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प्रसवोत्तर मनोविकृति

मेडिकली रिव्यूड

प्रसव पश्चात मनोविकृति एक गंभीर मानसिक बीमारी है जिसमें एक स्त्री अपने बच्चे को जन्म देने के बाद इससे प्रभावित हो जाती है।

इससे उसे हलूसिनेशन(hallucinations) आते हैं और भ्रम का शिकार भी हो जाती है (मनोविकृति के लक्षण)।

प्रसव पश्चात मनोविकृति जन्म देने वाली 1000 महिलाओं में से एक में होती है। कभी-कभी इसे जच्चा मनोविकृति या प्रसव पश्चात मनोविकृति भी कहते हैं।

प्रसवोत्तर मनोविकृति के क्या लक्षण हैं?

प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित अधिकांश महिलाएं इस मानसिक बीमारी(एक ‘मनोविकार का दौर’) एवं अन्य लक्षणों को बच्चे के जन्म के करीब दो हफ्तों के अंदर महसूस करती है।

कुछ स्त्रियों में यह लक्षण बाद में होते हैं - कुछ में यह लक्षण तब विकसित होते हैं जब वह स्तनपान कराना बंद कर देती हैं या जब उनकी माहवारी फिर से शुरू हो जाती है।

मनोविकृति

मनोविकृति में लोग अपने आसपास के लोगों से अलग-अलग चीजें अलग-अलग तरीके से कहते हैं। इसके दो मुख्य लक्षण हैं:

  • मिथक विचार - सामान्यत: उन चीजों को देखना या सुनना जो वहां नहीं हैं,उदाहरण है - आवाजें सुनाई देना।
  • भ्रम- ऐसे विचार या बातों पर विश्वास करना जो कभी सच नहीं हो सकते(जैसे-आपने लॉटरी जीती है)

इन दोनो प्रकार के विचार उसकी सोच, समझ और व्यवहार को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर सकते हैं।

अन्य लक्षण

प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित महिला इस तरीके से व्यवहार करती है जो उसके असली व्यवहार से एकदम अलग होता है और इस कारण वह निम्नलिखित बातों को महसूस करती है:

  • उच्च मूड में रहना - वह बहुत ज्यादा बोलती है और सोचती है और बहुत जल्दी सोच लेती हैं, हमेशा ज्यादा खुश रहना, सामान्य से ज्यादा सामाजिक होना
  • संकोच खत्म होना
  • सनकी, संकोची या डरा हुआ महसूस करना
  • बैचेनी या गुस्से में होना
  • उदास रहना- उसमें अवसाद के भी लक्षण हो सकते हैं जिससे वह हमेशा रोती रहे, ऊर्जा की कमी होना, भूख न लगना, परेशानी, चिड़चिड़ापन या सोने में मुश्किल होना
  • हमेशा भ्रमित रहना

उसका मूड तेजी से बदलता है। कुछ प्रभावित महिलाएं पागलपन और अवसाद दोनों का समान समय में अनुभव करती हैं।

यह कितना गंभीर हो सकता है?

प्रसवोत्तर मनोविकृति एक गंभीर मानसिक बीमारी है, इसका मेडिकल इमरजेंसी के रूप में इलाज किया जाना चाहिए।

अगर इसका जल्दी इलाज नहीं किया गया, तो प्रसवोत्तर मनोविकृति बहुत जल्दी बुरी हो सकती है।

ये बीमारी में पीड़ित अपने बच्चे का ध्यान का ध्यान नहीं रख पाती और उसे या ख़ुद को नुक़सान पंहुच सकती है।

उसे यह नहीं पता चलता कि वह बीमार है, इसलिए उसके पति, परिवार या दोस्तों को चाहिए कि वह उन चेतावनियों के लक्षणों को समझकर उसपर कार्यवाही करें- या इसे ऐसे देखें कि अगर किसी में प्रसवोत्तर मनोविकृति के लक्षण विकसित हो जाएं तो आपको क्या करना चाहिए?

प्रसवोत्तर मनोविकृति से ग्रसित अधिकांश महिलाओं को अगर सही समय में सही इलाज मिल जाए तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाती हैं।

प्रसवोत्तर मनोविकृति का जोखिम किन्हें होता है?

प्रसवोत्तर मनोविकृति अधिकांश उन महिलाओं में होती है जिन्हें:

  • पहले भी प्रसवोत्तर मनोविकृति रही हो
  • जिसकी पहले से ही गंभीर मानसिक स्थिति है, जैसे-बाइपोलर डिसऑर्डर या सिजोफ्रेनिया( bipolar disorder or schizophrenia)
  • उनका कोई रिश्तेदार, जिसे पहले से यह मनोवैज्ञानिक समस्या रही है(अगर महिला को पहले से कोई मानसिक बीमारी न हो)

एकबार जब महिला में प्रसवोत्तर मनोविकृति विकसित हो जाए तो अगली गर्भवस्था के दौरान उसमें यह फिर से होने की संभावना होती है।

अगर किसी में प्रसवोत्तर मनोविकृति विकसित हो जाए तो मुझे क्या करना चाहिए?

अगर किसी में प्रसवोत्तर मनोविकृति विकसित हो जाए तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। अगर यह संभव नहीं है, तो अपने स्थानीय आपात सर्विस को सम्पर्क करें। अगर आपको ऐसा लगता है कि बहुत ज्यादा खतरा है तो एंबुलेंस को बुला लें।

अगर मुझे ऐसा लगे कि यह मेरे साथ हो रहा है तो मुझे क्या करना चाहिए?

अगर आपको ऐसा लगता है कि आप बहुत ज्यादा जोखिम की स्थिति में हैं और आपके पास स्वयं का एक केयर प्लान है, तो आपको तुरंत क्राइसिस टीम को कॉल करना चाहिए।

अगर आपके पास कोई केयर प्लान नहीं है, तो यह सोचें कि आपको इस मानसिक स्थिति के लिए जल्द ही अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए या अपने नज़दीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में चले जाना चाहिए।

प्रसवोत्तर मनोविकृति का इलाज कैसे किया जाता है?

प्रसवोत्तर मनोविकृति एक मनोवैज्ञानिक आपातकालीन स्थिति है। ज़रूरतमंद महिला को अस्पताल में इलाज के लिए दाखिल कर देना चाहिए।

इन मामलों में माँ को बच्चे के साथ विशिष्ट साइकेट्रिक यूनिट में एडमिट करना चाहिए जिसे मदर एंड बेबी यूनिट कहते हैं। कुछ महिलाओं के लिए वह इसकी अनुमति भी दे देते हैं जिससे बच्चे एवं मां के बीच वह जुड़ाव बना रहे। इससे उन महिलाओं के भीतर अपने मां होने की भूमिका जगी रहती है।

मेडिकेशन

आम तौर पर, प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित महिलाओं को एक से अधिक दवाइयाँ खाने को दी जाती हैं:

  • एंटीडिप्रेसेंट, यह दिमाग में मूड बदलने वाले रसायनों में संतुलन रखता है। यह विभिन्न लक्षणों जैसे मूड खराब होना, चिड़चिड़ापन, मन भटकना और अनिद्रा, को ठीक करने में मदद करते हैं। इन दवाइयों को लेने से मां सामान्य रूप से काम कर पाती हैं और अपने नवजात शिशु के साथ भी सही से तालमेल बिठा पाती है।
  • एंटीसाइकोटिक(न्यूरोलेप्टिक), यह डोपामाइन के प्रभाव को रोकता है (वह रसायन जो दिमाग में संदेश जाने देता है)
  • मूड को स्थिर करने वाली दवाएँ। अगर लिथियम खाने को कहा गया है तो कम से कम तीन माह सही नियमित खून की जांच की जानी चाहिए जिससे यह सुनिश्चित किया जाए कि लिथियम का स्तर न तो कम हो न ही ज्यादा।

डॉक्टर इन दवाओं की प्रभावशीलता और गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान उसके हानिकारक प्रभावों के जोखिम को मापेंगे।

प्रसवोत्तर मनोविकृति के क्या कारण हैं?

प्रसवोत्तर मनोविकृति के कारणों के बारे में हमें निश्चित तौर पर कुछ पता नहीं है। हॉरमोन में उतार-चढ़ाव और नींद लेने के तरीके भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, इसके अलावा आनुवंशिक कारण भी इसमें शामिल है क्योंकि अगर किसी महिला के रिश्तेदार को यह बीमारी है तो उसमें भी विकसित होने की संभावनाएं होती हैं।

प्रसवोत्तर मनोविकृति और व्यक्तित्व विकार के बीच भी एक कड़ी होती है।

यह समझना भी जरूरी है कि किसी महिला में उसके कारण से प्रसवोत्तर मनोविकृति नहीं होता न ही किसी तनाव के कारण न ही रिश्तों की समस्या या अनचाहे बच्चे की समस्या के कारण।

क्या प्रसवोत्तर मनोविकृति को रोका जा सकता है?

प्रसवपूर्व अपाइंटमेंट के दौरान एक महिला में प्रसवोत्तर मनोविकृति के जोखिम का आकलन करना चाहिए, क्यूँकि अगर बच्चे के जन्म के बाद उसमें वह विकसित हो जाए और उसके लक्षण सीधे दिखने लगें जाएं तो जल्दी से उसके उपचार का प्लान तैयार रहे।

प्रसवोत्तर मनोविकृति के कोई विशिष्ट स्क्रीनिंग टूल्स नहीं होते पर एंटीनेटल केयर टीम उस महिला के लक्षणों को पहचानने में सक्षम होनी चाहिए कि वह उसमें इसके होने पर महिला को किसी मनोचिकित्सक को रेफर कर सके।

अगर आपको ज्यादा जोखिम है...

अगर आप में प्रसवोत्तर मनोविकृति के होने की बहुत अधिक संभावनाएं हैं तो आपको गर्भावस्था के 32 हफ्ते में प्री-बर्थ प्लानिंग की बैठक के लिए बुलाया जाता है।

जो भी लोग आपकी देखभाल में शामिल हों, उन्हें भी इस बैठक के शामिल किया जाता है जैसे-आपके पति, परिवार या दोस्त, मानसिक स्वास्थ्य प्रोफेशनल, मिडवाइफ, स्वास्थ्य विजिटर और डॉक्टर को बुलाया जाता है।

इसका उद्देश्य यह होता है कि सभी को आपके जोखिम के बारे में सतर्क कर दिया जाए और आपकी देखभाल के उस प्लान के बारे में सभी से सहमति ली जाए।

शोध यह बताते हैं कि गर्भावस्था के अंतिम चरणों में कुछ खास दवाइयाँ लेने से उच्च जोखिम वाली महिलाओं में प्रसवोत्तर मनोविकृति को रोका जा सकता है। आपको अपनी केयर टीम के साथ इस विकल्प पर चर्चा करनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान दवाइयों के जोखिम एवं लाभ को हमेशा सावधानीपूर्वक देखा जाना चाहिए।

आपको इस बात की सलाह दी जा सकती है कि गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके उतना स्वस्थ रहना चाहिए, जैसे जिंदगी में किसी भी प्रकार के तनाव को कम करना और जितना संभव हो उतनी नींद लेना।

आपको अपने केयर प्लान की एक कॉपी मिलेगी जिसमें यह लिखा हुआ होना चाहिए कि अगर आप बीमार हो जाएं तो आपको और आपके परिवार को किस प्रकार से जल्दी से सहायता मिलनी चाहिए।

आपके बच्चे के पैदा होने के बाद मिडवायिफ और मानसिक स्वास्थ्य नर्स द्वारा नियमित जांच होनी चाहिए।

किसी प्रसवोत्तर मनोविकृति वाली स्त्री के लिए आगे की सम्भावना

सही इलाज के साथ, अधिकांश महिलाएं प्रसवोत्तर मनोविकृति के साथ बहुत जल्दी ठीक होने लगती हैं।

प्रसवोत्तर मनोविकृति के बाद कुछ महिलाओं में अपने बच्चे के साथ जुड़ाव पैदा करने में दिक्कत होती है पर यह लंबे समय तक नहीं चलता। अपने परिवार, दोस्तों और मेंटल हेल्थ टीम के सहयोग के साथ अधिकांश महिलाओं के अपने बच्चे के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हो जाते हैं।

यह कोई जरूरी नहीं कि दूसरा बच्चा होने के बाद - प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित क़रीब आधी महिलाओं को यह फिर से हो सकता है। ऐसे मामलों में उन्हें जल्दी से जल्दी मदद मिलनी चाहिए। सही इलाज मिलने से यह जोखिम कम हो सकता है।

प्रसवोत्तर मनोविकृति के कुछ मामलों के बाद कुछ दिनों के लिए अवसाद, परेशानी और आत्मविश्वास में कमी हो सकती है। इस बात को स्वीकार करने में थोड़ा वक़्त लग सकता है।

आगे के लिए सलाह एवं सहयोग

जिन महिलाओं को प्रसवोत्तर मनोविकृति है या हुआ है, उनके लिए ऑनलाइन फोरम और सहायता केंद्र मदद करते हैं।

प्रसवोत्तर मनोविकृति जीवन साथी के लिए भी तनाव और परेशानी वाली स्थिति हो सकती है। बच्चे और पत्नी दोनों के अस्पताल में होने पर उनमें अलगाव और अकेलापन पैदा हो सकता है।

अगर आप इस समस्या से जूझ नहीं पा रहे कि आपके पार्टनर को प्रसवोत्तर मनोविकृति है या वो उससे ठीक होने की कोशिश कर रही हैं तो अपने लिए मदद लेने से न हिचकिचाएँ।

अपने पार्टनर की देखभाल के लिए उपरोक्त कोई भी मदद लेने के लिए मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से बात करें

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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