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कोरियोनिक विलस सैंपलिंग क्या है? (What is chorionic villus sampling)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली एक जांच है जिसे जन्म लेने वाले बच्चे में विशेष असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली एक जांच है जिसे जन्म लेने वाले बच्चे में विशेष असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस दौरान गर्भनाल यानी प्लेसेंटा (वह अंग जो माँ से बच्चे में खून की आपूर्ति को जोड़ता है) से कोशिकाओं का नमूना लिया जाता है और आनुवंशिक दोषों की जांच की जाती है।

सीवीएस (Chorionic villus sampling), गर्भधारण के दौरान किया जाता है, जहां शिशु को गंभीर रूप से आनुवांशिक समस्याओं का खतरा होता है। आपको ये समस्याएं हो सकती हैं, यदि:

  • पिछली गर्भावस्था में भ्रूण से जुड़ी समस्याएं रही हों, जैसे बच्चा गुणसूत्र असामान्यताओं या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के साथ पैदा हुआ हो।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस या मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (cystic fibrosis or muscular dystrophy) जैसी समस्याएं आपके परिवार में पहले भी किसी को हो चुकी हों
  • पहले के एंटीनेटल स्क्रीनिंग टेस्ट में किसी समस्या जैसे सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anaemia) (इनहेरिटेड ब्लड डिसऑर्डर) की पहचान हुई हो

सीवीएस (Chorionic villus sampling) का इस्तेमाल क्यों किया जाता है इसके बारे में और पढ़ें, अन्य समस्याओं की जानकारी सहित यह जल्दी निदान करने में मदद कर सकता है।

सीवीएस (Chorionic villus sampling) गर्भावस्था के 10वें और 13वें सप्ताह के बीच किया जाता है और आमतौर पर इससे पहले इसे कराने का सुझाव नहीं दिया जाता है। अगर सीवीएस (Chorionic villus sampling) गर्भावस्था के 10वें हफ्ते में किया जाता है तो इसके कारण शिशु में गर्भपात या जन्म दोष जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

सीवीएस (Chorionic villus sampling) से होने वाली समस्याओं के बारे में और पढ़ें।

सीवीएस या एम्नियोसेंटेसिस? (Chorionic villus sampling OR Amniocentesis)

सीवीएस (Chorionic villus sampling) एम्नियोसेंटेसिस का एक विकल्प है। इसमें जांच के लिए मां के एम्नियोटिक फ्लुइड (amniotic fluid) का नमूना लिया जाता है। सीवीएस (Chorionic villus sampling) को एम्नियोटिक (amniotic) की अपेक्षा पहले किया जाता है जो आमतौर पर गर्भावस्था के 15वें और 20वें हफ्ते के बीच किया जाता है।

एम्नियोसेंटेसिस (amniocentesis) का परिणाम आने में दो से तीन हफ्तों का समय लगता है। इसका मतलब यह है कि जब तक आपका परिणाम आता है, तब तक आपके गर्भावस्था के 20 या इससे अधिक समय बीत चुके होते हैं और गर्भावस्था अधिक एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है।

यदि आपको अपने बच्चे में कोई आनुवांशिक बीमारी होने का खतरा है, तो आपके डॉक्टर या दाई आपसे जांच के बारे में चर्चा करेंगे और बताएंगे कि जांच क्यों जरूरी है। साथ ही आपको और आपके साथी को निर्णय लेने में मदद करेंगे।

कुछ मामलों में आपको जेनेटिक काउंसलर (जेनेटिक्स में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी) के पास भेजा जा सकता है। वे बच्चे में कुछ आनुवंशिक बीमारियां होने के जोखिम पर चर्चा करेंगे और सीवीएस (Chorionic villus sampling) का परिणाम आने पर आगे के लिए उचित सलाह दे सकते हैं।

यह कैसे किया जाता है? (How is it performed?)

सीवीएस (Chorionic villus sampling) के दौरान गर्भवती महिला के गर्भनाल यानी प्लेसेंटा से कोशिकाओं का नमूना लिया जाता है, जिसे कोरियोनिक विली सेल्स (chorionic villi cells) कहते हैं। इस नमूने का निम्न जांच में इस्तेमाल होता है:

  • ट्रांसएब्डॉमिनल सीवीएस (transabdominal CVS) - इसमें पेट के जरिए एक सूई डाली जाती है।
  • ट्रांससर्वाइकल सीवीएस (transcervical CVS) - इसमें गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) के जरिए एक नली डाली जाती है।

सीवीएस (Chorionic villus sampling) कैसे किया जाता है, इसके बारे में और पढ़ें।

जांच करने में लगभग 5 मिनट का समय लगता है। हालांकि पूरे परामर्श में लगभग 30 मिनट लगेंगे। सीवीएस (Chorionic villus sampling) के दौरान आमतौर पर दर्द नहीं होता है लेकिन आपको थोड़ी असहजता जरूर होती है। बाद में पेट में हल्की ऐंठन होती है जो मासिक धर्म के जैसा होता है।

पहला परिणाम कुछ दिनों के भीतर उपलब्ध हो जाता है। इससे आपको गुणसूत्र समस्या के बारे में जानकारी मिल सकती है।

पूरा परिणाम आने में दो से तीन हफ्ते का समय लगता है। यदि किसी विशेष समस्या के निदान के लिए टेस्ट किया गया हो तो परिणाम आने में एक महीने लग सकते हैं।

सीवीएस कैसे काम करता है? (How does CVS work)

गर्भावस्था के शुरूआती चरण में भ्रूण दो भागों में बंटा होता है:

  • एक हिस्से का विकास बच्चे के रूप में होता है।
  • दूसरा हिस्सा नाल या प्लेसेंटा के रुप में विकसित होता है।

प्लेसेंटा (Placenta) बनाने वाले भ्रूण का हिस्सा उंगली के जैसे निकलता है जिसे कोरियोनिक विली (chorionic villi) कहा जाता है। ये मां की रक्त वाहिकाओं (blood vessels) के करीब जाने के लिए गर्भ की दीवार में दब जाते हैं।

कोरियोनिक विली (chorionic villi) निषेचित अंडे (fertilised egg) के विभाजन से बनते हैं। इसका मतलब है उनका डीएनए भ्रूण के बिल्कुल समान और उन्हें वैसी ही आनुवांशिक समस्या हो सकती है। कोरियोनिक विली में कोई भी असामान्यता भ्रूण में भी मौजूद हो सकता है।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग की जटिलताएं (Complications of chorionic villus sampling)

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (Chorionic villus sampling) का निर्णय लेने से पहले आपके डॉक्टर, दाई या जेनेटिक काउंसलर आपसे इसके जोखिम और संभावित जटिलताओं के बारे में चर्चा करेंगे। जिसमें गर्भपात भी शामिल होता है।

गर्भपात (Miscarriage)

सीवीएस (Chorionic villus sampling) के कारण गर्भपात का भी खतरा रहता है। इस दौरान गर्भावस्था 23वें हफ्ते में खत्म हो सकती है। रॉयल कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (आरसीओजी) के अनुसार, सीवीएस (Chorionic villus sampling) के बाद गर्भपात का जोखिम लगभग 2% होता है। अधिकांश अनुमान बताते हैं कि सीवीएस एम्नियोसेंटेसिस की अपेक्षा अधिक खतरनाक है, जिसमें लगभग 1% मामलों में अपने आप गर्भपात का खतरा होता है।

सीवीएस असफल होना (CVS failure)

कभी-कभी जांच के लिए कोरियोनिक विली (chorionic villi) का सैंपल निकालते समय यह प्रक्रिया असफल हो जाती है। लगभग 5% प्रक्रियाओं में ऐसा होता है। यह इसलिए होता है क्योंकि पर्याप्त कोशिकाएं नहीं ली जाती हैं या मां की कोशिकाओं का सैंपल दूषित होता है। ट्रांससर्वाइकल सीवीएस (transcervical CVS) में असफलता की संभावना सबसे अधिक होती है क्योंकि यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से अधिक कठिन होती है। इस स्थिति में प्रक्रिया को दोहराना जरूरी होता है।

संक्रमण (Infection)

सभी तरह की शल्य प्रक्रियाओं में सीवीएस (Chorionic villus sampling) से पहले या सीवीएस (Chorionic villus sampling) के दौरान संक्रमण का खतरा बना रहता है। यदि आपकी त्वचा या इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण पर बैक्टीरिया हो तो आपको संक्रमण हो सकता है। प्रत्येक 1,000 प्रक्रिया में 1 से कम में गंभीर संक्रमण का खतरा होता है।

रीसस सेंसिटाइजेशन (Rhesus sensitisation)

यदि आपके खून का प्रकार रीसस-निगेटिव और आपके बच्चे का खून रीसस-पॉजीटिव है तो सीवीएस (Chorionic villus sampling) के दौरान सेंसिटाइजेशन हो सकता है। रीसस सेंसिटाइजेशन (Rhesus sensitisation) तब होता है जब आपके बच्चे का खून आपके खून में पहुंच जाता है और आपका शरीर इस पर हमला करने के लिए एंटीबॉडी बनाने लगता है।

यदि इसका इलाज न किया जाए तो बच्चे में रीसस रोग हो सकता है। सेंसिटाइजेशन से बचने के लिए एंटी-डी इम्युनोग्लोबुलिन (anti-D immunoglobulin) दवा का इंजेक्शन दिया जाता है।

भ्रूण में असामान्यता (Foetal abnormalities)

भ्रूण के अंगों में असामान्यता के कुछ मामले सामने आए हैं, जैसे कि हाथ और पैर की उंगलियां छोटी होना, या न होना। गर्भावस्था के 10वें हफ्ते से पहले सीवीएस (Chorionic villus sampling) कराने से अन्य परीक्षण के कारण यह असामान्यता हो सकती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है। इन जटिलताओं से बचने के लिए 10वें हफ्ते के गर्भावस्था से पहले सीवीएस (Chorionic villus sampling) नहीं कराना चाहिए।

सीवीएस क्यों कराना चाहिए (Why it should be done)

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (Chorionic villus sampling (CVS)) भ्रूण में शुरूआती चरण में विशेष आनुवंशिक समस्याओं का निदान करने के लिए किया जाता है।

यदि कोई ऐसी समस्या पायी जाती है जिसका इलाज नहीं किया जा सकता है या यह बच्चे में विकलांगता पैदा करती है तो माता-पिता को गर्भपात कराने का निर्णय लेना पड़ता है। यदि माता-पिता गर्भावस्था को रखना चाहते हैं तो सीवीएस से उन्हें समस्या के बारे में पहले ही जानकारी मिल जाती है और उन्हें आगे की चुनौतियों के लिए तैयार होने में काफी समय मिलता है।

सीवीएस से भ्रूण में इन समस्याओं का निदान किया जाता है:

  • क्रोमोसोमल समस्याएं जैसे डाउन सिंड्रोम (Down's syndrome) एक ऐसी बीमारी जो किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट को और मानसिक विकास की क्षमता को प्रभावित करती है।

  • आनुवंशिक बीमारी जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस (cystic fibrosis) जिसमें शारीरिक स्राव मोटा और चिपचिपा हो जाता है और कुछ अंग सही ढंग से काम नहीं करते हैं।

  • मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम से जुड़ी बीमारी जैसे कि डचेने मस्कुलर डिस्ट्रॉपी (Duchenne muscular dystrophy) यह एक आनुवंशिक समस्या जिसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और बच्चा विकलांग हो सकता है।

  • रक्त विकार जैसे थैलेसीमिया (thalassaemia) एक ऐसी समस्या है जो शरीर द्वारा लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने की क्षमता को प्रभावित करती है, या सिकल सेल एनीमिया (sickle-cell anaemia) जो लाल रक्त कोशिकाओं द्वारा आपके शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है।

  • मेटाबोलिज्म संबंधी विकार जैसे एंटीट्रीप्सिन की कमी, जिसमें आपका शरीर प्रोटीन अल्फा -1 एंटीट्रिप्सिन, या फेनिलकीटोनुरिया (phenylketonuria) नहीं बनाता है। इसके अलावा शरीर एंजाइम फेनिलएलनिन हाइड्रॉक्सिल (enzyme phenylalanine hydroxylase) भी नहीं उत्पन्न करता है।

  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम, यह एक ऐसी समस्या है जो आपकी शारीरिक बनावट, बुद्धि और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

इसके अलावा कुछ अन्य समस्याओं के निदान के लिए भी सीवीएस (Chorionic villus sampling) का इस्तेमाल किया जाता है।

सीवीएस (Chorionic villus sampling) से न्यूरल ट्यूब में असामान्यता का पता नहीं लगाया जा सकता है। ये जन्म दोष हैं जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करते हैं, जैसे कि स्पाइना बिफिडा (spina bifida)। इनका निदान आमतौर पर अल्ट्रासाउंड स्कैन से किया जा सकता है।

यदि आपके बच्चे को कोई ऐसी बीमारी होने की संभावना है, जिसका सीवीएस से निदान किया जा सकता है तो आपके डॉक्टर या दाई आपसे इस बारे में चर्चा करेंगे। आपको प्रक्रिया के दौरान होने वाले जोखिम और परिणाम का सामना करने के बारे में भी बताया जाएगा।

कुछ मामलों में आपको आगे की बातचीत के लिए जेनेटिक के विशेषज्ञ जेनेटिक काउंसलर या डॉक्टर के पास भेजा जा सकता है।

यह कैसे किया जाता है? (How is it performed)

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (Chorionic villus sampling) में गर्भवती महिला के गर्भनाल के ऊतक से कोशिकाओं का एक सैंपल लिया जाता है। इन कोशिकाओं को कोरियोनिक विली (chorionic villi) कहा जाता है।

यह प्रक्रिया हमेशा अल्ट्रासाउंड स्कैन की देखरेख में की जाती है ताकि यह देखा जा सके कि एम्नियोटिक थैली (सुरक्षा थैली जो बच्चे के विकास के समय उसे तरल पदार्थ के रूप में कुशन के रूप में काम करती है) में कुछ भी प्रवेश नहीं कर पाए या बच्चे को छू न पाए।

सीवीएस दो अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है:

  • ट्रांसएब्डॉमिनल सीवीएस (transabdominal CVS)
  • ट्रांससर्वाइकल सीवीएस (transcervical CVS)

ज्यादातर मामलों में ट्रांसएब्डॉमिनल (transabdominal) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

ट्रांसएब्डॉमिनल सीवीएस (Transabdominal CVS)

ट्रांसएब्डॉमिनल सीवीएस (Transabdominal CVS) के दौरान आपके पेट को एंटीसेप्टिक से साफ किया जाता है और इसके जरिए एक सूई डाली जाती है। अल्ट्रासाउंड स्कैन पर चित्र का इस्तेमाल करके सुई को आपके गर्भ की ओर डाला जाता है।

सुई से एक सिरिंज जुड़ा होता है। इसका इस्तेमाल कोरियोनिक विली (chorionic villi) का एक छोटा सैंपल लेने के लिए किया जाता है। सैंपल निकालने के बाद सुई को बाहर निकाल दिया जाता है।

ट्रांससर्वाइकल सीवीएस (Transcervical CVS)

ट्रांसवेरिकल सीवीएस (Transcervical CVS) के दौरान आपके गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) से कोरियोनिक विली (chorionic villi) का एक सैंपल लिया जाता है।

सबसे पहले, आपकी योनि और गर्भाशय ग्रीवा को एंटीसेप्टिक से साफ किया जाएगा। एक ट्यूब को आपकी योनि और गर्भाशय ग्रीवा के जरिए डाला जाता है और अल्ट्रासाउंड स्कैन का इस्तेमाल करके कोरियोनिक विली (chorionic villi) की ओर प्रवेश किया जाता है। इस दौरान कोरियोनिक विली (chorionic villi) का सैंपल लेने के लिए एक संक्शन का इस्तेमाल किया जाता है, फिर ट्यूब को हटा दिया जाता है।

किस तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए? (Which method will be used)

ज्यादातर मामलों में ट्रांसएब्डॉमिनल (transabdominal) तरीके को प्राथमिकता दी जाती है। इसका कारण यह है कि ट्रांससर्वाइक (transcervical) विधी से सैंपल प्राप्त करना कठिन होता है और ट्यूब को एक से अधिक बार डालना पड़ता है।

इसके अलावा ट्रांससर्वाइकल सीवीएस (Transcervical CVS) के तुरंत बाद योनि से रक्तस्राव होने की संभावना अधिक होती है। आमतौर पर 10 में से 1 महिला को इस प्रक्रिया के बाद रक्तस्राव होता है। हालाँकि, दोनों विधियों के बीच गर्भपात की दर में कोई अंतर नहीं है।

यदि इस तरीके से प्लेसेंटा तक पहुंचना आसान हो तो ट्रांसएब्डॉमिनल (transabdominal CVS) के बजाय ट्रांससर्वाइकल सीवीएस (Transcervical CVS) अधिक पसंद किया जा सकता है।

क्या सीवीएस के दौरान दर्द होता है? (Is CVS painful)

सीवीएस पीड़ादायक होने के बजाय थोड़ा असहज होता है। ज्यादातर मामलों में जहां सुई डाली जाती है, उस क्षेत्र को सुन्न करने के लिए ट्रांसएब्डॉमिनल सीवीएस (transabdominal CVS) से पहले लोकल एनेस्थेशिया का एक इंजेक्शन दिया जाता है। लेकिन बाद में आपको पेट में हल्का दर्द हो सकता है।

ट्रांससर्वाइकल सीवीएस (Transcervical CVS) स्मीयर टेस्ट के जैसा महसूस होता है।

इसमें कितना समय लगता है? (How long does it take)

आमतौर पर सीवीएस की पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 मिनट का समय लगता है। लेकिन जांच के कारण यदि आपको कोई रिक्शन जैसे भारी रक्तस्राव होता है, ऐसे मामले में एक घंटे तक आपकी देखभाल की जाएगी। फिर आप घर जाकर आराम कर सकते हैं।

रिकवरी (Recovery)

सीवीएस की प्रक्रिया के बाद ऐंठन होना सामान्य है। यह आमतौर पर मासिक धर्म में होने वाले ऐंठन और हल्के योनि रक्तस्राव के समान होता है जिसे स्पॉटिंग (Spotting) कहते हैं। यह एक से दो दिनों तक रहता है। यदि आपको दर्द महसूस होता है तो आप दर्दनिवारक जैसे पैरासिटामोल (Paracetamol) का सेवन कर सकती हैं।

इसके अलावा आपको कुछ दिनों तक भारी काम करने से बचना चाहिए। अगर आपको कुछ लक्षण महसूस होते हैं तो अपने डॉक्टर, या अस्पताल से संपर्क करें जहाँ आपने सीवीएस की प्रक्रिया कराई थी। इन लक्षणों में शामिल हैं:

  • 38 ° C (100.4 ° F) या उससे अधिक तापमान
  • ठंड लगना या कंपकंपी होना
  • योनि से अधिक रक्तस्राव या डिस्चार्ज
  • ऐंठन

परिणाम आना (Getting the results)

पहला परिणाम कुछ दिनों के भीतर उपलब्ध हो जाता है। इससे आपको पता चल जाएगा कि गुणसूत्र की समस्या है या नहीं।

पूरा परिणाम जिसमें की गंभीर समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं, आने में दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। यदि जांच किसी विशेष बीमारी के लिए की गई हो तो परिणाम आने में एक महीने का समय लग सकता है।

सीवीएस के परिणाम के बारे में और पढ़ें।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग से उबरना या ठीक होना

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (Chorionic villus sampling) किए जाने के बाद कोरियोनिक विली (chorionic villi) के सैंपल को प्रयोगशाला में ले जाया जाता है। वहां माइक्रोस्कोप से कोशिकाओं की जांच की जाती है।

इस दौरान कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या गिनी जा सकती है और असामान्यताओं का पता लगाने के लिए गुणसूत्रों की संरचना की जांच की जाती है। यदि सीवीएस (Chorionic villus sampling) किसी विशेष आनुवंशिक बीमारी के निदान के लिए किया जाता है तो इसके लिए भी सैंपल की जांच की जाती है।

सीवीएस (Chorionic villus sampling) लगभग 99% सटीक होता है। हालांकि, इससे हर जन्म दोष की जांच नहीं की जा सकती है और ना ही यह बेहतर परिणाम देता है। लगभग 1% मामलों में, सीवीएस से यह पता नहीं लगाया जा सकता कि भ्रूण में गुणसूत्र सामान्य हैं।

यदि ऐसा होता है तो माता-पिता से कोशिकाओं में गुणसूत्रों की जांच के लिए दोबारा टेस्ट करना जरूरी होता है। इसके साथ ही निदान के लिए एम्नियोसेंटेसिस (amniocentesis) (एक वैकल्पिक जांच जिसमें मां से एम्नियोटिक फ्लुइड का सैंपल लिया गया हो) होना भी जरूरी है।

जांच का परिणाम (Test Result)

जांच के कुछ दिनों के भीतर पहला परिणाम उपलब्ध हो जाता है। इससे आपको गुणसूत्र में असामान्यता के बारे में पता चल सकता है।

पूरा परिणाम आने में दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। यदि किसी विशेष समस्या के निदान के लिए टेस्ट किया गया हो तो परिणाम आने में एक महीने का समय लग सकता है।

सीवीएस (Chorionic villus sampling) कराने वाली अधिकांश महिलाओं की जांच का परिणाम सामान्य होता है। इसका अर्थ यह है कि बच्चे को कोई बीमारी नहीं होती है।

हालांकि कभी-कभी सामान्य परिणाम होना संभव है लेकिन आमतौर पर बच्चा उसी बीमारी के साथ पैदा होता है जिसके निदान के लिए जांच करायी गई हो। नॉर्मल टेस्ट रिजल्ट से संभावित आनुवांशिक समस्या खत्म नहीं हो सकती है।

यदि आपका टेस्ट पॉजिटिव है तो बच्चे को वह बीमारी हो सकती है। टेस्ट पॉजिटिव आने पर इसके बारे में आपसे बात की जाएगी। गुणसूत्र से जुड़ी समस्याओं का कोई इलाज नहीं है। इसलिए आपको इन विकल्पों पर विचार करना चाहिए:

  • अपनी गर्भावस्था को जारी रखते हुए उस समस्या के बारे में जानकारी जुटाना ताकि आप अपने बच्चे की देखभाल के लिए तैयार हो सकें।
  • गर्भपात कराना

यदि आप गर्भपात के बारे में सोच रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें। वे आपको जरूरी जानकारी और सलाह दे सकते हैं।

उदाहरण के लिए, गर्भपात का विकल्प इस बात पर निर्भर करेगा कि यह निर्णय लेते समय आप कितने सप्ताह की गर्भवती हैं। यदि आप गर्भपात कराना चाहती हैं, तो काउंसलर से बात कर सकती हैं। आपके डॉक्टर या दाई गर्भपात कराने में आपकी मदद कर सकते हैं।

एंटेनाटल रिजल्ट्स एंड चॉइस (Antenatal Results and Choices) नामक संगठन माता-पिता को एंटेनाटल टेस्टिंग (antenatal testing) और इससे जुड़े विषयों पर बात करने में मदद करता है।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।