5th November, 20205 min read

दिवाली: खुद को प्रदूषण से कैसे बचाएं

दिवाली: खुद को प्रदूषण से कैसे बचाएं
मेडिकली रिव्यूड

पटाखे और अतिशबाजी प्रकाश के त्योहार दीपावली का एक प्रमुख हिस्सा हैं।

यदि आप पटाखे चलाने की योजना बना रहे हैं, तो यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इनके अधिक प्रयोग से वातावरण में वायु प्रदूषण के बढ़ने का ख़तरा होता है, कई बार हानिकारक स्तर पर।

उदाहरण के लिए नई दिल्ली, भारत में - जहाँ वायु की गुणवत्ता पहले से ही ख़राब है - सरकार ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हाल के वर्षों में दीवाली के दौरान पटाखों और आतिशबाजी की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

दिवाली के दौरान पटाखों और आतिशबाज़ी से कितनी मात्रा में प्रदूषण होता है?

जब पटाखे चलाए जाते हैं, तो वे हवा में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे हानिकारक गैस पैदा करते हैं। वे छोटे कणों(जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर के रूप में जाना जाता है) को भी हवा में फैलाते हैं और वो कण आपके फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं।

आतिशबाजी के बाद ये रसायन हवा में मौजूद रहते हैं और स्थानीय वायु प्रदूषण को हानिकारक स्तर तक बढ़ा सकते हैं।

दिवाली की आतिशबाज़ी से होने वाला प्रदूषण

वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

अध्ययनों से पता चला है कि प्रदूषित हवा में सांस लेना, थोड़े समय के लिए भी, आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। उदाहरण के लिए, यह आपके दिल और फेफड़े की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और [अस्थमा के लक्षणों](/ अस्थमा) को बदतर बना सकता है।

लेकिन वायु प्रदूषण कई स्रोतों से होता है, जैसे सड़क परिवहन और खेती, और वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि आतिशबाजी से हुआ प्रदूषण शरीर को कितना प्रभावित करता है।

हालाँकि, अध्ययनों से पता चला है कि जब आप पटाखों के आसपास होते हैं तो आप छोटे, अधिक हानिकारक कणों के ज़्यादा संपर्क में होते हैं।

वैज्ञानिकों को लगता है कि अधिक मात्रा में इस तरह से कणों में सांस लेने से आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों या उन लोगों को जिन्हें पहले से ही दिल या फेफड़ों की समस्या है।

खुद को प्रदूषण से कैसे बचाएँ?

यदि आप आतिशबाजी और पटाखों के साथ दीवाली मनाने की योजना बनाते हैं, या किसी ऐसी जगह रहते हैं जहां आसपास कई लोग पटाखे चला रहे हों, तो कई तरीके हैं जिनसे आप अपना बचाव कर सकते हैं।

सांस लेते वक़्त हानिकारक हवा की मात्रा को सीमित करने के लिए आप निम्न कर सकते हैं:

  • घर के अंदर रहें और अंदर से आतिशबाजी देखें
  • अगर आप बाहर जाते हैं तो दूर से ही पटाखे और आतिशबाजी देखें
  • यह देखें कि धुआं कहां से आ रहा है और उससे दूर जाएं
  • बाहर होने पर शारीरिक गतिविधि सीमित करें, ऐसा ना करने पर आप मुंह के माध्यम से अधिक गहराई से साँस ले सकते हैं जिसमें आपकी कणों को छानने की क्षमता आपकी नाक की तुलना में कम है
  • अंदर रहने के लिए स्थानीय वायु गुणवत्ता अलर्ट(local air quality alerts) पर नज़र रखें - हर देश के अलर्ट अलग होते हैं, लेकिन वे आमतौर पर आपको बताते हैं कि कब प्रदूषक का स्तर, जैसे कण या सल्फर डाइऑक्साइड, सुरक्षित स्तरों से ऊपर हैं
  • घर के अंदर हवा को साफ करने के लिए एयर फिल्टर का इस्तेमाल करें

दीपावली के मौक़े पर फुलझड़ी चलाता एक व्यक्ति

अगर आपको फेफड़ों की समस्या है तो क्या करें?

यदि आपको कोई सांस की समस्या है जैसे [अस्थमा](/ अस्थमा), तो पटाखों और अलाव से होने वाला प्रदूषण आपके फेफड़ों में परेशानी पैदा कर सकता है और आपके लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है।

अस्थमा एक ऐसी स्थिति है जिसके कारण घरघराहट, सांस फूलना, खाँसी और छाती में कसाव जैसी साँस की समस्याएँ होती हैं। ये लक्षण तब होते हैं, जब श्वास नलिकाएं(breathing tubes) फूल जाती हैं जिससे हवा की मात्रा, जो फेफड़ों के माध्यम से अंदर बाहर जाती है, को अंदर जाने में बाधा हो सकती है।

अस्थमा यूके(Asthma UK) के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि अस्थमा से पीड़ित 60% लोगों ने वायु प्रदूषण की वजह से लक्षणों में बढ़ोत्तरी देखी। इसलिए अगर आतिशबाजी आपके लिए एक ट्रिगर है, तो उन्हें घर के अंदर से देखना उचित रहेगा।

फेस मास्क कणों को फ़िल्टर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है (जैसे N95 या FFP2 मास्क), उनसे भी आपके फेफड़ों से प्रदूषित धुएं को बाहर रखने में मदद मिल सकती है।

अपनी दवा साथ ले जाना न भूलें और सुनिश्चित करें कि आप उन लोगों के साथ हैं जो जानते हैं कि आपकी मदद कैसे करनी चाहिए यदि आपके लक्षण बदतर हो जाते हैं। आपको अपनी नियमित दवा भी लेते रहना चाहिए, क्योंकि इससे लक्षणों को रोकने में मदद मिल सकती है।

मुख्य बातें

  • आतिशबाजी और पटाखे के कारण हवा में हानिकारक गैस और कण उत्पन्न होते हैं
  • वायु प्रदूषण आपके दिल, फेफड़ों और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है
  • यह बच्चों, बुजुर्गों और दिल या फेफड़ों की समस्या से ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है
  • धुएं से दूरी बनाकर रखें और यदि संभव हो तो घर के अंदर रहें, इससे आप प्रदूषित वातावरण में साँस लेने से बच सकेंगे
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