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बर्थमार्क्स (Birthmarks)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

परिचय

बर्थमार्क (Birthmarks) त्वचा पर दिखने वाले रंगीन निशान होते हैं। कई बार ये जन्म के समय मौजूद होते हैं या बाद में उभर आते हैं।

कई तरह के बर्थमार्क (Birthmarks) होते हैं और उनमें से कई काफी आम होते हैं।

बर्थमार्क (Birthmarks) के दो मुख्य प्रकार हैं:

  • वेस्कुलर बर्थमार्क्स (vascular birthmarks)- (कई बार लाल, गुलाबी या बैंगनी होते हैं) ये असामान्य रक्त वाहिकाओं की वजह से और त्वचा के नीचे होते हैं
  • पिगमेंटिड बर्थमार्क्स (pigmented birthmarks)- (आमतौर पर भूरे होते हैं) ये पिगमेंट सेल्स (pigment cells) के समूहों की वजह से होते हैं

वेस्कुलर बर्थमार्क्स (Vascular birthmarks) आमतौर पर सिर और गर्दन के हिस्से में होते हैं, मुख्य रूप से चेहरे पर। बहरहाल दोनों तरह के बर्थमार्क (Birthmarks) शरीर के अंदर कहीं पर भी हो सकते हैं।

अगर सतह की रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं तो वेस्कुलर बर्थमार्क्स लाल, बैंगनी या गुलाबी होंगे। अगर गहरी वाहिकायें प्रभावित होंगी तो बर्थमार्क का रंग नीला होगा।

पिगमेंटिड बर्थमार्क्स (Pigmented birthmarks) टैन या भूरे रंग के त्वचा के निशान होते हैं।

वेस्कुलर बर्थमार्क्स (Vascular birthmarks)

वेस्कुलर बर्थमार्क्स (Vascular birthmarks) के कुछ सबसे सामान्य प्रकार यहां पर बताये गए हैं:

  • सालमन पैच (स्टोर्क मार्क) (Salmon patch (stork mark)) - लाल या गुलाबी रंग के सपाट निशान बच्चे की पलक, गर्दन या माथे पर जन्म के समय होते हैं। ये सबसे सामान्य प्रकार के वेस्कुलर बर्थमार्क्स (Vascular birthmarks) होते हैं और सभी में से आधे बच्चों में होते हैं। ज्यादातर कुछ महीनों में हल्के पड़ जाते हैं, लेकिन माथे पर बने सामन पैच (Salmon patch) गायब होने में चार वर्ष तक का समय ले सकते हैं। गर्दन के पीछे के निशान लंबे समय तक चलते हैं। जब बच्चा रोता है तो वे ज्यादा दिखाई देते हैं।
  • इन्फेंटाइल हीमान्गिओमा (Infantile haemangioma)- त्वचा पर एक उठा हुआ निशान, जो आमतौर पर लाल होता है और शरीर में कहीं भी उभर सकता है। इन्हें स्ट्राबेरी मार्क्स (strawberry marks) भी कहा जाता है। कई बार ये त्वचा के अंदर गहराई में होते हैं और उस मामले में ये नीले या बैंगनी दिख सकते हैं। हीमान्गिओमा (Haemangiomas) भी आम होते हैं, खासकर लड़कियों में और जन्म के बाद 5 फीसदी बच्चों को प्रभावित करते हैं। पहले छह माह में ये तेजी से अपना आकार बढ़ाते हैं लेकिन फिर लगभग सात साल में सिकुड़कर गायब हो जाते हैं। काफी बड़े हीमान्गिओमा (Haemangiomas), जो तेजी के साथ आकार में बढ़ते हैं और वे जो दृष्टि के आगे आते हैं या फीडिंग में दिक्कत करते हैं, उनके इलाज की जरूरत होती है।
  • पोर्ट वाइन स्टेन (Port wine stain)- लाल या बैंगनी सपाट निशान जो लगभग 0.3 फीसदी नवजात शिशुओं को प्रभावित करते हैं। ये आकार में अलग हो सकते हैं। आकार में कुछ मिलीमीटर से कई सेंटीमीटर तक। पोर्ट वाइन स्टेन अक्सर शरीर के एक तरफ होते हैं और अमूमन चेहरे, सीने और पीठ पर होते हैं। हालांकि वे कहीं पर भी हो सकते हैं। पोर्ट वाइन स्टेन (Port wine stain) हारमोन्स को लेकर काफी संवेदनशील होते हैं और युवावस्था और गर्भावस्था व मेनोपॉज के आसपास काफी नोटिस किए जाने वाले हो सकते हैं। ज्यादातर स्थायी होते हैं और समय के साथ इनका रंगा गाढ़ा होता जाता है।

पिगमेंट वाले बर्थमार्क (Pigmented birthmarks)

पिगमेंट वाले बर्थमार्क के सबसे आम स्वरूपों का वर्णन यहां किया गया है:

  • कैफे-ओ-लेट स्पॉट्स (Café-au-lait spots)- कॉफी रंग के स्किन पैच (skin patches)। कई बच्चों में ये एक या दो होते हैं, लेकिन वह जब पांच साल का हो जाता है तो ये छह से ज्यादा हो जाएं तो अपने डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस (neurofibromatosis) का संकेत हो सकता है
  • मंगोलियन स्पॉट्स (Mongolian spots)- नीले-स्लेटी या चोट जैसे दिखने वाले बर्थमार्क (birthmarks), जो जन्म के समय से ही मौजूद होते हैं। ये ज्यादातर गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में दिखते हैं और ज़्यादातर पीछे की तरफ निचले हिस्से में या नितंबों पर होते हैं, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों या हाथ-पैरों पर भी हो सकते हैं। वे कई महीनों या वर्षों तक बने रहते हैं, लेकिन आम तौर पर चार साल की उम्र तक गायब हो जाते हैं। ये पूरी तरह से नुकसानदायक नहीं होते और उपचार की जरूरत नहीं होती। उन्हें कई बार गलती से चोट भी मान लिया जाता है।
  • कॉन्जेंटियल मेलानोसाइटिक नाइवी (सीएमएन) Congenital melanocytic naevi (CMN)- इन्हें कॉन्जेंटियल मोल्स (congenital moles) भी कहा जाता है। ये काफी बड़े भूरे या काले रंग के मस्से होते हैं, जो जन्म के समय से ही होते हैं। ये त्वचा में पिगमेंट सेल्स (pigment cells) के जरूरत से ज्यादा बढ़ने से होते हैं और काफी आम होते हैं। ज्यादातर सीएमएन (CMN) समय के साथ आनुपातिक रूप में छोटे हो जाते हैं, लेकिन यौवनावस्था की शुरूवत के दौरान इनका रंग गहरा हो जाता है या ये उभरे हुए (bumpy) या बाल वाले हो जाते हैं। इनका आकार 1.5 सेमी से 20 सेमी तक हो सकता है। सीएमएन (CMN) का स्किन कैंसर में बदलने का जोखिम काफी कम होता है, लेकिन इस का आकार बढ़ने का जोखिम बना रहता है।

बर्थमार्क होने की वजह क्या है?

यह पूरी तरह समझा नहीं जा सका है कि बर्थमार्क (birthmarks) क्यों बनते हैं, लेकिन आमतौर पर जन्म से विरासत में नहीं मिलते। वेस्कुलर बर्थमार्क्स (Vascular birthmarks) हमारी असामान्य रक्त कोशिकाओं या त्वचा के अंदर खराबी की वजह से बनते हैं, जबकि पिगमेंटिड बर्थमार्क्स (pigmented birthmarks) पिगमेंट सेल्स (pigment cells) के समूहों की वजह से होते हैं।

यह माना जाता है कि पोर्ट वाइन स्टेन्स (port wine stains) उन नर्व्स (nerves) की वजह से होता है, जो कैपिलरीज capillaries (छोटी रक्त वाहिकाओं) के फैलने या सिकुड़ने को नियंत्रित करती हैं, जो सही तरीके काम नहीं करतीं या पर्याप्त नहीं होतीं। इसका मतलब है उस हिस्से में त्वचा तक खून निरंतर सप्लाई होता रहता है, जिससे ये स्थायी रूप से लाल या बैंगनी रंग के बने रहते हैं।

पोर्ट वाइन स्टेन्स (Port wine stains) कई बार अन्य स्थितियों से संबंधित होती हैं, जैसे स्टूर्ज-वेबर सिंड्रोम (Sturge-Weber syndrome) और क्लिपल-ट्रेनॉने सिंड्रोम (Klippel-Trenaunay syndrome)।

बर्थमार्क (birthmarks) से संबंधित जटिलताओं के बारे में और अधिक पढ़ें।

क्या बर्थमार्क (birthmarks) के उपचार की जरूरत है?

ज्यादातर बर्थमार्क नुकसानदायक नहीं होते और उनका उपचार करने की आवश्यकता नहीं होती। कुछ प्रकार के बर्थमार्क वक्त के साथ धुंधले पड़ जाते हैं, जबकि कुछ अन्य जैसे पोर्ट वाइन स्टेन स्थायी होते हैं और उनका इलाज नहीं होता। कुछ मामलों में बर्थमार्क का चिकित्सा कारणों से इलाज करना जरूरी होता है, उदाहरण के लिए हीमान्गिओमा (haemangioma) एयरवेज को रोक देते हैं, दृष्टि पर असर डालते हैं और फफोले जैसे बन जाते हैं। कुछ लोग कॉस्मेटिक कारणों से भी उपचार करवाते हैं।

जन्मचिह्नों (birthmarks) के उपचार के बारे में और अधिक पढ़ें।

उपचार

ज्यादातर बर्थमार्क घातक नहीं होते और कुछ बिना उपचार के गायब हो जाते हैं। बहरहाल, कुछ चिकित्सकीय कारणों से कई जन्मचिह्नों (birthmarks) का इलाज करने की जरूरत पड़ती है और कुछ लोग कॉस्मेटिक कारणों से भी इनका उपचार करवाते हैं।

हेमेंजियोमा (Haemangiomas)

कुछ हेमेंजियोमा बिना उपचार किए गायब हो जाते हैं, लेकिन कई बार वे बच्चे के दो साल का होने तक बिल्कुल भी नहीं बदलते। आधे मामले पांच साल की उम्र तक चले जाते हैं और कुछ हेमेंजियोमा बच्चे के 12 साल तक के होने तक बने रहते हैं।

जिन मामलों में हेमेंजियोमा त्वचा को विरूपित या निशान वाला बनाकर छोड़ देते हैं, वहां पर खराब हुई त्वचा को ठीक करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी एक विकल्प है।

अगर हेमेंजियोमा अल्सर (ulcer) बन गई है तो आपको संक्रमण रोकने के लिए अतिरिक्त उपाय करने होंगे और सर्जरी (नीचे देखें) की सलाह दी जा सकती है।

जन्मचिह्नों (birthmarks) की जटिलताओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें।

जटिल या बढ़े हुए हेमेंजियोमा

कुछ हेमेंजियोमा से जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जिनका उपचार करना जरूरी होता है।

बच्चे की आंख, नाक या मुंह के पास हेमेंजियोमा नजर, सांस लेने और खाने में समस्या पैदा कर सकते हैं। होंठ पर या नैप्पी के हिस्से के आसपास हेमेंजियोमा से अधिकांशतः अल्सर हो सकता है, जिसमें से कभी-कभार खून भी आता है और काफी दर्द भी हो सकता है।

सटीक इलाज इस बात पर निर्भर करेगा कि हेमेंजियोमा कितना गंभीर है। ज्यादातर हेमेंजियोमा को दवा से प्रभावी तरीके से ठीक किया जा सकता है, उदाहरण के लिए तरल रूप में ओरल प्रोप्रानोलोल (oral propranolol) (नीचे देखें)। यह जन्म के निशान को सिकोड़ देगा। अगर प्रोप्रानोलोल (propranolol) काम नहीं करता तो कई बार दूसरी दवाएं भी इस्तेमाल की जा सकती हैं, जैसे स्टेरॉयड्स (steroids) या विनक्रिस्टाइन (vincristine)। सर्जरी की बहुत कम जरूरत पड़ती है।

अगर आपके बच्चे को एयरवे में हेमेंजियोमा होने की वजह से सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो उन्हें एंडोस्कोप (endoscope) के नाम से जानी जाने वाली छोटी टेलिस्कोप (telescope) का प्रयोग करते हुए उनके एयरवे में जांच के दौरान लेजर सर्जरी करनी पड़ सकती है। इसे माइक्रोलेरिन्गोस्कोपी (microlaryngoscopy) और ब्रोन्चॉस्कोपी (bronchoscopy) या एमएलबी (MLB) कहा जाता है।

कई बार एयरवे में हेमेंजियोमा वाले बच्चे को सांस लेने में सुधार के लिए एक अस्थायी ट्रेकियोस्टोमी (हवा वाली पाइप में कृत्रिम मार्ग) की जरूरत पड़ती है।

प्रोप्रानोलोल (Propranolol)

अगर हेमेंजियोमा जटिल या बड़ा हो तो आपके बच्चे को दवा दी जा सकती है। यह एक प्रोप्रानोलोल (Propranolol) नामक बीटा-ब्लॉकर (beta-blocker) होती है। हीमान्गिओमा (haemangioma) के इलाज के लिए प्रयोग में इस दवा के पूरे साइड इफेक्ट की जांच की जा रही है।

बीटा-ब्लॉकर (beta-blocker) शरीर के कई हिस्सों में नोराड्रेनालाइन (noradrenaline) का रिलीज होना बंद करने का काम करते हैं। नोराड्रेनालाइन (noradrenaline) नर्व्स (nerves) द्वारा छोड़े जाने वाला एक कैमिकल होता है। यह उस वक्त छोड़ते हैं, जब वे उत्तेजित होती हैं। नोराड्रेनालाइन शरीर के अन्य हिस्सों को संदेश भेजता है, जैसे मांसपेशियां, रक्त वाहिनियां और दिल।

यह माना जाता है कि प्रोप्रानोलोल (propranolol) रक्त वाहिनियों को संकरा होने और उनमें दौड़ने वाले खून की मात्रा कम करता है। यह रंग कम करता है और उन्हें मुलायम बनाता है। हेमेंजियोमा की ग्रोथ का काम करने वाले सेल्स भी इससे प्रभावित होते हैं, इसलिए हेमेंजियोमा छोटा हो जाता है।

अंदरूनी हेमेंजियोमा की निगरानी

अगर आपके बच्चे में मौजूद हेमेंजियोमा उसके आंतरिक अंगों में मौजूद है तो आपको उसकी जगह और आकार पता करने के लिए अल्ट्रासाउंड (ultrasound) या एमआरआई स्कैन (MRI scan) करवाने की जरूरत होगी। एमआरआई स्कैन (MRI scan) शरीर के अंदर की विस्तृत तस्वीर खींचने के लिए काफी शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का प्रयोग करता है।त्र और रेडियो तरंगों का प्रयोग करता है।

पोर्ट वाइन स्टेन्स (Port wine stains)

पोर्ट वाइन स्टेन्स (Port wine stains) स्थायी होते हैं। बहरहाल कुछ उपचारों से ये निशान हल्के पड़ सकते हैं, जिससे इन पर नजर कम जाती है या आप इन्हें कास्मेटिक्स की मदद से छुपा सकते हैं।

लेजर ट्रीटमेंट (Laser treatment)

इससे त्वचा के प्रभावित हिस्से को हल्का किया जा सकता है और पोर्ट वाइन स्टेन्स (Port wine stains) का यह इकलौता उपचार है। लेजर ट्रीटमेंट (laser treatment) छोटी उम्र के बच्चों में बेहतर काम करता है, क्योंकि पोर्ट वाइन स्टेन (Port wine stain) बड़े होने पर कुछ सालों में उभर कर बड़े हो जाते हैं।

सबसे आम लेजर ट्रीटमेंट (laser treatment) को पल्स्ड डाई लेजर ट्रीटमेंट (pulsed dye laser treatment) के नाम से जाना जाता है। इसमें लेजर (laser) एक फाइबर ऑप्टिक केबल (fibre optic cable) से गुजरती है। उस केबल के अंत में एक डिवाइस होता है, जो पेन की तरह दिखता है। इसे बच्चे की त्वचा की सतह पर धीरे से रखा जाता है और एक बटन दबाया जाता है, जो त्वचा पर रोशनी की बीम छोड़ता है।

यह लाइट त्वचा के अंदर एक मिमी (1mm) तक जाती है। सतह के नीचे रक्त वाहिनी द्वारा इसे आत्मसात कर लिया जाता है, जिससे यह गर्म हो जाती है। यह गर्मी रक्त वाहिका को क्षति पहुंचाती है, जिससे वो चोटिल हो जाती है,, लेकिन एक-दो सप्ताह में यह धुंधली पड़ जाती है।

उपचार के दौरान या उसके बाद आपके बच्चे की त्वचा परेशानी को कम करने के लिए उसे ठंडा किया जाता है या उपचार के दौरान स्किन पर ठंडी हवा की जाती है।

लेजर ट्रीटमेंट (laser treatment) के कुछ दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

  • चोट लगना- कुछ तरह के लेजर ट्रीटमेंट के बाद यह सामान्य है कि स्किन पर कुछ रह गए निशान चोट की वजह से बुरे लग सकते हैं। यह चोट के घाव एक दो हफ्ते में खुद ही धुंधले पड़ जाते हैं।
  • दर्द- लेजर से काफी दर्द होता है, इसलिए ज्यादातर बच्चों का उपचार जनरल एनेस्थीसिया के तहत किया जाता है (इसमें बच्चों को सुला दिया जाता है)। कुछ बच्चे दर्द सहन करने की स्थिति में होते हैं तो उन्हें लोकल एनेस्थीसिया क्रीम लगाई जाती है, जिससे त्वचा का वह हिस्सा सुन्न हो जाता है। सुन्न करने वाली क्रीम से लेजर ट्रीटमेंट करवाने वाले बच्चों को आराम पहुंचाने के लिए कई बार कोल्ड जेल पैड उनके उस हिस्से पर ट्रीटमेंट से पहले रखा जाता है।
  • सूरज की रोशनी को लेकर संवेदनशीलता- आपके बच्चे की त्वचा में लेजर ट्रीटमेंट के छह माह बाद तक सनबर्न (sunburn) की समस्या हो सकती है।

3 से 30 उपचार सत्रों के बीच छह से आठ सप्ताह का अंतराल जरूरी होता है।

यह उपचार कितना प्रभावी है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वह हिस्सा कितना प्रमुख और डार्क है। उन निशानों पर बेहतर असर दिखता है, जो छोटे और हल्के हैं।

कैमोफ्लैज़ मेकअप (Camouflage make-up)

आपको एक विशेष प्रकार का कैमोफ्लैग मेकअप (Camouflage make-up)

यानी त्वचा के रंग से मिलता जुलता कृत्रिम मेकअप करने को कहा जा सकता है, जो बर्थमार्क (birthmark) को ढक देगा।

कई जगहों पर इस तरह की सेवाएं उपलब्ध हैं। आप उनसे अपॉइंटमेंट लेकर यह काम कर सकते हैं।

कॉनजेनिटल मेलेनोसाइटिक नाइवी (सीएमएन) (Congenital melanocytic naevi (CMN) )

क्योंकि सीएमएन (CMN) से व्यक्ति की उपस्थिति पर असर पड़ता है, इसलिए सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। बहरहाल इससे निशान रह सकता है और अगर वह हिस्सा काफी बड़ा हो तो यह संभव नहीं होगा। सर्जरी में प्रभावित बर्थमार्क को हटाना और त्वचा के किनारों को फिर से मिलाना शामिल होगा। अगर वह हिस्सा काफी बड़ा है तो स्किन ग्राफ्ट (skin graft) की जरूरत हो सकती है। स्किन ग्राफ्ट में किसी एक जगह से त्वचा लेकर उससे घाव को ढका जाता है।

जटिलताएं

ज्यादातर बर्थमार्क (birthmarks) हानिकारक नहीं होते। बहरहाल कुछ मामलों में जटिलताएं हो सकती हैं, जिनका इलाज करने की जरूरत होती है।

हेमेंजियोमा (Haemangiomas)

हालांकि यह काफी कम होता है फिर भी कुछ हेमेंजियोमा गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं, जिनमें से कई जानलेवा हो सकते हैं। इस स्थिति में खाने, सांस लेने या दृष्टि में बाधा आ जाती है, जिसका इलाज करने की जरूरत होती है।

जन्मचिह्नों (birthmarks) के उपचार के बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें।

अगर आपके बच्चे में हेमेंजियोमा उनकी आंख, नाक, मुंह या नैप्पी वाले हिस्से में है तो उन्हें किसी स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए।

कुछ हेमेंजियोमा से खून निकल सकता है या उनमें संक्रमण हो सकता है। अगर बर्थमार्क (birthmark) से खून आ रहा हो तो उसे तब तक दबा कर रखें, जब तक खून बहना बंद न हो जाए।

अगर आपके बच्चे का हेमेंजियोमा अल्सर (ulcer) बन जाता है तो उसे डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह संक्रमित भी हो सकता है और यह काफी दर्द देने वाला होता है। घाव को साफ और ड्रेसिंग से ढक कर रखें। यह दो हफ्ते में ठीक हो जाता है। संक्रमित हेमेंजियोमा को शीघ्रता से एंटीबायोटिक्स से ठीक किए जाने की जरूरत होती है, क्योंकि वे काफी दर्दभरे होते हैं और संक्रमित अल्सर काफी कुरूप निशान भी छोड़ जाता है।

अगर आपके बच्चे में पांच से ज्यादा हेमेंजियोमा हैं तो यह संकेत है कि उनमें इंटरनल हेमेंजियोमा हैं। यह संभव नहीं कि इनकी वजह से कोई समस्या हो, लेकिन अल्ट्रासाउंड स्कैन (ultrasound scan) या मैग्नेटिक रिसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन यह देखने के लिए करवाना चाहिए कि क्या कोई इंटरनल हेमेंजियोमा मौजूद है।

ज्यादातर इंटरनल हेमेंजियोमा में कोई लक्षण नहीं होते। कुछेक मामलों में संभव है कि वो इन लक्षणों की वजह बन सकते हैं::

  • कफ आना और सांस लेने में तकलीफ, जिससे संकेत मिल सकता है कि सांस लेने के रास्ते में हेमेंजियोमा है
  • मल में खून आना, इससे संकेतमिल सकता है कि बोवल (आंत) में हेमेंजियोमा है

पोर्ट वाइन स्टेन्स (Port wine stains)

पोर्ट वाइन स्टेन्स (Port wine stains) से निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

ग्लूकोमा (Glaucoma) (आंख के अंदर दबाव बढ़ जाना, जिससे नजर पर असर पड़ता है) - आप में यह स्थिति हो सकती है, अगर बर्थमार्क एक ही तरफ से आंख के ऊपर और नीचे की पलक पर मौजूद हो।

स्टूर्ज-वेबर सिंड्रोम (Sturge-Weber syndrome)- यह काफी दुर्लभ विकार है, जो आंखों और दिमाग पर असर करता है। यह आमतौर पर लार्ज पोर्ट वाइन स्टेन (large port wine stain) से संबंधित होता है, जो माथे से लेकर सिर तक फैला होता है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर्स एंड स्ट्रोक्स (Neurological Disorders and Stroke (NINDS)) की वेबसाइट देखें।

सॉफ्ट टिशू हाइपरट्रॉफी (Soft tissue hypertrophy) बर्थमार्क के नीचे के टिशू का बड़ा होना)- जैसे यह होंठ पर हो सकता है।

क्लिपल-ट्रेनॉने सिंड्रोम (Klippel-Trenaunay syndrome) - जन्म के समय मौजूद एक दुर्लभ विकार, जिसमें रक्त वाहिकाएं पूरी तरह से आकार नहीं ले पातीं। अगर आपके बच्चे में पोर्ट वाइन स्टेन (port wine stain) उनके किसी अंग पर है और वह बड़ा हो रहा है तो उनको क्लिपल-ट्रेनॉने सिंड्रोम (Klippel-Trenaunay syndrome) हो सकता है।

इनमें से किसी भी स्थिति का उपचार किसी स्पेशलिस्ट से करवाना चाहिए।

कन्जेनिटल (जन्मजात) मेलेनोसाइटिक नाइवी (सीएमएन) - Congenital melanocytic naevi (CMN)

कन्जेनिटल मेलेनोसाइटिक नाइवी (सीएमएन) (Congenital melanocytic naevi (CMN))

अगर आपका सीएमएन (CMN) का आकार बढ़ता है या रूप या रंग में बदलाव आता है तो आपका डॉक्टर बायोप्सी (biopsy) करने की सलाह दे सकते हैं (इसमें सघन जांच के लिए टिशू का नमूना लिया जाता है)। अगर आपके सीएमएन (CMN) में इनमें से कोई बदलाव आता है तो अपने डॉक्टर से मिलें:

  • खून निकलना
  • रंग बदलना
  • जलन (सूजन)
  • खुजली
  • खुले फोड़े
  • दर्द
  • आकार बदलना
  • टेक्सचर बदलना

हालांकि यह काफी दुर्लभ होता है। कुछ सीएमएन (CMN) त्वचा के कैंसर में बदल सकते हैं। सीएमएन (CMN) के आकार के साथ जोखिम बढ़ जाता है। मोल्स (moles) के बारे में और अधिक जानें।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।