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क्‍या आपको हड्डी टूटने का ख़तरा है?

मेडिकली रिव्यूड

पता करें कि कहीं अगले 10 साल में आपको भी ऑस्‍टियोपोरोसिस(osteoporosis) और हड्डी टूटने का खतरा तो नहीं है।

इंटरनेट पर उपलब्‍ध फ्रैक्‍चर जोखिम मूल्‍यांकन उपकरण (फ्रैक्‍चर रिस्‍क एसेसमेंट टूल – फ्रैक्‍स) में किसी व्‍यक्‍ति को हड्डी कमजोर होने की वजह से टूटने का खतरा बताती है, कायी कारणों का आकलन कर।

यह स्‍वयं मूल्‍यांकन उपकरण 40 से 90 साल की उम्र के बीच के लोगों में, अगले 10 साल में रीढ़, कूल्‍हे, कंधे या कलाई में फ्रैक्‍चर होने का अनुमान लगाता है।

खुद को फ्रैक्‍चर होने का खतरा होने का मूल्‍यांकन, हड्डियों को मजबूत करने के लिए समय से इलाज शुरू करने की ओर पहला कदम हो सकता है, ताकि फ्रैक्‍चर के खतरे को घटाया जा सके।

एक अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक, “ऑस्‍टियोपोरोसिस के इलाज से फ्रैक्‍चर के खतरे को 30 से 50% तक कम किया जा सकता है। किसी को भी इलाज शुरू करने के लिए बहुत देर नहीं होती है।”

ऑस्‍टियोपोरोसिस की पहचान हड्डियों के घनत्‍व(bone density) के स्‍कैन (डीईएक्‍सए या डीएक्‍सए स्‍कैन) की मदद से की जाती है। हालांकि हड्डियों की कम सघनता फ्रैक्‍चर के खतरे का सटीक माप नहीं होती है और इसे उम्र, लिंग, सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य और जीन जैसे अन्‍य जोखिम कारकों के साथ देखा जाना चाहिए।

फ्रैक्‍स उपकरण को DEXA स्कोर के बिना भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है, यह आपकी हड्डियों की सेहत पर डॉक्‍टर से आगे की चर्चा के लिए अच्‍छा रास्‍ता हो सकता है। इसके जरिए डॉक्‍टर यह पता लगा सकते हैं कि आपको भविष्‍य में फ्रैक्‍चर होने के खतरे का पता लगाने के लिए डीएक्‍सए स्‍कैन की जरूरत है या नहीं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘यह हड्डियों की सघनता के मुकाबले फ्रैक्‍चर के जोखिम का मामला अधिक है। ऐसे लोग हैं जिनकी हड्डियों की सघनता काफी कम होती है, मगर उनकी हड्डी कभी नहीं टूटती और दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जिनकी हड्डियों की सघनता ऑस्‍टियोपोरोसिस की हद में नहीं आती हैं और मामूली जोर से टूट जाती हैं।’

ऑस्‍टियोपोरोसिस के कारण

ऑस्‍टियोपोरोसिस और फ्रैक्‍चर होने के खतरों में, जिनमें से कुछ का इस्‍तेमाल फ्रैक्‍स उपकरण भी करते हैं, उनमें शामिल हैं :

  • उम्र : हड्डियों की सघनता चाहे जितनी हो मगर उम्र बढ़ने के साथ वह नाज़ुक होने लगती हैं और उनके टूटने की सम्भावना बढ़ जाती है
  • जीन : परिवार में ऑस्‍टियोपोरोसिस का इतिहास होने पर भी खतरा बढ़ जाता है। जिन परिवारों में हड्डियाँ छोटी होती हैं, उनमें खासतौर से कूल्‍हे का फ़्रैक्चर आम होता है।
  • रेस : अश्‍वेत लोगों में श्‍वेत या एशियाई मूल के लोगों के मुकाबले कम खतरा होता है क्‍योंकि उनकी हड्डियाँ बड़ी और मजबूत होती हैं।
  • लिंग : महिलाओं की हड्डियां पुरुषों के मुकाबले छोटी होती हैं और रजोनिवृत्‍ति के कारण प्राकृतिक रूप से कमजोर हो जाती हैं।
  • शरीर का कम वजन : शरीर का BMI 19 से कम होने को छोटी और कमजोर हड्डियों के साथ ही कम शारीरिक वसा से जोड़कर देखा जाता है, जिसकी वजह से गिरने पर सुरक्षा नहीं मिलती
  • आहार : आहार में कैल्‍शियम और विटामिन डी की कमी को भी कमजोर हड्डियों का कारण देखा जाता है
  • व्यायाम : युवावस्‍था के दौरान नियमित शारीरिक क्रियाकलाप से हड्डियाँ मजबूत बनती हैं और उम्र बढ़ने के साथ उनमें हानि कम होती है
  • धूम्रपान : शोध में देखा गया है नियमित धूम्रपान करने वालों की हड्डियाँ कमजोर होती हैं, हालांकि ऑस्‍टियोपोरोसिस में तंबाकू के योगदान को अब तक साफ तौर पर समझा नहीं जा सका है
  • शराब : बहुत ज्‍यादा मात्रा में शराब पीने से कैल्‍शियम को सोखने की हमारी क्षमता प्रभावित होती है, जिससे हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं
  • पुराने फ्रैक्‍चर : अगर आपकी हड्डियाँ पहले ही आसानी से टूट जाती हैं, तो भविष्‍य में आपको फ्रैक्‍चर होने का खतरा अधिक होगा
  • एनोरेक्‍सिया : खाना कम खाने से कैल्‍शियम की कमी हो जाती है, जिससे हड्डियाँ कमजोर होने लगती हैं, महिलाओं में एनोरेक्‍सिया के कारण महावारी बंद हो सकती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं
  • स्‍टेरॉएड्स : तीन माह से ज्‍यादा समय तक प्रेड्निसोलोन(एक तरह का स्‍टेरॉएड) का सेवन करने से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं
  • डायबिटीज़ : टाइप 1 डायबिटीज़ के शिकार लोगों को दवाएँ लेनी पड़ती है क्‍योंकि वह इनसुलिन का उत्‍पादन नहीं कर पाते हैं, यह एक तरह का हॉर्मोन है, जिसे हड्डियों की ताकत बढ़ाने के लिए जरूरी समझा जाता है
  • थायरॉएड की समस्‍या : अतिसक्रिय थायरॉएड के कारण थायरॉएड हॉरमोन बहुत अधिक होना या असामान्‍य रूप से निष्‍क्रिय थायरॉएड के इलाज से हड्डियों में कमज़ोरी आ सकती है
  • टेस्‍टोस्‍टेरोन की कमी : अधिक उम्र या कैंसर जैसी बीमारी की वजह से यौन शक्‍ति के लिए जिम्‍मेदार हॉरमोन टेस्‍टोस्‍टेरोन में कमी को कमजोर हड्डियों का कारण माना जाता है
  • समय से पहले रजोनिवृत्‍ति : 45 साल से कम उम्र में रजोनिवृत्‍ति से गुजरने वाली महिलाओं में ऑस्‍ट्रोजेन का स्‍तर कम हो जाता है, जिससे हड्डियों का घनत्‍व कम हो जाता है

आप अपनी हड्डियों को पतला होते हुए देख या महसूस नहीं कर सकते हैं और बहुत से लोग तब तक इस समस्‍या से अनभिज्ञ रहते हैं जब तक उनकी हड्डियाँ टूटती नहीं हैं।

अगर आपको लगता है आपको ऑस्‍टियोपोरोसिस और फ्रैक्‍चर होने का खतरा है तो इस बात की चर्चा अपने डॉक्‍टर से जरूर करें।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।