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सोते समय भयभीत होना

मेडिकली रिव्यूड

कई बच्चे रात के समय बुरे सपने और भय का अनुभव करते हैं, लेकिन ज़्यादातर उनमें से बाहर निकल आते हैं। ये आपके बच्चे को कोई दीर्घकालिक नुकसान नहीं पहुँचाते।

रात का भय रात में आने वाले बुरे सपनों से बहुत अलग है।

रात के भय से प्रभावित होने वाला बच्चा चीख-चिल्ला कर इधर-उधर हाथ पाँव है और आपका सामना करने पर आपको नहीं भी पहचान सकता है। ऐसा व्यवहार गहरी नींद के चक्र से बाहर आने के कारण होता है। ऐसा भी हो सकता है कि इस घटना के दौरान आपका बच्चा पूरी तरह से जगा हुआ न हो और उसे सुबह उठकर अपना व्यवहार याद भी न हो।

दूसरी ओर, बुरे सपने नींद के हल्के चरण में होने पर आते हैं, जब बच्चा सपना देख रहा होता है। वह बुरे सपने के कारण नींद से जाग सकता है और अपनी आयु के अनुसार बुरे सपने को याद रख उसका वर्णन करने में सक्षम हो सकता है।

बुरे सपने और सोते वक़्त भयभीत होना, दोनों के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है तथा आपको इस बारे में क्या करना चाहिए, इसकी सलाह भी दी गई है।

नींद में भयभीत होना

रात का भय 3 से 8 वर्ष कि आयु के बच्चों में आम है। एक बच्चा, जिसने रात में डर का अनुभव किया हो, वो चीखने-चिल्लाने के साथ चारों और घबराहट में भाग सकता है और अपने बिस्तर से कूद सकता है। उसकी आँखें खुली हो सकती हैं, लेकिन वह पूर्ण रूप से जागा हुआ नहीं होता है।

ऐसी घटना आम तौर पर रात्रि के शुरुआती भाग में होती है और 15 मिनट या कई मिनटों तक जारी रह सकती है।

ऐसा क्यों होता है?

रात में भय उन बच्चों में ज़्यादा आम है, जिन बच्चों के पारिवारिक इतिहास में रात में डर लगना या नींद में चलने की आदत हो।

एक नाइट टेरर अटैक की शुरुआत इन वजहों से हो सकती है:

  • कुछ भी ऐसा, जो आपके बच्चे की गहरी नींद को बढ़ाए, जैसे कि थकान, बुखार या कुछ दवाएँ
  • कुछ भी ऐसा, जिसके कारण आपके बच्चे की गहरी नींद से जागने की संभावना हो, जैसे कि उत्तेजना, चिंता या अचानक हुआ शोर

आपको क्या करना चाहिए?

आपके बच्चे के साथ रात के भय की घटना होने पर सबसे अच्छा ये होगा कि आप शांत रहें और उस घटना को बीतने दें तथा यह सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा सुरक्षित हो।

रात को होने वाला डर डर देखने में भयानक लग सकता है, लेकिन आपके बच्चे को इससे कोई नुकसान नहीं पहुँचता। अगर आपके बच्चे के साथ ऐसी घटना हो रही हो तो आपको उस वक्त अपने बच्चे को नींद से जगाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

ऐसा हो सकता है कि आपका बच्चा आपको न पहचाने और आप द्वारा मदद देने पर और आक्रामक हो जाए।

आपके बच्चे के नाइट टेरर के अटैक से बाहर आने पर उसे जगाना सुरक्षित होता है। अगर जरूरत पड़े तो अपने बच्चे को वापस सोने जाने से पहले शौचालय जाने के लिए कहें।

अगर आपका बच्चा जल्द ही गहरी नींद में चला जाता है तो हो सकता है कि उसके साथ फिर से ऐसी घटना हो। यह सुनिश्चित करें कि दोबारा सोने के लिए जाने से पहले आपका बच्चा पूरी तरह जागा हुआ है, तो इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।

आपके बच्चे को अगली सुबह रात की घटना के बारे में कुछ याद नहीं होगा, लेकिन फिर भी आप उसके साथ बात कर यह जानने का प्रयास कर सकते है कि कोई बात उसे चिंतित या उसकी इस स्थिति को बढ़ा तो नहीं रही। एक आराम और शांत मन के साथ सोने की दिनचर्या भी इसमें मददगार हो सकती है।

अगर सोते वक़्त भय का अटैक बार-बार या एक ही समय पर होता है तो आप देख सकते हैं कि आपके बच्चे के जगने से यह चक्र टूट सकता है। अपने बच्चे को 7 दिन तक अपेक्षित समय से 15 मिनट पहले उठा दें। यह उसकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना उसके स्लीप पैटर्न को भंग कर इस रात्रि भय को रोक सकता है।

आपको मदद कब लेनी चाहिए?

ज्यादातर बच्चे रात के भय से उबर जाते हैं। लेकिन अगर यह एक रात में बार-बार हो रहे हैं या लगातार (ज्यादातर रातों को) हो रहे हैं तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। आपका डॉक्टर यह जांच सकता है कि क्या इसका कुछ ऐसा कारण है, जिसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बड़े टॉन्सिल्स रात में सांस लेने में समस्या पैदा कर आपके बच्चे को जगा सकते हैं।

बार-बार बुरे सपने आना

बुरे सपने आना 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों में आम हैं। अधिकांश बच्चे इनसे बाहर निकल आते हैं।

आम तौर पर ये देर रात में आते हैं, और आपका बच्चा जागकर अपने सपने को याद रख उसके बारे बता सकता है।

बच्चों को बुरे सपने किसी भयानक अनुभव के कारण आ सकते हैं, जैसे कि कोई डरावनी फिल्म देखने से या किसी ऐसी चीज के कारण, जिसकी वजह से वे चिंतित हों।

आपको क्या करना चाहिए

आपको अपने बच्चे से बात कर यह देखना चाहिए कि कुछ ऐसा तो नहीं है, जो बच्चे को परेशान कर रहा है या उसके बुरे सपनों को बढ़ा रहा है। ऐसा करना यह भी सुनिश्चित करता है कि उसकी दिनचर्या आरामदायक है।

अगर आपका बच्चा बड़ा है और उसे बुरे सपने आते हैं तो आपको एक मनोवैज्ञानिक से सलाह लेने की आवश्यकता हो सकती है।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।