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भारी माहवारी(Heavy Periods)

मेडिकली रिव्यूड

भारी माहवारी क्या होती है?

भारी पीरियड्स(भारी मासिक) को मीनोरेजिया(menorrhagia) भी कहा जाता है, जब एक महिला को लगातार पीरियड्स (मासिक) के दौरान बहुत ज्यादा खून आता है, तो उसे हैवी पीरियड्स या मीनोरेजिया कहते हैं।

मेनोरेजिया स्वयं या अन्य लक्षणों के साथ संयोजन में हो सकता है, जैसे कि मासिक धर्म में दर्द (dysmenorrhoea)। भारी रक्तस्राव का मतलब जरूरी नहीं है कि कुछ भी गंभीर रूप से गलत है, लेकिन यह एक महिला को शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से प्रभावित कर सकता है, और रोजमर्रा की जिंदगी में व्यवधान पैदा कर सकता है।

अगर आप अपने पीरियड्स के दौरान या बीच में ज्यादा ब्लीडिंग को लेकर चिंतित हैं तो अपने डॉक्टर को दिखाएं।

पीरियड में कितना भारी रक्त्स्त्राव हो सकता है?

बिल्कुल ठीक-ठीक ये बता पाना मुश्किल है कि भारी माहवारी कितनी मात्रा में होती है क्योंकि पीरियड के दौरान हर महिला में खून निकलने की मात्रा बहुत अलग-अलग होती है।

एक अवधि के दौरान निकलने वाले रक्त की औसत मात्रा 30-40 मिली(मिली लीटर) होती है, जिसमें दस में से नौ महिलाओं को 80 मिलीलीटर से कम रक्तस्त्राव होता है। इसलिए, प्रत्येक चक्र में भारी मासिक धर्म रक्तस्राव 60-80 मिलीलीटर या उससे अधिक माना जाता है।

हालांकि, शायद ही कभी मासिक धर्म में होने वाली रक्त हानि को नापने की जरूरत पड़ती है। अधिकांश महिलाओं को ये बात अच्छी तरह पता होती है कि पीरियड के दौरान उनके लिए कितनी ब्लीडिंग सामान्य है। और अगर यह मात्रा कम या ज्यादा होती है, तो वे बता सकती हैं।

एक संकेत जिससे ज्ञात हो कि आपके रक्त की हानि अत्यधिक है यदि:

  • आपको लगता है कि आप असामान्य रूप से अधिक संख्या में टैम्पोन या पैड का उपयोग कर रहे हैं
  • आप अपने कपड़ों या बिस्तर पर भी ब्लीडिंग का अनुभव करती हैं।
  • आपको टैम्पोन व तौलिया एक साथ उपयोग करना पड़ता है।

भारी माहवारी क्यों होती है?

अधिकांश मामलों में, हैवी पीरियड्स का कोई विशेष कारण समझ में नहीं आता है। हालांकि, कुछ स्थितियां और इलाज मीनोरेजिया से जुड़े होते हैं, इनमें शामिल हैं-

भारी पीरियड्स के कारणों के बारे में और पढ़ें-

हैवी पीरियड्स का निदान

आपका डॉक्टर को सिर्फ़ आपके लक्षणों से भारी माहवारी का निदान करने में सक्षम होना चाहिए।

आपके मीनोरेजिया(menorrhagia) का कारण पता लगाने के लिए कभी-कभी आगे जांच की जरूरत पड़ सकती है। अमूमन, इसमें पेल्विक (श्रोणि) और खून की जांच की जाती है।

अगर फिर भी कारण का पता नहीं चलता है, तो आपको अल्ट्रासाउंड स्कैन कराना पड़ सकता है।

हैवी पीरियड्स के परीक्षण के बारे में और पढ़ें

भारी माहवारी का इलाज

कुछ मामलों में, पीरियड्स यानी भारी माहवारी के लिए इलाज कराने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि थोड़ी-बहुत कम-ज्यादा ब्लीडिंग होना सामान्य है और यह आपकी जीवनशैली पर असर नहीं डालता है

यदि उपचार आवश्यक है, तो दवा का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। हालांकि, आपके लिए सबसे उपयुक्त दवा खोजने में थोड़ा समय लग सकता है, क्योंकि उनकी प्रभावशीलता सभी के लिए अलग-अलग होती है और कुछ गर्भ निरोधकों के रूप में भी काम करते हैं। यदि दवा काम नहीं करती है, तो सर्जरी भी एक विकल्प हो सकता है।

हैवी पीरियड्स के इलाज के बारे में और पढ़े

भारी पीरियड्स के कारण

भारी पीरियड्स (मीनोरेजिया) के 40 से 60 फीसदी मामलों में कोई विशेष कारण पता नहीं चलता है। इसके अलावा, भारी पीरियड्स के संभावित कारणों में ये शामिल हैं:

  • सर्विकल या एंडोमेट्रियल पॉलिप्स(cervical or endometrial polyps)- गर्भाशय या सर्विक्स(गर्भाशय ग्रीवा) की आंतरिक परत में गैर कैंसरकारी कोशिकाएं विकसित होना
  • एंडोमेट्रियोसिस(endometriosis) : जब गर्भाशय की कोशिकाओं के छोटे टुकड़े गर्भाशय के बाहर फैलने लगते हैं, जैसे- फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, मूत्राशय या योनि में
  • यूटरिन फाइब्रॉयड (fibroids): गर्भाशय में ग़ैर कैन्सरस कोशिकाओं का विकसित होना, जो श्रोणि (पेल्विक) में दर्द की वजह बनती हैं
  • इंट्रायूटरिन कंट्रासेप्टिव डिवाइसेज (IUD) (द क्वाइल के नाम से भी जानी जाती है):
  • सर्विकल या एंडोमेट्रियल पॉलिप्स(cervical or endometrial polyps)- गर्भाशय या सर्विक्स(गर्भाशय ग्रीवा) की आंतरिक परत में गैर कैंसरकारी कोशिकाएं विकसित होना
  • एंडोमेट्रियोसिस(endometriosis) : जब गर्भाशय की कोशिकाओं के छोटे टुकड़े गर्भाशय के बाहर फैलने लगते हैं, जैसे- फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, मूत्राशय या योनि में
  • यूटरिन फाइब्रॉयड (fibroids): गर्भाशय में ग़ैर कैन्सरस कोशिकाओं का विकसित होना, जो श्रोणि (पेल्विक) में दर्द की वजह बनती हैं
  • इंट्रायूटरिन कंट्रासेप्टिव डिवाइसेज (IUD) (द क्वाइल के नाम से भी जानी जाती है): आईयूडी डालने के बाद 40 से 50 फीसदी तक रक्त हानि बढ़ सकती है।
  • पेल्विक इंफ्लामेंट्री डिजीज (PID): पेल्विस (श्रोणि) में लगातार संक्रमण (इंफेक्शन) जो श्रोणि में दर्द, बुखार और यौन संबंध बनाने के बाद या पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग का कारण बनता है।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम(पीसीओएस): पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के अंडाशय में खास तौर से कई गांठें बनती हैं।
  • खून का थक्का जमने की विकृति जैसे- वॉन विलेब्रांड डिजीज( von Willebrand disease)
  • एडिनोमायोसिस(adenomyosis) - जब गर्भाशय सतह की ग्रंथियां गर्भाशय की मांसपेशी में अंत:स्थापित हो जाती है
  • एक अंडरएक्टिव थायराइड ग्रंथि (हाइपोथायराइडिज्म): यह थकान, कब्ज, असहनीय ठंड और बालों व त्वचा में बदलावों का कारण बन सकती है
  • लिवर (यकृत) या किडनी (गुर्दा) की बीमारी
  • गर्भाशय का कैंसर (हालांकि, यह बहुत दुर्लभ है)

इलाज, जिनकी वजह से भारी पीरियड्स हो सकते हैं

भारी मासिक धर्म कभी-कभी चिकित्सा उपचार के कारण हो सकता है। इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • एंटीकोएगुलांट दवाएं(anticoagulant medicines )- खून का थक्का जमने की क्षमता कम करने के लिए दी जाने वाली दवा
  • कीमोथेरेपी (कैंसर का इलाज)

भारी पीरियड्स का परीक्षण

अगर आपको ऐसा महसूस होता है कि आपका पीरियड सामान्य से ज्यादा हो रहा है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। आपके डॉक्टर समस्या की जांच करेंगे और इसके बाद इलाज करेंगे।

आपके पीरियड्स और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेने के बाद हैवी पीरियड्स (menorrhagia) की पहचान तब होती है, जब आप और आपके डॉक्टर इस बात पर सहमत हों कि मासिक चक्र में ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है।

डॉक्टर से परामर्श

आपके भारी पीरियड्स के कारण का पता लगाने के लिए आपके डॉक्टर इन चीजों के बारे में पूछेंगे:

  • आपकी मेडिकल हिस्ट्री
  • आपकी ब्लीडिंग(रक्तस्राव) का प्रकार
  • कोई संबंधित लक्षण, जो आपको हो

वे आपके पीरियड्स के बारे में ये सवाल भी पूछेंगे:

  • आमतौर पर आपका पीरियड कितने दिनों तक रहता है?
  • आपको कितनी ब्लीडिंग होती है?
  • आपको अपना टैम्पोन या सैनिटरी पैड कितनी बार बदलना पड़ता है?
  • आपने फ्लडिंग का अनुभव किया है या नहीं (यानी इतनी ज्यादा ब्लीडिंग कि आपके कपड़े या बिस्तर खराब हो गए हों)
  • आपके हैवी पीरियड्स से आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है?

आपके डॉक्टर यह भी जानना चाहेंगे कि क्या आपको पीरियड्स के बीच में (दो मासिक चक्र के बीच की अवधि) या यौन संबंध बनाने के बाद (postcoital bleeding) कोई ब्लीडिंग हुई है। आपने श्रोणि में किसी तरह का दर्द महसूस किया है या नहीं।

आपके मीनोरेजिया का कारण पता करने में मदद के लिए आपकी शारीरिक जांच की जा सकती है। खास तौर से अगर आपकी श्रोणि में दर्द होता है या पीरियड्स के बीच या यौन संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग होती है।

आपके डॉक्टर संभवत: यह भी जानना चाहेंगे कि आप अभी कौन-सा गर्भनिरोधक इस्तेमाल कर रही हैं, आप उसे बदलने की सोच रही हैं या नहीं और आपकी भविष्य में बच्चा पैदा करने की कोई योजना है या नहीं। अगर पिछली बार आपने सर्विकल स्क्रीनिंग टेस्ट कराया था, तो उसे भी देखा जाएगा।

आखिर में वे आपसे आपके परिवार की हिस्ट्री के बारे में पूछेंगे ताकि इसके लिए जिम्मेदार किसी आनुवांशिक कारण को खारिज किया जा सके, जैसे- वॉन विलेब्रांड डिजीज, जो परिवारों के बीच होती है और ठीक तरीके से खून जमाने की क्षमता पर असर डालती है।

आगे की जांच

आपकी मेडिकल हिस्ट्री और आपकी शुरुआती शारीरिक जांच पर निर्भर करता है कि आपके भारी पीरियड्स का कारण जानने के लिए आगे जांच की जरूरत है या नहीं। बतौर उदाहरण- अगर आप दो पीरियड्स के बीच में या यौन संबंध के बाद ब्लीडिंग का अनुभव करती हैं या श्रोणि में दर्द होता है, तो किसी गंभीर बीमारी, जैसे : कैंसर (जो बहुत दुर्लभ है) का संदेह मिटाने के लिए आगे जांच करने की जरूरत होगी।

पेल्विक की जांच

अगर आपके पेल्विक की जांच करने की जरूरत पड़ती है तो आपके डॉक्टर पूछेंगे कि क्या आप किसी महिला सहयोगी की उपस्थिति चाहती हैं। पेल्विक जांच मे ये शामिल हैं:

  • योनिमुख की जांच: आपके योनिमुख (बाहरी यौन अंग) की जांच ताकि बाहरी रक्तस्राव और संक्रमण के संकेतों का प्रमाण मिल सके, जैसे- वजाइनल डिस्चार्ज (योनि से रिसाव)
  • आपकी योनि और सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) की स्पेकुलम से जांच : स्पेकुलम एक मेडिकल उपकरण होता है जो योनि और सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) की जांच में इस्तेमाल होता है।

बाईमैनुअल पल्पेसन : इसमें उंगलियों का इस्तेमाल करके आपकी योनि की आंतरिक जांच की जाती है। ताकि ये पता लग सके कि आपका गर्भाशय या अंडाशय नरम या बढ़ गया है।

पेल्विक जांच केवल उन्हीं हेल्थेकेयर पेशेवरों से ही करानी चाहिए, जो ऐसा करने की योग्यता रखते हों। जैसे: डॉक्टर या गाइनीकोलॉजिस्ट यानी स्त्री रोग विशेषज्ञ (महिलाओं की प्रजनन प्रणाली की विशेषज्ञ)।

पेल्विक जांच करने से पहले हेल्थकेयर पेशेवर आपको इसकी पूरी प्रक्रिया के बारे में बताएंगे और ये क्यों जरूरी है, इसकी वजह भी बताएंगे। आपको जिस भी बारे में संदेह हो उस बारे में उनसे पूछना चाहिए। पेल्विक जांच आपकी अनुमति के बिना नहीं की जानी चाहिए।

बायोप्सी(Biopsy)

मीनोरेजिया के कुछ मामलों में कारण का पता लगाने के लिए बायोप्सी की जरूरत हो सकती है। यह विशेषज्ञ द्वारा की जाएगी और इसमें पहले आपके गर्भाशय की आंतरिक परत से एक छोटा टुकड़ा सैंपल के लिए लिया जाएगा, फिर इसकी माइक्रोस्कोप से गहन जांच की जाएगी।

खून की जांच(Blood tests)

जो भी महिला हैवी पीरियड्स से पीड़ित होती है, अमूमन उन सभी के खून की पूरी जांच कराई जाती है। इससे आयरन की कमी यानी एनीमिया का पता चल सकता है, अक्सर ज्यादा समय तक हैवी पीरियड्स होना आयरन की कमी का कारण होता है।

अगर आपमें आयरन की कमी यानी एनीमिया है तो सामान्यत: आपको दवा का एक कोर्स करने की सलाह दी जाएगी। आपके डॉक्टर बता देंगे कि आपके लिए कौन-सी दवा सबसे उपयुक्त होगी और इसे कब तक लेने की जरूरत है।

अल्ट्रासाउंड स्कैन -

अगर आपको मासिक के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है और जांच के बाद भी कारण पता नहीं चला है तो असामान्यताओं, जैसे : फाइब्रॉयड्स (गैर कैंसरकारी कोशिकाओं का विकास) या पॉलिप्स (बिना नुकसानदायक कोशिकाओं का विकास) का पता लगाने के लिए आपके गर्भाशय का अल्ट्रासाउंड स्कैन कराया जा सकता है। कुछ तरह के कैंसर का पता लगाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अक्सर ट्रांसवजाइनल (योनि संबंधी) स्कैन इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें योनि के अंदर आपके गर्भाशय की करीब से स्पष्ट तस्वीर ली जा सके।

भारी पीरियड्स का इलाज

हैवी पीरियड्स (menorrhagia) का मुख्य इलाज दवा है। लेकिन कुछ मामलों में सर्जरी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

अगर आप मीनोरेजिया(menorrhagia) से पीड़ित पाई जाती हैं तो आपके डॉक्टर इसके संभावित इलाज के विकल्पों के बारे में आपसे बातचीत करेंगे, जिनमें ये शामिल हैं:

  • इलाज की प्रभावशीलता
  • संबंधित इलाज से होने वाले संभावित दुष्प्रभाव
  • गर्भनिरोधक की जरूरत होगी या नहीं
  • इलाज का प्रजनन क्षमता से संबंध

कुछ मामलों में इलाज की जरूरत नहीं होती। अगर भारी पीरियड्स से आपकी जिंदगी प्रभावित नहीं होती है या किसी गंभीर कारण का संदेह नहीं है तो आप ये सोचकर आश्वस्त हो सकती हैं कि कुछ समय के साथ पीरियड्स की मात्रा में बदलाव हो सकता है।

मीनोरेजिया के इलाज का मकसद है:

  • मासिक चक्र में ज्यादा ब्लीडिंग को कम करना या रोकना।
  • मीनोरेजिया पीड़ित महिलाओं की जीवन गुणवत्ता को सुधारना
  • मासिक चक्र में ज्यादा ब्लीडिंग से होने वाली आयरन की कमी यानी एनीमिया की रोकथाम करना या ठीक करना

दवा

जिन महिलाओं को इलाज में सबसे पहले दवा लेने की सलाह दी जाती है, वे होती हैं जिन्हें:

अगर कोई खास दवा आपके लिए उपयुक्त नहीं है या कोई दवा असर नहीं कर रही है तो दूसरा तरीका इस्तेमाल करने की सलाह दी जा सकती है। कुछ दवाएँ आपके पीरियड्स को हल्का बना देती हैं और दूसरी दवाएँ इसे पूरी तरह से रोक सकती हैं। कुछ दवाएँ गर्भनिरोधक भी होती हैं। आपके डॉक्टर आपको बता देंगे कि कौन-सी दवा कैसे काम करती है और उसके संभावित साइड इफेक्ट (नुकसान) क्या हैं। इससे आपको और आपके डॉक्टर को यह तय करने में मदद मिलेगी कि सबसे उपयुक्त इलाज कौन-सा है।

मीनोरेजिया में इस्तेमाल किए जाने वाले अलग-अलग तरह के इलाज के बारे में संक्षिप्त जानकारी नीचे दी गई है।

आप हमारी 'हैवी पीरियड्स के लिए मेडिसिन गाइड' में इन इलाज के बारे में और ज्यादा पढ़ सकते हैं-

लिवोनोगेस्ट्रल-रिलीजिंग इंट्रायूटरिन सिस्टम (एलएनजी-आईयूएस) (Levonorgestrel-releasing intrauterine system (LNG-IUS)):

लिवोनोगेस्ट्रल-रिलीजिंग इंट्रायूटरिन सिस्टम (एलएनजी-आईयूएस) प्लास्टिक की एक छोटी मशीन होती है, जिसे आपके गर्भाशय में डाला जाता है, जो धीरे-धीरे प्रोजेस्टोजन नाम का हार्मोन छोड़ता है। यह आपके गर्भाशय की आंतरिक परत को जल्दी बढ़ने से रोकता है और एक तरीके का गर्भनिरोधक भी होता है। एलएनजी-आईयूएस का इस्तेमाल बंद करने के बाद ये आपके गर्भवती होने की संभावनाओं को प्रभावित नहीं करता है।

एलएनजी-आईयूएस इस्तेमाल करने के संभावित साइड इफेक्ट (नुकसान) में ये शामिल हैं:

  • अनियमित ब्लीडिंग, जिसे खत्म होने में छह महीने से भी ज्यादा लग सकते हैं
  • स्तनों का दर्द
  • मुंहासे
  • पीरियड्स ही न होना (एमेनोरिया)

एलएनजी-आईयूएस रक्त की हानि को 71 से 96 प्रतिशत तक घटा सकता है और मीनोरेजिया से पीड़ित महिलाओं के इलाज में इसे पहली पसंद के रूप में प्राथमिकता दी जाती है। बशर्ते, लंबी अवधि के गर्भनिरोधक के रूप में इंट्रायूटरिन डिवाइस उपयुक्त है।

ट्रेनेक्सामिक एसिड(Tranexamic acid)

अगर एलएनजी-आईयूएस अनुपयुक्त है (उदाहरण के लिए, यदि गर्भनिरोधक की जरूरत नहीं है) तो ट्रेनेक्सामिक एसिड इस्तेमाल करने पर विचार किया जा सकता है। ये टैबलेट्स आपके गर्भाशय में रक्त का थक्का जमने में मदद करती हैं। इससे 29 से 58 प्रतिशत तक रक्त हानि रोकी जा सकती है।

ज्यादा ब्लीडिंग शुरू होने के बाद दो या तीन ट्रेनेक्सामिक एसिड टैबलेट ली जा सकती हैं। ये अधिकतम तीन से चार दिनों के लिए दिन में तीन से चार बार ली जाती हैं। सामान्यत: इसकी न्यूनतम डोज लेने की ही सलाह दी जाएगी। बतौर उदाहरण- दो टैबलेट, चार दिनों के लिए एक दिन में तीन बार। अगर तीन महीने के अंदर आपके लक्षणों में सुधार नहीं होता है तो ये इलाज बंद कर देना चाहिए।

ट्रेनेक्सामिक एसिड टैबलेट्स गर्भनिरोधक का काम नहीं करती हैं और ये आपकी गर्भवती होने की संभावना पर असर नहीं डालेगी। अगर जरूरत हो तो ट्रेनेक्सामिक एसिड को नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (एनएसएआईडी) के साथ दिया जा सकता है।

इसके संभावित साइड इफेक्ट में अपच और दस्त शामिल हैं।

नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडीज) (Non-steroidal anti-inflammatory drugs (NSAIDs))

अगर एलएनजी-आईयूएस उपयुक्त न लगे तो नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडीज) मीनोरेजिया के इलाज में दूसरी पसंद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। एनएसएआईडीज के नतीजे दिखाते हैं कि इससे 20 से 49 प्रतिशत तक रक्त की हानि घट जाती है। आपका पीरियड शुरू होने (या उससे ठीक पहले) से इसे टैबलेट के रूप में लिया जाता है, जब तक कि ब्लीडिंग बंद न हो जाए।

एनएसएआईडीज, जिन्हें मीनोरेजिया के इलाज में लेने की सलाह दी जाती है, वे हैं:

  • मेफेनेमिक एसिड[mefenamic acid]
  • नेप्रोक्सन[naproxen]
  • आईब्रूफेन[ibuprofen]

ये दिन में सामान्य तौर पर तीन या चार बार ली जाती हैं।

एनएसएआईडीज आपके शरीर में पैदा होने वाले हार्मोन यानी प्रोस्टाग्लैंडीन जैसे पदार्थ, जिसका संबंध भारी पीरियड्स से होता है, को कम करने का काम करता है। एनएसएआईडीज दर्दनिवारक भी होता है। यह गर्भनिरोधक का काम नहीं करता है। हालांकि, अगर जरूरत हो तो इसे ओरल गर्भनिरोधक गोली (नीचे देखें) के साथ मिलाकर लिया जा सकता है।

एनएसएआईडीज(NSAIDs) के आम साइड इफेक्ट में बदहजमी और दस्त शामिल हैं।

एनएसएआईडीज अनगिनत मासिक चक्रों तक इस्तेमाल की जा सकती है, जब तक कि ज्यादा रक्त हानि के लक्षणों में आराम न मिल जाए और इसका कोई खास साइड इफेक्ट भी नहीं होता। हालांकि, अगर एनएसएआईडीज असरदार साबित नहीं हो रही हैं तो तीन महीने बाद इससे इलाज बंद कर देना चाहिए।

संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोली(Combined oral contraceptive pill)

कंबाइंड ओरल गर्भनिरोधक गोलियां, अक्सर मीनोरेजिया का इलाज करने में गोली के रूप में इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें एस्ट्रोजन और नाम के हार्मोन होते हैं। इसमें 21 दिनों तक रोज एक गोली ली जाती है, फिर 7 दिन का ब्रेक दिया जाता है। ये 7 दिन वो होते हैं, जब आपका पीरियड आता है। फिर यही चक्र दोहराया जाता है।

मीनोरेजिया के इलाज में कंबाइंड ओरल गर्भनिरोधक गोलियां इस्तेमाल करने का फायदा यह है कि इसमें गर्भनिरोधक के रूप में एलएनजी-आईयूएस की अपेक्षा ज्यादा आसानी से होने वाले असर को बंद करने की सम्भावना होती हैं। इससे मासिक चक्र को नियमित रखने और दर्दनाक पीरियड्स(डिसमीनोरिया) से राहत मिलने का भी फायदा है।

कंबाइंड ओरल गर्भनिरोधक हर महीने आपके अंडाशय से एक अंडा बाहर निकलने से रोक देता है। जब तक आप ठीक तरह से गोलियां ले रही हैं, ये आपको गर्भवती होने से बचती रहेंगी।

कंबाइंड ओरल गर्भनिरोधक गोली के सामान्य साइड इफेक्ट (नुकसान) में ये शामिल हैं:

  • मूड में बदलाव
  • जी मिचलाना
  • फ्लूइड रिटेंशन
  • स्तनों में दर्द

ओरल नोरेथिस्टेरोन(Oral norethisterone)

नोरेथिस्टेरोन इंसानों द्वारा निर्मित प्रोजेस्टोजेन का ही एक प्रकार है (महिलाओं के सेक्स हार्मोंस में से एक)। यह एक दूसरा तरीका है, जो मीनोरेजिया के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आपका मासिक चक्र शुरू होने के 5 से 26 दिनों तक टैबलेट के रूप में दिन में दो से तीन बार लिया जा सकता है। अपने पीरियड के पहले दिन को एक दिन के रूप में गिनें।

ओरल नोरेथिस्टेरोन आपके गर्भाशय की आंतरिक परत को जल्दी बढ़ने से रोकने का काम करता है। यह गर्भनिरोध का कारगर उपाय नहीं है और इसके अरुचिकर साइड इफेक्ट में ये शामिल हैं:

  • वजन बढ़ना
  • स्तन में दर्द
  • अल्पावधि में मुंहासे

ओरल प्रोजेस्टोजेंस जैसे- नोरेथिस्टेरोन उतना असरदार नहीं है, जितना कि ट्रेनक्सामिक एसिड और ये हमेशा ज्यादा ब्लीडिंग को रोकने में सक्षम भी नहीं है।

इंजेक्टेड प्रोजेस्टोजेन(Injected progestogen)

प्रोजेस्टोजेन का एक प्रकार है मेड्रोक्सीप्रोजेस्टोजेन एसीटेट(medroxyprogesterone acetate), जो इंजेक्शन के रूप में भी उपलब्ध है और कभी-कभी मीनोरेजिया के इलाज में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह आपके गर्भाशय की आंतरिक परत को जल्दी बढ़ने से रोकने का काम करता है। और यह एक तरह का गर्भनिरोधक है। इसका इस्तेमाल बंद करने के बाद ये आपको गर्भवती होने से नहीं रोकता है। हालांकि, इसे लेने के बाद आपको गर्भवती होने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

इंजेक्टेड प्रोजेस्टोजेन के सामान्य साइड इफेक्ट में ये शामिल हैं:

  • वजन बढ़ना
  • अनियमित ब्लीडिंग
  • पीरियड न होना (amenorrhoea)
  • इंजेक्शन बंद करने के बाद आपको गर्भवती होने में 6 से 12 महीने की देरी हो सकती है।
  • प्रीमेंस्ट्रुयल लक्षण, जैसे- ब्लोटिंग, फ्लूइड रिटेंशन और स्तनों में दर्द

जब तक ये इलाज चलेगा, आपको 12 हफ्तों में एक बार प्रोजेस्टोजेन का इंजेक्शन लगवाने की जरूरत पड़ेगी।

गोनाडोट्रोपिन रिलीजिंग हार्मोन एनालॉग(Gonadotropin releasing hormone analogue)

गोनाडोट्रोपिन रिलीजिंग हार्मोन एनालॉग (GnRH-a) एक तरह का हार्मोन है, जो कभी-कभी फाइब्रॉयड (गर्भाशय में गैर कैंसरकारी कोशिकाओं का विकास) के इलाज में इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है।

अध्ययन दिखाते हैं कि GnRH-a पीरियड्स के दौरान रक्त की हानि कम करने में कारगर है। हालांकि, यह महंगा हो सकता है और हार्मोन असामान्यताओं(हाइपोगोनाडिज्म) का कारण बन सकता है, ठीक मीनोपॉज की तरह। इसके असर में अचानक गर्मी लगना, ज्यादा पसीना आना और योनि में सूखापन होना शामिल है। इसलिए, GnRH-a एक नियमित इलाज नहीं है लेकिन अगर आप सर्जरी का इंतजार कर रहे हैं तो ये इस्तेमाल की जा सकती है।

सर्जरी

अगर आपके मीनोरेजिया के इलाज में दवाएँ असरदार साबित नहीं होती हैं तो आपके डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।

मीनोरेजिया का इलाज करने के लिए कई तरह की सर्जरी इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें से दो केवल तभी उचित हैं, अगर आपको फाइब्रॉयड (गर्भाशय में गैर कैंसरकारी कोशिकाओं का विकसित होना) के कारण भारी पीरियड्स हो रहे हैं। ये हैं-

  • आर्टरी एंबोलाइजेशन (यूएई)-uterine artery mbolization (UAE)
  • मायोमेक्टॉमी(myomectomy)

यूटरिन आर्टरी एंबोलाइजेशन (यूएई)

यूटरिन आर्टरी एंबोलाइजेशन (यूएई) एक सबसे कम खतरनाक तरीका है, जिसमें आपके पेट और जाँघों के अंदर एक छोटी-सी ट्यूब डाली जाती है। इस ट्यूब के जरिए फाइब्रॉयड को खून पहुंचाने वाली धमनियों में प्लास्टिक के छोटे मनके डाले जाते हैं। यह धमनियों को अवरुद्ध कर देते हैं और इसकी वजह से फाइब्रॉयड अगले छह महीनों में सिकुड़ जाता है।

यूएई के फ़ायदों में शामिल हैं:

  • यह आमतौर पर उन महिलाओं में सफल इलाज है, जिन्हें फाइब्रॉयड की वजह से भारी पीरियड्स होते हैं
  • इससे गंभीर परेशानियां होना दुर्लभ हैं
  • आपको अस्पताल में सिर्फ एक रात रुकने की जरूरत है

हालांकि, यूएई में खून की आपूर्ति रुकने के बाद कुछ दर्द हो सकता है और करीब 8 घंटे तक स्ट्रोंग दर्दनिवारक लेने की जरूरत पड़ती है। कुछ दूसरी परेशानियां भी होती हैं, उस बारे में आपके डॉक्टर आपको बता देंगे।

अगर आप भविष्य में गर्भवती होना चाहती हैं तो आपको यूएई चुनने की सलाह नहीं दी जा सकती है, चूंकि इससे आपकी प्रजनन क्षमता को काफी खतरा है।

करीब 10 से 20 प्रतिशत मामलों में यूएई की बाद में फिर जरूरत पड़ सकती है। इस बारे में भी आपके विशेषज्ञ आपसे बात करेंगे।

मायोमेक्टॉमी (Myomectomy)

कभी-कभी फाइब्रॉयड्स को सर्जिकल प्रक्रिया का इस्तेमाल करके हटाया जाता है, इस प्रक्रिया को मायोमेक्टॉमी के नाम से जाना जाता है। हालांकि, हर प्रकार के फाइब्रॉयड में ऑपरेशन उचित नहीं होता है। आपकी गाइनीकोलॉजिस्ट(महिला प्रजनन प्रणाली में विशेषज्ञ) आपको बता देंगी कि मायोमेक्टॉमी संभव है या नहीं और इससे क्या समस्याएं हो सकती हैं।

आपके केस में अगर यह संभव होती है तो मायोमेक्टॉमीज प्रभावशाली ऑपरेशन होते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में फाइब्रॉयड्स दोबारा विकसित हो जाते हैं।

फाइब्रॉयड्स के इलाज के बारे में और पढ़ें:

अगर फाइब्रॉयड्स की वजह से आपको भारी पीरियड्स हो रहे हैं तो कई तरह की सर्जरी की जा सकती हैं, इनमें शामिल हैं:

  • एंडोमेट्रियल एब्लेसन(endometrial ablation) - इसमें गर्भाशय की आंतरिक परत नष्ट कर दी जाती है
  • हिस्टेरेक्टॉमी(hysterectomy) - सर्जरी से गर्भाशय निकाल दिया जाता है, जिसमें कभी-कभी सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), फैलोपियन ट्यूब और अंडाशयों (ओफोरेक्टॉमी) को भी हटा दिया जाता है

आपके विशेषज्ञ आपसे इस बारे में बातचीत कर सकते हैं। साथ ही इसके फायदों और इससे जुड़े खतरों के बारे में भी बता सकते हैं।

एंडोमेट्रियल एब्लेसन(Endometrial ablation)

एंडोमेट्रियल एब्लेशन के लिए कई तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं, उनमें शामिल हैं:

  • माइक्रोवेव एंडोमेट्रियल एब्लेशन(microwave endometrial ablation): एक प्रोब(पतली लचीली रॉड) जो माइक्रोवेव ऊर्जा इस्तेमाल करती है (एक तरह का रेडिएशन) गर्भाशय के अंदर डाली जाती है ताकि उसे गर्म करके गर्भाशय की आंतरिक परत को नष्ट किया जा सके
  • थर्मल बैलून एब्लेशन(thermal balloon ablation): एक गुब्बारा गर्भाशय में डाला जाता है और इसे फुलाकर और गर्म करके गर्भाशय की आंतरिक परत नष्ट की जाती है

ये प्रक्रियाएं लोकल एनेस्थेटिक (दर्दनिवारक इलाज) या जनरल एनेस्थेटिक(जिसमें आप बेहोश हो जाते हैं) की देखरेख में की जा सकती हैं। इसे काफी जल्दी कर दिया जाता है, करीब 20 मिनट ही लगते हैं और आप उसी दिन घर भी जा सकते हैं।

एंडोमेट्रियल एब्लेशन के बाद कुछ दिनों के लिए आपको योनि से कुछ रक्तस्राव महसूस हो सकता है, जो कि हल्के पीरियड की तरह होता है। टैम्पोन की जगह सैनिटरी तौलिया इस्तेमाल करें। कुछ महिलाओं को तीन से चार हफ्तों तक खून जैसा रिसाव हो सकता है।

आपको एक या दो दिन तक पेट में ऐंठन का भी अनुभव हो सकता है, ठीक वैसा ही जैसा पीरियड के समय होता है। इसे पैरासीटामोल दर्दनिवारक से ठीक किया जा सकता है।

अमूमन ऐसी सलाह दी जाती है कि एंडोमेट्रियल एब्लेशन के बाद आप गर्भवती नहीं हों, क्योंकि गर्भपात का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

हिस्टरेक्टमी(Hysterectomy)

हिस्टरेक्टमी (गर्भाशय को हटाना) से भविष्य में आपको कभी पीरियड्स नहीं आएँगे लेकिन इस पर केवल तभी विचार करना चाहिए, जब दूसरे विकल्प आज़माए जा चुके हों या उन पर बात की जा चुकी हो। हिस्टरेक्टमी ऑपरेशन और इसमें ठीक होने का समय हैवी पीरियड्स के इलाज के लिए की जाने वाली दूसरी सर्जिकल तकनीकों के मुकाबले ज्यादा होता है। मीनोरेजिया के इलाज के लिए हिस्टरेक्टमी का इस्तेमाल केवल तभी किया जाना चाहिए जब आपने इस प्रक्रिया के फ़ायदों और नुकसान के बारे में अपने विशेषज्ञ से विस्तार से बातचीत कर ली हो।

हिस्टरेक्टमीके बाद आप कभी गर्भवती नहीं हो पाएंगी।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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