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एगोराफोबिया / भीड़ / खुले स्‍थान का डर

मेडिकली रिव्यूड

परिचय

एगोराफोबिया एक ऐसी परिस्‍थिति में ख़ुद को पाने का डर है, जिसमें बचना मुश्‍किल हो या कुछ गलत होने पर मदद मिलना संभव न हो।

काफी लोग मानते हैं कि एगोराफोबिया पीड़ित लोग सिर्फ खुले स्‍थान से डरते हैं, मगर हकीक़त में यह कहीं ज्‍यादा जटिल अवस्‍था है। एगोराफोबिया से पीड़ित व्‍यक्‍ति निम्‍न बातों से डर सकता है :

  • सार्वजनिक परिवहन में सफर करने में
  • शॉपिंग सेंटर जाने में
  • घर से बाहर निकलने में

एगोराफोबिया के शिकार लोगों को तनावपूर्ण हालात में होने पर घबराहट का दौरा के लक्षण हो सकते हैं। इसमें शामिल है :

  • दिल की धड़कन बढ़ना
  • सांस तेज होना (हाइपरवेंटिलेटिंग)
  • गर्मी लगना या पसीना होना
  • ऊबकायी आना

ऐसे लोग बेचैनी बढ़ाने वाले हालात से दूर रहने की कोशिश करते हैं और दोस्‍त या पार्टनर के साथ ही घर से बाहर निकलते हैं। घरेलू सामान सुपरमार्केट जाकर लेने के बजाय वह ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं। व्‍व्यवहार में इस बदलाव को टालमटोल की प्रवृत्‍ति कहते हैं।

एगोराफोबिया के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

क्‍या कारण हैं एगोराफोबिया के?

एगोराफोबिया घबराहट के दौरे (panic disorder) की जटिलता के तौर पर होता है, जो एक प्रकार का ऐंज़ाइयटी डिसॉर्डर(anxiety disorder) है, जिसमें घबराहट के दौरे और गहन भय के पल शामिल हैं। इसकी शुरुआत किसी खास जगह या परिस्‍थिति में घबराहट होने के बाद उसके भय से होती है और फिर पीड़ित व्‍यक्‍ति उससे बचने की कोशिश में लगा रहता है।

एगोराफोबिया के शिकार थोड़े लोगों में पैनिक अटैक का कोई इतिहास नहीं होता है। इन मामलों में उनका डर अपराध, आतंकी हमला, बीमारी या दुर्घटनाग्रस्त‍ होने के भय से संबंधित होता है।

किसी करीबी की मृत्‍यु जैसी दर्दनाक घटनाएँ एगोराफोबिया को बढ़ावा देती हैं, साथ ही इसके लिए वंशनुगत जीन भी जिम्‍मेदार होते हैं।

एगोराफोबिया के संभावित कारणों के बारे में और पढ़ें।

एगोराफोबिया की पहचान

खुद के एगोराफोबिया से प्रभावित होने की आशंका होने पर अपने डॉक्‍टर से ज़रूर बात करनी चाहिए। अगर आप खुद डॉक्‍टर के पास नहीं जाना चाहते हैं, तो फोन से परामर्श लेना संभव हो सकता है।

डॉक्‍टर आपके लक्षणों के बारे में जानकारी माँगेंगे , किन हालात में और कितनी जल्‍दी ये नजर आते हैं। उन्‍हें यह बताना बेहद जरूरी है कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं और लक्षण आपको कैसे प्रभावित कर रहे हैं।

डॉक्‍टर आपसे निम्‍न सवाल पूछ सकते हैं :

  • घर से बाहर निकलना आपको तनावग्रस्‍त करता है?
  • ऐसी कौन से स्‍थान या परिस्‍थितियां हैं जिनसे आप बचना चाहते हैं?
  • लक्षणों से उबरने के लिए आप कोई तरकीब लगाते हैं, जैसे किसी और से अपने लिए शॉपिंग करवाना?

कभी-कभी अपने एहसास, भावनाओं और निजी जिंदगी के बारे में बात करना बहुत मुश्‍किल होता है, मगर चिंता या शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी चाहिए। सही पहचान के लिए डॉक्‍टर आपके लक्षणों के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानना चाहते हैं, ताकि सटीक इलाज का सुझाव दे सकें।

एगोराफोबिया की पहचान के बारे में और पढ़ें।

एगोराफोबिया का इलाज

एगोराफोबिया के शिकार ज़्यादातर लोगों में मनोवैज्ञानिक इलाज(बातचीत की थेरेपी) से काफी सुधार होता है, खासतौर से नीचे बताए जा रहे तीन चरणों का पालन करने पर राहत मिलती है।

आमतौर पर एगोराफोबिया और उससे जुड़े पैनिक विकार के चरणबद्ध इलाज की सलाह दी जाती है। इसमें शामिल है :

  • पहला स्‍टेप – अपनी अवस्‍था के बार में जानकारी लें, जीवनशैली के क्‍या संभावित बदलाव कर सकते हैं, और लक्षणों से राहत के लिए खुद की मदद के लिए क्‍या रास्‍ते अपनाए जा सकते हैं
  • दूसरा स्‍टेप – निर्देशित स्‍वयं सहायता कार्यक्रम में शामिल हों
  • तीसरा स्‍टेप – ज्‍यादा गहरा इलाज, जैसे कॉगनिटिव बिहेवियर थेरेपी(सीबीटी) या दवाएँ
  • जीवनशैली में बदलाव के तरीकों में नियमित व्‍यायाम करना, सेहतमंद खान पान और शराब, ड्रग्‍स और चाय, कॉफी व कोला जैसे कैफीनयुक्‍त पेय से दूरी बनाना शामिल हो सकता है।
  • पैनिक अटैक में मददगार स्‍वयं सहायता की तकनीक में जहां आप हैं वहीं रहना, उन चीजों पर ध्‍यान केंद्रित करना जो खतरनाक न हों और धीरे-धीरे व गहरी सांस लेना शामिल हो सकता है।

अगर आपको लगता है एगोराफोबिया के आपके लक्षणों में इलाज के इन तरीकों से मदद नहीं मिल रही है, तो डॉक्‍टर आपको निर्देशित स्‍वयं सहायता कार्यक्रम में शामिल होने का सुझाव दे सकते हैं। इसमें स्‍वयं सहायता मैनुअल के मुताबिक काम करना, जिसमें आप जिस तरह की परिस्‍थितियों से गुजर रहे हैं वह शामिल हों। साथ ही इससे निपटने का तरीका सुझाने वाली व्यवहारिक सलाह भी शामिल हो।

अगर आपके लक्षणों को नियंत्रित करने में स्‍वयं सहायता की तकनीक और जीवनशैली में बदलाव के तरीके कारगर नहीं हो रहे हैं, तो दवाओं का सुझाव दिया जा सकता है। अमूमन ऐसी परिस्‍थिति में सेलेक्‍टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएसआरआई, SSRIs) के कोर्स की सलाह दी जा सकती है। इनका इस्‍तेमाल अवसाद और बेचैनी के इलाज में भी किया जाता है।

एगोराफोबिया के गंभीर मामलों में दवाएँ CBT और शांत रहने की थेरेपी जैसे दूसरे तरह के इलाज के साथ दी जाती हैं।

एगोराफोबिया के इलाज के बारे में और पढ़ें।

आगे की संभावनाएँ

एगोराफोबिया के शिकार तकरीबन एक तिहाई लोग अंतत: पूरी तरह से लक्षणों से मुक्‍त होकर ठीक हो जाते हैं।

तकरीबन आधे लोगों को लक्षणों में सुधार महसूस होता है, मगर उन्‍हें कभी-कभी ऐसे दौर से गुजरना पड़ता है जब उनके लक्षण परेशानी पैदा करते हैं – जैसे तनावग्रस्‍त महसूस होना।

इलाज के बावजूद पांच में से करीब एक व्‍यक्‍ति में परेशान करने वाले लक्षण नजर आते हैं।

लक्षण

अलग-अलग लोगों में एगोराफोबिया की गंभीरता भी अलग-अलग हो सकती है।

मिसाल के तौर पर गंभीर एगोराफोबिया के शिकार लोग अकेले घर से बाहर नहीं निकल पाते हैं। इसके विपरीत औसत दर्जे के एगोराफोबिया के शिकार लोग कम दूरी की यात्राओं को बिना किसी समस्‍या के पूरी कर पाते हैं।

मोटे तौर पर एगोराफोबिया के लक्षणों को तीन प्रकार में बाँटा जा सकता है :

  • शारीरिक
  • अनुभव-संबंधी
  • व्‍यवहार संबंधी

नीचे इनके बारे और विस्‍तार से बताया जा रहा है।

शारीरिक लक्षण

एगोराफोबिया के शारीरिक लक्षण प्रभावित शख्‍स के घबराहट बढ़ाने के लिए जिम्‍मेदार वातावरण या जगह पर होने पर नजर आते हैं।

हालांकि एगोराफोबिया के शिकार ज़्यादातर लोगों में शारीरिक लक्षण नहीं दिखते हैं क्‍योंकि वे बेचैनी बढ़ाने वाली स्थितियों से बच कर रहते हैं।

एगोराफोबिया के शारीरिक लक्षण पैनिक अटैक के लक्षणों से काफी मेल खाते हैं, और इसमें शामिल है:

  • दिल की धड़कन तेज़ होना
  • सांस तेज चलना(हाइपरवेंटिलेटिंग)
  • गर्मी लगना या पसीना-पसीना होना
  • उबकाई आना
  • सीने में दर्द
  • निगलने में परेश्‍नी (डिसफेगिया)
  • डायरिया
  • कंपकंपी होना
  • चक्‍कर आना
  • कान में घंटियां बजना (टिनिटस)
  • बेहोशी छाना

कॉगनिटिव लक्षण

भावनाएं और विचार संबंधित एगोराफोबिया के कॉगनिटिव लक्षण शारीरिक लक्षणों से संबंधित होते हैं, मगर यह हमेशा जरूरी नहीं है।

कॉगनिटिव लक्षणों में निम्‍न प्रकार के डर शामिल हैं:

  • दूसरे लोगों के सामने एक पैनिक अटैक की वजह से आपको शर्मिंदगी महसूस होना या जड़ हो जाना
  • पैनिक अटैक जानलेवा भी हो सकता है – मिसाल के तौर पर आप चिंतित हो जाएं कि आपके दिल की धड़कन बंद हो जाएगा या आप सांस नहीं ले पाएंगे
  • आप किसी ऐसी जगह या परिस्‍थिति में हैं जिससे पैनिट अटैक होने पर आप बचकर निकल नहीं पाएंगे
  • आपका मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है
  • भीड़ में आप संतुलन नहीं रख पाएंगे
  • लोगों के सामने आपको कंपकपी हो सकती है और शर्मिंदा होना पड़ सकता है
  • लोग आपको घूर सकते हैं

ऐसे मनोवैज्ञानिक लक्षण भी हो सकते हैं, जिनका पैनिक अटैक से कोई संबंध न हो। जैसे कि :

  • आप दूसरों की मदद के बिना कोई काम नहीं कर सकते हैं या जीवित नहीं रह सकते
  • अपने घर में अकेले बंद हो जाने का डर (मोनोफोबिया)
  • चिंता और डर का साधारण एहसास

व्‍यवहारिक लक्षण

व्‍यवहार से संबंधित एगोराफोबिया के लक्षणों में शामिल है :

  • उन परिस्‍थितियों से बचना जिससे पैनिक अटैक का खतरा हो, जैसे भीड़ वाली जगह, पब्‍लिक ट्रांसपोर्ट और लाइन में लगना।
  • घर से बाहर न निकलना – लंबे समय के लिए घर छोड़कर बाहर नहीं निकल पाना
  • कहीं जाने के लिए किसी भरोसेमंद व्‍यक्‍ति का साथ चाहना
  • घर से दूर जाने से बचना

कुछ लोग असहज परिस्‍थितियों का सामना करने के लिए खुद को मज़बूती से तैयार कर पाते हैं, मगर ऐसा करने में उन्‍हें काफी डर और बेचैनी से गुज़रना पड़ता है।

कब लें डॉक्‍टर की सलाह?

अगर आप में एगोराफोबिया के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो अपने डॉक्‍टर से संपर्क कर सकते हैं।

निम्‍न में से कुछ भी नजर आने पर भी आप डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं:

  • सीने में दर्द
  • सांस की कमी
  • सिरदर्द
  • चक्‍कर आना
  • बेहोशी छाना
  • बेवजह कमज़ोरी होना
  • दिल की धड़कन असामान्‍य महसूस होना (पलपिटेशंस)
  • अवसाद
  • आत्‍महत्‍या का विचार या खुद को नुकसान पहुंचाना

कारण

अधिकांश मामलों में पैनिक डिसॉर्डर की जटिलता होती है एगोराफोबिया।

किसी शख्‍स को खास परिस्‍थिति या वातावरण में पैनिक अटैक होने पर भी एगोराफोबिया हो सकता है।

ऐसे लोग समान परिस्‍थिति या वातावरण में होने पर दूसरा पैनिक अटैक होने की आशंका से इतना परेशान हो जाते हैं कि उन्‍हें पैनिक अटैक के लक्षण लौटने का एहसास होने लगता है।

इसकी वजह से यह लोग खास परिस्‍थिति या वातावरण में रहने से बचने की कोशिश करते हैं।

पैनिक डिसॉर्डर

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की कई अवस्‍थाओं की तरह, पैनिक डिसॉर्डर का सटीक कारण पूरी तरह से ज्ञात नहीं है।

हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जैविक और मनोवैज्ञानिक कारणों का संयोग इसके लिए जिम्‍मेदार हो सकता है।

बायोलॉजिकल कारण

पैनिक डिसॉर्डर का संबंध विभिन्‍न प्रकार के जैविक(बायोलॉजिकल) कारणों से स्‍थापित करने वाली ढेरों अवधारणाएं हैं। इनके बारे में नीचे जानकारी दी जा रही है।

‘लड़ो या भागो’ प्रतिक्रिया

आकस्‍मिक डर के विकार की एक अवधारणा हमारे शरीर की ‘लड़ो या भागो’ की प्राकृतिक प्रतिक्रिया काफी करीबी से जुड़ी है – यह तनावपूर्ण और खतरनाक परिस्‍थितियों से बचने का तरीका है।

डर और बेचैनी होने पर शरीर में एड्रेनलाइन जैसे कुछ हॉर्मोन का स्राव होता है और आपकी सांस और दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं। यह खतरनाक या तनावपूर्ण परिस्‍थिति से खुद को सुरक्षित रखने का हमारे शरीर का प्राकृतिक तरीका है।

पैनिक डिसॉर्डर से ग्रस्‍त लोगों में ‘लड़ो या भागो’ की प्रतिक्रिया गलत तरीके से सक्रिय हो जाती है, जिसका नतीजा पैनिक अटैक के रूप में सामने आता है।

न्‍यूरोट्रांसमिटर्स(Neurotransmitters)

एक अन्‍य अवधारणा के मुताबिक मस्‍तिष्‍क में न्‍यूरोट्रांसमिटर्स(तंत्रिकासंचारक) के स्तर में असंतुलन होने से मिज़ाज और बर्ताव पर असर पड़ता है। इससे कुछ परिस्‍थितियों में प्रतिक्रिया के तौर पर तनाव काफी ज्‍यादा हो जाता है और पैनिक की भावना सक्रिय हो जाती है।

डर का जाल

डर का जाल एक अवधारणा है, जिसके मुताबिक पैनिक डिसॉर्डर से ग्रस्‍त लोगों के मस्‍तिष्‍क की संरचना ज्‍यादातर लोगों से अलग होती है।

डर का भाव जगाने वाले और उससे उपजने वाले शारीरिक संकेत उत्‍पन्‍न करने वाले मस्‍तिष्‍क के उस हिस्‍से में गड़बड़ी हो सकती है। यह डर की प्रबल भावना उत्‍पन्‍न कर पैनिक अटैक को सक्रिय करते हैं।

अपने स्थान पर होने का अहसास(स्‍पैटियल अवेयरनेस)

स्‍थानिक जागरूकता और आकस्‍मिक डर के विकार में संबंध होने की पहचान की गयी है। स्‍थानिक जागरूकता या स्‍पैटियल अवेयरनेस उस परिस्‍थिति को पहचानने की क्षमता को कहते हैं, जिसमें आपका संबंध किसी चीज या व्‍यक्‍ति से हो।

पैनिक डिसॉर्डर से ग्रस्‍त कुछ लोगों में संतुलन का तंत्र और स्‍थान की जागरुकता कमजोर होती है। इसकी वजह से भीड़ वाली जगह पर वे लोग व्‍याकुल या गुमराह महसूस करते हैं, जो पैनिक अटैक को सक्रिय कर देता है।

मनोवैज्ञानिक कारण

एगोराफोबिया का खतरा बढ़ाने वाले मनोवैज्ञानिक कारणों में शामिल है:

  • बचपन का दर्दनाक अनुभव, जैसे दोनों में से किसी एक अभिभाव की मृत्‍यु या यौन शोषण
  • तनावपूर्ण घटना से गुजरना, जैसे किसी प्रियजन की मृत्‍यु, डाइवोर्स या नौकरी छूट जाना
  • मानसिक रोग का इतिहास, जैसे अवसाद, एनोरेक्सिया नर्वोसा या बुलिमिया
  • शराब या ड्रग्‍स का दुरुपयोग
  • एक दुर्भाग्‍यपूर्ण रिश्‍ते में होना या ऐसे रिश्‍ते में जिसमें पार्टनर बहुत नियंत्रण करने वाला हो

पहचान

अगर आपको लगता है कि आप एगोराफोबिया के शिकार हैं तो अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।

खुद डॉक्‍टर के पास नहीं जाना चाहते हैं, तो फोन से परामर्श का भी इंतज़ाम किया जा सकता है।

डॉक्‍टर आपसे अपने लक्षणों के बारे में बताने को कहेंगे, कितनी बार ऐसा होता हैं और किन परिस्‍थितियों में। अपने डॉक्‍टर को यह बताना बेहद जरूरी है कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं और लक्षण आपको किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं।

डॉक्‍टर यह भी जानना चाहेंगे कि लक्षण आपके नियमित व्‍यवहार पर कैसे असर डाल रहे हैं। मिसाल के तौर पर वे पूछ सकते हैं :

  • क्‍या आपको घर से बाहर निकलने में तनाव महसूस होता है ?
  • ऐसी जगहें या परिस्‍थितियां हैं जिनसे आप बचना चाहते हैं ?
  • अपने लक्षणों से उबरने के लिए आपने कोई बचाव की रणनीति बनाई है, जैसे अपनी शॉपिंग के लिए दूसरों पर निर्भर होना ?

अपनी भावनाओं, एहसास और निजी जिंदगी के बारे में किसी और से बात करना मुश्‍किल होता है, मगर शर्मिंदा या बेचैन होने से बचना चाहिए। डॉक्‍टर आपके लक्षणों के बारे में जितना ज्‍यादा संभव हो उतना जानने चाहते हैं, ताकि मर्ज की सही पहचान कर उसके लिए सबसे उचित इलाज की सलाह दे सकें।

शारीरिक परीक्षण

हो सकता है डॉक्‍टर आपका शारीरिक परीक्षण कराना चाहें, कुछ अन्‍य मामलों में किसी दूसरी शारीरिक समस्‍या के लिए आपके खून की जांच कराने का भी फैसला कर सकते हैं जिसकी वजह से आपके लक्षण नजर आ रहे हैं।

मिसाल के तौर पर अत्‍यधिक सक्रिय थायरॉयड ग्रंथि (हाइपरथायरॉयडिज्‍म) की वजह से होने वाले लक्षण कई बार पैनिक अटैक से काफी मेल खाते हैं।

अंदर ही अंदर बढ़ रही किसी दूसरी चिकित्‍सकीय अवस्‍था की आशंका को दरकिनार कर डॉक्‍टर आपकी समस्या की सही पहचान कर सकते हैं।

पहचान की पुष्‍टि

अमूमन एगोराफोबिया की पहचान की जा सकती है जब:

  • आप किसी ऐसी जगह या परिस्‍थिति में होने को लेकर चिंतित होते हैं जहां आपको घबराहट या पैनिक अटैक होने पर बचना या मदद मिला मुश्‍किल हो, जैसे भीड़ में या बस में
  • ऊपर बताई गई परिस्‍थिति में होने से बचने की आप कोशिश करते हैं या काफी चिड़चिड़ाहट से या किसी साथी की मदद से उससे बाहर निकल पाते हैं
  • कोई ऐसी अंतरनिहित समस्‍या नहीं है, जो लक्षणों की वजह बन रही हो
  • मर्ज की पहचान को लेकर अगर कोई दुविधा है तो आप गहन आकलन के लिए सकाइट्रिस्‍ट से सलाह ले सकते हैं।

इलाज

एगोराफोबिया और किसी अंतरनिहित आकस्‍मिक डर के विकार के लिए अमूमन चरणबद्ध इलाज का सुझाव दिया जाता है।

यह चरण निम्‍न प्रकार से हैं :

  • पहला चरण – अपनी अवस्‍था के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जानकारी लें, जीवनशैली में बदलाव करें और लक्षणों में आराम के लिए स्‍वयं सहायता तकनीक की मदद लें
  • दूसरा चरण – निर्देशित स्‍वयं सहायता कार्यक्रम में खुद को शामिल करें
  • तीसरा चरण – कॉगनिटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसे ज्‍यादा सघन इलाज अपनाया जाए, या यह देखें कि आपके लक्षणों को दवाओं से नियंत्रित कर सकते हैं या नहीं

एगोराफोबिया के इलाज के विभिन्‍न तरीकों के बारे में नीचे बताया जा रहा है। आप एगोराफोबिया के इलाज के तरीकों के फायदे और नुकसान का सारांश पढ़ सकते हैं, जिससे आपको इलाज के तरीकों में तुलना करने में आसानी होगी।

जीवनशैली में बदलाव और स्‍वयं सहायता तकनीक

एगोराफोबिया और उसके आकस्‍मिक डर के विकार व पैनिक अटैक से जुड़ाव के बारे में अधिक जानकारी हासिल कर आप अपने लक्षणों को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।

मिसाल के तौर पर ऐसी कई तकनीकें हैं जिनका पैनिक अटैक के दौरान इस्‍तेमाल कर आप अपनी भावनाओं को काबू में कर सकते हैं।

अपनी भावनाओं को अधिक आत्‍मविश्‍वास के साथ नियंत्रित कर आप पूर्व में पेश आ चुकी असहज परिस्‍थितियों और वातावरण से ज्‍यादा भरोसे से उबर सकते हैं।

इन स्‍वयं सहायता तकनीकों के बारे में नीचे बताया जा रहा है।

  • जहां हैं वहीं रहें – पैनिक अटैक होने पर किसी सुरक्षित स्‍थान पर भाग जाने की तीव्र इच्‍छा का प्रतिरोध करें, अगर आप ड्राइव कर रहे हैं तो जहां सुरक्षित लगे वहां किनारे कर गाड़ी रोक कर खड़े हो जाएं
  • फोकस – ऐसे में जरूरी है किसी ऐसी नजर आने वाली मगर सुरक्षित चीज पर ध्‍यान केंद्रित करें, जैसे अपनी घड़ी में गुजरते समय पर, या सुपरमार्केट में रखी चीजों पर, खुद को यकीन दिलाएं कि डरावने विचार या एहसास घबराहट का लक्षण हैं और यह जल्‍द ही गुजर जाएंगे
  • धीरे-धीरे और गहरी सांस लें – तेज-तेज और जल्‍दी-जल्‍दी सांस लेने से घबराहट और चिड़चिड़ाहट बढ़ सकता है, अपना ध्‍यान धीरे-धीरे और गहरी सांस लेने की ओर केंद्रित करने के साथ ही सांस लेते और छोड़ते समय तीन की गिनती गिनें
  • डर को चुनौती दें – यह जानने की कोशिश करें आपको किस बात से डर लग रहा है और उसे चुनौती दें, आपका डर सच नहीं है और जल्‍द ही गुजर जाएगा यह बात खुद को लगातार याद दिलाते रहें।
  • रचनात्‍मक सोचें – पैनिक अटैक के दौरान मुसीबत या आपदा जैसे नकारात्‍मक विचार से खुद को दूर रखने की कोशिश करें, इसके बजाय किसी ऐसी जगह या परिस्‍थिति के बारे में सोचें जिससे आपको शांति मिलती हो या आराम आ जाए: एक बार यह तस्‍वीर आपके दिमाग में उभरने के बाद आप उस पर अपना सारा ध्‍यान केंद्रित करने की कोशिश करें
  • पैनिक अटैक से लड़ें नहीं – पैनिक अटैक के लक्षणों से लड़ने पर चीजें बिगड़ सकती हैं। इसके बजाय खुद को यह मानने के लिए यकीन दिलाएं कि पैनिक अटैक के लक्षण चाहे कितने भी शर्मिंदगी वाले हों और उनसे निपटना मुश्‍किल हो मगर यह जानलेवा नहीं होता

जीवनशैली में कुछ बदलावों से भी मदद मिल सकती है। मिसाल के तौर पर आप सुनिश्‍चित करें कि :

  • नियमित एक्‍सरसाइज – व्‍यायाम करने से आपका तनाव और दबाव कम होता है और मूड भी अच्‍छा होता है
  • स्‍वस्‍थ खानपान – खराब खानपान से घबराहट और तनाव के लक्षणों पर नकारात्‍मक असर होता है
  • ड्रग्‍स और शराब से दूरी – इनसे कुछ देर का आराम तो मिल सकता है, मगर लंबे समय में इससे आपके लक्षण बिगड़ सकते हैं

चाय, कॉफी या कोला जैसे कैफीनयुक्‍त पेय से दूरी बनाएं – कैफीन में उत्‍तेजना बढ़ाने की तासीर होती है, जो आपके लक्षणों को बिगाड़ सकती है

निर्देशित स्‍वयं सहायता(Guided self-help)

अगर आपके लक्षणों में ऊपर बताई गई स्‍वयं सेवा तकनीक और जीवनशैली में बदलाव से मदद नहीं मिल रही है तो डॉक्‍टर आपको निर्देशित स्‍वयं सहायता कार्यक्रम में शामिल होने की सलाह दे सकते हैं।

इसमें स्‍वयं सहायता मैनुअल के मुताबिक काम करना शामिल है, जिसमें आपके सामने आ रही परेशानियों और उनसे निपटने की व्‍यावहारिक सलाह होती है।

इंटरनेट आधारित कई कार्यक्रम भी उपलब्‍ध हैं। मिसाल के तौर पर कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं जो आपको अपनी भावनात्‍मक समस्‍या के बारे में सोचने और उनका समाधान निकालने में मदद करते हैं।

एगोराफोबिया के लिए निर्देशित स्‍वयं सहायता सीबीटी पर आधारित है, जिसका मकसद विचारों के असहयोगी और अवास्‍तविक स्‍वरूप में बदलाव कर व्‍यवहार में सकारात्‍मक परिवर्तन लाना है।

इसके विपरीत सीबीटी में एक्‍सपोजर थेरेपी नाम की विधा का इस्‍तेमाल किया जाता है, जिसमें प्रभावित शख्‍स का सामना धीरे-धीरे उसके डर का कारण बनने वाले हालात या चीजों से कराया जाता है और फिर उसे राहत पहुंचाने वाली तकनीक व सांस लेने की एक्सरसाइज के जरिए बेचैनी को कम करने में मदद की जाती है।

इस कार्यक्रम के तहत सीबीटी थेरेपिस्‍ट के साथ फोन पर या आमने-सामने बैठकर – तकरीबन 20 से 30 मिनट के – छोटे-छोटे सत्र आयोजित किए जाते हैं। आपको एगोराफोबिया और आकस्‍मिक भय के विकार से जूझने का इतिहास वाले लोगों के साथ सामूहिक कार्यों में शामिल होने के लिए आमंत्रित भी किया जा सकता है।

ज्‍यादातर स्‍वयं सहायता कार्यक्रमों में पांच से छह हफ्तों का कोर्स होता है जिसमें निर्धारित लक्ष्‍यों को पूरा करने की श्रृंखला होती है।

इंटेन्सिव थेरेपी

अगर स्‍वयं सहायता कार्यक्रम से मदद नहीं मिल रही है तो आपको अधिक सघन थेरेपी की सलाह दी जा सकती है। इसके तीन मुख्‍य विकल्‍प हैं :

थेरेपिस्‍ट के साथ CBT

व्‍यावहारिक तनाव-मुक्‍ति

दवाएं

कॉगनिटिव बिहेवियरल थेरेपी(CBT)

कॉगनिटिव बिहेवियरल थेरेपी इस सोच पर आधारित है कि असहयोगी और अवास्‍तविक सोच नकारात्‍मक व्‍यवहार के लिए जिम्‍मेदार है।

सीबीटी इस चक्र को तोड़कर सोच के नए रास्‍ते तलाश करती है, जिससे आप ज्‍यादा सकारात्‍मकता के साथ बर्ताव कर सकें। मिसाल के तौर पर एगोराफोबिया के शिकार बहुत लोगों को यह अवास्‍तविक विचार परेशान करता है कि अगर उन्‍हें पैनिक अटैक हुआ तो उनकी मौत हो जाएगी।

सीबीटी थेरेपिस्‍ट सोच के अधिक सकारात्‍मक तरीके को बढ़ावा देने की कोशिश करता है – मिसाल के तौर पर पैनिक अटैक चाहे कितना भी बुरा क्‍यों न हो, मगर यह जानलेवा नहीं है और जल्‍द ही गुजर जाएगा।

सोच में यह बदलाव सकारात्‍मक बदलाव की तरफ ले जाता है और संबंधित व्‍यक्‍ति पूर्व में उसे डराने वाली परिस्‍थितियों का डटकर सामने करने के लिए तैयार हो जाता है।

सीबीटी में अक्सर जोखिम चिकित्‍सा समाहित होती है जिसे इक्स्पोज़र थेरेपी भी कहते हैं। इलाज की शुरुआत में आपका थेरेपिस्‍ट कम मुश्‍किल लक्ष्‍य निर्धारित करता है, जैसे अपने घर के पास वाली दुकान पर जाना। जैसे-जैसे आपका आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है उसी अनुपात में लक्ष्‍यों की चुनौती का स्‍तर भी कठिन होता जाता है, जैसे किसी बड़े सुपरमार्केट में जाना या किसी बेहद व्‍यस्‍त रेस्‍तरां में जाकर खाना खाना।

सीबीटी के एक कोर्स में 12 से 15 हफ्तों के सत्र होते हैं, जिसमें प्रत्‍येक सत्र एक घंटे का होता है।

अप्लाइड तनाव-मुक्‍ति

लागू किये गए तनाव-मुक्‍ति(अप्‍लाइड रिलैक्‍सेशन) के तरीके का आधार यह सोच है कि एगोराफोबिया और उससे जुड़े आकस्‍मिक डर के विकार से ग्रस्‍त लोगों की शांत रहने की क्षमता खो चुकी है। अप्‍लाइड रिलैक्‍सेशन का मकसद प्रभावित शख्‍स को शांत रहना सिखाना होता है।

खासतौर से तैयार एक्‍सरसाइज की श्रृंखला का इस्‍तेमाल कर इसे हासिल किया जा सकता है, जो आपको सिखाती है:

  • तनाव के संकेत और एहसास को पहचानें
  • मांसपेशियों को आराम दें ताकि तनाव कम हो
  • इन तकनीक का इस्‍तेमाल दबाव वाली या रोज़मर्रा की परिस्‍थितियों में करें जिससे आप तनाव और घबराहट से बचें

सीबीटी की तरह अप्‍लाइड रिलैक्‍सेशन थेरेपी के कोर्स में 12 से 15 हफ्तों के साप्‍ताहिक सत्र होते हैं, जिसमें प्रत्‍येक सत्र एक घंटे लंबा होता है।

दवाएँ

एगोराफोबिया के कुछ मामलों में सिर्फ दवाएँ ही एकमात्र इलाज होती हैं। कुछ बेहद गंभीर मामलों में इनका इस्‍तेमाल सीबीटी या अप्‍लाइड रिलैक्‍सेशन थेरेपी के साथ किया जा सकता है।

सलेक्‍टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएसआरआई)

अगर आपको दवाओं का परामर्श दिया गया है, तो यह अधिकांश सलेक्‍टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएसआरआई) का कोर्स हो सकता है।

प्रारंभिक तौर पर एसएसआरआई को अवसाद का इलाज करने के लिए बनाया गया था, मगर बाद में यह मूड डिसऑर्डर से संबंधित घबराहट, हड़बड़ाहट का एहसास और सनकपूर्ण विचार जैसे अन्‍य विकार के इलाज में भी काफी कारगर सिद्ध हुई।

एगोराफोबिया से ग्रस्‍त लोगों में सरट्रालीन(sertraline) नामक एसएसआरआई दी जाती है। सरट्रालीन से जुड़े दुष्‍प्रभावों में शामिल है :

  • उल्‍टी आना
  • यौन इच्‍छा में कमी (लिबिडो)
  • नजर धुंधलाना
  • डायरिया या कब्‍ज
  • उत्‍तेजित या कंपकपी महसूस होना
  • बहुत पसीना आना

इन दुष्‍प्रभावों में कुछ समय में सुधार आने लगता है, हालांकि कुछ मामलों में ये लंबे समय तक बने रहते हैं।

सरट्रालीन(sertraline) से आपके लक्षणों में आराम नहीं मिल रहा है तो आपको एसएसआरआई की वैकल्‍पिक दवा या इससे मेल खाती सेरोटोनिन- नोरपीनफ्राइन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएनआरआई) ( serotonin-norepinephrine reuptake inhibitors, SNRIs) नाम की दवा दी जाती है।

SSRI या SNRI कितने समय तक लेनी होगी यह इलाज के प्रति आपकी प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। कुछ लोगों को SSRI 6 से 12 महीने या उससे ज्‍यादा समय तक लेनी पड़ सकती है।

जब आप और आपके डॉक्‍टर SSRI दवाएं बंद करने का फैसला करते हैं तो धीरे-धीरे आपको इसकी खुराक में कमी लाते हुए बंद करना चाहिए। आपको तब तक दवाएँ बंद नहीं करनी चाहिए जब तक डॉक्‍टर आपको ऐसा करने की सलाह न दें।

प्रीगेब्‍लिन(Pregabalin)

अगर चिकित्‍सकीय कारणों से आप SSRI या SNRIनहीं ले सकते हैं या आपको तकलीफदेह दुष्‍प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है तो प्रीगेब्‍लिन(Pregabalin) नाम की दूसरी दवा की सलाह दी जा सकती है। चक्‍कर आना और नींद आना प्रीगेब्‍लिन के सामान्‍य दुष्‍प्रभाव हैं।

बेंजोडायजेपाइंस(Benzodiazepines)

अगर आपको खासतौर पर घबराहट से संबंधित गंभीर लक्षण उभर रहे हैं, तो आपको बेंजोडायजेपाइंस का छोटी अवधि के कोर्स की सलाह दी जा सकती है। यह शांति प्रदान करने वाली दवा (tranquillisers) है, जो घबराहट को कम कर शांति और आराम पहुँचाती है।

बेंजोडायजेपाइंस को दो हफ्ते से ज्‍यादा समय तक लेने की सलाह नहीं दी जाती है क्‍योंकि इनसे नशे की लत लगने का खतरा होता है।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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