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अल्ट्रासाउंड-स्कैन (Ultrasound-scan)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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अल्ट्रासाउंड-स्कैन क्या है? (What is an ultrasound scan)

अल्ट्रासाउंड-स्कैन(Ultrasound-scan) जिसे कभी-कभी सोनोग्राम(sonogram) भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों (high frequency sound waves) का उपयोग कर दिल जैसे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की छवि (image) बनाई जाती है।

ये प्रक्रिया सुरक्षित है क्योंकि इसमें विकिरण (radiation) की जगह ध्वनि तरंगों (sound waves) का इस्तेमाल किया जाता है। अल्ट्रासाउंड-स्कैन्स (Ultrasound-scans) का उपयोग सामान्य तौर पर गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की छवि (image) लेने के लिए किया जाता है।

अल्ट्रासाउंड-स्कैन्स का उपयोग दिल की परेशानियों का पता लगाने, साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों जैसे लिवर, किडनी और पेट की जांच करने में भी किया जाता है और कुछ प्रकार की बायोप्सी (biopsy) करते वक्त सर्जन का मार्गदर्शन करने में भी किया जाता है। अल्ट्रासाउंड-स्कैन(Ultrasound-scan) किस काम में आता है, इस बारे में और जानें।

अल्ट्रासाउंड-स्कैन के दौरान क्या होता है?

अधिकांश अल्ट्रासाउंड-स्कैन् होने में ज्यादा समय नहीं लगता है। आमतौर पर ये 15 से 45 मिनट के बीच हो जाता है। आपका अल्ट्रासाउंड-स्कैन सामान्य तौर पर हॉस्पिटल के एक्स-रे विभाग (X-ray department) में किया जाता है। इसे डॉक्टर, जो कि आपकी जांच रिपोर्ट देंगे, या फिर सोनोग्राफर (sonographer) के द्वारा किया जाता है। सोनोग्राफर(sonographer) अल्ट्रासाउंड करने में प्रशिक्षित एक विशेषज्ञ होता है जो डॉक्टर को समस्या की पहचान करने के लिए विवरणात्मक रिपोर्ट देगा।

कुछ तरह के अल्ट्रासाउंड-स्कैन (Ultrasound-scan) करवाने से पहले, आपको प्रक्रिया से पहले कुछ निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जा सकता है, जैसे:

  • पानी पीना और टेस्ट होने तक पेशाब के लिए ना जाना - ये आपके मूत्राशय को पूरी तरह से भरने के लिए किया जाता है और इसकी ज़रूरत आपके अजन्मे बच्चे या श्रोणि क्षेत्र (pelvic area) के स्कैन से पहले हो सकती है।
  • स्कैन से कई घंटे पहले कुछ भी ना खाना - इसकी ज़रूरत आपके पेट के स्कैन के लिए हो सकती है।

शरीर के किस हिस्से का स्कैन किया जाना है और क्यों, इस बात पर निर्भर करते हुए अल्ट्रासाउंड-स्कैन्स(Ultrasound-scans) कई प्रकार के हो सकते हैं। तीन मुख्य प्रकार ये हैं-

  • बाहरी अल्ट्रासाउंड (external ultrasound)
  • आंतरिक अल्ट्रासाउंड (internal ultrasound)
  • एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (endoscopic ultrasound)

बाहरी अल्ट्रासाउंड (external ultrasound)

बाहरी अल्ट्रासाउंड स्कैन (external ultrasound scan) का मुख्य तौर पर उपयोग आपके दिल या फिर आपके गर्भ में पल रहे बच्चे की जांच के लिए किया जाता है। ट्रांसड्यूसर(transducer) नाम का हाथ में पकड़े जाने वाला एक छोटा सा उपकरण आपकी त्वचा पर रखकर फिर शरीर के उस हिस्से के ऊपर घुमाया जाता है, जिसकी जांच होनी है।

आपकी त्वचा पर एक चिकना जेल (gel) लगाया जाता है। इस जेल की वजह से आपकी स्किन और सेंसर के बीच लगातार सम्पर्क बनाए रखते हुए ट्रांसड्यूसर (transducer) सरलता से बढ़ पाता है। ट्रांसड्यूसर (transducer) एक कम्प्यूटर और मॉनिटर से जुड़ा होता है।

आपकी त्वचा और शरीर से अल्ट्रासाउंड की तरंगे जांच के दौरान ट्रांसड्यूसर में भेजी जाती हैं, जो फिर आपके शरीर के हिस्से से परिवर्तित होकर मॉनिटर पर एक चित्र का रूप ले लेती हैं।

स्थिर चित्रों के अलावा, अल्ट्रासाउंड स्कैन (ultrasound scan) गतिविधि को भी दिखाता है जिसे वीडियों में रिकॉर्ड किया जा सकता है।

आपको सेंसर और अपनी त्वचा पर जेल( जो कि सामान्य तौर पर ठंडा होता है), के अतिरिक्त कुछ भी महसूस नहीं होगा। अगर आप यूट्रस (uterus) का स्कैन करवा रहे हैं तो पूरी तरह से भरे हुए मूत्राशय की वजह से आपको कुछ असुविधा हो सकती है।

आंतरिक अल्ट्रासाउंड (Internal ultrasound)

अंदरूनी जांच के ज़रिए आपका डॉक्टर आपके शरीर के अंदरूनी हिस्सों जैसे प्रोस्टेट ग्लैंड ( prostate gland), अंडाशय या गर्भाशय की जांच और बेहतर तरीके से कर पाता है। अल्ट्रासाउंड प्रोब (ultrasound probe) को आपकी योनि या मलाशय में रखा जाता है और फिर इससे छवियां (images) स्क्रीन पर भेजी जाती हैं। आंतरिक जांच (internal examination) में आपको कुछ असुविधा हो सकती है लेकिन आमतौर पर कोई दर्द नहीं होता है।

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड(Endoscopic ultrasound)

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (Endoscopic ultrasound) में एक लम्बी, पतली और लचीली ट्यूब जिसे एंडोस्कोप (endoscope) कहा जाता है, उसे आपके मुंह के ज़रिए आपके शरीर में डाला जाता है। इसके ज़रिए पेट, ग्रासनली (oesophagus) या फिर आपके सीने की लसीका ग्रंथियों (lymph nodes) जैसे हिस्सों की जांच की जाती है।

एंडोस्कोप (endoscope) में एक लाइट और सिरे पर एक उपकरण होता है। एक बार जब इसे शरीर में प्रविष्ट करवा दिया जाता है तो बाहरी अल्ट्रासाउंड(ultrasound) की तरह ही इसमें भी अल्ट्रासाउंड तरंगों का इस्तेमाल तस्वीरें लेने में किया जाता है।

आपको शांत रखने के लिए आमतौर पर दर्द की दवा या फिर सिडेटिव (sedative) दिया जाएगा, क्योंकि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (Endoscopic ultrasound) में आपको असुविधा हो सकती है या फिर आप बीमार हो सकते हैं।

कुछ अंगों की बारीकी से जांच करने के लिए, आंतरिक और एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (Endoscopic ultrasound) , बाहरी अल्ट्रासाउंड (external ultrasound) की तुलना में अधिक प्रभावशाली होते हैं, चूँकि इसमें एक वस्तु आपके शरीर के अंदर प्रवेश करती है तो उससे आपको थोड़ी ज्यादा दिक्कत सकती है और अंदरूनी रक्तस्त्राव जैसे दुष्प्रभाव का हल्का सा ख़तरा हो सकता है।

अन्य प्रकार के स्कैन

अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) की तरंगे हड्डी, हवा और गैस से नहीं गुज़र सकतीं, इसलिए ये शरीर के कुछ हिस्सों की साफ और विस्तृत तस्वीर नहीं बना सकती। उदाहरण के तौर पर, दिमाग, क्योंकि दिमाग हड्डी से घिरा होता है।

बेरियम टेस्ट(barium test), कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन(computerized tomography(CT) scans), और चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (MRI) स्कैन(magnetic resonance imaging(MRI))scans)

जैसे तरीकों से शरीर के उन हिस्सों की जांच की जा सकती है जिनके लिए अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग (ultrasound scanning) उपयुक्त नहीं है।

अल्ट्रासाउंड स्कैन का उपयोग किसलिए किया जाता है? (What is an ultrasound scan used for)

अल्ट्रासाउंड स्कैन (ultrasound scan) का उपयोग कई अलग-अलग तरीकों से किया जाता है, जैसे कि अजन्मे बच्चे को मॉनिटर करना, किसी स्थिति की पहचान करना या फिर सर्जन को किसी प्रक्रिया के लिए गाइड करना।

गर्भावस्था (Pregnancy)

एक गर्भवती स्त्री के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन (Ultrasound scan) सामान्य प्रक्रिया है। इससे गर्भ के अंदर पल रहे अजन्मे बच्चे की छवि मॉनिटर पर दिखाई देती है।

अधिकतर महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान दो अल्ट्रासाउंड स्कैन Ultrasound scans करवाने के लिए कहा जाता है।

पहला स्कैन (8 से 14वें हफ्ते के बीच) ये जानने में मदद कर सकता है कि बच्चा कब जन्म लेगा।

दूसरा स्कैन (सामान्य रूप से 18 और 20 हफ्ते के बीच) खासतौर से बच्चे के सिर और रीढ़ की हड्डी की संरचनात्मक विकृतियों को जानने के लिए किया जाता है।

हालांकि, गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) स्कैन कभी भी किया जा सकता है और इससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है।

स्थिति की जांच करना (Diagnosing conditions)

अल्ट्रासाउंड स्कैन्स शरीर के कई हिस्सों में होने वाली परेशानियों की जांच करने में मदद कर सकता है। जैसे कि

  • लिवर (cirrhosis)
  • गॉलब्लैडर (gallstones)
  • थायरॉइड ग्रंथि (thyroid gland)
  • लसिका ग्रंथि (lymph nodes)
  • अंडाशय (ovaries)
  • टेस्टिस (testes)
  • स्तन (breasts)

उदाहरण के तौर पर आपके शरीर के इनमें से किसी हिस्से में जो गांठ है वो सिस्ट है या फिर ट्यूमर।

अल्ट्रासाउंड आपके शरीर के इन हिस्सों की परेशानी जाँचने में भी काम आता है -

  • रक्त वाहिकाएं (aneurysm)
  • जोड़, लिग्मेंन्ट्स और टेंडन्स (ligaments and tendons)
  • त्वचा
  • आंखे

नवजात शिशुओं के मस्तिष्क, कूल्हे और रीढ़ की असमानताओं की जांच स्कैन से हो सकती है लेकिन 18 महीने तक खोपड़ी पूरी तरह से विकसित हो गई होती है, इसके बाद बिना सर्जरी के अल्ट्रासाउंड संभव नहीं है।

इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram (ECG))

अल्ट्रासाउन स्कैन (ultrasound scan) के ज़रिए दिल के नाप, आकार और दिल के संचालन की जांच की जाती है। उदाहरण के तौर पर, ये आपके दिल की संरचना, जैसे कि वॉल्व्स और दिल के चैम्बर्स सही तरह से काम कर रहे हैं या नहीं और आपका खून सामान्य रूप से प्रवाहित हो रहा है, इसकी जांच कर सकता है। इस तरह के अल्ट्रासाउंड स्कैन इकोकार्डियोग्राम (echocardiogram (ECG)) कहलाते हैं।

जन्म से पहले बच्चों में दिल की समस्या की जाँच करने के लिए ECG का उपयोग किया जाता है। इसे फीटल इकोकार्डियोग्राफ़ी (foetal echocardiography) कहा जाता है और ये सामान्य जांच एंटीनीटल एग्जामिनेशन (antenatal examinations) के दौरान की जाती है।

जन्मजात दिल की बीमारी के पहचान के बारे में और पढ़ें।

बायोप्सी (biopsy)

अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) का उपयोग विशेष प्रक्रियाओं जैसे बायोप्सी (biopsy) के दौरान डॉक्टरों का मार्गदर्शन करने के लिए किया जाता है। बायोप्सी (biopsy) में ऊतक (tissue) का एक नमूना जांच के लिए लिया जाता है। इसका इस्तेमाल ये जानने के लिए किया जाता है कि सर्जन सही स्थान पर काम कर रहे हैं या नहीं, खासतौर से ब्रेस्ट कैंसर की पहचान करते वक्त।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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