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फाइब्रॉयड्स (Fibroids)

मेडिकल समीक्षा के साथ

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यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया था। इस लेख का मूल संस्करण यहां देखा जा सकता है।

फाइब्रॉयड्स क्या हैं? (What are fibroids?)

फाइब्रॉयड्स गैर-कैंसरकारी गांठ है जो गर्भाशय (uterus) में या उसके आसपास विकसित होती है।

यह गांठ मांसपेशियों और कोशिकाओं से बनी होती है और आकार में भिन्न होती है। इसे आमतौर पर यूटेरिन मायोमा या लियम्योमा कहा जाता है।

अधिकांश महिलाओं को इस बात की जानकारी नहीं होती हैं कि उन्हें फाइब्रॉयड्स हैं क्योंकि आमतौर पर उन्हें इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। जिन महिलाओं में लक्षण होते हैं (लगभग तीन में से एक) उन्हें निम्न लक्षणों का अनुभव हो सकता है:

दुर्लभ मामलों में, फाइब्रॉयड्स के कारण आगे होने वाली जटिलताएं गर्भावस्था को प्रभावित कर सकती हैं या बांझपन का कारण बन सकती हैं।

डॉक्टर से परामर्श करें

चूंकि फाइब्रॉयड्स होने पर अक्सर लक्षण पैदा नहीं होते हैं। संयोग से स्त्री रोग संबंधी जांच, परीक्षण या स्कैन के दौरान इस बीमारी का निदान किया जाता है।

हालांकि, यदि आपको फाइब्रॉयड्स के लगातार लक्षण नजर आ रहे हैं, तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। वे संभावित कारणों की जांच कर सकते हैं।

यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आपको फाइब्रॉयड्स हो सकता है, तो वे आमतौर पर निदान की पुष्टि करने के लिए आपको अल्ट्रासाउंड स्कैन कराने के लिए कहेंगे।

फाइब्रॉयड्स के निदान के बारे में और पढ़ें।

फाइब्रॉयड्स क्यों विकसित होते हैं (Why fibroids develop)

फाइब्रॉयड्स विकसित होने का सटीक कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि, ये एस्ट्रोजन हार्मोन से संबंधित होते हैं। एस्ट्रोजन एक महिला प्रजनन हार्मोन है जो अंडाशय (महिला प्रजनन अंगों) द्वारा उत्पन्न होता है।

फाइब्रॉयड्स आमतौर पर महिला के प्रजनन काल (लगभग 16 से 50 वर्ष की आयु तक) के दौरान विकसित होते हैं। इस दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर अपने उच्चतम स्तर पर होता है। जब एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है तो फाइब्रॉयड्स सिकुड़ जाते हैं, जैसे कि रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के बाद (जब महिला की माहवारी रुक ​​जाती है)।

फाइब्रॉयड्स किसे होता है?

फाइब्रॉयड्स एक आम समस्या है। यह 3 में से लगभग 1 महिला को उसके जीवन के किसी भी पड़ाव पर विकसित हो सकता है। यह बीमारी आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं में सबसे अधिक पायी जाती है।

माना जाता है कि फाइब्रॉयड्स अफ्रीकी-कैरेबियन मूल की महिलाओं में अधिक बार विकसित होते हैं। यह भी माना जाता है कि यह बीमारी अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में होती है क्योंकि अधिक वजन के कारण शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है।

जो महिलाएं बच्चों को जन्म दे चुकी होती हैं, उनमें फाइब्रॉयड्स विकसित होने का कम जोखिम होता है। आपके पास जितने अधिक बच्चे होते हैं, इस बीमारी का खतरा उतना ही कम होता है।

फाइब्रॉयड्स के प्रकार (types of fibroids)

फाइब्रॉयड्स गर्भाशय के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकते हैं। इनका आकार भी अलग-अलग हो सकता है। कुछ फाइब्रॉयड्स मटर के आकार के होते हैं, जबकि अन्य खरबूजे के आकार के होते हैं।

फाइब्रॉयड्स के मुख्य प्रकार हैं:

इंट्राम्यूरल फाइब्रॉयड्स - ये सबसे आम प्रकार के फाइब्रॉयड्स हैं, जो गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार में विकसित होते हैं

सबसेरोसल फाइब्रॉयड्स - ये फाइब्रॉयड्स गर्भाशय की दीवार के बाहर श्रोणि में विकसित होते हैं और बहुत बड़े हो सकते हैं

सबम्यूकोसल फाइब्रॉयड्स - ये फाइब्रॉयड्स गर्भाशय में मांसपेशियों की परत के बीच में विकसित होते हैं और गर्भाशय के गुहा में विकसित होते हैं

कुछ मामलों में, सबसेरोसल या सबम्यूकोसल फाइब्रॉयड्स ऊतक के संकुचित स्कंध के साथ गर्भाशय से जुड़े होते हैं। इन्हें पेडुंकलेटेड फाइब्रॉयड्स कहा जाता है।

फाइब्रॉयड्स का इलाज (Fibroids treatment)

यदि फाइब्रॉयड्स होने पर कोई भी लक्षण पैदा नहीं होता है तो फाइब्रॉयड्स के उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ती है। समय के साथ, खासतौर पर मेनोपॉज होने के बाद आमतौर पर फाइब्रॉयड्स सिकुड़ जाते हैं और बिना इलाज के ही ठीक हो जाते हैं।

यदि फाइब्रॉयड्स के कारण आपको लक्षणों का सामना करना पड़ रहा है, तो आमतौर पर दवा से इन लक्षणों को कम किया जाता है।

फाइब्रॉयड्स को कम करने के लिए कई दवाएं उपलब्ध हैं। यदि ये दवाएं प्रभावी साबित नहीं होती हैं, तो सर्जरी या कम इनवेसिव प्रक्रिया कराने की सलाह दी जा सकती है।

फाइब्रॉयड्स के इलाज के बारे में और पढ़ें।

फाइब्रॉयड्स का निदान (Diagnosing fibroids)

यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आपको फाइब्रॉयड्स है, तो वे किसी भी लक्षण के बारे में जानने के लिए आमतौर पर पेल्विक की जांच कराने के लिए कहेंगे।

निदान की पुष्टि करने या आपके लक्षणों के पीछे अन्य संभावित कारणों का पता लगाने के लिए वे आपको नीचे दिए गए आगे की जांच के लिए स्थानीय अस्पताल में भी भेज सकते हैं।

कभी-कभी फाइब्रॉयड्स केवल स्त्री रोग (योनि) परीक्षण या अन्य समस्याओं की जांच के दौरान पाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि इस बीमारी का कोई अलग लक्षण नजर नहीं आता है।

अल्ट्रासाउंड स्कैन (Ultrasound scan)

फाइब्रॉयड्स के निदान के लिए किए जाने वाले मुख्य परीक्षणों में से एक अल्ट्रासाउंड स्कैन है। अल्ट्रासाउंड के दौरान किसी तरह का दर्द नहीं होता है। इसमें आपके शरीर के अंदर के चित्र को लेने के लिए उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।

फाइब्रॉयड्स के निदान के लिए दो प्रकार के अल्ट्रासाउंड स्कैन का इस्तेमाल किया जा सकता है:

  • पेट का अल्ट्रासाउंड स्कैन - इसमें पेट के बाहर अल्ट्रासाउंड प्रोब घुमाया जाता है
  • ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड स्कैन - इसमें एक छोटा अल्ट्रासाउंड प्रोब योनि के अंदर डाला जाता है

इन स्कैन द्वारा प्रदर्शित चित्रों को मॉनीटर पर भेजा जाता है। इस दौरान डॉक्टर उन चित्रों को देखकर फाइब्रॉयड के लक्षणों का पता लगाते हैं।

यदि अल्ट्रासाउंड स्कैन से यह पता चलता है कि आपको फाइब्रॉयड्स है, तो आपको नीचे दिए गए जांच के लिए आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ (महिला प्रजनन प्रणाली में विशेषज्ञ) के पास भेजा जा सकता है।

हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy)

हिस्टेरोस्कोपी के दौरान योनि और गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से एक छोटे से टेलीस्कोप (हिस्टेरोस्कोप) को गर्भ में डाला जाता है। इसकी मदद से डॉक्टर गर्भ के अंदर की जाँच करते हैं। इस जांच में लगभग पांच मिनट का समय लगता है।

इस प्रक्रिया के दौरान आपको दर्द के अनुभव से बचाने के लिए लोकल एनेस्थेटिक (anaesthetic) या जनरल एनेस्थेटिक (general anaesthetic) का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, अधिकांश महिलाओं को एनेस्थेटिक की आवश्यकता नहीं होती है। कुछ महिलाओं को इस प्रक्रिया के दौरान ऐंठन का अनुभव होता है।

हिस्टेरोस्कोपी का इस्तेमाल आमतौर पर गर्भाशय के भीतर फाइब्रॉयड्स (सबम्यूकोसल फाइब्रॉयड्स) की जांच करने के लिए किया जाता है ।

लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy)

लेप्रोस्कोप एक छोटा टेलिस्कोप होता है जिसमें एक छोर पर लाइट और कैमरा लगा होता है। कैमरा पेट या पेल्विस के अंदर के चित्रों को टेलीविज़न मॉनीटर पर प्रदर्शित करता है।

लेप्रोस्कोपी के दौरान सर्जन पेट में एक छोटा चीरा लगाते हैं। इसके बाद पेट या पेल्विस के अंदर के अंगों और ऊतकों की जांच करने के लिए लेप्रोस्कोप पेट में डाला जाता है। इस दौरान मरीज को लोकल एनेस्थेटिक दिया जाता है ताकि वह इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सो सके।

लेप्रोस्कोपी का इस्तेमाल गर्भाशय के बाहर फाइब्रॉयड्स (सबसेरोसल फाइब्रॉयड्स) या गर्भाशय के चारों ओर की परत में फाइब्रॉयड्स (इंट्र्राम्यूरल फाइब्रॉयड्स) की जांच के लिए भी किया जाता है। इनका साइज और शेप गर्भाशय को प्रभावित कर सकता है।

बायोप्सी (Biopsy)

कुछ मामलों में हिस्टेरोस्कोपी या लैप्रोस्कोपी के दौरान ऊतक का एक छोटा नमूना (बायोप्सी) लेकर माइक्रोस्कोप से काफी गहन जांच की जाती है।

फाइब्रॉयड्स का इलाज (Fibroids treatment)

यदि आपको फाइब्रॉयड्स है लेकिन इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता है या केवल मामूली लक्षण नजर आता है जो आपके रोजमर्रा के कार्यों को बहुत अधिक प्रभावित नहीं कर रहा है तो इसका इलाज जरूरी नहीं है।

रजोनिवृत्ति के बाद फाइब्रॉयड्स आमतौर पर सिकुड़ जाते हैं। इसके कारण लक्षण आमतौर पर कम हो जाते हैं या पूरी तरह से गायब हो जाते हैं।

यदि आपको फाइब्रॉयड्स है और उसका इलाज कराने की जरूरत है, तो डॉक्टर इस बीमारी के लक्षणों को दूर करने के लिए दवा लेने की सलाह देंगे। हालाँकि, अगर दवा से आपकी बीमारी ठीक नहीं होती है तो आगे की दवा या सर्जरी के लिए आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ (महिला प्रजनन प्रणाली के विशेषज्ञ) के पास जाना पड़ सकता है। अपने लिए बेहतर इलाज के बारे में चर्चा करने के लिए डॉक्टर के पास जाएं।

फाइब्रॉयड्स के लिए कई तरह के इलाज मौजूद हैं, जिनके बारे में नीचे दिया गया है। आप फाइब्रॉयड्स के इलाज के फायदे और नुकसान के बारे में भी पढ़ सकते हैं जिससे आपको इलाज के विकल्प चुनने में आसानी होगी।

फाइब्रॉयड्स के लक्षणों के लिए दवा (Medication for fibroids symptoms)

माहवारी के दौरान अधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए कई दवाएं उपलब्ध हैं। लेकिन अगर आपका फाइब्रॉयड काफी बड़ा है तो दवाएं कम प्रभावी हो सकती। इन दवाओं के बारे में नीचे दिया गया है।

लेवोनोर्गेस्ट्रेल इंट्रायूटेरिन सिस्टम (LNG-IUS) (Levonorgestrel intrauterine system (LNG-IUS)

लेवोनोर्गेस्ट्रेल इंट्रायूटेरिन सिस्टम (एलएनजी-आईयूएस) (Levonorgestrel intrauterine system (LNG-IUS) प्लास्टिक का एक छोटा और टी-आकार का उपकरण है जो आपके गर्भाशय में रखा जाता है। यह धीरे-धीरे प्रोजेस्टोजन हार्मोन लेवोनोर्गेस्ट्रेल को स्रावित करता है। यह गर्भाशय की परत को तेजी से बढ़ने से रोकता है। इसके कारण यह पतला हो जाता है और आपका रक्तस्राव हल्का हो जाता है।

LNG-IUS से जुड़े दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

  • अनियमित रक्तस्राव जो छह महीने से अधिक समय तक रह सकता है
  • मुँहासे (acne)
  • सिर दर्द (headaches)
  • स्तनों को छूने पर दर्द होना (breast tenderness)
  • कुछ मामलों में, माहवारी बिल्कुल नहीं होती है(पीरियड नहीं आता है)

LNG-IUS गर्भनिरोधक के रूप में भी काम करता है। लेकिन इसका इस्तेमाल बंद करने के बाद आपके गर्भवती होने की संभावनाओं पर असर नहीं पड़ता है।

ट्रानेक्सेमिक एसिड (Tranexamic acid)

यदि एलएनजी-आईयूएस आपके लिए उपयुक्त नहीं है - जैसे कि, यदि आप गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं करना चाहती हैं तो आपको ट्रैनेक्सेमिक एसिड टैबलेट दिया जा सकता है। यह दवा गर्भाशय में छोटी रक्त वाहिकाओं को रोकती है जिससे रक्तस्राव कम हो जाता है। यह रक्त के नुकसान को लगभग 50% कम करती है।

पीरियड के दौरान ट्रानेक्सेमिक एसिड की गोलियां दिन में तीन या चार बार चार दिनों तक ली जाती हैं। यदि आपके लक्षण तीन महीने के भीतर ठीक नहीं होते हैं तो इलाज बंद कर देना चाहिए।

ट्रेनेक्सामिक एसिड की गोलियां गर्भनिरोधक की तरह काम नहीं करती हैं और यह आपके गर्भवती होने की संभावनाओं को प्रभावित नहीं करती हैं।

ट्रेनेक्सामिक एसिड की गोलियों से अपच और दस्त, ये दो दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं (Anti-inflammatory medicines)

नॉन-स्टेरायडल एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं (एनएसएआईडी), जैसे इबुप्रोफेन और मेफेनैमिक एसिड आदि दवाएं पीरियड के पहले दिन से अगले तीन दिन तक ली जाती हैं जब तक रक्तस्राव बंद नहीं हो जाता है या एक स्तर तक कम नहीं हो जाता है।

एनएसएआईडी शरीर में हार्मोन जैसे एक पदार्थ प्रोस्टाग्लैंडीन (prostaglandin) के उत्पादन को कम करता है, जो अधिक रक्तस्राव से जुड़ा होता है।

एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं भी दर्द निवारक होती हैं, लेकिन ये गर्भनिरोधक का एक रूप नहीं होती हैं।

अपच (Indigestion) और दस्त (diarrhoea) एनएसएआईडी (NSAIDs)के सामान्य दुष्प्रभाव हैं।

गर्भनिरोधक गोली (contraceptive pill)

गर्भनिरोधक गोली गर्भनिरोधक का एक लोकप्रिय तरीका है। यह अंडाशय में अंडे रिलीज नहीं होने देता है और गर्भावस्था को रोकता है।

रक्तस्राव को हल्का करने के साथ-साथ कुछ गर्भनिरोधक गोलियां पीरियड के दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं।

आपके डॉक्टर आपको गर्भनिरोधक और गर्भनिरोधक गोली के बारे में और सलाह दे सकते हैं।

ओरल प्रोजेस्टोजन (Oral progestogen)

ओरल प्रोजेस्टोजन सिंथेटिक (मानव निर्मित) प्रोजेस्टेरोन (फीमेल सेक्स हार्मोन) है। यह अधिक रक्तस्राव की समस्या को को कम करने में मदद करता है। यह आमतौर पर मासिक धर्म चक्र के पांच से 26 दिनों तक रोजना एक टैबलेट के रूप में लिया जाता है। आपके पीरियड के पहले दिन को दवा का पहला दिन माना जाता है।

ओरल प्रोजेस्टोजन गर्भाशय को तेजी से बढ़ने से रोकता है। यह गर्भनिरोधक का रूप नहीं है, लेकिन इसका सेवन करने के दौरान गर्भधारण की संभावनाएं कम हो सकती हैं।

ओरल प्रोजेस्टोजन के दुष्प्रभावों में वजन बढ़ना, स्तन कोमल होना और मुँहासे शामिल हैं।

इंजेक्शन प्रोजेस्टोजेन (Injected progestogen)

प्रोजेस्टोजन अधिक रक्तस्राव को कम करने के लिए इंजेक्शन के रूप में भी उपलब्ध है। यह गर्भाशय की लाइनिंग को तेज़ी से बढ़ने से रोकता है।

जब तक इलाज की जरूरत होती है तब तक प्रोजेस्टोजन के इंजेक्शन को हर 12 सप्ताह में एक बार लगवाया जा सकता है।

प्रोजेस्टोजेन इंजेक्शन लगवाने के सामान्य दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

  • वजन बढ़ना (weight gain)
  • अनियमित रक्तस्राव (irregular bleeding)
  • पीरियड न आना (absent periods)
  • प्रीमेन्स्ट्रुअल के लक्षण, जैसे सूजन, तरल पदार्थ का स्राव और स्तन कोमल होना

इंजेक्टेड प्रोजेस्टोजन गर्भनिरोधक के रूप में भी काम करता है। इसका इस्तेमाल बंद करने के बाद यह आपको गर्भवती होने से नहीं रोकता है। हालांकि गर्भावस्था की प्लानिंग से 12 महीने पहले इसका सेवन बंद कर देना चाहिए।

फाइब्रॉयड्स को सिकोड़ने के लिए दवा (Medication to shrink fibroids)

गोनाडोट्रोपिन रिलीजिंग हार्मोन एनालॉग्स (GnRHas) (Gonadotropin releasing hormone analogues (GnRHas))

यदि ऊपर दी गई दवाओं से इलाज के बावजूद आप फाइब्रॉयड्स से जुड़े लक्षणों का अनुभव कर रही हैं, तो डॉक्टर आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं। वे फाइब्रॉयड्स को सिकुड़ने के लिए गोनाडोट्रोपिन रिलीजिंग हार्मोन एनालॉग्स (GnRHas) दवा लिख ​​सकते हैं।

GnRHas, जैसे गोसेरेलिन एसीटेट, हार्मोन हैं जो इंजेक्शन द्वारा दिए जाते हैं। वे पिट्यूटरी ग्रंथि को प्रभावित करते हैं जो एस्ट्रोजेन का उत्पादन करने वाले अंडाशय को रोकता है। पिट्यूटरी ग्रंथि मस्तिष्क के निचले हिस्से में स्थित एक छोटी, मटर के आकार की ग्रंथि है। यह शरीर के भीतर कई महत्वपूर्ण हार्मोन ग्रंथियों को नियंत्रित करता है।

GnRHas मासिक धर्म चक्र (पीरियड) को रोकते हैं। लेकिन यह गर्भनिरोधक का एक रूप नहीं हैं। इनका उपयोग बंद करने के बाद आपके गर्भवती होने की संभावनाएं प्रभावित नहीं होती हैं।

GnRHas का इस्तेमाल करने के बाद भारी रक्तस्राव और पेट पर महसूस होने वाला दबाव कम हो जाता है। इसके अलावा बार-बार पेशाब और कब्ज के लक्षणों में भी सुधार हो जाता है।

कभी-कभी GnRHas का इस्तेमाल फाइब्रॉयड्स को हटाने के लिए सर्जरी से पहले इन्हें सिकोड़ने के लिए भी किया जाता है।

GnRHas के कारण रजोनिवृत्ति की तरह कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • गर्मी लगना (hot flushes)
  • पसीना आना (increased sweating)
  • मांसपेशियों में जकड़न (muscle stiffness)
  • योनि में सूखापन (vaginal dryness)

इन दुष्प्रभावों से बचने के लिए GnRHas और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) की कम खुराक एक साथ दी जा सकती है।

ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का पतला होना) GnRHas का इस्तेमाल करने से होने वाला एक दुष्प्रभाव है। इसके बारे में डॉक्टर से आपको अधिक जानकारी मिल सकती है। हड्डियों को पतला होने से रोकने के लिए डॉक्टर कुछ अतिरिक्त दवा लिख ​​सकता है।

GnRHas केवल थोड़े समय (एक बार में अधिकतम छह महीने) के लिए निर्धारित किया जाता है। इलाज बंद होने के बाद फाइब्रॉयड्स अपने मूल आकार में वापस आ सकते हैं।

यूलिप्रिस्टल एसीटेट (Ulipristal acetate)

यूलिप्रिस्टल एसीटेट (Ulipristal acetate ) फाइब्रॉयड्स के इलाज का एक नया तरीका है। यह गंभीर लक्षणों को हल्का करता है। यह केवल 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को दिया जा सकता है।

तीन महीने तक दिन में एक बार इसकी एक गोली लेनी पड़ती है। इस दौरान आपकी माहवारी बंद रहती है और फाइब्रॉयड्स सिकुड़ जाते हैं।

इलाज के शुरुआती कोर्स के बाद कुछ दिनों तक इलाज बंद करके यह देखा जाता है कि आपके शुरू के दो पीरियड (माहवारी) कैसे हैं। यदि अब भी आपको तेज रक्तस्राव होता है तो अगले तीन महीने तक यूलिप्रिस्टल एसिटेट का कोर्स लेना पड़ सकता है।

इलाज आमतौर पर केवल तभी शुरू किया जाना चाहिए जब मासिक धर्म (पीरियड) हुआ हो। इलाज का पहला कोर्स मासिक धर्म के पहले सप्ताह के दौरान शुरू किया जाता है। इस दौरान आपके डॉक्टर आपको बता सकते हैं कि कोर्स के बीच कितने समय का अंतराल होना चाहिए।

यदि आप यूलिप्रिस्टल एसिटेट का कोर्स कर रही हैं और आप कोई खुराक छूट जाती हैं, तो आपको जल्द से जल्द अपनी खुराक लेनी चाहिए। हालांकि, यदि आप छूटी हुई खुराक 12 घंटे से अधिक समय तक नहीं लेती हैं, तो आपको फिर वह खुराक नहीं लेनी चाहिए, लेकिन अपने सामान्य खुराक शेड्यूल पर वापस लौटना चाहिए।

यदि आप यूलिप्रिस्टल एसिटेट ले रही हैं तो आपको हार्मोनल गर्भनिरोधक जैसे कि प्रोजेस्टोजन-ओनली पिल, इंट्रायूटेरिन डिवाइस, या संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोली लेने की सलाह नहीं दी जाती है। इसके बजाय, आपको गर्भनिरोधक बैरियर जैसे कंडोम का उपयोग करना चाहिए।

इलेक्ट्रॉनिक मेडिसिन कम्पेंडियम (eMC) (Medicines Compendium (eMC)) वेबसाइट पर यूलिप्रिस्टल एसिटेट के बारे में अधिक जानकारी मौजूद है।

फाइब्रॉयड्स सर्जरी (Fibroids surgery)

यदि आपके लक्षण गंभीर हैं और दवाएं अप्रभावी साबित हो रही हैं तो फाइब्रॉयड्स को हटाने के लिए सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।

फाइब्रॉयड्स के इलाज के लिए कई अलग-अलग प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। डॉक्टर आपको एक विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं जो आपके साथ फायदे और नुकसान सहित इलाज के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा करेगा।

फाइब्रॉयड्स के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मुख्य शल्य प्रक्रियाएं नीचे दी गई हैं।

हिस्टेरेक्टोमी (Hysterectomy)

हिस्टेरेक्टॉमी गर्भाशय को हटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक शल्य प्रक्रिया है। यह फाइब्रॉयड्स को दोबारा विकसित होने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

हिस्टेरेक्टॉमी की सलाह तब दी जाती है जब आपके फाइब्रॉयड्स काफी बड़े हों या आपको गंभीर रक्तस्राव हो रहा हो और आपको भविष्य में बच्चे की जरूरत न हो।

योनि के जरिए या पेट में कई छोटे चीरों के जरिए सहित हिस्टेरेक्टॉमी के कई तरीके हैं।

हिस्टेरेक्टॉमी को स्पाइनल या एपीड्यूरल एनेस्थेटिक का उपयोग करके किया जा सकता है (जिसमें शरीर के निचले हिस्से सुन्न हो जाते हैं)। कभी-कभी जनरल एनेस्थेटिक का भी इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें इस प्रक्रिया के दौरान आप सो रहे होंगे।

हिस्टेरेक्टॉमी होने के बाद आपको आमतौर पर कुछ दिनों तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता होगी। पूरी तरह से ठीक होने में लगभग छह से आठ सप्ताह लगते हैं, इस दौरान आपको जितना संभव हो उतना आराम करना चाहिए।

हिस्टेरेक्टॉमी के दुष्प्रभावों में समय से पहले रजोनिवृत्ति और सेक्स की इच्छा घटना (सेक्स ड्राइव) शामिल है। हालांकि, सेक्स की इच्छा केवल तभी कम होती है जब अंडाशय बाहर निकाल दिया गया हो।

मायोमेक्टॉमी (Myomectomy)

गर्भाशय की दीवार से फाइब्रॉयड्स को हटाने के लिए मायोमेक्टोमी सर्जरी की जाती है। यदि आप बच्चे पैदा करना चाहते हैं तो इसे हिस्टेरेक्टॉमी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि, मायोमेक्टोमी सभी प्रकार के फाइब्रॉयड्स के लिए उपयुक्त नहीं है। आपके स्त्रीरोग विशेषज्ञ आपके फाइब्रॉयड्स की साइज, संख्या और पोजिशन के आधार पर बता सकते हैं कि यह प्रक्रिया आपके लिए उपयुक्त है या नहीं।

फाइब्रॉयड्स के आकार और स्थिति के आधार पर मायोमेक्टोमी में पेट में एक ही बड़ा चीरा (कीहोल सर्जरी) या कई छोटे चीरे (खुली सर्जरी) लगाए जा सकते हैं।

मायोमेक्टोमी से पहले मरीज को जनरल एनेस्थेटिक दिया जाता है। साथ ही आपको आमतौर पर कुछ दिनों के लिए अस्पताल में रहने की आवश्यकता होगी। मायोमेक्टोमी होने के बाद ठीक होने के लिए कई हफ्तों तक आराम करने की सलाह दी जाएगी।

मायोमेक्टोमी आमतौर पर फाइब्रॉयड्स के लिए एक प्रभावी उपचार है। हालांकि फाइब्रॉयड्स के दोबारा विकसित होने की संभावना होती है और आगे सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

फाइब्रॉयड्स का हिस्टेरोस्कोपिक रिसेक्शन (Hysteroscopic resection of fibroids)

फाइब्रॉयड्स का हिस्टोरोस्कोपिक रिसेक्शन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें फाइब्रॉयड्स को हटाने के लिए एक पतली दूरबीन (हिस्टेरोस्कोप) और छोटे सर्जिकल उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

इस प्रक्रिया का उपयोग गर्भ के अंदर से फाइब्रॉयड्स (सबम्यूकोसल फाइब्रॉयड्स) को हटाने के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर उन महिलाओं के लिए उपयुक्त है जो भविष्य में बच्चे पैदा करना चाहती हैं।

इसमें कोई चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि हिस्टेरोस्कोप को योनि और गर्भ के प्रवेश द्वार के जरिए गर्भाशय ग्रीवा में डाला जाता है। इस उपकरण को अधिक अंदर डालकर जितना संभव हो उतना फाइब्रॉयड्स ऊतक को हटा दिया जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को जनरल एनेस्थेटिक दिया जाता है, हालांकि लोकल एनेस्थेटिक का उपयोग भी किया जा सकता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आप उसी दिन घर जा सकते हैं।

प्रक्रिया के बाद आपको पेट में ऐंठन का अनुभव हो सकता है, लेकिन यह केवल कुछ घंटों तक रहता है। इसके अलावा योनि से हल्का रक्तस्राव भी हो सकता है, जो कुछ हफ्तों के भीतर बंद हो जाना चाहिए।

फाइब्रॉयड्स के हिस्टेरोस्कोपिक मोर्सेलेशन (Hysteroscopic morcellation of fibroids)

फाइब्रॉयड्स का हिस्टोरोस्कोपिक मोर्सिलेशन एक नई प्रक्रिया है जो फाइब्रॉयड्स को हटाने के लिए हिस्टेरोस्कोप और छोटे सर्जिकल उपकरणों का उपयोग करने के लिए विशेष तकनीक का प्रयोग करने में प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा किया जाता है।

हिस्टेरोस्कोप को गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से गर्भ में डाला जाता है। मोर्सिलेटर नामक एक विशेष उपकरण का उपयोग फाइब्रॉयड्स ऊतक को निकालने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया से पहले मरीज को जनरल या स्पाइनल एनेस्थेटिक दिया जाता है। इसके बाद आप आमतौर पर उसी दिन घर जा सकते हैं।

हिस्टेरोस्कोपिक रिसेक्शन की अपेक्षा हिस्टेरोस्कोपिक मोर्सिलेशन का मुख्य फायदा यह है कि बार-बार की बजाय इसमें हिस्टेरोस्कोप केवल एक बार डाला जाता है। इससे गर्भाशय में चोट लगने की संभावना कम होती है।

इस प्रक्रिया का इस्तेमाल गंभीर जटिलता होने पर किया जाता है। हालांकि, हिस्टेरोस्कोपिक मोर्सिलेशन एक नई तकनीक है इसलिए इसकी सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रभावशीलता के बारे में अधिक प्रमाण नहीं हैं।

गर्भाशय फाइब्रॉयड्स के हिस्टेरोस्कोपिक मोर्सिलेशन के बारे में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ केयर एक्सीलेंस (एनआईसीई) के दिशानिर्देशों को पढ़ें।

नॉन-सर्जिकल प्रक्रियाएं (Non-surgical procedures)

फाइब्रॉयड्स के इलाज के लिए पारंपरिक सर्जिकल तकनीकों के साथ-साथ नॉन-सर्जिकल उपचार भी उपलब्ध हैं। इनके बारे में नीचे दिया गया है।

यूटेरिन आर्टरी इंबोलिसेशन (UAE) (Uterine artery embolisation (UAE))

फाइब्रॉयड्स के इलाज के लिए यूटेरिन आर्टरी इंबोलिसेशन (यूएई) हिस्टेरेक्टॉमी या मायोमेक्टोमी की एक वैकल्पिक प्रक्रिया है। बड़े फाइब्रॉयड्स से पीड़ित महिलाओं को उपचार के इस विकल्प की सलाह दी जाती है।

यूएई रेडियोलॉजिस्ट (एक विशेषज्ञ डॉक्टर जो एक्स-रे और स्कैन की व्याख्या करता है) द्वारा किया जाता है। इसमें फाइब्रॉयड्स तक खून की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध कर दिया जाता है जिससे वे सिकुड़ जाते हैं।

इस प्रक्रिया के दौरान एक छोटी ट्यूब (कैथेटर) के माध्यम से एक विशेष घोल को इंजेक्ट किया जाता है, जो पैर में रक्त वाहिका के माध्यम से एक्स-रे द्वारा निर्देशित होता है। यह प्रक्रिया लोकल एनेस्थेटिक देने के बाद की जाती है। इस दौरान आपकी आंखें खुली होती हैं लेकिन प्रभावित क्षेत्र सुन्न रहता है।

यूएई होने के बाद आपको आमतौर पर एक या दो दिन अस्पताल में रहना पड़ सकता है। अस्पताल छोड़ते समय आपको एक से दो सप्ताह आराम करने की सलाह दी जाएगी।

UAE होने के बाद भी आप गर्भवती हो सकती हैं। इसका आपकी प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था पर प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि आपको डॉक्टर से संभावित जोखिमों, फायदे और नुकसान के बारे में चर्चा करने के बाद ही यह प्रक्रिया कराना चाहिए।

एंडोमेट्रियल एब्लेशन (Endometrial ablation)

एंडोमेट्रियल एब्लेशन एक अपेक्षाकृत एक मामूली प्रक्रिया है जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग को निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल उन महिलाओं के लिए किया जाता है जो फाइब्रॉयड्स से पीड़ित नहीं होती हैं लेकिन उन्हें अधिक रक्तस्राव होता है। लेकिन इसका उपयोग गर्भाशय में छोटे फाइब्रॉयड्स के इलाज के लिए भी किया जा सकता है।

प्रभावित गर्भाशय की परत को कई तरीकों से हटाया जा सकता है - उदाहरण के लिए, लेजर एनर्जी द्वारा, गर्म वायर लूप या गुब्बारे में भरे गर्म तरल पदार्थ का उपयोग करके।

इस प्रक्रिया से पहले मरीज को लोकल एनेस्थेटिक या जनरल एनेस्थेटिक दिया जाता है । लगभग 20 मिनट में यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है और उसी दिन आप घर जा सकते हैं।

इसके बाद आपको कुछ दिनों तक योनि से रक्तस्राव और पेट में ऐंठन का अनुभव हो सकता है, हालांकि कुछ महिलाओं में तीन या चार सप्ताह तक खूनी स्राव होता है।

एंडोमेट्रियल एब्लेशन होने के बाद कुछ महिलाओं को अधिक गंभीर या लंबे समय तक दर्द का अनुभव होता है। इस मामले में, आपको अपने डॉक्टर या अपने अस्पताल की देखभाल टीम के एक सदस्य से बात करनी चाहिए। वे आपको दर्द निवारक दवा दे सकते हैं।

एंडोमेट्रियल एब्लेशन होने के बाद भी आप गर्भवती हो सकती हैं, लेकिन यह प्रक्रिया उन महिलाओं के लिए नहीं है जो अधिक बच्चे पैदा करना चाहती हैं। दरअसल, इस प्रक्रिया के बाद गर्भपात जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा अधिक होता है।

रॉयल कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (आरसीओजी) (Royal College of Obstetricians and Gynaecologists (RCOG)) में एंडोमेट्रियल एब्लेशन के बारे में अधिक जानकारी है। एंडोमेट्रियल एब्लेशन (endometrial ablation) के बाद उनका सूचना पत्रक देखें।

एमआरआई-निर्देशित प्रक्रियाएं (MRI-guided procedures)

फाइब्रॉयड्स के इलाज के लिए दो नई तकनीक भी मौजूद हैं जिसमें मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) का उपयोग किया जाता है। वो हैं:

एमआरआई-निर्देशित परक्यूटेनियस लेजर एब्लेशन

एमआरआई-निर्देशित ट्रांसक्यूटेनियस फोकस्ड अल्ट्रासाउंड

इन तकनीकों में फाइब्रॉयड्स के केंद्र में छोटी सुई को डालने के लिए एमआरआई का इस्तेमाल किया जाता है। सूई के जरिए लेजर एनर्जी या अल्ट्रासाउंड एनर्जी छोड़ी जाती है जो फाइब्रॉयड्स को नष्ट करने में मदद करती है।

इन उपचार विधियों का उपयोग सभी प्रकार के फाइब्रॉयड्स के इलाज के लिए नहीं किया जाता है। इनका दीर्घकालिक लाभ और जोखिम ज्ञात नहीं हैं। चूंकि ये प्रक्रियाएँ अपेक्षाकृत नई हैं, इसलिए अभी तक यूके में व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

इस पर अभी भी रिसर्च किए जा रहे हैं, लेकिन साक्ष्यों के अनुसार अनुभवी डॉक्टर से इन नॉन-इनवेसिव प्रक्रियाओं को कराने से कुछ समय तक लाभ मिल सकता है।

फाइब्रॉयड्स की जटिलताएं (Complications of fibroids)

अधिकांश महिलाओं को फाइब्रॉयड्स के किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं होता है, लेकिन दुर्लभ मामलों में इनसे कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

ये जटिलताएं आमतौर पर फाइब्रॉयड्स की स्थिति और उनके आकार जैसे कारकों पर निर्भर करती है। कुछ मुख्य जटिलताओं के बारे में नीचे बताया गया है।

गर्भावस्था के दौरान समस्याएं (Problems during pregnancy)

यदि गर्भावस्था के दौरान फाइब्रॉयड्स मौजूद रहता है, तो यह कभी-कभी बच्चे के विकास में समस्या या प्रसव के दौरान कठिनाइयां उत्पन्न कर सकता है।

फाइब्रॉयड्स से पीड़ित महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द का अनुभव हो सकता है और समय से पहले प्रसव का खतरा होता है। यदि फाइब्रॉयड्स बड़े हों तो ये योनि को अवरुद्ध करते हैं। इसके कारण बच्चे को जन्म देने के लिए सीजेरियन सेक्शन की आवश्यकता पड़ सकती है। दुर्लभ मामलों में, फाइब्रॉयड्स के कारण गर्भपात (पहले 23 सप्ताह के दौरान गर्भावस्था का नुकसान) हो सकता है।

यदि आपको फाइब्रॉयड्स हैं और आप गर्भवती हैं, तो आपके डॉक्टर आपको आगे की जानकारी और सलाह दे सकते हैं।

बांझपन (Infertility)

यदि कोई महिला बड़े फाइब्रॉयड्स से पीड़ित है तो उसे बांझपन (गर्भधारण में समस्या ) की समस्या हो सकती है। फाइब्रॉयड्स निषेचित अंडे को गर्भाशय की परत में आने या शुक्राणु को अंडे तक पहुंचने से रोक सकते हैं, हालांकि यह दुर्लभ है।

यदि आपको सबम्यूकोसल फाइब्रॉयड्स (submucosal fibroid) है (फाइब्रॉयड्स जो मांसपेशियों की दीवार से गर्भाशय की गुहा में बढ़ता है), तो यह फैलोपियन ट्यूब को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे आपको गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। फैलोपियन ट्यूब अंडाशय (जहां अंडा रिलीज होता है) को गर्भाशय से जोड़ते हैं।

NHS के मूल कॉन्टेंट का अनुवादHealthily लोगो
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