COVID-19: नवीनतम सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक करें

×
31 min read

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर या मनोग्रसित बाध्यता विकार

मेडिकल समीक्षा के साथ

स्वास्थ्य संबंधी सभी लेखों की चिकित्सीय सुरक्षा जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है। अधिक जानकारी के लिए हमारी सम्पादकीय नीति देखें।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

परिचय

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर(OCD) मानसिक स्वास्थ्य की एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति में जुनूनी विचार और उन विचारों के प्रति बाध्यता या ज़बरदस्ती वाला व्यवहार होता है।

जुनून या ओबसेशन एक अन चाहा, अप्रिय विचार, चित्र या जरूरत है जो बार-बार किसी व्यक्ति के दिमाग में आता रहता है और चिंता का कारण बन जाता है।

सामन्यतया, “जुनून” शब्द किसी खुशी मिलने वाली स्थिति या चीज को बताता है, पर ओसीडी(OCD) में ये जुनून बहुत अप्रिय और भयावह होता है।

बाध्यता बार-बार होने वाला वो व्यवहार या मानसिक काम है, जो उन्हें अपने जुनून को सच होने से रोकने के लिए पूरा करना ही पड़ता है। उदाहरण के लिए, किसी को अगर जरूरत से ज्यादा डर है कि उन्हें कोई बीमारी हो जाएगी, तो वो बाथरूम जाने के बाद हर बार नहाने की जरूरत महसूस कर सकते हैं।

ओसीडी(OCD) के लक्षण

ओसीडी के लक्षण मंद से तीव्र तक हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ओसीडी से ग्रस्त कुछ लोग इस तरह के मानसिक-बाध्यता के विकार वाले व्यवहार में एक दिन में एक घण्टे के लगभग समय लगा सकते हैं। दूसरों के लिए, यह स्थिति उनके पूरे जीवन पर ही काबू कर सकती है।

हालांकि, OCD सभी व्यक्तियों को अलग अलग तरह प्रभावित करता है, इस स्थिति वाले अधिकतर लोग व्यवहार और विचार के एक निश्चित क्रम में आते हैं। इस क्रम के चार मुख्य हिस्से हैं: 

  • जुनून - आपका दिमाग लगातार किसी जुनूनी डर या चिंता से जकड़ा हुआ है, जैसे ये डर कि आपके घर मे कोई घुस जाएगा
  • चिंता - यह जुनून एक बहुत अधिक चिंता और कष्ट का एहसास जगाता है
  • बाध्यता - आप अपनी उस चिंता या पीड़ा को कम करने के लिए, एक ज़बरदस्ती या बाध्य व्यवहार के क्रम को निश्चित कर लेते हैं, जैसे घर से बाहर निकलने से पहले ,खिड़की, दरवाज़ों को कम से कम तीन बार जांच लेना कि वो बंद हैं
  • अल्पकालिक या कुछ समय के लिए आराम - ये बाध्य व्यवहार चिंता से थोड़ी देर के लिए आराम देता है, पर जुनून और चिंता जल्दी ही वापस आ जाते हैं और ये क्रम या सायकल फिर शुरू ही जाता है

ओसीडी के बारे में और पढ़ें।

OCD क्यों होता है? 

बहुत से कारण OCD में योगदान देते हैं। सबूत कहते हैं, कि कुछ मामलों में यह स्थिति परिवारों में पीढ़ियों से पाई जाती है और दिमाग के विकास पर प्रभाव डालने वाले कुछ खास आनुवांशिक जीन्स से जुड़ी हुई है।

दिमाग के इमेजिंग अध्ययनों ने भी यह दिखाया है कि ओसीडी ग्रस्त लोगों के दिमाग में कुछ असामान्यताएं होती हैं, जैसे दिमाग के कुछ हिस्सों में ज्यादा हलचल या खून का अधिक बहाव होना। दिमाग के ये हिस्से तीव्र एहसासों और उनके प्रति हमारे प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।

अध्य्यन ये बताते हैं कि ओसीडी ग्रस्त लोगों के दिमाग में सेरोटोनिन (serotonin) का असंतुलन होता है। सेरोटोनिन(serotonin) एक न्यूरो ट्रांसमिटर(संवेदनाओं को पहुंचाने वाला) है जो दिमाग की सूचना को एक दिमागी कोशिका से दूसरी दिमागी कोशिका तक पहुँचाता है।

OCD के कारणों के बारे में और पढ़ें।

डॉक्टर से सलाह लेना

OCD से ग्रस्त लोग अक्सर अपने लक्षण डॉक्टर को बताने में झिझकते हैं क्योंकि उन्हें शर्मिंदगी या घबराहट महसूस होती है। वे अपने लक्षणों को परिवार और दोस्तों से भी छुपाने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, अगर आपको OCD है, तो शर्माने या घबराने की कोई बात नहीं है। OCD एक लंबे समय तक रहने वाली, डायबिटीज़ या अस्थमा की तरह की स्वास्थ्य स्थिति है और आप इससे ग्रस्त हैं तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है।

अगर आपको OCD है तो आपको अपने डॉक्टर के पास जाना चाहिए। शुरुआत में शायद वो आपसे बहुत से सवाल पूछेंगे कि आप कितनी बार सफाई करते हैं या क्या आपको चीजों को किसी खास क्रम में रखने की चिंता रहती है।

अगर आपके डॉक्टर को लगता है कि आपको OCD है तो आपको विशेषज्ञ से जांच कराने की जरूरत है।

ओसीडी के निदान के बारे में और पढ़ें।

ओसीडी का इलाज

अगर आप OCD से ग्रस्त हैं तो आपके इलाज की योजना इस बात पर निर्भर करेगी कि इस स्थिति ने आपके काम करने की क्षमता पर कितना असर डाला है।

आपके इलाज में आपके व्यवहर को बदल कर आपकी चिंता को कम करने के लिए व्यवहार थेरेपी और आपके लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए, दवाओं का उपयोग हो सकता है।

ओसीडी का इलाज सामान्यतया कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी(सी बी टी, CBT)  या एन्टी डिप्रेसेंट्स जिन्हें सेलेक्टिव सेरेटोनिन रीअपटेक इंहिबिटर्स (एस एस आर आई, selective seretonin reuptake inhibitors (SSRIs) कहते हैं, से होता है। सी बी टी (CBT) एक बातचीत की थेरेपी है जो आपके सोचने और व्यवहार के तरीके को बदल कर, आपकी समस्याओं को सुलझाने में मदद कर सकती है।

आपका ओसीडी कितना गंभीर है, इस बात के हिसाब से आपको मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दिखाने की जरूरत हो सकती है।

ओसीडी का इलाज कैसे होता है, इसके बारे में और पढ़ें।

जटिलतायें

OCD से पीड़ित कुछ लोगों में अवसाद या डिप्रेशन भी विकसित हो जाता है। आपको अवसाद की भावनाओं को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर उनका इलाज नहीं किया गया तो वो ज्यादा तीव्र ही जायेंगीं। बिना इलाज का अवसाद आपको ओसीडी के लक्षणों का सामना करना भी और मुश्किल बना देगा।

अगर आप पिछले कुछ महीनों से मुरझाया हुआ महसूस कर रहे हैं और आपको उन चीजों से कोई खुशी नहीं मिलती जिन्हें करना आपको पहले बहुत पसंद था, तब आपको अवसाद हो सकता है। अगर ऐसी स्थिति है तो आप को डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

OCD और अवसाद से ग्रस्त लोगों में कई बार ख़ुदकुशी की भावनाएं होती हैं।

अगर आप खुदकुशी करने जैसा या अवसादग्रस्त महसूस कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर या अपनी देखभाल करने वाली टीम से तुरन्त सम्पर्क करें।

दृष्टिकोण

अगर आपको OCD है, तो सबसे जरूरी काम जो आप कर सकते हैं, वो है मदद ढूंढना। बिना इलाज के, तो आपके ओसीडी के लक्षणों में सुधार की गुंजाइश नहीं है, बल्कि वो और ज्यादा बिगड़ ही सकते हैं। बिना इलाज के, आधे के लगभग लोगों में OCD के लक्षण 30 साल बाद तक भी रहते हैं।

इलाज करने से, OCD के लिए हालात काफी अच्छे हैं और बहुत से लोगों को पूरा आराम मिल गया है , या कम से कम लक्षणों में इतनी तो कमी आई है कि एक अच्छे जीवन का आनंद ले सकें।

लक्षण

OCD लोगों को अलग-अलग ढंग से प्रभावित करता है, पर सामन्यतया विचारों और व्यवहार का एक खास क्रम बनाता है।

OCD से ग्रस्त अधिकतर लोग व्यवहार और विचार के एक निश्चित क्रम का पालन करते हैं। इस क्रम के चार मुख्य चरण हैं: 

जुनून - जब आपका दिमाग लगातार किसी जुनूनी डर या चिंता से जकड़ा हुआ है, जैसे ये डर कि आपके घर मे चोरी हो जाएगी

चिंता -यह जुनून एक बहुत अधिक चिंता और कष्ट का एहसास जगाता है

बाध्यता - आप अपनी उस चिंता या पीड़ा को कम करने के लिए, एक ज़बरदस्ती या बाध्य व्यवहार के क्रम को निश्चित कर लेते हैं, जैसे घर से बाहर निकलने से पहले, खिड़की, दरवाज़ों को कम से कम तीन बार जांच लेना कि वो बंद हैं

अल्पकालिक या कुछ समय के लिए आराम - ये बाध्य व्यवहार चिंता से थोड़ी देर के लिए आराम देता है, पर जुनून और चिंता जल्दी ही वापस आ जाते हैं और ये क्रम या सायकल फिर शुरू ही जाता है

ऑब्सेसिव या जुनूनी विचार

लगभग हर किसी को जीवन के किसी बिंदु पर कई अनचाहे और अप्रिय विचार आते हैं, जैसे लगातार होने वाली ये चिंता कि उनका रोज़गार सुरक्षित नहीं है, या एक छोटा सा शक कि उनका साथी उन्हें धोखा दे रहा है।

अधिकांश लोग इन ख्यालों और चिंताओं को एक तरफ रख कर अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी जीने में कामयाब होते हैं। वे बार बार उन चिंताओं के बारे में नहीं सोचते जिनमें उनको पता है कि कोई तथ्य नहीं है।

हालांकि, अगर आप में लगातार कोई ऐसा अनचाहा और अप्रिय विचार है जो आपकी सोच पर इतना हावी हो जाता है कि आपके अन्य विचारों को रोक देता है, तब आपको ओबसेशन या जुनून हो सकता है।

 OCD से ग्रस्त लोगों के कुछ सामान्य जुनून हैं : 

  • खुद को या दूसरों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का डर - उदाहरण के लिए, आपको लगता है कि आप दूसरे पर हमला कर सकते हैं, हालांकि इस तरह के व्यवहार से आपको चिढ़ है
  • खुद को या दूसरों को गलती से नुकसान पहुंचाने का डर - उदाहरण के लिए, ये डर कि आप गलती से कुकर गैस पर जलता हुआ छोड़ देंगें और घर में आग लगा देंगें, जिससे आप बार बार रसोई के सामानों को जांचते रहते हैं कि वो बंद हैं
  • बीमारी, संक्रमण या किसी अप्रिय पदार्थ का डर
  • व्यवस्था या समरूपता(सिमेट्रि) की जरूरत - उदाहरण के लिए, आप चाहेंगें कि आपकी अलमारी में सभी डब्बों के लेबल एक तरफ मुंह करके हों

कोई ऐसा काम करने का डर जिससे आपके धार्मिक विश्वास को ठेस लग जाये

कंपल्सिव या बाध्यता का व्यवहार

जुनूनी विचारों के नुकसान को कम करने के लिए बाध्यता का व्यवहार पैदा होता है। हालांकि, यह व्यवहार या तो बहुत अधिक होता है या फिर वास्तविकता से बिल्कुल भी जुड़ा हुआ नहीं होता।

उदाहरण के लिए,  जिसको गन्दगी औऱ कीटाणुओं से संक्रमित होने का डर है, वो दिन में 50 बार अपने हाथ धोएगा, या वो जिसको अपने परिवार को नुकसान पहुंचाने का डर है, उसको एक काम को बार बार करने की जरूरत होगी ताकि वो नुकसान पहुंचाने वाले विचार को 'निष्क्रिय' कर सके। यह बाद वाली तरह का बाध्यता का व्यवहार OCD से ग्रस्त बच्चों में खास कर पाया जाता है।

OCD वाले अधिकतर लोग ये समझ लेते हैं कि इस तरह का बाध्यता व्यवहार नासमझी का है और इसका कोई तार्किक अर्थ नहीं निकलता, पर वो अपनी बाध्यता पर काम करना बंद नहीं कर सकते।

OCD वाले लोगों को प्रभावित करने वाले कुछ सामान्य बाध्यता पूर्ण व्यवहारों में शामिल हैं : 

  • सफाई
  • हाथ धोना
  • जांचना (जैसे कि, दरवाजे और खिड़की , या गैस और नल बंद है या नहीं) 
  • गिनना
  • क्रमवार या व्यवस्थित करना
  • इकट्ठा करना
  • आश्वासन चाहना
  • स्वीकार करने की जरूरत
  • शब्दों को धीरे धीरे दोहराना
  • एक ही विषय के बारे में बहुत लंबे देर तक चलने वाले/विचार
  • विचारों को 'निष्क्रिय' करना (जुनूनी ख़यालों का सामना करने के लिए)

कारण

ओसीडी (OCD) या ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (obsessive compulsive disorder) के ऊपर बहुत गहन शोध के बाद भी इसके होने का सटीक कारण पता नहीं है।

हालांकि, किसी व्यक्ति में OCD शुरू होने का कारण, उस व्यक्ति के आनुवांशिक, दिमागी, व्यवहारिक और आस-पास के माहौल के कारणों का मेल माना जाता है।

आनुवांशिक

जेनेटिक्स OCD के कुछ मामलों में जिम्मेदार मानी जाती है। शोध कहता है कि ओसीडी कुछ उन खास जीन्स ( आनुवंशिक पदार्थों की इकाई)  का परिणाम हो सकता है जो दिमाग के विकास को प्रभावित करते हैं।

हालांकि, किसी खास जीन को OCD से जोड़ा नहीं गया है, ओर ऐसे प्रमाण हैं जो कहते हैं कि यह स्थिति पीढ़ियों में पाई जाती है।  OCD से ग्रस्त व्यक्ति के परिवार में इसी बीमारी से दूसरे व्यक्ति के ग्रस्त होने की सम्भावना सामान्य से चार गुना ज्यादा होती है।

आनुवंशिक और परिवारों का अध्ययन यह बताता है कि, OCD कई अन्य स्थितियों से जुड़ा हुआ है,  जैसे : 

  • खिंचाव - मांस-पेशियों के एक समूह का तीव्र, बिना हमारी मर्जी के और बार- बार होने वाला खिंचाव या संकुचन
  • टॉरेट सिंड्रोम(Tourette’s syndrome)- एक स्थिति जिसमे व्यक्ति बार बार कोई हरकत या आवाज करता है

ओसीडी से ग्रस्त कुछ लोगों में टिक या टॉरेट सिंड्रोम (Tourette’s syndrome) भी होता है।

दिमागी असामान्यताएं

दिमागी इमेजिंग के अध्ययनों ने यह दर्शाया है कि OCD वाले लोगों में दिमाग के कुछ हिस्सों में असामान्यताएं होती हैं, जैसे खून का बहाव तेज होना, ज्यादा हलचल होना और दिमाग के केमिकल सेरोटोनिन (serotonin) का कम होनाI

दिमाग के प्रभावित हुए हिस्से वो हैं जो गहन या तीव्र भावनाओं और उनके लिए हमारी प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। अध्ययनों में , दिमाग की क्रियाएं सी बी टी (CBT) या कॉग्निटिव बेहेवियरल थेरेपी या सेलेक्टिव सेरेटोनिन री-अपटेक इंहिबिटर्स या एस एस आर आई (SSRIs) के सफल इलाज के बाद वापस सामान्य हो जाती हैं।

सेरेटोनिन(Serotonin)

सेरोटोनिन (serotonin) भी ओसीडी में भूमिका निभाता है। सेरोटोनिन एक न्यूरो ट्रांसमिटर(संवेदनाओं को पहुंचाने वाला) है जो दिमाग की सूचना को एक दिमागी कोशिका से दूसरी दिमागी कोशिका तक पहुँचाता है। सेरेटोनिन शरीर के बहुत से कामों, जैसे मूड या मन, चिंता, याददाश्त और नींद को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होता है।

सेरेटोनिन किस तरह से OCD में सहायता करता है, यह पूरी तरह से पता नहीं है, पर इस अवस्था के लोगों के दिमाग में यह रसायन कम मात्रा में प्रतीत होता है।

ये पाया गया है कि वो दवाइयाँ जो दिमाग में सेरेटोनिन का स्तर बढ़ाती हैं, जैसे कुछ खास तरह की एन्टी डिप्रेसेंट्स, वो OCD के लक्षणों का इलाज करने में असरदार होती हैं।

जीवन की घटनाएं

जीवन की कोई खास घटना जैसे किसी का बिछड़ना या परिवार का टूटना उन लोगों में ओसीडी को शुरू कर सकती है जिनमे पहले से ही यह प्रवृत्ति है। (उदाहरण के लिए, आनुवंशिक कारणों से)

कोई जीवन की घटना भी आपकी स्थिति को प्रभावित कर सकती है। उदाहरण के लिए, किसी प्रिय जन की मृत्यु आपके मन मे यह डर पैदा कर सकती है कि आपके परिवार में से किसी को कोई नुकसान हो सकता है।

तनाव, जो कि जीवन की घटनाओं की वजह से भी हो सकता है, OCD के लक्षणों को और बढ़ा सकता है। हालांकि, तनाव खुद से OCD नहीं पैदा कर सकता।

परवरिश और परिवार

OCD को परवरिश से जुड़ा हुआ नहीं समझा जाता ,पर जरूरत से ज्यादा लाड़ और सुरक्षा करने वाले माता-पिता होने जैसे कारणों से OCD होने की संभावना बढ़ जाती है।

कभी-कभी परिवार के सदस्य का OCD के रोगी के मामले में दखल देना बुरा साबित ही सकता है। उदाहरण के लिए,  OCD से ग्रस्त व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य से अपने किसी डर के बारे में बार बार आश्वासन मांग सकता है, जैसे कि क्या उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया है।

अगर परिवार का सदस्य लगातार यह सोच कर कि उनको / रोगी को अच्छा लगेगा, उनको आश्वस्त करता रहेगा कि हाँ, उन्होंने ऐसा कर दिया है, तो यह उनको मदद और इलाज करवाने से रोकेगा।

संक्रमण

कुछ बच्चों और युवा व्यक्तियों में स्ट्रेप्टोकोकल(streptococcal) बैक्टीरिया से संक्रमित होने के बाद OCD विकसित होने की रिपोर्ट्स आई हैं।

एक थ्योरी कहती है, शरीर के द्वारा बनाई गई एन्टी बॉडीज(संक्रमण से लड़ने वाले प्रोटीन) दिमाग के हिस्सों से प्रतिक्रिया करते हैं और OCD हो जाता है। संक्रमण खुद OCD नहीं पैदा करता, पर उन बच्चों में, जो पहले से ही इस स्थिति के लिए आनुवंशिक रूप से संवेदनशील हैं, ये OCD को बढ़ावा देता है।

जो OCD संक्रमण की वजह से शुरू हुआ है उसके लक्षण सामान्यतया काफी जल्दी(एक से दी हफ़्तों में) ही प्रकट हो जाते हैं।

निदान

अगर आपको OCD या ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के लक्षण हैं तो आपका डॉक्टर के पास जाना बहुत जरूरी है।

अगर यह स्थिति पहचान ली जाती है और इसका प्रभावी इलाज किया जाता है तो आपके रोज़मर्रा की जिंदगी पर इसका असर कम किया जा सकता है।

OCD से ग्रस्त लोग अक्सर अपने लक्षण डॉक्टर को बताने में झिझकते हैं क्योंकि उन्हें शर्मिंदगी या घबराहट महसूस होती है। वे अपने लक्षणों को परिवार और दोस्तों से भी छुपाने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, अगर आपको ये समस्या है , तो शर्माने या घबराने की कोई बात नहीं है। OCD एक लंबे समय तक रहने वाली, डायबिटीस या अस्थमा की तरह की स्वास्थ्य स्थिति है और आप इससे ग्रस्त हैं तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है

शुरुआती स्क्रीनिंग या जाँच

जब आप अपने डॉक्टर से मिलेंगे तो वो शायद बहुत से सवाल पूछेंगे।

ये सवाल जो फिनबर्ग-जोहर की जांच प्रश्नावली का हिस्सा हैं, यह निश्चित करने में मदद करेंगे कि क्या आपको OCD हो सकता है। पर सभी शुरूवती जांच के सवालों की तरह, जिनको OCD नहीं है वो इसमे सकारात्मक अंक ला सकते हैं।

आपसे पूछे जाने वाले सवाल नीचे दिए गए सवालों से मिलते जुलते हो सकते हैं: 

  • क्या आप बहुत ज्यादा साफ़-सफाई करते हैं?
  • क्या आप चीजों को बहुत ज्यादा जांचते हैं?
  • क्या आपको ऐसे विचार आते हैं जो आपको बहुत परेशान करते हैं और जिनसे आप छुटकारा चाहते हैं पर मिल नहीं पाता ?
  • क्या आपके रोज़मर्रा के काम खत्म होने में बहुत समय लगाते हैं?
  • क्या आप चीजों को एक खास क्रम में लगाने को लेकर चिंतित रहते हैं और या फिर फैले हुए सामान से परेशान हो जाते हैं?
  • क्या ये परेशानियां आपको तंग करती हैं?

मूल्यांकन

अगर आपकी शुरुआती जांच के नतीजों ने ये बताया कि आपको OCD है तो उसके लक्षणों की गंभीरता आपके डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य प्रोफेशनल द्वारा आँकी जाएगी।

आंकने के कई अलग तरीके हैं। सभी मे ये जानने के लिए कि आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी में ऑब्सेसिव कंपल्सिव विचारों और व्यवहार का कितना असर है, विस्तृत सवाल पूछे जाते हैं।

मूल्यांकन के दौरान, यह जरूरी है कि आप खुले और ईमानदार रहें क्योंकि सटीक और सच्चे उत्तर आपके सबसे सही इलाज को सुनिश्चित करेंगें।

ओसीडी की गंभीरता

OCD की गंभीरता इस बात से निश्चित की जाती है कि आपके लक्षणों ने आपकी रोज़मर्रा के काम करने की क्षमता पर कितना असर डाला है।

स्वास्थ्य कर्मचारी रोज़मर्रा के कामों में रुकावट को कार्य का रुकना मानते हैं। OCD को उसकी गंभीरता के आधार पर तीन प्रकारों में बाँटा गया है। ये हैं: 

  • हल्का या माइल्ड फंक्शनल इम्पैयरमेंट - ऐसी जुनूनी सोच और बाध्यता का व्यवहार जो दिन में एक घंटे से कम ले
  • बीच का या मॉडरेट फंक्शनल इम्पैयरमेंट -  ऐसी जुनूनी सोच और बाध्यता का व्यवहार जो दिन में एक से तीन घंटे तक ले ले
  • बहुत ज्यादा या सीवियर फंक्शनल इम्पैयरमेंट - ऐसी जुनूनी सोच और बाध्यता का व्यवहार जो दिन में तीन घंटे से ज्यादा ले

दूसरों के लिए मदद

कभी-कभी OCD से ग्रस्त व्यक्ति को परेशान ना करने के उद्देश्य से उनके मित्र और रिश्तेदार उनके अजीब व्यवहार को टोकते नहीं हैं या उस के लिए सहमति जताते हैं।

पर इसकी सलाह नहीं दी जाती क्योंकि यह व्यक्ति के ऑब्सेसिव कंपल्सिव व्यवहार को और पक्का करेगा। बेहतर है, कि उनको उनके अजीब व्यवहार के बारे में बताया जाए और उनको डाक्टरी सलाह लेने के लिए समझाया जाए।

इलाज

अगर आपको ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर है, तो आपका इलाज इस बात पर निर्भर करेगा कि आपकी स्थिति आपकी काम करने की क्षमता को कितना प्रभावित करती है।

जैसे-जैसे OCD बढ़ता है, वो अनचाहे और जुनूनी डर जो बहुत ही बैचेन कर देने वाले होते हैं, अलग-अलग लोगों मे अलग-अलग होते हैं। लोग अपने डर को नियंत्रित करने के लिए जो कम्पलसिव व्यवहार करते हैं, उस पर भी यही बात लागू होती है।

किसी व्यक्ति के जीवन पर OCD का कितना असर होता है, यह इन बातों पर निर्भर करता है: 

  • कंपल्सिव व्यवहार में खर्च किये गए समय की मात्रा पर
  • व्यवहार की तीव्रता या अधिकता पर
  • इसमे से कितना असल कामों की बजाय,  उनके दिमाग में होता है।

आपके इलाज का प्लान

आपके इलाज निमलिखित तरीक़ों से हो सकता है: 

बेहेवियरल थेरेपी - आपके व्यवहार का तरीका बदलने और आपकी चिंता को कम करने के लिए

दवाइयाँ - आपके लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए

स्वास्थ्य कर्मचारी रोज़मर्रा के कामों में रुकावट को कार्य करने में अक्षमता मानते हैं।

वो ओसीडी जो माइल्ड फंक्शनल इम्पैयरमेंट पैदा करता है, वो कॉग्निटिव बेहेवियरल थेरेपी(सी बी टी)  के छोटे कोर्स से ठीक हो जाता है। सी बी टी एक बातचीत की चिकित्सा है जो आपके सोचने और व्यवहार के तरीके को बदल कर, आपकी समस्याओं को सुलझाने में मदद कर सकती है।

अगर आपका OCD, बीच का या मोडरेट फंक्शनल इम्पैयरमेंट पैदा करता है, तो यह सलाह दी जा सकती है कि आप सी बी टी का एक ज्यादा गहन कोर्स करें या , सेलेक्टिव सेरेटोनिन री-अपटेक इंहिबिटर्स(एस एस आर आई) जो कि एक एंटी डिप्रेसेंट्स दवा है का कोर्स करें। आपको एक खास मानसिक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र भी भेजा जा सकता है।

अगर आपका OCD बहुत ज्यादा अधिक फंक्शनल इम्पैयरमेंट या काम-काज में रुकावट पैदा करता है, तो आपको मानसिक स्वास्थ्य सुविधा के पास CBT और SSRIs. के सम्मिलित कोर्स के लिए भेजा जाएगा।

इस समस्या से ग्रस्त बच्चों को सामान्य तौर पर बच्चों के इलाज का अनुभव रखने वाले किसी स्वास्थ्य कर्मचारी के पास भेजा जाता है।

बेहेवियरल थेरेपी

देखा गया है कि जो सी बी टी क्रमबद्ध तरीके से एक्सपोजर और रेस्पॉन्स प्रिवेंशन (graded exposure and response prevention, ई आर पी) करती है, वह OCD का असरदार इलाज है।

एक्सपोजर एंड रेस्पॉन्स प्रिवेंशन (ERP)

ई आर पी (ERP) में उन बहुत सी स्थितियों को पहचाना जाता है जो आपकी चिंता का विषय हैं। आपको सबसे कम चिंता देने वाले क्रम के हिसाब से उन्हें लगाया जाता है।

आप और आपका थेरेपिस्ट ऐसे कामों को पहचानेंगे जो आपको चिंता वाली परिस्थितियों में डालेंगे, और आपको उनका सामना करना होगा, पर उस दर्जे तक जहां तक आप उस चिंता को सहन कर सकें। आपको उन कामों को अपने चिंता कम करने वाले कंपल्सिव या बाध्यता वाले व्यवहार के बिना करना होगा। (वो हरकतें जो आमतौर पर आप ऐसी परिस्थिति का सामना करने के लिए करते हैं) 

हालांकि, ये डरावना लगता है पर OCD ग्रस्त लोग ये पाते हैं कि जब वो अपनी चिंताओं का बिना बाध्यता के व्यवहार से सामना करते हैं, तो वो चिंता एक या दो घंटे में पूरी तरह ग़ायब हो जाती है।

इसी तरह के सामना करने वाले काम दिन में तीन-चार बार दोहराने चाहिए। हर बार, चिंता कम होती जाएगी और कम देर के लिए रहेगी।

एक बार जब आप एक ऐसे परिस्थिति का सामना ठीक से कर पायेंगे, आप और मुश्किल काम की तरफ बढ़ पाएँगें, तब तक जब तक कि आप उन सारी स्थितियों पर क़ाबू पा सकें जो आपको चिंतित करती हैं।

माइल्ड या मॉडरेट दर्जे के ओसीडी वाले लोगों को सेशन के बीच मे स्वयं-इलाज वाली इक्स्पोज़र अभ्यास को मिला कर लगभग 10 घंटे के लिए थैरेपिस्ट की जरूरत होती है। वो लोग जो ज्यादा गम्भीर OCD से ग्रस्त हैं, उन्हें, सी बी टी के अधिक गहन कोर्स की जरूरत होती है जो 10 घंटो से ज्यादा चलता है।

दवाइयां

अगर आपकी सी बी टी हल्के(माइल्ड) ओसीडी का इलाज नहीं कर पाती, या आपको मध्यम(मोडरेट) या तेज(सीवियर) ओसीडी है, तो आपको दवाओं की जरूरत पड़ेगी । जिन अलग अलग तरह की दवाओं की आपको जरूरत पड़ेगी उनके बारे में नीचे बताया गया है : 

सेलेक्टिव सेरेटोनिन री-अपटेक इंहिबिटर्स(एस एस आर आई) 

सेलेक्टिव सेरेटोनिन री-अपटेक इंहिबिटर्स (Selective serotonin reuptake inhibitors (SSRIs)) एक तरह के एंटी डिप्रेसेंट्स है, जो आपके दिमाग में सेरेटोनिन रसायन के स्तर को बढ़ा देता है।

सेरेटोनिन एक न्यूरो ट्रांसमिटर है जिसका इस्तेमाल दिमाग सूचना को एक दिमागी कोशिका से दूसरी तक पहुंचाने में करता है।

वो एस एस आर आई (SSRIs) जो आप ले सकते हैं में आते हैं: 

  • फ्लुओक्सेटीन (fluoxetine)
  • फ्लुवोक्सामाइन (fluvoxamine)
  • पैरोक्सेटाइन (paroxetine)
  • सेरट्रलाइन (sertraline)
  • सीटेलोप्राम (citalopram)
  • एसिटेलोप्राम (escitalopram)

इससे पहले कि आपको कोई फायदा नजर आए, आपको SSRI सामान्यतया 12 हफ्तों तक लेनी होगी। मोडरेट या मध्यम OCD से लेकर सीवियर या तेज OCD वाले लोगों को SSRI कम से कम 12 हफ्तों तक लेनी होती है। इस समय के बाद आपकी स्थिति की फिर से समीक्षा की जाती है और अगर आपकी समस्या बहुत कम या बिल्कुल ठीक हो जाती है तो आप दवा लेना बंद कर सकते हैं।

SSRI के संभावित दुष्प्रभावों में सर दर्द और जी मिचलाना आते हैं। हालांकि, ये भी कुछ हफ्तों में गुजर जाने चाहिए।

एक छोटी सी सम्भावना यह भी है कि SSRI आपकी चिंता को बढ़ा सकते हैं, जिससे आपको ख़ुदकुशी के विचार या खुद को नुकसान पहुंचाने की इच्छा हो सकती है।

अगर आप SSRI ले रहे हैं और आपको ख़ुदकुशी या खुद को नुकसान पहुंचाने के खयाल आते हैं तो अपने निकटतम अस्पताल या फिर डॉक्टर से तुरंत सम्पर्क करें।

आप SSRI ले रहे हैं, ये बात अपने मित्र या क़रीबी रिश्तेदार को बताना मददगार सकता है। उनको ये कहें कि अगर आपके व्यवहार में कुछ बदलाव देखते हैं, या उनको आपके तौर-तरीकों को देख कर फ़िक्र हो रही है, तो आपको बताएं।

जब आप SSRI लेना बंद कर देंगे तब आपको उसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, इसलिये आपको अपनी दवा लेना अचानक बंद नहीं कर देनी चाहिए। अगर आपको दवा की जरूरत नहीं है तो आपका डॉक्टर धीरे-धीरे खुराक कम कर देगा।

अन्य संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए, दवा के साथ आने वाले सूचना के पर्चे या फिर(दवा की सूचना) ऊपर की टैब को देखें।

कुछ लोग किसी एक SSRI को ज़्यादा अच्छे से रेस्पॉन्स देते हैं। अगर आप एक SSRI की पूरी निर्धारित खुराक तीन महीने तक लेते हैं और फिर भी कोई फायदा नहीं है, तो आपको दूसरी तरह का SSRI दिया जा सकता है।

OCD के लिए दिए जाने वाले SSRI की खुराक डिप्रेशन या अवसाद में दी जाने वाली खुराक से सामान्यतया ज्यादा होती हैं। इस बात के प्रमाण हैं कि SSRI की कम मात्रा का कोई प्रभाव नहीं होता है।

क्लोमिप्रामिन(Clomipramine)

क्लोमिप्रामिन(Clomipramine) एक त्रिचक्री या ट्राई साइक्लिक एन्टी डिप्रेसेंट् (टी सी ए) है जो SSRIs के विकल्प में इस्तेमाल किया जा सकता है। TCA को सामान्यतया SSRI की जगह इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि इनके दुष्प्रभाव ज्यादा होते हैं। हालांकि, ये उन OCD ग्रस्त लोगों के इलाज में असरदार होते हैं जो SSRI को झेल नहीं पाते।

क्लोमिप्रामिन(Clomipramine) के संभावित दुष्प्रभावों में आते हैं : 

  • सूखा मुंह
  • कब्ज
  • डायरिया
  • धुँधला दिखाई देना
  • चक्कर
  • थकान (बहुत ज्यादा थका महसूस करना)

क्लोमिप्रामिन उन लोगों के लिए उचित नहीं है जिन्हें : 

  • कम रक्तचाप हो
  • आरहयथेमिया(दिल की अनियमित धड़कनें) 
  • हाल ही में दिल का दौरा पड़ा है
  • अगर आप किसी हृदय सम्बन्धी रोग (वो स्थिति जो आपके ह्रदय और खून की नलियों को प्रभावित करती है)  के खतरे पर हैं तो आपका डॉक्टर आपका इलाज शुरू करने से पहले, आपको रक्तचाप की जांच और ई सी जी या इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम कराने के लिए बोलेंगे ।

जैसा कि SSRI के साथ होता है, 12 महीने का क्लोमिप्रामिन (Clomipramine) के कोर्स का परामर्श दिया जाता है, जिसके बाद आपके लक्षणों की फिर से समीक्षा की जाएगी।

अन्य संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए, दवा के साथ आने वाले सूचना के पर्चे या फिर(दवा की सूचना) ऊपर की टैब को देखें।

अगर एस एस आर आई या क्लोमीप्रमाइन बेअसर साबित होते हैं तो आपको मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास भेजा जाएगा।

सहायक समूह

OCD से ग्रस्त बहुत लोग सहायक समूहों को मददगार पाते हैं, क्योंकि वो  : 

  • आपको सांत्वना दे सकते हैं
  • अकेलेपन के उस एहसास को कम करते हैं, जो आपको हो सकता है
  • आपको दूसरों से मिलने -जुलने का मौका देते हैं
  • सहायक समूह आपके दोस्तों या परिवार के सदस्यों, जो आपकी इस स्थिति से प्रभावित हुए हो सकते हैं, को भी जानकारी और सलाह दे सकते हैं

सर्जरी

जब बाकी सब इलाज बेअसर रहे, तब सर्जरी सीवियर ओसीडी के इलाज करने का आखिरी तरीका है। इसके बारे में तब तक नहीं सोचना चाहिए, जब तक किसी को : 

अलग-अलग तरह के SSRI के कम से कम दो पूरे कोर्स या क्लोमिप्रामिन (Clomipramine) की निर्धारित खुराक नहीं मिली हो

रिफ्रैक्टरी OCD( ऐसा ओसीडी जो इलाज से हिक नहीं होता) के लिए इलाज, साथ ही एन्टी सायकोटिक दवाएँ या SSRI या मूड को स्थिर करने वाली दवाओं की बढ़ी हुई खुराक से इलाज ना किया गया हो

घर और क्लीनिक, दोनो जगह असफल CBT ट्रीटमेंट ना मिला हो

एब्लेशन न्यूरोसर्जरी (Ablation neurosurgery)

OCD से ग्रस्त बहुत ही कम लोगों को न्यूरोसर्जरी की जरूरत होती है। एब्लेशन सर्जरी के दौरान, एक न्यूरोसर्जन (वो शल्य चिकित्सक जो दिमाग और तंत्रिका तंत्र का विशेषज्ञ होता है) एक बिजली के करंट या पल्स रेडिएशन का इस्तेमाल करके लिम्बिक सिस्टम के एक छोटे से हिस्से को जला देता है। लिम्बिक सिस्टम दिमाग के अंदर की वह संरचना है जो दिमाग के कुछ बहुत महत्वपूर्ण कामों, जैसे तीव्र और ऊंचे श्रेणी की भावनाओं, याददाश्त और व्यवहार के लिए जिम्मेदार है।

OCD के लिए न्यूरोसर्जरी का कभी नियंत्रित परीक्षण नहीं किया गया है। हालांकि, रॉयल कॉलेज ऑफ साइकियाट्रिस्ट ने एक सर्वेक्षण के हिसाब से ये पाया है कि OCD की सर्जरी कराने वाले 478 लोगों में से आधे से ज्यादा ने यह महसूस किया कि वे बेहतर हुए हैं। हालांकि, 15% को लगा कि उन्हें कोई असर नहीं हुआ या फिर पहले से बुरा असर हुआ है।

इसके अलावा, OCD की सर्जरी में दीर्घकालिक और अल्पकालिक, दोनों तरह के गंभीर और स्थायी दुष्प्रभावों का खतरा बना रहता है, जैसे याददाश्त चली जाना और दिमागी असमंजस होनाI

गहन दिमागी स्टिमुलेशन(Deep brain stimulation)

गहन दिमागी उद्दीपन एक अन्य सर्जरी वाला विकल्प है जो भविष्य में OCD के इलाज के लिए ज्यादा इस्तेमाल हो सकता है। फिलहाल, ये सिर्फ मेडिकल शोध की तरह इस्तेमाल होता है।

गहन दिमागी स्टिमुलेशन में आपके सीने में एक बिजली से चलने वाला जेनेरेटर और दिमाग में इलेक्ट्रोड्स(छोटी धातु की बनी प्लेट) लगा देते हैं। आपके सीने के उपकरण से आपके दिमाग के इलेक्ट्रोड्स में इलेक्ट्रिक या विद्युत सिग्नल भेजते हैं।

OCD के लिए गहन दिमागी स्टिमुलेशन से जुड़े कुछ छोटे अध्ययनों में लक्षणों में सुधार की सूचना मिली है। हालांकि, इस तकनीक से जुड़े कुछ गंभीर दुष्प्रभाव हैं जिसमे संक्रमण और दिमाग के अंदर खून का रिसाव आते हैं।

सच्ची कहानियां

डायना को 26 साल से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर था। अब OCD-UK के लिए काम करते हुए वो यहाँ अपने अनुभव साझा करती हैं कि किस तरह उन्होंने आखिरकार इस डिसऑर्डर पर काबू पा ही लिया।

"इस बीमारी की मेरी सबसे पहली याद तब की है जब मैं आठ साल की थी। लक्षण थे,  फुटपाथ की दरारों पर चढ़ने का डर। मुझे नहीं पता क्यों, पर अगर मैं यह करती थी, तो यह मुझे शारीरिक रूप से असुविधाजनक लगता था।”

"यह एक विधान की तरह था। दूसरा विधान था कि, अगर मैंने अपनी प्रार्थनाएं सम्मान और ईमानदारी से नहीं की तो मेरी माँ कार दुर्घटना में मर सकती हैं। एक बच्चे के रूप में मैंने अपने ऊपर एक अन्य व्यक्ति के जीवन की इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी ले ली थी।”

" बहुत से लोग हाथ धोने और चीजों को क्रम से लगाने के बारे में जानते हैं, पर बहुत से लोग नहीं जानते कि ओसीडी एक भयानक मोड़ भी ले सकता है, जहां आपको ये डर होता है कि आप अपने खुद के बच्चों को बहुत हिंसात्मक ढंग से नुकसान पहुंचा सकते हैं।”

"जब मेरा चौथे शिशु का जन्म हुआ तब मुझे बहुत से दखल देने वाले खयाल आने लगे की मैं नींद में बच्चों के कमरे में जाती थी, उनके सोने के कपड़ों से डोरियां निकालूंगी और हर एक का गला घोंट दूंगी। इससे गुजरना बहुत ही भयावह था क्योंकि मुझे पता नहीं था कि मैं ये करने वाली थी या नहीं।”

" OCD वाले लोग खतरनाक नही होते और वो नुकसान नहीं पहुँचाते, पर मैं हमेशा थकी हुई रहती थी।

"यह जुनून था: ये बाध्यता इन विचारों से आने वाले डर और दर्द को कुछ कम करने का प्रयास थी। मैं बिस्तर से उठ कर, उनके ड्रेसिंग गाउन को ढूंढ कर उनकी डोरियां निकाल कर, जितनी ज्यादा हो सकें उतनी गांठें लगा देती थी, ताकि मैं उन डोरियों को उनके गले मे ना बांध सकूँ।

तब मैं बिस्तर पर जाती थी, पर तब भी मैं सो नहीं पाती थी। मैं फिर बिस्तर से उठती थी, डोरियां लेती थी, उन्हें एक बैग में रखती थी, बैग को सील बन्द करके, उस बैग को एक ऊंची अलमारी में रख देती थी। यह थोड़ा आराम देता था, पर यह फिर भी बहुत डरावना था।”

“अपने डॉक्टर से मिलने के बाद, मैं एक सलाह देने वाले मनोचिकित्सक से मिली।मुझे एंटी डिप्रेसेंट्स पर रखा गया जिससे मुझे बहुत ज्यादा मदद मिली। दवाओं ने मुझे ठीक से सोने और खाने की ताकत दी, जिससे मैं कॉग्निटिव बेहेवियरल थेरेपी करवा पायी, जोकि हमारे वर्तमान से जुड़ा हुआ एक मनोवैज्ञानिक इलाज है। मैंने अपने ठीक होने में अपना पूरा मन लगाया।”

"मैं अक्सर खुद से पूछा करती थी कि मेरी याददाश्त के साथ क्या गलत हो रहा है और मैं क्यों याद नहीं रख पाती हूँ कि क्या मैंने गैस बंद कर दी है या नहीं , जबकि मैं उसे 10 सेकंड पहले 13 बार जांच चुकी होती थी। सच तो यह है कि ओसीडी वाले लोगों की याददाश्त एकदम सटीक होती है पर उनके पास जो नहीं होता, वो है अपनी याददाश्त में भरोसा। CBT इसे दुबारा वापस लाने में मदद कर सकती है। "

पारिवार और दोस्त

OCD या ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर से ग्रस्त बहुत से लोग अपनी कुछ चिंताओं और बाध्यताओं के सूत्र अपने बचपन मे पा सकते हैं।

औसतन, ये बाध्यताएं किसी व्यक्ति के जीवन में बहुत ज्यादा दखलंदाज़ी तब देना शुरू करती हैं जब वो 17-20 साल के होते हैं। हालांकि, ये जल्दी से जल्दी, 5 साल और देर से देर 70 साल देर तक से भी शुरू हो सकती हैं।

वो अनचाहे और जुनूनी डर जो समस्या के विकसित होने के साथ-साथ, बहुत हावी हो जाने का खतरा रखते हैं, वो हर व्यक्ति में अलग अलग रहते हैं। उसी तरह बाध्यता का व्यवहार जो व्यक्ति अपने डर को नियंत्रित करने के लिए करता है, वो भी अलग अलग रहता है।

किसी व्यक्ति के जीवन पर ओसीडी का कितना प्रभाव पड़ता है ये निभर्र करता है :

बाध्यता के व्यवहार या हरकतों पर खर्च होने वाला समय

व्यवहार की तीव्रता

इसमें से कितना उनकी हरकतों या व्यवहार के बजाय उनके दिमाग मे होता है

ऐसी आदतें जिनमें जाँचना होता है, वो अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, घर छोड़ते समय, OCD से ग्रस्त व्यक्ति अपने पीछे दरवाज़ा बंद कर सकता है,  और फिर उसके बारे में पूरे दिन बार-बार सोचता रहेगा।

उनकी दरवाज़ा ठीक से बंद करने की चिंता लगातार बनी रहती है और उसके साथ मे आने वाला दुःख और डिप्रेशन या अवसाद भी निरंतर रहता है। इसके बावजूद भी, OCD से ग्रस्त कुछ लोग बहुत चुनौती भरे रोज़गार करने में सक्षम होते हैं।

दूसरों के लिए, यह व्यवहार उनका पूरा ध्यान ले सकता है। जब वो घर छोड़ने वाले होते हैं तब वो बार बार ताले को जाँचने के चक्कर में,  बीच के रास्ते में ही अटक जाते हैं। बहुत ज्यादा तीव्र मामलों में,  इन हरकतों या आदतों को बार बार करने के विचार और चिंता की वजह से लोग एक जगह से घंटों तक हिल नहीं पाते हैं।

OCD से ग्रस्त परिवार के सदस्यों को संभालना

स्वाभाविक है कि जिस व्यक्ति का सबको पता है कि वो इस तरह के व्यवहार से ग्रस्त है, उसके परिवार के सदस्य उसकी मदद करना चाहेंगे। एक ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने मानसिक स्वास्थ्य की ट्रेनिंग या प्रशिक्षण नहीं लिया है और वो इलाज के विकल्पों से भी अनजान है, इस स्थिति का मतलब भार को साझा करने में मदद करने की कोशिश करना है। उदाहरण के लिए, वो बाध्यता की वजह से सफाई करने वाले या बार बार जाँचने वाले की कुछ हरकतों को खुद अपना सकते हैं।

यह देखने में एक स्वाभाविक चीज लगती है पर अंत में, पूरा परिवार OCD वाले सदस्य को उसके खुद के डर से बचाने में लग सकता है। हालांकि, यह उल्टा असर करता है क्योंकि, समस्या तो सुलझती नहीं है और आगे बढ़ने की भी कोई उम्मीद नजर नहीं आती। इस तरीके से,  पूरा परिवार ’ओसीडी से पीड़ित’ हो जाता है।

सबसे अच्छा तरीका ओसीडी ग्रस्त व्यक्ति के इलाज में मदद करना और जैसे जैसे वो ठीक हों और बदले, तब उन्हें सहारा देने होता है। एक बार जब थेरेपी शुरू हो जाती है, तब साथी का सहयोग और सहारा अनमोल होता है।

कभी -कभी ओसीडी से ग्रस्त व्यक्ति घबराया हुए और शर्मिंदा महसूस करते हैं और वो अपनी हरकतों को दूसरों से छुपाने की कोशिश करते हैं। जब इसमे कोई शारीरिक क्रिया या काम आता है, जैसे, हाथ धोना , तब , उनके हाथों की स्थिति, या स्नानघर में लंबा समय बिताना,  इस बात के सबसे पहले लक्षण हैं कि कुछ गलत है। मानसिक रूप से की जाने वाली हरकतों को पकड़ना या उनपर ध्यान देना ज्यादा मुश्किल है।

अच्छी बात ये है कि जब ओसीडी से ग्रस्त कोई व्यक्ति मदद लेने का निश्चय करता है, तब एक अच्छा डॉक्टर उन लक्षणों को पहचान लेगा और किसी विशेषज्ञ से आगे सलाह और सहयोग के लिए सम्पर्क करेगा।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
क्या यह लेख उपयोगी था?

महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।