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रंगहीनता (अल्बाइनिज्म-Albinism)

मेडिकली रिव्यूड

परिचय

ऐल्बिनिज़म (Albinism) त्वचा, बालों और आंखों में रंग भरने वाले पिगमेंट मेलानिन (melanin) के उत्पादन पर असर करता है। इसकी समस्या से ग्रस्त लोगों में मेलानिन (melanin) की मात्रा कम हो जाती है या वह बिल्कुल खत्म हो जाता है जिसके कारण विशेष लक्षण दिखने लगते हैं। कई बार ये जन्म के समय से ही नज़र आते हैं।

व्यक्ति में मौजूद मेलानिन (melanin) की मात्रा पर निर्भर करता है कि उनके बाल, त्वचा और आंखों का रंग काफी पीला होगा। हालांकि ऐल्बिनिज़म वाले कुछ लोगों में बालों का रंग भूरा या जिंजर और त्वचा का रंग हल्का लाल हो जाता है।

ऐल्बिनिज़म से ग्रस्त लोगों में आमतौर पर आंखों के लेकर कई स्थितियां पैदा हो जाती हैं जैसे:

  • नजर की समस्या- उन्हें चश्मा लगाने से लाभ हो सकता है हालांकि इनसे पूरी तरह आंख का विजन ठीक नहीं हो सकता।
  • पुतलियों का अनायास घूमना (निस्टाग्मस- nystagmus)
  • फोटोफोबिया (photophobia) (रोशनी का लेकर संवेदनशीलता)

ऐल्बिनिज़म के लक्षणों और उसकी पहचान के बारे में और अधिक पढ़ें।

ऐल्बिनिज़म की वजह क्या है?

ऐल्बिनिज़म में मेलानिन (melanin) पैदा करने वाले सेल्स विरासत में मिले जेनेटिक म्यूटेशंस (जीन्स की खराबी) की वजह से सही तरीके से काम नहीं करते।

ऐसे कई ख़राब जीन होते हैं जिसके चलते ऐल्बिनिज़म हो सकता है और ये बच्चों में उनके मां बाप से आता है।

ऐल्बिनिज़म के कारणों के बारे में और पढ़ें।

कौन प्रभावित होता है?

एक अनुमान के मुताबिक हर 17,000 में से एक व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार का ऐल्बिनिज़म होता है।

यह स्थिति आमतौर पर दोनों लिंगों को समान रूप से प्रभावित करती है हालांकि एक प्रकार का आंख का ऐल्बिनिज़म (ocular albinism) पुरुषों में ज्यादा आम है।

ऐल्बिनिज़म सभी संजातीय समूहों में होता है।

ऐल्बिनिज़म से ग्रस्त लोगों का उपचार

ऐल्बिनिज़म का कोई इलाज करने की जरूरत नहीं होती लेकिन उससे जुड़ी त्वचा और आंख की समस्या का कई बार इलाज करना पड़ता है।

ऐल्बिनिज़म की समस्या वाले बच्चे को नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी पड़ती है और ऐसा संभव है कि उन्हें अपनी निकट या दूर की दृष्टि या दृष्टि की विषमता के दोष को दूर करने के लिए चश्मा या कांटेक्ट लेंस लगाना पड़े।

ऐल्बिनिज़म वाले लोगों को सूर्य का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। मेलानिन (melanin) के बिना सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट (यूवी) किरणें उनकी त्वचा को आसानी से क्षतिग्रस्त (सनबर्न) कर सकती हैं और उनमें त्वचा के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

दृष्टिकोण

ऐल्बिनिज़म एक जीवन पर्यन्त रहने वाली स्थिति है, लेकिन ये समय के साथ खराब नहीं होती।

ऐल्बिनिज़म दृष्टि वाला व्यक्ति कभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाता चाहे वह चश्मा लगाए या कांटेक्ट लेंस। और इस स्थिति वाले बच्चों को स्कूल में अतिरिक्त सहयोग की जरूरत पड़ती है।

ऐल्बिनिज़म वाले बच्चे को किसी तरह की बुलिंग से निपटने के लिए भी सहयोग की जरूरत होती है क्योंकि उनका अलग दिखना इसकी वजह बन जाता है।

बहरहाल, इसका कोई कारण नहीं है कि ऐल्बिनिज़म की समस्या वाला व्यक्ति सामान्य तरीके से स्कूल में क्यों नहीं पढ़ सकता या आगे शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपना कौशल क्यूँ नहीं दिखा सकता।

ऐल्बिनिज़म के संकेत और लक्षण

ऐल्बिनिज़म में मेलानिन (melanin) पिगमेंट की कमी व्यक्ति के बालों, त्वचा तथा/या आंखों के रंग पर असर डालती है।

ऐल्बिनिज़म का सबसे आम प्रकार ओक्यूलोक्यूटेनियस अल्बिनिज्म (ओसीए) (oculocutaneous albinism (OCA) है जो इन सभी पर असर डालता है। एक दुर्लभ प्रकार है ओक्यूलर अल्बिनिज्म (ocular albinism (OA) जो मुख्य रूप से आंखों पर असर करता है। हालांकि इस स्थिति वाले व्यक्ति में त्वचा और बाल उनके पूरे परिवार से साफ होते हैं।

बाल और त्वचा

ऐल्बिनिज़म वाले व्यक्तियों के बाल अक्सर सफेद या काफी हल्के चमकीले बाल होते हैं। बहरहाल, कुछ लोगों में भूरे या लाल रंग के बाल होते हैं। उनके बालों का रंग इस बात पर निर्भर करता है कि उनका शरीर कितना मेलानिन (melanin) पैदा करता है।

ऐल्बिनिज़म से ग्रस्त लोगों की त्वचा काफी पीली होती है जो टैन नहीं होती और सूरज की रोशनी में आसानी से जल जाती है।

आंखें

ऐल्बिनिज़म की समस्या वाले व्यक्ति के आइरिसिज (irises) (आंख का रंगीन भाग) में पिगमेंट नहीं होता है। इसके परिणामस्वरूप उनकी आंखें आमतौर पर पीले रंग वाली नीली या स्लेटी रंग की होती हैं। यह गायब पिगमेंट उनमें आंखों की अन्य स्थितियां भी पैदा कर देता है, जैसे:

  • कमजोर नजर- मायोपिया (myopia) या हाइपरोपिया (hyperopia) या कम दिखना ( जिसे ठीक नहीं किया जा सकता)
  • ऐस्टीगमैटीज़्म (astigmatism) - जहां कोर्निया (cornea) (आंख का आगे का भाग) पूरी तरह से कर्व आकार में नहीं होता या उसका लैंस असामान्य आकार में होता है जिससे धुंधला नजर आता है।
  • फोटोफोबिया (photophobia) - जहां पर आंखें प्रकाश को लेकर संवेदनशील होती हैं।
  • पुतलियों का अनायास घूमना (निस्टाग्मस- nystagmus)- इसमें आंखें अनियंत्रित रूप से एक तरफ से दूसरी तरफ घूमती हैं जिससे दिखना कम हो जाता है। ऐल्बिनिज़म वाले व्यक्ति की आंखें लगातार घूमती रहती हैं फिर भी उन्हें ये दुनिया झूलती हुई नजर नहीं आती क्योंकि उनका दिमाग उनकी घूमती आंखों के संकेतों को समझना सीख लेता है।
  • भेंगापन(squint)- इसमें आंखें अलग-अलग दिशा में संकेत करती हैं।

ऐल्बिनिज़म की समस्या वाले छोटे बच्चों में कई बार दृष्टि का गंभीर दोष होता है और हालांकि पहले छह माह में उनकी दृष्टि में काफी सुधार होता है लेकिन यह कभी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंचती।

ऐल्बिनिज़म की समस्या वाले छोटे बच्चे काफी अव्यवस्थित होते हैं क्योंकि अपनी कम नजर के चलते वे कई कार्य और मूवमेंट करना सीखने में पिछड़ जाते हैं जैसे किसी चीज को उठाना या घुटनों को बल चलना। लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, नजर में प्रयोग होने वाली चीज़ों की मदद से इस समस्या में सुधार आ जाता है।

संबंधित स्थितियां

ऐल्बिनिज़म के संकेत और लक्षण समान स्थिति वाले लोगों में भी पाए जाते हैं जैसे हरमेंस्की पुडलक सिंड्रोम (एचपीएस) Hermansky Pudlak syndrome (HPS) और चेडियक-हिगासी सिंड्रोम (सीएचएस) Chediak-Higashi syndrome (CHS)।

ये दुर्लभ जेनेटिक स्थितियां होती हैं जो ऊपर बताए गए एस्टिगमैटिज्म के लक्षणों के अतिरिक्त अन्य लक्षणों की वजह बन सकती हैं।

एचपीएस (HPS) से खून बहने की समस्या (bleeding disorders) भी हो सकती है जैसे अनियंत्रित रूप से खून बहना या आसानी से चोट लगना। इससे दिल, किडनी, फेफड़े और अंतड़ियों पर असर पड़ सकता है। सीएचएस (CHS) इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है और उससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

अगर आपके बच्चे में ऐल्बिनिज़म की समस्या है और आप ध्यान देते हैं कि उसे काफी खून बहता है, आसानी से चोट लग जाती है या वे बार-बार बीमार पड़ जाते हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें।

ऐल्बिनिज़म के कारण

ऐल्बिनिज़म मेलानिन पिगमेंट की कमी से होता है जो बालों, त्वचा और आंखों को रंग देता है।

मेलानिन रेटीना ( आंख के पीछे अंदर की तरफ नर्व सेल्स की पतली परत) के विकास और रेटीना और दिमाग के बीच संपर्क में अहम भूमिका निभाता है। इसी की वजह से ऐल्बिनिज़म वाले ज्यादातर लोगों में दृष्टि विकार होता है।

ऐल्बिनिज़म वाले लोगों में मेलानिन (melanin) बनाने वाले सेल्स जीन्स की खराबी के कारण सही तरीके से काम नहीं करते।

ऐल्बिनिज़म के दो मुख्य प्रकार हैं:

  • ओक्यूलोक्यूटेनियस अल्बिनिज्म (oculocutaneous albinism (OCA)) -सबसे आम प्रकार जिसमें त्वचा, बाल और आंखें प्रभावित होती हैं।
  • ओक्यूलर अल्बिनिज्म (ocular albinism (OA)) - एक दुर्लभ प्रकार जो आंखों पर असर डालता है।

ये दोनों प्रकार विभिन्न जैनेटिक दोष की वजह से होते हैं और उन्हें कई अन्य उपश्रेणियों में रखा जा सकता है जो काफी सारे अलग-अलग ख़राब जीन की वजह से होते हैं।

ऐल्बिनिज़म किस प्रकार परिवार में आगे बढ़ता है?

अधिकांश मामलों में, सभी तरह के ओसीए (OCA) और ओए (OA) के कुछ प्रकारों के ज्यादातर मामलों में ऐल्बिनिज़म ऑटोसोमल रिसेसिव इनहेरिटेंस पैटर्न (autosomal recessive inheritance pattern) द्वारा आगे बढ़ते हैं।

बहरहाल, ओए (OA) के कुछ प्रकारों की वजह एक्स क्रोमोसोम (X chromosome-सेक्स क्रोमोसोम में से एक) पर म्यूटेशन होती है। इसे एक्स-लिंक्ड इनहेरिटेंस पैटर्न (X-linked inheritance pattern) कहा जाता है।

ऑटोसोमल रिसेसिव इनहेरिटेंस (autosomal recessive inheritance pattern)

इस स्थिति का अर्थ यह होता है कि इस हालत के लिए आपके दोषपूर्ण जीन की विरासत में दो प्रतियां (एक आपकी मां से दूसरी आपके पिता से) मिली हैं।

अगर दोनों अभिभावकों में ये जीन हैं तो चार में से एक सम्भावना है कि उनके बच्चे में ऐल्बिनिज़म हो और दो में से एक बार होगा कि वे इसके वाहक हों।

एक्स-लिंक्ड इनहेरिटेंस (X-linked inheritance)

एक्स-लिंक्ड रिसेसिव कंडीशन (X-linked recessive conditions) में कई बार महिलाओं पर असर नहीं होता क्योंकि महिलाओं में दो एक्स क्रोमोसोम (X chromosomes) होते हैं जिनमें से एक सामान्य होता है और म्यूटेटिड क्रोमोसोम (mutated chromosome) की क्षतिपूर्ति करता है। पर, जो महिलाएं म्यूटेशन (mutation) को विरासत में प्राप्त करती हैं वे उसकी वाहक बन जाती हैं।

अगर कोई पुरुष अपनी मां से म्यूटेशन (mutation) विरासत में लेता है (पुरुष वाई क्रोमोसोम (Y chromosome ) अपने पिता से हासिल करता है) तो उसमें सामान्य जीन की प्रति नहीं होती और उनमें ऐल्बिनिज़म विकसित हो जाती है।

जब कोई मां एक एक्स-लिंक्ड म्यूटेशन (an X-linked mutation) की वाहक होती है तो उसकी हर बेटी में दो में से एक केस में होता है कि वह वाहक बने और हरेक पुत्र में दो में से एकबार होता है कि उसमें ऐल्बिनिज़म की समस्या हो।

जब एक पिता में एक्स-लिंक्ड कंडीशन (X-linked condition) होता है तो उसकी बेटियां म्यूटेशन (mutation) की वाहक होती हैं।ऑटोसोमल रिसेसिव इनहेरिटेंस (autosomal recessive inheritance pattern)

इस स्थिति का अर्थ यह होता है कि इस हालत के लिए आपके दोषपूर्ण जीन की विरासत में दो प्रतियां (एक आपकी मां से दूसरी आपके पिता से) मिली हैं।

अगर दोनों अभिभावकों में ये जीन हैं तो चार में से एक अवसर है कि उनके बच्चे में रंगहीनता (अल्बाइनिज्म-Albinism) हो और दो में से एक अवसर होगा कि वे इसके वाहक हों।

जेनेटिक काउंसलिंग

अगर आपके परिवार में ऐल्बिनिज़म का इतिहास है या आपके बच्चे में ऐसी स्थिति है तो आपको जेनेटिक काउंसलिंग के लिए भेजा जा सकता है।

जनेटिक काउंसलिंग एक ऐसी सर्विस होती है जो जेनेटिक स्थितियों के बारे में सहयोग, जानकारी और सलाह मुहैया करवाती है।

एक वयस्क या बच्चा जिसमें ऐल्बिनिज़म की समस्या की पहचान हुई है उन्हें जेनेटिक काउंसलिंग के लिए रेफर किया जा सकता है ताकि वे इस बात पर विमर्श कर सकें कि यह उन्हें कैसे मिली और यह स्थिति कैसे और आगे तक जा सकती है।

जेनेटिक टेस्टिंग और काउंसलिंग के बारे में और पढ़ें।

ऐल्बिनिज़म की पहचान

ज्यादातर मामलों में ऐल्बिनिज़म का उनके जन्म के समय दिखने वाले लक्षणों से ही पता चल जाती है।

पिंगमेंट की गैर मौजूदगी की पड़ताल करने के लिए बच्चे के बालों, त्वचा और आंखों की जांच की जाती है जैसे सफेद बाल या पीली स्लेटी आंखें।

आंखों की जांच

ऐल्बिनिज़म में कई तरह के आंखों के विकार हो सकते हैं। इसके लिए उस बच्चे की आंखों पर होने वाले असर को लेकर कई तरह की जांच की जाती है।

इन परीक्षणों के लिए उन्हें किसी ऑप्थोमोलॉजिस्ट (Ophthalmologists) के पास भेजा जा सकता है। ये डॉक्टर आंखों की समस्याओं की जांच करने और उसके उपचार करने वाले विशेषज्ञ होते हैं। ये मुख्य रूप से अस्पतालों के नेत्र विभागों में काम करते हैं।

आंखों की जांच के दौरान विशेषज्ञ निम्न चीज़ें कर सकते हैं:

  • बच्चे के प्यूपिल (pupils) को बढ़ाने के लिए आई ड्राप का प्रयोग कर सकते हैं
  • एक स्लिट लैंप से बच्चे की आंख की जांच करेंगे जो कि एक माइक्रोस्कोप होता है जिस पर काफी तेज लाइट लगी होती है
  • आंखों के अनियंत्रित घूमने के संकेतों की जांच करेंगे (इसमें आंखें एक तरफ से दूसरी तरफ अनियंत्रित रूप से घूमती हैं)
  • भेंगेपन के संकेतों की जांच करेंगे, इसमें आंखें विपरीत दिशा में देखती हैं।
  • दृष्टि वैमस्य के संकेतों की जांच, इसमें कोर्निया (cornea) (आंख का अगला हिस्सा) पूरी तरह से कर्व्ड शेप में नहीं होता।

विकार की पड़ताल करने के लिए कई बार इलेक्ट्रोडायग्नोस्टिक टेस्टिंग (Electrodiagnostic testing) भी की जाती है। इसमें स्कैल्प में छोटे इलेक्ट्रोड फंसाए जाते हैं और आंखों की दृष्टि को निंयत्रित करने वाले दिमाग के हिस्से को आंखों से जोड़ने वाले संपर्क की जांच की जाती है।

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है उन्हें नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी पड़ती है और उन्हें चश्मा या कांटेक्ट लैंस भी लगवाना पड़ता है।

ऐल्बिनिज़म से ग्रस्त लोगों का उपचार एवं सहयोग

इस विकार के इलाज की जरूरत नहीं होती लेकिन इससे जुड़ी त्वचा और नेत्र की समस्याओं का कई बार उपचार करने की जरूरत पड़ती है।

आंखों की समस्या

ऐल्बिनिज़म की समस्या वाले कई बच्चों में जीवन के शुरुआती कुछ महीनों में गंभीर रूप का दृष्टि दोष होता है लेकिन थोड़ा बड़े होने पर उनकी आंखों की ज्योति में धीरे-धीरे काफी हद तक सुधार हो जाता है। इसे विलंबित दृष्टि सुधार कहा जाता है।

बहरहाल, उनकी नजर कभी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाती इसलिए उन्हें उनकी नजर में सुधार करने की जरूरत होती है और कम दृष्टि के साथ जीना सीखना पड़ता है।

चश्मे और कांटेक्ट लैंस

अगर बच्चे की नजदीक की नजर (मायोपिया-myopia) या दूर की नजर खराब (हाइपरोपिया-hyperopia) है तो चश्मा या कांटेक्ट लैंस से उनकी दृष्टि में सुधार हो सकता है।

नजर में विकृति को दूर करने के लिए चश्मा या कांटेक्ट लैंस का प्रयोग किया जा सकता है, यह तब होता है जब कोर्निया (cornea) (आंख के सामने) सही तरीके से आकार में न हो।

नियमित आंखों की जांच से चश्मे और लैंसों का प्रिस्क्रिप्शन चेक किया जा सकता है। आंखों की जांच के बारे में और अधिक जानकारी के लिए चिकित्सक से मिलें।

कम दृष्टि

ऐल्बिनिज़म की समस्या वाले व्यक्ति की दृष्टि कभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, किसी चश्मे या कांटेक्ट लैंस से उसे कभी भी पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। बहरहाल, कम दृष्टि वाले लोगों के लिए कई तरह के उपाय उपलब्ध हैं:

  • बड़े-प्रिंट या हाई कंट्रास्ट वाली किताबें और प्रिंटिड मैटिरियल (उदाहरण के लिए काली पृष्ठभूमि पर सफेद अक्षर) जैसे स्कूल के प्रिंटआउट और परीक्षा के पर्चे
  • मैग्निफाइंग लैंस
  • एक छोटा टेलीस्कोप या टेलीस्कोपिक लैंस जो चश्मे के साथ जुड़ा होता है तो उसे दूर से पढ़ने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे स्कूल ब्लैकबोर्ड
  • बड़ी स्क्रीन वाला विशेष कंप्यूटर या साफ्टवेयर जो बोली गई बात को टाइप कर सकता है या लिखी गई बात को बोल सकता है
  • टैबलेट और स्मार्टफोन जो डिस्पले को बड़ा कर सकते हैं और लिखना और चीजों को देखना आसान बना देते हैं
  • घर को आपके अनुरूप तैयार करने में मदद करना जैसे दरवाजों, फ्रेम्स, दरवाजों के हैंडल, बैनिस्टर्स और लाइट के स्विचों को ब्राइट कलर करना
  • नजर की समस्या के लिए विशेष तकनीक का प्रयोग जैसे कंप्यूटर और फोन
  • नजर के दोष वाले बच्चों के लिए स्कूल के विकल्प के बारे में सलाह

इसमें कोई संदेह नहीं है कि उचित सहायता और सहयोग के साथ रंगहीनता (अल्बाइनिज्म-Albinism) वाले ज्यादातर बच्चे मुख्यधारा वाले स्कूल में पढ़ सकते हैं।

फोटोफोबिया (Photophobia)

चश्मा या टिंटिड चश्मा पहनने से रोशनी से संवेदनशीलता (Photophobia) कम की जा सकती है। एक चौड़े कौने वाला हैट बाहर पहना जा सकता है। इस हैट का फैब्रिक गहरे रंग का होना चाहिए और चमकीला न हो ताकि उसका रिफ्लैक्शन आंखों पर न पड़े।

भेंगापन (squint)

यह ऐसा विकार होता है जिसमें एक आंख दूसरी आंख की विपरीत दिशा में देखती है। इसे स्टारबिसमस (strabismus) भी कहते हैं। ये बचपन की आम समस्या है और उसका उपचार अमूमन भेंगेपन की वजह बनने वाली समस्याओं को ठीक करने के लिए चश्मों से किया जाता है।

अगर आपके बच्चे का भेंगापन उनमें लेजी आई (जिसमें दृष्टि प्रभावित आंख की वजह से धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है क्योंकि दिमाग इसके भेजे गए संकेतों को अनदेखा करता है) की परेशानी पैदा कर रहा है तो उन्हें उन्हें अपने सही आंख पर पैच पहनने से मदद मिलेगी ताकि दूसरी आंख ज्यादा मेहनत करे।

सात या आठ साल की उम्र तक के बच्चों के लिए पैच असरदार होते हैं। ज्यादातर बच्चों को कई सप्ताह तक हर दिन कुछ घंटों तक पैच पहनने होते हैं।

कुछ मामले में आंखों का संतुलन बनाने के लिए आंखों की सर्जरी भी की जा सकती है और उन्हें एक साथ कार्य करने के लिए तैयार किया जा सकता है।

भेंगेपन की सर्जरी के बारे में और अधिक पढ़ें।

पुतलियों का अनायास घूमना (निस्टाग्मस- nystagmus)

यह आंखों का अनचाहे रूप से घूमने की समस्या है, आमतौर पर एक तरफ से दूसरी तरफ। इसकी वजह से दिखाई देना कम हो जाता है जिसे चश्मे या कांटेक्ट लैंस से भी ठीक नहीं किया जा सकता।

वर्तमान में इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसमें दर्द नहीं होता और स्थिति और गंभीर भी नहीं होती। कई खिलौने और गेम्स बच्चों को उनकी दृष्टि में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। एक ऑप्थाल्मोलॉजिस्ट (ophthalmologist-आंखों की समस्या का उपचार करने वाला विशेषज्ञ) इस बारे में और अधिक सलाह दे सकता है।

कई बार सर्जरी भी एक विकल्प हो सकती है। टेनोटोनी ऑफ होरिजोंटल आई मसल्स (tenotomy of horizontal eye muscles) नाम की एक सर्जरी आंख की कुछ मांसपेशियों को अलग कर उन्हें फिर से जोड़ने का काम करती है। इसका लक्ष्य आंखों की फ्रिक्वेंसी और मूवमेंट की डिग्री का कम करना होता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि यह प्रक्रिया सुरक्षित है लेकिन कितनी असरकारी है इसको लेकर कोई निश्चित नहीं कहा जा सकता।

एक ऑप्थोल्मोलॉजिस्ट (ophthalmologist) ही इस बारे में आपको बेहतर बता सकता है कि सर्जरी कितनी कारगर रहेगी और उसके जोखिम और लाभ क्या हो सकते हैं।

त्वचा की समस्याएं

ऐल्बिनिज़म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा में मेलानिन (पिगमेंट) की कमी होती है और उनमें सनबर्न और स्किन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है जो त्वचा के सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने की वजह से होता है।

सनबर्न (Sunburn)

ऐल्बिनिज़म वाले लोगों को एक उच्च सन प्रोटेक्टर फैक्टर (एसपीएफ) (sun protection factor (SPF) ) वाला सनस्क्रीन पहननी चाहिए। 30 या अधिक की एसपीएफ (SPF) वाली क्रीम ज्यादा सुरक्षा प्रदान करती है।

सूरज की रोशनी में बाहर निकलने से कम से कम 15 मिनट पहले सनस्क्रीन को अच्छी तरह से लगाना चाहिए। अधिकतम सुरक्षा के लिए ऐसा लोशन चुनें जो यूएवी (UVA) और यूवीबी (UVB) रेज दोनों के खिलाफ सुरक्षा देता हो।

आप यह भी ध्यान रखें:

  • जब बहुत ज्यादा गर्मी हो और सूरज अपने चरम (प्रातः 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच) पर हो तो बाहर जाने से बचें
  • चश्मा खरीदते समय केवल वही खरीदें जिसमें यूवी फिल्टर्स हों
  • जब बाहर सूरज की रोशनी में हों तो हैट और खुली फिटिंग वाले कपड़े जैसे लंबी बांह वाली शर्ट या टॉप से खुद को ढक कर रखें
  • सनबर्न से बचाव के बारे में और अधिक पढ़ें

स्किन कैंसर (skin cancer)

कमजोर त्वचा होने से आपमें स्किन कैंसर (skin cancer) होने का खतरा बढ़ जाता है, जैसे पहले सूरज की रोशनी में जाने पर आपकी त्वचा में जलन हो सकती है।

ऐल्बिनिज़म वाले लोगों को पूरे ध्यान के साथ सनबर्न से बचने की सलाह का पालन करना चाहिए और स्किन कैंसर (skin cancer) के संकेतों को लेकर नियमित रूप से त्वचा की जांच करनी चाहिए जैसे त्वचा पर नए स्पॉट या ग्रोथ।

स्किन कैंसर (skin cancer) के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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