COVID-19: नवीनतम सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक करें

×
16 min read

कलर विज़न की कमी (कलर ब्लाइन्डनेस) (Colour vision deficiency (colour blindness))

मेडिकल समीक्षा के साथ

स्वास्थ्य संबंधी सभी लेखों की चिकित्सीय सुरक्षा जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है। अधिक जानकारी के लिए हमारी सम्पादकीय नीति देखें।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

परिचय

जिन लोगों को कलर विज़न डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) की समस्या होती है वो रंगों को साफ और सही तरीके से नहीं देख पाते हैं। उन्हें अलग-अलग रंगों में अंतर करने में मुश्किल आ सकती है।

कलर विज़न डिफिशिएंसी(colour vision deficiency) को अक्सर कलर ब्लाइंडनेस भी कहा जाता है। हालांकि, असली कलर ब्लाइंडनेस दुर्लभ है; जिसमें व्यक्ति को कोई भी रंग दिखाई नहीं देता है।

जिन लोगों को कलर विजन डिफिशिएंसी की समस्या होती है उन्हें कम रोशनी में हल्के पीले रंगों या गहरे रंगों को पहचानने में मुश्किल हो सकती है।

कलर विज़न डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) गंभीर रूप ले सकती है। कुछ लोगों को तब तक पता ही नहीं चलता कि उन्हें ये समस्या है, जब तक वो कलर विजन टेस्ट नहीं करवा लेते। अन्य लोगों को अलग-अलग रंगों को और रंग के शेड्स में फर्क महसूस करने में थोड़ा अंतर अनुभव होगा। दुर्लभ मामलों में किसी इंसान को कई रंग एक जैसे लग सकते हैं।

कलर विज़न डिफिशिएन्सी (colour vision deficiency) के लक्षणों के बारे में और पढ़े।

कलर विज़न डिफिशिएन्सी के प्रकार (Types of colour vision deficiency)

कलर विज़न डिफिशिएन्सी (colour vision deficiency) के दो मुख्य प्रकार होते हैं -

  • रेड-ग्रीन डिफिशिएन्सी -जब लोग लाल और हरे के कुछ निश्चित शेड्स में अंतर ना कर पाएं, ये आमतौर पर अनुवांशिक होता है।
  • ब्लू-येलो डिफिशिएंसी - ये एक दुर्लभ स्थिति है, जब पीले और हरे में अंतर करना मुश्किल होता है और पीला हल्के ग्रे या बैगनी की तरह दिखता है।

कलर विज़न डिफिशिएन्सी किस कारण होती है? (What causes colour vision deficiency)

अधिकांश मामलों में कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) अनुवांशिक होती है (आपके माता पिता से आप में आती है) हालांकि, कभी-कभी ये पहले से चल रही किसी स्वास्थ्य संबधी परेशानी के परिणामस्वरूप या किसी दवा के दुष्प्रभाव के कारण होती है।

अनुवांशिक कलर विजन डिफिशिएंसी रेटिना में किसी असामान्यता के कारण होती है (फिल्म जो आंख के पिछले हिस्से को लाइन करती है)। रेटिना रॉड और कॉन(rod and cone) कोशिकाओं से बना होता है। कॉन सेल्स मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है। वे लोग जिन्हें इनहेरिटेड कलर डिफिशिएंसी (Inherited colour deficiency) होती है, उनमें एक प्रकार की कॉन सेल नहीं होती है या सही तरह से काम नहीं करती हैं।

कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) के कारणों के बारे में और पढ़े।

कलर विजन डिफिशिएंसी की पहचान (Recognising colour vision deficiency)

बहुत सारे लोग जिन्हें कलर विजन डिफिशिएंसी की समस्या होती है, उन्हें ये बात तब पता चलती है जब उन्हें रंग पहचानने में समस्या आने लगती है।

उदाहरण के तौर पर, एक बच्चे को कलर के नाम बताने में परेशानी हो सकती है या आपको किसी मैप या डॉक्यूमेंट को पढ़ने में दिक्कत हो सकती है।

कलर विजन की परेशानी को शुरुआत में पहचानना बहुत जरूरी है। अगर आपके बच्चे में प्रारंभिक उम्र में ही इसका पता चला है और अध्यापकों को इस बारे में जागरूक किया जाता है तो उनके सीखने के अनुभव को अनुकूलित बनाया जा सकता है।

कलर विज़न डिफिशिएन्सी (colour vision deficiency) के निदान के बारे में और पढ़ें।

कलर विजन डिफिशिएंसी का इलाज (Treating colour vision deficiency)

वर्तमान में इनहेरिटेड कलर विजन डिफिशिएंसी (inherited colour vision deficiency) का कोई इलाज नहीं है क्योंकि रेटिना में मौजूद कॉन सेल्स को ठीक करना या बदलना संभव नहीं है।

हालांकि क्योंकि कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) से कोई दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबधी समस्या नहीं होती है, इसलिए आपके सामान्य और स्वस्थ जीवन के लिए इसका इलाज करना जरूरी नहीं है।

अगर आपको किसी पुरानी स्वास्थ्य संबधी परेशानी की वजह से या किसी दवाई की वजह से कलर विजन डिफिशिएंसी की समस्या हुई है तो बुनियादी स्थिति का इलाज करके या फिर किसी अन्य दवा का प्रयोग करके आपके लक्षणों में सुधार संभव है।

अधिकांश लोग जिन्हें कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) की समस्या है वो अपनी स्थिति के साथ रहना सीख लेते हैं और रंगों को लेकर जो समस्या है उसकी क्षतिपूर्ति के लिए अन्य रास्ते ढूंढना संभव है। उदाहरण के तौर पर अलग-अलग रंगों के बजाय ट्रैफिक लाइट पर लाइट की पोजीशन पहचानना संभव है।

कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) के इलाज के बारे में और पढ़ें।

जटिलताएं (Complications)

अधिकतर मामलों में कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) वाले लोगों को कोई लंबे वक्त तक रहने वाली स्वास्थ्य संबधी परेशानी नहीं होती है।

हालांकि अगर आपको लाल-हरी कलर डिफिशिएंसी है तो आपके लिए शरीर में मौजूद तरल पदार्थों में से रक्त को खोजना मुश्किल हो सकता है; जो कभी-कभी दूसरी मेडिकल स्थितियों का एक प्रारंभिक चिन्ह हो सकता है।

कलर विजन डिफिशिएंसी आपके करियर की पसंद पर भी प्रभाव डाल सकती है क्योंकि कुछ नौकरियां जैसे कि पायलट या एयर ट्रैफिक कंट्रोलर में सटीक रंग पहचानने की जरूरत होती है।

अगर आपके बच्चे को कलर विजन डिफिशिएंसी की समस्या है और उसकी टीचर को ये बात पता नहीं है तो उसे स्कूल में परेशानी हो सकती है। पढ़ाई से जुड़ी कई सामग्री कलर कोडेड होती है और अगर सीखने का वातावरण आपके बच्चे की ज़रूरत के हिसाब से नहीं है तो ये उनके लिए और मुश्किल हो सकता है। कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) की जटिलताओं के बारे में और पढ़ें।

लक्षण (Symptoms)

अगर आपको कलर विजन डिफिशिएंसी है तो रोशनी कम होने पर आपको गहरे रंगों और फीके रंगों को पहचानने में मुश्किल हो सकती है।

कलर विजन डिफिशिएंसी की गंभीरता अलग लोगों के लिए अलग हो सकती है। कुछ लोगों को तब तक पता ही नहीं चलता कि उन्हें ये समस्या है जब तक वो कलर विजन टेस्ट नहीं करवा लेते। अन्य लोगों को अलग-अलग रंगों को और रंग के शेड्स में फर्क करने में थोड़ा अंतर अनुभव होगा। दुर्लभ मामलों में किसी इंसान को कई रंग एक जैसे लग सकते हैं।

रेड-ग्रीन डिफिशिएन्सी (red green deficiency)

रेड ग्रीन डिफिशिएन्सी (red green deficiency), कलर विज़न डिफिशिएन्सी (colour vision deficiency)

का सबसे प्रचलित प्रकार है। अगर आपको रेड-ग्रीन डिफिशिएन्सी (red green deficiency) है तो -

  • आपको लाल और हरे के शेड्स के बीच अंतर करने में मुश्किल होगी
  • लाल, नारंगी, पीला और हरा ये सभी रंग आपको एक जैसे लग सकते हैं
  • लाल, नारंगी, पीले और हरे रंग जैसे किसी सामान्य विजन वाले इंसान को दिखाई देते हैं, उसके मुकाबले आपको हल्के लग सकते हैं
  • लाल, नारंगी, पीले और हरे रंग को केवल उनकी चमक और तीव्रता से पहचाना जा सकता है
  • बैंगनी के शेड्स, जैसे लैवेंडर और बैगनी रंगों में अंतर करना भी मुश्किल हो सकता है

नीला-पीला डिफिशिएन्सी (blue yellow deficiency)

अगर आपको नीला-पीला डिफिशिएंसी

(blue yellow deficiency) है तो आपको -

  • हरे और नीले रंग में अंतर करना मुश्किल होगा
  • हरा रंग आपको ब्लू के शेड जैसा ही लगेगा
  • पीला रंग आपको ग्रे या पर्पल के हल्के शेड जैसा नजर आएगा

बच्चे (Children)

अगर आपके बच्चे को कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) है तो उसके लिए रंगों में अंतर करना या फिर पढ़ाई की सामग्री, जिसमें रंगों का इस्तेमाल हुआ हो, उनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।

कारण (Causes)

रंगों को सही तरह से देखने के लिए आपकी आंखों को तीन प्राथमिक रंगों - लाल, हरे और नीले में भेद करने की जरूरत होती है।

आंखे रंगों की पहचान कैसे करती हैं (How the eye detects colour)

जब रोशनी आपकी आंख में प्रवेश करती है तो रंग संवेदनशील कोशिकाओं, जिन्हें कोन्स भी कहा जाता है, तक पहुंचने से पहले आपकी आंख के सामने के लेंस से गुज़रती है (कोशिकाओं की परत जो आंख के पिछले हिस्से को लाइन करती है।)

कोन सेल्स तीन अलग प्रकार की होती हैं - नीली, हरी और लाल (जिन्हें छोटी, मीडियम और लंबी वेवलैंथ भी कहा जाता है) - जो लाइट के अलग-अलग वेवलैंथ का पता लगाती हैं।

कोन्स इस बात का पता लगाती हैं कि आप किस रंग को देख रहे हैं और ऑप्टिक तंत्रिका के ज़रिए आपके मस्तिष्क को संदेश भेजती हैं। अगर आपकी कोन सेल्स सामान्य रूप से काम करती हैं तो आप सैकड़ों अलग-अलग रंग संयोजनों के बीच भी अंतर कर पाएंगे।

हालांकि, अगर तीन प्रकार की कोन सेल्स में से कोई एक नहीं है या वो सही से काम नहीं कर रही है तो आपको रंगों में अंतर करने में समस्या होगी।

इनहेरिटेड कलर विज़न डिफिशिएन्सी (Inherited colour vision deficiency)

अधिकांश लोग जिन्हें कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) की समस्या होती है, उन्हें ये अपने माता-पिता से प्राप्त होती है। इनहेरिटेड कलर विजन डिफिशिएंसी (Inherited colour vision deficiency) आमतौर पर आपके हरे और लाल रंग को देखने के तरीके पर असर डालती है।

आपकी स्थिति हल्के से गंभीर तक पहुंच सकती हैं लेकिन जैसे-जैसे आप बड़े होंगे ये और खराब नहीं होगी।

आपकी कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) पहले जैसे ही रहेगी बशर्ते आप को कोई और समस्या ना हो और आप कोई ऐसी दवाई ना लें जिससे आपकी दृष्टि पर असर हो।

अन्य स्वास्थ्य समस्याएं(Other health conditions)

कई बार कलर विजन डिफिशिएंसी किसी बीमारी या पहले से मौजूद किसी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के कारण हो सकती है। अगर आपको कलर विज़न डिफिशिएन्सी (colour vision deficiency) किसी स्वास्थ्य समस्या की वजह से है तो आपको आमतौर पर पीला और नीला रंग देखने में दिक्कत होगी। आपका कलर विज़न भी एक आंख की अपेक्षा दूसरी में खराब होगा। जिन स्थितियों से कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) हो सकती है वो निम्न हैं -

अगर आपकी स्थिति इलाज के योग्य है तो कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) में सुधार भी संभव हो सकता है। हालांकि अगर आपकी स्थिति बिगड़ती है तो कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) भी और अधिक गंभीर हो सकता है।

दवाइयां (Medication)

कुछ दवाएं कलर विज़न में असामान्यताएं पैदा कर सकती हैं। यदि असामान्यता दवा के कारण होती है, तो दवा बंद करने के बाद आपकी दृष्टि आमतौर पर खुद को सही कर लेगी।

अगर किसी दवा को लेने के बाद आपको रंगों में अंतर करने में मुश्किल हो रहा हो तो अपने डॉक्टर से बात करें। वो आपको कुछ अन्य दवा दे सकते हैं । हालांकि जब तक डॉक्टर आपको दी गई दवा बंद करने की सलाह नहीं देते तब तक उसे बंद ना करें।

दवाइयां जिनसे कलर विजन से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं उनमें शामिल हैं :

  • digoxin (डाईजॉक्सिन)
  • इथाम्बुटोल (Ethambutol)- ट्यूबरक्लॉसेस का इलाज
  • क्लोरोक्वीन (Chloroquine)
  • हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (hydroxychloroquine)
  • फेनीटोइन (phenytoin)
  • सिल्डेनाफिल (वायग्रा) (sildenafil)

केमिकल्स (Chemicals)

अगर आपकी नौकरी में आप केमिकल के सम्पर्क में आते हैं तो आपको कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) होने का ख़तरा हो सकता है।

जिन रसायनों से रंगों को पहचानने में समस्या हो सकती है, उनमें कार्बन डाईसल्फाइड (carbon disulfide) और स्टाइरीन (styrene) शामिल है।

आपके काम करने की जगह पर आपके स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए। अगर आपको कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) जैसी समस्या होती है तो अपने मालिक से उपयुक्त स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी बातों का ध्यान रखने को कहें और फिर आपके लिए काम जारी रखना सुरक्षित है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा कार्यकारी वेबसाइट कार्यस्थल पर सेहत और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी और सलाह देती है।

उम्र बढ़ना (Ageing)

अधिकांश लोगों की रंगों में अंतर करने की क्षमता उम्र के साथ कम हो जाती है। ये उम्र बढ़ने के साथ होने वाला प्राकृतिक बदलाव है और इसके लिए अधिक चिंता करने की कोई ज़रूरत है।

हालांकि, अगर आपको कोई ऐसे लक्षण है जो अचानक दिखाई देना शुरू हुए हैं या फिर आपको गंभीर कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) का अनुभव हो रहा है तो आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।

निदान (Diagnosis)

बहुत सारे लोगों को कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) होने का पता तब चलता है जब उन्हें रंगों में पहचानने में समस्या होती है।

आपके बच्चे को कलर के नाम बताने में या कलर मैप या डॉक्यूमेंट को पढ़ने में समस्या हो सकती है। हालांकि, हल्के मामलों में कलर डिफिशिएंसी का पता नहीं चल पाता है।

उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति जिसे कलर विजन डिफिशिएंसी है, उसे एक पत्ती का रंग उससे अलग दिख सकता है, जैसे किसी नॉर्मल विजन वाले इंसान को दिखता है; पर दोनों ही उस रंग को हरा बताएंगे। हालांकि जिस इंसान को कलर विजन डिफिशिएंसी है उसे जो रंग दिखाई देगा, वो अगर नॉर्मल विजन वाला इंसान देखे तो उसे पीला रंग कहेगा।

कलर विजन डिफिशिएंसी का शुरुआती दौर में पता चलना बहुत ज़रूरी है क्योंकि बच्चे की पढ़ाई का अनुभव रंगों के इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है।

कलर विजन के टेस्ट (Colour vision tests)

एक ऑप्टोमेट्रिस्ट(optometrist) द्वारा किए गए नेत्र परीक्षण के हिस्से के रूप में आपके कलर विजन का परीक्षण किया जा सकता है।

एक ऑप्टोमेट्रिस्ट, जिसे एक नेत्र चिकित्सक के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रकार का डॉक्टर है जो आपकी आंखों की जांच करता है और दृष्टि दोष को पहचानने का विशेषज्ञ होता है।

कलर विजन की जांच करने के लिए कई टेस्ट किए जाते हैं; जिनमें दो का वर्णन नीचे किया गया है:

इशिहारा टेस्ट (ishihara test)

कलर विजन को चेक करने के लिए आमतौर पर सबसे अधिक

इशिहारा टेस्ट (ishihara test) का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बहुरंगी डॉट्स से बनी हुई प्लेटे होती हैं। कुछ बिंदु अलग रंग के होंगे और एक नम्बर को चित्रित करेंगे।

आपको प्लेट पर देखने के लिए कहा जाएगा और पूछा जाएगा कि क्या आपको कोई नंबर दिख रहा है। जिन नंबरों को आप नहीं पहचान पाए या आपने गलत पहचाना, उनका एक नोट बनाया जाएगा।

कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) के अलग-अलग प्रकारों को पहचानने के लिए अलग-अलग इशिहारा प्लेट टेस्ट्स (ishihara plate test) का इस्तेमाल किया जाता है। लाल-हरे डिफिशिएंसी को पहचानने के लिए ये सबसे कॉमन टेस्ट है। अगर आपको इशिहारा प्लेट टेस्ट्स (ishihara plate test) पूरा करने में समस्याएं आती हैं तो आपको कलर विजन डिफिशिएंसी हो सकती है।

अरेंजमेंट टेस्ट (arrangement test)

अरेंजमेंट टेस्ट (arrangement test) में आप रंगीन वस्तुओं को उनके विभिन्न रंगों के क्रम में व्यवस्थित करते हैं।

उदाहरण के लिए, आपको थोड़े अलग रंगों के रंगीन ब्लॉक दिए जा सकते हैं और उन्हें सबसे हल्के से सबसे गहरे रंग में व्यवस्थित करने के लिए कहा जा सकता है। गलतियों का एक विशेष पैटर्न इस तरफ इशारा करता है कि आपको कलर विजन डिफिशिएन्सी (colour vision deficiency) है।

इलाज (Treatment)

वर्तमान में इनहेरिटेड कलर विजन डिफिशिएंसी का कोई इलाज नहीं है क्योंकि सही रंग पहचानने के लिए जिम्मेदार रेटिना में मौजूद दोषपूर्ण लाइट-सेंसिटिव सेल्स का बदलना संभव नहीं है।

अगर आपको इनहेरिटेड कलर विजन डिफिशिएंसी है तो इससे आपको कोई लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य समस्या नहीं होगी और एक सामान्य, हेल्दी जिंदगी जीने के लिए इलाज जरूरी नहीं है।

इस समस्या के साथ ज़िंदगी जीना (Compensating and adapting)

अधिकांश लोग जिन्हें कलर विजन डिफिशिएंसी है वो उसके साथ तालमेल बिठाना सीख लेते हैं। आमतौर पर रंगों को पहचानने में आपको जो कठिनाई है उसकी पूर्ति करने के रास्ते ढूंढ लेंगे। जैसे:

  • अपने परिवार के सदस्यों या दोस्तों से अपने कपड़े या रंग वाली चीज़ें चुनने में मदद करने के लिए कहें - ये बहुत ज़रूरी है अगर आपको गम्भीर कलर विजन डिफिशिएंसी (severe colour vision deficiency) है।
  • इस बात का ध्यान रखें कि आपके घर में और काम करने की जगह में अच्छी रोशनी हो इससे आपको रंगों में अंतर करने में मदद मिलेगी।
  • शिक्षकों को उन रंगों के बारे में बताएं जिन्हें आपके बच्चे को देखने में कठिनाई होती है - यह सीखने की सामग्री को उसी अनुसार अनुकूलित करने में मदद करेगा

टिंटेड कॉन्टैक्ट लैंसेज (Tinted contact lenses)

कुछ मामलों में आपको टिंटेड कॉन्टैक्ट लैंसेज पहनने की सलाह दी जा सकती है; ये आपको रंगों में आसानी से अंतर करने में मदद करेगा। हालांकि, ये सिर्फ कुछ ही लोगों में काम करता है और ये आपकी दूरियां और गहराई को जज करने की क्षमता पर प्रभाव डाल सकता है।

आंखों की अन्य स्थितियां (Other eye conditions)

कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) के अधिकांश मामले अनुवांशिक होते हैं, पर रंगों को देखने की आपकी क्षमता आंख की बुनियादी स्थिति से प्रभावित हो सकती है।

इसलिए यह ज़रूरी है कि आप अपने डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट (नेत्र रोग विशेषज्ञ) से मिलें ताकि वे यह निर्धारित कर सकें कि आप में कलर विजन डिफिशिएन्सी (colour vision deficiency) की क्या वजह है?

अगर आपकी आंख की बुनियादी समस्या इसकी वजह है तो स्थिति का इलाज कर आपकी कलर विजन डिफिशिएंसी को सुधारा जा सकता है।

कुछ तरह की दवाइयां भी आपके लिए रंग में भेद करना मुश्किल कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो आपको कोई और दवा दी जा सकती है।

हालांकि, आपको डॉक्टर की बताई हुई दवा तब तक नहीं छोड़नी चाहिए जब तक डॉक्टर या आपकी देखभाल के लिए ज़िम्मेदार हैल्थकेयर विशेषज्ञ आपको खुद ऐसा करने के लिए ना कहें।

जटिलताएं (Complications)

कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) की वजह से कोई लंबी स्वास्थ्य समस्या नहीं होती है पर ये आपकी करियर की पसंद पर असर डाल सकती है।

आपकी स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करते हुए, आप कोई ऐसी नौकरी नहीं कर पाएंगे जिनमें सटीक रंग पहचानने की ज़रूरत होती है।

उदाहरण के तौर पर, जिन नौकरियों से आपको बाहर रखा जा सकता है, उनमें शामिल हैं:

  • आर्म्ड फोर्सेज में कुछ जगहें
  • कस्टम एंड एक्साइज ऑफिसर
  • फायर सर्विस ऑफिसर्स
  • हॉस्पिटल लैब टेक्नीशियन
  • फार्मासिस्ट
  • इलेक्ट्रीशियन
  • कुछ उड़ान संबंधी भूमिकाएँ, जैसे पायलट और हवाई यातायात नियंत्रक
  • पेंट, पेपर या टेक्सटाइल निर्माण से जुड़ी नौकरियां
  • ट्रेन ड्राइवर या रेलवे मेन्टेनेंस स्टाफ

बच्चे (Children)

अगर आपको बच्चे को कलर विजन डिफिशिएंसी (colour vision deficiency) है तो जब तक टीचर को उसकी समस्या के बारे में पता नहीं है, उसे स्कूल में दिक्कत हो सकती है।

क्योंकि कई शिक्षण सामग्री रंग कोडेड होती हैं, इसलिए आपके बच्चे को यह सबसे अधिक कठिन लग सकता है, यदि उनके सीखने का वातावरण उनकी खास जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुकूलित नहीं है।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk
क्या यह लेख उपयोगी था?

महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।