे फूड एलर्जी होने की अधिक संभावना है।

फूड एलर्जी के मामलों में वृद्धि

खाद्य एलर्जी का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि पिछले दो दशकों में मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के लिए, भोजन से संबंधित एनाफिलेक्सिस से पीड़ित अस्पताल में भर्ती बच्चों की संख्या में 1990 के बाद से सात गुना वृद्धि हुई है।

एक सिद्धांत यह है कि मामलों में वृद्धि एक सामान्य बच्चे के आहार में परिवर्तन के कारण है जो पिछले 30 से 40 वर्षों में हुई है।

एक अन्य सिद्धांत के अनुसार, बच्चे "रोगाणु-मुक्त" वातावरण में तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मतलब यह है कि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को उन कीटाणुओं से प्रारंभिक संपर्क नहीं हो सकता है जिन्हें इसे ठीक से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसे हाइजीन हाइपोथिसिस (hygiene hypothesis) कहा जाता है।

फूड एलर्जी की जांच और निदान (Food allergy diagnosis)

यदि आपको लगता है कि आपको या आपके बच्चे को फूड एलर्जी है, तो अपने डॉक्टर से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लें।

यह संभावना है कि आपका डॉक्टर आपसे आपके बच्चे के लक्षणों के पैटर्न के बारे में कुछ प्रश्न पूछेगा, जैसे:

  • भोजन के संपर्क में आने के बाद लक्षणों को शुरू होने में कितना समय लगा?
  • लक्षण कितने समय तक रहे?
  • लक्षण कितने गंभीर थे?
  • क्या यह पहली बार था जब आपके बच्चे में इस प्रकार के लक्षण हुए हैं, और यदि नहीं, तो लक्षण कितनी बार हुए हैं?
  • खाना में क्या शामिल था और आपके बच्चे ने कितना खाना खाया?

वे आपके बच्चे के चिकित्सा इतिहास के बारे में भी जानना चाहेंगे, जैसे:

  • क्या आपके बच्चे को कोई अन्य एलर्जी या एलर्जी की स्थिति है?
  • क्या आपके परिवार में एलर्जी का इतिहास है?
  • आपके बच्चे को स्तनपान कराया गया था या बोतल से दूध पिलाया गया था?

आपका डॉक्टर यह सुनिश्चित करने के लिए आपके बच्चे के वजन और आकार नाप सकते हैं कि वे अपेक्षित दर से बढ़ रहे हैं।

यदि आपके डॉक्टर को संदेह है कि आपको या आपके बच्चे को खाद्य एलर्जी है, तो आपको परीक्षण के लिए एलर्जी क्लिनिक या केंद्र में भेजा जा सकता है।

यदि आपके बच्चे में ऐसे लक्षण थे जो जल्दी से (IgE- मीडिएट फूड एलर्जी) विकसित हुए, तो उसे स्किन प्रिक टेस्ट कराने के लिए कहा जाएगा। डॉक्टर उसे खून की जांच कराने के लिए भी कह सकते हैं।

यदि आपके बच्चे के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं (नॉन-आईजीई-मीडिएट फूड) तो उसे भोजन उन्मूलन आहार लेने के लिए कहा जा सकता है।

इस प्रकार के परीक्षण के बारे में अधिक जानकारी नीचे दी गई है।

स्किन-प्रिक टेस्ट (Skin-prick testing)

स्किन प्रिक टेस्ट के दौरान, पतले खाद्य पदार्थों की बूंदों को बांह पर रखा जाता है। त्वचा को फिर छेदा जाता है, ड्रॉप के माध्यम से, सिस्टम में भोजन को पहुंचाने के लिए एक छोटी सुई या पिन का उपयोग किया जाता है। खुजली, लालिमा और सूजन आमतौर पर एक सकारात्मक प्रतिक्रिया का संकेत देती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर दर्द रहित होती है।

स्किन-प्रिक टेस्ट के कारण एनाफिलेक्सिस होने की हल्की संभावना हो सकती है। इसलिए परीक्षण केवल वहीं किया जाना चाहिए जहां एनाफिलेक्टिक प्रतिक्रिया से निपटने के लिए सुविधाएं उपलब्ध हों। यह आमतौर पर एलर्जी क्लिनिक या केंद्र या अस्पताल में होता है।

रक्त परीक्षण (Blood test)

खून की जांच स्किन प्रिक टेस्ट का एक विकल्प है। आमतौर पर रक्त में एलर्जिक एंटीबॉडी की मात्रा को मापने के लिए यह टेस्ट किया जाता है।

खाद्य उन्मूलन वाले आहार (Food elimination diet)

खाद्य उन्मूलन वाले आहार में, आपके या आपके बच्चे के जिस आहार से दो से छह सप्ताह तक एलर्जी की प्रतिक्रिया पैदा होने का संदेह होता है, उसे हटाया जाता है। भोजन को बाद में फिर से आहार में शामिल किया जाता है।

यदि उस को छोड़ने पर आपके बच्चे के लक्षण दूर हो जाते हैं और फिर भोजन शुरू करने के बाद वापस आते हैं, तो इससे यह पता लगाया जा सकता है कि आपके बच्चे को कौन से भोजन से एलर्जी है।

आहार शुरू करने से पहले आपको आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए, जैसे:

  • किन भोजन और पेय से बचना चाहिए
  • खाद्य लेबल के बारे में कैसे समझना चाहिए
  • क्या आपके बच्चे को पोषण के किसी वैकल्पिक स्रोत की आवश्यकता है
  • आहार कितने समय तक लेना चाहिए

डॉक्टर से परामर्श किए बिना अपने आप भोजन-उन्मूलन आहार का प्रयास न करें।

वैकल्पिक जांच (Alternative tests)

एलर्जी के लक्षणों का पता लगाने के लिए कई जांच मौजूद है। उनमे शामिल है:

  • वेगा टेस्टिंग, यह विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन को मापकर एलर्जी के लक्षणों का पता लगाती है।
  • काइनेसियोलॉजी टेस्टिंग, यह मांसपेशियों की प्रतिक्रियाओं के द्वारा फूड एलर्जी का पता लगाता है।
  • हेयर एनालिसिस, इसमें आपके बालों का एक नमूना लिया जाता है और कई परीक्षण करके फूड एलर्जी का पता लगाया जाता है।
  • वैकल्पिक रक्त परीक्षण (ल्यूकोसाइटोटॉक्सिक परीक्षण), इसमें "सफेद रक्त कोशिकाओं की सूजन" की जाँच करके फूड एलर्जी का पता लगाया जाता है।

कई वैकल्पिक परीक्षण किट महंगे हैं। वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार वे प्रमाणित नहीं हैं और सटीक परीक्षण नहीं करते हैं। इसलिए इनसे बचना चाहिए।

फूड एलर्जी का इलाज (Treatment for food allergies)

दो मुख्य प्रकार की दवाएँ हैं जिनका उपयोग खाद्य पदार्थों में एलर्जी की प्रतिक्रिया के लक्षणों को दूर करने के लिए किया जा सकता है:

  • एंटीहिस्टामिन, जिसका उपयोग हल्के से मध्यम एलर्जी की प्रतिक्रिया के लिए किया जा सकता है
  • एड्रेनालिन, जिसका उपयोग गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाओं (एनाफिलेक्सिस) के इलाज के लिए किया जा सकता है

एंटीहिस्टामिन (Antihistamines)

एंटीहिस्टामिन, एलर्जिक रिएक्शन के अधिकांश लक्षणों के लिए जिम्मेदार प्रोटीन हिस्टामिन के प्रभाव को अवरुद्ध करके काम करते हैं।

कई एंटीहिस्टामिन फार्मासिस्ट या डॉक्टर के पर्चे के बिना उपलब्ध हैं, इसलिए किसी आपात स्थिति में इसे खरीदकर रखा जा सकता है।

कुछ एंटीहिस्टामिन, जैसे कि एलिमेमाज़िन और प्रोमेथाज़िन, दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसलिए फूड एलर्जी से पीड़ित अपने बच्चे को डॉक्टर से सलाह लेकर ही एंटीहिस्टामिन दें।

एंटीहिस्टामिन लेने के बाद शराब पीने से बचें क्योंकि इससे आपको सुस्ती का अनुभव हो सकता है।

एड्रेनालाईन (Adrenaline)

एड्रेनालाईन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करके निम्न रक्तचाप के प्रभावों रोकता है और वायुमार्गों को खोलकर सांस लेने की तकलीफ को कम करने में मदद करता है।

यदि आपके बच्चे, या आपकी खुद की एलर्जी, के कारण एनाफिलेक्सिस का खतरा है या एनाफिलेक्सिस पहले भी हो चुका है, तो आपको आपात स्थिति में एड्रेनेलिन का एक ऑटो-इंजेक्टर दिया जाएगा।

ऑटो-इंजेक्टर पर लिखे निर्देशों को ध्यान से पढ़ें और जब आपका बच्चा काफी बड़ा हो जाता है, तो उन्हें इसका उपयोग करने का तरीका सिखाएँ (नीचे देखें)।

ऑटो-इंजेक्टर का इस्तेमाल करना (Using an auto-injector)

यदि आपको संदेह है कि कोई व्यक्ति एनाफिलेक्सिस के लक्षणों का सामना कर रहा है, तो तुरंत एम्बुलेंस के लिए 999 पर कॉल करें और ऑपरेटर को बताएं।

बड़े बच्चों और वयस्कों को खुद को इंजेक्ट करने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। आपको छोटे बच्चों या बड़े बच्चों और वयस्कों को इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता हो सकती है जो खुद को इंजेक्ट करने के लिए सक्षम नहीं हैं।

ऑटो-इंजेक्टर के तीन प्रकार हैं:

  • इपिपेन
  • एनापेन
  • जेक्स्ट

तीनों एक ही तरीके से काम करते हैं। यदि एनाफिलेक्सिस का संदेह है, तो आपको इंजेक्टर से सेफ्टी कैप को हटा देना चाहिए, इसे अपनी बाहरी जांघ (समकोण रूप से पकड़कर) के विपरीत रखें और फिर इंजेक्टर के अंत में स्थित इंजेक्टर बटन दबाए रखें। इंजेक्शन कपड़ों के ऊपर से दिया जा सकता है।

आपकी जांघ में सुई चुभोकर एड्रेनेलिन की खुराक दी जाती है। आपको दस सेकंड के लिए बटन दबाए रखने की आवश्यकता है।

यदि व्यक्ति बेहोश है, तो जांच करें कि उनके वायुमार्ग खुले और साफ़ हैं और उनकी श्वास की जांच करें। फिर रिकवर करने की कोशिश करें (नीचे देखें।) किसी बेहोश व्यक्ति को रिकवरी पोजिशन में रखने से पहले यह ध्यान रखें कि उल्टी से उसका गला जाम न हो जाए।

व्यक्ति को उसकी साइड में रखें। उन्हें एक पैर और एक हाथ द्वारा सहारा दें। सिर झुकाकर और ठुड्डी उठाकर वायुमार्ग खोलें।

यदि व्यक्ति की सांस या हृदय गति रुक जाती है, तो कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) किया जाना चाहिए।

ऑटो-इंजेक्टर रखना (Owning an auto-injector)

सावधानी के तौर पर निम्नलिखित सलाह का पालन करना चाहिए:

  • हर समय अपने पास ऑटो-इंजेक्टर रखें या यदि आपका बच्चा बड़ा है,तो उसे भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें। आपको कई तरह के इंजेक्टर रखने की सलाह दी जा सकती है। अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। इसके अलावा आपको अपने बच्चे के पूरे विवरण के साथ इमर्जेंसी कार्ड या ब्रेसलेट भी दिया जा सकता है.जो उन्हें हर समय यह पहनना चाहिए।
  • बहुत ज़्यादा या कम तापमान के कारण एड्रेनेलिन का प्रभाव कम हो सकता है इसलिए फ्रिज या कार के अंदर के डिब्बों जैसे स्थानों में ऑटो-इंजेक्टर न छोड़ें।
  • एक्सपायरी डेट की नियमित जांच करें। एपिपेन की निर्माण की तारीख के बाद 18 महीने की अवधि तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है और एनापेन और जेक्स्ट को दो साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है। आउट-ऑफ-डेट इंजेक्टर केवल सीमित सुरक्षा प्रदान करेगा।
  • निर्माता आमतौर पर रिमाइंडर सेवा प्रदान करते हैं जहां आपको समाप्ति की तारीख के निकट संपर्क किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए दवा के साथ आने वाले सूचना पत्रक की जाँच करें।
  • यदि आपके बच्चे के पास एक ऑटो-इंजेक्टर है, तो उसे 30 किलो (4.7 स्टोन) वजन तक पहुंचने पर वयस्कों के समान खुराक देना चाहिए। यह आपके बच्चे के शरीर के आकार पर निर्भर करता है जो 5 से 11 वर्ष की आयु के बीच हो सकता है।
  • यदि आपको लगता है कि आपको या आपके बच्चे को एनाफिलेक्सिस हो रहा है, तो भले ही शुरुआती लक्षण हल्के हों, इंजेक्शन लगाने में देरी न करें। एड्रेनेलिन का उपयोग करना बेहतर है।जल्द से जल्द इलाज कराएं क्योंकि देर करने पर आपका बच्चा गंभीर एनाफिलेक्सिस से पीड़ित हो सकता है।

एलेक्सिस की कहानी (Alexis’ story)

32 वर्षीय एलेक्सिस मैनिंग कार्डिफ विश्वविद्यालय में चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र हैं। उन्हें अपने जीवन के अधिकांश समय मूंगफली से एलर्जी रही है।

"मुझे पहली बार बचपन में पता चला कि मुझे मूंगफली से एलर्जी है। कुछ मिठाइयों का महज स्वाद लेने से मेरा होंठ सूज जाता था। इस समस्या को हल करने में देर नहीं लगी। मैंने उस समय टेस्ट नहीं कराया था क्योंकि मूंगफली एलर्जी बहुत आम नहीं थी, और यह बहुत गंभीर नहीं थी। मैंने मूंगफली से परहेज किया, लेकिन रिएक्शन बदतर हो गया।”

"मुझे मेरी पहली एनाफिलेक्टिक रिएक्शन तब हुआ जब मैं 18 साल का था और सलाद खा रहा था जिसमें ऐसी चीजें थीं जो पके हुए बीन की तरह दिखती थीं लेकिन वास्तव में मूंगफली थीं। मैंने इनमें से एक खाया - सबसे अधिक मूंगफली मैंने एक बार में उसी वक़्त ली होगी, मुझे लगता है - तुरंत पता चल गया कि कुछ गलत हो रहा है। कुछ ही मिनटों के भीतर, मेरा चेहरा सूज गया। मेरी त्वचा टाइट हो गई , मैं अपनी आँखें बंद नहीं कर सकता था, मैं ठीक से सुन नहीं सकता था और सबसे बुरी बात, मैं साँस नहीं ले सकता था।”

"मैं भाग्यशाली था कि केवल 10 मिनट की दूरी पर अस्पताल मौजूद था। उन्होंने मुझे एड्रेनेलिन के कई इंजेक्शन दिए जिससे रिएक्शन नियंत्रित हो गया। मुझे कुछ एपिपेन दिए गए और घर भेज दिया गया।”

"तब से, मैं खाने पीने के प्रति सावधान रहता हूं। हाल के वर्षों में खाद्य लेबलिंग में स्पष्ट रूप से सुधार हुआ है, लेकिन कई खाद्य पदार्थों में अभी भी 'चेतावनी' हो सकती है, जिसके होने की सम्भावना काम होती है। जैसे कि मैंने देखा है मछली, लाल गोभी, और सावर क्रीम के ऊपर, ‘मूंगफली मौजूद हो सकती है’ का लेबल लगा होता है।

मैं हर समय अपने साथ कुछ एपिपेंस रखता हूं। लेकिन कभी भी उनका इस्तेमाल नहीं करता हूं क्योंकि मैं बहुत सावधान हूं। मैंने ऐसे रेस्टोरेंट में खाना बंद कर दिया जहां भाषा की समस्या आती थी। इसके अलावा मैं अपने द्वारा बनायी चीजों के अलावा कुछ भी नहीं खाता हूं। जो लोग मुझे जानते हैं वे इसे स्वीकार करते हैं, लेकिन अन्य लोग इसे अजीब समझते हैं। यह थोड़ा अजीब तब होता है जब मैं भोजन करने के लिए साथ बैठे लोगों के साथ अपनी खाली प्लेट लेकर बैठा होता हूं।

"मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं, हालांकि यह अजीब लग सकता है। कुछ लोग बचपन में एनाफिलेक्टिक रिएक्शन का अनुभव करते हैं, लेकिन मुझे यह तब हुआ जब मैं काफी बड़ा हो चुका था और इससे निपटना सीख गया था। मुझे अपने माता-पिता के लिए बहुत सहानुभूति है, जिन्होंने अपने छोटे बच्चों को गंभीर खाद्य एलर्जी से बचाने का प्रयास किया। इस वजह से, मैंने मूंगफली एलर्जी यूके नामक एक वेबसाइट की स्थापना की, जो मूंगफली एलर्जी वाले लोगों को बुनियादी जानकारी देती है और इसमें एक चर्चा मंच शामिल है जो उन्हें अन्य पीड़ित लोगों के साथ बात करना आसान बनाता है जैसे कि सुरक्षित खाद्य पदार्थ, यात्रा और स्कूल आदि के बारे में।”

"मूंगफली की एलर्जी से ग्रसित लोगों के लिए मेरी यही सलाह है कि वे घबराएं नहीं। शुरू में, ऐसा लगता है कि आप कुछ भी नहीं खा सकते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में फूड लेबलिंग में व्यापक सुधार हुआ है, इसलिए सतर्क रहना आसान हो गया है।"

जेन की कहानी (Jane’s story)

जेन 1997 में जन्मी लिली की मां हैं, जिन्होंने अपने जीवन के पहले कुछ महीनों में कई एलर्जी विकसित की हैं। यह जेन और लिली की कहानी है।

"पैदा होने के बाद से ही लिली को साँस लेने और दूध पीने में कठिनाई होती थी। वह कुछ भी लेने के लिए संघर्ष करती थी। उसका मल बहुत ढीला, पीला और बदबूदार था। पहले आठ हफ्तों में उसका वजन केवल 7 औंस था। 10 हफ्तों बाद, मैं उसे अपने डॉक्टर के पास ले गई क्योंकि मुझे लग रहा था कि कुछ गलत हो रहा है। अगले पांच महीनों तक मैं नियमित डॉक्टर के पास जाती रही।”

"लिली को 12 बार गैस्ट्रोएंटेराइटिस हुआ था और उसे तरल पदार्थ पर रखा गया और फिर से दूध दिया गया। जब दूध को फिर से पिलाया गया तो उसके लक्षण कुछ ही घंटे में दोबारा वापस आ गए जो पहले से अधिक गंभीर थे।”

"हमें स्थानीय अस्पताल में भेजा गया, जहां यह सुझाव दिया गया था कि लिली को मिल्क इनटॉलरेंस है। उसे सोया युक्त इनफैंट फार्मूला दिया गया लेकिन उसके लक्षणों में सुधार नहीं हुआ।”

"नौ महीने में, लिली गंभीर रूप से बीमार हो गई। उसकी मल-मूत्र जेली में बदल गई थी, वह पीला और बदबूदार था। हम उसे अस्पताल ले गए और सलाहकार ने हमें बताया कि हमारी बेटी शायद स्तनपान की एलर्जी से पीड़ित थी। अगले कुछ हफ्तों तक उसे ड्रिप के जरिए तरल पदार्थ दिया गया जब तक कि उसके लक्षण कम नहीं हो गए।”

"एक बार जब उसकी हालत स्थिर हो गई तो दूध और सोया दोनों को अलग-अलग फिर से खिलाया गया और लिली ने दोनों के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त की। फिर उसे अत्यधिक एलर्जी वाले शिशुओं के लिए एक अमीनो-एसिड-आधारित फार्मूला, नियोकेट देना शुरू किया गया। उसके गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट ने समझाया कि उसकी प्रणाली को इससे निपटने में थोड़ा समय लगेगा, चूँकि उसकी स्थिति की पुष्टि होने में काफ़ी वक़्त लगा है।”

"अगले तीन वर्षों में, लिली को कई टेस्ट, खाद्य चुनौतियों और स्कैन से गुजरना पड़ा। उसे अस्पताल में लंबे समय तक ड्रिप और नाक से दूध पिलाया गया। क्योंकि उसकी प्रणाली बचपन की बीमारियों से निपटने के लिए बहुत कमजोर थी। इससे उबरने में उसे दो साल लग गए। उसे सभी दूध उत्पादों, सोया, अंडे, नट्स, आम और कुछ एंटीबायोटिक दवाओं से गंभीर रूप से एलर्जी रहती है।”

"बड़े होने के बाद लिली के लिए चीजें अधिक कठिन हो गईं। हम केवल यह आशा कर सकते हैं कि उचित मार्गदर्शन और उसकी एलर्जी की सटीक समझ के साथ वह अधिक सुरक्षित रहेगी।”

"जब उनसे पूछा गया कि माता-पिता को क्या करना चाहिए अगर उन्हें लगता है कि उनके बच्चे को खाने की एलर्जी हो सकती है। तो उन्होंने कहा कि मैं हमेशा उन्हें अपने अंदर की आवाज को सुनने के लिए कहती हूं और मैं एलर्जी यूके के बारे में बताती हूं जिससे काफी मदद मिलती है।"

फूड एलर्जी के साथ रहना (Living with a food allergy)

नीचे दी गई सलाह मुख्य रूप से फूड एलर्जी से पीड़ित बच्चे के माता-पिता के लिए है, लेकिन यह आपके लिए भी लागू होगा यदि आप वयस्क हैं और फूड एलर्जी से पीड़ित हैं।

बच्चे का आहार (Your child’s diet)

वर्तमान में फूड एलर्जी का कोई इलाज नहीं है, हालांकि कई बच्चे इसके साथ ही बड़े हो जाते हैं। अपने भोजन से एलर्जेंस को हटाकर आप सबसे प्रभावी तरीके से फूड एलर्जी को कम कर सकते हैं।

हालांकि, कुछ खाद्य पदार्थों को छोड़ने से पहले अपने डॉक्टर या अपने बच्चे के डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

यदि बच्चे को अंडे या मूंगफली से एलर्जी है तो या तो इन खाद्य पदार्थों से परहेज करने पर उनके पोषण पर ज्यादा असर नहीं होगा। दोनों प्रकार के भोजन प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं लेकिन प्रोटीन के कई अन्य वैकल्पिक स्रोत हैं।

दूध से एलर्जी का प्रभाव अधिक हो सकता है क्योंकि दूध कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है, लेकिन कई अन्य तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे के आहार में कैल्शियम शामिल कर सकते हैं, जैसे हरी पत्तेदार सब्जियाँ।

कई खाद्य पदार्थ और पेय में अतिरिक्त कैल्शियम होता है।

यदि आप चिंतित हैं कि एलर्जी के कारण आपके बच्चे का विकास प्रभावित होगा तो सलाह के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

सूचक पत्र (लेबल) पढ़ना (Reading labels)

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपका बच्चा जिस खाद्य या पेय पदार्थ का सेवन करता है, पहले उस उत्पाद पर लगे लेवल को जरूर पढ़ लें।

यूरोपीय संघ के कानून के तहत, यूरोप में बिकने वाले किसी भी पूर्व-पैक भोजन या पेय में मौजूद तत्वों को स्पष्ट रूप से लेबल पर लिखा होना चाहिए, यदि इसमें निम्नलिखित तत्व शामिल हैं:

  • सेलेरी
  • अनाज जिसमें ग्लूटेन होता है (गेहूं, राई, जौ और जई सहित)
  • क्रस्टेशियंस (झींगा, केकड़ा और झींगा मछलियां)
  • अंडे
  • मछली
  • ल्यूपिन (ल्यूपिन बगीचे के आम पौधे हैं और कुछ किस्मों के बीजों का इस्तेमाल कभी-कभी आटा बनाने के लिए किया जाता है)
  • दूध
  • मोलस्क (मसल्स और सीप) (molluscs)
  • सरसों
  • बादाम, हेज़लनट्स, अखरोट, ब्राज़ील नट्स, काजू, पेकान, पिस्ता और मैकाडामिया नट्स
  • मूंगफली
  • तिल के बीज
  • सोयाबीन
  • सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फाइट्स (कुछ खाद्य पदार्थों और पेय में उपयोग किए जाने वाले संरक्षक) का स्तर10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम या प्रति लीटर से अधिक

कुछ खाद्य निर्माता अपने पूर्व-पैक खाद्य पदार्थों पर एलर्जी सलाह चेतावनी लेबल (उदाहरण के लिए, "नट्स" होते हैं) डालना पसंद करते हैं यदि उनमें एक घटक होता है जो आमतौर पर एलर्जी की प्रतिक्रिया का कारण बनता है, जैसे कि मूंगफली, अंडे या दूध।

हालाँकि, ये अनिवार्य नहीं हैं। यदि किसी उत्पाद पर एलर्जी सलाह बॉक्स या "घटक" से संबंधित जानकारी नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि 14 एलर्जेंस में से किसी भी सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

निर्माता कभी-कभी उपभोक्ताओं को चेतावनी देने के लिए अपने उत्पादों पर यह लेबल लगाते हैं कि वे बनने के दौरान किसी अन्य खाद्य उत्पाद से दूषित हो सकते हैं।

कुछ गैर-खाद्य उत्पादों से भी एलर्जी पैदा हो सकती है:

  • कुछ साबुन और शैंपू में सोया, अंडा और ट्री नट का तेल होता है।
  • कुछ पालतू जानवरों के खाने में दूध और मूंगफली हो सकती है
  • लिफाफे और टिकटों पर इस्तेमाल होने वाले कुछ ग्लू और चिपकने वाले लेबल में गेहूं की सूक्ष्म मात्रा

फिर से, किसी भी गैर-खाद्य उत्पादों के लेबल को पढ़ें जिससे आपका बच्चा निकट शारीरिक संपर्क में आ सकता है।

बिना पैक किए हुए खाद्य पदार्थ (Unpacked food)

वर्तमान में, बिना पैक किए हुए खाद्य पदार्थों को पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की तरह लेबल करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए यह जानने में कठिनाई हो सकती है कि किसी विशेष व्यंजन में किन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।

बिना पैक किए गए खाद्य पदार्थ निम्न है:

  • बेकरी (सुपरमार्केट में इन-स्टोर बेकरी सहित)
  • डेल्स
  • सलाद बार
  • सैंडविच की दुकानों से "रेडी-टू-ईट"
  • टेकअवे (पैक्ड फूड आईटम)
  • रेस्त्रां

यदि आपके बच्चे को गंभीर फूड एलर्जी है, तो उसे बाहर का भोजन सावधानीपूर्वक देना चाहिए

निम्नलिखित सलाह आपकी मदद कर सकती है:

  • स्टाफ को बताएं। किसी रेस्तरां में बुकिंग करते समय यह ध्यान रखें कि कर्मचारी आपके बच्चे की एलर्जी के बारे में जानें और बच्चे को वह भोजन न परोसें जिससे उन्हें एलर्जी है। यदि कर्मचारी इस तरह की गारंटी नहीं दे सकते हैं, तो दूसरे रेस्तरां का चयन करें। शेफ और रसोई के कर्मचारियों को सूचित करने के साथ-साथ वेटर और वेट्रेस को यह बताएं ताकि वे भोजन की जांच करके आपको भोजन परोसें।
  • मेनू को ध्यान से पढ़ें और "छिपी हुई सामग्री" की जांच करें। कुछ खाद्य पदार्थों में अन्य खाद्य पदार्थ मौजूद होते हैं जो एलर्जी को बढ़ा सकते हैं। रेस्तरां के कर्मचारी इसकी अनदेखी कर सकते हैं। कुछ मिठाइयों में नट्स होते हैं (जैसे चीज़केक बेस) और कुछ सॉस में गेहूं और मूंगफली होती है।
  • किसी बुरी स्थिति के लिए तैयार रहें। किसी भी घटना के लिए तैयारी करना एक अच्छा विचार है। खाना खाते समय अपने बच्चे की एलर्जी-रोधी दवा हमेशा अपने साथ रखें, खासकर यदि उन्हें एड्रेनेलिन का ऑटो-इंजेक्टर दिया गया है (ऑटो-इंजेक्टर से फूड एलर्जी के इलाज के बारे में और पढ़ें)।
  • बड़े बच्चों में आप "स्वाद-परीक्षण" का इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने बच्चे को खाना देने से पहले, उन्हें खाने का एक छोटा हिस्सा लेने के लिए कहें और अपने होठों के पास रगड़ने के लिए कहें कि क्या वे झुनझुनी या जलन का अनुभव करते हैं। यदि वे करते हैं, तो यह पता चलता है कि भोजन से उन्हें एलर्जिक रिएक्शन हो रहा है। हालांकि, "स्वाद-परीक्षण" सभी खाद्य पदार्थों के लिए काम नहीं करता है, इसलिए ऊपर दी गई सलाह को विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

आगे के लिए सलाह (Further advice)

माता-पिता के लिए आगे की सलाह नीचे दी गई है।

  • अपने बच्चे के स्कूल को उनकी एलर्जी के बारे में सूचित करें। आपके बच्चे की एलर्जी की गंभीरता के आधार पर उसे आकस्मिक जोखिम के मामले में अपने स्कूल के कर्मचारियों को आपातकालीन कार्य योजना प्रदान करना उपयोगी हो सकता है।
  • एड्रेनेलिन की सप्लाई बनाए रखने के लिए स्कूल की नर्स, या किसी अन्य उपयुक्त स्टाफ सदस्य की व्यवस्था करें। फूड एलर्जी के ब्रेसलेट भी उपलब्ध हैं, जिससे दूसरे लोग आपातकालीन स्थिति में आपके बच्चे की मदद कर सकते हैं।
  • अन्य माता-पिता को बताएं। छोटे बच्चे आसानी से अपने भोजन की एलर्जी के बारे में भूल सकते हैं और दूसरे बच्चों के भोजन को खा सकते हैं। अपने बच्चे के दोस्तों के माता-पिता को उनकी एलर्जी के बारे में बताने से इसे रोकने में मदद करनी चाहिए।
  • अपने बच्चे को शिक्षित करें। एक बार जब आपका बच्चा बड़ा हो जाता है और समझने लगता है, तो उसे स्पष्ट, सरल निर्देश प्रदान करें कि वे किन खाद्य पदार्थों से बचें और यदि वे गलती से उन्हें खा लेते हैं तो उन्हें क्या करना चाहिए।

शीला की कहानी (Sheila’s story)

बेदफोर्डशायर की 69 वर्षीय शीला को जीवनभर मछली से एलर्जी रही।

“जब भी मुझे बचपन में मछली खाने को मिलती तो मुझे उल्टी हो जाती। लेकिन उस समय, एलर्जी बड़े पैमाने पर नहीं पहचानी जाती थी, इसलिए मेरी मां ने मुझे मछली खिलाना जारी रखा। अगर मुझे कभी ताजी मछली दी जाती, तो मुझे हमेशा उल्टी होती है, मेरे पेट में तेज दर्द होता है और कभी-कभी बेहोश हो जाती है।

“मैं केवल टिन्ड या स्मोक्ड मछली खा सकती हूं। लेकिन कोई और मछली खाने से मैं बहुत बीमार पड़ जाती हूं। अपने पूरे जीवन में, मैंने केवल मछली खाने से परहेज किया है। कोई और इलाज नहीं है। इससे बचना ही सबसे अच्छा तरीका है।”

“मुझे रेस्तरां में बहुत सावधान रहना होता है। मैं जब रेस्तरां में जाती हूं तो मुझे हमेशा अपनी एलर्जी के बारे में बताना होता है। जब मैं देख लेती हूं कि मेरा भोजन मछली से पकाया नहीं गया है तब मैं इसे खाती हूं। खाद्य लेबल अब और अधिक स्पष्ट रूप से एलर्जी की स्थिति बताता है इसलिए मैं हमेशा लेबल भी जांचती हूं।”

“मेरी एलर्जी के साथ सबसे बुरा अनुभव तब हुआ जब मैंने एक रेस्तरां में पैलिया खाया। मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि इसमें मछली थी और मैंने रेस्तरां के बीच उल्टी की। ”

“फूड एलर्जी वाले किसी भी व्यक्ति को मेरी सलाह है कि अपने डॉक्टर से सलाह लेते रहें और वे जो भी टेस्ट कराने के लिए कहें, उसे जरूर कराएं। ताकि आपको पता चल सके कि आपको किस चीज से एलर्जी है। हमेशा लेबल को ध्यान से देखें और शादियों और किसी भी अन्य सामाजिक समारोह में खाने से सतर्क रहें।"

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।