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जेनेटिक्स (आनुवंशिकी)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

जेनिटिक्स क्या है? (What is genetics)

आप भौतिक व व्यावहारिक गुणों को अपने माता-पिता से कैसे पाते है, इसकी जानकारी देने वाली विज्ञान की शाखा को जेनेटिक्स (genetics) कहते हैं।

आपके जीन में वैसी जेनेटिक जानकारियाँ होती है, जिसकी वजह से आपकी आंखों और बालों का रंग तय होता है।

जीन्स, जेनिटिक्स मटरेयिल की एकल इकाई है, जो क्रोमोजोम के भीतर पायी जाती है। (लंबी, शरीर की प्रत्येक कोशिका में थ्रेडलाइड संरचनाएं जिसमें डीएनए पाएं जाते हैं, नीचे देखें।)

हालांकि, लक्षण केवल अकेले जीन के कारण नहीं होते हैं - परिवेश भी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यानी कि जिस तरह से एक बच्चे को पाला-पोसा जाता है उसका उनके विकास पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

उदाहरण के लिए, एक बच्चे को अपने माता -पिता से लंबा होने वाला जीन प्राप्त होता है, लेकिन यदि उनके आहार से उन्हें आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त नहीं होते हैं, तो वे बहुत लंबे नहीं हो सकते हैं।

क्रोमोजोम्स (Chromosomes)

हमारे शरीर के प्रत्येक कोशिकाओं में 23 क्रोमोजोम्स

(Chromosomes) की जोड़ियाँ पायी जाती हैं। यह उन जीन्स को साथ लाते हैं जो आपको आपके माता-पिता से प्राप्त होती हैं।

आँखों और बालों के रंग जैसी जेनिटिक्स के लक्षणों के साथ-साथ, आप एक स्वास्थ्य स्थिति, या किसी विशेष स्थिति को विकसित करने की प्रवृत्ति भी प्राप्त कर सकते हैं।

क्रोमोजोम (Chromosome) के प्रत्येक जोड़े में से एक माता -पिता के जनेटिक्स से प्राप्त होता है, जिसका अर्थ है कि यह एक अपवाद के साथ, प्रत्येक कोशिका में जीन की दो कॉपी पायी जाती हैं।

एक्स और वाई सेक्स क्रोमोजोम्स (Chromosomes) के साथ अपवाद है। ये बच्चे के लिंग का निर्धारण करते हैं। एक X और Y वाले क्रोमोजोम (Chromosome) वाले शिशु पुरूष (XY) होंगे। वाई क्रोमोजोम (Chromosome) के बिना, लेकिन एक ही तरह के समान एक्स क्रोमोजोम (Chromosome) होने पर, महिला (XX) होंगी।

इसका मतलब यह है कि पुरुषों में प्रत्येक एक्स क्रोमोजोम (Chromosome) जीन की केवल एक कॉपी होती है।

प्रत्येक क्रोमोजोम (Chromosome) में सैकड़ों या हजारों जीन होते हैं। कुल मिलाकर लगभग 21,000 जीन हैं, जिन्हें क्रोमोजोम (Chromosome) में निहित डीएनए में देखा जा सकता है। जीन (gene) के पूरे सेट को जीनोम (genome) के रूप में जाना जाता है।

डीएनए (DNA)

डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) Deoxyribonucleic acid (DNA) वह लंबा मोलेक्यूल (अणु) है जो जेनिटिक्स की जानकारी को संग्रहीत करता है। यह जानकारी डीएनए (DNA) में चार 'अक्षरों', या छोटे मोलेक्यूल की वर्णमाला का उपयोग करके लिखी गई है: ए, सी, जी और टी (A, C, G & T)।

प्रत्येक जीन में अक्षरों का एक सटीक अनुक्रम होता है। यह जेनेटिक कोड (genetic code) है। प्रत्येक जीन (gene) में एक विशेष सेल (cell) में, एक विशेष समय में एक विशेष प्रोटीन बनाने के निर्देश होते हैं। प्रोटीन जटिल रसायन होते हैं जो बनाते हैं:

● रक्त (blood)

● मांसपेशियों (muscles)

● कण्डरा (रेशेदार डोरियाँ जो हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ती हैं) (tendons)

● त्वचा (skin)

● तंत्रिकाएं (nerves)

● अंग (organs)

डीएनए दो स्ट्रैंड्स कॉइल्ड (strands coiled) से मिलकर बने होते हैं, जो एक दूसरे की प्रतिबिंब यानी कि समान छवि के होते हैं। इस वजह से, जब कोशिकाओं का विभाजन होता है, तो डीएनए (DNA) आसानी से विभाजित हो जाता है और जेनेटिक कोड (genetic code) हूबहू उसी रूप में उसमें पहुँच जाता है। जब कोशिकाओं का विभाजन होता है, तो डीएनए की प्रतिलिपिकरण की इस प्रक्रिया (कॉपी) को प्रतिरुप (रेप्लिकैशन) से जाना जाता है।

23 क्रोमोजोम (Chromosome) में डीएनए कोड के लगभग 3 बिलियन अक्षर होते हैं।

मानव जीनोम परियोजना (The Human Genome Project)

मानव जीनोम परियोजना (The Human Genome Project) एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना (international scientific project) है जिसमें दुनिया भर के हजारों वैज्ञानिक शामिल हैं।

प्रारंभिक परियोजना 1990 से 2003 तक चली। इसका उद्देश्य प्रत्येक मानव कोशिका में पाई जाने वाली जेनेटिक्स (genetics) जानकारी की बढ़ी संख्या में मैपिंग करना है।

विशिष्ट मानव जीन की पहचान करने के साथ, ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट (Human Genome Project) ने वैज्ञानिकों को एक बेहतर समझ हासिल करने में सक्षम किया है कि माता-पिता से बच्चों तक कुछ लक्षण और विशेषताएँ कैसे हस्तांतरित होते हैं।

इसके अलावा यह जेनिटिक्स से प्राप्त परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में भी सहायता प्रदान करता है, जैसे कि -

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (muscular dystrophy) - एक ऐसी स्थिति जो धीरे-धीरे मांसपेशियों को समय के साथ कमजोर करती है, जिससे विकलांगता के खतरे का स्तर बढ़ जाता है।

● डाउन सिंड्रोम (Down's syndrome) - एक ऐसी स्थिति जो बच्चे के सामान्य शारीरिक विकास को प्रभावित करती है और सीखने की कठिनाइयों का कारण बनती है।

● सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis) - एक ऐसी स्थिति जिसके कारण आंतरिक अंग मोटे, चिपचिपे बलगम से भर जाते हैं।

जेनेटिक परीक्षण और परामर्श (Genetic testing and counselling)

जेनेटिक परीक्षण (Genetic testing) का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि क्या आप किसी विशेष जेनेटिक उत्परिवर्तन (परिवर्तित जीन) को ले जा रहे हैं जो चिकित्सा परिस्थिति का कारण बन सकता है।

परीक्षण में आमतौर पर रक्त या ऊतक का नमूना लेना होता है। नमूने में आपके डीएनए (DNA) वाले सेल होंगे। यह पता लगाने के लिए परीक्षण किया जा सकता है कि क्या आप किसी विशेष उत्परिवर्तन को ले जा रहे हैं और किसी विशेष जेनिटिक स्थिति के विकास का खतरा है या नहीं।

जेनिटिक परीक्षण और परामर्श के बारे में और पढ़ें।

तथ्य (Facts)

शरीर के प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े क्रोमोजोम (Chromosome) होते हैं। प्रत्येक जोड़े में से एक क्रोमोजोम (Chromosome) आपकी माँ से वंशानुगत में मिली होती है और एक आपके पिता से वंशानुगत में प्राप्त होता है।

क्रोमोजोम (Chromosome) में वे जीन होते हैं जो आपको अपने माता-पिता से प्राप्त होते हैं। एक ही जीन के विभिन्न रूप हो सकते हैं। इन विभिन्न रूपों को एलील्स (alleles) कहा जाता है।

उदाहरण के लिए, आंख को निर्धारित करने वाले जीन के लिए, नीली आंखों के लिए एक एलील (alleles) और भूरी आंखों के लिए एक एलील (alleles) हो सकता है।

आपको अपनी माँ से भूरे रंग का एलील (alleles) और अपने पिता से एक ब्लू एलील (alleles) मिल सकता है। इस स्थिति में, आपकी आँखें भूरी होंगी, क्योंकि भूरा प्रमुख एलील (alleles) है। डीएनए कोड में उत्परिवर्तन (परिवर्तन) के कारण जीन के विभिन्न रूप होते हैं।

चिकित्सा शर्तों के लिए भी यही सच है। एक जीन का एक दोषपूर्ण संस्करण हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप एक चिकित्सा स्थिति होती है, और एक सामान्य संस्करण जो स्वास्थ्य समस्याओं का कारण नहीं हो सकता है।

क्या आपके बच्चे में निम्नलिखित चिकित्सा स्थिति है, जिसमें यह कारण शामिल हैं-

आपका बच्चा एक चिकित्सा स्थिति के साथ पैदा होता है, जिसमें कारकों पर निर्भर करेगा:

● उन्हें कौन सा जीन वंशानुगत में मिला है

● क्या उस स्थिति के लिए जीन प्रमुख या पुनरावर्ती है

● उनका वातावरण, जिसमें वो उपचार भी शामिल है, जो वे ले रहे हैं।

जेनेटिक परिवर्तन (Genetic mutations)

जेनेटिक परिवर्तन (Genetic mutations) तब होते हैं जब डीएनए में परिवर्तन होता है, जेनेटिक निर्देशों में परिवर्तन होता है। यह एक जेनेटिक विकार या लक्षणों में बदलाव के परिणामस्वरूप हो सकता है।

उत्परिवर्तन अनायास नहीं होते हैं।

पानी और ऑक्सीजन सहित सामान्य प्रक्रियाओं और प्राकृतिक रसायनों, साथ ही विकिरण और सूर्य के प्रकाश से डीएनए को लगातार नुकसान होता रहता है।

क्षति की मरम्मत आमतौर पर की जाती है, लेकिन कभी-कभी मरम्मत सही नहीं हो सकती है। जब एक कोशिका विभाजित होने पर डीएनए की प्रतिलिपि बनाई जाती है, उस वक्त एक गलती हो सकती है, जिससे उत्परिवर्तन होता है।

उदाहरण के लिए, सिगरेट का धुआं उन रसायनों से भरा होता है जो डीएनए पर हमला करते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। यह फेफड़ों की कोशिकाओं के जीन में उत्परिवर्तन का कारण बनता है, जिसमें वृद्धि को नियंत्रित करने वाले भी शामिल होते हैं। यह समय के साथ फेफड़ों के कैंसर को जन्म देने का कारण बनता है।

उत्परिवर्तन के तीन अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं। जो इस प्रकार से हो सकते हैं:

  • तटस्थ रहे औऱ इसका कोई प्रभाव नहीं पड़े
  • प्रोटीन में सुधार करें और हितकारी हो
  • ऐसे प्रोटीन जिसके परिणाम सही नहीं होते व काम नहीं करता है, जिससे बीमारी हो सकती है।

नए उत्परिवर्तन

उत्परिवर्तन एक माता-पिता से वंशानुगत में मिल सकता है या वे तब हो सकते हैं जब एक शुक्राणु या अंडा बनता है, जिसके परिणामस्वरूप एक नया उत्परिवर्तन होता है।

नए उत्परिवर्तन वाले किसी व्यक्ति के पास किसी हालत का पारिवारिक इतिहास नहीं होगा, लेकिन उन्हें अपने बच्चों पर उत्परिवर्तन पारित करने का खतरा हो सकता है। उनके पास स्वयं के लक्षणों का आंशिक या संशोधित रूप विकसित होने का खतरा भी हो सकता है।

नई जेनेटिक्स उत्परिवर्तन के कारण अक्सर होने वाले लक्षणों में शामिल हैं:

● डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne muscular dystrophy) - मांसपेशियों की डिस्ट्रोफी का सबसे आम और सबसे गंभीर रूप (एक ऐसी स्थिति जो धीरे-धीरे मांसपेशियों को कमजोर कर देती है)

● हीमोफिलिया (haemophilia) - एक ऐसी स्थिति जो रक्त के थक्के की क्षमता को प्रभावित करती है

पासिंग ऑन म्यूटेशन (Passing on mutations)

अंडे और शुक्राणु में केवल वयस्क में मौजूद प्रत्येक जोड़े में से एक क्रोमोजोम (Chromosome) होता है। क्रोमोजोम (Chromosome) के प्रत्येक जोड़े में से कौन सा एक अंडे में या शुक्राणु में जाता है यह यादृच्छिक (रेंडम) होता है।

इसलिए, यदि एक उत्परिवर्तन जीन की दो प्रतियों में से एक (क्रोमोजोम की एक जोड़ी में से एक) में मौजूद है, तो बच्चे में दो में से एक पास होने की संभावना है।

आवर्ती (रिसेसिव) वंशानुगत (Recessive inheritance)

आवर्ती वंशानुगत (Recessive inheritance) में, एक बच्चे को एक विशेष जीन की दोनों प्रतियों में एक उत्परिवर्तन वंशानुगत में प्राप्त हो जाता है।

दूसरे शब्दों में, शर्त पर पास होने के लिए माता-पिता दोनों के पास दोषपूर्ण जीन (वे स्थिति के वाहक हैं) की एक प्रति होनी चाहिए। यदि बच्चा केवल दोषपूर्ण जीन की एक प्रति प्राप्त करता है, तो वे स्थिति के वाहक होंगे।

यदि माता और पिता दोनों ही दोषपूर्ण जीन को ले जाते हैं, तो चार में से एक ऐसा होता है, जब उनके बच्चे की आनुवंशिक स्थिति होगी।

उदाहरण के लिए, एक पुनरावर्ती जीन सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis) का कारण बनता है। इसका मतलब यह है कि सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis) वाले बच्चे को अपनी मां और पिता दोनों से जीन की दोषपूर्ण प्रतिलिपि मिली है।

प्रमुख वंशानुक्रम (Dominant inheritance)

प्रमुख वंशानुगत (Dominant inheritance) में, एक उत्परिवर्तन को केवल माता या पिता से पारित करने की आवश्यकता होती है। इसलिए, यदि माता-पिता में से किसी एक की स्थिति है, तो दो में से एक बार ऐसी संभावना होती है कि वो बच्चे को मिल सकता है।

एक प्रमुख जीन टाइप 1 न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस (type 1 neurofibromatosis) का कारण बनता है, एक ऐसी स्थिति जो पूरे शरीर में नसों पर ट्यूमर पैदा कर सकती है। एक बच्चे को यह लक्षण वंशानुगत में मिल सकती है अगर माँ या पिता को है और वे दोषपूर्ण जीन को आगे पास करते हैं। यह एक नए जेनेटिक उत्परिवर्तन के कारण भी हो सकता है।

एक्स-लिंक्ड इनहेरिटेंस (X-linked inheritance)

यदि एक्स क्रोमोजोम पर एक जीन में उत्परिवर्तन होता है, तो प्रभाव महिलाओं में नहीं देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि महिलाओं में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं, जिनमें से एक लगभग निश्चित रूप से सामान्य है।

हालांकि, यदि कोई पुरुष अपनी मां से एक्स क्रोमोजोम पर उत्परिवर्तन वंशानुगत में प्राप्त करता है, तो उसके पास जीन की एक सामान्य प्रतिलिपि नहीं होगी और वह स्थिति विकसित करेगी। डचेन (Duchenne) पेशी अपविकास और हीमोफिलिया दोनों इस तरह से वंशानुगत में मिले हैं।

बहु-तथ्यात्मक स्थितियां (Multi-factorial conditions)

बहुत कम स्वास्थ्य की परेशानियाँ केवल जीन के कारण उत्पत्न होती है; अधिकांश जीन और परिवेश के संयोजन के कारण होते हैं। परिवेश में जीवनशैली, आहार और व्यायाम जैसे कारक शामिल हैं।

लगभग एक दर्जन जीन अधिकांश मानव विशेषताओं को निर्धारित करते हैं, जैसे कि ऊंचाई और सामान्य बीमारियों की होने की संभावना।

जीन के कई प्रकार हो सकते हैं (एलील्स - ऊपर देखें।) बड़ी संख्या में व्यक्तियों के पूरे जीनोम (जीन के पूरे सेट) के अध्ययन से पता चलता है कि इन प्रकारों से किसी व्यक्ति में लक्षण के बढ़ने या घटने की संभावना बढ़ सकती है। प्रत्येक संस्करण केवल एक स्थिति की संभावना को बहुत कम बढ़ा या घटा सकता है, लेकिन यह कई जीनों को जोड़ सकता है।

ज्यादातर लोगों में, जीन वेरिएंट ज्यादातर स्थितियों के लिए एक औसत जोखिम देने के लिए संतुलित करते हैं लेकिन, कुछ मामलों में, जोखिम औसत से ऊपर या नीचे होता है। यह माना जाता है कि परिवेश और जीवनशैली में बदलाव लाकर जोखिम को कम करना संभव हो सकता है।

जीवनशैली कारक (Lifestyle factors)

जबकि आपके जीन एक निश्चित स्थिति को विकसित करने की आपकी संभावना को बढ़ा सकते हैं, यह जोखिम भी जीवन शैली कारकों से निकटता से जुड़ा हुआ है। ये सभी कारक जुड़े हुए हैं, क्योंकि एक जीन या कुछ जीन्स आपको परिवेश के प्रति संवेदनशील बना सकता है।

उदाहरण के लिए, कोरोनरी हृदय रोग (जब हृदय की रक्त की आपूर्ति अवरुद्ध हो जाती है) परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रह सकती है, लेकिन एक खराब आहार, धूम्रपान और व्यायाम की कमी भी स्थिति को विकसित करने के आपके जोखिम को बढ़ा सकती है।

शोध बताते हैं कि भविष्य में व्यक्तियों के लिए यह पता लगाना संभव होगा कि उनमें कौन सी बीमारी विकसित होने की सबसे अधिक संभावना है। फिर आपके लिए जीवनशैली और परिवेश में बदलाव करके इन परिस्थितियों से बचना संभव हो सकता है।

जेनेटिक परीक्षण और परामर्श (Genetic testing and counselling)

जेनिटिक परीक्षण का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि क्या कोई व्यक्ति एक विशिष्ट जेनिटक उत्परिवर्तन (परिवर्तित जीन) ले जा रहा है जो किसी विशेष चिकित्सा परिस्थिति का कारण बन सकता है।

जेनिटिक वंशुनागत और आनुवंशिक उत्परिवर्तन के बारे में और पढ़ें।

जेनेटिक परीक्षण (Genetic testing)

आनुवंशिक परीक्षण में आमतौर पर आपके रक्त या ऊतक का एक नमूना लिया जाता है। नमूने में ऐसी कोशिकाएँ होंगी जिनमें आपका डीएनए होता है और यह पता लगाने के लिए परीक्षण किया जा सकता है कि आप किसी विशेष उत्परिवर्तन को ले जा रहे हैं या नहीं और किसी विशेष जेनेटिक स्थिति के विकसित होने का खतरा है।

आनुवंशिक परीक्षण केवल तभी उपयोगी है जब यह पता चल सके कि एक विशिष्ट जेनेटिक उत्परिवर्तन एक स्थिति का कारण बनता है। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट जीन को स्पाइनल पेशी शोष (spinal muscular atrophy) का कारण माना जाता है (ऐसी स्थिति जहां मांसपेशियों की कमजोरी और उसके हिलने-डुलने में परेशानी होती है)। इसलिए इस जीन की उपस्थिति या अनुपस्थिति के लिए रक्त के नमूने का परीक्षण करना संभव है।

कुछ जेनिटिक स्थितियाँ विशेष उत्परिवर्तन के कारण होती हैं। अन्य किसी जीन में किसी भी उत्परिवर्तन के कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis) आमतौर पर कुछ विशेष उत्परिवर्तन के कारण होता है, जिसका अर्थ है कि इसका परीक्षण करना अपेक्षाकृत आसान है।

हालांकि, मारफन सिंड्रोम (Marfan syndrome) (एक ऐसी स्थिति जो शरीर के संयोजी ऊतकों को प्रभावित करती है) किसी विशेष जीन में सैकड़ों विभिन्न संभावित उत्परिवर्तनों में से किसी एक का कारण हो सकती है।

जीन अनुक्रमण (Gene sequencing)

मार्फन सिंड्रोम (Marfan syndrome) जैसी स्थिति के लिए, प्रयोगशाला में एक वैज्ञानिक को जीन अनुक्रमण नामक प्रक्रिया का उपयोग करके, उत्परिवर्तन के लिए पूरे जीन की जांच करनी होगी। यह बहुत सावधानी से किया जाना है, और अधिकांश अन्य अस्पताल प्रयोगशाला परीक्षणों की तुलना में इसमें लंबा समय लग सकता है।

उदाहरण के लिए, मार्फन सिंड्रोम जीन (Marfan syndrome gene) में डीएनए कोड के 200,000 से अधिक अक्षर शामिल हैं, जिन्हें 65 भागों में विभाजित किया गया है। और, यह सबसे बड़ा मानव जीन भी नहीं है।

जब एक उत्परिवर्तन पाया जाता है, तब भी यह निर्धारित करने के लिए बहुत काम की आवश्यकता हो सकती है कि क्या यह वास्तव में स्थिति का कारण है या नहीं।

क्लिनिकल जेनिटिक्स, जेनिटिक्स में प्रशिक्षित डॉक्टर होते हैं औऱ जेनेटिक्स स्थितियों के बारे में सलाह देने में कुशल व सक्षम होते हैं।

कई स्थितियां एक से अधिक जीन के कारण हो सकती हैं और विभिन्न तरीकों से जेनिटिक्स के माध्यम से प्राप्त हो सकते हैं।

वंशानुक्रम के कारण और पैटर्न का निर्धारण करना महत्वपूर्ण है। इसका कारण यह है कि अगर किसी व्यक्ति का निदान किया गया है तो उसे अपनी पसंद के बारे में सलाह देना आसान हो जाता है।

अक्सर जेनिटिक्स स्थिति वाले लोगों या उनके परिवारों के अनुरोध पर डॉक्टर और अस्पताल के डॉक्टर जेनिटिक्स सेवाओं के लिए रेफरल बना सकते हैं।

कई अन्य विशेषज्ञ भी जेनिटिक्स सेवाओं का उपयोग करते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • प्रसूति विशेषज्ञ (obstetricians) (गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की देखभाल में विशेषज्ञ) - वे क्रोमोजोम (Chromosome) परीक्षणों के लिए गर्भवती महिला के गर्भ से तरल पदार्थ का एक नमूना भेज सकते हैं।
  • बाल रोग विशेषज्ञ (paediatricians) (बालरोग विशेषज्ञ) और न्यूरोलॉजिस्ट (तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ) - वे अक्सर नैदानिक ​​और नैदानिक ​​परीक्षणों के बारे में सलाह लेते हैं।
  • ऑन्कोलॉजिस्ट (oncologists) (कैंसर के विशेषज्ञ) और सर्जन - जिन्हें कैंसर होने का खतरा होता है उन्हें या उनके परिवार वालों को जेनेटिकटेस्ट करवाने के लिए रेफर कर सकते हैं।

जेनेटिक्स तेजी से रोजमर्रा की दवा का हिस्सा बनता जा रहा है।

जेनेटिक परामर्श (Genetic counselling)

जेनेटिक परामर्श (Genetic counselling) एक ऐसी सेवा है जो जेनेटिक स्थितियों के बारे में जानकारी और सलाह प्रदान करती है।

परामर्श स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों द्वारा संचालित किया जाता है; जिन्हें विशेष रूप से मानव जेनेटिक (एक जेनेटिक्स परामर्शदाता या एक नैदानिक ​​जेनेटिक्स) के विज्ञान में प्रशिक्षित किया गया है।

परामर्शदाता आपके साथ जेनेटिक्स परीक्षण के जोखिमों, लाभों और सीमाओं पर चर्चा करेगा। वे यह भी बताएंगे कि जेनेटिक्स परीक्षण के परिणामस्वरूप मिली जानकारी का आपके और आपके परिवार दोनों के लिए क्या प्रभाव पड़ सकता है।

जेनिटिक्स सेवाएं (Genetics services) अक्सर जेनिटिक्स लक्षणों वाले लोगों की मदद करती हैं जो बच्चे पैदा करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी के पास में जेनिटिक्स वाले लक्षण हैं और वह माता-पिता बनना चाहता है, तो जेनिटिक्स सबंधित परामर्श बच्चे में इन लक्षणों का असर या जोखिम का आकलन कर सकता है।

आपका पारिवारिक इतिहास आमतौर पर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पूर्व में जिन परिवार के सदस्यों की जो स्थिति थी या उनमें कोई लक्षण थे, उन्हें पहचानने से यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि कौन से जेनेटिक्स परीक्षण उचित हो सकते हैं।

आनुवंशिकीविद आपके पास होने वाले किसी भी परीक्षण या परीक्षा के परिणामों की व्याख्या करने में सक्षम होंगे और प्रगति करने के तरीके को तय करने में आपकी मदद करेंगे।

एक आनुवंशिकीविद् किसी विशेष स्थिति के विकास के आपके जोखिम का आकलन करने में भी मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपके घर में या परिवार में कैंसर का एक मजबूत पारिवारिक इतिहास है, तो एक आनुवंशिकीविद् आपके जोखिमों का आकलन करेगा और आपके साथ उन पर चर्चा करेगा। वे यह तय करने में आपकी मदद कर सकते हैं कि कैंसर की जांच हो या अन्य परीक्षण।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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