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बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Borderline personality disorder)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर क्या हैं? (What are personality disorder?)

पर्सनालिटी डिसऑर्डर (personality disorder) एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्ति काफी असामान्य और अजीब व्यवहार करता है और इसके कारण उसे कई तकलीफदेह लक्षणों का सामना करना पड़ता है।

इसमें शामिल हैं:

  • परेशानी, चिंता, व्यर्थता या तेज गुस्से का अनुभव होना
  • खुद को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी ऐसी भावनाओं को नियंत्रित करने में कठिनाई, उदाहरण के लिए ड्रग्स और शराब का सेवन करने या ओवरडोज लेने से
  • स्थायी और करीबी रिश्तों को बनाए रखने में कठिनाई
  • · कभी-कभी, लंबे समय तक वास्तविकता से दूर रहना
  • · कुछ मामलों में, दूसरों को नुकसान पहुंचाने की धमकी

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

पर्सनालिटी डिसऑर्डर आमतौर पर किशोरावस्था में उभरते हैं और वयस्क होने के बाद भी बने रहते हैं। ये आनुवांशिक और पारिवारिक कारकों से जुड़े होते हैं, और बचपन के दौरान संकट या भय के अनुभव, जैसे कि उपेक्षा या उत्पीड़न जैसे कारणों से होते हैं। पर्सनालिटी डिसऑर्डर हल्के से लेकर गंभीर तक होते हैं।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) क्या है? (What is borderline personality disorder?)

माना जाता है कि बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (BPD) से पीड़ित व्यक्ति 'बॉर्डर' के बीच जीते हैं:

  • न्यूरोसिस, ऐसी स्थिति जिसमें एक व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान होता है, लेकिन इसके बावजूद वह अपनी धारणा और वास्तविकता के बीच का अंतर बता सकता है
  • साइकोसिस, ऐसी स्थिति जिसमें एक व्यक्ति अपनी धारणा और वास्तविकता के बीच अंतर बताने में असमर्थ है, और भ्रम और मतिभ्रम का अनुभव कर सकता है

हालांकि यह इस बीमारी की विस्तृत और सटीक व्याख्या नहीं है। बीपीडी को मूड और इंटरपर्सनल फंक्शन (एक व्यक्ति दूसरों के साथ कैसे बातचीत करता है) के विकार के रूप में सबसे अच्छी तरह से समझा जा सकता है।

बीपीडी एक आम पर्सनालिटी डिसऑर्डर है। हालांकि यह बीमारी महिलाओं में सबसे अधिक पायी जाती है। क्योंकि यह पुरुषों में जल्दी पहचान में नहीं आती है और इसके कारण इलाज कराने की संभावना कम हो सकती है।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के निदान के बारे में और पढ़ें।

बीपीडी कैसे विकसित होता है? (How does BPD develop?)

बीपीडी का स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं हैं। हालांकि, अधिकांश समस्याओं के साथ, बीपीडी आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के कारण होता है।

बचपन के दौरान होने वाली दर्दनाक घटनाओं के कारण बीपीडी विकसित हो सकता है। बीपीडी से पीड़ित 10 में से आठ लोगों को बचपन में माता-पिता की उपेक्षा या शारीरिक, यौन या भावनात्मक शोषण का अनुभव होता है।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के कारणों के बारे में और पढ़ें।

आउटलुक (Outlook)

बीपीडी एक गंभीर समस्या है। इस बीमारी से पीड़ित बहुत से लोग खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या का प्रयास करते हैं। अनुमान के अनुसार, बीपीडी से पीड़ित 60-70% लोग अपने जीवन में किसी भी समय आत्महत्या का प्रयास कर सकते हैं।

हालांकि, बीपीडी से पीड़ित कई लोगों के नजरिए में समय के साथ काफी अच्छा बदलाव होता है। साथ ही मनोवैज्ञानिक या मेडिकल इलाज से भी उन्हें मदद मिल सकती है।

इलाज में सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य टीम (CMHT) के साथ काम करने वाले प्रशिक्षित पेशेवर शामिल होते हैं। वे कई तरह की मनोवैज्ञानिक थेरेपी (मनोचिकित्सा) का इस्तेमाल कर सकते हैं। इलाज का प्रभाव एक वर्ष से अधिक समय तक रह सकता है।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के इलाज के बारे में और पढ़ें।

हाल के अध्ययनों से पता चला है कि बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर से पीड़ित अधिकांश लोग समय के साथ ठीक हो जाते हैं और उन्हें बहुत से लक्षणों से राहत मिल जाती है। जबकि लगभग आधे लक्षणों से वे पूरी तरह मुक्त हो जाते हैं और एक सामान्य जीवन जी सकते हैं।

जिन लोगों में लक्षण दोबारा विकसित होने लगते हैं, उन्हें अतिरिक्त इलाज की सलाह दी जाती है।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के लक्षण

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) के कारण कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं। इन्हें चार मुख्य भागों में बांटा जा सकता है।ये चार क्षेत्र हैं:

  • भावनात्मक अस्थिरता (इसके लिए एक मनोवैज्ञानिक शब्द डिसरेगुलेशन का इस्तेमाल किया जाता है)
  • अशांत सोच या धारणा (इनके लिए मनोवैज्ञानिक शब्द कॉग्निटिव या परसेप्सुअप डिसऑर्डर का इस्तेमाल किया जाता है)
  • आवेगी व्यवहार
  • दूसरों के साथ गहरे लेकिन अस्थायी संबंध

इनमें से प्रत्येक क्षेत्र के बारे में नीचे अधिक विस्तार से बताया गया है।भावनात्मक असंतुलन (Emotional instability)यदि आप बीपीडी से पीड़ित हैं, तो आप आमतौर पर अधिक से अधिक नकारात्मक भावनाओं और विचारों का अनुभव कर सकते हैं, जैसे:

  • क्रोध
  • शोक
  • शर्म
  • घबड़ाहट
  • डर
  • लंबे समय तक अकेलेपन का एहसास

इसके अलावा कुछ देर के लिए गंभीर रुप से आपका मूड स्विंग हो सकता है। बीपीडी से पीड़ित लोगों में निराशा और आत्महत्या का विचार भी बहुत आम है। साथ ही कुछ ही घंटों में वे काफी सकारात्मक महसूस करने लग सकते हैं। कुछ लोग सुबह में बेहतर महसूस करते हैं और कुछ लोग शाम को। लेकिन इसका मुख्य लक्षण यह है कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का असामान्य तरीके से मूड स्विंग होता रहता है।अशांत सोच (Disturbed patterns of thinking)अशांत सोच के तीन स्तर हैं जो बीपीडी से पीड़ित लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। गंभीरता के अनुसार इनका क्रम नीचे दिया गया है:परेशान करने वाले विचार, जैसे कि यह सोचना कि आप एक डरावने व्यक्ति हैं या यह महसूस करना आपके होने का कोई अर्थ नहीं हैं। आप इन विचारों को लेकर आश्वस्त नहीं हो सकते हैं और ना ही ये कह सकते हैं कि ये विचार सही नहीं हैं।अजीब अनुभव होना, जैसे कि कुछ मिनट तक आपके सिर के बाहर आवाजें सुनाई पड़ना। ये अक्सर खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने के संकेत की तरह महसूस हो सकते हैं। ये आवाजें वास्तविक हैं या नहीं, इन्हें लेकर आप पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो सकते हैं।लंबे समय तक असामान्य अनुभव होना, जहां आप मतिभ्रम (सिर के बाहर आवाज आना) या परेशान करने वाली भावनाओं का अनुभव कर सकते हैं। जिसके बारे में कोई भी आपसे बात नहीं कर सकता है (जैसे कि यह महसूस करना कि आपका परिवार गुप्त रूप से आपको मारने की कोशिश कर रहे हैं)। इस प्रकार की धारणाएं मानसिक (भ्रम) हो सकती हैं और यह आपके अस्वस्थ होने का संकेत है। यदि आप भ्रम से जूझ रहे हैं तो किसी की मदद लें।आवेगपूर्ण व्यवहार (Impulsive behaviour)यदि आप बीपीडी से पीड़ित हैं, तो आपको दो तरह के आवेग महसूस होंगे जिन्हें नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो सकता है:आवेग में खुद को नुकसान पहुंचाना , जैसे कि किसी औजार से अपनी बांह काटना या सिगरेट से अपनी त्वचा जलाना। गंभीर मामलों में, खासकर जब आप बहुत उदासी और अवसाद महसूस करते हैं, तो इन आवेगों के कारण आपके मन में आत्महत्या के विचार आ सकते हैं और आप खुद को मारने की कोशिश कर सकते हैं।लापरवाह और गैरजिम्मेदार गतिविधियों में संलग्न होने का आवेग, जैसे अधिक शराब और नशीली दवाओं के सेवन पर खर्च करना, जुआ में पैसा लगाना या अजनबियों के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना। जब आप पूरी तरह से होश में नहीं होते हैं, तो उस दौरान आवेगपूर्ण व्यवहार काफी खतरनाक हो सकते हैं। इस दौरान आपको अपने निर्णय से आवेग उत्पन्न हो सकता है।अस्थायी संबंध (Unstable relationships)यदि आप बीपीडी से पीड़ित हैं, तो आप यह महसूस कर सकते हैं कि जब आपको लोगों की सबसे अधिक जरूरत होती है, तो वे आपको अकेला छोड़ देते हैं, या वे आप बहुत करीब आते हैं और आपसे सहानुभूति जताते हैं।जब लोग दूसरों द्वारा साथ न दिए जाने से डरते हैं, तो इसके कारण उन्हें तीव्र चिंता और क्रोध का अनुभव हो सकता है। वे अकेलेपन से खुद को बचाने के लिए निम्न प्रयास कर सकते हैं, जैसे:

  • किसी व्यक्ति को लगातार मैसेज भेजना या फोन करना
  • अचानक उस व्यक्ति को आधी रात को फोन करना
  • उस व्यक्ति के शरीर से चिपक जाना और उसे जाने से मना करना
  • धमकी देना कि यदि वह उन्हें छोड़कर गया तो वे खुद को नुकसान पहुँचाएँगे या मार डालेंगे

इसके अलावा अन्य लोग आपको शांत कराने या नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं तो आप डर और तेज गुस्से का अनुभव कर सकते हैं।फिर आप उनसे भावनात्मक रुप से न जुड़कर, उनकी बातों को न मानकर या फिर उन्हें गाली या अपशब्द कहकर अपने से दूर रहने के लिए कह सकते हैं।ये दो पैटर्न कुछ लोगों में अस्थायी ’प्रेम-घृणा’ (लव-हेट) वाले रिश्ते में देखने को मिलते हैं।बीपीडी से पीड़ित कई लोग 'काले-सफेद' संबंधों में फंसा हुआ महसूस करते हैं। या तो उन्हें अपना रिश्ता और वह व्यक्ति परफेक्ट लगता है या उन्हें अपने संबंध धुंधले दिखते हैं और वह व्यक्ति भयानक लगता है। बीपीडी से पीड़ित लोग अपने व्यक्तिगत जीवन और रिश्तों में किसी भी प्रकार के 'ग्रे एरिया' को स्वीकार नहीं कर पाते हैं।बीपीडी से पीड़ित कई लोगों के भावनात्मक रिश्ते (डॉक्टर सहित)! सभी के साथ खराब होते हैं! जिन्हें समझने में काफी परेशानी होती है। इसके कारण संबंधों में दरार आ सकती है।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के कारण (Borderline personality disorder causes)

अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) का कोई एक कारण नहीं होता है। इसके पीछे कई तरह के कारक जिम्मेदार होते हैं।

इसमें शामिल है:

  • आनुवांशिकी - माता-पिता से मिले जीन के कारण बीपीडी विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है। पर्यावरणीय कारकों के बारे में नीचे दिए गए हैं।
  • न्यूरोट्रांसमीटर - इन्हें मैसेंजर केमिकल ’ कहा जाता है। इनका इस्तेमाल मस्तिष्क द्वारा मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच संकेतों को पहुंचााने के लिए किया जाता है। कुछ न्यूरोट्रांसमीटर मूड और व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।
  • न्यूरोबायोलॉजी - इस शब्द का इस्तेमाल मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की संरचना और कार्य के लिए किया जाता है। बीपीडी से पीड़ित कुछ लोगों के मस्तिष्क की संरचना और कार्य असामान्य हो जाते हैं
  • पर्यावरणीय कारक - अतीत में घटी घटनाएं, जैसे कि आपके परिवार के साथ आपका संबंध, बीपीडी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

इन्हें नीचे और अधिक विस्तार से समझाया गया है।

आनुवंशिक (Genetics)

जुड़वां बच्चों पर किए गए शोध में पाया गया है कि आनुवांशिक कारणों से बीपीडी विकसित होने का खतरा अधिक होता है।

एक अध्ययन में पाया गया कि यदि एक समान जुड़वां बच्चों में बीपीडी पाया जाता है, तो तीन में से दो दूसरे समान जुड़वां बच्चों में भी बीपीडी हो सकता है।

हालांकि, इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि जीन के कारण बीपीडी विकसित होता है।

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में सबसे पहले व्यक्तित्व से जुड़े कुछ लक्षण विकसित होने की अधिक संभावना हो सकती है। उदाहरण के लिए, बीपीडी के बजाय आप अपने माता-पिता से मिले जीन के कारण आक्रामक और भावनात्मक रूप से अस्थिर हो सकते हैं।

अधिकतर जुड़वां बच्चे एक ही घर में और एक ही परिवार के वातावरण में बड़े होते हैं, इसलिए वे उनमें कई पर्यावरणीय कारक भी एक जैसे होते हैं।

न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitters)

माना जाता है कि बीपीडी से पीड़ित कई लोगों के मस्तिष्क में सेरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर का कार्य बदल सकता है।

मस्तिष्क में सेरोटोनिन के कार्य में बदलाव के कारण अवसाद, उत्तेजना और अपने उग्र व्यवहार को नियंत्रित करने में कठिनाई हो सकती है।

यह भी पाया गया है कि बीपीडी से पीड़ित कुछ लोगों में दो अन्य न्यूरोट्रांसमीटरों डोपामिन और नॉरएड्रेनालिन के कामकाज में बदलाव हो जाता है। जिसके कारण व्यक्ति भावनात्मक रूप से अस्थिर हो जाता है।

न्यूरोबायोलॉजी (Neurobiology)

शोधकर्ताओं ने बीपीडी से पीड़ित लोगों के मस्तिष्क का अध्ययन करने के लिए मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन का इस्तेमाल किया। एमआरआई स्कैन में शरीर के अंदर का एक विस्तृत चित्र बनाने के लिए मजबूत चुंबकीय क्षेत्रों और रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है।

स्कैन से पता चला कि बीपीडी से पीड़ित कई लोगों में, मस्तिष्क के तीन हिस्से उम्मीद से छोटे थे या उनमें असामान्य स्तर की गतिविधि थी। ये भाग थे:

  • एमिग्डाला, ये भावनाओं को नियंत्रित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विशेष रूप से भय, आक्रामकता और चिंता जैसे अधिक 'नकारात्मक' भावनाओं को नियंत्रित करता है
  • हिप्पोकैम्पस, यह व्यवहार और आत्म-नियंत्रण को रेगुलेट करने में मदद करता है
  • ऑर्बिटोफ्रंटल कॉर्टेक्स, यह योजना बनाने और निर्णय लेने में मदद करता है

मस्तिष्क के इन हिस्सों में समस्याएं होने पर बीपीडी के लक्षण विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

मस्तिष्क के इन हिस्सों का विकास आपकी शुरुआती परवरिश (नीचे देखें) से प्रभावित होता है। आपके मस्तिष्क के ये भाग भी मूड को रेगुलेट के लिए जिम्मेदार होते हैं, जो कि बीपीडी से पीड़ित व्यक्ति के साथ ही उनके करीबी रिश्तों में भी समस्याएं पैदा कर सकता है।

पर्यावरणीय कारक (Environmental factors)

बीपीडी से पीड़ित लोगों में कई पर्यावरणीय कारक सामान्य होते हैं। इसमें शामिल है:

  • भावनात्मक, शारीरिक या यौन शोषण का शिकार होना
  • बचपन में भय या किसी परेशानी से ग्रसित होना
  • माता-पिता द्वारा उपेक्षा किया जाना
  • गंभीर मानसिक समस्याओं जैसे बाइपोलर डिसऑर्डर या अधिक शराब पीने की लत से ग्रसित परिवार के किसी अन्य सदस्य की देखरेख में बड़ा होना

व्यक्ति पर उसके माता-पिता और परिवार के साथ संबंधों का प्रभाव भी पड़ता है कि वे दुनिया को कैसे देखता है और वे अन्य लोगों के बारे में कैसा सोचता है।

बचपन से अनजाना भय, क्रोध और कोई घटना वयस्क होने के बाद अशांत या खराब सोच का कारण बनती हैं। जैसे कि दूसरों को आदर्श बनाना, दूसरों से माता-पिता होने की उम्मीद करना, अन्य लोगों से धमकी मिलने की अपेक्षा करना और ऐसा व्यवहार करना जैसे कि अन्य लोग वयस्क हैं और आप हैं नहीं।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर का निदान (Diagnosing borderline personality disorder)

यदि आपको लगता है कि आप बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) से पीड़ित है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

आपके लिए MIND वेबसाइट और साथ ही बॉर्डरलाइन यूके वेबसाइट (जिसे इमर्जेंस कहा जाता है) उपयोगी हो सकती है।

डॉक्टर आमतौर पर आपकी भावनाओं, आपके हाल के व्यवहार, और जीवन की गुणवत्ता पर आपके लक्षणों के प्रभाव के बारे में पूछते हैं।

इससे सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे अवसाद की आमतौर पर पुष्टि नहीं हो पाती है और यह पता चल जाता है कि आपके स्वास्थ्य को इससे कोई तत्काल जोखिम नहीं है।

सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य टीम (Community mental health team)

यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आप बीपीडी से पीड़ित हो सकते हैं, तो आपको अधिक गहरे मूल्यांकन के लिए स्थानीय सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य टीम (सीएमएचटी) के पास भेजा जा सकता। आप अपने डॉक्टर से पूछ सकते हैं कि आपको जिस टीम के पास भेजा जा रहा है उन्हें पर्सनालिटी डिसऑर्डर के मरीजों को ठीक करने का कितना अनुभव है।

सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य टीमें बीपीडी जैसी जटिल मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों की मदद करती हैं। हालाँकि, कुछ टीम केवल मानसिक विकारों वाले लोगों पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। अन्य क्षेत्रों में, जटिल आवश्यकताओं वाली सेवाएं मौजूद हैं जिनसे आपको बेहतर मदद मिल सकती है।

आपका मूल्यांकन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के विशेषज्ञ द्वारा किया जाएगा, जिसमें मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक शामिल होंगे।

मूल्यांकन (Assessment)

बीपीडी के निदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानदंडों की एक चेकलिस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। निदान आमतौर पर तभी किया जाता है जब आप निम्न में से पांच या अधिक प्रश्नों का उत्तर हां में देते हैं:

  • अकेलेपन से डर लगना जिसके कारण आप अजीब हरकतें करते हैं जैसे कि किसी को लगातार फोन करना (लेकिन खुद को नुकसान न पहुंचाना या आत्मघाती व्यवहार न करना)?
  • क्या अन्य लोगों के साथ आपके गहरे और अस्थायी संबंध हैं। आप उस व्यक्ति से प्यार करने के बारे में सोचते हैं और नफरत भी करते हैं जिससे आप उसे भयानक और डरावना समझने लगते हैं?
  • क्या आपको कभी लगता है कि आप भावनात्मक रुप से अंदर से मजबूत नहीं है और अपनी आत्म-छवि को लेकर अस्पष्ट हैं?
  • क्या आप दो क्षेत्रों में आवेगी गतिविधियों में शामिल हैं जो आपके लिए हानिकारक हैं, जैसे असुरक्षित यौन संबंध, नशीली दवाओं का सेवन या फिजूल खर्च (लेकिन खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्मघाती व्यवहार के बारे में नहीं सोचते है)?
  • क्या आप पहले कभी बार-बार आत्महत्या की धमकी देने या आत्महत्या प्रयास किए हैं और खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश किए हैं?
  • क्या गंभीर रुप से आपका मूड स्विंग होता है, जैसे अधिक उदासी, चिंता या चिड़चिड़ा महसूस करना, जो कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक रहता है?
  • क्या आप लंबे समय तक खालीपन या अकेलापन महसूस करते हैं?
  • क्या आपको अचानक तेज गुस्सा और उत्तेजना महसूस होती है, और अक्सर अपने क्रोध को नियंत्रित करना मुश्किल होता है?
  • जब आप खुद को तनावपूर्ण परिस्थितियों में पाते हैं, क्या आपको पागलपन का अनुभव होता है, या क्या आपको ऐसा लगता है कि आप दुनिया से या अपने शरीर, विचारों और व्यवहार से कट या अलग हो गए हैं?

अपने परिवार को शामिल करना (Involving your family)

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी (बीपीडी) के निदान की पुष्टि हो जाने के बाद, आपको इसके बारे में अपने परिवार और करीबी दोस्तों को बताने की सलाह दी जाती है।

इसके अनेक कारण हैं।

बीपीडी के लक्षणों में से कई लक्षण आपके करीबी लोगों के साथ आपके संबंधों को प्रभावित करते हैं, इसलिए उन्हें अपने उपचार में शामिल करना जरूरी है ताकि उन्हें आपकी स्थिति से अवगत कराया जा सके और आपके उपचार को अधिक प्रभावी बना सकता है।

आपका परिवार और दोस्त आपके द्वारा किए जाने वाले किसी भी व्यवहार के लिए तैयार रहेंगे और यह समझ सकेंगे कि आप परेशानी में हैं।

इसके अलावा बीपीडी से पीड़ित व्यक्ति से संबंधित लोगों को स्थानीय सहायता समूहों और अन्य सेवाओं का लाभ भी मिल सकता है।

हालांकि, अपनी समस्या के बारे में बात करने का निर्णय पूरी तरह से आपका खुद का है, और आपकी गोपनीयता का हर हाल में सम्मान किया जाएगा।

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर का इलाज (Treating borderline personality disorder)

बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) से पीड़ित अधिकांश लोगों का इलाज चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा समुदाय में किया जाता है। उनका उद्देश्य मरीज को सहायता और उपचार प्रदान करना है। इसके साथ ही वह मरीज को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करते हैं।

CMHT में आमतौर पर शामिल होते हैं:

  • सामाजिक कार्यकर्ता
  • सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य नर्सें (जो मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में विशेष रुप से प्रशिक्षित होती हैं)
  • फार्मासिस्ट
  • परामर्शदाता और मनोचिकित्सक
  • मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक (मनोचिकित्सक आमतौर पर टीम में वरिष्ठ डॉक्टर होते हैं)

केयर प्रोग्राम अप्रोच (CPA) (Care programme approach)

यदि आपके लक्षण मध्यम से गंभीर हैं, तो आपको संभवतः एक उपचार प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा जिसे केयर प्रोग्राम अप्रोच (CPS) कहा जाता है।

CPA आमतौर पर यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि आप अपनी आवश्यकताओं के अनुसार सही उपचार मिल रहा है या नहीं। इसके चार चरण हैं:

  • आपके स्वास्थ्य और सामाजिक आवश्यकताओं का आकलन
  • देखभाल की योजना, जो आपके स्वास्थ्य और सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाई जाती है
  • केयर को-ऑर्डिनेटर (की-वर्कर) की नियुक्ति, आमतौर पर सामाजिक कार्यकर्ता या नर्स और सीएमएचटी के अन्य सदस्यों के साथ आपका पहला संपर्क
  • समीक्षा, जहां आपके उपचार की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है और देखभाल की योजना में कोई भी आवश्यक बदलाव किया जा सकता है

मनोचिकित्सा (Psychotherapy)

बीपीडी के इलाज में आमतौर पर कुछ मनोवैज्ञानिक थेरेपी भी शामिल होती है, जिसे मनोचिकित्सा कहा जाता है। मनोचिकित्सा कई प्रकार की होती है, लेकिन इन्हें आपकी समझ और भावनाओं को बेहतर बनाने में मदद करने में काफी समय लगता है।

आपके साथ जरूरी मुद्दों को सुनने और चर्चा करने के साथ, मनोचिकित्सक आपको समस्याओं को हल करने के तरीके के बारे में भी बता सकता है। जरूरत पड़ने पर वे आपको अपने दृष्टिकोण और व्यवहार को बदलने में भी मदद कर सकते हैं। बीपीडी के लिए थेरेपी का उद्देश्य लोगों को उनकी भावनाओं और विचारों पर बेहतर नियंत्रण पाने में मदद करना है।

बीपीडी से पीड़ित मरीजों को साइकोथेरेपी केवल एक प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा ही दिया जाना चाहिए। वे आमतौर पर एक मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक या अन्य प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर होने चाहिए। उनके अनुभव के बारे में पूछने से नहीं डरना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में बीपीडी के लिए सबसे अच्छा उपचार खोजा। यह सलाह देता है:

  • उपचार कम से कम 12-18 महीने तक चलता है
  • जो लोग खुद को नुकसान पहुंचाने के व्यवहार से जूझ रहे हैं, उन लोगों को डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी दी जाती है
  • मानसिक-आधारित चिकित्सा, जो समूह में और व्यक्तिगत रुप से दी जाती है
  • चिकित्सीय समुदाय और संरचनात्मक समूह थेरेपी कार्यक्रम

इन थेरेपी का वर्णन नीचे किया गया है।

इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि किसी अन्य प्रकार की थेरेपी सहायक होती है। यदि बचपन में यौन शोषण का इतिहास रहा है, तो व्यक्तिगत थेरेपी लेने में परेशानी आ सकती है। इसलिए हमेशा समूह में थेरेपी लेना शुरू करना चाहिए। व्यक्तिगत थेरेपी लेने से पहले डर से जुड़ी भावनाओं को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करना सीखना बेहतर हो सकता है।

आप किस तरह की थेरेपी चाहते हैं, यह आपकी व्यक्तिगत पसंद और आपके स्थानीय क्षेत्र में उपलब्ध इलाजों पर आधारित होती है।

डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी (DBT) (Dialectical behaviour therapy)

डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी (DBT) एक ऐसी थेरेपी है जो विशेष रूप से बीपीडी से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए दी जाती है।

यह थेरेपी इस बात पर आधारित होती है कि बीपीडी में दो महत्वपूर्ण कारक योगदान करते हैं:

आप विशेष रूप से भावनात्मक रूप से कमजोर हैं - जैसे कि जरा से तनाव के कारण आप अधिक हो जाते हैं

आप एक ऐसे वातावरण में पले-बढ़े हैं जहाँ लोग आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करते हैं - उदाहरण के लिए, यदि आप चिंता या तनाव महसूस करते हैं तो आपके माता-पिता यह कहते हैं कि तुम्हें दुखी होने का कोई अधिकार नहीं है या क्या 'मूर्खतापूर्ण' बातें कर रहे हो।

ये दो कारक आपको दुविधा में डाल सकते हैं - आप बहुत परेशान या निराश हैं और फिर भी आप पछतावा महसूस करते हैं और इन भावनाओं को बेकार समझते हैं। अपनी परवरिश के कारण आपको लगता है कि इन भावनाओं के कारण आप बुरे इंसान बन सकते हैं। ऐसे ख्याल आगे आपको और निराश कर सकते हैं।

डीबीटी का लक्ष्य दो महत्वपूर्ण अवधारणाओं के द्वारा इस चक्र को तोड़ना है:

  • वैलिडेशन: यह स्वीकार करना की आपकी भावनाएं वैध, वास्तविक और मानने योग्य है
  • डायलेक्टिक: दर्शन स्कूल के अनुसार, जीवन में ज्यादातर चीजें शायद ही कभी काली या सफेद होती हैं ’और ऐसे विचारों का खुलकर सामने आना जरूरी है जो आपके खुद के विचारों का विरोध करते हैं

डीबीटी थेरेपिस्ट आपके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए दोनों अवधारणाओं का उपयोग करते हैं।

उदाहरण के लिए, थेरेपिस्ट यह स्वीकार कर सकता है जब आपको अधिक उदास होते हैं तो आपको खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आ सकते हैं, और इस तरह से व्यवहार करने से आप डरावने या बेकार व्यक्ति नहीं बन सकते हैं।

लेकिन फिर थेरेपिस्ट इस धारणा को चुनौती देने का प्रयास करते हैं कि दुःख की भावनाओं से निपटने के लिए स्वयं को नुकसान पहुंचाना एकमात्र तरीका है।

डीबीटी का अंतिम लक्ष्य आपको दुनिया, रिश्तों और जीवन को बहुत संकीर्ण और कठोर तरीके से अलग सकारात्मक रूप से देखने में मदद करना है। यह नजरिया आपको हानिकारक और विनाशकारी व्यवहार से दूर रखने में मदद करता है।

डीबीटी में आमतौर पर सप्ताह में एक बार व्यक्तिगत और सामूहिक सत्र आयोजित होते हैं। यदि आपके लक्षण बदतर हो जाते हैं तो किसी भी समय संपर्क कर सकते हैं।

डीबीटी टीम वर्क पर आधारित है। आपसे अपने थेरेपिस्ट और अपने समूह सत्रों में अन्य लोगों के साथ सहयोग करने की उम्मीद की जा सकती है। बदले में, थेरेपिस्ट एक टीम के रूप में एक साथ काम करते हैं।

डीबीटी बीपीडी से पीड़ित उन महिलाओं के इलाज में विशेष रूप से प्रभावी साबित हुआ है जिनका खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्मघाती व्यवहार का इतिहास है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड क्लिनिकल एक्सीलेंस (एनआईसीई) द्वारा इन महिलाओं के प्राथमिक उपचार की सिफारिश की गई है।

MIND वेबसाइट पर डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी के बारे में और पढ़ें।

मानसिक चिकित्सा आधारित थेरेपी (MBT) (Mentalisation-based therapy)

एक थेरेपी का एक अन्य प्रकार है जो लंबे समय तक चलती है। इसका उपयोग बीपीडी के इलाज के लिए किया जाता है।इस थेरेपी को मानसिक चिकित्सा आधारित थेरेपी (एमबीटी) कहा जाता है।

एमबीटी इस अवधारणा पर आधारित है कि बीपीडी से पीड़ित लोगों की सोचने समझने की क्षमता अच्छी नहीं होती है।

मेंटलाइजेशन अपनी सोच के बारे में सोचने की क्षमता है। इसका अर्थ है अपने स्वयं के विचारों और विश्वासों की जांच करना, और यह आकलन करना कि वे उपयोगी, यथार्थवादी और वास्तविक हैं या नहीं।

जैसे कि, बीपीडी से पीड़ित कई लोगों को अचानक खुद को नुकसान पहुंचाने का मन करता है और फिर वे बिना सोचे समझे खुद को नुकसान पहुंचाते हैं। उनके पास उस आवेग को नियंत्रित करने की क्षमता नहीं होती है। फिर वे कहते हैं कि यह अच्छी बात नहीं है और मैंने ऐसा इसलिए सोचा क्योंकि मैं दुखी और परेशान था।

मेंटलाइजेशन का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा अन्य लोगों द्वारा अपने विचारों, भावनाओं, विश्वासों, इच्छाओं और जरूरतों को पहचानना है। अन्य लोगों की मानसिक स्थिति के बारे में आपकी सोच सही नहीं हो सकती है। इसके अलावा, आपको अपनी उन हरकतों के बारे में पता होना चाहिए जिससे दूसरों की मानसिक स्थिति प्रभावित होती है।

एमबीटी का लक्ष्य अपने स्वयं के और दूसरों की मानसिक स्थिति को पहचानने की आपकी क्षमता में सुधार करना है। इसके साथ ही अपने और दूसरों के बारे में आकलन करना है कि वे उचित हैं या नहीं।

प्रारंभ में, एमबीटी आमतौर पर अस्पताल में दिया जाता है, इसके लिए आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। उपचार के दौरान आमतौर पर एख थेरेपिस्ट के साथ दैनिक व्यक्तिगत सत्र होते हैं और बीपीडी से पीड़ित अन्य लोगों के साथ सामूहिक सत्र होते हैं।

एमबीटी का एक कोर्स आमतौर पर 18 महीने की अवधि का होता है। कुछ अस्पताल और विशेषज्ञ केंद्र आपको इस दौरान अस्पताल में रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अन्य अस्पताल और केंद्र आपको एक निश्चित अवधि के बाद अस्पताल छोड़ने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन कुछ लोग नियमित अस्पताल जाकर इलाज करा सकते हैं।

थेरेप्यूटिक कम्युनिटी (TCs) (Therapeutic communities)

चिकित्सीय समुदाय (टीसी) एक ऐसा वातावरण हैं जहां जटिल मनोवैज्ञानिक समस्याओं और जरूरतों वाले लोग बातचीत करने और थेरेपी में भाग लेने के लिए एक साथ जमा होते हैं।

टीसी लंबे समय तक भावनात्मक समस्याओं से जूझ रहे लोगों की मदद करने और उन्हें दूसरों के साथ सामाजिक रूप से बातचीत करने में मदद करता है।साथ ही आवश्यक कौशल सिखाकर खुद को नुकसान पहुंचाने के व्यवहार में सुधार करता है।

अधिकांश टीसी आवासीय होते हैं। ये बड़े घरों में चलते हैं, जहां आप सप्ताह में एक से चार दिन रह सकते हैं।

व्यक्तिगत और समूह थेरेपी में भाग लेने के साथ, आपको अपने सामाजिक कौशल और आत्मविश्वास में सुधार के लिए कुछ अन्य गतिविधियाँ करने की जरूरत पड़ेदी, जैसे:

  • घर के काम
  • खाना बनाना
  • गेम, स्पोर्ट्स और अन्य मनोरंजक गतिविधियाँ
  • नियमित सामुदायिक बैठकें, जहाँ लोग समुदाय में उत्पन्न होने वाले मुद्दों पर चर्चा करते हैं

टीसी को लोकतांत्रिक आधार पर चलाया जाता है। इसका मतलब यह है कि प्रत्येक निवासी और स्टाफ सदस्य वोट करता है कि टीसी को कैसे चलाया जाना चाहिए। साथ ही यह भी निर्धारित किया जाता है कि कोई व्यक्ति उस समुदाय में प्रवेश के लिए उपयुक्त है या नहीं।

यदि आपकी देखभाल टीम मानती है कि आपको टीसी में समय बिताने से फायदा हो सकता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि टीसी आपको इसमें शामिल होने की अनुमति देगा।

कई टीसी ने समुदाय के भीतर स्वीकार्य व्यवहार के बारे में दिशानिर्देश निर्धारित किए हैं, जैसे कि शराब नहीं पीना, अन्य निवासियों या कर्मचारियों के साथ कोई हिंसा नहीं करना, और खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करना है। इन दिशानिर्देशों को तोड़ने वालों को आमतौर पर टीसी छोड़ने के लिए कहा जाता है।

बीपीडी से पीड़ित कुछ लोगों को टीसी में समय बिताने से उनके लक्षणों में सुधार होने में मदद मिली है। हालांकि इस बात का पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि टीसी बीपीडी से पीड़ित सभी लोगों के लिए उपयोगी है या नहीं।

इसके अलावा, यदि आपको अपने व्यवहार को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है तो व्यवहार से जुड़े सख्त नियमों के कारण टीसी आपके लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है ।

समस्या का इलाज (Treating a crisis)

यदि आपको किसी तरह की परेशानी (जब लक्षण विशेष रूप से गंभीर होते हैं और खुदकुशी का खतरा बढ़ जाता है) होती है, तो यह बताने के लिए कई टेलीफोन नंबर दिए जाएंगे।।

इन नंबरों में से एक सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य नर्स का नंबर हो सकता है। अन्य नंबर सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोकल क्राइसिस रिज्योलुशन टीम (CRT) का हो सकता है।

क्राइसिस रिज्योलुशन टीम गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित उन लोगों का सहयोग करती है जो वर्तमान में तीव्र और गंभीर मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं। जिन्हें टीम की भागीदारी के बिना अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होगी। आत्महत्या का प्रयास इसमें से एक बड़ा मनोवैज्ञानिक समस्या है।

बीपीडी से पीड़ित लोग अपनी समस्या को समझने वाले व्यक्ति से बातचीत करने के बाद काफी राहत महसूस करते हैं। इसके अलावा उनके लक्षणों में सुधार होता है।

बहुत ही कम मामलों में मूड को शांत करने के लिए ट्रेंक्विलाइज़र जैसी दवा का एक छोटा कोर्स देना पड़ सकता है । इस दवा की खुराक आमतौर पर सात दिनों तक दी जाती है।

यदि आपके लक्षण काफी गंभीर हैं और इससे आपके स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो रहा है, तो आपको अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है। यदि आप अपनी सुरक्षा को लेकर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं तो आपको मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत डिटेंशन के माध्यम से अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता। इसमें बहुत कम समय लगता है और लक्षणों में सुधार होने के बाद आप घर लौट सकते हैं। हालांकि, डॉक्टर आपको तब तक नहीं रोकते जब तक कि बहुत जरूरी न हो।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।