COVID-19: नवीनतम सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक करें

×
18 min read

पीलिया (जॉन्डिस /Jaundice)

मेडिकल समीक्षा के साथ

स्वास्थ्य संबंधी सभी लेखों की चिकित्सीय सुरक्षा जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है। अधिक जानकारी के लिए हमारी सम्पादकीय नीति देखें।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

पीलिया/जॉन्डिस क्या है? (What is jaundice)

पीलिया (jaundice) एक ऐसी स्थिति है जिसमें त्वचा और आँखों के सफ़ेद भाग का रंग पीला हो जाता है।

यह शरीर के रक्त और ऊतकों में बिलीरुबिन (bilirubin) नामक पदार्थ के अतिरिक्त मात्रा में बनने के कारण होता है।

पीलिया के लक्षण (signs of jaundice)

पीलिया के सबसे आम लक्षण निम्न हैं:

  • त्वचा, आंखों और श्लेष्मा झिल्ली (mucous membrane) (शरीर के मार्ग और गुहाओं की परत, जैसे मुंह और नाक) का पीला होना
  • मल का रंग फीका होना
  • गहरे रंग का पेशाब होना

चिकित्सकीय सलाह कब लें

यदि उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण नजर आएं, तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। ये लक्षण इस बात का संकेत हैं कि आपके शरीर की सामान्य प्रक्रियाओं में कुछ गड़बड़ है।

जितनी जल्दी हो सके अपने डॉक्टर से संपर्क करें। यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो अपने स्थानीय सेवा प्रदाताओं से संपर्क करें।

पीलिया के प्रकार (types of jaundice)

पीलिया (jaundice) के तीन प्रकार होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर से बिलीरुबिन (bilirubin) के सामान्य निकास में किस तरह की समस्या आ रही है।

पीलिया के तीन मुख्य प्रकार के बारे में नीचे बताया गया है।

  • प्री-हिपैटिक जॉन्डिस (pre-hepatic jaundice) – बिलीरुबिन (bilirubin) के रक्त से लिवर में जाने से पहले ही कोई बाधा हो जाती है।यह आमतौर पर सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anaemia) और हेमोलिटिक एनीमिया (hemolytic anaemia) के कारण होता है।
  • इंट्रा-हिपैटिक जॉन्डिस (intra-hepatic jaundice) - इसे हेप्टा सेल्युलर जॉन्डिस (hepatocellular jaundice) भी कहते हैं। इसमें बिलीरुबिन (bilirubin) लिवर के अंदर विघटित होता है। यह सिरोसिस (cirrhosis) या लिवर खराब होने जैसी स्थितियों के कारण होता है।
  • पोस्ट-हिपैटिक जॉन्डिस (post-hepatic jaundice)- इसे ऑब्सट्रक्टिव जॉन्डिस (obstructive jaundice) भी कहा जाता है। इसमें पित्त और बिलीरुबिन (bilirubin) पित्ताशय थैली से बाहर निकलकर पाचन तंत्र तक नहीं पहुंच पाता है। यह आमतौर पर पित्ताशय में पथरी और ट्यूमर के कारण होता है।

पीलिया के कारणों के बारे में पढ़ें।

किन्हें ज्यादा जोखिम है

इंट्रा-हिपेटिक (intra-hepatic) और पोस्ट-हिपेटिक (post-hepatic) पीलिया युवा लोगों की अपेक्षा मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्गों में अधिक आम है। प्री-हिपैटिक पीलिया (pre-hepatic jaundice) बच्चों सहित सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है।

जीवनशैली में कुछ बदलाव करने से पीलिया (jaundice) को रोकने में मदद मिलती है। जैसे कि, अपने वजन को संतुलित रखें, कम मात्रा में एल्कोहल का सेवन करें और हेपेटाइटिस (hepatitis) के जोखिम से बचें।

पीलिया से बचाव के बारे में और पढ़ें।

पीलिया का इलाज (treating jaundice)

वयस्कों और बड़े बच्चों में पीलिया का इलाज इस समस्या के कारणों पर निर्भर करता है।

पीलिया के कारणों का पता लगाने के लिए किए गए परीक्षण के बाद उचित इलाज की सलाह दी जाती है।

पीलिया के निदान के बारे में और पढ़ें।

पीलिया के कारण (causes of jaundice)

पीलिया (jaundice) शरीर के खून और ऊतकों में बिलीरुबिन (bilirubin) नामक पदार्थ के अतिरिक्त मात्रा के बनने के कारण होता है।

कोई भी स्थिति जो बिलीरुबिन को रक्त से लिवर तक जाने और शरीर से बाहर निकलने से रोकती है, वह पीलिया का कारण बनती है।

बिलीरुबिन क्या है?

बिलीरुबिन एक अपशिष्ट उत्पाद है जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है।

बिलीरुबिन रक्त द्वारा लिवर तक ले जाया जाता है जहां विशेष कोशिकाएं पित्त (bile) नामक पाचन द्रव के साथ इसे जोड़ने में मदद करती हैं।

पाचन तंत्र के अंदर पित्त (और बिलीरुबिन) को बैक्टीरिया द्वारा यूरोबिलिनोजेन (urobilinogen) नामक पदार्थ में परिवर्तित कर दिया जाता है, जो पेशाब या मल के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है। बिलीरुबिन के कारण ही पेशाब का रंग हल्का पीला होता है और मल गहरे भूरे रंग का होता है।

पीलिया के प्रकार (types of jaundice)

पीलिया तीन प्रकार का होता है। यह आमतौर पर इस बात पर निर्भर करता है कि बिलीरूबिन के शरीर से बाहर निकलने की को कौन से कारक प्रभावित कर रहे हैं।

  • प्री-हिपैटिक पीलिया (pre-hepatic jaundice) तब होता है जब किसी समस्या या संक्रमण के कारण लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने की गति बढ़ जाती है। इससे रक्त में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति में पीलिया के लक्षण नजर आने लगते हैं।
  • इंट्रा-हिपैटिक पीलिया (intra-hepatic jaundice) तब होता है जब संक्रमण या एल्कोहल जैसे हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आने की वजह से लिवर को नुकसान पहुंचता है, जिससे लिवर द्वारा बिलीरुबिन को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।
  • पोस्ट-हिपैटिक पीलिया (post-hepatic jaundice) तब होता है जब पित्त नलिका प्रणाली क्षतिग्रस्त हो जाती है, या इसमें सूजन आ जाती है या यह अवरुद्ध हो जाती है। इसके कारण पित्ताशय की थैली पाचन तंत्र में पित्त नहीं भेज पाती है।

प्रत्येक प्रकार के पीलिया के कारणों के बारे में नीचे बताया गया है।

प्री-हिपैटिक पीलिया (pre-hepatic jaundice)

प्री-हिपैटिक जॉन्डिस के कारणों में शामिल हैं:

  • मलेरिया (malaria) - यह एक रक्त जनित संक्रमण है जो मच्छरों के काटने से फैलता है। यह दुनिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आम है।
  • सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anaemia) - यह एक अनुवांशिक समस्या है जिसके कारण लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य रूप से विकसित होती हैं। सिकल सेल एनीमिया काले कैरिबियन, काले अफ्रीकी और काले ब्रिटिश लोगों में बेहद आम है
  • थैलेसीमिया (thalassaemia) - सिकल सेल एनीमिया की तरह यह भी एक अनुवांशिक समस्या है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को प्रभावित करता है। थैलेसीमिया (thalassaemia) भूमध्यसागरीय, मध्य पूर्वी और दक्षिण एशियाई लोगों में बेहद आम है।
  • गिल्बर्ट सिंड्रोम (Gilbert’s syndrome)- यह एक आम अनुवांशिक समस्या है जिसमें रक्त से लिवर तक बिलीरुबिन (bilirubin) का आवागमन सामान्य से कम हो जाता है जिसके कारण खून में बिलीरुबिन (bilirubin) जमा होने लगता है।
  • क्रिगलर-नज्जर सिंड्रोम (Crigler-Najjar syndrome) - यह एक दुर्लभ अनुवांशिक समस्या है जिसमें बिलीरूबिन (bilirubin) को रक्त से लिवर में ले जाने में मदद करने वाले एंजाइम नहीं बनते हैं।
  • वंशानुगत स्फेरोसाइटोसिस (hereditary spherocytosis) - यह एक असामान्य अनुवांशिक समस्या है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं का जीवनकाल सामान्य से बहुत कम हो जाता है।

इंट्रा-हिपैटिक पीलिया (intra-hepatic jaundice)

इंट्रा-हिपैटिक पीलिया (intra-hepatic jaundice) के निम्न कारण हैं:

  • वायरल हेपेटाइटिस संक्रमण के समूह - हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी
  • शराब के कारण लिवर की बीमारी - जिसमें शराब का अधिक सेवन करने के कारण लिवर खराब हो जाता है।
  • लेप्टोस्पायरोसिस (leptospirosis) - यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो जानवरों, विशेष रूप से चूहों द्वारा फैलता है। यह दुनिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आम है।
  • ग्लैंडुलर फीवर (glandular fever)- यह एक वायरल संक्रमण है जो एपस्टीन-बार (Epstein-Barr) वायरस के कारण होता है।
  • दवा का अधिक सेवन - इसके दो प्रमुख कारण हैं, सुकून और मनोरंजन के लिए दवा का सेवन और दर्द निवारक दवाओं जैसे पैरासिटामोल का अधिक मात्रा में सेवन।
  • प्राइमरी बाइलरी सिरोसिस (primary biliary cirrhosis) - यह एक दुर्लभ समस्या है जो प्रोग्रेसिव लिवर डैमेज के कारण होती है।
  • लिवर कैंसर - यह एक दुर्लभ और आमतौर पर लाइलाज कैंसर है जो लिवर के अंदर होता है।
  • ऐसे पदार्थों के संपर्क में आने से जो लिवर के लिए हानिकारक होते हैं, जैसे कि फिनोल (phenol) (प्लास्टिक के निर्माण में इस्तेमाल) या कार्बन टेट्राक्लोराइड (carbon tetrachloride) (बड़े पैमाने पर रेफ्रीजरेशन जैसी प्रक्रियाओं में पहले इस्तेमाल किया जाता था, हालांकि अब इसका उपयोग बंद है।)
  • ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस (autoimmune hepatitis) - यह एक दुर्लभ समस्या है। इसमें इम्यून सिस्टम (संक्रमण और बीमारी से बचाने वाला शरीर का प्राकृतिक कवच) लिवर पर हमला करना शुरू कर देता है।
  • प्राइमरी स्क्लेरोजिंग कोलेंगिटिस (primary sclerosing cholangitis)- यह लिवर की एक दुर्लभ बीमारी है। इसके कारण लिवर में सूजन आ जाती है जो लंबे समय तक बनी रहती है।
  • डबिन-जॉनसन सिंड्रोम (Dubin-Johnson syndrome) - यह एक दुर्लभ अनुवांशिक समस्या है। जिसमें लिवर पित्त के साथ बिलीरुबिन (bilirubin) को संयुक्त नहीं कर पाता है और इस से बिलीरूबिन लिवर के अंदर ही रह जाता है।

पोस्ट-हिपैटिक पीलिया (post-hepatic jaundice)

पोस्ट-हिपैटिक पीलिया (post-hepatic jaundice) के कारण हैं:

  • पित्ताशय की पथरी जो पित्त नली प्रणाली को बाधित करती है
  • अग्नाशय का कैंसर (pancreatic cancer) - यह एक असामान्य प्रकार का कैंसर है जो अग्नाशय (pancreas) के अंदर होता है (अग्नाशय एक ग्रंथि है जो भोजन के पाचन में मदद करती है।)
  • पित्ताशय की थैली या पित्त नली का कैंसर, जो कैंसर का दुर्लभ प्रकार है।
  • पैन्क्रियाटाइटिस (pancreatitis) - यह अग्नाशय में सूजन से जुड़ी समस्या है, जो या तो एक्यूट पैन्क्रियाटाइटिस (acute pancreatitis) (सूजन केवल कुछ दिनों तक रहती है) या क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस (chronic pancreatitis) (सूजन कई वर्षों तक रहती है) हो सकती है।

पीलिया की जांच (diagnosing jaundice)

यदि आपको पीलिया है, तो इसकी गंभीरता और कारणों का पता लगाने के लिए शुरूआत में कई जांच करानी पड़ेगी।

जांच के बारे में नीचे बताया गया है।

पुरानी बीमारियों की जानकारी और परीक्षण

पीलिया के कारणों का निदान करने के लिए आपके डॉक्टर या स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आपसे पिछली बीमारियों के बारे में पूछ सकते हैं।

आपसे पूछा जा सकता है कि क्या:

  • क्या पीलिया से पहले आपको फ्लू जैसे लक्षण थे (यह हेपेटाइटिस की पहचान की ओर इशारा करता है।)
  • आपको फिलहाल पेट दर्द, त्वचा पर खुजली या वजन घटने जैसे लक्षणों का अनुभव हो रहा है।
  • आपने हाल ही में एक ऐसे देश की यात्रा की है जहाँ मलेरिया या हेपेटाइटिस ए जैसी बीमारियां बड़े पैमाने पर फैली हैं।
  • आपने अपने पेशाब या मल के रंग में बदलाव देखा है।
  • आप लंबे समय से अधिक शराब का सेवन कर रहे हैं।
  • आप अभी रीक्रिएशनल दवाएं (सुकून पाने या नशे के रूप में ली जाने वाली दवाएं) ले रहे हैं या पहले लेते थे।
  • आप किसी हानिकारक पदार्थ के संपर्क में आए हैं।

इसके अलावा समस्या के लक्षणों का पता लगाने के लिए आपका शारीरिक परीक्षण भी किया जा सकता है, जैसे:

  • पैरों और टखनों में सूजन (सिरोसिस का लक्षण)
  • लिवर में सूजन (हेपेटाइटिस का लक्षण)

पेशाब की जांच

पेशाब की जांच यूरोबिलिनोजेन (urobilinogen) नामक पदार्थ के स्तर को मापने के लिए किया जा सकता है। यूरोबिलिनोजेन (urobilinogen) का उत्पादन तब होता है जब बैक्टीरिया पाचन तंत्र के अंदर बिलीरुबिन (bilirubin) को विघटित कर देते हैं।

आपके पेशाब में सामान्य से अधिक यूरोबिलिनोजेन (urobilinogen) होने पर प्री-हिपैटिक पीलिया (pre-hepatic jaundice) या इंट्रा-हिपैटिक पीलिया (intra-hepatic jaundice) के रूप में पहचान की जा सकती है। यूरोबिलिनोजेन (urobilinogen) का स्तर कम होने का मतलब आपको पोस्ट-हिपैटिक पीलिया (post-hepatic jaundice) हो सकता है।

लिवर की कार्यप्रणाली और खून की जांच

लिवर की कार्यप्रणाली जाँचने के लिए खून की जांच की जाती है। इसमें लिवर से जुड़ी निम्न समस्याओं की पहचान की जाती है:

  • हेपेटाइटिस (hepatitis)
  • सिरोसिस (cirrhosis)
  • शराब के सेवन से होने वाली लिवर की बीमारी

जब लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है तो यह रक्त में एंजाइम छोड़ता है। इसी समय, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लिवर द्वारा बनाए जा रहे प्रोटीन का स्तर गिरना शुरू हो जाता है।

इन एंजाइमों और प्रोटीनों के स्तर को मापकर, लिवर कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है, इसका एक सटीक अनुमान लगाया जाता है।

इसके अलावा, पीलिया के लक्षणों को बढ़ाने वाले संक्रमण जैसे मलेरिया और हेपेटाइटिस सी की पहचान के लिए रक्त की जांच की जाती है।

इमेजिंग टेस्ट

इंट्रा-हिपैटिक पीलिया (intra-heptic jaundice) या पोस्ट-हिपैटिक पीलिया (post-hepatic jaundice) का संदेह होने पर लिवर या पित्त नली प्रणालियों के अंदर असामान्यताओं की जांच के लिए इमेजिंग टेस्ट किया जाता है।

इसमें निम्न टेस्ट शामिल है:

  • अल्ट्रासाउंड स्कैन (ultrasound scan)- इसमें उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें आपके शरीर के अंदर का चित्र बनाती हैं।
  • कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (CT) स्कैन - यह एक्स-रे की एक श्रृंखला है जो आपके शरीर का अधिक विस्तृत, तीन आयामी चित्र बनाता है।
  • मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) स्कैन- आपके शरीर के अंदर का विस्तृत चित्र लेने के लिए मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है।
  • इंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंजियोपैंक्रियाटोग्राफी (ERCP ) - पित्त नलिकाओं में एक विशेष डाई इंजेक्ट करने के लिए एक छोटा लचीला, फाइबर-ऑप्टिक कैमरा (endoscope) का उपयोग किया जाता है। डाई एक्स-रे पर दिखाई देता है और प्री-हिपैटिक पीलिया (pre-hepatic jaundice) की पहचान में मदद करता है।

लिवर बायोप्सी (liver biopsy)

यदि यह संदेह हो कि आपका लिवर, सिरोसिस (cirrhosis) या लिवर कैंसर जैसी बीमारियों के कारण खराब हुआ है, तो लिवर के ऊतकों की जांच करने के लिए लिवर बायोप्सी की सलाह दी जाती है।

लिवर बायोप्सी के दौरान, आपके पेट को लोकल एनेस्थेटिक (local anaesthetic) (दर्द निवारक दवा) से सुन्न किया जाता है और इसमें एक महीन सुई डाली जाती है। इससे लिवर की कोशिकाओं का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है जिसे माइक्रोस्कोप से जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है।

पीलिया का इलाज (jaundice treatment)

कारणों के आधार पर पीलिया का कई तरह से इलाज संभव है।

नीचे अलग-अलग प्रकार के पीलिया के इलाज के बारे में विस्तार से बताया गया है।

प्री-हिपैटिक पीलिया (pre-hepatic jaundice)

प्री-हिपैटिक पीलिया (pre-hepatic jaundice) के इलाज में लाल रक्त कोशिकाओं को तेजी से टूटने से रोकने की कोशिश की जाती है जो रक्त में बिलीरुबिन (bilirubin) के स्तर को बढ़ाता है।

मलेरिया जैसे संक्रमण के मामलों में मरीज को दवा देकर बीमारी का इलाज किया जाता है। अनुवांशिक रक्त विकार जैसे सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anaemia) या थैलेसीमिया (thalassaemia) होने पर लाल रक्त कोशिकाओं को बदलने के लिए रक्त चढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है।

आमतौर पर गिल्बर्ट सिंड्रोम के इलाज की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि इस समस्या से जुड़ा पीलिया अधिक गंभीर नहीं होता है और यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा नहीं करता है।

इंट्रा-हिपैटिक पीलिया (intra-hepatic jaundice)

इंट्रा-हिपैटिक पीलिया (intra-hepatic jaundice) होने पर खराब लिवर को ठीक करने के लिए उसकी मरम्मत की जाती है। हालांकि कई बार समय के साथ यह स्वयं ही अपनी मरम्मत कर लेता है। इसलिए इलाज का मुख्य उद्देश्य लिवर को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाना होता है।

वायरल हेपेटाइटिस (viral hepatitis) या ग्लैंडुलर फीवर (glandular fever) जैसे संक्रमण के कारण क्षतिग्रस्त लिवर को आगे नुकसान से बचाने के लिए एंटी-वायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

शराब और रसायन जैसे हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आने पर लिवर क्षतिग्रस्त हो सकता है। इसलिए इन पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

लिवर की बीमारी से जुड़े गंभीर मामलों में लिवर का प्रत्यारोपण एक अन्य संभावित विकल्प है। हालांकि कुछ ही मरीजों में लिवर का प्रत्यारोपण संभव है क्योंकि दान किए गए लिवर की संख्या काफी सीमित है।

अधिक जानकारी के लिए निम्न विषय देखें:

पोस्ट-हिपैटिक पीलिया (post-hepatic jaundice)

पोस्ट-हिपैटिक पीलिया के अधिकांश मामलों में पित्त नली प्रणाली को खोलने के लिए सर्जरी की सलाह दी जाती है।

सर्जरी के दौरान इन्हें हटाना भी आवश्यक हो सकता है:

  • पित्ताशय की थैली
  • पित्त नली प्रणाली का एक भाग
  • आगे होने वाली रुकावटों को रोकने के लिए अग्नाशय का एक भाग

अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित विषय देखें:

पीलिया से बचाव (preventing jaundice)

पीलिया आमतौर पर कई कारणों से होता है। इसलिए इस बीमारी के सभी कारणों से बचना संभव नहीं है। हालांकि आप पीलिया होने के जोखिम को कम करने के लिए सावधानी बरत सकते हैं।

इन सावधानियों में शामिल हैं:

  • सीमित मात्रा में शराब का सेवन करें।
  • अपने वजन को नियंत्रित रखें।
  • हेपेटाइटिस ए या हेपेटाइटिस बी के संक्रमण का टीका लगवाएं। टीकाकरण की सलाह इस आधार पर दी जाती है कि आप दुनिया में कहां यात्रा कर रहे हैं (नीचे देखें)
  • हेपेटाइटिस सी के जोखिम को कम करें क्योंकि वर्तमान में इसके लिए कोई टीका मौजूद नहीं है। हेपेटाइटिस सी को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका अवैध दवाओं (जैसे हेरोइन) का सेवन न करें। इसके अलावा दवा का इंजेक्शन किसी दूसरे व्यक्ति से साझा न करें।

सावधानियों से जुड़ी अधिक जानकारी नीचे दी गई है।

शराब

अगर आप कई सालों से शराब पी रहे हैं, तो शराब का सेवन पूरी तरह से बंद करना पीलिया के जोखिम को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

जोखिम से बचने के लिए सीमित मात्रा में शराब का सेवन करें।

रोजाना की सीमित मात्रा इस प्रकार है:

  • पुरुषों के लिए एक दिन में 3-4 यूनिट
  • महिलाओं के लिए एक दिन में 2-3 यूनिट

एल्कोहल की एक यूनिट की मात्रा एक सामान्य-शक्ति वाले बेयेर के लगभग २५० ml ग्लास , या एक छोटा गिलास वाइन या 25 मिली स्पिरिट के बराबर होती है।

कई विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि रोजाना सीमित मात्रा में शराब का सेवन करने के साथ आप 2-3 दिन बिना शराब पिये बिताएं।

यदि आप शराब के सेवन को कम नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से मिलें। शराब के सेवन को कम करने में मदद करने के लिए परामर्श सेवाएँ और दवाएँ उपलब्ध हैं।

अपने वजन को नियंत्रित रखें

मोटापा और इससे होने वाला नुकसान कभी-कभी लिवर में नुकसान (नॉन-एल्कोहल फैटी लिवर रोग) का कारण बन सकता है। इसलिए वजन को नियंत्रित करके पीलिया से काफी हद तक बचा जा सकता है।

इसके अलावा अधिक वसायुक्त आहार का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है। इससे पित्ताशय में पथरी होने का जोखिम बढ़ जाता है।

वजन को नियंत्रित करने का सबसे आसान तरीका यह है कि एक हफ़्ते में लगभग 150 मिनट यानी ढाई घंटे एरोबिक गतिविधि (जैसे साइकिल चलाना या तेजी से टहलना) करें। इसके साथ ही कम मात्रा में भोजन करें और हेल्दी स्नैक खाएं। हर हफ्ते कम से कम 0.5 किलो (1.1 एलबीएस) वजन कम करें।

मोटापे के इलाज के बारे में यहां पढ़ें।

हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी

टीकाकरण की सलाह आमतौर पर केवल तभी दी जाती है जब आप दुनिया के उन हिस्सों की यात्रा कर रहे हों जहां हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी बड़े पैमाने पर फैला हो।

आपको टीकाकरण की सलाह तब भी दी जा सकती है कि जब आपकी नौकरी या जीवनशैली के कारण आपके किसी भी वायरस के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है।

उदाहरण के लिए, हेपेटाइटिस ए के लिए टीकाकरण की सलाह दी जाती है:

  • जो लोग उन स्थानों पर यात्रा कर रहे हैं जहां वायरस बहुत आम है, जैसे कि भारतीय उपमहाद्वीप, अफ्रीका, मध्य और दक्षिण अमेरिका, सुदूर पूर्व और पूर्वी यूरोप।
  • जो लोग प्रयोगशालाओं में काम करते हैं।
  • जो लोग बंदर और चिंपांजी जैसे जानवरों के साथ काम करते हैं।

हेपेटाइटिस बी के टीकाकरण की सलाह दी जाती है:

  • दुनिया के कुछ हिस्सों जहां हेपेटाइटिस बी बड़े पैमाने पर फैला हो, जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया, उप-सहारा अफ्रीका और प्रशांत द्वीप समूह, जैसे समोआ या सोलोमन द्वीप के आगंतुकों को।
  • जो नियमित रूप से दवाओं का इंजेक्शन लेते हैं।
  • जो पुरुष पुरुषों के साथ सेक्स करते हैं।
  • सेक्स वर्कर

हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी को रोकने के बारे में अधिक जानकारी और सलाह पढ़ें।

हेपेटाइटिस सी

यदि आप नियमित रूप से हेरोइन जैसे ड्रग्स का इंजेक्शन लेते हैं तो हेपेटाइटिस सी के संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने ड्रग-इंजेक्शन के किसी भी उपकरण को दूसरों के साथ साझा न करें। यह न केवल सुइयों पर लागू होता है, बल्कि ऐसे किसी भी चीज़ पर लागू होता है जो अन्य लोगों के खून के संपर्क में आ सकता है, जैसे:

  • चम्मच
  • फिल्टर
  • ड्रग को घोलने वाला पानी
  • टर्निक्वेट्स (tourniquets) - एक ऐसा बेल्ट जिसे ड्रग के आदी व्यक्ति कभी-कभी अपनी नसों में आसानी से इंजेक्शन लगाने के लिए अपनी बांह में बाँध लेते हैं।

चूंकि हेपेटाइटिस सी के कारण कई वर्षों तक किसी भी तरह के लक्षण नहीं दिखते हैं, इसलिए कई लोगों को पता ही नहीं चल पाता है कि वे संक्रमित हैं। अतः यह मान लेना चाहिए कि किसी को भी संक्रमण हो सकता है।

आप भले ही ड्रग का सेवन न करते हों, लेकिन अन्य लोगों के रक्त के संपर्क में आने से पूरी तरह बचना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति के साथ किसी वस्तु जैसे रेजर या टूथब्रश को साझा नहीं करना चाहिए।

संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से हेपेटाइटिस सी होने का कम जोखिम होता है, लेकिन एहतियात के तौर पर हमेशा कंडोम जैसे गर्भनिरोधक का उपयोग करना चाहिए।

संक्रमित व्यक्ति के साथ कोकीन या एम्फ़ैटामिन जैसे नशीले पदार्थों को सूंघने के लिए बैंकनोट्स या स्नॉर्टिंग ट्यूब साझा करने से हेपेटाइटिस सी फैलने का खतरा हो सकता है। इस प्रकार की दवाएं नाक की परत में जलन पैदा कर सकती हैं। साथ ही दूषित रक्त के छोटे कण नोट या ट्यूब पर चिपक सकते हैं जिससे दूसरा व्यक्ति सांस लेने पर संक्रमित हो सकता है।

हेपेटाइटिस सी की जांच, इलाज और हेपेटाइटिस सी के बारे में अधिक जानकारी और सलाह के लिए यहां पढ़ें।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
क्या यह लेख उपयोगी था?

महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।