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लिवर ट्रांसप्लांट (यकृत प्रत्यारोपण/Liver transplant)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

लिवर ट्रांसप्लांट क्या है? (What is a liver transplant)

लिवर ट्रांसप्लांट एक ऑपरेशन है जिसमें शरीर से रोगग्रस्त या क्षतिग्रस्त लिवर को निकालकर उसके बदले में एक स्वस्थ लिवर प्रत्यारोपित किया जाता है।

इसकी अनुशंसा तब की जाती है कि जब लिवर इस हद तक क्षतिग्रस्त हो जाए कि अपना सामान्य कार्य भी नहीं कर सके और उसके असफल होने की संभावना हो।

इस बारे में और पढ़ें कि आपके लिए लिवर ट्रांसप्लांट क्यों आवश्यक हो सकता है (why you might need a liver transplant)।

हालांकि, लिवर ट्रांसप्लांट होना आम है लेकिन यह एक बड़ा ऑपरेशन है। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि शरीर नए अंग को (अपनाने से) अस्वीकार कर सकता है। ऐसा होने से रोकने के लिए, आपको अपने शेष जीवन में इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) का दमन करने के लिए दवा लेनी होगी।

लिवर ट्रांसप्लांट के बाद ठीक होने (recovering from a liver transplant) के बारे में और पढ़ें।

लिवर को क्षति

बीमारी, संक्रमण या शराब पीने के परिणामस्वरूप लिवर क्षतिग्रस्त हो सकता है। इस क्षति के कारण लिवर पर घाव हो जाता है, जिसे सिरोसिस (cirrhosis) कहा जाता है।

लिवर की क्षति और सिरोसिस के कुछ सबसे आम कारण निम्न हैं:

जब सिरोसिस एक निश्चित स्तर पर पहुंच जाता है, तब लिवर धीरे-धीरे अपने सभी क्रियाकलाप खोने लगता है। इसे लिवर की विफलता या एंड-स्टेज लिवर डिजीज कहा जाता है।

लिवर की विफलता वाले व्यक्ति के लंबे समय तक जीवित रहने का एकमात्र उपाय लिवर ट्रांसप्लांट है।

लिवर ट्रांसप्लांट (यकृत प्रत्यारोपण)

लिवर ट्रांसप्लांट के तीन प्रकार होते हैं:

  • मृतक से अंगदान (डिसिज्ड ऑर्गन डोनेशन) में वह लिवर ट्रांसप्लांट किया जाता है जिसे हाल ही में मरने वाले व्यक्ति से निकाला गया है।
  • लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट में एक लिविंग डोनर से लिवर का एक हिस्सा निकाला जाता है - क्योंकि लिवर स्वयं से दोबारा बन सकता है, यानी प्रत्यारोपित हिस्सा और दानकर्ता के लिवर का शेष हिस्सा दोनों ही फिर से सामान्य आकार के लिवर में विकसित होने में सक्षम होते हैं।
  • स्प्लिट डोनेशन में लिवर को हाल ही में मरे हुए व्यक्ति से निकाल कर दो टुकड़ों में बांटा जाता है, एक बड़ा और एक छोटा टुकड़ा - प्रत्येक टुकड़े को अलग-अलग व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता है, जहाँ वे सामान्य आकार में फिर से विकसित हो जाएंगे।

इस बारे में और पढ़ें कि लिवर ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है (how a liver transplant is performed)।

लिवर ट्रांसप्लांट के बाद जीवन

उत्तरजीविता (सर्वाइवल) दर कई कारकों से प्रभावित हो सकती है, जिनमें शामिल है:

  • उम्र
  • सामान्य स्वास्थ्य स्थिति
  • लिवर ट्रांसप्लांट का कारण
  • क्या ट्रांसप्लांट के बाद अगर कोई जटिलता विकसित होती है, जैसे कि डायबिटीज़ (मधुमेह) या किडनी की विफलता
  • इम्यूनोसप्रेसेंट के लंबे समय तक उपयोग से भी कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, और यह व्यक्ति को संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है।

लिवर ट्रांसप्लांट की जटिलताओं (complications of a liver transplant) के बारे में और पढ़ें।

लिवर ट्रांसप्लांट किया जाना कितना सामान्य है?

लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले लोगों की संख्या दान किए गए लिवर की संख्या से बहुत अधिक है।

वयस्कों के लिए लिवर ट्रांसप्लांट का औसत प्रतीक्षा समय लगभग 142 दिन है, और बच्चों के लिए यह लगभग 78 दिन है।

यह अनुमान है कि पिछले 20 वर्षों में, लिवर ट्रांसप्लांट के लाभान्वितों की संख्या में 90% की वृद्धि हुई है, लेकिन उपलब्ध डोनेशन की संख्या समान बनी हुई है।

नतीजतन, लिवर की बीमारी से होने वाली मौतें अधिक रहती हैं।

लिवर ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है?

उपयुक्त लिवर उपलब्ध होते ही आपसे लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर के स्टाफ संपर्क करेंगे। यह सही आकार का होना चाहिए और आपके रक्त समूह से मेल खाना चाहिए।

दिन या रात में किसी भी समय कॉल आ सकता है, अतः आपको अलर्ट करने के लिए ब्लीपर दिया जा सकता है। आवश्यक होने पर ट्रांसप्लांट सेंटर तक जाने के लिए आपके परिवहन की व्यवस्था की जा सकती है।

यह महत्वपूर्ण है कि जैसे ही ट्रांसप्लांट सेंटर आपसे संपर्क करे, उसके बाद कुछ भी न खाएं या पिएं।

जब आप ट्रांसप्लांट सेंटर पहुंच जाते हैं, तो आपकी छाती का एक्स-रे (X-ray) और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) किया जाएगा ताकि आपके दिल और फेफड़ों के क्रियाकलाप का पुनः आकलन किया जा सके। फिर आपको ट्रांसप्लांट की तैयारी में जनरल एनेस्थेसिया (general anaesthetic) दी जाएगी।

ऑर्थोटोपिक ट्रांसप्लांट

लिवर ट्रांसप्लांट का सबसे सामान्य प्रकार ऑर्थोटोपिक ट्रांसप्लांट है, जिसमें संपूर्ण लिवर को हाल ही में मृतक दानकर्ता से लिया जाता है।

सर्जन आपके पेट में चीरा लगाएंगे और आपके लिवर को निकाल देंगे। फिर डोनर लिवर को वहाँ रखने के बाद आपकी रक्त वाहिकाओं और पित्त नलिकाओं (वे छोटी नलिकाएं जो पित्त को जिगर से बाहर ले जाती हैं) से जोड़ा जाएगा।

डोनर लिवर के प्रत्यारोपित होने के बाद, घुलनशील टांके से चीरे को सील कर दिया जाएगा। अतिरिक्त तरल पदार्थ बाहर निकालने के लिए ड्रेनेज ट्यूब को अटैच किया जाएगा, जो आमतौर पर सर्जरी के बाद कई दिनों तक अटैच रहते हैं।

ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी हो जाने पर, रिकवरी के लिए आपको गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) (intensive care unit (ICU)) में रखा जाएगा।

लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट

लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट के दौरान, दानकर्ता व्यक्ति के लिवर के बाएँ या दाएँ भाग (लोब) को निकालने के लिए एक ऑपरेशन होगा।

आमतौर पर वयस्कों के लिए (लिवर के) दाएँ भाग के ट्रांसप्लांट की अनुशंसा की जाती है। बच्चों के लिए, (लिवर के) बाएँ भाग के ट्रांसप्लांट की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दाहिना भाग बड़ा होता है और वयस्कों के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है, जबकि बायां भाग छोटा और बच्चों के लिए बेहतर होता है।

डोनर ऑपरेशन के बाद, आपके लिवर को निकाल दिया जाएगा और वहाँ दानकर्ता का लिवर भाग प्रत्यारोपित कर दिया जाएगा। फिर आपकी रक्त-वाहिकाओं और पित्त-नलिकाओं को लिवर भाग से जोड़ दिया जाएगा।

ट्रांसप्लांट के बाद, प्रत्यारोपित भाग (लोब) जल्द ही फिर से खुद को उत्पन्न कर लेगा। लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट के ज्यादातर मामलों में, एक सप्ताह के भीतर नया भाग मूल लिवर के 85% आकार तक बढ़ जाएगा।

स्प्लिट डोनेशन

यदि हाल ही एक मृतक व्यक्ति से डोनर लिवर उपलब्ध हो जाता है तो स्प्लिट डोनेशन किया जा सकता है, और इसमें आप और एक बच्चा दोनों ही डोनेशन के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं।

दान किए गए लिवर को बाएं और दाएं भाग में विभाजित किया जाएगा। आम तौर पर, आपमें बड़ा दायां भाग और बच्चे में छोटा बायां भाग प्रत्यारोपित किया जाएगा।

कई सारी लिवर ट्रांसप्लांट इकाइयों द्वारा दो वयस्कों में सफल ढंग से स्प्लिट डोनेशन ट्रांसप्लांट किया गया है, हालांकि छोटा बायां भाग प्राप्त करने वाले वयस्क में ट्रांसप्लांट की सफलता औसत से काफी कम होती है।

यह क्यों जरूरी है

लिवर ट्रांसप्लांट तब जरूरी हो जाता है जब लिवर इस हद तक क्षतिग्रस्त हो चुका होता है कि वह अपने सामान्य कार्य भी नहीं कर पाता। इसे लिवर की विफलता कहा जाता है।

आमतौर पर थोड़े समय की दवा से लिवर की विफलता को प्रबंधित किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान में एकमात्र उपचार लिवर ट्रांसप्लांट है।

किडनी, हृदय या फेफड़ों की तरह इसके लिए कोई यांत्रिक उपकरण जैसे कि डायलिसिस मशीन नहीं है, जो लिवर के क्रियाकलापों को दोहरा सके।

लिवर की विफलता क्यों होती है

लिवर की विफलता के दो मुख्य कारण हैं:

  • क्रोनिक लिवर फेल्योर, जिसमें कई महीनों या सालों तक क्षति पहुँचने के कारण लिवर काम करना बंद कर देता है।
  • एक्यूट लिवर फेल्योर, जिसमें एक छोटी अवधि में ही लिवर को काफी क्षति पहुँचती है। क्रोनिक लिवर फेल्योर के मुख्य कारण नीचे सूचीबद्ध हैं।

अल्कोहलिक लिवर डिजीज

जब भी आप शराब पीते हैं, तो आपका लिवर आपके खून से जहरीली शराब को बाहर निकाल देता है। जब भी आपका लिवर शराब को फिल्टर करता है, तो लिवर की कुछ कोशिकाएं मर जाती हैं।

यद्यपि लिवर नई कोशिकाओं को विकसित कर सकता है, लेकिन यदि आप कई वर्षों से काफी ज्यादा शराब पीते आ रहे हैं तो आपका लिवर इस क्षमता को खो देगा और मृत कोशिकाएं निर्मित होकर आपके लिवर को दागदार बना देंगी (सिरोसिस) (cirrhosis)।

यदि आपका लिवर बहुत अधिक दागदार हो जाता है, तो यह कार्य करने की अपनी क्षमता खो देगा जिससे लिवर विफल हो जाएगा।

अल्कोहलिक लिवर डिजीज (alcoholic liver disease) के अधिकांश मामलों में, लिवर के विफल होने तक आपको कोई लक्षण महसूस नहीं होगा।

हेपेटाइटिस सी

हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C) एक रक्तजनित वायरस है जिससे आप संक्रमित व्यक्ति के रक्त, या थोड़े कम सामान्य रूप में, उसके शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आने पर ग्रस्त हो सकते हैं। एक ही सुई को साझा करने वाले ड्रग यूजर को इसका विशेष जोखिम होता है।

वायरस से लिवर टिश्यू में सूजन और दाग बन सकता है। कुछ मामलों में, यह लिवर को काफी क्षति पहुंचा सकता है।

हेपेटाइटिस सी से संक्रमित लगभग सात में से एक व्यक्ति में लिवर की विफलता होगी, जो प्रायः प्रारंभिक संक्रमण के 20 से 30 साल बाद हो सकती है।

प्राइमरी बिलियरी सिरोसिस

प्राइमरी बिलियरी सिरोसिस (पीबीसी) Primary biliary cirrhosis (PBC) - यह लिवर की दीर्घकालिक बीमारी का एक प्रकार है जिसे लिवर के अंदर पित्त-निर्माण का कारण माना जाता है। पित्त, लिवर के अंदर उत्पन्न होने वाला तरल है जो वसा के पाचन में शरीर की मदद करता है।

पीबीसी अपेक्षाकृत एक दुर्लभ स्थिति है, लेकिन यह उन सर्वाधिक सामान्य कारणों में से एक है कि एक व्यक्ति को लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता क्यों होती है।

हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)

हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) थोड़ा कम सामान्य प्रकार का वायरल हेपेटाइटिस है जो असुरक्षित यौन संबंध के दौरान या सुइयां साझा करने से फैल सकता है।

लगभग 2-10% लोगों में क्रोनिक (दीर्घकालिक) संक्रमण विकसित हो सकता है जहां वायरस उनके शरीर में रहता है, हालांकि यह जरूरी नहीं कि कोई लक्षण महसूस हो।

उपचार के बिना, क्रोनिक हेपेटाइटिस बी वाले लगभग 15-25% मरीज लिवर की विफलता का अनुभव करते हैं।

प्राइमरी स्केलेरोसिंग कोलेंजाइटिस (Primary sclerosing cholangitis)

प्राइमरी स्केलेरोसिंग कोलेंजाइटिस (पीएससी) एक प्रकार का यकृत रोग है, जिससे लिवर में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है। जो आमतौर पर लिवर विफलता की ओर ले जाता है।

पीएससी एक दुर्लभ बीमारी है जो 16,000 लोगों में से लगभग 1 व्यक्ति को प्रभावित करती है। यह आमतौर पर 30-50 वर्ष के लोगों में होती है।

ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस

ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस, दीर्घकालिक हेपेटाइटिस होने का एक दुर्लभ कारण है। सफेद रक्त कोशिकाएं लिवर पर हमला करती हैं, जिससे (लिवर को) सूजन और नुकसान पहुंचता है। इससे अधिक गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि लिवर की विफलता। इस प्रतिक्रिया का कारण ज्ञात नहीं है।

बिलियरी एट्रेसिया (पित्त-अविवरता/Biliary atresia)

बिलियरी एट्रेसिया, बाल्यकाल की एक दुर्लभ बीमारी है जिसमें जन्म के समय ही शिशुओं की पित्त नलिका में अवरोध दिखाई देता है। यह पीबीसी के समान ही पित्त का निर्माण करती है, जिसके परिणामस्वरूप लिवर में दाग हो जाता है और अंततः लिवर की विफलता होती है।

बिलियरी एट्रेसिया 18,000 नवजात शिशुओं में से केवल 1 को प्रभावित करती है, लेकिन यह एक शिशु को लिवर ट्रांसप्लांट किए जाने का सर्वाधिक सामान्य कारण है।

लिवर कैंसर

लिवर कैंसर (liver cancer) एक दुर्लभ और आक्रामक प्रकार का कैंसर है।

इसका उपयोग कौन कर सकता है

इसके लिए सख्त मूल्यांकन प्रक्रिया है जो यह तय करती है कि किसे लिवर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है, क्योंकि दान किया जाने वाला लिवर दुनिया भर में दुर्लभ है।

ट्रांसप्लांट सेंटर इस बात का निर्धारण करने के लिए स्कोरिंग प्रणाली का उपयोग करते हैं कि यदि ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता है तो किसी व्यक्ति के मृत्यु का जोखिम कितना है।

जीवन-गुणवत्ता का आकलन

आपकी जीवन-गुणवत्ता का आकलन एक सब्जेक्टिव प्रक्रिया हो सकती है। हालांकि, निम्नलिखित संकेत और लक्षण जीवन की गुणवत्ता में गिरावट को दर्शाते हैं जो कई लोगों के लिए असहनीय होगा:

  • तरल पदार्थ के निर्माण (ascites) के कारण पेट की सूजन जो उपचार पर प्रतिक्रिया करने में विफल रहती है।
  • लगातार बनी रहने वाली और दुर्बल करने वाली सांस की तकलीफ
  • लिवर को क्षति जो मस्तिष्क के सामान्य कामकाज को प्रभावित करती है (हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी), जिसके परिणामस्वरूप मानसिक भ्रम, चेतना-स्तर में कमी, और सबसे गंभीर मामलों में कोमा हो सकता है।
  • त्वचा में लगातार खुजली जो उपचार पर प्रतिक्रिया देने में विफल रहती है (वे कारण जो अभी भी अस्पष्ट हैं, उनके लिए त्वचा में खुजली होना 'यकृत रोग' का एक सामान्य लक्षण है)।
  • लिवर में लगातार दर्द जिसे उपचार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।
  • सर्वाइवल रेट (उत्तरजीविता दर) का अनुमान लगाना

आपके संभावित सर्वाइवल रेट का आकलन आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों और संबंधित कारकों पर निर्भर है, जैसे कि:

  • आपकी उम्र (हालांकि 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में भी ट्रांसप्लांट सफल रहा है)
  • आपको कोई और भी गंभीर बीमारी तो नहीं है, जैसे कि हृदय रोग
  • ट्रांसप्लांट के बाद दान किए गए लिवर के स्वस्थ रहने की संभावना कितनी है
  • सर्जरी के प्रभाव और इम्यूनोसप्रेसेंट दवा से जुड़े दुष्प्रभावों का (शारीरिक और मानसिक रूप से) सामना करने की आपकी क्षमता

आपके स्वास्थ्य और आपके जीवित रहने की संभावना का आकलन करने के लिए कई और परीक्षण भी किए जाएंगे।

इन परीक्षणों में आपके हृदय, फेफड़े, किडनी और लिवर की व्यापक जांच शामिल हो सकती है, इसके अलावा, लिवर कैंसर के लक्षणों के लिए भी जाँच की जा सकती है।

लिवर ट्रांसप्लांट को खारिज करना

यदि आपको निम्नलिखित में से दो या अधिक बीमारियाँ हैं तो संभवतः आपको लिवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह नहीं दी जाएगी:

  • किडनी की विफलता (kidney failure) – यानी जब गुर्दे अपने ज्यादातर या सभी काम करने बंद कर देते हैं
  • खराब सेहत और कुपोषण (malnutrition) के कारण वजन में भारी कमी होना
  • हेपेटाइटिस बी का सक्रिय संक्रमण जो दवा पर प्रतिक्रिया नहीं कर रहा है
  • लिवर के आसपास की किसी एक मुख्य रक्तवाहिका में खून का थक्का बनना

यदि आपको इनमें से कोई भी बीमारी है, तो लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह नहीं दी जाएगी:

  • एड्स (AIDS) (एचआईवी संक्रमण का अंतिम चरण)
  • मस्तिष्क को अपरिवर्तनीय क्षति
  • एक संक्रमण - उस संक्रमण के चले जाने का इंतजार करना आवश्यक होगा
  • कई सारे अंगों की विफलता जिनमें लिवर ट्रांसप्लांट से मदद नहीं मिलेगी
  • शरीर के किसी अन्य भाग में कैंसर (cancer) (इसमें त्वचा कैंसर (skin cancer) अपवाद है)
  • हृदय और/या फेफड़े का गंभीर रोग, जैसे हृदय की विफलता या क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज (सीओपीडी) (chronic obstructive pulmonary disease (COPD))
  • गंभीर मानसिक स्वास्थ्य या व्यवहारपरक स्थिति, जैसे कि मनोविकृति (साइकोसिस) (psychosis) या द्विध्रुवीय विकार (bipolar disorder), जिसका अर्थ है कि आप लिवर ट्रांसप्लांट के बाद जीवन के संबंध में चिकित्सा सिफारिशों का पालन करने में सक्षम नहीं होंगे।
  • लिवर का एडवांस कैंसर (advanced liver cancer) – वह समय जब कैंसर लिवर से आगे बढ़कर आसपास के टिश्यू में फैल जाता है, तब ट्रांसप्लांट द्वारा कैंसर को ठीक करने में बहुत देर हो चुका होता है

इसके अतिरिक्त, तब भी लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह नहीं दी जाएगी यदि:

  • आप शराब का सेवन करते हैं (abusing alcohol) – अधिकांश ट्रांसप्लांट सेंटर केवल ऐसे व्यक्ति के ट्रांसप्लांट पर विचार करते हैं जिसने कम से कम तीन महीने से शराब का सेवन नहीं किया है।
  • आप मादक पदार्थों का सेवन करते हैं - अधिकांश ट्रांसप्लांट सेंटर केवल ऐसे व्यक्ति के ट्रांसप्लांट पर विचार करेंगे जिसने ड्रग रिहैबिलिटेशन कोर्स में भाग लिया है, और जिसने कम से कम छह महीने तक ड्रग्स का सेवन नहीं किया है (कुछ ट्रांसप्लांट सेंटर ऐसे लोगों को भी स्वीकार करेंगे जो वर्तमान में हेरोइन का स्थानापन्न मेथाडोन ले रहे हैं)

लिवर ट्रांसप्लांट के लिए प्रतीक्षा करना

चूंकि उपलब्ध लिवर की कमी होती है, अतः आवश्यकता पड़ने पर यथाशीघ्र लिवर ट्रांसप्लांट शायद ही संभव होता है, इसलिए यह संभावना है कि आपको ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में रखा जाए।

लिवर ट्रांसप्लांट की क्लीनिकल आवश्यकता के आधार पर, आपको या तो उच्च-प्राथमिकता या मध्यम-प्राथमिकता वाली प्रतीक्षा सूची में रखा जाएगा। कई लोगों की स्वास्थ्य स्थिति इतनी ठीक होती है कि वे लिवर उपलब्ध नहीं होने तक घर पर रह सकें।

ट्रांसप्लांट सेंटर आपसे अल्प सूचना पर संपर्क कर सकता है, इसलिए आपको अपने व्यक्तिगत संपर्क विवरण में कोई भी बदलाव होने पर स्टाफ को सूचित करना चाहिए। यदि आपके स्वास्थ्य में कोई परिवर्तन है तो भी आपको स्टाफ को सूचित करना चाहिए, उदाहरण के लिए, यदि आप किसी संक्रमण से ग्रस्त होते हैं।

ट्रांसप्लांट के लिए प्रतीक्षा करना

दान किए जाने वाले लिवर के उपलब्ध होने तक, यह महत्वपूर्ण है कि आप निम्न कार्य करके यथासंभव स्वस्थ बने रहें:

  • स्वस्थ आहार लें
  • नियमित व्यायाम करें, यदि संभव हो
  • शराब का सेवन न करें - यदि आप शराब से परहेज नहीं कर पा रहे हैं तो संभावना है कि आपको प्रतीक्षा सूची से निकाल दिया जाए
  • धूम्रपान न करें - धूम्रपान छोड़ने के बारे में जानकारी पढ़ें

लिवर ट्रांसप्लांट का औसत प्रतीक्षा समय वयस्कों के लिए 142 दिन और बच्चों के लिए 78 दिन है।

हालाँकि, यदि आप उच्च-प्राथमिकता वाली प्रतीक्षा सूची में हैं तो आपका प्रतीक्षा समय कुछ और कम हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में, आपका प्रतीक्षा समय और भी कम हो सकता है यदि आपके किसी रिश्तेदार या आपके कोई मित्र का रक्त प्रकार आपके समान ही है, और वह एक लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट में भाग लेने का इच्छुक है।

यदि आपके बच्चे को लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है, तो आप ट्रांसप्लांट सेंटर के कर्मचारियों के साथ लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट में भाग लेने की संभावना पर भी चर्चा कर सकते हैं।

ओवरनाइट बैग तैयार करें और अपने दोस्तों, परिवार और नियोक्ता के साथ वैकल्पिक व्यवस्था करें ताकि आप डोनर लिवर के उपलब्ध होते ही ट्रांसप्लांट सेंटर जा सकें।

एक नियोजित ट्रांसप्लांट को रद्द भी किया जा सकता है, उदाहरण के लिए यदि आपकी सेहत इस हद तक बिगड़ जाती है कि ट्रांसप्लांट सुरक्षित या प्रभावी साबित न हो। आपको अपने ट्रांसप्लांट सेंटर के स्टाफ के साथ और आवश्यक होने पर अपने मित्रों, परिवार और प्रियजनों के साथ इस संभावना पर चर्चा करनी चाहिए।

प्रतीक्षा सूची के दौरान स्वयं को संभालना

लिवर की गंभीर बीमारी के साथ जीवन जीना काफी तनावप्रद हो सकता है, तो लिवर उपलब्धता की प्रतीक्षा करते समय अतिरिक्त चिंता और मानसिक दबाव से स्थिति आसान नहीं होनी है।

इस अतिरिक्त तनाव के कारण, लिवर ट्रांसप्लांट के संभावित उम्मीदवारों का अवसादग्रस्त (depression) होना सामान्य बात है।

एक अध्ययन में पाया गया कि लिवर ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा कर रहे चार में से एक व्यक्ति में मध्यम से लेकर गंभीर अवसाद के लक्षण थे।

अवसादग्रस्तता के लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

  • पिछले कुछ दिनों से आप प्रायः निराशा, उदासी या नाउम्मीदी महसूस कर परेशान हुए हैं
  • पिछले कुछ दिनों से आपको शायद ही कोई काम करने में रुचि या खुशी महसूस हुई

अपने मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें क्योंकि इससे आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

यदि आपको लगता है कि आप अवसादग्रस्त हो सकते हैं, तो अपने डॉक्टर की सलाह लें।

शोहना की कहानी

शोहना न्यूमैन-किड को नृत्य, दौड़ और इंद्रधनुष की पेंटिंग करना पसंद है, लेकिन उसके लिए ये सब करना कड़ी मेहनत का काम था जबकि दूसरे बच्चे आसानी से कर लेते थे।

1998 में जब शोहना का जन्म हुआ तो उसके शरीर में पित्तनली नहीं थी, यह एक ऐसी स्थिति है जिसे बिलियरी एट्रेसिया कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि उसका लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा और उसके शारीरिक तंत्र में जहर बन रहा है। जब शोहना सिर्फ चार हफ्ते की थी, तभी उसकी समस्या को ठीक करने के लिए डिज़ाइन किए गए दो ऑपरेशनों में से पहला ऑपरेशन हुआ था।

उसकी मां डेलोरिस न्यूमैन याद करती हैं कि कैसे उनकी बेटी का इलाज हर चीज पर हावी था: “उसकी 12 दवाएं चल रही थीं, कुछ तो दिन में तीन बार। मुझे उसके लिए एक विशेष आहार तैयार करना पड़ता था, और फिर उसकी नाक से उसके पेट में एक फीडिंग ट्यूब डालना पड़ता था। हम बड़ी मुश्किल से कभी बाहर जा पाते थे। लिवर की समस्याओं के चलते उसे सूखा रोग (रिकेट्स) भी हो गया।"

जब शोहना ढाई साल की थी, तब उसकी तबीयत और भी खराब हो गई। "डॉक्टरों ने कहा कि तत्काल लिवर ट्रांसप्लांट कराना होगा। उसे ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में रखे जाने के पाँच दिनों के भीतर, हमारे पास देर रात फोन आया जिसे कहा गया कि आपकी बच्ची के लिए एक लिवर उपलब्ध है," डेलोरिस कहती हैं।

"हमें लगा था कि हमें वर्षों तक इंतजार करना पड़ सकता है, और फिर यह लगा कि शायद हमें लंबे समय से इंतजार कर रहे अन्य बच्चों पर वरीयता दी जा रही है, लेकिन हमें आश्वासन दिया गया कि आपकी बच्ची के लिए सबसे अच्छा मैच मिलने के चलते ही शीघ्र नंबर आया है।"

शोहना का स्प्लिट लिवर ट्रांसप्लांट हुआ था। उसमें लिवर का छोटा हिस्सा प्रत्यारोपित हुआ, जबकि बड़ा हिस्सा एक वयस्क मरीज में प्रत्यारोपित किया गया।

“मुझे बहुत गर्व है कि उसने (इन मुश्किल दिनों का) डटकर सामना किया। वह समझती है कि उसके साथ क्या हुआ है, उसे पता है कि कौन सी चीजें खाना स्वास्थ्यप्रद है और उसे कोई भी नया भोजन आजमाने में खुशी होती है। वह यह भी समझती है कि भले ही उसके दोस्त दौड़ रहे हैं लेकिन उसे बीच-बीच में रुककर आराम करना चाहिए। उसे स्टेरॉयड और इम्यूनोसप्रेसेंट के कड़वे स्वाद को लेकर भी कोई शिकायत नहीं है। दुर्भाग्य से, उसे एक्जिमा हो गया है जो उसके लिए एक और लड़ाई के समान है, लेकिन वह इसे भी मैनेज कर रही है।"

डेलोरिस यह मानती हैं कि जब शोहना ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती थी, तब मेरे लिए यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि वह कभी बाहर जा सकती है या स्कूल के स्पोर्ट्स डे में भाग ले सकती है। "तब हर दिन (हमारे लिए) बोनस के समान था। डॉक्टरों को इतनी अच्छी प्रगति की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उसने हम सब को ऐसा कर दिखाया।"

स्वास्थ्य-लाभ (रिकवरी)

लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी हो जाने पर, आपको गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) में रखा जाएगा।

सांस लेने में आपकी सहायता के लिए वहाँ एक वेंटिलेटर होगा। शरीर में पोषक तत्व और तरल पदार्थ पहुंचाने के लिए आपकी नाक से आपके पेट में एक नली डाली जाएगी। इन नलियों को आम तौर पर कुछ दिनों के बाद हटाया जा सकता है।

ट्रांसप्लांट के बाद, आपको कुछ दर्द हो सकता है। इसलिए आपको आवश्यकतानुसार दर्द से राहत वाली दवा दी जाएगी।

ज्यादातर लोग इतने सक्षम हो जाते हैं कि उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट के कुछ दिनों के भीतर गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) intensive care unit (ICU) से अस्पताल के वार्ड में रखा जा सके। वे दो से तीन हफ्ते में अस्पताल से जा सकते हैं।

लिवर ट्रांसप्लांट में स्वास्थ्य-लाभ प्राप्त करना एक लंबी, धीमी प्रक्रिया हो सकती है। धीरे-धीरे अपने स्वास्थ्य और फिटनेस को पाने का प्रयास करें। आपको काम पर लौटने और सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू करने में तीन से छह महीने लग सकते हैं।

इम्यूनोसप्रेसेंट

लिवर ट्रांसप्लांट के बाद, सबसे बड़ा जोखिम यह है कि आपका इम्यून सिस्टम शायद नए लिवर को पहचान नहीं पाए और उस पर हमला शुरू कर दे। इसे ही अस्वीकृति या खारिज करना के रूप में जाना जाता है।

अस्वीकृति और लिवर ट्रांसप्लांट जटिलताओं (liver transplant complications) के बारे में और पढ़ें।

अस्वीकृति को रोकने के लिए, आपको इम्यून सिस्टम का दमन करने वाली दवाएँ लेनी पड़ सकती हैं। इन दवाओं को इम्यूनोसप्रेसेंट कहा जाता है।

चूंकि ट्रांसप्लांट से पहले तीन महीनों में अस्वीकृति का जोखिम सबसे अधिक होता है, इसलिए आपको शुरू में इम्यूनोसप्रेसेंट का अपेक्षाकृत हाई डोज़ दिया जा सकता है।

फिर, आपके डोज़ को उस स्तर तक कम किया जाएगा जो आपके इम्यून सिस्टम द्वारा नए लिवर को खारिज करने से रोकने के लिए पर्याप्त हो, साथ ही अप्रिय दुष्प्रभावों को कम करने में भी उपयोगी हो।

इम्यूनोसप्रेसेंट की प्रभावकारिता का आकलन करने के लिए, जब आप इन्हें पहली बार लेना शुरू करते हैं तो ऐसी संभावना है कि आपका नियमित रक्त परीक्षण किया जाए।

अस्वीकृति को रोकने और दुष्प्रभावों को कम करने के मध्य संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आपके लिए इष्टतम डोज़ हासिल करने में कई महीने लग सकते हैं।

इम्यूनोसप्रेसेंट के प्रकार

लिवर ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों के उपचार में मुख्यतः दो प्रकार के इम्यूनोसप्रेसेंट का उपयोग किया जाता है:

प्रत्येक दवा प्रकार के बारे में नीचे और अधिक विस्तार से चर्चा की गई है।

कैल्सिन्यूरिन इन्हिबिटर (calcineurin inhibitors)

कैल्सिन्यूरिन इन्हिबिटर - ये कैल्सिन्यूरिन नामक प्रोटीन के प्रभाव को ब्लॉक करके काम करते हैं, जो कि टी-कोशिका नामक सफेद रक्त कोशिका के एक प्रकार को सक्रिय करने के लिए जवाबदेह है। संक्रमण से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम टी-कोशिकाओं का उपयोग करता है।

कैल्सिन्यूरिन के प्रभावों को अवरुद्ध करने का मतलब यह है कि आपका इम्यून सिस्टम आपके नए लिवर के टिश्यू पर हमला करने के लिए टी-कोशिकाओं को नहीं भेजेगा।

व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले दो कैल्सिन्यूरिन इन्हिबिटर हैं- सिक्लोस्पोरिन और टैक्रोलिमस, जिन्हें या तो टैबलेट या कैप्सूल के रूप में या फिर इंजेक्शन के रूप में दिया जा सकता है।

सिक्लोस्पोरिन और टैक्रोलिमस के सामान्य दुष्प्रभावों में शामिल है:

दुष्प्रभावों की पूरी सूची और अन्य दवाओं के साथ इंटरैक्शन के लिए, कृपया [सिक्लोस्पोरिन] पर दवा जानकारी खंड देखें।

हालाँकि ये दुष्प्रभाव तकलीफदेह हो सकते हैं, लेकिन आपको इम्यूनोसप्रेसेंट की अनुशंसित डोज़ लेना कभी भी बंद या कम नहीं करना चाहिए क्योंकि यह आपके लिवर को अस्वीकार किए जाने का कारण बन सकता है।

कोई अन्य दवा लेने से पहले हमेशा अपने फार्मासिस्ट या डॉक्टर को दिखाएँ।

कोर्टिकोस्टेरॉइड

कोर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroids) - ये इम्यून सिस्टम की कोशिका-दीवारों को भेद सकते हैं। कोशिकाओं के अंदर प्रवेश करने के बाद कोर्टिकोस्टेरॉइड उन कई रसायनों को स्रावित करने वाले जीन को "बंद" कर सकते हैं जिन्हें इम्यून सिस्टम अन्यथा प्रकार से आपके नए लिवर पर हमला करने के लिए उपयोग कर सकती है।

लिवर ट्रांसप्लांट के मरीजों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला कॉर्टिकोस्टेरॉइड 'प्रेडनिसोलोन' है।

प्रेडनिसोलोन के सामान्य दुष्प्रभावों में शामिल है:

  • व्यवहार या भावनाओं में अचानक बहुत ज्यादा परिवर्तन (मूड स्विंग)
  • मांसपेशियों की दुर्बलता
  • वजन बढ़ना

दुष्प्रभावों की पूरी सूची के लिए, कृपया [प्रेडनिसोलोन] पर दवा जानकारी खंड देखें।

कोर्टिकोस्टेरॉइड के लंबे समय तक उपयोग से अधिक गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। कोर्टिकोस्टेरॉइड के दुष्प्रभावों (side effects of corticosteroids) के बारे में और अधिक जानकारी पढ़ें।

प्रेडनिसोलोन इस्तेमाल करने वाले 20 लोगों में से लगभग 1 व्यक्ति में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि:

  • आत्महत्या के बारे में सोचना
  • मतिभ्रम होना (ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तविक नहीं हैं)
  • बहुत व्याकुल महसूस करना और स्पष्ट रूप से सोचने में समस्या होना
  • अजीब, असामान्य और भयावह विचार आना

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो अपने डॉक्टर या अपनी देखभाल टीम के सदस्य से तुरंत संपर्क करें। यदि यह संभव नहीं है, तो अपने लोकल आउट-ऑफ-ऑवर्स सर्विस को फोन करें।

गॉर्डन की कहानी

जब गॉर्डन ब्रिडवेल 1975 में नए साल की पूर्व संध्या पर एक पथप्रदर्शक लिवर ट्रांसप्लांट के लिए वेस्ट कंट्री से लंदन जा रहे थे, तो वे नहीं जानते थे कि वे आगे जाकर अपने नाम एक रिकॉर्ड भी दर्ज कराने वाले हैं।

गॉर्डन, जो अभी 59 वर्ष के हैं, ब्रिटेन के सबसे लंबे समय तक जीवित लिवर ट्रांसप्लांट मरीज है, साथ ही दुनिया के शीर्ष 10 सबसे लंबे समय तक जीवित लिवर ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ताओं में से एक हैं।

इसकी शुरुआत एक फुटबॉल मैच के दौरान मामूली चोट से हुई थी। "मेरे पैर में एक छोटी सी गांठ दिखाई दी, और चलते वक्त इसमें दर्द होता था। मैं खेलने के लिए उत्सुक था, इसलिए मैं अपने डॉक्टर के पास गया," गॉर्डन कहते हैं।

इसे हटाने के लिए हुए ऑपरेशन के बाद, गॉर्डन को ब्लैकआउट (क्षणिक-अंधता) और मतिभ्रम होना शुरू हो गया। इसके पीछे एक तर्क यह था कि उसके लिवर ने एनेस्थेसिया को फ़िल्टर नहीं किया था। इससे पहले कि वे काम पर लौट सकें, उनके डॉक्टर ने आगे के परीक्षणों के लिए लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल में एहतियातन विजिट करने की सलाह दी।

“किंग्स कॉलेज अस्पताल में, उन्होंने लगभग 20 से 30 परीक्षण किए। मुझे आश्चर्य हो रहा था कि मैं वहां क्या कर रहा था, जबकि मैं ठीक हूँ। तब कंसल्टेंट ने मुझे बताया कि मेरे लिवर पर एक ट्यूमर है।"

ट्यूमर को निकाल दिया गया, लेकिन परीक्षणों से एक दूसरे रोग का पता चला जो ऑपरेशन करने योग्य नहीं था। विशेषज्ञों ने लिवर ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया।

"मैं अचंभित हो गया। मैं अभी भी दूसरे ट्यूमर की बात सुनकर उबर नहीं पाया था। मैंने किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में सुना तो था लेकिन लिवर ट्रांसप्लांट के बारे में सिर्फ यही ज्ञात था कि यह एक आखिरी उपाय है और ज्यादातर बुजुर्ग लोगों के लिए अपनाया जाता है।"

"अब सिर्फ इंतजार करना था - मेरे पास चार बार गलत सूचना मिली और जब मैं लंदन पहुंचता तो मालूम होता कि वे अंग मेरे लिए संगत नहीं हैं।" एक उपयुक्त मैच ढूँढने के लिए यूरोप के शेष हिस्सों में पूछताछ की गई।

दिसंबर 1975 में, गॉर्डन को एक और संभावित ट्रांसप्लांट के लिए बुलाया गया। 12 घंटे चले ऑपरेशन का नेतृत्व रॉय केल्ने (वर्तमान में प्रोफेसर सर रॉय केल्ने) ने किया, जिन्होंने 1968 में यूरोप में पहला लिवर ट्रांसप्लांट किया था। ऑपरेशन के बाद होश में आने पर और शरीर पर कई सारे ट्यूब जुड़े हुए देखने के बावजूद, गॉर्डन ने अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया, भले ही शरीर के बाहरी हिस्से में 30 टांके लगे थे और यहां तक कि शरीर के अंदरूनी हिस्से में पता नहीं कितने टांके लगे थे। वे अपने ट्रांसप्लांट में शामिल टीम की सहायता और कौशल के लिए बेहद आभारी हैं।

वह काफी ठीक महसूस करने पर 13 महीने बाद काम पर लौट गए: वे कहते हैं, "हर दिन दो घंटे और खूब सारी गोलियां - वे घंटे मानो पूरी जिंदगी का निचोड़ थे।" "पित्त को बाहर निकालने के लिए मुझे तब तक एक ट्यूब लगी थी जब तक नए लिवर ने ठीक ढंग से काम करना शुरू नहीं कर दिया। मुझे इसे दिन में दो या तीन बार खाली करना होता था ”

गॉर्डन ने जल्द ही फिर से खेल में भाग लेना शुरू कर दिया। 1980 में उन्होंने रॉस-ऑन-वाई 100-मील राफ्ट रेस का प्रशिक्षण लिया, और इसमें प्रतिस्पर्धा करने वाले ब्रिटेन के प्रथम ट्रांसप्लांट करने वाले व्यक्ति बन गए। इन वर्षों में, उन्होंने दुनिया भर के अनेक लोगों की काउंसलिंग की ताकि उन्हें अपने लिवर ट्रांसप्लांट के लिए तैयार किया जा सके।

गॉर्डन अपने दानकर्ता के आभारी हैं, और उन्हें यूके में सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाला लिवर ट्रांसप्लांट व्यक्ति होने पर गर्व है: “यह मुझे सम्मानित और कुछ विशेष अनुभूति प्रदान करता है। हर नए साल की पूर्व संध्या पर यह सबकुछ याद आता है, और मैं हमेशा इसका जश्न मनाता हूं। मैं यहां आकर बहुत खुश हूं।”

"ऑपरेशन ने मेरे पूरे जीवन को बदल दिया - उपयुक्त लिवर की उपलब्धता के लिए मुझे केवल पांच महीने प्रतीक्षा करनी पड़ी। मैं कई लोगों से दानकर्ता बनने की अपील करता हूं और उनसे पूछता हूं कि अगर आपके बेटे या बेटी को अंग प्रत्यारोपण की जरूरत पड़े तो क्या करेंगे?"

गॉर्डन का मानना है कि उसकी समझदारी ने ही उसे अच्छा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन उसे ऑपरेशन के बाद अपना पहला पूरा खाना खाने में बहुत अधिक समय लगा: "मैं वास्तव में इसके लिए तत्पर था और जैसे ही नर्स ने ढक्कन उठाया और फिर हांफते हुए कहा 'मैं आपको यह नहीं दे सकती!" यह कलेजी (लिवर)और प्याज था!”

लिवर ट्रांसप्लांट की जटिलताएँ

लिवर ट्रांसप्लांट की जटिलताओं में अस्वीकृति, संक्रमण का बढ़ा जोखिम, ग्राफ्ट की विफलता, पित्त की स्थिति और डायबिटीज़ जैसी कुछ स्थितियों के विकसित होने का अधिक जोखिम शामिल हो सकता है।

लिवर की अस्वीकृति

यह सामान्य है कि नए लिवर पर इम्यून सिस्टम हमला करे। ऐसा 40% मामलों में होता है, आमतौर पर ट्रांसप्लांट के बाद शुरुआती 7-14 दिनों में।

लिवर अस्वीकृति के लक्षणों में शामिल है:

  • 38ºC (100.4ºF) या इससे अधिक का तापमान
  • उल्टी
  • दस्त (डायरिया) (diarrhoea)
  • पीली त्वचा और आंखों के सफेद भाग में पीलापन (पीलिया)
  • पीले रंग का मल
  • गहरे रंग की पेशाब
  • त्वचा में खुजली

अधिकांश मामलों को इम्यूनोसप्रेसेंट की आपकी खुराक में परिवर्तन करके सफलतापूर्वक प्रबंधित किया जा सकता है।

संक्रमण

इम्यूनोसप्रेसेंट आपको संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं। आप विशेष रूप से इनके प्रति संवेदनशील होंगे:

  • फंगल संक्रमण
  • साइटोमेगालोवायरस (सीएमवी) संक्रमण - एक सामान्य वायरस जो हर्पिस (दाद) परिवार का वायरस है

फंगल संक्रमण

एस्परगिलोसिस (Aspergillosis) और थ्रश (thrush ) (कैंडिडायसिस) - ये फंगल संक्रमण हैं जो आमतौर पर लिवर ट्रांसप्लांट के बाद लोगों को प्रभावित करते हैं।

एहतियात के तौर पर, आपको ट्रांसप्लांट के बाद कई महीनों तक फ़्लूकोनाज़ोल जैसी एक एंटी-फंगल दवा (antifungal medication) का कोर्स दिया जाएगा।

इस प्रकार के फंगल संक्रमण के लक्षण इस पर निर्भर करेंगे कि आपके शरीर का कौन सा हिस्सा प्रभावित है, लेकिन इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • त्वचा की स्केलिंग और लालिमा
  • खुजली
  • योनि संक्रमण के मामलों में, योनि से गाढ़ा, सफेद तरल पदार्थ का स्राव
  • आपके शरीर के अंदर अधिक गंभीर फंगल संक्रमण भी विकसित हो सकते हैं, जैसे कि फेफड़े (फंगल निमोनिया) या रक्तप्रवाह में

लक्षणों में शामिल हैं:

  • 38ºC (100.4ºF) या इससे अधिक का तापमान
  • सांस लेने में कठिनाई
  • चक्कर आना (शिरोभ्रमण)
  • छाती में दर्द
  • मानसिक व्यवहार में बदलाव, जैसे भ्रम या भटकाव

यहां तक कि मामूली संक्रमण के लक्षण भी तेजी से बिगड़ सकते हैं, और यदि आप इम्यूनोसप्रेसेंट ले रहे हैं तो घातक जटिलताएं हो सकती हैं। यदि आप किसी फंगल संक्रमण के लक्षण महसूस करते हैं, तो आपको अपने डॉक्टर या ट्रांसप्लांट टीम को जल्द से जल्द दिखाना चाहिए।

साइटोमेगालोवायरस (सीएमवी) संक्रमण (Cytomegalovirus (CMV) infection)

साइटोमेगालोवायरस (सीएमवी) के विरुद्ध एहतियात के तौर पर, आपको ट्रांसप्लांट के बाद कई महीनों तक एंटीवायरल दवा का कोर्स दिया जा सकता है।

सीएमवी संक्रमण के लक्षणों में शामिल हैं:

  • उच्च तापमान (बुखार)
  • सांस लेने में कठिनाई
  • भूख में कमी
  • आपके मुंह में बड़े-बड़े, दर्दनाक छाले
  • जोड़ों का दर्द

नजर की समस्या, जैसे कि अंध-बिंदु (ब्लाइंड स्पॉट), धुंधलापन और फ्लोटर (आपकी नजर के सामने तैरती काले रंग की चीज़ें)

यदि ऐसा लगता है कि आपको सीएमवी संक्रमण है, तो अपने डॉक्टर या ट्रांसप्लांट सेंटर से जल्द से जल्द संपर्क करें।

पित्त रोग (Biliary conditions)

लिवर ट्रांसप्लांट के बाद, पित्त नली को प्रभावित करने वाली स्थितियों का खतरा होता है, जिनमें शामिल हैं:

  • पित्त रिसाव
  • दागदार ऊतक जो रुकावट का कारण बनता है

इन्हें आमतौर पर एंडोस्कोपी से उपचारित किया जा सकता है। पित्त को अधिक स्वतंत्र रूप से प्रवाहमान बनाने के लिए एक छोटे, वायर-मेश ट्यूब, जिसे स्टेंट कहा जाता है, को डाला जा सकता है। कुछ मामलों में, आगे सर्जरी की आवश्यकता होती है।

डायबिटीज़ (मधुमेह)

लिवर ट्रांसप्लांट की एक आम और संभावित गंभीर जटिलता 'टाइप 2 डायबिटीज़ ' (type 2 diabetes) है। यह पांच लोगों में लगभग एक व्यक्ति को प्रभावित करता है।

डायबिटीज़ के लक्षणों में शामिल हैं:

  • बहुत प्यास लगना
  • कई बार टॉयलेट जाना, खासतौर पर रात में
  • अत्यधिक थकान
  • वजन कम होना और मांसपेशी आयतन (मसल बल्क) की क्षति

इसका अब तक सटीक कारण ज्ञात नहीं है कि लिवर ट्रांसप्लांट के मरीजों में डायबिटीज़ विकसित होने का खतरा क्यों बढ़ जाता है। लेकिन लिवर ट्रांसप्लांट के बाद विकसित होने वाले डायबिटीज़ के आधे से अधिक मामले उन लोगों में पाए गए हैं, जिन्हें हेपेटाइटिस सी का इतिहास रहा है।

किडनी की विफलता

किडनी की विफलता (kidney failure) एक और सामान्य व गंभीर जटिलता है जो लिवर ट्रांसप्लांट वाले पांच लोगों में से एक व्यक्ति को प्रभावित करती है, आमतौर पर पांच साल के भीतर।

किडनी की विफलता तब होती है जब किडनी अपना काम करना बंद कर देती हैं, और वो खून से अपशिष्ट उत्पादों को फ़िल्टर करने में सक्षम नहीं होती हैं।

ऐसा माना जाता है कि किडनी की विफलता का मुख्य कारण इम्यूनोसप्रेसेंट के कैल्सिन्यूरिन इन्हिबिटर प्रकार का दुष्प्रभाव है। ये दवाएं कुछ लोगों में किडनी को नुकसान पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं।

गुर्दे की विफलता के लक्षणों में शामिल हैं:

  • थकान
  • टखने, पैर या हाथ में सूजन (पानी से संपर्क के कारण)
  • सांस लेने में कठिनाई
  • मतली
  • मूत्र में रक्त आना

डायलिसिस (dialysis) (कृत्रिम रूप से गुर्दे के कुछ कार्यों को बदलना) या किडनी ट्रांसप्लांट (kidney transplant) के द्वारा किडनी की विफलता का इलाज किया जा सकता है।

ग्राफ्ट विफलता (Graft failure)

ग्राफ्ट विफलता एक चिकित्सीय शब्द है जिसका अर्थ है कि प्रत्यारोपित अंग ठीक से काम नहीं कर रहा है। यह लिवर ट्रांसप्लांट की सबसे गंभीर जटिलताओं में से एक है, और यह 14 में से 1 मामले में होती है।

ग्राफ्ट विफलता का सबसे सामान्य कारण खून के थक्के (थ्रोम्बोसिस) बनने के कारण प्रत्यारोपित लिवर में खून की आपूर्ति बाधित हो जाना है। इसमें शामिल हैं:

  • हेपेटिक आर्टरी थ्रोम्बोसिस (hepatic artery thrombosis), जो हृदय और लिवर (हेपेटिक आर्टरी) के बीच रक्त वाहिका को प्रभावित करती है।
  • पोर्टल वेन थ्रोम्बोसिस (portal vein thrombosis), जो पेट और लिवर में अंगों के बीच की नस को प्रभावित करता है।

ग्राफ्ट विफलता के अन्य कारणों में शामिल हैं:

प्राइमरी नॉन-फंक्शन, जिसमें पहले कुछ घंटों के भीतर नया लिवर काम नहीं करता है और एक नए ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है।

हालांकि, कई मामलों में इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं दिखता है।

ग्राफ्ट विफलता वाले व्यक्ति की स्थिति तेजी से बिगड़ती है, और उसमें कई सारे लक्षण दिख सकते हैं जिनमें मांसपेशियों की ऐंठन से लेकर दोहरी दृष्टि तक शामिल हैं, और अंततः व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है।

हालांकि दवा से शरीर को थोड़े समय के लिए स्थिर रखा जा सकता है, लेकिन इसका एकमात्र इलाज शरीर में नया लिवर ट्रांसप्लांट करना है।

पोस्ट-ट्रांसप्लांट लिम्फोप्रोलिफेरेटिव डिसऑर्डर (पीटीएलडी) (Post-transplant lymphoproliferative disorder (PTLD))

पोस्ट-ट्रांसप्लांट लिम्फोप्रोलिफेरेटिव डिसऑर्डर (पीटीएलडी) एक असामान्य और गंभीर जटिलता है जो लिवर ट्रांसप्लांट वाले लगभग 50 में से 1 व्यक्ति को होता है।

पीटीएलडी एक सामान्य शब्द है जिसका उपयोग सफेद रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करने वाले एपस्टीन-बार वायरस के चलते दिखने वाले कई लक्षणों का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जिसके कारण पूरे शरीर में असामान्य वृद्धि हो सकती है।

पीटीएलडी आम तौर पर ट्रांसप्लांट के बाद पहले वर्ष में होता है, हालांकि यह किसी भी समय विकसित हो सकता है।

पीटीएलडी के लक्षणों में शामिल हैं:

  • उच्च तापमान
  • सूजी हुई लसीका ग्रंथियां (लिम्फ नोड)
  • पेट में दर्द
  • टॉन्सिल में सूजन, जो सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता हैं
  • वजन घटना
  • पेट में दर्द

पीटीएलडी एक गंभीर जटिलता है क्योंकि यह कई अंग विफलता के साथ ही मृत्यु का कारण बन सकती है। यदि अंग प्रत्यारोपण के बाद पीटीएलडी विकसित होता है, तो ऐसे लगभग 40% लोगों की इस स्थिति से मौत हो सकती है।

पीटीएलडी का उपचार अस्थायी रूप से इम्यूनोसप्रेसेंट का उपयोग बंद कर और अंतर्निहित वायरल संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीवायरल दवा का उपयोग करके किया जाता है।

कैंसर

प्रत्यारोपित लिवर वाले लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, जैसे:

ऐसा माना जाता है कि यह बढ़ा हुआ जोखिम इम्यूनोसप्रेसेंट लेने का दुष्प्रभाव है।

त्वचा कैंसर का खतरा विशेष रूप से अधिक है - ऐसा माना जाता है कि सामान्य आबादी की तुलना में प्रत्यारोपित लिवर वाले व्यक्ति को त्वचा कैंसर होने की 20 गुना अधिक संभावना है।

इस बढ़े हुए जोखिम के कारण, यदि आपका लिवर ट्रांसप्लांट हुआ है तो आपको धूप या पराबैंगनी प्रकाश के कृत्रिम रूपों, जैसे सनबेड या सन लैंप से लंबे समय तक संपर्क से बचना चाहिए। इसमें डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) के साथ नियमित चेक-अप की सलाह दी जाएगी।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।