मिर्गी

31 min read

परिचय

मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है और बार-बार दौरे आने का कारण बनती है, जिन्हें फिट भी कहा जाता है।

मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है और बार-बार दौरे आने का कारण बनती है, जिसे फिट भी कहा जाता है।

मिर्गी आमतौर पर बचपन के दौरान शुरू होती है, हालांकि यह किसी भी उम्र में शुरू हो सकती है।

मिर्गी का दौरा पड़ना

दौरा पड़ना मिर्गी का सबसे आम लक्षण है, हालांकि कई लोगों को मिर्गी हुए बिना भी जीवन में कभी भी दौरे पड़ सकते हैं।

मस्तिष्क में कोशिकाएं, जिन्हें न्यूरॉन्स के रूप में जाना जाता है, विद्युत आवेगों के द्वारा एक दूसरे के साथ संचार करती हैं। दौरा पड़ने के दौरान, विद्युत आवेग बाधित होते हैं, जो मस्तिष्क और शरीर के अजीब व्यवहार करने का कारण बन सकते हैं।

बरामदगी की गंभीरता हर इंसान में अलग तरह की हो सकती है। कुछ लोगों को बस कुछ सेकंड या मिनट के लिए-ट्रान्स जैसी स्थिति का अनुभव होता है, वहीं कुछ लोग बेहोश हो जाते हैं और ऐंठन (शरीर बेकाबू हो कर हिलने लगता है) होती है।

मिर्गी के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

मिर्गी क्यों होती है?

मिर्गी बहुत से विभिन्न कारणों से हो सकती है, हालांकि आमतौर पर यह मस्तिष्क को किसी प्रकार की क्षति पहुँचने के कारण होती है।

मिर्गी को तीन प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उसका कारण क्या है। कारण निम्न प्रकार हैं:

● लक्षणात्मक मिर्गी - जब मिर्गी के लक्षण मस्तिष्क को हुई क्षति या अवरोध के कारण होते हैं।

● क्रिप्टोजेनिक मिर्गी - जब ऐसा कोई सबूत नहीं मिलता है जिससे ये पता चले कि मस्तिष्क को कोई नुकसान पहुंचा है, लेकिन दूसरे लक्षण, जैसे कि कुछ सीखने में कठिनाइ होना,इस बात की इशारा करते हैं कि मस्तिष्क को नुकसान हुआ है।

● इडियोपैथिक मिर्गी - जब मिर्गी होने का साफ़ तौर पर कोई भी कारण नहीं मिल रहा हो।

मिर्गी के कारणों के बारे में और पढ़ें।

मिर्गी

ज़्यादातर मिर्गी का निदान तब किया जाता है जब आपको एक से अधिक बार दौरे पड़ते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई लोगों को अपने पूरे जीवनकाल में एक बार ही मिर्गी का दौरा पड़ता है।

एक डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट को आपके मिर्गी के दौरे के बारे में विस्तार से जानना सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है। मिर्गी के अधिकांश मामलों का निदान इसी तरह से किया जाता है।

आपके मस्तिष्क का कौन सा क्षेत्र मिर्गी से प्रभावित है यह निर्धारित करने के लिए कुछ स्कैन का उपयोग भी किया जा सकता है, लेकिन ये निदान के लिए अकेले इस्तेमाल नहीं किए जा सकते हैं।

मिर्गी के निदान के बारे में और पढ़ें।

मिर्गी

दवाईयां मिर्गी का इलाज नहीं कर सकतीं, लेकिन इनका इस्तेमाल अक्सर दौरे को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इन दवाओं को मिरगी-रोधी दवाएं (एईडीज़) भी कहते हैं। लगभग 70% मामलों में, मिर्गी के दौरे को एईडीज़ द्वारा सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है।

आपके दौरे को नियंत्रित करने से पहले एईडी का सही प्रकार और सही खुराक जानने में थोड़ा समय लग सकता है।

कुछ मामलों में, मस्तिष्क के प्रभावित क्षेत्र को निकालने या एक विद्युत उपकरण, जो दौरे को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, को स्थापित करने के लिए सर्जरी का इस्तेमाल किया जा सकता है ।

मिर्गी के इलाज के बारे में और पढ़ें।

मिर्गी

हालाँकि मिर्गी हर किसी में अलग तरह से होती है, लेकिन कुछ ऐसे सामान्य नियम हैं जो स्थिति को आसान बनाने में मदद कर सकते हैं।

कार चलाने, गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने और गर्भवती होने जैसी चीजों को करने से पहले आपको मिर्गी के बारे में सोचना पड़ सकता है।

मिर्गी के साथ जीवन को समायोजित करने में मदद करने के लिए आपको डॉक्टर या सहायता समूहों से सलाह मिल सकती है।

मिर्गी (SUDEP) में अचानक अप्रत्याशित मौत हो सकती है, हालाँकि ये काफ़ी दुर्लभ है, फिर भी मिर्गी से जुड़े मुख्य खतरों में से एक है। हर साल 500 से 1,000 तक लोग SUDEP के कारण मरते हैं, यह मिर्गी के दौरे से 1% कम है।

हालांकि SUDEP का कारण स्पष्ट नहीं है, आपके मिर्गी और आपके दौरों के बीच अच्छी समझ जोखिम को कम कर सकती है।

मिर्गी के साथ ही जीवन व्यतीत करने के बारे में और पढ़ें।

लक्षण

मिर्गी के मुख्य लक्षण हैं बार-बार दौरे पड़ना। दौरे बहुत अलग-अलग प्रकार के होते हैं, ये इस बात पर निर्भर करता है की मस्तिष्क का कौन सा भाग प्रभावित प्रभावित है।

मिर्गी वाले लोग किसी भी प्रकार के दौरे का अनुभव कर सकते हैं, हालांकि ज्यादातर लोगों को मिर्गी सिंड्रोम के रूप में पहचाने जाने वाले लक्षणों के अनुसार पैटर्न होते हैं।

दौरे कभी भी पड़ सकते हैं फिर चाहे आप जाग रहे हों या सो रहे हों (रात्रिकालीन दौरे)।

मस्तिष्क का कितना भाग प्रभावित है, डॉक्टर इससे दौरों को वर्गीकृत करते हैं। जिनमें शामिल हैं:

● आंशिक दौरे - जिसमे मस्तिष्क का केवल एक छोटा सा हिस्सा प्रभावित होता है

● सामान्यीकृत दौरे - जहाँ मस्तिष्क का अधिकांश भाग या पूरा मस्तिष्क ही प्रभावित होता है

कुछ दौरे इन श्रेणियों में फिट नहीं होते हैं और उन्हें अवर्गीकृत दौरों के रूप में जाना जाता है।

आंशिक

आंशिक दौरों के दो प्रकार हैं:

● साधारण आंशिक दौरे - जहाँ आपक पूरे समय होश में रहते हैं

● जटिल आंशिक दौरे - जहाँ आप अपने होश खो देते हैं और आपको दौरे के बाद कुछ भी याद नहीं रहता कि क्या हुआ था

एक साधारण आंशिक दौरे के लक्षणों में शामिल हैं:

● चीजों को देखने, सूंघने, महसूस करने, स्वाद या ध्वनि के तरीके में बदलाव

● एक तीव्र भावना जिसमें ऐसा महसूस होता है कि ये घटना पहले हो चुकी है (déjà vu)

● आपकी बाहों और पैरों में एक झुनझुनी या चुभता हुआ दर्द

● डर या ख़ुशी जैसे अचानक तेज़ भाव

● आपके हाथ, पैर और चेहरे की मांसपेशियाँ सख्त हो सकती हैं

● आपके शरीर में एक तरफ फड़कन का अनुभव हो सकता है

एक जटिल आंशिक दौरों के लक्षण में आमतौर पर स्पष्ट रूप से और अजीब शारीरिक व्यवहार शामिल होते हैं, जैसे:

● अपने होठों का चटकारा लगाना

● अपने हाथों को रगड़ना

● अजीब आवाज़ें निकालना

● अपनी बाहों को इधर-उधर करना

● कपड़ों को काटना

● चीज़ों के साथ अजीबो गरीब तरीके से व्यवहार करना

● एक अजीबो गरीब मुद्रा बनाना

● चबाना या निगलना

एक जटिल आंशिक दौरे के दौरान, आप किसी को भी कोई जवाब देने में सक्षम नहीं होंगे, और आपको बाद में घटना के बारे में कुछ याद भी नहीं रहेगा।

जटिल आंशिक दौरे काफी आम हैं और मिर्गी के दौरे वाले लोगों में 10 में से 2 लोगों को ये होता है।

सामान्यीकृत

ज्यादातर मामलों में, जिसे सामान्यीकृत दौरे पड़ते हैं वह व्यक्ति पूरी तरह से बेहोश हो जाता है।

सामान्यीकृत दौरे मुख्यतः छह प्रकार के होते हैं:

बेसुधी

बेसुधी दौरे, जिसे कभी-कभी पेटिट माल कहा जाता है, मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करते हैं। इसके कारण बच्चे को अपने आस-पास के बारे में 20 सेकंड तक कुछ पता नहीं होता। बच्चा खाली जगह में घूरने लगेगा, हालाँकि कुछ बच्चे अपनी आँखें फड़फड़ाते हैं या अपने होंठों को मसलते हैं। बच्चे को दौरे के बारे में कुछ याद नहीं रहता।

बेसुधी दिन में कई बार हो सकती है। हालांकि यह खतरनाक नहीं हैं, लेकिन इससे बच्चे का स्कूल में प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

मायोक्लोनिक झटके

इस प्रकार के दौरे से आपके हाथ, पैर या शरीर का ऊपरी भाग झटके खाता है या हिलता है, जैसे कि आपको बिजली का झटका लगा हो। ऐसा अक्सर केवल एक सेकंड के कुछ हिस्से तक होता है, और आप उस समय पूरी तरह से सचेत रहते हैं।

मायोक्लोनिक झटके अक्सर जागने के बाद शुरूआती कुछ घंटों में होते हैं और अन्य प्रकार के सामान्यीकृत दौरों के साथ में भी हो सकते हैं।

क्लोनिक दौरे

इसमें भी मायोक्लोनिक झटके की ही तरह फड़कन होती है, बस इसके लक्षण लंबे समय तक रहते हैं, आम तौर पर दो मिनट तक। बेहोशी भी हो सकती है।

एटोनिक दौरे

एटोनिक दौरे के कारण आपकी सभी मांसपेशियां अचानक ढीली पड़ जाती हैं, इसलिए ऐसा भी हो सकता है कि आप जमीन पर गिर जाएं। इस प्रकार के दौरों में चेहरे पर चोटें लगना आम हैं।

टॉनिक दौरे

एटोनिक दौरे के विपरीत, टॉनिक दौरे में सभी मांसपेशियाँ अचानक कठोर हो जाती हैं। आप संतुलन खो सकते हैं और गिर सकते हैं, इसलिए सिर के पिछले हिस्से में चोट लगना आम है।

टॉनिक-क्लोनिक दौरे

टॉनिक-क्लोनिक दौरे, जिसे कभी-कभी ग्रैंड माल के रूप में भी जाना जाता है, के दो चरण होते हैं। आपका शरीर कठोर हो जाएगा और फिर आपके हाथ और पैर फड़कने लगेंगे। आप चेतना खो देंगे और कुछ लोग गीले भी हो जाते हैं। दौरा आम तौर पर एक से तीन मिनट तक चलता है, लेकिन ये लंबे समय तक भी रह सकता है।

यह दौरे का सबसे आम प्रकार है, और मिर्गी वाले लोगों द्वारा अनुभव किए गए सभी दौरों का लगभग 60% टॉनिक-क्लोनिक दौरा है।

टॉनिक-क्लोनिक वही दौरा है जिसे ज्यादातर लोग मिर्गी के दौरे समझते हैं।

औरा

जिन लोगों को मिर्गी होती है उन्हें अक्सर एक विशिष्ट भावना या चेतावनी महसूस होती है कि दौरा पड़ने वाला है। इन चेतावनी संकेतों को औरा के रूप में जाना जाता है, लेकिन वे वास्तव में आंशिक दौरे होते हैं।

औरा हर व्यक्ति के लिए भिन्न होते हैं, लेकिन कुछ सामान्य औरा निम्नलिखित हैं:

● एक अजीब गंध या स्वाद महसूस होना

● déjà vu की भावना होना

● यह महसूस करना कि बाहर की दुनिया अचानक झूठी या सपने जैसी हो गई है

● भय या चिंता की भावना का अनुभव करना

● आपका शरीर अचानक अजीब महसूस करने लगता है

हालाँकि यह चेतावनी दौरे को रोक तो नहीं सकती, लेकिन यह आपको समय दे सकती है अपने आस-पास के लोगों को चेतावनी देने का और यह सुनिश्चित करने का कि आप सुरक्षित स्थान पर हैं।

स्टेटस एपिलेप्टिकस

स्टेटस एपिलेप्टिकस एक ऐसा दौरा है जो 30 मिनट से अधिक समय तक रहता है या दौरे की एक ऐसी श्रृंखला है जिसमें व्यक्ति को बीच में होश नहीं आता है। यदि एक दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक रहता है, तो एम्बुलेंस को बुलाएँ।

लंबे समय तक होने वाले दौरे में डायजेपाम को या तो इंजेक्शन के रूप में या फिर मरीज़ के मलाशय के माध्यम से दिया जा सकता है। हालांकि, अगर दौरे जारी रहते हैं, क्योंकि उन्हें इस तरह से जल्दी नियंत्रण में नहीं लाया जाता है, तो यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है कि मरीज को अस्पताल पहुँचाया जाए। अस्पताल में, वायुमार्ग को बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता होगी और दौरे को नियंत्रित करने के लिए उच्च स्तर की बेहोशी की दवा देने की आवश्यकता हो सकती है।

वैकल्पिक उपचार के लिए बुक्कल मिडज़ोलम नाम की एक दवा है। यह तरल रूप में आती है और आपके गाल के अंदर रखी जाती है जहाँ से ये रिस रिस कर अंदर जाती है। तब यह आपके रक्तप्रवाह में अवशोषित हो जाती है।

ऐसा करने के लिए आपको कोई डॉक्टर होने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन आपको सही प्रशिक्षण के साथ-साथ मिर्गी वाले व्यक्ति की अनुमति की आवश्यकता है। यदि आप मिर्गी से पीड़ित किसी व्यक्ति की देखभाल करते हैं, तो आपको स्टेटस एपिलेप्टिकस के दौरे पड़ने के समय रेक्टल डायजेपाम या बक्कल मिडाज़ोलम देने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है।

कारण

मिर्गी के अधिकांश मामलों में, कोई कारण नहीं पाया जाता है। यदि कोई पहचान योग्य कारण मिलता है, तो इसमें आमतौर पर मस्तिष्क क्षति का कोई रूप शामिल होता है।

मस्तिष्क न्यूरॉन्स (मस्तिष्क कोशिकाओं), विद्युत आवेगों और रसायनों का एक नाजुक मिश्रण है, जिसे न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में जाना जाता है। किसी भी क्षति में ये क्षमता होती है कि वो मस्तिष्क के कामकाज को बाधित कर दे और दौरे का कारण बन जाये।

मिर्गी के तीन मुख्य वर्ग हैं:

● लक्षणात्मक मिर्गी - इसमें व्यक्ति की मिर्गी का कारण पता होता है, जैसे कि सिर में चोट।

● ईडीओपैथिक मिर्गी - जाँच के बावजूद, मिर्गी का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता है।

● क्रिप्टोजेनिक मिर्गी - इसमें भी इडियोपैथिक मिर्गी की तरह कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता है। हालांकि, इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस प्रकार की मिर्गी मस्तिष्क में हुए नुकसान के कारण होती है।

लक्षणात्मक मिर्गी

लक्षणात्मक मिर्गी के कारणों में शामिल हैं:

● ऐसी स्थितियाँ जो मस्तिष्क की संरचना को प्रभावित करती हैं, जैसे कि सेरेब्रल पाल्सी

● ड्रग्स और शराब का दुरुपयोग

● जन्म दोष

● जन्म के दौरान समस्याएं जो बच्चे को ऑक्सीजन से वंचित करती हैं, जैसे कि गर्भनाल का प्रसव के दौरान मुड़ना या संकुचित होना

● संक्रामक स्थिति जो मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है, जैसे कि मेनिन्जाइटिस

● सिर में चोट

● स्ट्रोक

● ब्रेन ट्यूमर

ईडीओपैथिक मिर्गी

लगभग 60% मामलों में, मिर्गी का कोई कारण नहीं मिल पाता है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि चिकित्सकीय उपकरण कुछ प्रकार के नुकसान का पता लगाने के लिए उतने उन्नत नहीं हैं या क्योंकि मिर्गी का कारण आनुवंशिक होता है।

कई शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि मस्तिष्क में छोटे आनुवंशिक परिवर्तन मिर्गी का कारण हो सकते हैं। वर्तमान शोध जीनों में कुछ ऐसे दोषों का पता लगा रहे हैं जो मस्तिष्क में विद्युत संचरण को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि कई अध्ययन किए गए हैं, लेकिन किसी विशेष जीन और मिर्गी के विकास के बीच कोई मजबूत संबंध नहीं पाया गया है।

आनुवंशिकी के बारे में और पढ़ें।

क्रिप्टोजेनिक मिर्गी

क्रिप्टोजेनिक मिर्गी शब्द का उपयोग तब किया जाता है जब मिर्गी का कोई निश्चित कारण नहीं पाया जा सकता है लेकिन इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस प्रकार की मिर्गी मस्तिष्क में हुए नुकसान या व्यवधान के कारण होती है।

एक व्यक्ति को क्रिप्टोजेनिक मिर्गी है, इसके सबूतों में शामिल हैं:

● उन्हें सीखने में कठिनाई होती है

● उनमें विकास से सम्बंधित तकलीफें होती हैं, जैसे कि ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम विकार

● उनकी इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (ईईजी) रीडिंग असामान्य होती है ( ईईजी एक ऐसा उपकरण है जो मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को मापता है)

ट्रिगर

मिर्गी वाले कई लोगों को कुछ परिस्थितियों या पदार्थ को देख कर दौरे पड़ सकते हैं। इन ट्रिगर में शामिल हैं:

● तनाव

● नींद की कमी

● शराब, विशेष रूप से रंगरलियाँ मनाते हुए पीने और एक हैंगओवर के दौरान

● कोई भी अवैध ड्रग्स जैसे कोकीन, एम्फ़ैटेमिन, एक्स्टसी और हेरोइन, मेथाडोन या कोडीन जैसे कोई भी अफ़ीम-वाले ड्रग्स लेने पर

● ऐसी कोई बीमारी जिसमें तेज़ बुखार आता हो

● चमकती रोशनी (यह एक असामान्य ट्रिगर है जो मिर्गी से पीड़ित लोगों में केवल 5% को प्रभावित करता है, और इसे सहज मिर्गी के रूप में जाना जाता है)

कुछ महिलाओं को अपने पीरियड्स के पहले या बाद में दौरे पड़ने का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उस दौरान शरीर द्वारा रिलीज किए गए हार्मोन मस्तिष्क में रसायनों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे दौरे अधिक पड़ सकते हैं।

दौरे की सीमा

मिर्गी वाले अधिकांश लोगों में दौरे की एक सीमा होती है। यह वह बिंदु है जिस पर मस्तिष्क का प्राकृतिक प्रतिरोध ख़त्म हो जाता है, जिससे दौरा शुरू हो जाती है।

कम दौरे की सीमा वाले लोगों को बार-बार दौरे पड़ते हैं, जबकि उच्च दौरे की सीमा वाले लोगों को कम बार दौरे और ट्रिगर होते हैं, उन पर कम प्रभाव पड़ता है।

निदान

मिर्गी का जल्दी से निदान करना आमतौर पर मुश्किल होता है। ज्यादातर मामलों में, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है जब तक कि आपको एक से अधिक दौरे न पड़े हों।

इसका निदान करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि कई अन्य बीमारियों, जैसे कि माइग्रेन और पैनिक अटैक के लक्षण भी समान होते हैं।

यदि आपको दौरे पड़ते हैं, तो आपको मिर्गी के विशेषज्ञ, आम तौर पर एक न्यूरोलॉजिस्ट (एक डॉक्टर जो उन स्थितियों में माहिर होता है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है) के पास भेजा जाएगा।

आपके दौरों का वर्णन

मिर्गी का निदान करने के लिए सबसे आवश्यक जानकारी आपके दौरे या दौरों के बारे में विवरण हैं।

डॉक्टर आपसे पूछेंगे कि आपको क्या याद है, और ऐसा कोई भी लक्षण जो आपको दौरा पड़ने से पहले हुआ हो, जैसे कि दौरे से पहले अजीब महसूस करना या किसी चेतावनी के संकेत का अनुभव करना। किसी ऐसे इन्सान से भी बात करना उपयोगी हो सकता है जिसने आपके दौरे को होते हुए देखा है और उनसे वही पूछें जो उन्होंने देखा हो, खासकर यदि आप दौरे के दौरान की बात को याद नहीं कर सकते हैं।

डॉक्टर आपके चिकित्सा और व्यक्तिगत इतिहास के बारे में भी पूछेगा और यह भी पूछेगा कि आप कोई दवा, ड्रग्स या शराब का इस्तेमाल करते हैं।

चिकित्सक आपके द्वारा दी गई जानकारी से मिर्गी का निदान करने में सक्षम हो सकते हैं, लेकिन वे आगे और भी परीक्षण कर सकते हैं।

आपको इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (ईईजी) करवाने की आवश्यकता हो सकती है, जो मिर्गी से जुड़ी असामान्य मस्तिष्क गतिविधि का पता लगा सकती है। या आपका एक मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन हो सकता है, जो आपके मस्तिष्क की संरचना में किसी भी तरह की खराबी को बता सकता है।

हालाँकि, हो सकता है कि ये परीक्षण कुछ भी न दिखायें, और फिर भी यह संभव है कि आपको मिर्गी हो।

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (ईईजी)

एक ईईजी परीक्षण आपके मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को आपकी खोपड़ी पर रखे गए इलेक्ट्रोड के माध्यम से मापता है। परीक्षण के दौरान, आपको गहरी साँस लेने या अपनी आँखें बंद करने के लिए कहा जा सकता है, क्योंकि ये क्रियाएं मिर्गी से जुड़ी असामान्य मस्तिष्क गतिविधि को प्रकट कर सकती हैं।

आपको एक चमकती रोशनी को देखने के लिए भी कहा जा सकता है, लेकिन अगर ऐसा लगता है कि चमकती रोशनी एक दौरे को ट्रिगर कर सकती है तो परीक्षण को तुरंत रोक दिया जाएगा । इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम के बारे में अधिक पढ़ें।

मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन

एक एमआरआई स्कैन अक्सर मिर्गी के संभावित कारणों का पता लगा सकता है, जैसे आपके मस्तिष्क की संरचना में दोष होना या मस्तिष्क में किसी ट्यूमर का होना। एमआरआई स्कैन के बारे में और पढ़ें।

इलाज

इलाज का अवलोकन

मिरगी-रोधी दवाएं (AED) आमतौर पर उपचार में सबसे पहले दी जाती हैं। मिर्गी से पीड़ित लगभग 70% लोग AED से अपने दौरे को नियंत्रित करते हैं।

आमतौर पर, AED उपचार तब तक शुरू नहीं किया जाता, जब तक कि आपको दूसरा दौरा न पड़ा हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि एएक दौरा इस बात का विश्वसनीय संकेतक नहीं है कि आपको मिर्गी है। कुछ मामलों में, उपचार पहले दौरे के बाद ही शुरू किया जाता है यदि:

● एक इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (ईईजी) परीक्षण मिर्गी से जुड़ी मस्तिष्क गतिविधि को दर्शाता है।

● एक मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन मस्तिष्क में हुए नुकसान को दिखाता है।

● आपको कोई ऐसी बीमारी है जो मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाती है, जैसे कि स्ट्रोक।

कुछ लोगों के लिए, सर्जरी एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, यह केवल तब हो सकता है जब मस्तिष्क के उस भाग को हटाने से, जहाँ मिर्गी की गतिविधि शुरू होती है, कोई नुकसान या विकलांगता नहीं होगी। यदि सफल हुए तो, ऐसा हो सकता है कि आपकी मिर्गी ठीक हो जाएगी।

यदि सर्जरी नहीं करवाई जा सकती है, तो छाती की त्वचा के नीचे एक छोटा सा उपकरण प्रत्यारोपित करने का विकल्प हो सकता है। डिवाइस मस्तिष्क को विद्युत संदेश भेजती है। इसे वेगस तंत्रिका उत्तेजना (नीचे देखें) कहा जाता है।

कभी-कभी, उन बच्चों के लिए एक विशेष आहार दिया जाता है जिनके दौरे को नियंत्रित करना मुश्किल होता है और दवा उन पर असर नहीं करती है।

मिरगी-रोधी दवाएं (AEDs)

मिर्गी से पीड़ित अधिकांश लोगों का इलाज मिरगी-रोधी दवाओं जिन्हें (एईडी) के रूप में भी जाना जाता है, से सफलतापूर्वक किया जा सकता है। एईडी मिर्गी का इलाज नहीं करता है, लेकिन दौरे को होने से रोक सकता है।

कई अलग-अलग एईडी हैं। आम तौर पर, वे आपके मस्तिष्क में रसायनों जो विद्युत आवेगों का संचालन करते हैं, के स्तर को बदलकर काम करते हैं। यह दौरे की संभावना को कम करता है।

मिर्गी के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं को अक्सर पहली पंक्ति और दूसरी पंक्ति की दवाओं के रूप में जाना जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि एक प्रकार की दवा दूसरे की तुलना में बेहतर है, लेकिन यह बताता है कि दवाएँ पहली बार कब आयीं थी। पहली पंक्ति की दवाएं पुरानी हैं और दशकों से मिर्गी का इलाज करती हैं। दूसरी पंक्ति की दवाएं बहुत नई हैं।

जो दवाएँ आपको निर्धारित की गयीं हैं, वो काफी हद तक इस बात पर निर्भर करतीं है कि आपको किस प्रकार के दौरे आते है।

पुरानी पहली पंक्ति की एईडी में [सोडियम वैल्प्रोएट], [कार्बामाज़ेपिन], [फ़िनाइटोइन] और फेनोबार्बिटल शामिल हैं।

अगर इस बात की चिंता है कि पुराने एईडी आपकी अन्य दवाओं (जैसे गर्भनिरोधक गोली) के साथ रिएक्शन कर सकती हैं, या यदि आप एक बच्चा करने की सोच रहे हैं या फिर किसी भी कारणवश आप एईडी नहीं ले सकते हैं तो नई दूसरी पंक्ति की एईडी की सिफारिश की जाती है, ।

नए एईडी में गैबापेंटिन, लैमोट्रीजीन, लेवेतिरेसेटम, ऑक्साकार्बाज़ेपिन, टियागाबाइन, टॉपमैक्स और विगबैट्रिन शामिल हैं। बच्चों के लिए लेवेतिरेक्टम की सिफारिश नहीं की जाती है, लेकिन यदि पुराने एईडी मिर्गी वाले बच्चों को लाभ नहीं देते हैं तो अन्य की सिफारिश की जाती है।

आपका विशेषज्ञ एईडी की कम खुराक के साथ शुरू करेगा, फिर धीरे-धीरे इसे सुरक्षित सीमा के भीतर बढ़ाएगा जब तक कि आपके दौरे बंद न हो जाएं। यदि एक एईडी दौरे को नियंत्रित नहीं करता है, तो दूसरी नई दवा शुरू करने और धीरे-धीरे पुरानी दवा की खुराक को कम करने की कोशिश की जाएगी।

उद्देश्य एक दवा की सबसे कम संभव खुराक का उपयोग कर, न्यूनतम दुष्प्रभाव के साथ अधिकतम दौरा नियंत्रण को प्राप्त करना है। विभिन्न प्रकार के एईडी परखते रहना, एक से अधिक एईडी लेने के लिए बेहतर है, हालांकि दौरे को नियंत्रित करने के लिए दवाओं का संयोजन आवश्यक हो सकता है।

अपने विशेषज्ञ की सलाह पर अमल करें क्योंकि ब्रांड या फॉर्मूले बदलने से दौरे पड़ सकते हैं।

एईडी के साथ उपचार शुरू करते समय दुष्प्रभाव आम हैं। हालांकि, वे कुछ समय के लिए होते हैं और आमतौर पर कुछ दिनों में ख़त्म हो जाते हैं। साइड इफेक्ट में शामिल हैं:

● मतली

● पेट दर्द

● नींद आना

● चक्कर आना

● चिड़चिड़ापन

● मूड बदलना

कुछ दुष्प्रभाव, जो नशे में होने के समान लक्षण पैदा करते हैं, तब होते हैं जब एईडी की खुराक बहुत अधिक होती है। उनमे शामिल है:

● अस्थिरता

● एकाग्रता में कमी

● नींद आना

● उल्टी

● दोहरी दृष्टि

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर या मिर्गी विशेषज्ञ से संपर्क करें ताकि आपकी खुराक को बदला जा सके।

यह महत्वपूर्ण है कि आप हर सलाह का पालन करें कि एईडी कब लेना है और कितना लेना है। कभी भी अचानक एईडी लेना बंद न करें क्योंकि ऐसा करने से दौरे पड़ सकते हैं।

एईडी लेने के दौरान, अपने डॉक्टर या मिर्गी विशेषज्ञ से बात किए बिना, किसी भी अन्य दवाओं को न लें, जिसमें ओवर-द-काउंटर दवाएं या पूरक दवाएं जैसे सेंट जॉन्स वोर्ट शामिल हैं। अन्य दवाएं आपके एईडी के साथ खतरनाक रिएक्शन कर सकती हैं और जिससे दौरा पड़ सकता है।

यदि आपको दो साल से अधिक समय से दौरे नहीं पड़े हैं, तो एईडी लेना बंद करना संभव हो सकता है। आपके मिर्गी विशेषज्ञ एईडी को सुरक्षित रूप से रोकने का सबसे अच्छा तरीका आपको बता सकते हैं।

वेगस तंत्रिका उत्तेजना (VNS)

यदि, आपने विभिन्न प्रकार के एईडी आज़माए हैं, और आपकी मिर्गी फिर भी ठीक से नियंत्रित नहीं है, तो वेगस तंत्रिका उत्तेजना (वीएनएस) चिकित्सा की सिफारिश की जा सकती है। इसमें आपके कॉलरबोन के पास, आपकी त्वचा के नीचे, पेसमेकर के समान एक छोटा विद्युत उपकरण प्रत्यारोपित किया जाता है।

डिवाइस में एक सीसा होता है जो आपकी गर्दन के बाईं ओर की नसों में से एक के चारों ओर लिपटा होता है, जिसे वेगस तंत्रिका के रूप में जाना जाता है। डिवाइस तंत्रिका को बिजली की एक नियमित खुराक से गुजारता है ताकि इसे उत्तेजित किया जा सके। यह दौरे की आवृत्ति और गंभीरता को कम करने में मदद कर सकता है।

यदि आपको दौरे पड़ने की चेतावनी का संकेत मिलता है, तो आप उत्तेजना के एक अतिरिक्त 'बर्स्ट' को सक्रिय कर सकते हैं, जो अक्सर दौरे को होने से रोक सकता है।

VNS कैसे और क्यों काम करता है इसे पूरी तरह से समझा नहीं गया है, लेकिन ऐसा सोचा जाता है कि वेगस तंत्रिका उत्तेजक मस्तिष्क में रासायनिक प्रसारण को बदल देता है।

अधिकांश लोग जिन्होंने वीएनएस किया है, उन्हें अभी भी एईडी लेने की जरूरत पड़ती है।

VNS के कुछ हल्के से मध्यम दुष्प्रभाव बताए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

● उपकरण का उपयोग होते समय अस्थाई स्वर बैठना और आवाज टोन में बदलाव आना (यह आमतौर पर हर पांच मिनट में होता है और 30 सेकंड तक रहता है)

● गले में खराश

● सांस की तकलीफ

● खाँसी

केटोजेनिक आहार

एईडी उपलब्ध होने से पहले केटोजेनिक आहार एक तरह का उपचार था, लेकिन ये अब मिर्गी वाले वयस्कों के लिए अनुशंसित नहीं किया जाता है। केटोजेनिक आहार में वसा और कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन कम होते हैं, और मस्तिष्क की रासायनिक संरचना को बदलकर दौरे की संभावना को कम कर सकता है। हालांकि, उच्च वसा वाले आहार को गंभीर बीमारियों से जोड़ा जाता है, जैसे कि मधुमेह और हृदय रोग, इसलिए आमतौर पर इसकी सिफारिश नहीं की जाती है।

ऐसे बच्चे जिनकी मिर्गी नियंत्रित करना मुश्किल है और एईडी उन पर काम नहीं करती है तो कभी-कभी एक केटोजेनिक आहार की सलाह दी जाती है। इस आहार से कुछ बच्चों में मिर्गी को कम होते हुए देखा गया है। इसका उपयोग केवल आहार विशेषज्ञ की मदद से मिर्गी रोग विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाना चाहिए।

सर्जरी

यदि दो साल के उपचार के बाद भी आपकी मिर्गी ठीक नहीं होती है, तो आपको विशेषज्ञ मिर्गी केंद्र भेजा जा सकता है यह देखने के लिए कि आप दिमागी सर्जरी के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।

यह पता लगाने के लिए कि मिर्गी कहां केंद्रित है, इसमें विभिन्न प्रकार के मस्तिष्क स्कैन शामिल हैं। मेमोरी और मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी किए जाते हैं ये पता लगाने के लिए कि आप सर्जरी के तनाव से कैसे निपट सकते हैं और यह आपको कैसे प्रभावित कर सकता है।

सर्जरी की सिफारिश तब की जाती है जब:

● मस्तिष्क के केवल एक तरफ के एक हिस्से के कारण दौरे पड़ रहे हों।

● मस्तिष्क के उस हिस्से को हटाने से मस्तिष्क के कार्य में कोई महत्वपूर्ण नुकसान नहीं होगा।

जैसा कि सभी प्रकार की सर्जरी में होता है, इस प्रक्रिया में भी जोखिम होता है। सर्जरी के बाद लगभग 100 रोगियों में से एक को स्ट्रोक होता है, और 100 में से लगभग 5 लोगों को याददाश्त की समस्याएं होती हैं। हालांकि, लगभग 70% लोग जिनकी मिर्गी की सर्जरी होती है, वे पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।

प्रक्रिया होने से पहले, आपका सर्जन आपको सर्जरी के लाभ और जोखिमों के बारे में बताएगा।

अधिकांश लोग आमतौर पर कुछ दिनों के बाद सर्जरी के प्रभाव से उबर जाते हैं, लेकिन पूरी तरह से फिट होने और काम पर लौटने में सक्षम होने के लिए दो से तीन महीने का समय लग सकता है।

गहरी मस्तिष्क उत्तेजना (डीबीएस) चिकित्सा भी मिर्गी के लिए एक शल्य चिकित्सा उपचार है। इसका उपयोग मिर्गी से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए किया जाता है, जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होता है या उनके मस्तिष्क का एक हिस्सा हटाया नहीं जा सकता है।

डीबीएस में मिर्गी को नियंत्रित करने के लिए मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में इलेक्ट्रोड प्रत्यारोपित किया जाता है। इलेक्ट्रोड को एक बाहरी उपकरण द्वारा नियंत्रित किया जाता है जिसे न्यूरोस्टिम्यूलेटर कहा जाता है।

पूरक उपचार

कई ऐसे पूरक उपचार हैं जिनके बारे में कुछ लोगों का कहना है कि वे उनके लिए काम करते हैं। हालांकि, किसी भी अध्ययन में मिर्गी को कम करने के लिए किसी को भी निर्णायक रूप से नहीं दिखाया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञ को बताये बिना मिरगी-विरोधी दवा को रोकने से दौरे पड़ सकते हैं।मिर्गी-रोधी दवा को कम करने या रोकने के लिए चिकित्सक की दी हुई किसी भी सलाह को सावधानी से मानें।

हर्बल उपचार का सावधानी से उपयोग किया जाना चाहिए क्योंकि उनकी कुछ सामग्री मिर्गी-रोधी दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकती हैं। सेंट जॉन वॉर्ट, हल्के अवसाद के लिए उपयोग किया जाने वाला एक हर्बल उपचार है, जो मिर्गी से पीड़ित लोगों के लिए अनुशंसित नहीं है क्योंकि यह मिर्गी-रोधी दवाओं के रक्त स्तर को प्रभावित कर सकता है और दौरे के नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है। आयुर्वेदिक हर्बल दवाओं की भी सिफारिश नहीं की जाती है।

मिर्गी वाले कुछ लोगों में, तनाव से दौरे पड़ सकते हैं। तनाव से राहत दिलाने वाले उपाय जैसे विश्राम, व्यायाम, योग और ध्यान इसमें मदद कर सकते हैं।

मिर्गी के जीवन गुज़ारना

स्वस्थ जीवन

नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार की सलाह सभी को दी जाती है, न कि केवल मिर्गी वाले लोगों को। वे हृदय रोग और कैंसर के कई रूपों सहित कई स्थितियों को रोकने में मदद कर सकते हैं। एक संतुलित आहार खाने की कोशिश करें, जिसमें सभी खाद्य समूह शामिल हों, जिसकी आपके शरीर को जरूरत हो। नियमित रूप से व्यायाम करने से आपकी हड्डियों की ताकत बढ़ सकती है, तनाव दूर हो सकता है और थकान कम हो सकती है।

शराब पीना

ज़्यादा शराब पीने से दौरे पड़ सकते हैं, साथ ही साथ मिरगी-रोधी दवाओं (एईडी) के साथ रिएक्शन, उन्हें कम प्रभावी बनाता है। एईडी शराब के प्रभाव को बढ़ा सकता है, जबकि शराब एईडी के दुष्प्रभाव को बदतर बना सकता है।

ज़्यादा शराब पीने को भी नींद टूटने के पैटर्न के साथ जोड़ा जाता है, और इससे दौरे पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। अनुशंसित रोज़ की सीमा से अधिक नहीं पीने से किसी भी होने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।

शराब के लिए अनुशंसित दैनिक सीमाएं पुरुषों के लिए तीन से चार यूनिट और महिलाओं के लिए दो से तीन यूनिट हैं। अल्कोहल की एक यूनिट, सामान्य स्ट्रेंथ वाले लेगर के लगभग आधे पिंट, वाइन के एक छोटे गिलास या स्पिरिट के एक पब माप (25 मिली) के बराबर होती है।

महिलाएँ और मिर्गी

गर्भनिरोध

कुछ मिर्गी-रोधी दवाएं (एईडी) कुछ प्रकार के गर्भनिरोधक की प्रभावशीलता को कम कर सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

● गर्भनिरोधक इंजेक्शन

● गर्भनिरोधक पैच

● संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोली - अक्सर 'गोली' के रूप में जाना जाता है

● प्रोजेस्टेरोन-केवल गोली (POP) या मिनी गोली

● गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण

यदि आप यौन रूप से सक्रिय हैं और गर्भावस्था से बचना चाहते हैं, तो अपने डॉक्टर या मिर्गी विशेषज्ञ से पूछें कि क्या आपका एईडी गर्भनिरोधक के इन तरीकों में से किसी को भी प्रभावित कर सकता है।

आपको गर्भनिरोधक के अन्य रूप जैसे कंडोम या कॉइल का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

कुछ AED को आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली को कम प्रभावी बनाने के लिए भी जाना जाता है। यदि आपको आपातकालीन गर्भनिरोधक की आवश्यकता होती है, तो आपको एक अंतर्गर्भाशयी डिवाइस (आईयूडी) का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। आपका डॉक्टर, परिवार नियोजन क्लिनिक या फार्मासिस्ट आपको सलाह देने में सक्षम होंगे।

गर्भावस्था

ऐसा कुछ नहीं है कि मिर्गी से पीड़ित महिलाओं को एक स्वस्थ गर्भावस्था नहीं हो सकती है। हालांकि, यह हमेशा बेहतर होता है यदि गर्भावस्था को योजना बना कर किया जाये। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का थोड़ा अधिक जोखिम होता है। हालांकि, आगे की योजना के साथ, इन जोखिमों को कम से कम किया जा सकता है।

मुख्य जोखिम यह है कि कुछ एईडी को एक गंभीर जन्म दोष की संभावना को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, जैसे कि स्पाइना बिफिडा, चीरे हुए होंठ या दिल में छेद। जोखिम एईडी के प्रकार और आपके द्वारा ली जा रही खुराक पर निर्भर करते हैं।

यदि आप गर्भावस्था की योजना बना रहे हैं, तो अपने मिर्गी विशेषज्ञ से बात करें। जोखिमों को कम करने के लिए आप जिस AED को ले रहे हैं शायद उसे बदल दिया जाये। प्रत्येक दिन 5 मिलीग्राम फोलिक एसिड के सप्लीमेंट लेने से भी जन्म दोष के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

यदि आपको पता चलता है कि आप गर्भवती हैं, तो अपनी दवा लेना बंद न करें। अनियंत्रित मिर्गी से आपके बच्चे के लिए होने वाला जोखिम आपकी दवाओं से जुड़े किसी भी जोखिम से कहीं ज़्यादा होता है।

AED लेते समय स्तनपान से जुड़े कोई जोखिम नहीं हैं।

बच्चे और मिर्गी

अच्छी तरह से नियंत्रित मिर्गी वाले कई बच्चे अपनी बीमारी से पूरी तरह अप्रभावित अपने स्कूल में पढ़ाई कर सकते हैं और गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। कुछ बच्चों को स्कूल में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता हो सकती है। सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे के शिक्षक उनकी बीमारी और उस दवा के बारे में जानते हैं, जिसे उन्हें नियंत्रित करने के लिए देने की आवश्यकता होती है।

विकलांग बच्चों और विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं वाले बच्चों में मिर्गी अधिक आम है। ये बच्चे अपनी कठिनाइयों को दूर करने के लिए अतिरिक्त सहायता के हकदार हैं। प्रत्येक स्कूल में कम से कम एक सदस्य होगा जिस पर विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं वाले बच्चों की जिम्मेदारी होगी। कानून कहता है कि सभी राज्य स्कूलों को विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए, कभी-कभी बाहरी विशेषज्ञों की मदद से।

यदि आपके बच्चे को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है, तो स्थानीय शिक्षा प्राधिकरण एक आकलन कर सकता है। यह आपके बच्चे की ज़रूरतों की मदद को रेखांकित करेगा, कई दीर्घकालिक लक्ष्यों को निर्धारित करेगा, और यह सुनिश्चित करेगा कि आपके बच्चे की नियमित रूप से समीक्षा की जाए।

दूसरों से बात करें

यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो आपका डॉक्टर या नर्स आपको जानकारी देने में सक्षम हो सकते हैं। आपको किसी प्रशिक्षित परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक से या किसी विशेषज्ञ हेल्पलाइन में किसी से बात करके भी मदद मिल सकती है। आपकी डॉक्टर के पास इन पर जानकारी होगी।

कुछ लोगों को मिर्गी के शिकार अन्य लोगों से बात करने से मदद मिलती है, या तो स्थानीय सहायता समूह में या इंटरनेट चैट रूम में।

ड्राइविंग

यदि आपको दौरे पड़ते हैं, तो यह आपकी कानूनी जिम्मेदारी है कि आप अपने ड्राइविंग लाइसेंस जारीकर्ता को सूचित करें।

आप आमतौर पर ग्रुप वन ड्राइविंग लाइसेंस नहीं रख पाएंगे, जो निजी कारों और मोटरसाइकिलों के लिए आवश्यक है, जब तक कि:

● आपको एक वर्ष से दौरे नहीं पड़े हैं।

● उन लोगों के मामले में जिन्हें सिर्फ नींद के दौरान दौरे आते हैं, तीन या अधिक वर्षों से नींद का एक ही पैटर्न है, दिन के दौरान कोई दौरे नहीं आते।

आप आमतौर पर भारी माल वाहनों और यात्री वाहक वाहनों के लिए एक ग्रुप टू ड्राइविंग लाइसेंस, जो 7.5 टन से अधिक हो, तक रखने में सक्षम नहीं होंगे जब तक कि:

● आपको पिछले 10 वर्षों से कोई दौरे नहीं पड़े हैं और इस अवधि के दौरान एईडी नहीं ले रहे हैं।

● आपके मिर्गी विशेषज्ञ इस बात की पुष्टि करते हैं कि दौरे पड़ने की कोई संभावना नहीं है।

आपको अपने लाइसेंस की वापसी के लिए अपने ड्राइविंग लाइसेंस जारीकर्ता को आवेदन करना होगा। वे केवल तभी आपका लाइसेंस लौटाएंगे जब वे संतुष्ट होंगे कि आपकी मिर्गी नियंत्रण में है। इस प्रक्रिया के भाग के रूप में, वे आपके डॉक्टर या मिर्गी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं। जब आपका लाइसेंस वापस आ जाएगा तो आपको ड्राइविंग टेस्ट नहीं देना होगा।

आपको मजिस्ट्रेट की अदालत में उनके फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है।

यदि आप इन नियमों की उपेक्षा करते हैं, तो आप अभियोजन के लिए उत्तरदायी होंगे।

मिर्गी (SUDEP) में अचानक अप्रत्याशित मौत

जब मिर्गी वाले किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता है, तो इसे मिर्गी (SUDEP) में अचानक अप्रत्याशित मौत के रूप में जाना जाता है।

SUDEP के सटीक कारण अज्ञात हैं, और यह भविष्यवाणी करना संभव नहीं है कि कौन प्रभावित होगा। एक सिद्धांत यह है कि मिर्गी व्यक्ति के सांस लेने और दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकती है। हाल ही में, यह सुझाव दिया गया है कि इसके पीछे आनुवंशिक कारण हो सकता है।

SUDEP में निम्नलिखित चीजें शामिल हो सकती हैं:

● दौरे पड़ना जिससे होश खो जाता है और शरीर अकड़ जाता है और मरोड़ने लगता है (सामान्यीकृत टॉनिक-क्लोनिक दौरे)

● खराब नियंत्रित मिर्गी, जैसे कि मिरगी-रोधी दवाओं (एईडी) को निर्धारित रूप से न लेना या दौरे नियंत्रित नहीं होना।

● एईडी में अचानक और बार-बार बदलाव होना

● युवा वयस्क होना (विशेष रूप से पुरुष में)

● नींद में दौरा होना

● अकेले होने पर दौरे पड़ना

● बड़ी मात्रा में शराब पीना

यदि आप चिंतित हैं कि आपकी मिर्गी ठीक से नियंत्रित नहीं है, तो अपने मिर्गी विशेषज्ञ से संपर्क करें। आगे के उपचार के लिए आपको विशेषज्ञ मिर्गी केंद्र में भेजा जा सकता है।

महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।