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रेडिएशन(Radiation)

मेडिकली रिव्यूड

रेडिएशन एक सामान्य शब्द है जो एक तरंग या कण के रूप में अंतरिक्ष में घूमने वाली एक ऊर्जा को कहते हैं।

रेडीएशन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों पर चर्चा करने के लिए रेडिएशन को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • गैर आयनीकृत रेडिएशन (non-ionising radiation) (कम ऊर्जा)
  • आयनीकृत रेडिएशन (ionising radiation) (अधिक ऊर्जा)

कुछ मेडिकल परीक्षणों के दौरान आप मानव निर्मित आयनीकृत रेडिएशन के संपर्क में आएँगे, लेकिन इनका स्तर काफी कम होता है और इससे किसी परेशानी के होने की संभावना कम होती है।

रेडिएशन के प्रकार और स्रोतों का अधिक विवरण नीचे वर्णित हैं।

गैर आयनीकृत रेडिएशन (Non-ionising radiation)

गैर आयनीकृत रेडिशन के उदाहरण हैं:

  • अल्ट्रवाययलेट किरणें
  • दिखायी देने वाला प्रकाश(visible light)
  • इन्फ़्रारेड किरणें
  • माइक्रोवेव
  • सूक्ष्म तरंगें
  • रेडियो और राडार तरंगे
  • वायरलैस इंटरनेट कनेक्शन (वाईफाई)
  • मोबाइल फोन सिग्नल

कुल मिलाकर, इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि अधिकांश प्रकार के गैर आयनीकृत रेडिएशन उस स्तर पर हानिकारक है, जहां आप सामान्य रूप से उनके संपर्क में आते हैं, लेकिन गैर—आयनीकृत रेडिएशन के कुछ प्रकार बेहद खतरनाक होते हैं।

अल्ट्रवाययलेट लाइट

गैर आयनीकृत रेडिएशन के खतरनाक होने का सबसे बड़ा सबूत अल्ट्रवाययलेट किरणों के कारण त्वचा का क्षतिग्रस्त होना है। मुख्य तौर पर अल्ट्रवाययलेट किरणें सूर्य से निकलती हैं, लेकिन यह सनबैड और सनलैंप से भी उत्पन्न होती हैं।

अल्ट्रवाययलेट किरणों का निम्न स्तर हमारे शरीर के लिए लाभदायक भी होता है, जैसे सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी, जो हमारे शरीर के लिए लाभकारी है। यह हमारी हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखता है।

हालांकि, अल्ट्रवाययलेट किरणों के संपर्क में ज्यादा रहना हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। इससे सन बर्न हो सकता है और इन किरणों के ज्यादा संपर्क में रहने से मेलेनोमा(melanoma) और नॉन मेलेनोमा त्वचा कैंसर(non-melanoma) के विकसित होने का खतरा भी बढ़ता है।

दूरसंचार उपकरण

कुछ लोगो द्वारा यह तर्क भी दिया जाता है कि कुछ दूरसंचार उपकरण जिनमें गैर आयनीकृत रेडिशन का प्रयोग होता है, जैसे मोबाइल और वाईफाई, यह भी हानिकारक हो सकते हैं।

हालांकि दुनिया के कई शोधों में इन उपकरणों से स्वास्थ्य को कोई बड़ा खतरा नहीं पाया गया है।

एक शोध कार्यक्रम जिसे मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन हेल्थ रिसर्च(एमटीएचआर,MTHR) के नाम से जाना जाता है, जिसका रिसर्च ब्रिटेन में चल रहा है। उसकी 2007 की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि मोबाइल फोन के कुछ अवधि के प्रयोग से कैंसर का खतरा होता है या इससे दिमाग की सामान्य प्रक्रिया पर कोई असर पड़ता है। पिछले दो सालों के दौरान हुए कई अध्ययन भी यह दर्शाते हैं कि मोबाइल फोन और कैंसर की समस्या के बीच कोई लिंक नहीं है।

हालांकि, बड़े तौर पर यह स्वीकार किया गया है कि मोबाइल फोन का केवल 10 सालों से व्यापक रूप से उपयोग किया गया है, तो यह संभव है कि यह उससे संबंधित दीर्घकालिक जोखिमों या समस्याओं का पता नहीं लग पाया हो।

मेडिकल परीक्षण और उपचार में रेडिएशन

गैर आयनीकृत रेडिएशन की तुलना में आयनीकृत रेडिएशन अधिक शक्तिशाली होता है। इसका अर्थ है कि यह कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करने में अधिक सक्षम है। आयनीकृत रेडिएशन के संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है और इसकी उच्च मात्रा, रेडिएशन बर्न सहित गंभीर क्षति का कारण हो सकती है।

मानव निर्मित आयनीकृत रेडिएशन के संपर्क में आने का सबसे सामान्य स्रोत चिकित्सीय परीक्षण और उपचार हैं। उदाहरण के लिए, X-rey और CT स्कैन में आयनीकृत रेडिएशन की कम मात्रा का उपयोग किया जाता है।

गामा किरणों के रूप में आयनकारी विकिरण को परमाणु चिकित्सा(nuclear medicine) के रूप में आमतौर पर जाना जाता है। इलाज की इस शाखा के तहत रेडियोधर्मी पदार्थों का उपयोग जाँच में मदद करने के लिए या कभी—कभी स्थिति के उपचार में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए स्कैन में सही स्थिति का पता चल सके, इसके लिए स्कैन इमेज को अच्छा करने के उद्देश्य से एक हल्के रेडियोधर्मी पदार्थ को रक्त प्रवाह में इंजेक्ट किया जाता है।

उपचार के संदर्भ में रेडियोथैरेपी कैंसर का सामान्य उपचार है, जिसमें आयनीकृत रेडिएशन से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। हालांकि, जबकि यह खतरनाक प्रतीत हो सकता है, चिकित्सा मे प्रयोग किए गए रेडिएशन को बारीकी से नियंत्रित किया जाता है और इससे रेडिएशन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं का खतरा बहुत कम हो जाता है।

रेडिएशन संपर्क को मापना

मेडिकल परीक्षण के दौरान, आप रेडिएशन के निम्न स्तर के संपर्क में आते हैं, इसे जिस इकाई से मापा जाता है, उसे मिलीसीवर्टस (mSv) कहा जाता है। रेडिएशन संपर्क के विभिन्न स्तरों के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैंI

  • एकल छाती एक्स-रे (0.02 mSv)— यह रेडिएशन की उस मात्रा के बराबर है, जिसके संपर्क में आप लंदन से स्पेन की वापसी की उड़ान के दौरान आएँगे (आप जितने उच्च स्थान पर जाते हैं, आपके अंदर ब्रह्मांडीय किरणों से सुरक्षा उतनी कम होती है)।
  • मेमोग्राम (2 से 5 mSv)- मेमोग्राम के बाद एक महिला को प्राप्त होने वाली रेडिशन की मात्रा(मेमोग्राम एक प्रकार का एक्स-रे है, जिसका प्रयोग स्तन कैंसर की जांच के लिए किया जाता है)। स्तन कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगने का लाभ यह है कि इससे रेडिएशन के संपर्क में आने से होने वाला जोखिम, कैंसर का बाद में पता चलने के जोखिम से काम होता है।
  • छाती, पेट और कूल्हे का एक कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी(सीटी) स्कैन(10 mSv)- रेडिएशन की वह मात्रा, जिसे एक व्यक्ति सीटी स्कैन से प्राप्त करता है। सीटी स्कैन एक मशीन है जिसका प्रयोग शरीर के अंदर की तस्वीर तैयार करने के लिए किए जाने वाले कई श्रेणियों के X-ray में किया जाता है।
  • रेडिएशन के साथ काम करना(20 mSv)- कई देशों में कानूनी मात्रा, जिसे आयनीकृत रेडिएशन रेगुलेशन द्वारा लागू किया गया है। इसके तहत एक वर्गीकृत व्यक्ति जो रेडिएशन के साथ काम कर रहा है, उसमें किसी भी वर्ष में उस मात्रा से एक्स्पोज़ हो सकता है। हालांकि अधिकांश कामगार इससे काफी कम मात्रा प्राप्त करते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन- आयनीकृत रेडिएशन क्या है?

व्यवसायिक जोखिम

नियमित रूप से रेडिएशन के साथ काम करने वालों के जोखिम के बारे में परस्पर विरोधी साक्ष्य हैं। इन लोगों में परमाणु ऊर्जा कार्यकर्ता और मेडिकल कर्मी शामिल हैं जो एक्स-रे और CT स्कैनर जैसी रेडियोधर्मी प्रौद्योगिकी(radioactive technology) का उपयोग करते हैं।

कुछ अध्ययन यह दर्शाते हैं कि जो लोग रेडिएशन के साथ काम करते हैं, उनको कैंसर, हृदय सबंधी और आघात की समस्या होने का खतरा ज्यादा होता है, जबकि अन्य अध्ययन दर्शाते हैं कि इन लोगों में इन समस्याओं का खतरा कम होता है।

सुरक्षा मानकों में सुधार का मतलब है कि अब यह अनुमान लगाया गया है कि केवल 6% रेडिएशन श्रमिकों के अपने कार्यकाल के दौरान आयनीकृत रेडिएशन(100mSv या अधिक) के उच्च स्तर के संपर्क में आने की संभावना है, जिससे समस्याओं के विकसित होने की संभावना कम होनी चाहिए।

इस बात का भी अभी कोई सबूत नहीं है कि रेडिएशन के साथ काम करने वाले लोगों के बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याओं के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, जैसे कि जन्मदोष(birth defects) या ल्यूकेमिया(leukemia)।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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