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लकवा (Paralysis)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

लकवा क्या है? (What is paralysis?)

लकवा यानी पैरलायसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक या इससे अधिक मांसपेशियां सही तरीके से कार्य करना बंद कर देती हैं और इससे शरीर के कई कार्य प्रभावित होते हैं।

लकवा आमतौर पर मांसपेशियों की समस्या के कारण नहीं होता है बल्कि मस्तिष्क द्वारा मांसपेशियों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नसों या रीढ़ की हड्डी में समस्याओं के कारण होता है। इसलिए, आमतौर पर लकवा से पीड़ित व्यक्ति की तंत्रिकाओं में किसी न किसी तरह का नुकसान होता है।

लकवा के प्रकार

लकवा क्षेत्रविशेष हो सकता है, जिसमें शरीर के विशेष हिस्से जैसे हाथ और चेहरा लकवाग्रस्त हो जाते है। साथ ही यह सामान्य भी हो सकता है जिसमें शरीर का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होता है।

विभिन्न प्रकार के लकवा के लिए अलग-अलग चिकित्सीय शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे:

  • मोनोप्लेजिया (monoplegia)- इसमें शरीर का केवल एक अंग लकवाग्रस्त होता है।
  • हेमीप्लेजिया (hemiplegia)- इसमें शरीर के एक तरफ का हाथ और पैर लकवाग्रस्त होते हैं
  • पैराप्लेजिया (paraplegia)- इसमें दोनों पैर और कभी-कभी श्रोणि (पेल्विस) और शरीर के कुछ निचले हिस्सों को लकवा मार जाता है
  • टेट्राप्लेजिया (tetraplegia)- इसमें दोनों बाह और पैर लकवाग्रस्त हो जाते हैं (इसे क्वाड्रिप्लेजिया भी कहा जाता है)

लकवा को कैसे वर्गीकृत किया जाता है, इसके बारे में और पढ़ें।

लकवा के कारण

लकवा आमतौर पर तीन आम कारणों से होता है:

कभी-कभी लकवा कई अन्य समस्याओं जैसे सेरेब्रल पाल्सी और गुलियन बेरी सिंड्रोम के कारण भी हो सकता है।

लकवा के कारण के बारे में और पढ़ें।

लकवा के साथ जीना (Living with paralysis)

आमतौर पर लकवा का प्रकार और इसका स्तर व्यक्ति के जीवन और रोज़मर्रा की गतिविधियों पर इसके प्रभाव को निर्धारित करता है।

जैसे, यदि एक व्यक्ति के शरीर का निचला अंग लकवाग्रस्त (पैराप्लेजिया) है तो वह व्हीलचेयर का इस्तेमाल करके अपना दैनिक कार्य कर सकता है और सक्रिय जीवन जी सकता है।

हालांकि बांह और पैर दोनों से लकवाग्रस्त (टेट्राप्लेजिया/क्वाड्रिप्लेजिया) को हमेशा किसी के मदद की जरूरत पड़ती है और वह बिना किसी देखभालकर्ता के नहीं रह सकता है।

लकवा के कारण कई दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं जैसे यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस (पेशाब को न रोक पाना) और बाउल इनकॉन्टिनेंस ( मलाशय से मल लीक हो जाना)। यह महिला और पुरुष दोनों में यौन क्रिया को प्रभावित करता है।

कुछ स्थितियों को छोड़कर आमतौर पर वर्तमान में लकवा का कोई इलाज मौजूद नहीं है। इसलिए स्थायी लकवा के मामले में इलाज का निम्न उद्देश्य होता है:

  • व्यक्ति को यथासंभव स्वतंत्र रूप से जीने में मदद करना
  • लकवा से उत्पन्न किसी भी संबंधित जटिलताओं, जैसे कि प्रेशर अल्सर (घाव जो ऊतक के प्रभावित क्षेत्र पर बहुत अधिक दबाव के कारण विकसित होते हैं) के बारे में बताना
  • मूत्राशय और आंत से जुड़ी परेशानियों के बारे में बताना
  • लकवा के कारण होने वाली ऐंठन और जटिलताओं का इलाज

मोबिलिटी एड, जैसे कि व्हीलचेयर और ऑर्थोस, लकवा से ग्रसित व्यक्ति की मदद कर सकते हैं।

मैनुअल व्हीलचेयर उन लोगों के लिए बने होते हैं जिनके शरीर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह स्वस्थ होता है। जबकि इलेक्ट्रिक ह्वीलचेयर उन लोगों के लिए डिजाइन किया होता है जिनके शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां कमजोर होती हैं या सभी चारों अंग लकवाग्रस्त होते हैं।

व्हीलचेयर और मोबिलिटी स्कूटर के बारे में और पढ़ें।

ऑर्थोस, व्हीलचेयर का एक विकल्प है। वे धातु या प्लास्टिक से बने ब्रेसेज़ हैं और एक अंग के कार्य में सुधार करने और मांसपेशियों की कमजोरी को दूर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

लकवा के इलाज और लकवा की जटिलताओं के बारे में और पढ़ें।

लकवा एक असामान्य और पीड़ादायक अनुभव है। लकवा से ग्रसित अधिकांश लोगों को अवसाद का भी अनुभव होता है।

हालांकि रिसर्च के अनुसार, लकवा से ग्रसित बहुत से लोग स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं।

लकवा के लक्षण (Symptoms of paralysis)

लकवा को कई प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है। जैसे कि यह लोकेलाइज्ड हो सकता है जो शरीर के विशेष हिस्से को प्रभावित करता है। साथ ही यह जनरलाइज्ड भी हो सकता है जो शरीर के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है।

लोकेलाइज्ड और जनरलाइज्ड लकवा (localised and generalised paralysis)

लोकेलाइज्ड पैरालिसिस में शामिल है:

  • फेशियल पैरालिसिस- आमतौर पर चेहरे के एक तरफ लकवा मारना
  • हाथ में लकवा मारना
  • वोकल कॉर्ड का लकवा-वोकल कॉर्ड्स ऊतक और मांसपेशियों के बैंड होते हैं जो बोलने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं; लकवा आमतौर पर केवल एक वोकल कॉर्ड को प्रभावित करता है जिसका अर्थ है कि व्यक्ति बोलने में सक्षम होता है लेकिन उनकी आवाज कर्कश या तेज हो सकती है

जनरलाइज्ड पैरालिसिस में शामिल है:

  • मोनोप्लेजिया (monoplegia)- इसमें केवल एक अंग लकवाग्रस्त होता है
  • हेमीप्लेजिया (hemiplegia)- इसमें शरीर के एक तरफ का हाथ और पैर लकवाग्रस्त होता है
  • पैराप्लेजिया (paraplegia)- इसमें दोनों पैरों में लकवा मारता है या कभी-कभी पेल्विस या शरीर के कुछ निचले अंग प्रभावित होते हैं
  • टेट्राप्लेजिया (tetraplegia/quadriplegia) (इसे क्वाड्रिप्लेजिया भी कहते हैं)- इसमें दोनों हाथ और पैर लकवाग्रस्त होते हैं

अस्थायी और स्थायी लकवा (Temporary and permanent paralysis)

लकवा या तो अस्थायी या स्थायी हो सकता है।

बेल पाल्सी अस्थायी लकवा का एक आम कारण है जिससे अस्थायी फेशियल पैरालिसिस हो सकता है। कभी-कभी, स्ट्रोक के बाद होने वाला लकवा भी अस्थायी हो सकता है।

गंभीर चोट जैसे टूटी हुई गर्दन के कारण होने वाला लकवा, आमतौर पर स्थायी होता है।

आंशिक या पूर्ण लकवा (Partial or complete paralysis)

लकवा हो सकता है:

  • आंशिक (partial)- इसमें कुछ मांसपेशियां काम नहीं करती हैं और सनसनाहट का अनुभव होता है, जैसे, व्यक्ति अपना एक पैर हिला सकता है जबकि दूसरा नहीं, या उसे ठंडा या गर्म जैसा सनसनाहट का अनुभव होता है
  • पूर्ण (complete)- इसमें व्यक्ति की कोई भी मांसपेशियां काम नहीं करती हैं और प्रभावित अंगों में सनसनाहट होती है

स्पास्टिक या फ्लैसिड पैरालिसिस (Spastic or flaccid paralysis)

लकवा निम्न तरह का हो सकता है:

  • स्पास्टिक (Spastic) - इसमें प्रभावित अंगों की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं या ऐंठन महसूस होता है और मांसपेशियों के हलचल पर व्यक्ति का नियंत्रण नहीं होता हैं (स्पास्टिक पैराप्लेजिया के बारे में पढ़ें)
  • फ्लैसिड (flaccid)- इसमें प्रभावित अंगों की मांसपेशियां बेडौल और कमजोर हो जाती हैं। फ्लैसिड पैरालिसिस में मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं।

स्पास्टिक पैरालिसिस से ग्रसित लोगों में ऐंठन (अनैच्छिक मांसपेशी संकुचन) के साथ मांसपेशियों में कमजोरी का अनुभव हो सकता है। जबकि फ्लैसिड लकवा से पीड़ित व्यक्ति को आमतौर पर ऐंठन के बिना मांसपेशियों में कमजोरी का अनुभव होता है।

मोटर न्यूरॉन डिजीज या सेरेब्रल पाल्सी जैसी समस्याओं के मामले में स्पास्टिक पैरालिसिस और फिर इसके बाद फ्लैसिड पैरालिसिस का अनुभव हो सकता है।

रीढ़ की हड्डी की चोट का स्तर (Levels of spinal cord injury)

रीढ़ की हड्डी की चोट का आकलन करते समय यह निर्धारित किया जाता है कि रीढ़ की हड्डी में चोट कहाँ पर लगी है, और इससे संबंधित तंत्रिका और मांसपेशियां कितनी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

रीढ़ की हड्डी को कशेरुक (डिस्क के आकार की हड्डियां जो रीढ़ और गर्दन को सहायता प्रदान करती हैं) के आधार पर एक संख्या और अक्षर प्रणाली का उपयोग करके मापा जाता है।

रीढ़ कुल 24 कशेरुकों से मिलकर बनी होती है, जिसमें निम्न शामिल हैं:

  • गर्दन में सात सर्विकल कशेरुक - इन्हें C1 से C7 के रूप में मापा जाता है
  • छाती क्षेत्र में 12 थोरैसिक कशेरुक - इन्हें टी 1 से टी 12 के रूप में मापा जाता है
  • पीठ के निचले हिस्से में पांच लंबर कशेरुका - इन्हें L1 से L5 के रूप में मापा जाता है

C1 और C7 के बीच रीढ़ की हड्डी में चोट से पीड़ित लोगों को सभी चार अंगों (टेट्राप्लेजिया) में लकवा लगने की संभावना होती है।

लकवा के स्तर और बाद में मांसपेशियों के कार्य में कमी इस बात पर निर्भर करती है कि चोट कितनी अधिक थी। जैसे:

  • C1-C4 रीढ़ की हड्डी में चोट से पीड़ित व्यक्ति के अंगों में बहुत कम या कोई भी हलचल या गति नहीं होगी और वह केवल अपने सिर और कंधों को हिला पाएगा।इसके अलावा उसे सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
  • C7 रीढ़ की हड्डी की चोट से पीड़ित व्यक्ति अपनी कोहनी को फैला सकता है और उसकी उंगलियों में कुछ गति हो सकती है
  • T2-T12 रीढ़ की हड्डी की चोट से पीड़ित व्यक्ति के शरीर के ऊपरी आधे हिस्से की मांसपेशियां पूरी तरह कार्य करती हैं लेकिन निचले अंगों की मांसपेशियां कार्य नहीं करती हैं और उन्हें व्हीलचेयर की आवश्यकता हो सकती है।
  • L1-L5 की चोट से पीड़ित व्यक्ति के कूल्हे, घुटने और पैरों में सीमित गति हो सकती है, लेकिन चलने फिरने के लिए व्हीलचेयर या वॉकिंग फ्रेम की जरूरत पड़ सकती है।

लकवा के कारण (Causes of paralysis)

लकवा स्ट्रोक, सिर पर चोट लगने, रीढ़ की हड्डी में चोट लगने और मल्टीपल स्क्लेरोसिस इन चार आम कारणों से होता है।

आघात (Stroke)

स्ट्रोक एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। यह आमतौर पर तब होती है जब मस्तिष्क में खून की आपूर्ति बाधित हो जाती है।

अन्य अंगों की तरह मस्तिष्क को सही तरीके से काम करने के लिए लगातार रक्त के आपूर्ति की जरूरत पड़ती है जिसमें ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की मात्रा होती है।

जब मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है तो मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं जिसके कारण मस्तिष्क डैमेज हो जाता है और व्यक्ति को लकवा लग जाता है।

स्ट्रोक के बारे में और पढ़ें।

सिर की चोट (Head injury)

सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मस्तिष्क डैमेज हो जाता है। मस्तिष्क की परत में खरोंच या चोट के कारण रक्त वाहिनियां और तंत्रिकाएं डैमेज हो जाती हैं।

सिर में गंभीर चोट लगने के कारण विशेष मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाला मस्तिष्क का एक हिस्सा डैमेज हो जाता है। इससे व्यक्ति लकवाग्रस्त हो जाता है। मस्तिष्क का बायां हिस्सा डैमेज होने पर शरीर के दायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाता है और मस्तिष्क का दायां हिस्सा डैमेज होने पर शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाता है।

सिर के गंभीर चोट के बारे में और पढ़ें।

रीढ़ की हड्डी में चोट

रीढ़ की हड्डी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का हिस्सा है। यह नसों का एक मोटा बंडल है जो मस्तिष्क से, गर्दन और रीढ़ से कशेरुक से जुड़ा होता है।

इसका मुख्य कार्य मस्तिष्क और शरीर से संकेतों को भेजना है। उदाहरण के लिए, रीढ़ की हड्डी तंत्रिका संकेतों से गुजरती है, जैसे कि गर्म या ठंडा महसूस होना।

यदि गर्दन या रीढ़ घायल हो जाती है, तो रीढ़ की हड्डी भी क्षतिग्रस्त हो सकती है। इसका मतलब है कि मस्तिष्क अब मांसपेशियों को संकेत नहीं भेज पाएगा। जिससे व्यक्ति लकवाग्रस्त हो सकता है।

जिस स्थान पर रीढ़ की चोट होती है, उस पर सबेस अधिक प्रभाव पड़ सकता है । इससे यह होता है कि लवका कितना गंभीर और व्यापक है। रीढ़ की चोट जितनी अधिक होगी, उतना ही अधिक लकवा होगा।

उदाहरण के लिए, रीढ़ के बीच की चोट से आमतौर पर पैराप्लेजिया (निचले अंगों का लकवा) हो सकता है। गर्दन की चोट, जैसे कि टूटी हुई गर्दन, आमतौर पर टेट्राप्लेजिया (सभी चार अंगों में लकवा, जिसे क्वाड्रिप्लेजिया भी कहा जाता है ) के कारण हो सकता है। साथ ही फेफड़े के सामान्य कार्य भी प्रभावित होते हैं, जिसका अर्थ है कि व्यक्ति को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर का उपयोग करने की आवश्यकता होगी ।

रीढ़ की हड्डी की चोट का स्तर कैसे निर्धारित किया जाता है, इसके बारे में और पढ़ें।

रीढ़ की हड्डी की चोट के सबसे आम कारण हैं:

  • मोटर वाहन दुर्घटना
  • काम करते समय दुर्घटना
  • खेल या अन्य प्रकार की गतिविधि के दौरान दुर्घटना
  • गिरना
  • चोट के बजाय बीमारी के कारण रीढ़ की हड्डी लकवाग्रस्त होना

पुरुषों और जवान लोगों में रीढ़ की हड्डी की अधिकांश चोटें होती हैं (जो सभी मामलों का 80% हिस्सा होती हैं।) सभी रीढ़ की हड्डी की चोटों का अनुमानित आधा हिस्सा उन लोगों में होता है जो 16-30 वर्ष की आयु के हैं।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस (multiple sclerosis)

मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी में तंत्रिका फाइबर प्रतिरक्षा प्रणाली से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से माइलिन नामक पदार्थ पर हमला करती है, जो तंत्रिका तंतुओं को घेर लेती है और तंत्रिका संकेतों के प्रसारण में मदद करती है। एमएस में, तंत्रिका तंतुओं के आसपास माइलिन क्षतिग्रस्त हो जाता है, जो मस्तिष्क से और आने वाले संदेशों को बाधित करता है। इसके परिणामस्वरूप लकवा लग सकता है।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस के बारे में और पढ़ें।

लकवा के कम सामान्य कारण (Less common causes of paralysis)

लकवा के कम सामान्य कारणों के बारे में नीचे दिया गया है।

कैंसर (Cancer)

कैंसर मस्तिष्क में विकसित होने वाले कैंसर, जैसे कि ब्रेन ट्यूमर, आमतौर पर शरीर के एक तरफ लकवा का कारण बन सकते हैं।

कैंसर (मेटास्टेसिस) शरीर के अन्य हिस्सों से मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में फैल सकता है, जिससे लकवा लग सकता है।

सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsi)

मस्तिष्क पक्षाघात सेरेब्रल पाल्सी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं (मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाले) हैं जो एक बच्चे की गति और समन्वय को प्रभावित करती हैं।

सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क क्षति के कारण होती है जो आमतौर पर जन्म के पहले या उसके बाद होती है। सेरेब्रल पाल्सी के कुछ संभावित कारणों में शामिल हैं:

  • गर्भावस्था के दौरान संक्रमण
  • समय से पहले जन्म या जन्म देने में परेशानी
  • बच्चे के मस्तिष्क में रक्तस्राव
  • बच्चे में असामान्य मस्तिष्क विकास

सेरेब्रल पाल्सी के सबसे गंभीर प्रकार को स्पास्टिक क्वाड्रिप्लेजिया कहा जाता है, इसमें व्यक्ति के सभी अंगों में मांसपेशियों में ऐंठन (स्पस्टीसिटी) इतनी अधिक होती है कि वे उनका उपयोग नहीं कर पाते हैं

सेरेब्रल पाल्सी के बारे में और पढ़ें।

फ्रेडरिक एटेक्सिया (Friedreich’s ataxia)

फ्रेडरिक एटेक्सिया एक दुर्लभ आनुवांशिक समस्या है। यह जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है जिसे GAA जीन कहा जाता है।

शरीर में उत्परिवर्तन के कारण फ्रेटाक्सिन नामक पर्याप्त प्रोटीन नहीं बनता है फ्रेटाक्सिन तंत्रिका कोशिकाओं के अंदर आयरन के स्तर को रेगुलेट करने में मदद करता है।

पर्याप्त फ्रेटास्किन की कमी के कारण तंत्रिका कोशिकाओं के अंदर आयरन और अन्य विषाक्त पदार्थ बनने लगते हैं और उन्हें डैमेज कर देते हैं।

फ्रेडरिक एटेक्सिया से पीड़ित कई लोग अपने पैरों में धीरे-धीरे लकवा बढ़ने का अनुभव करते हैं। उन्हें अंततः व्हीलचेयर या किसी अन्य प्रकार के मोबिलिटी एड्स का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।

गुलियन-बेरी सिंड्रोम (Guillain-Barre syndrome)

गुलियन-बेरी सिंड्रोम पेरिफेरल नर्वस सिस्टम के डैमेज होने के कारण होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है। पेरिफेरल नर्वस सिस्टम तंत्रिकाओं का नेटवर्क है जो शरीर की इंद्रियों और हलचल को नियंत्रित करता है।

गुलियन-बेरी सिंड्रोम में, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पेरिफेरल नर्वस सिस्टम की नसों पर हमला करती है, जिसके कारण उनमें सूजन हो जाती है।

इस तंत्रिका क्षति के कारण हाथ, पैर और चेहरे में सुन्नता और सनसनाहट का अनुभव होता है, जिससे हाथ, पैर और चेहरे पर अस्थायी लकवा लग सकता है।

गुलियन-बर्रे सिंड्रोम से ग्रसित अधिकांश लोग कुछ हफ्तों या महीनों में पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं और किसी अन्य संबंधित समस्या का अनुभव नहीं करते हैं।

गुलियन-बेरी सिंड्रोम के बारे में और पढ़ें।

लाइम रोग (Lyme disease)

लाइम रोग एक जीवाणु संक्रमण है जो संक्रमित टिक्स द्वारा लोगों में फैलता है।

टिक्स छोटे कीड़े होते हैं जो मनुष्यों सहित स्तनधारियों के रक्त को चूसते हैं। टिक्स बैक्टीरिया छोड़ते हैं जो तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे चेहरे का अस्थायी लकवा हो सकता है।

लाइम रोग के बारे में और पढ़ें।

मोटर न्यूरॉन रोग (Motor neurone disease)

मोटर न्यूरॉन रोग (MND) एक दुर्लभ, लाइलाज समस्या है। समय के साथ, मस्तिष्क और रीढ़ की नसें धीरे-धीरे कार्य (न्यूरोडीजेनेरेशन) करना बंद कर देती हैं।

तंत्रिका कोशिकाएं को मोटर न्यूरॉन कहा जाता है जो एमएनडी से प्रभावित होती हैं। मोटर न्यूरॉन्स विशेष तंत्रिका कोशिकाएं हैं जो स्वैच्छिक मांसपेशियों के हलचल को नियंत्रित करती हैं, जैसे चलना। एमएनडी प्रोग्रेसिव मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनता है,जिसके कारण शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है।

मोटर न्यूरॉन रोग के बारे में और पढ़ें।

स्पाइना बिफिडा (Spina bifida)

स्पाइना बिफिडा एक शब्द है जो जन्म दोष के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह रीढ़ और तंत्रिका तंत्र के विकास को प्रभावित करता है।

मायलोमेनिनगोकेले स्पाइना बिफिडा का सबसे गंभीर प्रकार है, जो हर 1,000 लोगों में से एक में होता है। यह तंत्रिका तंत्र को व्यापक नुकसान पहुंचाता है जिसके कारण निचले अंगों में आंशिक या स्थायी लकवा हो सकता है।

स्पाइना बिफिडा के बारे में और पढ़ें।

लकवा का निदान (diagnosing paralysis)

यदि कारण स्पष्ट हो तो लकवा का निदान आमतौर पर आवश्यक नहीं है। जैसे कि यदि स्ट्रोक के बाद लकवा लगा हो।

यदि लकवा के निदान के लिए जांच की आवश्यकता होती है, तो यह जांच मौजूदा कारणों पर निर्भर करेंगे।

लकवा का स्तर जानने के लिए आमतौर पर निम्न टेस्ट किए जाते हैं:

  • एक्स-रे - इसमें हड्डियों के सघन क्षेत्र का चित्र लेने के लिए शरीर के जरिए विकिरण की छोटी खुराक छोड़ी जाती है। एक्स-रे आपकी रीढ़ या गर्दन में समस्या का आकलन करने का एक उपयोगी तरीका हो सकता है
  • सीटी स्कैन - इसमें हड्डियों और ऊतकों का स्पष्ट चित्र लेने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है। सिर की गंभीर चोट या रीढ़ की हड्डी की चोट की मात्रा का आकलन करने के लिए सीटी स्कैन का उपयोग किया जाता है
  • एमआरआई स्कैन - इसमें शरीर के अंदर का विस्तृत चित्र लेने के लिए मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है। एमआरआई स्कैन मस्तिष्क क्षति या रीढ़ की हड्डी के नुकसान का पता लगाने में मदद कर सकता है
  • माइलोग्राफी - रीढ़ की हड्डी में तंत्रिका तंतुओं की अधिक विस्तार से जाँच करने का एक तरीका (कंट्रास्ट डाई नामक एक विशेष तरल पदार्थ को नसों में इंजेक्ट किया जाता है, जिससे वे एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन पर बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं)
  • इलेक्ट्रोमोग्राफी - इसमें मांसपेशियों और नसों में विद्युत गतिविधि को मापने के लिए सेंसर का उपयोग किया जाता है; आमतौर पर बेल्स पाल्सी (चेहरे का लकवा) के निदान के लिए इलेक्ट्रोमोग्राफी का उपयोग किया जाता है

लकवा का इलाज (treatment for paralysis)

स्थाई पैरालिसिस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। इलाज का उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाकर उसे लकवा के साथ जीवन जीने में मदद करना होता है।

इसके अलावा इलाज का अन्य उद्देश्य लकवा के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं और इससे जुड़ी जटिलातएं जैसे कि प्रेशर अल्सर के बारे में मरीज को बताना होता है।

लकवा के लिए इलाज के कई विकल्प और उपाय मौजूद हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है:

मोबिलिटी एड्स (mobility aids)

लकवा से ग्रसित व्यक्ति के लिए व्हीलचेयर जैसे बहुत से मोबिलिटी एड्स मौजूद हैं।

व्हीलचेयर (Wheelchairs)

व्हीलचेयर मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:

  • मैनुअल ह्वीलचेयर- यह ऐसे लोगों के लिए बनी होती है जिनके शरीर के ऊपरी अंगों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर-यह उन लोगों के लिए होती है जिनके शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां कमजोर होती है या जो लोग क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों में लकवा लगना) से ग्रसित होते हैं।

एक नए प्रकार की व्हीलचेयर भी मौजूद है जिसे स्टैंडिंग चेयर कहा जाता है। यह व्हीलचेयर की तरह काम करती है लेकिन इस पर व्यक्ति खड़ा भी हो सकता है। यह प्रेशर के दर्द के खतरे को विकसित होने से रोकती है। हालांकि स्टैंडिंग चेयर महंगी है स्टैंडर्ड चेयर से भारी है।

ऑर्थोसेस (Orthoses)

ऑर्थोसेस व्हीलचेयर का एक विकल्प है। इसमें प्लास्टिक या धातु के ब्रेसेज लगते होते हैं जो अंगों के कार्यों में सुधार लाते हैं और कमजोर मांसपेशियो को ताकत प्रदान करते हैं।

ऑर्थोसेस के निम्न उदाहरण हैं:

  • रिस्ट-हैंड आर्थोसेस- सही तरीके से काम करने वाली कलाई से लकवाग्रस्त ऊंगली में ताकत प्रदान करता है।
  • एंकल-फुट आर्थोसेस- यह ऐसे लोगों के लिए बना होता है जिनका निचला अंग कुछ काम करता है और वे अपने पैरों से टहलते समय अपने इन अंगों को हिला सकते हैं।
  • नी-एंकल-फीट आर्थोसेस-यह टेट्राप्लेजिया (शरीर के निचले अंगों में लकवा लकना, जिसे क्वाड्रिप्लेजिया भी कहा जाता है) से प्रभावित लोगों के लिए बना है। इस डिवाइस पर वे अपने घुटने और टखनों को स्थायी करके और टहलते समय अपने पैरों को स्विंग कर सकते हैं।

न्यूरोप्रोस्थेसिस एक नए प्रकार का ऑर्थोसिस है। न्यूरोप्रोस्थेसिस एक तकनीक पर आधारित है जिसे फंक्शनल इलेक्ट्रिकल स्टीमुलेशन (एफईएस) कहा जाता है। एफईएस में इलेक्ट्रोड (धातु से बनी छोटी डिस्क जो त्वचा से चिपकी होती है) का उपयोग किया जाता है और इससे पैर या बाहों की मांसपेशियों में इलेक्ट्रिकल करेंट दिया जाता है। ये धारएं मांसपेशियों को उसी तरह से गति करने के लिए उत्तेजित करती हैं जैसे कि मस्तिष्क में सामान्य रूप से होता है।

एफईएस उन लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है, जो सीधे पैरों में नसों के डैमेज होने जैसे कि मोटर न्यूरोन बीमारी और गुलियन-बेरी सिंड्रोम से ग्रसित होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि तंत्रिकाएं विद्युत धाराओं पर प्रतिक्रिया नहीं करती हैं।

ऑर्थोस का उपयोग शारीरिक जरूरत के अनुसार किया जाता है इसलिए यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता है। आप व्हीलचेयर और ऑर्थोसिस दोनों का उपयोग करने का निर्णय ले सकते हैं।

सहायक तकनीक (Assistive technology)

ऐसी कई सहायता तकनीक मौजूद हैं, जिनकी मदद से व्यक्ति खुद अपने पैरों पर चल सकता है और अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। जैसे:

  • पर्यावरण नियंत्रण इकाइयाँ - ध्वनि-सक्रिय नियंत्रण इकाइयाँ जिनका उपयोग आप अपने घर में प्रकाश व्यवस्था, तापमान या टेलीफोन जैसी चीज़ों को नियंत्रित करने के लिए कर सकते हैं
  • विशेष रूप से अनुकूलित कंप्यूटर - जैसे ध्वनि-सक्रिय कंप्यूटर, विशेष कीबोर्ड जिन्हें मुंह में रखी एक छड़ी का उपयोग करके नियंत्रित किया जा सकता है, और कर्सर सिर से जुड़ी एक लेजर बीम से नियंत्रित किए जा सकते हैं

ड्राइविंग (Driving)

आपके हाथ और पैरों की मांसपेशियों में चाहे भले ही कम गति या हलचल हो, लेकिन आप कार भी आसानी से चला सकते हैं।

लकवाग्रस्त व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार उपकरणों का इस्तेमाल करके कार को नियंत्रित कर सकता है। उदाहरण के लिए, पैडल को लेवर्स या इलेक्ट्रिकल स्विचिंग सिस्टम से बदला जा सकता है, और स्टीयरिंग व्हील को अनुकूलित किया जाता है ताकि आप अपने हाथों से इसे पकड़ने के बजाय अपनी कलाई या बाहों का उपयोग कर सकें।

मूत्राशय और आंत को नियंत्रित करना (Bladder and bowel management)

लगभग सभी प्रकार की रीढ़ की हड्डी की चोट और लकवा के कारण आंत और मूत्राशय की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आंत और मूत्राशय को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाएं रीढ़ की हड्डी के आधार पर स्थित होती हैं।

ज्यादातर लोग अपने मूत्राशय से पेशाब को खाली करने के लिए एक कैथेटर का इस्तेमाल करते हैं। कैथेटर एक पतली, लचीली ट्यूब होती है जिसे पेट में छेद के जरिए मूत्रमार्ग में डाला जाता है (लिंग या योनि द्वार पर जो पेशाब को बाहर निकलता है)। कैथेटर मूत्राशय से पेशाब को ड्रेनेज बैग में प्रवाहित करने में मदद करता है।

लकवाग्रस्त मूत्राशय को प्रबंधित करने के कई तरीके हैं। आप अपनी क्षमता, मूत्राशय की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भरता के आधार पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह ध्यान रखें कि मूत्राशय को नियमित रूप से खाली करना जरूरी है क्योंकि मूत्राशय में अधिक पेशाब जमा होने के कारण रीढ़ की हड्डी में चोट से ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया नामक गंभीर जटिलता हो सकती है।

यूरिन कैथेटेराइजेशन के बारे में और पढ़ें।

लकवाग्रस्त लोगों को अपनी आंत खाली करने में मदद के लिए इलाज के दो मुख्य विकल्प हैं:

  • बाउल रिट्रेनिंग - जिसका उद्देश्य मल की स्थिरता में सुधार करना और नियमित समय पर आंत को खाली करना है। साथ ही यह आपको अपने आंत को खाली करने के तरीकों को खोजने में मदद करता है।
  • एनीमा जैसे वैकल्पिक तरीके - जहां तरल आपके आंत्र में इंजेक्ट किया जाता है ताकि इसे खाली करने में मदद मिल सके
  • कोलोस्टॉमी- यह एक ऑपरेशन है जिसमें आंत का एक भाग मोड़ दिया जाता है और पेट की दीवार में एक द्वार से जोड़ दिया जाता है

बाउल इनकॉन्टिनेंस और कोलोस्टोमी के बारे में और पढ़ें।

न्यूरोपैथिक दर्द (Neuropathic pain)

न्यूरोपैथिक दर्द तंत्रिका के डैमेज होने के कारण होने वाला दर्द है।रीढ़ की हड्डी में चोट और अन्य तरह के लकवा से पीड़ित व्यक्ति को लंबे समय तक दर्द होता है जो चोट के कई हफ्तों , महीनों या सालों तक बना रहता है।

अन्य तरह के दर्द से अलग न्यूरोपैथी का दर्द पीड़ाहारी दवाओं जैसे पैरासिटामोल और इबुप्रोफेन से ठीक नहीं होता है।इसके लिए एमिट्रिप्टिलिन या प्रेगाबलिन जैसी दवाओं की जरूरत पड़ती है।

इन दवाओं के कई दुष्प्रभाव भी होते हैं। इसलिए यह पहचान करने में समय लगता है कि आपके लिए कौन सी दवा प्रभावी है और किस दवा से आपके लक्षणों में सुधार हो रहा है। मुंह सूखना, पसीना, चक्कर आना और आंखों से धुंधला दिखना इन दवाओं के मुख्य दुष्प्रभाव हैं।

एमिट्रिप्टिलिन का सेवन करने के दौरान व्यक्ति को आत्महत्या का विचार भी आ सकता है। यदि ऐसा होता है तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए या स्थानीय अस्पताल में जाना चाहिए।

यदि आप एमिट्रिप्टिलिन का सेवन कर रहे हैं तो अपने रिश्तेदार या करीबी दोस्त को बताएं और अपने व्यवहार में परिवर्तन होने पर उन्हें नोटिस करने के लिए कहें।

सांस लेने में तकलीफ (Breathing difficulties)

यदि आपके गर्दन के ऊपरी हिस्से की रीढ़ की हड्डी में चोट लगी है तो आपका डायफ्राम लकवाग्रस्त हो सकता है।डायाफ्राम एक पतली गुंबद के आकार की मांसपेशी है जो आपको अंदर और बाहर साँस लेने में मदद करती है।

जब डायफ्राम सांस लेने में मदद नहीं करता है तो आपको आपको वेंटिलेटर से साँस लेने में सहायता की आवश्यकता होगी। वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है जो फेफड़ों के दबाव को नियंत्रित करके डायाफ्राम के काम को आसान बनाती है।

यह आमतौर पर इन दो तरीकों से होता है

  • निगेटिव प्रेशर वेंटिलेटर-जहां वेंटिलेटर फेफड़े के चारों ओर एक वैक्यूम (हवा की कुल कमी) बनाता है, जिससे आपकी छाती फैलती है और हवा में खींचती है
  • पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेटर - जहां वेंटिलेटर फेफड़ों में सीधे ऑक्सीजन को भेजता है

पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेटर बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं क्योंकि वे आमतौर पर छोटे और अधिक सुविधाजनक होते हैं।पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेटर हो सकता है:

  • इनवेसिव - जहां गले में चीरा लगाया जाता है और श्वासनली (विंडपाइप) में एक ट्यूब डाली जाती है
  • नॉन-इनवेसिव - जहां एक ट्यूब नाक में डाली जाती है, या एक माउथपीस के जरिए हवा की आपूर्ति की जाती है

नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर सिस्टम से फेफड़े में संक्रमण जैसे निमोनिया होने का जोखिम होता है। हालांकि, नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर अधिक गंभीर रुप से लकवाग्रस्त लोग जिन्हें कि निगलने में कठिनाई होती है, उनके लिए उपयुक्त नहीं हैं।

फ्रेनिक नर्व स्टीमुलेटर वेंटिलेटर का एक अन्य विकल्प है। फ्रेनिक नर्व डायाफ्राम को नियंत्रित करती है। डिवाइस को छाती में शल्य चिकित्सा द्वारा प्रत्यारोपित किया जाता है और नियमित विद्युत आवेगों को फ्रेनिक तंत्रिका में भेजता है, जिससे डायाफ्राम सिकुड़ता और फैलता है और फेफड़ों में हवा भरता है।

खांसी कम होना (Reduced cough)

लकवा से पीड़ित व्यक्ति की खांसने की क्षमता कम हो जाती है। इसका कारण यह है कि कफ रिफ्लेक्स फेफड़ों पर दबाव पड़ने पर पेट और पसलियों के बीच की मांसपेशियों द्वारा बनता है। यदि इन मांसपेशियों को लकवा मार जाता है, तो किसी व्यक्ति की खांसने की क्षमता काफी कम हो सकती है।

यह एक गंभीर समस्या है क्योंकि किसी व्यक्ति के खांसने की क्षमता उसे बलगम और अन्य स्राव को फेफड़ों से साफ करने में मदद करती है। कम खांसने से फेफड़े जाम हो सकते हैं। जिससे फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

इसकी भरपाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक तकनीक को असिस्टेंट कफ कहा जाता है। इसमें एक रिश्तेदार या देखभालकर्ता शामिल होता है, जब आप खांसने की कोशिश करते हैं, तो आपके पेट के बाहर विपरीत ओर से धक्का देते हैं।

खांसने में मदद करने के लिए कई उपकरण भी उपलब्ध हैं। ये मांसपेशियों को गतिशील बनाते हैं और खांसने में मदद करते हैं।

इसके साथ ही आप फेफड़ों के संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए इन सावधानियों को अपनाएं।

हर दिन बैठें और लेटते समय कफ बनने की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करें।

नियमित रूप से खांसने की कोशिश करें

कफ को पतला करने के लिए खूब सारा पानी पिएं और इससे खांसने में आसानी होगी

धूम्रपान से परहेज करें और धूम्रपान करने वाले लोगों के निकट संपर्क में रहने से बचें

फ्लू टीकाकरण और न्यूमोकोकल टीकाकरण करवाएं। ये टीके इन्फ्लूएंजा और निमोनिया के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं

स्पास्टिसिटी और मांसपेशियों में ऐंठन (Spasticity and muscle spasms)

स्पास्टिसिटी एक चिकित्सीय शब्द है जिसका अर्थ है मांसपेशियों का असामान्य रूप से कठोर और संकरा हो जाना है। लकवा से ग्रसित बहुत से लोगों में स्पास्टिसिटी और अनैच्छिक मांसपेशी ऐंठन (जहां मांसपेशियों में ऐंठन और अकड़न होता है) विकसित होता है।

स्पास्टिसिटी और मांसपेशियों की ऐंठन आमतौर पर रीढ़ की हड्डी के खंड के कारण होती है, जो चोट 'मिसफायरिंग' के बिंदु से नीचे होती है और अंगों को असामान्य संकेत भेजती है।

कुछ मामलों में, स्पास्टिसिटी और मांसपेशियों की ऐठन फायदेमंद होती है। जैसे कि यदि आपका पैर आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हैं तो आपकी मांसपेशियों में ऐंठन आपके पैरों को आसानी से नियंत्रित कर सकेगी। कुछ लोग मांसपेशियों में ऐंठन के कारण अपने मूत्राशय और आंत को आसानी से खाली कर पाते हैं।

हालांकि दूसरे मामलों में स्पास्टिसिटी और मांसपेशियों में ऐंठन से काफी दर्द होता है। यह चलने फिरने की प्रक्रिया को बाधित करता है और दैनिक कार्यों को प्रभावित करता है। स्पास्टिसिटी और मांसपेशियों में ऐंठन के इलाज के बारे में नीचे बताया गया है।

मसल रिलैक्सेंट (Muscle relaxants)

आपको सबसे पहले मसल रिलैक्सेंट जैसे बेक्लोफेन, टिजानिडिन या डेंट्रोलीन नामक दवा का सुझाव दिया जाएगा। ये दवा टेबलेट के रूप में मौजूद है। कुछ गंभीर मामलों को छोड़कर डडायजेपैम जैसे सेडेटिव का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। हर दवा का कोई न कोई दुष्प्रभाव जरूर होता है।

बोटुलिनम टॉक्सिन (Botulinum toxin)

यदि मसल रिलैक्सेंट प्रभावी नहीं होती है तो लोकेलाइज्ड स्पैस्म के लिए बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटॉक्स) का इंजेक्शन दिया जाता है। यह मस्तिष्क को प्रभावित मांसपेशियों में संकेत भेजने से रोकता है और प्रभावी तरीके से कार्य करता है।

इंजेक्शन का प्रभाव आमतौर पर तीन महीनों तक रहता है। स्ट्रेचिंग और फिजिकल थेरेपी के साथ यह इंजेक्शन बेहतर तरीके से कार्य करता है।

इंट्राथेकल बेक्लोफेन थेरेपी (Intrathecal baclofen therapy)

इंट्राथेकल बेक्लोफेन थेरेपी एक अन्य संभावित उपचार है। इसमें सर्जिकल रूप से रीढ़ की हड्डी से जुड़े शरीर के बाहर एक छोटे पंप को प्रत्यारोपित किया जाता है।

पंप रीढ़ को सीधे बैक्लोफेन नामक दवा की नियमित खुराक देता है। यह कुछ तंत्रिका संकेतों को अवरुद्ध करता है जिससे मांसपेशियों में ऐंठन नहीं होती है।

सुझाव (Recommendations)

यदि आप लकवाग्रस्त हैं तो प्रेशर अल्सर से बचने के लिए आपको उपाय करना जरूरी है।

व्हीलचेयर या बिस्तर पर रेगुलर प्रेशर रिलिफ दबाव के दर्द को कम करने के लिए जरूरी है।

त्वचा की देखभाल और प्रेशर अल्सर (Skin care and pressure ulcers)

यदि आपको लकवा मार गया है तो त्वचा की देखभाल करना बहुत जरूरी है क्योंकि इसके कारण प्रेशर अल्सर का खतरा बढ़ सकता है।

प्रेशर अल्सर तब विकसित होता है जब लगातार दबाव के कारण शरीर के कुछ हिस्सों में खून की आपूर्ति रुक जाती है। खून ऑक्सीजन के साथ ही दूसरे पोषक तत्वों को भी पहुंचाता है जो ऊतकों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। लगातार खून की आपूर्ति न होने के कारण ऊतक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और अंत में नष्ट हो जाते हैं।

सामान्य रूप से गतिशील लोगों में आमतौर पर प्रेशर अल्सर विकसित नहीं होता है, क्योंकि शरीर की नियमित गति के कारण शरीर के किसी एक हिस्से में दबाव नहीं बन पाता है। जैसे कि यदि आप जब सो रहे होते हैं तो आपको लगता है कि आप अभी लेटे हैं लेकिन शायद रात में आप 20 बार करवट बदल चुके होते हैं।

यदि एक लकवाग्रस्त व्यक्ति नियमित चल फिर नहीं पाता है तो उसे बहुत जल्दी प्रेशर अल्सर की समस्या विकसित हो सकती है। कभी कभी कुछ घंटों के अंदर ही वह प्रेशर अल्सर से पीड़ित हो सकता है।

अपने पोजीशन को नियमित बदलना प्रेशर अल्सर से बचने का सबसे आसान उपाय है। जैसे कि व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को हर 15 से 30 मिनट में अपना पोजीशन बदलना चाहिए।

यदि आप बिस्तर पर हैं, तो आपको हर दो घंटे बाद अपने पोजीशन को बदल लेना चाहिए। यदि आप खुद पोजीशन नहीं बदल पाते हैं तो किसी रिश्तेदार या अपने देखभालकर्ता से मदद लें।

प्रभावित अंगों पर दबाव को कम करने के लिए कुशन, गद्दा या दबाव से राहत देने वाले अन्य डिवाइस का इस्तेमाल करें।

प्रभावित क्षेत्र की त्वचा को साफ और सूखा रखना बहुत जरूरी है। गीली त्वचा पर अधिक दबाव पड़ने का जोखिम रहता है।

प्रेशर अल्सर के लक्षणों को देखने के लिए नियमित अपनी त्वचा की जांच करें। प्रेशर अल्सर के कारण त्वचा आमतौर पर लाल, क्षतिग्रस्त हो जाती है या गर्माहट का अनुभव होता है। इसे स्पर्श करने पर कठोर लगता है।

जब तक त्वचा पूरी तरह ठीक न हो जाए तब तक प्रभावित त्वचा को साफ रखकर और अनचाहे दबाव से बचाकर इसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

यदि आपकी त्वचा क्षतिग्रस्त हो गई है या घाव बन गया है तो आपको सलाह के लिए अपने देखभालकर्ता टीम से संपर्क करना चाहिए।

प्रेशर अल्सर के बारे में और पढ़ें।

व्यायाम (Exercise)

यदि आप लकवाग्रस्त हैं तो आपको नियमित व्यायाम करना और अच्छी तरह फिट रहना बहुत जरूरी है। इसका निम्न कारण है:

  • आप जितना अधिक फिट रहेंगे, आपकी सेहत उतनी ही अच्छी रहेगी और जटिलताएं विकसित होने काखतरा कम होगा।
  • नियमित एक्सरसाइज करने से मूत्राशय और आंत की क्रियाएं बेहतर होती हैं।
  • व्यायाम करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं जिससे आपको व्हीलचेयर या ऑर्थोसिस का इस्तेमाल करने में आसानी होती है। साथ ही मोबिलिटी डिवाइस के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याएं जैसे कंधे और बांह में दर्द से बचाव होता है।
  • व्यायाम करने से मांसपेशियों में ताकत बनी रहती है जिससे प्रभावित अंग की मांसपेशियों बहुत अधिक कमजोर नहीं होती हैं।

दुर्घटना या चोट के कारण लकवाग्रस्त होने के कुछ दिन या हफ्तों बाद या लंबा इलाज कराने के बाद आपको फिजियोथेरेपिस्ट के पास भेजा जाएगा (शारीरिक व्यायाम के विशेषज्ञ)

आपके फिजियोथेरेपिस्ट आपको कई तरह के व्यायाम और गतिविधियों के बारे में बताएंगे। आपके लकवा के स्तर के आधार पर आपको निम्न व्यायाम और गतिविधियां करने के लिए कहा जा सकता है:

  • वेटलिफ्टिंग (शरीर के ऊपरी हिस्से में मजबूती के लिए व्यायाम)
  • हैंड साइक्लिंग (आर्म साइकिल का पैडर पैरों से मारने के बजाय उसे हाथों से चलाया जाता है)
  • घुड़सवारी
  • व्हीलचेयर बास्केटबाल
  • व्हीलचेयर रेसिंग
  • व्हीलचेयर टेनिस

यदि आपका लकवा काफी गंभीर है और आप हर तरह का व्यायाम नहीं कर पा रहे हैं तो आपको फंक्शनल इलेक्ट्रिकल स्टीमुलेशन (एफईएस) की सलाह दी जाएगी। एफईएस में आपके पैरों और हाथों में गति को बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिकल करेंट देने के लिए इलेक्ट्रोड (त्वचा पर रखी गई छोटी, धातु की डिस्क) का इस्तेमाल किया जाता है।

आप इलाज सेक्शन में एफईएस के बारे में और पढ़ सकते हैं।

अधिक लकवाग्रस्त लोग व्यायाम के लिए एफईएस बाइक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सामान्य इनडोर एक्सरसाइज बाइक की तरह होता है लेकिन इसमें अपने पैरों में कई इलेक्ट्रोड जोड़ने पड़ते हैं। जिससे आपको बाइक के पैडल को मोड़ने में मदद मिलती है।

लकवा से होने वाली समस्याएं

लकवा से पीड़ित लोगों को ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया, यौन समस्या और अवसाद जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया (Autonomic dysreflexia)

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया एक गंभीर जानलेवा समस्या है। यह छाती के बीच में रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण लकवा से पीड़ित लोगों को प्रभावित कर सकता है। यह आमतौर पर टेट्राप्लेजिया के मामले में देखा जाता है (जिसमें हाथ और पैर दोनों को लकवा मार जाता है, जिसे क्वाड्राप्लेजिया भी कहा जाता है)।

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया, ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या के कारण होता है, जो तंत्रिका तंत्र का हिस्सा है। यह शरीर के कई कार्यों जैसे रक्तचाप, पाचन औरसांस को नियंत्रित करता है।

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया तब होता है जब ऑटोइम्यून नर्वस सिस्टम के सामान्य कार्य में गड़बड़ी आ जाती है। तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क को संदेश भेजता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अड़चन से कैसे निपटना है। हालांकि, रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण मस्तिष्क में संदेश नहीं पहुंच पाता है।

संकेत अवरुद्ध होने के कारण रक्तचाप बढ़ जाता है और हार्टबीट घट जाता है जिससे ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम में समस्या उत्पन्न हो सकती है।

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया के लक्षण (Symptoms of autonomic dysreflexia)

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया के लक्षण निम्न हैं:

  • गंभीर और तेज सिरदर्द
  • डर और चिंता
  • तेज पसीना होना
  • छाती में जकड़न
  • त्वचा पर लाल धब्बे
  • दिल की धड़कन घटना (एक मिनट में 60 से कम धड़कन)
  • पुतली चौड़ा होना
  • रोंगटे खड़े होना
  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)

यदि इसका इलाज न कराया गया तो ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया के कारण चक्कर आ सकता है और मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव हो सकता है, जो काफी गंभीर होता है।

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया के कारण (Triggers of autonomic dysreflexia)

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया मूत्राशय से जुड़ी कई सामान्य कारणों से होता है, जैसे:

  • यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन- किडनी, मूत्राशय, मूत्रवाहिनी या मूत्रमार्ग का संक्रमण
  • मूत्राशय में अधिक पेशाब जमा होना
  • कैथेटर अवरुद्ध होना (मूत्राशय को खाली करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ट्यूब)
  • मूत्राशय की निकास थैली का भर जाना
  • मूत्राशय की पथरी
  • ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया को बढ़ाने वाले अन्य कारण हैं:
  • कब्ज
  • बवासीर
  • प्रेशर अल्सर
  • असामान्य रुप से बढ़ा पैर का नाखून
  • सनबर्न
  • यौन क्रिया
  • मासिक धर्म के दौरान होने वाली ऐंठन
  • प्रसव पीड़ा और बच्चे को जन्म देना
  • हड्डियां टूटना

ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया का इलाज (Treating autonomic dysreflexia)

यदि आपको ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्शिया है, तो आराम से बैठकर अपने सिर को सीधा ऊपर उठाएं। यदि संभव हो तो अपने पैर को भी नीचे रखें।

अपने लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है। सबसे आम कारण मूत्राशय की समस्या है, इसलिए आपको पहले अपने कैथेटर सिस्टम की जांच करनी चाहिए। यदि:

  • आपका कैथेटर अवरुद्ध या मुड़ जाता है
  • आपका ड्रेनेज बैग भरा हुआ है
  • कैथेटर पूरी तरह से ड्रेनेज बैग में डाला गया है
  • ड्रेनेज बैग मूत्राशय से अधिक बड़ा है

यदि आपका मूत्राशय भरा है या पेशाब करने में परेशानी होती है, और कैथेटर जुड़ा नहीं है, तो आपको तत्काल यूरिनरी कैथेटेराइजेशन की आवश्यकता हो सकती है।

यदि आपको मूत्राशय के कारण यह समस्या महसूस नहीं हो रही है, तो अपने आंत्र की जांच करें। अपनी उंगली का उपयोग करें या अपने प्रशिक्षित देखभालकर्ता से यह जांचने के लिए कहें कि आपके मल मार्ग में कोई कठोर मल है या नहीं। स्वास्थ्यकर्मी आमतौर पर चिकनाई वाले दस्ताने का इस्तेमाल करके कठोर मल की जांच करते हैं।

यदि आपके मूत्राशय या आंत्र के कारण आपको यह समस्या नहीं है, तो अपनी त्वचा पर प्रेशर अल्सर या असामान्य रूप से बढ़े नाखूनों की जांच करें। त्वचा या पैर की उंगलियों से किसी भी कपड़े को ढीला करें जो क्षतिग्रस्त दिखाई देते हैं।

यदि आपको कारणों का पता नहीं चल पा रहा है और उपर्युक्त सलाह से आपको लक्षणों को दूर करने में मदद नहीं मिल रही है, तो तुरंत अपनी देखभाल टीम से संपर्क करें।

अवसाद (Depression)

लकवा से पीड़ित व्यक्ति अचानक और असामान्य रूप से अवसाद से ग्रसित हो सकता है। बहुत से लोग दुख के कई चरणों से गुजरते हैं। इसके बारे में नीचे दिया गया है:

  • इनकार - शुरूआत में आप यह मानने से इनकार कर सकते हैं कि आपकी बीमारी का कोई इलाज नहीं है और आपको लगता है कि आप अपनी पुरानी जीवनशैली को जारी रख पाएंगे
  • क्रोध- आप दोस्तों, परिवार या स्वास्थ्य कर्मचारियों पर गुस्सा दिखा सकते हैं
  • सौदेबाजी - आप अपने डॉक्टरों के साथ सौदेबाजी करने की कोशिश कर सकते हैं या फिर किसी भी तरह के ‘चमत्कारिक इलाज’ के लिए कह सकते हैं।
  • अवसाद - आप अपने जीवन से नाखुश हो सकते हैं और महसूस कर सकते हैं कि आपकी स्थिति निराशाजनक है।
  • स्वीकृति - समय के साथ, ज्यादातर लोग लकवा के साथ जीना सीख जाते हैं।

लकवा से ग्रसित कुछ लोगों को अपनी स्थिति स्वीकार करने में समय लगता है और वे अवसाद से ग्रसित हो जाते हैं। अनुमान के अनुसार, स्थायी लकवा से ग्रसित लगभग 20-30% अवसाद से प्रभावित होते हैं।

अवसाद के किसी भी लक्षणों को अनदेखा न करें। इससे आपकी सेहत प्रभावित हो सकती है और यदि जल्द इलाज न कराया गया तो अवसाद के लक्षण भी जल्दी बदतर हो सकते हैं अवसाद के बारे में और पढ़ें।

लकवा के बाद अवसाद का अनुभव करने वाले लोग आमतौर पर समस्याओं से ग्रसित हो सकते हैं। स्टडी के अनुसार, कई वर्षों से पैराप्लेजिया (निचले अंगों में लकवा लगना) से पीड़ित 83% लोग औसत से ऊपर या औसत गुणवत्ता वाला जीवन जीते हैं।

यौन जीवन और प्रजनन क्षमता (Sex life and fertility)

लकवा आमतौर पर व्यक्ति के यौन जीवन और प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, भले ही आप गंभीर रुप से लकवाग्रस्त हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप बच्चे पैदा नहीं कर सकते या संभोग नहीं कर सकते।

लकवा कभी-कभी पुरुष को इरेक्शन प्राप्त करने और बनाए रखने और शुक्राणु स्खलन करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

इरेक्शन (Erection)

इरेक्शन दो प्रकार के होते हैं:

  • रिफ्लेक्स इरेक्शन- लिंग या शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्से को छूने के कारण होता है
  • साइकोजेनिक इरेक्शन-सेक्स से जुड़ी बातों को सोचने या चित्रों को देखने के कारण होता है

रिफ्लेक्स इरेक्शन को नियंत्रित करने वाली नसें आपकी रीढ़ के आधार पर स्थित होती हैं। गंभीर लकवा मारने के बाद भी आमतौर पर इस तरह के इरेक्शन की क्षमता बरकरार रहती है।

हालांकि, साइकोजेनिक इरेक्शन को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाएं रीढ़ की हड्डी से बहुत ऊपर स्थित होती हैं, इसलिए आंशिक और पूर्ण पैरालिसिस से ग्रसित पुरुषों में साइकोजेनिक इरेक्शन होने की संभावना नहीं होती है।

यदि आपको सिर्फ रिफ्लेक्श इरेक्शन होता है तो आप यौन संबंध बना सकते हैं। हालांकि आपको लंबे समय तक इरेक्शन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसे इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहा जाता है।

सिल्डेनाफिल (वियाग्रा) नामक दवा से इरेक्टाइल डिसफंक्शन का इलाज संभव है। यह दवा लिंग में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती है, और लिंग पंप एक वैक्यूम बनाता है और आपके लिंग में रक्त का प्रवाह बढ़ाने में मदद करता है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन के बारे में और पढ़ें।

स्खलन (Ejaculation)

आपके लकवे का प्रकार और स्थान आपके शुक्राणु के स्खलन को प्रभावित कर सकता है और नहीं भी।

यदि आप स्खलन नहीं कर पाते हैं, लेकिन आप बच्चे पैदा करना चाहते हैं, तो शुक्राणु का नमूना लेने के लिए कई तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। फिर इस नमूना का इस्तेमाल प्रजनन के इलाज में किया जाता है, जैसे कि अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (जिसमें एक ट्यूब के जरिए महिला के गर्भ में शुक्राणु का एक नमूना प्रत्यारोपित किया जाता है।)

इसके लिए पेनाइल वाइब्रेटरी स्टिमुलेशन (पीवीएस) को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एक विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए वाइब्रेटर को लिंग के नीचे रखा जाता है। वाइब्रेटर लिंग के तंत्रिका अंत को उत्तेजित करता है और स्खलन की क्षमता को बढ़ाता है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में आमतौर पर लगभग 10-30 मिनट लगते हैं।

चूंकि शुक्राणु के नमूने को जल्द से जल्द स्टोर करना जरूरी होता है इसलिए पीवीएस आमतौर पर फर्टिलिटी क्लिनिक के निजी कमरे में किया जाता है।

यदि पीवीएस सफल नहीं होता है, तो रेक्टल प्रोब इलेक्ट्रोइजैक्युलेशन (आरपीई) नाम की एक वैकल्पिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। आरपीई फिर से आमतौर पर फर्टिलिटी क्लिनिक में किया जाता है।

आरपीई के दौरान आपके मलाशय (पीछे के मार्ग) में एक इलेक्टिक प्रोब डाली जाएगी। प्रोब मलाशय में एक छोटा इलेक्ट्रिकल पल्स छोड़ती है, जो तंत्रिकाओं को उत्तेजित करती है और स्खलन को बढ़ाती है। फिर शुक्राणु को एकत्र किया जा सकता है।

महिलाएं (Women)

लकवा से ग्रस्त महिलाओं में आमतौर पर शारीरिक यौन और प्रजनन क्षमता प्रभावित नहीं होती है।

हालांकि बहुत सी महिलाओं में अपने शरीर के संरचना, मूत्राशय या आंत नियंत्रण प्रणाली के इस्तेमाल को लेकर चिंता के कारण सेक्स की इच्छा घट सकती है।

यौन रूप से उत्तेजित होने पर आपको अपनी योनि में चिकनाहट महसूस नहीं होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि रीढ़ के ऊपर स्थित तंत्रिकाओं के कारण ही चिकनाहट की प्रक्रिया होती है। आप इसके लिए कृत्रिम वाटर बेस्ड ल्यूब्रिकेंट, जैसे केवाई जेली का उपयोग कर सकती हैं। पेट्रोलियम जेली (वैसलीन) का उपयोग न करें क्योंकि यह आपकी योनि में जलन पैदा करेगा।

इस बात का कोई कारण नहीं है कि लकवाग्रस्त गर्भवती महिला का सामान्य प्रसव नहीं हो सकता।

टी 6 की रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण गर्भवती महिला को ऑटोनोमिक डिस्लेक्सिया विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।, इसलिए लक्षणों के बारे में पता होना जरूरी है (ऊपर देखें) और, यदि आप इनका अनुभव करती हैं, तो अपने डॉक्टर या दाई को तुरंत सूचित करें।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।